मुंबई। ( शोर संदेश ) मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते शुक्रवार के कारोबारी सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव तथा महंगाई की आशंका के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे कीमती धातुओं में मजबूती दर्ज की गई।
सुबह करीब 10.39 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 1,072 रुपये यानी 0.67 प्रतिशत बढ़कर 1,60,745 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 5,333 रुपये से अधिक की बढ़त के साथ 2,67,524 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,61,525 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,65,560 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इस कारण महंगाई बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है और निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी में हल्की तेजी देखी गई। हाजिर चांदी 84.11 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि सोना 12.60 डॉलर या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 5,153.91 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी ने बताया कि हालिया तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे कुछ समय के लिए कीमतों पर दबाव आया। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल सीमित बनी हुई है।
बाजार में तनाव उस समय और बढ़ गया जब यह खबर सामने आई कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया। वहीं ईरान की ओर से क्षेत्र के कई हिस्सों में मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे लंबे समय तक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस अनिश्चित माहौल में निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाकर सोने जैसे सुरक्षित एसेट्स में निवेश बनाए रखना पसंद कर रहे हैं। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व की संभावित नीतिगत ढील, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार शुरुआती बेरोजगारी दावे 2.13 लाख रहे, जो बाजार के अनुमान से बेहतर हैं। अब निवेशकों की नजर यूरोपीय संघ के जीडीपी डेटा, अमेरिका की रिटेल सेल्स, फैक्ट्री ऑर्डर्स और श्रम बाजार से जुड़े अन्य प्रमुख आंकड़ों पर टिकी हुई है।