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शासन और नागरिकों के बीच सेतु बन रही ‘सेवा सेतु’, घर के करीब पहुंच रहीं सरकारी सेवाएं

शासन और नागरिकों के बीच सेतु बन रही ‘सेवा सेतु’, घर के करीब पहुंच रहीं सरकारी सेवाएं

20-Sep-2026
रायपुर ( शोर संदेश )  नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन की ‘सेवा सेतु’ पहल शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। विभिन्न विभागों की सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर लाकर अब प्रदेशवासियों को 900 से अधिक शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में डिजिटल सुशासन को प्राथमिकता देते हुए सेवाओं की पहुंच शहरों के साथ-साथ गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाई जा रही है।
सेवा सेतु का मूल उद्देश्य केवल सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और सेवा को नागरिक के घर अथवा उसके नजदीकी केंद्र तक पहुंचाना है। आवेदन, दस्तावेजों की प्रक्रिया, स्थिति की जानकारी और प्रमाण पत्र प्राप्त करने जैसी सुविधाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़कर सेवा वितरण को अधिक सहज बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अम्बिकापुर निवासी डॉली गंधर का अनुभव सेवा सेतु की उपयोगिता को जमीन पर सामने लाता है। उनके आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि के कारण बैंक खाता खुलवाने में परेशानी आ रही थी। बैंक खाता नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही थी।
डॉली ने अपनी समस्या के समाधान के लिए सेवा सेतु केंद्र में आवेदन किया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि का निराकरण किया गया। अब उनके लिए बैंक खाता खुलवाने और छात्रवृत्ति से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाना आसान हो गया है। समस्या के समाधान पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
डॉली का अनुभव बताता है कि किसी दस्तावेज में छोटी सी त्रुटि भी नागरिक के लिए बैंकिंग, शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच में बाधा बन सकती है। ऐसे मामलों में सेवा सेतु केंद्र नागरिक को समस्या से समाधान तक पहुंचाने का सरल माध्यम बन रहे हैं।
सेवा सेतु के माध्यम से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, भू-अभिलेख एवं राजस्व संबंधी सेवाएं, नाम संशोधन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा श्रम विभाग से जुड़ी विभिन्न सेवाओं सहित अनेक सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नागरिक घर बैठे अथवा नजदीकी सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकते हैं। डिजिटल प्रमाण पत्रों में क्यूआर आधारित सत्यापन, एसएमएस और व्हाट्सऐप अलर्ट जैसी सुविधाएं सेवा प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में सहायक हैं।
इस व्यवस्था का लाभ यह है कि नागरिक को आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार संबंधित कार्यालय जाने की आवश्यकता कम होती है। डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध होने से सेवा वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलता है।
सेवा सेतु की महत्वपूर्ण विशेषता इसका ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक विस्तार है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी विभिन्न नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इनमें विवाह प्रमाण पत्र, भवन अनुज्ञा, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई व्यवस्था और नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
स्थानीय स्तर पर सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों और संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए जिला या तहसील मुख्यालय जाने की आवश्यकता कम होगी।
इसका सीधा लाभ नागरिकों के समय, श्रम और आने-जाने के खर्च की बचत के रूप में सामने आएगा। गांव में ही डिजिटल माध्यम से सेवा उपलब्ध होने से शासन की सुविधाएं नागरिकों के और करीब पहुंचेंगी।
ऑनलाइन आवेदन और ट्रैकिंग व्यवस्था नागरिकों को अपने आवेदन की प्रगति जानने का अवसर देती है। डिजिटल माध्यम से सेवा वितरण में मैनुअल प्रक्रिया को कम करने, जवाबदेही बढ़ाने और कागज रहित व्यवस्था को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण की यात्रा 2003 में ब्भ्व्प्ब्म् के माध्यम से शुरू हुई और वर्ष 2015 में ई-डिस्ट्रिक्ट के विस्तार के साथ आगे बढ़ी। सेवा सेतु इस यात्रा को एकीकृत स्वरूप देते हुए विभिन्न विभागों की सेवाओं को एक मंच पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस क्रम में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं रह जाती, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली को नागरिक-केंद्रित बनाने का साधन बनती है। आवेदन की डिजिटल प्रक्रिया, ऑनलाइन स्थिति की जानकारी और डिजिटल प्रमाण पत्र जैसी व्यवस्थाएं नागरिकों को सेवा प्रक्रिया से सीधे जोड़ती हैं।
सेवा सेतु का व्यापक उद्देश्य केवल सेवाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि शासन को नागरिक के और करीब लाना है। जब प्रमाण पत्र, पंजीयन, दस्तावेज संशोधन और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए नागरिक को बार-बार सरकारी कार्यालय नहीं जाना पड़े, तो यह व्यवस्था सुशासन के उस स्वरूप को सामने लाती है जिसमें प्रशासन नागरिक की सुविधा को केंद्र में रखकर काम करता है।
डॉली गंधर जैसे नागरिकों की समस्याओं का समाधान इस व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता को रेखांकित करता है। दस्तावेज संबंधी समस्या दूर होने से उनके लिए बैंक खाता और छात्रवृत्ति की राह आसान हुई। यह एक छोटे से दस्तावेज सुधार का मामला जरूर है, लेकिन इसके पीछे शिक्षा और वित्तीय सुविधा से जुड़ा बड़ा प्रभाव दिखाई देता है।
सेवा सेतु के माध्यम से छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक को नागरिक सुविधा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। एक मंच पर 900 से अधिक सेवाओं की उपलब्धता, ऑनलाइन आवेदन और ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाण पत्र, क्यूआर आधारित सत्यापन तथा गांवों तक सेवाओं के विस्तार से सेवा वितरण की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
सेवा सेतु की मूल भावना यही हैकृसेवा के लिए नागरिक को शासन तक पहुंचने की जरूरत कम हो और शासन स्वयं सेवा लेकर नागरिक के करीब पहुंचे। तकनीक के माध्यम से सेवा प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाते हुए यह पहल छत्तीसगढ़ में नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन रही है।

स्वास्थ
 समय पर हुई पहचान, सफल सर्जरी से जन्मजात हृदयरोग से मुक्त हुआ भाव्यांश

समय पर हुई पहचान, सफल सर्जरी से जन्मजात हृदयरोग से मुक्त हुआ भाव्यांश

19-Sep-2026
​रायपुर,19 सितंबर 2026/ समय पर ली गई एक सही स्वास्थ्य जांच किसी मासूम का पूरा भविष्य संवार सकती है, इसका जीवंत उदाहरण धमतरी के नन्हें भाव्यांश साहू की यह सफलता की कहानी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत संचालित 'चिरायु योजना' ने जन्मजात हृदयरोग से जूझ रहे इस बच्चे को न केवल समय पर सही इलाज दिलाया, बल्कि उसके परिवार के जीवन में खुशियों की एक नई रोशनी भी बिखेर दी।
​कहानी की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब शहरी चिरायु टीम धमतरी ने जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों के स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण किया। जांच के दौरान डॉक्टरों की सजग नजरों ने भाव्यांश में जन्मजात हृदयरोग के लक्षणों को तुरंत पहचान लिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए टीम ने बिना कोई समय गंवाए बच्चे को आगे के उच्च स्तरीय उपचार के लिए सत्य साईं अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया और पूरे मार्गदर्शन तथा सहयोग के साथ परिजनों की हिम्मत बढ़ाई।
​अस्पताल में विशेषज्ञों की गहन जांच और परामर्श के बाद सर्जरी का निर्णय लिया गया। 31 अगस्त 2026 को भाव्यांश को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 सितंबर को विशेषज्ञ कार्डियाक सर्जनों की टीम द्वारा उसकी सफल हृदय सर्जरी संपन्न हुई। चिकित्सकों की निरंतर देखरेख और सही देखभाल का ही परिणाम था कि मासूम के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आया और 9 सितंबर को उसे पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया।
​राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का मुख्य ध्येय जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकृतियों, गंभीर बीमारियों और पोषण संबंधी कमियों की समय रहते पहचान कर उन्हें निःशुल्क और सर्वश्रेष्ठ उपचार उपलब्ध कराना है। चिरायु टीम की तत्परता और विशेषज्ञ चिकित्सकों के इस समन्वय से आज भाव्यांश पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट आया है। उसकी खिलखिलाती मुस्कान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सरकार की यह संवेदनशील योजना प्रदेश के जरूरतमंद बच्चों के लिए नवजीवन का वरदान साबित हो रही है।
 
जनता
  भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

05-Sep-2026
रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्री श्री राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं।
इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अपने आराध्य के दर्शन को लेकर अपार उत्साह है। राज्य सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थ दर्शन की उनकी अभिलाषा पूरी होते देखना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से हमारी विरासत का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर निर्मित होते हैं। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।
उल्लेखनीय है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 03 से 05 सितम्बर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारीगण, संतजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
 

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