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अर्नब तूफान से प्रभावित किसानों को राहत देने सक्रिय हुआ प्रशासन, फसल क्षति का सर्वे शुरू

31-Oct-2026
रायपुर: प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बेमेतरा जिले में अर्नब तूफान के प्रभाव से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व एवं कृषि विभाग की संयुक्त टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6(4) के प्रावधानों के तहत फसल क्षति का सर्वे कर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
अर्नब तूफान के प्रभाव से बेमेतरा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खेतों में खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने राजस्व एवं कृषि विभाग को संयुक्त रूप से सर्वे कार्य तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद संयुक्त दल गांवों में पहुंचकर खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं। अधिकारी फसलों की स्थिति का जायजा लेकर क्षति का आकलन कर रहे हैं, ताकि प्रभावित किसानों की पहचान कर नियमानुसार राहत की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
जिला प्रशासन ने प्रभावित किसानों से अपील की है कि जिनकी खरीफ फसलों को अर्नब तूफान के कारण नुकसान पहुंचा है, वे इसकी जानकारी तत्काल अपने क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक (RI) अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) को दें। इससे सर्वे दल समय पर संबंधित खेतों तक पहुंचकर फसल क्षति का आकलन कर सकेगा।
सर्वे कार्य पूर्ण होने और पात्रता निर्धारित किए जाने के बाद शासन के नियमानुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6(4) के तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में राहत राशि अंतरित की जाएगी।
जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को सर्वे कार्य गंभीरता और तत्परता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।

पटवारियों की हड़ताल के बीच जिला प्रशासन ने पूरा कराया धान के रकबे का सत्यापन, 98 प्रतिशत पॉलीगॉन जनरेशन का कार्य पूरा

30-Oct-2026
रायगढ़। ( शोर संदेश ) पटवारियों की हड़ताल के बीच रायगढ़ जिला प्रशासन ने धान के रकबे के भौतिक सत्यापन का काम लगभग पूरा कर लिया है। जिस काम में पटवारियों की भूमिका को अहम माना जाता है, उसे राजस्व विभाग ने राजस्व निरीक्षकों, सर्वेयरों, कोटवारों और किसानों के सहयोग से आगे बढ़ाते हुए उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। जिले में निर्धारित 1 लाख 52 हजार 49 धान खसरों में से 1 लाख 48 हजार 773 से अधिक का पॉलीगॉन जनरेशन पूरा हो चुका है। इस तरह 98 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। शेष खसरों का पीवी भी पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
जिले में पटवारियों की हड़ताल के बीच किसानों के धान विक्रय की प्रक्रिया प्रभावित न हो और वास्तविक रकबे का सत्यापन समय पर हो सके, इसके लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मैदानी अमले को सक्रिय किया। तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और सर्वेयरों ने गांवों में पहुंचकर किसानों तथा कोटवारों के सहयोग से खेतों की पहचान की और भौतिक सत्यापन का कार्य किया। समन्वित प्रयास और तकनीक के उपयोग से इस महत्वपूर्ण कार्य को पटवारियों की अनुपस्थिति में भी पूरा किया गया।
धान के रकबे का सत्यापन केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि खेतों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की गई। थर्ड पार्टी सर्वेयरों को संबंधित खसरों की जानकारी देकर मौके पर भेजा गया। गांव के कोटवारों ने खेत और उसके मालिक की पहचान कराने में मदद की। इसके बाद किसानों से संपर्क कर उन्हें अपने खेत तक बुलाया गया। किसानों ने स्वयं अपने खेत की सीमा बताई, जिसके आधार पर सर्वेयरों ने मौके पर पॉलीगॉन तैयार किया और धान से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज की। इस प्रक्रिया में किसान की प्रत्यक्ष भागीदारी से खेत की पहचान की पुष्टि हुई, वहीं स्थानीय कोटवार के सहयोग से भी जानकारी का मिलान किया गया। इससे सर्वेयरों को सही खेत तक पहुंचने और वास्तविक स्थिति के अनुरूप पॉलीगॉन तैयार करने में मदद मिली।
भौतिक सत्यापन को अधिक सटीक बनाने के लिए तहसीलों में राजस्व नक्शों का गूगल मैप से मिलान भी किया गया। इससे संबंधित खसरे की वास्तविक भौगोलिक स्थिति समझने और मौके पर सही खेत तक पहुंचने में सहायता मिली। मैदानी सत्यापन, किसान की पुष्टि, कोटवार के सहयोग और नक्शे के मिलान कर त्रुटिरहित बनाने का प्रयास किया गया। यह प्रक्रिया डीसीएस के दूसरे चरण के अंतर्गत की जा रही है। पहले चरण में डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से गिरदावरी का कार्य किया जाता है, जबकि दूसरे चरण में ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए संबंधित खसरों की मौके पर जाकर पहचान और भौतिक सत्यापन किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत सर्वेयरों की मदद से पॉलीगॉन तैयार किए जा रहे हैं।
इस अभियान में 27 राजस्व निरीक्षकों और लगभग 1,385 सर्वेयरों ने मैदानी स्तर पर काम किया। इसके साथ ही 900 से अधिक कोटवारों ने गांवों में खेतों और खसरों की पहचान कराने में सहयोग दिया। तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति की निगरानी की, जबकि अनुविभागीय अधिकारियों ने भी मैदानी कार्यों की समीक्षा की। जिला स्तर पर अपर कलेक्टर डॉ. प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर हेमेन्द्र भूआर्य सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की। प्रतिदिन शेष कार्यों की समीक्षा कर संबंधित क्षेत्रों में टीमों को सक्रिय किया गया, ताकि जहां काम बाकी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन पूरा कराया जा सके।
जिले की पांच तहसीलों ने निर्धारित धान खसरों के पॉलीगॉन जनरेशन का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया है। इनमें घरघोड़ा, धरमजयगढ़, पुसौर, मुकडेगा और रायगढ़ तहसील शामिल हैं। घरघोड़ा में 6 हजार 91, धरमजयगढ़ में 15 हजार 458, पुसौर में 34 हजार 128, मुकडेगा में 1 हजार 577 और रायगढ़ में 28 हजार 800 खसरों का काम पूरा हो चुका है। अन्य तहसीलों में भी काम तेजी से आगे बढ़ा है। खरसिया में 99.40 प्रतिशत, लैलूंगा में 98.76 प्रतिशत, तमनार में 98.67 प्रतिशत और छाल में 90.02 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है। कापू में 84.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। जिले के 902 गांवों में सत्यापन कार्य किया गया है, जबकि व्यापक अभियान में 938 गांव शामिल रहे हैं।
जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वास्तविक धान रकबे का सत्यापन करते हुए किसानों के हितों की रक्षा करना है। पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना धान उपार्जन केंद्रों में बेच सकें, इसे ध्यान में रखकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी, कोटवारों की स्थानीय जानकारी, सर्वेयरों की तकनीकी सहायता और राजस्व अधिकारियों की निगरानी से काम को अंतिम चरण तक पहुंचाया गया है। प्रशासन शेष खसरों का सत्यापन पूरा कर प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने में जुटा है। यह कार्य भी शीघ्र पूरा हो जाएगा।

 


धान की फसल पर कुदरत का कहर : लोकगीत गाकर किसानों ने बयां किया दर्द, सरकार से मुआवजे की लगाई गुहार

30-Oct-2026
कवर्धा।( शोर संदेश )  दीपावली की खुशियों के बीच छत्तीसगढ़ के किसानों के घरों में मातम जैसा माहौल है। जिस धान की फसल को किसान अपनी मेहनत और पसीने से सींचकर तैयार कर रहे थे, उसी फसल पर बेमौसम बारिश और अंधड़ ने कहर बरपा दिया। अर्नब चक्रवात के चलते खेतों में लहलहाती फसल बर्बादी की भेंट चढ़ गई। किसानों के सामने परिवार के भरण-पोषण से लेकर बच्चों की शादी-ब्याह तक की चिंता खड़ी हो गई है। कवर्धा में किसानों ने अपनी पीड़ा बयां करने के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का सहारा लिया। तबला, ढोलक और हारमोनियम की धुन पर गीत गाकर किसानों ने सरकार से मुआवजे की गुहार लगाई है।
किसान सालभर खेतों में दिन-रात मेहनत करता है, इस उम्मीद में कि फसल बिकेगी तो घर में खुशहाली आएगी। बच्चों की पढ़ाई, बेटे-बेटियों की शादी और परिवार की जरूरतें पूरी होंगी, लेकिन कुदरत की मार ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी धान और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग
अपनी व्यथा शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए किसानों ने अनोखा तरीका अपनाया। लोकगीतों के जरिए तबला, ढोलक और हारमोनियम की संगत में अपनी पीड़ा सुनाई। किसानों की मांग है कि फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।

किसानों को सरकार से उम्मीद
दीपावली के त्योहार से पहले फसल बर्बाद होने से किसानों की खुशियां भी संकट में हैं। जिन घरों में दीप जलने थे, वहां अब नुकसान की चिंता सता रही है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी पुकार सुनेगी और उन्हें राहत देकर इस मुश्किल घड़ी में सहारा देगी।

कृषक उन्नति योजना: 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से होगी धान खरीदी

29-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश )छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में लिए जा रहे निर्णयों से किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की व्यवस्था को किसान हितैषी कदम बताते हुए मुंगेली जिले के ग्राम बोदा निवासी नंदूराम अंचल ने शासन की सराहना की है। नंदूराम ने कहा कि धान खरीदी की यह व्यवस्था किसानों के परिश्रम को उचित महत्व देने और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। खेती-किसानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
ऐसे में किसानों की उपज के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य पर खरीदी तथा शासन की किसान कल्याणकारी योजनाएं उनके लिए आर्थिक सहारा बनती हैं। ग्राम बोदा के नंदूराम अंचल ने शासन की धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक खरीदी का प्रावधान किसानों के हित में महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलती है और कृषि कार्यों में किए गए निवेश के प्रति भरोसा मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की यह व्यवस्था किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने और खेती-किसानी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बिहान योजना से आत्मनिर्भर बन रहीं ग्रामीण महिलाएं, गन्ने की खेती से ममता राजवाड़े ने बढ़ाई आमदनी

28-Oct-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। योजना के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को मिल रही वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। इसकी प्रेरक मिसाल सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत कटकोना की ममता राजवाड़े हैं, जिन्होंने महिला स्व-सहायता समूह से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर गन्ने की खेती शुरू की और इससे प्राप्त आमदनी से ब्याज सहित पूरा ऋण चुका दिया। आज वे पांच एकड़ भूमि में गन्ने की खेती के साथ गुड़ उत्पादन कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं। इस वर्ष गन्ने की खेती और उत्पादों की बिक्री से उन्हें अब तक लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है।
पीपल महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष ममता राजवाड़े बताती हैं कि पहले उनके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। खेती और अन्य आजीविका गतिविधियों के विस्तार के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं होने के कारण वे चाहकर भी अपनी आमदनी नहीं बढ़ा पा रही थीं। इसी दौरान वे बिहान योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और नियमित बचत शुरू की। समूह को रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) और सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जिससे समूह की महिलाओं को आजीविका गतिविधियां शुरू करने और उनका विस्तार करने का अवसर मिला।
ममता बताती हैं कि समूह की महिलाओं ने मिलकर डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और इस राशि का उपयोग गन्ने की खेती में किया। मेहनत और बेहतर उत्पादन से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने मूलधन के साथ ब्याज की पूरी राशि चुका दी। ऋण चुकाने के बाद उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा और उन्होंने खेती का विस्तार करने का निर्णय लिया। इस वर्ष उन्होंने गन्ने की खेती का रकबा बढ़ाकर पांच एकड़ कर दिया है। समूह से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें खेती में निवेश करने और अपनी आजीविका को मजबूत बनाने का अवसर प्रदान किया है। 
ममता राजवाड़े गन्ने की खेती के साथ उसका मूल्य संवर्धन कर गुड़ भी तैयार करती हैं। वे बताती हैं कि गन्ने को सीधे बेचने के साथ उससे गुड़ बनाकर बिक्री करने से आमदनी के अतिरिक्त अवसर मिल रहे हैं। इस वर्ष गन्ने की खेती और उत्पादों की बिक्री से अब तक लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है। इससे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है और खेती को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहन मिला है।
ममता के अनुसार, गन्ने और गुड़ की बिक्री के लिए उन्हें बाजार तलाशने में विशेष परेशानी नहीं होती। खड़े गन्ने की खरीदी के लिए व्यापारी स्वयं उनके पास पहुंचते हैं और खेत से ही गन्ना खरीदकर ले जाते हैं। इससे परिवहन और विपणन संबंधी परेशानियां कम होती हैं। स्थानीय स्तर पर बिक्री की सुविधा मिलने से वे खेती और गुड़ उत्पादन पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं। गन्ने की खेती से मिली सफलता ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि उचित आर्थिक सहयोग और मेहनत से खेती को लाभकारी आजीविका का साधन बनाया जा सकता है।
ममता राजवाड़े ने अपनी आर्थिक स्थिति में आए सकारात्मक बदलाव पर खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें खेती में निवेश करने के लिए आर्थिक सहायता मिली। समूह से प्राप्त ऋण के माध्यम से उन्होंने गन्ने की खेती शुरू की और उससे हुई आमदनी से ब्याज सहित पूरा ऋण चुका दिया। अब खेती का विस्तार करने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु भैया को धन्यवाद दिया।
ममता राजवाड़े की सफलता यह दर्शाती है कि महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता ग्रामीण महिलाओं के पारंपरिक व्यवसायों और कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों को नई दिशा दे रही है। बिहान योजना के अंतर्गत समूह आधारित बचत, ऋण सुविधा और सामुदायिक निवेश के माध्यम से महिलाएं खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों में आगे बढ़ रही हैं। गन्ने की खेती के साथ गुड़ उत्पादन जैसे मूल्य संवर्धन कार्यों से उनकी आमदनी के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तीकरण की दिशा में संचालित बिहान योजना ममता राजवाड़े जैसी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रही हैं, बल्कि सामूहिक प्रयास, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने में योगदान दे रही हैं।














 

धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

27-Oct-2026
रायपुर(शोर संदेश)।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विविधीकरण तथा कृषि आधारित सहायक आजीविका गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य गतिविधियों को अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जशपुर जिले के ग्राम सोगड़ा निवासी प्रगतिशील महिला किसान संजीता एक्का इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन को अपनाकर अपने परिवार के लिए आय के नए अवसर विकसित किए हैं।
संजीता एक्का अपने पति ईश्वर राम एक्का के साथ मिलकर खेती-किसानी और विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। पहले उनका परिवार मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती पर निर्भर था। खेती से होने वाली सीमित आमदनी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने आय के वैकल्पिक साधनों की तलाश शुरू की।
संजीता ने पारंपरिक खेती के साथ सबसे पहले मत्स्य पालन को अपनाया। इस गतिविधि से बेहतर लाभ मिलने पर उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने बत्तख पालन तथा सुकर पालन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया। आज वे खेती के साथ इन सहायक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं, जिससे परिवार की आय के स्रोतों में विविधता आई है और केवल एक फसल पर निर्भरता कम हुई है।

संजीता एक्का बताती हैं कि पहले वे अपने पति के साथ केवल धान की खेती करती थीं, लेकिन इससे अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता था। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें धान की खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने लगा। इस अनुभव ने उन्हें कृषि आधारित अन्य व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मत्स्य पालन के साथ बत्तख और सुकर पालन शुरू करने से उनकी आजीविका को नया आधार मिला है। अलग-अलग गतिविधियों से आय अर्जित करने के अवसर बढ़ने के साथ खेती में होने वाले मौसमी उतार-चढ़ाव पर निर्भरता भी कम हुई है। संजीता का मानना है कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी भूमि, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सहायक व्यवसाय भी अपनाने चाहिए।
संजीता एक्का ने खेती में फसल विविधीकरण को भी विशेष महत्व दिया है। वे बरसात के मौसम में धान की खेती करती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में आलू और गेहूं जैसी फसलों का उत्पादन करती हैं। इससे कृषि भूमि का अलग-अलग मौसम में बेहतर उपयोग हो रहा है और अतिरिक्त आमदनी की संभावनाएं बढ़ी हैं।
इसके साथ ही उन्होंने अपने खेत में लीची के पौधे लगाकर बागवानी की भी शुरुआत की है। लीची के पौधे भविष्य में फल उत्पादन से अतिरिक्त आय का साधन बन सकते हैं। वहीं, पौधरोपण से मिट्टी के कटाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
संजीता का मानना है कि खेती में नए प्रयोग और विविध फसलों को अपनाना किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कृषि, पशुपालन और बागवानी को साथ लेकर चलने से उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
कृषि गतिविधियों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए संजीता एक्का ने अपने खेत के पास सोलर फेंसिंग भी लगवाई है। इससे फसलों की सुरक्षा में मदद मिल रही है। खेती में आधुनिक तकनीक और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर वे कृषि कार्यों को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।
शासन की विभिन्न योजनाओं और जिला प्रशासन से मिले सहयोग का लाभ उठाकर वे मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और फसल विविधीकरण जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
संजीता एक्का ने अपनी प्रगति के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं से किसानों को खेती के साथ अन्य आजीविका गतिविधियां अपनाने में सहयोग मिल रहा है।
वे अपने अनुभवों के आधार पर गांव के अन्य किसानों को भी धान की खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि किसान यदि अपनी परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप खेती में बदलाव लाएं, तो आय के नए साधन विकसित कर सकते हैं।

संजीता एक्का की सफलता यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार और विविधीकरण अपनाकर ग्रामीण परिवार आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर न केवल पारंपरिक खेती के स्वरूप में बदलाव किया है, बल्कि मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और बागवानी को जोड़कर आजीविका का एक विविधतापूर्ण मॉडल भी विकसित किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। संजीता एक्का जैसी प्रगतिशील महिला किसानों की पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण है।
आज संजीता एक्का की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि नई सोच और मेहनत से अपनी आजीविका को मजबूत बनाने वाली महिला के रूप में हो रही है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि खेती में बदलाव की पहल छोटे स्तर से भी की जा सकती है। दृढ़ संकल्प, मेहनत और योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की खुशहाली के साथ गांव की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

 

 


राज्योत्सव समारोह-2026 के सफल आयोजन के लिए नोडल और सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त

24-Oct-2026
सक्ती।( शोर संदेश ) शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राज्योत्सव समारोह-2026 का एक दिवसीय आयोजन 2 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाना है। जारी आदेश के तहत जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह-2026 का आयोजन जिला मुख्यालय सक्ती में कलेक्ट्रेट के समीप स्थित मैदान में आयोजित किया जाएगा। आयोजन के सफल एवं सुव्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर  जयश्री जैन ने नोडल और सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दायित्व सौंपे हैं।
जारी आदेश के अनुसार, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी आईएएस वासु जैन को कार्यक्रम का नोडल अधिकारी तथा सीएमओ नगर पालिका सक्ती प्रहलाद पाण्डेय को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इनके मार्गदर्शन में संबंधित विभागों के अधिकारी सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करेंगे।
जिला स्तरीय राज्योत्सव समारोह-2026 आयोजन के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था के लिए अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी जिला सक्ती एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सक्ती को दायित्व दिया गया है। आमंत्रण पत्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रारूप के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सक्ती एवं तहसीलदार सक्ती को, आमंत्रण पत्र वितरण व्यवस्था के लिए तहसीलदार सक्ती एवं उप संचालक पंचायत सक्ती को दायित्व दिया गया है। कार्यक्रम स्थल पर पंडाल, स्टॉल, मंच, टेंट की व्यवस्था व साउंड माइक, लाइट व्यवस्था के लिए कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग सक्ती एवं अनुविभागीय अधिकारी लोक निर्माण विभाग उप संभाग सक्ती को दायित्व सौंपा गया है। मंच पर बैठक व्यवस्था के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सक्ती को, कार्यक्रम स्थल पर शुद्ध पेयजल व्यवस्था के लिए कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी सक्ती व बाराद्वार को, मंच संचालन एवं उदघोषक के लिए जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती को दायित्व सौंपा गया है। इसी तरह सांस्कृतिक कार्यक्रमों के व्यवस्था के लिए सर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत जिला सक्ती, सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग एवं जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती और कार्यक्रम स्थल पर साफ सफाई के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी सक्ती व बाराद्वार को दायित्व सौंपा गया है, इसी तरह अन्य आवश्यक कार्यों के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर जयश्री जैन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों का समय पर एवं समन्वय के साथ निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि राज्योत्सव का आयोजन व्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

ग्राम बगौद, जिला बेमेतरा में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ

23-Oct-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषददृराष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR&NIBSM), रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बेमेतरा के समन्वय से आज ग्राम बगौद, जिला बेमेतरा, में ‘खेत बचाओ अभियान (Khet Bachao Abhiyaan)’ का शुभारंभ किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को फसलों में कीटों, रोगों एवं अन्य जैविक तनावों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को खेत स्तर तक पहुँचाना है।
कार्यक्रम में ICAR&NIBSM के संयुक्त निदेशक एवं अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. एस. के. जैन, डॉ. के. सी. शर्मा, डॉ. अजय वर्मा तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के डॉ. लव कुमार उपस्थित रहे। वैज्ञानिकों ने किसानों से संवाद कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा की और फसल सुरक्षा के व्यावहारिक उपाय बताए।
इस अवसर पर डॉ. पंकज शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेत बचाओ अभियान का प्रमुख उद्देश्य फसलों को जैविक तनावों से सुरक्षित रखने के साथ-साथ कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाना है। उन्होंने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने, उपयुक्त वैकल्पिक फसलों को शामिल करने, फसल चक्र अपनाने तथा कीटों एवं रोगों की समय पर पहचान कर समन्वित प्रबंधन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विविधीकृत फसल प्रणाली से कृषि जोखिम कम करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डॉ. के. सी. शर्मा ने फसलों में कीट एवं रोगों की समय पर पहचान, समन्वित कीट प्रबंधन (IPM), संतुलित पोषण तथा रासायनिक कीटनाशकों एवं रोगनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को पर्यावरण-अनुकूल एवं वैज्ञानिक फसल सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. लव कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा ने स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण, फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा वैज्ञानिक कृषि सलाह के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को उपलब्ध कृषि तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन एवं लाभप्रदता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

खेत बचाओ अभियान के तहत एनआईबीएसएम और केवीके मिलकर करेंगे किसानों को जागरूक

22-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश )  आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र बेमेतरा के सहयोग से देशव्यापी खेत बचाओ अभियान ( KBA&Rabi 2026 ) के अंतर्गत किसानों के बीच टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह अभियान आज 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित होगा। इसका उद्देश्य रबी मौसम में मृदा स्वास्थ्य में सुधार, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करना है।
एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने मृदा की उर्वरता बनाए रखने, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा दीर्घकालीन कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों में जागरूकता बढ़ाने तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे फसल उत्पादन के साथ-साथ किसानों की आजीविका को भी सुदृढ़ किया जा सके।
डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं खेत बचाओ अभियान के नोडल अधिकारी ने बताया कि केवीके बेमेतरा के साथ संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों एवं क्षमता विकास गतिविधियों में योगदान देगी।
अभियान के अंतर्गत फसलों की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, सामान्य उर्वरक अनुशंसाओं (GFR), एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) तथा जैविक एवं जैव उर्वरकों के उचित उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, फसल अवशेषों को जलाए बिना उनका उचित प्रबंधन तथा मृदा की नमी एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जागरूकता और प्रदर्शन गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने तथा धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। किसानों को विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं तथा स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुकूल टिकाऊ तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। इस संयुक्त पहल का उद्देश्य कृषि अनुसंधान एवं खेत स्तर पर प्रसार गतिविधियों के बीच समन्वय को मजबूत करना है। इससे किसान वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर बेहतर निर्णय ले सकेंगे, अनावश्यक कृषि लागत को कम कर पाएंगे तथा संसाधनों के दक्ष उपयोग वाली कृषि पद्धतियों को अपना सकेंगे। यह पहल मृदा स्वास्थ्य में सुधार, टिकाऊ फसल उत्पादन तथा क्षेत्र की कृषि प्रणालियों को जलवायु एवं अन्य चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम बनाने में योगदान देगी।
 

 


धान की जगह रागी की खेती से दिनेश को मिलेगा 10 हजार रुपये का प्रोत्साहन

19-Oct-2026
रायपुर। ( शोर संदेश ) सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम परसा निवासी किसान दिनेश कुमार यादव ने परंपरागत धान की खेती के स्थान पर रागी (मडि़या) की खेती अपनाई है। कृषि विभाग से मिले बीज और तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने एक एकड़ में रागी की अच्छी फसल तैयार की है। कृषक उन्नति योजना के तहत पात्रता पूरी होने पर उन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। शासन द्वारा कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को परंपरागत धान की खेती के साथ अन्य लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
 यादव ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत उन्हें रागी का बीज उपलब्ध कराया गया था। विभागीय अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने धान के स्थान पर रागी की खेती शुरू की। नियमित तकनीकी मार्गदर्शन और देखरेख से फसल की बढ़वार अच्छी हुई है। अधिकांश फसल तैयार हो चुकी है। कटाई के बाद उत्पादन और उससे होने वाली आय का वास्तविक आकलन हो सकेगा।
यादव ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों से उन्हें कृषक उन्नति योजना के तहत धान के बदले अन्य निर्धारित फसलों की खेती करने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत पंजीयन भी करा लिया है। पात्रता पूरी होने पर प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने से खेती के खर्च में आर्थिक मदद मिलेगी।कृषि विभाग द्वारा बीज वितरण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से किसानों को धान के साथ वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

’मिलेट की खेती से फसल विविधीकरण को मिल रहा प्रोत्साहन’
रागी जैसे मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए फसल विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। पोषक तत्वों से भरपूर रागी की खेती को बढ़ावा देने से कृषि उत्पादन में विविधता लाने के साथ किसानों को आय के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ती हैं। कृषि विभाग द्वारा बीज वितरण, तकनीकी सलाह और शासन की प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी देकर किसानों को वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

 



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