रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। मौजूदा हालात में देश की अर्थ व्यवस्था की चिंता तो हर कोई कर रहा है। आखिर क्यों ना करे, क्योंकि जिस विश्वव्यापी महामारी ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को संकट में जो डाल दिया है। मौजूदा जीडीपी कि यदि बात करें तो आज देश की जीडीपी 11 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। देश में कांग्रेस की मनमोहन सिंह की सरकार के वक्त वर्ष 2009 में आई मंदी जैसी निर्मित हो गई हैं, यहां यह कहना लाजमी होगा कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई थी जो अब महामारी की चपेट में आने से और ज्यादा चरमरा गई है। देश में तत्कालीन वित्तीय वर्ष की जीडीपी 4.2 फीसदी पर रही। यह करीब 11 साल का निचला स्तर है, इससे पहले 2009 में जीडीपी ग्रोथ इस स्तर के नीचे गई थी। इसके बाद भी 2009 में यूपीए वापस सत्ता पर आई थी जबकि वित्तीय वर्ष 2008-09 के जीडीपी आंकड़े 3.09 फीसदी पहुँच गए थे। जीडीपी के इन आंकड़ों पर वैश्विक मंदी का साया था।
दरअसल, साल 2008 में दुनियाभर में मंदी छाई हुई थी। इस मंदी ने भारतीय इकोनॉमी को भी प्रभावित किया। इसका असर जीडीपी आंकड़ों पर देखने को मिला.आज करीब 11 साल बाद देश की जीडीपी एक बार फिर उसी स्तर के करीब जा पहुंची है। वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी की ग्रोथ 4.2 फीसदी पर रही. यह करीब 11 साल का निचला स्तर है. इससे पहले 2008- 09 में जीडीपी ग्रोथ इस स्तर तक पहुंची थी।
इन 11 साल में जीडीपी के चाल की बात करें तो ग्रोथ का सबसे उच्चतम स्तर वित्त वर्ष 2016-17 में रहा। इस वित्त वर्ष में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 8.25 फीसदी पर रही। हालांकि, इसके बाद के 3 वित्त वर्ष में लगातार गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है।
00 वित्त वर्ष 2019-20 के चारों तिमाही का हाल :
वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच जीडीपी ग्रोथ रेट 3.1 फीसदी पर रही. इसी तरह, दिसंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 4.7 फीसदी पर आ गई थी. इसके अलावा 2019-20 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट को संशोधित कर 5.6 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 5.1 फीसदी कर दिया गया था.
00 ये साल और बुरा...:
कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए वित्त वर्ष 2020-21 का साल और बुरा होने की आशंका है. बीते दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तो यहां तक कह दिया कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश के जीडीपी में ग्रोथ निगेटिव रहेगी यानी इसमें गिरावट आएगी.
00 राहत पैकेज का फायदा नहीं :
बीते दिनों कोरोना संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने करीब 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. देश के सामने इस पैकेज का ब्यौरा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रख चुकी हैं, लेकिन तमाम रेटिंग एजेंसियों को अनुमान है कि इस राहत पैकेज से जीडीपी को कोई फायदा नहीं होगा। इस पैकेज का अधिकतर हिस्सा क्रेडिट स्कीम की तरह है। ऐसे में इससे इकोनॉमी में कोई उत्साह नहीं आएगा।