खरसिया (शोर सन्देश)। पर्यावरण विभाग की सभी गाइडलाइन्स को किताबों में लिखे जुमले की तरह समझकर उद्योगों द्वारा जगह-जगह फ्लाईऐश डम्प किया जा रहा है। वहीं यह भी हद है कि माइनिंग डिपार्टमेंट के परमिशन के बगैर ही उद्योग विशेष ने ग्राम जामझोर में पत्थर खदानों तक को फ्लाईऐश से पाट दिया है। ग्राम जामझोर स्थित भूमि खसरा नंबर 225/1 क, ख, ग, घ तथा 226/1 पर खनन हेतु माइनिंग द्वारा अस्थाई अनुज्ञा दी गई थी। वहीं 2 वर्ष की अवधि पूर्ण हो जाने पर माइनिंग अथवा पॉल्यूशन डिपार्टमेंट से बिना परमिशन लिए एसकेएस प्लांट द्वारा यहां बेजा रूप से लाखों टन फ्लाईऐश डम्प कर दिया गया है। उल्लेखनीय होगा कि प्लांट द्वारा उन खदानों को भी पाटा जा रहा है जिनसे अब भी पत्थर निकाले जाने की संभावनाएं हैं।
00 सारे नियम ताक़ में रखकर की जा रही मनमानी : प्लांट द्वारा जिस स्थान पर फ्लाईऐश के पहाड़ बनाए जा रहे हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग वहां से महज 200 मीटर की दूरी पर ही है। वहीं बोतल्दा पहाड़ी भी बिल्कुल नजदीक है।, जबकि वन भूमि को फ्लाईऐश से नहीं पाटा जा सकता। उल्लेखनीय होगा कि लगभग 20 गांव के लिए निस्तारी का साधन बना दंतार नाला भी फ्लाईऐश के इस भंडारण से प्रभावित हुए बगैर नहीं रह पाएगा। कहना होगा कि पर्यावरण के सभी नियमों को ताक़ में रखकर यहां नाजायज फ्लाईऐश डम्पिंग की जा रही है। जब एसकेएस प्लांट प्रबंधन से इस बाबत बात की गई तो उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि यह फ्लाईऐश उन्हीं के द्वारा डम्प किया गया है। हालांकि उन्होंने बात को संभालते हुए यह भी कहा कि पिछले 4 माह से अब हम वहां नहीं भेज रहे। ऐसे में यह प्रश्न है कि प्रतिदिन प्लांट से निकलने वाले फ्लाईऐश को क्या जमीन निकल रही है
00 जुगत में लगा प्लांट प्रबंधन : लंबे समय से अवैध रूप से फ्लाईऐश डम्प किए जाने की शिकायत होने पर अब एसकेएस प्लांट प्रबंधन पॉल्यूशन डिपार्टमेंट से अनुमति प्राप्त करने के लिए जोड़-तोड़ कर रहा है। वहीं पर्यावरण विभाग भी इस संबंध में संवाददाता को किसी प्रकार की भी जानकारी देने से बचते नजर आ रहा है। ऐसे में देखना होगा कि इस अवैध भंडारण पर विभाग द्वारा कोई पेनाल्टी की जाती है या फिर परंपरागत रूप से सब कुछ सेट कर लिया जाएगा।