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नॉर्मल का उल्टा ‘एबनॉर्मल’ नहीं होता बल्कि ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी’ होता है : अनुपम खेर

23-Nov-2025
मुंबई (शोर संदेश)। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में भावनाओं से भरी सिनेमा की एक खास शाम देखने को मिली, जब मशहूर फ़िल्मकार, अभिनेता और निर्देशक अनुपम खेर ने अपनी नई निर्देशन में बनी ‘तन्वी द ग्रेट’ पेश की। यह फ़िल्म ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाली एक असाधारण लड़की की कहानी है, जो गलत समझे जाने के बावजूद अपने सैन्य अफसर पिता के कदमों पर चलते हुए आर्मी में शामिल होने का सपना पूरा करने की राह पर निकलती है। वह साबित करती है कि असली हीरो दिल से आता है। फिल्म की फेस्टिवल स्क्रीनिंग के बाद अनुपम खेर और अभिनेत्री तन्वी ने मीडिया से बातचीत की। दर्शकों और प्रतिनिधियों ने फ़िल्म को गर्मजोशी और उत्साह के साथ सराहा।
दरअसल, फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ अपने उत्थानकारी संदेश , बारीकी से गढ़े गए पात्रों, और सहज भावनात्मक यात्रा के लिए लगातार प्रशंसा बटोर रही है। इफ्फी में इसका स्वागत फिल्म की बढ़ती यात्रा में एक और मील का पत्थर है। यह विभिन्न आयु समूहों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के दर्शकों के बीच इसके आकर्षण को रेखांकित करता है।
वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान अनुपम खेर ने बताया कि यह कहानी उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक अनुभवों से गहराई से जुड़ी है, जिसके कारण यह प्रोजेक्ट उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन गया। ऑटिज़्म पर बात करते हुए अनुपम खेर ने कहा कि हम अक्सर “नॉर्मल” का उल्टा “एबनॉर्मल” मान लेते हैं, जबकि नॉर्मल का उलट “एक्स्ट्राऑर्डिनरी” भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अब वे उन कहानियों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं जो मानवीय सहनशीलता, संवेदनशीलता और जीवन-परिवर्तन को दर्शाती हैं। खेर ने आगे कहा कि वे आगे भी ऐसे ही प्रोजेक्ट्स पर काम करते रहेंगे जो “मानव भावनाओं के मूल को छूते हों और लोगों को अपने जीवन में सकारात्मक और सार्थक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करें।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक मुख्य आकर्षण फिल्म की मुख्य अभिनेत्री शुभांगी दत्त की उपस्थिति थी, जिन्होंने ‘तन्वी द ग्रेट’ के साथ सिनेमा जगत में अपनी शुरुआत की है। कैमरे के सामने अपने पहले अनुभव के बारे में बात करते हुए शुभांगी ने अनुपम खेर के अनुशासित और गहन निर्देशन दृष्टिकोण की जमकर तारीफ की। उन्होंने उन्हें एक “सख्त गुरु” बताया, यह कहते हुए कि उनके मार्गदर्शन ने न केवल उनके अभिनय को निखारा बल्कि उनके भीतर छिपी कलात्मक क्षमता को पहचानने में भी मदद की।
शुभांगी ने आगे कहा कि वह भविष्य में सिनेमा की विविध शैलियों को तलाशना चाहती हैं-ऐसे किरदार निभाना चाहती हैं जो उनके हुनर को चुनौती दें और ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती हैं जो समाज में सार्थक संदेश छोड़ें। 

रानी मुखर्जी ने राष्ट्रीय पुरस्कार अपने दिवंगत पिता को किया समर्पित, कहा- ‘मैं आज उन्हें बहुत याद कर रही हूं’

24-Sep-2025
मुंबई। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रानी मुखर्जी को उनके शानदार अभिनय के लिए पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ में उनके प्रभावशाली अभिनय के लिए मिला। इस फिल्म में रानी ने एक ऐसी भारतीय मां का किरदार निभाया, जो अपने बच्चों को वापस पाने के लिए एक विदेशी देश की सरकार से अकेले संघर्ष करती है।
यह सम्मान मेरे लिए बेहद खास
इस खास मौके पर रानी मुखर्जी ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा, ”यह सम्मान मेरे लिए बेहद खास है क्योंकि यह मेरे अभिनय सफर के तीस साल पूरे होने पर मिला है। मैं इसे अपने दिवंगत पिता राम मुखर्जी को समर्पित करना चाहती हूं, क्योंकि यह उनका सपना था।”
रानी ने भावुक होकर कहा, ”मैं आज उन्हें बहुत याद कर रही हूं। मुझे लगता है कि यह उनकी दुआओं और मेरी मां की प्रेरणा का ही असर है कि मैं यह किरदार निभा पाई।”
‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित
फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ की कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित है। यह 2011 में नॉर्वे में रहने वाले एक भारतीय दंपति सागरिका चक्रवर्ती और अनुरूप भट्टाचार्य की कहानी है, जिनके बच्चों को नॉर्वे सरकार ने जबरन अलग कर दिया था। इस कहानी ने दुनियाभर में एक बहस छेड़ दी थी और मां के संघर्ष को एक नई पहचान दी थी। रानी ने इस भूमिका को निभाते समय कहा कि यह उनके लिए बेहद निजी अनुभव था, क्योंकि वे खुद एक मां हैं और इस किरदार से वे दिल से जुड़ गई थीं।
पुरस्कार पूरी टीम की मेहनत का नतीजा
रानी ने कहा, “इस फिल्म की शूटिंग के दौरान कोविड महामारी के कारण कई मुश्किलें आईं, लेकिन पूरी टीम ने दिल से मेहनत की। मैं फिल्म की निर्देशक आशिमा छिब्बर और निर्माता निखिल आडवाणी, मोनिशा आडवाणी और मधु भोजवानी का धन्यवाद करती हूं। यह पुरस्कार पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है।” उन्होंने आगे कहा, ”मेरे फैंस हमेशा मेरे साथ रहे हैं, चाहे अच्छा समय हो या बुरा। उनका प्यार और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मुझे खुशी है कि यह अवॉर्ड उन्हें भी बहुत खुशी दे रहा है।”
रानी ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की जूरी का आभार जताया
उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की जूरी का आभार जताते हुए कहा, ”इस फिल्म के जरिए मैंने मातृत्व की भावना और एक मां की ताकत को दिखाने की कोशिश की है। यह पुरस्कार दुनिया की उन सभी माताओं को समर्पित है, जो हर दिन अपने बच्चों के लिए अनगिनत बलिदान देती हैं।” 

पंडित राजेंद्र गंगानी की कथक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

28-Aug-2025
रायपुर ( शोर संदेश ) रायगढ़ में आयोजित हो रहे चक्रधर समारोह के मंच पर दिल्ली से पधारे देश के प्रख्यात कथक नर्तक पंडित राजेंद्र गंगानी ने अपनी मोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह के 40वें संस्करण की शुरुआत उनके प्रस्तुति से हुई।
जयपुर घराने के वरिष्ठ कलाकार पंडित गंगानी ने अपनी अद्भुत नृत्य शैली में पारंपरिक कथक की झलक प्रस्तुत की। महज चार वर्ष की आयु से उन्होंने नृत्य साधना प्रारंभ की थी। वर्ष 2003 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया, साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्हें अनेक पुरस्कार और अलंकरण प्राप्त हुए हैं। उनकी कला में परंपरा और आधुनिकता का अद्वितीय संगम देखने को मिला, जिसने श्रोताओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।










 

चक्रधर समारोह 2025 : शास्त्रीय संगीत और लोक कलाओं का अनूठा संगम

25-Aug-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश ) देश-विदेश में ख्यातिप्राप्त चक्रधर समारोह का शुभारंभ 27 अगस्त से होने जा रहा है। कला के विविध रूपों के साधक और कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से इस समारोह को अविस्मरणीय बनाएंगे। इस वर्ष समारोह में शास्त्रीय संगीत के साथ लोक कलाओं का अद्वितीय संगम देखने को मिलेगा। शास्त्रीय गायन और वादन के साथ-साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों एवं लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।
समारोह में कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम और मोहिनीअट्टम जैसे शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियां देश के विख्यात कलाकारों द्वारा दी जाएंगी। कथक जहां उत्तर भारत की शास्त्रीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं ओडिसी पूर्वी भारत की, और मोहिनीअट्टम व भरतनाट्यम दक्षिण भारत की समृद्ध नृत्य शैलियां हैं। ये नृत्य शैलियां भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति हैं, जो अपनी अनूठी मुद्राओं, वेशभूषा, संगीत और कथा वाचन की विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं।

शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों में गायन और वादन का अनूठा संगम होगा। सितार की मधुर ध्वनि, तबले की लयबद्ध थाप, संतूर के मधुर स्वर और बांसुरी की सुरीली तान दर्शकों को भाव-विभोर करेगी। समारोह के मंच पर जहां शास्त्रीय कलाओं का प्रदर्शन होगा, वहीं छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं का भी रंग बिखरेगा। प्रदेश का प्रसिद्ध पंथी नृत्य, लोकगीत और लोकरंग की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त परिचय देंगी।
इसके साथ ही अबूझमाड़ के सुप्रसिद्ध मलखम्ब दल की विशेष प्रस्तुति भी समारोह का आकर्षण होगी। इस दल ने वर्ष 2023 में इंडियाज गॉट टैलेंट में प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की थी और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किए हैं। उनके अद्वितीय योग और जिम्नास्टिक मुद्राओं का प्रदर्शन समारोह का मुख्य आकर्षण रहेगा। चक्रधर समारोह 2025 का आयोजन दर्शकों के लिए न केवल कला और संस्कृति का पर्व होगा, बल्कि भारत की शास्त्रीय और लोक परंपराओं का जीवंत उत्सव भी साबित होगा।



 

छत्तीसगढ़ का राज्योत्सव चार से, पहले दिन शान, दूसरे दिन नीति मोहन की होगी प्रस्तुति, पवनदीप-अरुनिता की जोड़ी भी दिखाएगी कमाल

02-Nov-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ में 4 नवंबर से राज्योत्सव की शुरुआत हो रही है। 3 दिन के आयोजन में होने वाले परफॉर्मेंस का शेड्यूल जारी किया गया है। इसमें लोक कलाकारों के साथ ही बॉलीवुड के सिंगर भी परफॉर्म करते दिखेंगे।
राज्योत्सव के उद्घाटन समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शामिल होने वाले हैं। वहीं समापन और अलंकरण समारोह के दिन देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ रायपुर पहुंचेंगे।
प्रदर्शनी और झांकी भी लगाई जाएगी
हाल ही में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साहब ने दिल्ली जाकर जगदीप धनखड़ को न्योता दिया था। उपराष्ट्रपति कार्यालय से छत्तीसगढ़ आने की सहमति भी मिल चुकी है। नया रायपुर में होने जा रहे राज्योत्सव को लेकर विभाग अपनी तैयारी कर रहे हैं।
सभी विभागों की अलग-अलग यहां पर प्रदर्शनी और झांकी भी लगाई जाएगी। फूड कोर्ट भी तैयार किया जा रहा है। कई तरह के सेल्फी जोन बन रहे हैं। हस्तशिल्प से जुड़े हुए आर्टवर्क, कपड़े, मिट्टी की बनी चीजें लोग यहां से खरीद पाएंगे।

रायपुर शहर से लोग नया रायपुर के राज्योत्सव मेला ग्राउंड जा सकें इसके लिए बीआरटीएस बसें भी चलाई जा रही हैं। आमतौर पर ग्राउंड तक यह बसें नहीं जातीं, लेकिन राज्योत्सव के दौरान तीन दिनों तक यहां पहुंचने और वापस आने के लिए इन बसों की सुविधा मिलेगी।

यह बसें सीबीडी बिल्डिंग से राज्योत्सव मेला ग्राउंड पहुंचेंगी। इसी तरह ग्राउंड से सीबीडी बिल्डिंग होते हुए वापस रायपुर आएंगी। 20 से 25 रुपए के शुल्क में आम लोग ये यात्रा कर सकेंगे। वापसी के लिए राज्योत्सव मेला ग्राउण्ड से सीबीडी- तेलीबांधा-डीकेएस भवन-रेलवे स्टेशन के लिए बसों का संचालन होगा।
यह बसें रायपुर से सुबह 11 बजे से रात के 9 बजे तक हर आधे घंटे के अंतराल में मिलेंगी। राज्योत्सव मेला ग्राउंड से रायपुर वापसी के लिए दोपहर 12.12 बजे से रात्रि के 11.12 बजे तक हर आधे घंटे में बस चलेगी।

सुनो भाई उधो,हसदेव के सराप

30-Aug-2024
 परमानंद वर्मा
 ( शोर संदेश )  तमाशा खुद न बन जाना देखने वालों के तर्ज पर.एक दिन क्या हुआ हसदेव से मुलाकात करने पहुंचा था तब शुरु में बात सौजन्यपूर्ण रहा लेकिन अचानक गुस्से में भरकर कहा, सब लोग  मेरी बर्बादी का तमाशा देख रहें है। नदी, नाले, पर्वत, पेड पौधे, हाथी, शेर, भालू, चीता, सियार, बंदर, पक्षी, चीटियां सहित सभी जीव जन्तु, दर.दर भटक रहें हैं। दुख मुझे मेरी अपनी जंगल की नहीं है लेकिन इन मूकधारियों की है। भूखे प्यासे भटक रहें हैं इस गांव से उस गांव। इनकी ऐसी हालत करनेवाले शैतानों सावधान... तमाशा खुद न बन जाना तमाशा देखने वालों।

कुलेश्वर महादेव, राजिम दरशन करके घर आय बर लहुटत रेहेंव तब कोनो माइलोगिन के बोमफार के रोये के आवाज मोर कान मं टकरइस। एती-ओती चारों मुड़ा नजर फइलाएव, फेर एको झन माइलोगिन नइ दीखिस। सोचेंव, मन कइसे भरमाय असन लागत हे? आवाज तो रोये के आवत हे फेर देखउन कइसे नइ देवत हे? कोनो भूत, परेतिन, चंडाल अउ चंडालिन तो नइ होही?
महानदी के छोर मं आगेंव, अउ बने हीरक के निहारेंव, अवइया-जवइया मन ऊपर घला नजर दउड़ायेंव फेर ओमन तो बने हांसत, कुलकत मंदिर आवत-जात रिहिन हे। धीरे-धीरे ओ कोती गेंव जेन कोती ले रोये के अवाज आवत रिहिसे। 
देखथौं, एक झन खोलदावन असन जघा मं नदी हा अपन छोटे बेटा नरवा ला गोदी मं बइठार के अइसे कलपत अउ रोवत रिहिसे जइसे कोनो ओकर गोसइयां मरगे हे। 
तीर मं जाथौं अउ पूछथौं- का होगे मोर महतारी, तैं याहा सावन पूरनमासी के दिन, जब लोगन उछाह मनावत हे, कुलेश्वर महादेव के पूजा पाठ करत हे, दूध, दही, घी लगा-लगा के अभिषेक करत हे, फूल-पान, नरियर चढ़ावत हे अउ तैंहर अतेक सुग्घर पावन पबरित दिन मं आंसू बहावत बइठे हस, बेटा ला धरके?
मोर पूछई-गुछई मं रोवई-गवई बंद होइस। ओहर कहिथे- जेकर ऊपर पहाड़ गिरथे, बिपत आथे ओला उही जानही बेटा। 
नदी के दुख ला देख ओला आघू पूछे के हिम्मत नइ होइस। जरे मं नून डारना अच्छा नइ होवय। तभो ले दुख के, रोये के कारन का हे एला जानबा तो होय। इसी समझ के पूछे के थोकन हौसला बनाएंव।
मोर महतारी, अतका तो जान सकत हौं के तोर रोये के का कारन हे अउ इहां अइसन ओंटा-कोंटा मं?
नदी कहिथे- जान के का करबे बेटा, अउ तैं करे का सकत हस। दुखिया मन के कोनो नइ होवय बाबू। ओहर दुख मं जनम लेथे, दुख मं पलथे अउ दुखे झेलत आखिर मं दम तोड़ देथे। 
नदी के बात ल सुन के मोर दिमाग काम करना बंद कर दीस, अइसे लगिस जइसे बिजली के करंट लग गे। सोचेंव- का करौं, का नइ करौं। देखथौं- ओकर गोदी मं नरवा खेलत राहय, कभू ओकर मुंह, कान, गाल मा मया पीरित देखावय तब कभू दूध पीये खातिर स्तन ला धर के मुंह ला ढेंठी मं लगा के चुहके के कोशिश करत राहय। 
अपन आंखी के आंसू ला पोंछत अउ लुगरा के अचरा ला मुंड़ मं ढांकत बताथे- बेटा, तैं मोर दुख पूछत हस ना, रोवइ-गवई के कारन जानना चाहत हस न, तब सुन- मैं उही महानदी हौं जेकर चारों मुंड़ा ए पार ले ओ पार कभु रेती के पहाड़ खड़ा हो जाय राहय, कुलेश्वर महाराज साक्षी हे अउ आज देख, का हालत हे। मोर छाती ला रापा, कुदारी, बुलडोजर मं कोड़-कोड़ के निकालत हे। मैं कहां ले ओगरौं, कहां ले लानौ। मोर शरीर ला देख, मोर हाथ-गोड़ ला देख, छाती ल देख, सब पिचकगे हे। राक्षस मन बरोबर ट्रेक्टर ट्राली मं भर-भर के, मोर छाती मं चढ़-चढ़कर  बस बेहाल कर दे हे बेटा। कुलेश्वर भगवान का करहि?  ये मोर सब दुख ल जानत हे, देखत हे, फेर कोनो काम के नइहे। करत राहौ तुमन पूजा-पाठ अउ अभिषेक, फेर मोर बर ये तो सिरिफ पथरा के भगवान हे, ओकर छोड़े कुछु नहीं। 
बिहान दिन सिहावा पर्वत पहुंचेंव, ओकरो हालत जतर-कतर हे। चेहरा लटके-उतरे। रोथे तब रोवासी नइ आवय। गोठियाय के कोशिश करथे तब बक्का नइ फूटय तइसे कस गतर होगे राहय। थोथना ल उतरे कस देखेंव तब मोरो कुछु पूछे-पाछे के हिम्मत नइ होवत रिहिसे। फेर का करबे कोनो ला दुखी, उदास देखथौं तब रेहे नइ सकौं। 
पूछथौं- कइसे का बात हे सिहावा, कइसे फटीचर छाप हालत हे तोर, कोन करे हे अइसन हालत?
हाथ ल धर के अपन कोती खींचथे अउ कान करा अपन मुंह ल दता के कहिथे- धीरे बोल, इहां बड़े-बड़े राक्षस के बसेरा हे, ओकर गण मन चारों मुड़ा गिंजरत रहिथे, निगरानी करथे। कोन आवत हे, कोन जावत हे?
सोचेंव- जउन परबत मं ऋंगी रिसि जइसन महान साधक तपस्या करे हे, साधना करे हे ओ सिहावा परबत अतेक डर, भय, आतंक मं जीयत हे, अपन समे गुजारत हे?
पूछेंव- कइसे सिहावा, अतेक आतंक तोला काके हे? 
ओहर फेर धीरे बोले के इशारा करत कहिथे- देख चारों मुड़ा- छाती, हाथ, गोड़, मुड़ी मन के का हालत कर देहे। ओमन ला गिट्टी अउ चट्टान चाही तेकर सेती ओ राक्षस मन बड़े मशीन धर-धर के आथे अउ ये परबत ला तहस-नहस कर डरे हे। मोर जीना हराम कर दे हे। अब सिहावा नहीं, सिरावत जाथौं, मोर दम घुटत जात हे। 
भारी करलई हे, जेती जाबे तेती चारों मुड़ा दुखे-दुख हे, सुख के कोनो सुराग नइ मिलत हे। नगरी-सिहावा ले घूमके अपन गांव आगेंव। 
एक दिन बिलासपुर के मितान हा फोन करथे। का भई मितान, अरे आना घू्मे-फिरे ल, निच्चट घरखुसरा चिरई असन खोंधरा मं घुसे रहिथस। ओला केहेंव- ले हौ, आवत हौं। 
मितान ह हसदेव जाय के योजना बनाय रहिथे। ओ हा अपन काम-बुता मं लगे राहय। अउ कुछ समय के बाद मंहु पहुंचेंव हसदेव के जंगल मं। जान दे, इहां तो अइसे कोलाहल मचे हे तेन ला जइसे अभी इजरायल अउ लेबनान के झगरा मं हजारों, लाखों मनखे बेमौत मारे गे हे। चारों मुड़ा चीख पुकार बचा लौ- बचा लौ...। बम बारुद बरसावत हे, टैंक बरसाय कस हाल हसदेव जंगल के होवत हे। 
महानदी कस हाल हसदेव के घला होगे हे। अतेक आतंक, मारकाट। राक्षस बन गे हे मनखे मन। हजारों लाखों पेड़ रोज काटत हे। जंगली जानवर जंगल छोड़के गांव-गांव भागत फिरत हे। बिन दाई-ददा के लइका मन बरोबर। हाथी, भालू, शेर, चीता, हिरण, बेंद्रा, चिरई-चिरगुन, सांप डेडु, कीड़ा-मकोड़ा, चांटी जइसे कतको परकार के जीव-जन्तु अपन-अपन रेहे के ठिहा खोजत हे, फेर जंगल मं रेहे के ठिकाना नइ मिलत हे। 
ये जंगल के विनाश ल देखके मोरो आंखीं मं आंसू आगे। हसदेव पूछथे- भइया, तोर आंखी मं आंसू?
ओला मंय बताथौं- तोर दुख समझगेंव फेर मंय ये नइ समझ पायेंव कि अभी तक कइसे जीयत हस, तोर परान तक कइसे छूटे नइहे?
मोर अतका बात ल सुनके बिन दाई ददा कस लइका जइसे कहूं मेला-ठेला मं भुला जथे तब बोमफार के रोथे वइसने हसदेव रो डरिस। ओहर कहिथे- मोर बरबादी के मोला कोनो दुख, गम नइहे भैया, दुख हे मोर ये लइका हाथी, भालू, शेर, सियार, हिरन, बिंद्रा, सांप-डेडु, चांटी अउ असने कतको जीव-जन्तु मन के। ये मन कहां रइहीं, कहां जांही, कहां बसही, कोन दिही एमन ला खाय-पीये बर? सब तना-नना होगे के भटकत हे। 
अचानक देखथौं- हसदेव के चेहरा गुस्सा मं भरगे राहय, कहिथे- अपन दुख ला ता मंय कइसनो करके झेल लेहूं भइया, फेर कोनो महतारी बाप अपन आंखी के आघू मं लइका मन ला लांघन-भूखन मरत नइ देख सकय। ओ अंधरा के औलाद मन जइसन मोर बिनास करिन, मंय सराप देवत हौं, जइसे कौरव कुल के विनास होइस ना, तइसने एकरो मन के होके रइही।

 


स्त्री 2 ने तोड़ा गदर 2 का रिकॉर्ड तो सनी देओल का आया रिएक्शन, फिल्म के लिए कह डाली ये बाद

23-Aug-2024
नई दिल्ली:    ( शोर संदेश )  स्त्री 2 का बॉक्स ऑफिस पर हर दिन शानदार जलवा देखने को मिल रहा है. राजकुमार राव, अपारशक्ति खुराना, श्रद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी और अभिषेक बनर्जी की एक्टिंग को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ हर दिन सिनेमाघरों में पहुंच रही है. यही वजह है कि स्त्री 2 ने सिर्फ एक हफ्ते में ही कई फिल्मों की कमाई के रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं. राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की फिल्म अपने पहले हफ्ते में ही फाइटर से आगे निकल गई है. इतना ही नहीं स्त्री 2 ने सनी देओल की गदर 2 को भी धूल चटा डाली है.
दरअसल पिछले साल आई गदर 2 ने दुनियाभर में अपने पहले हफ्ते 284.63 करोड़ रुपये की कमाई की थी. लेकिन स्त्री 2 ने अपने पहले हफ्ते में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर डाली है. वहीं स्त्री 2 की इस सफलता को देखते हुए सनी देओल ने रिएक्शन दिया है. उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी पर स्त्री 2 की टीम को बधाई दी है. साथ ही बॉक्स ऑफिस पर चल रहे सूखे के खत्म होने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने स्त्री 2 की टीम के लिए लिखा, 'बॉक्स ऑफिस जमकर बारिश करने के लिए स्त्री 2 की टीम को ढेर सारी बधाई.'
सोशल मीडिया पर सनी देओल का यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है. आपको बता दें कि स्त्री 2 की बात करें तो श्रद्धा कपूर, राजकुमार राव स्टारर स्त्री 2 साल 2018 में आई फिल्म स्त्री का दूसरा भाग है, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अपारशक्ति खुराना अहम किरदार में नज़र आ रहे हैं. यह हॉरर कॉमेडी फिल्म अपने ट्रेलर से फैंस के बीच काफी चर्चा में रही थी.
 

पेड़ के छांव

01-Aug-2024
( शोर संदेश )  पूछ वोला कीमत भूख के जेन ला,
कहीं कुछू खाय बर घलो नइ मिले।।
पूछ ओला कीमत पसीना के जेन ला,
थोरिक रुके बर छांय घलो नइ मिले।।

अपन स्वारथ बर जम्मो रुखराई ला,
भाजी _भाटा कस हमन काट डरेन।
जब पड़ीस मार ऊपर वाले मालिक के,
त कोरोना मा तड़प _तड़प छाँट मरेन।।

अब भीतर बाहिर के आँखी ला खोल,
कोंदा हस त थोरिक इसारा मा बोल।
कोनो भारी नींद मा हस झकना के उठ,
लोगन ला जगा हल्ला कर बजा ढोल।।

मनखे,गरुवा,छेरी,हिरण, कुकुर,बिलई,
शेर,भालू,चीता,तेंदुआ होय छोटे चिरई।
सब ला घाम ले बचे बर आज जरूरत हे।
ठंडा_ठंडा पानी अउ छोटे _मोटे रुख राई।।

एखर सेती मोर _बात ला चेत लगा के सुनौ।
आगू _पाछू के लोग लइका बर कुछु गुनौ।।
अपन घर के कोनो भी काम सुख हो चाहे दुख।
बर,पीपर,नीम संग फलदार पेड़ बर जगा चुनौ।।

पहिली के सियान मन तरिया,नदियां कोड़ावय।।
ओखर चारो कोती छोटे बड़े रुख राई लगावय।
आज के लइका मन रहिथे डिजिटल दुनियां मा।
मोबाइल,फेस बुक मा पेड़ लगा हल्ला मचावय।


                      तुलेश्वर कुमार सेन
                      सलोनी राजनांदगांव

सुनो भाई उधो,अंधेर नगरी अउ चउपट राजा

01-Aug-2024
( शोर संदेश ) परमानंद वर्मा क्या अंधे की औलाद अंधे ही होते हैं, यदि हां तब तो कुछ नहीं कहना और जब नहीं होते हैं तब इस कहावत को अनावश्यक रूप से क्यों गढ़ा गया है? कुछ तो इसका अर्थ निश्चित होगा ही। कहते हैं कलियुग में इसकी प्रचुरता है। यहां सब अंधे हो गए हैं, गलत तो गलत है ही, लेकिन सत्य को भी गलत करार साबित करने में यहां के लोगों ने महारत हासिल कर ली है। जिधर देखो उधर अनैतिक, अधार्मिक, असामाजिक और गैर कानूनी कार्य हो रहे हैं लेकिन इसे मानने को कोई तैयार नहीं। आतंक, अधर्म, अन्याय और पाखंड जिंदाबाद है, और इससे डरकर सत्य छिप गया है निर्जन स्थल जंगल में कहीं जाकर। इसी संदर्भ में प्रस्तुत है यह छत्तीसगढ़ी आलेख...
 

 


कोन ह कोन ला चलावात हे

20-Jul-2024
ददा _दाई कहिथे घर ला में चलावत हो।
बेटा _बहू कहिथे घर ला में चलावत हो।।
आप सबो मनखे मन जानत हो संगी हो।
आज हमर घर ला सरकार हा चलवात हे।।

जनम ले मरन तक योजना उही बनावत हे।
पूरा करे बर गाँव मन मा तिहार मनावत हे।।
कोनो कहीं छुटगे त ओखर बर तंत्र लगा के।
शमशान घाट मा घलो खोजे बर जावत हे।

क्रिकेट,सिनेमा,सरकार सब ला भरमावत हे।
काम कम विज्ञापन ला जादा बतावत हे।।
आज कोनो ला समझ नइ आवत हे भाई।
जनता या सरकार कोन देश चलावत हे।।

राजनीति सबके धंधा बनत जावत हे।
दल बदलू मन सत्ता के सुख पावत हे।।
स्कूल कालेज नशा पानी के अड्डा बनगे।
धरती महतारी रो _रो के गोहरावत हे।।

                         तुलेश्वर कुमार सेन
                          सलोनी राजनांदगांव

 




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