नई दिल्ली (शोर सन्देश) । केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित प्रतिष्ठित आसियान पीएचडी फेलोशिप प्रोग्राम के लिए आसियान के सदस्य देशों से चुने गए छात्रों को आज वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया और उन्हें देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों आईआईटी में उनके चयन के लिए बधाई दी। केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे इस अवसर पर सम्मानित अथिति के रूप में उपस्थित थे। आसियान के सदस्य देशों के राजदूत और प्रतिनिधि; उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे; विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) सुश्री रीवा गांगुली दास; आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर वी रामगोपाल राव; आईआईटी संस्थानों से आसियान संयोजक, आईआईटी के निदेशक और स्कॉलरशिप के लिए चयनित छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
आसियान देशों के छात्रों का स्वागत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और आसियान के सदस्य देशों के बीच शैक्षिक और अनुसंधान के क्षेत्रों में परस्पर संबंध दोनों के लिए फायदेमंद होंगे। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति, वाणिज्य और संपर्क तीनों ही स्तर पर परस्पर संबंधों को और मजबूत करेगा। एपीएफपी भारत और आसियान के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में तालमेल के लिए कई नयी संभावनाएं लेकर आएगा। उनके द्वारा किए गए शोध और आविष्कारों का उपयोग दुनिया भर में मानव जाति की बेहतरी के लिए किया जा सकेगा। श्री निशंक ने कहा कि कोविड महामारी के कारण दुनिया की रफ्तार धीमी हो गई है लेकिन इस बात की खुशी है कि इसके बावजूद आईआईटी कभी भी बंद नहीं हुए और लगातार अपने मूल्यवान शोधों और आविष्कारों के साथ देश की सहायता करके इस महामारी के बीच नई सफलता की कहानियां लिख रहे हैं। आसियान के सदस्य देशों के छात्रों को सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संस्थानों में से एक आईआईटी में अध्ययन करने का अवसर मिला है। उन्होंने छात्रों को उनके शोध कार्यक्रमों के लिए शुभकामनाएं दीं। शिक्षा मंत्रालय आसियान छात्रों के लिए आईआईटी दिल्ली में विशेष रूप से गठित आसियान पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम सचिवालय को मदद देगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आसियान पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सभी दस आसियान देशों के नेताओं की उपस्थिति में की थी। उन्होंने बताया कि एपीएफपी के तहत, 1000 फेलोशिप विशेष रूप से आसियान नागरिकों को प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि एपीएफपी विदेशी लाभार्थियों के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया सबसे बड़ा क्षमता विकास कार्यक्रम भी है। आसियान पीएचडी फेलो को संबंधित आईआईटी के पूर्व छात्रों के रूप में मान्यता दी जाएगी, जहां से वे अपनी पीएचडी पूरी करेंगे। श्री पोखरियाल ने कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का भी प्रतीक है कि भारत हमेशा से वसुधैव कुटुम्बकम् और अथिति देवो भव की भावना के साथ `सर्वे भवंतु सुखिन` की संस्कृति को पोषित करते हुए आगे बढ़ाता रहा है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। एक ग्लोबल माइंड सेट और दृष्टिकोण के साथ हम भारत को शिक्षा के क्षेत्र में ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एपीएफपी कार्यक्रम शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम है। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री धोत्रे ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ हमारे संबंध बहुत पुराने हैं। हमारे प्राचीन महाकाव्य रामायण का प्रभाव आसियान देशों के सांस्कृतिक परिवेश में बहुत अच्छी तरह से देखा जा सकता है। हमारे बीच रिश्तों का आधार भगवान बुद्ध के संदेश के माध्यम से आगे पोषित हुआ है। हम मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन साझा करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में आसियान के छात्रों के लिए शैक्षणिक अनुसंधान यात्रा की यह शुरुआत हमारे संबंधों को और मजबूत करेगी। शोध और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग हम सभी के लिए फायदेमंद होगा। श्री धोत्रे ने कहा कि दुनिया अभी भी कोविड से जूझ रही है। हमारे अनुसंधान संस्थानों ने हमें कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए कम लागत वाले वेंटिलेटर, परीक्षण किट, मास्क आदि विकसित करने में हमारी मदद की है। उन्होंने इस फेलोशिप कार्यक्रम के तहत चुने गए सभी छात्रों को उनके भविष्य के अनुसंधान और नवाचार के लिए सर्वश्रष्ठ शिक्षाविदों और आईआईटी के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने की कामना की।