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पिता रामविलास से बड़े राजनीति के 'मौसम विज्ञानी' हैं चिराग पासवान?

22-Aug-2024
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  चिराग पासवान अपने बयानों को लेकर इन दिनों चर्चा में हैं. वो नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल का सदस्य हैं.वो खुद को नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते हुए नहीं अघाते हैं.लेकिन मौका पड़ने पर वो सरकार की आलोचना से भी पीछे नहीं हटते हैं. पिछले कुछ दिनों से आए उनके बयानों से बीजेपी असहज.चिराग आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बयान दे चुके हैं.उन्होंने वक्फ बोर्ड पर लाए गए बिल और लैटरल एंट्री पर आए यूपीएससी के विज्ञापन पर भी आपत्ति जताई थी. पासवान इन दिनों दलितों के मुद्दों पर काफी मुखर हैं.उनकी राजनीति में आए इस बदलाव के बाद राजनीतिक पंडितों को चिराग पासवान में भी एक राजनीतिक मौसम विज्ञानी नजर आ रहा है. एक ऐसा राजनेता जो राजनीतिक हवाओं का रुख समय रहते भांप लेता है. उनके पिता रामविलास पासवान को भी मौसम वैज्ञानिक ही कहा जाता था. 
चिराग पासवान की रणनीति
पिता रामविलास पासवान के साये में रहकर ही चिराग पासवान ने राजनीति के गुर सीखे हैं.पिता के निधन के बाद चिराग ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली थी.साल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी लोजपा ने नीतीश कुमार के जेडीयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार दिए. लेकिन बीजेपी के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया.उस चुनाव के समय से ही उन्होंने खुद को नरेंद्र मोदी का हनुमान कहना शुरू कर दिया था. चिराग की इस रणनीति का असर भी हुआ. नीतीश कुमार की पार्टी पहली बार बीजेपी की जूनियर पार्टी बनकर रह गई.लेकिन इससे चिराग को कोई फायदा नहीं हुआ. लोजपा 5.66 फीसदी वोट के साथ एक सीट ही जीत पाई. लेकिन यह 2015 के चुनाव परिणाम से बेहतर था, जिसमें लोजपा दो सीटों के साथ 4.83 फीसदी वोट ही हासिल कर पाई थी.  
इस चुनाव के बाद नीतीश और चिराग के रिश्तों में काफी खटास आ गई.चिराग की पार्टी नरेंद्र मोदी सरकार को बाहर से समर्थन करती रही. बाद में लोजपा सांसदों ने चिराग के चाचा पसुपति पारस के नेतृत्व में बगावत कर दी.नरेंद्र मोदी ने भी चिराग को झटका देते हुए पसुपति पारस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करवा दिया. उन्हें मंत्रालय भी वही दिया गया, जो रामविलास पासवान संभालते थे.कहा जाता है कि लोजपा में हुई बगावत के पीछे नीतीश कुमार का हाथ था. इस बगावत के बाद चिराग पासवान ने खुद को संभाला. उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी नई पार्टी को फिर से खड़ा किया. 


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