रायपुर/पुष्कर (शोर सन्देश)। आज के समय में बच्चों पर सरकारी नौकरी पाने का एक जुनून सा सवार है। एक नौकरी के लिए बच्चे दिन-रात मेहनत कर सिर खपा रहे हैं। ऐसे ही राजस्थान का एक गरीब लड़का भी सरकारी नौकरी के लिए पढ़ रहा था। उसके लिए एक नौकरी पा लेना ही बड़ी बात थी। पढ़ाई का खर्च उठाने और परिवार को पालने के लिए वो गांव में ऊंट चराता था और खेतों में जुताई के लिए उन्हें ट्रेनिंग भी देता था। इन्ही ऊंटों को वो पुष्कर मेले में ले जाकर बेच देता था। उससे जो कमाई होती उससे वो अपने परिवार और पढ़ाई के खर्च में लगाता था लेकिन ये कमाई चंद रुपयों में थी। ऐसे में उसने सरकारी नौकरी के लिए सोचना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने हवलदार की नौकरी के लिए एग्जाम दिया। इस एग्जाम के पास होने और नौकरी पाने के बाद उसने सोचा कि वो आगे भी कुछ बड़ा कर सकता है। यही से उसने आईपीएस, आईएएस करने की सोच ली। ये कहानी है कच्चे घर में रहकर जिंदगी गुजारने वाले आईपीएस अफसर विजय सिंह गुर्जर की।
विजय गुर्जर का नाम संघर्ष, मेहनत और कामयाबी की मिसाल है। बुलंद हौसलों के दम पर ऊंची उड़ान भरने और सफलता की सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़ने वाले विजय राजस्थान के झुंझुनूं जिले में नवलगढ़-उदयपुरवाटी मार्ग पर स्थित गांव देवीपुरा के रहने वाले हैं। लक्ष्मण सिंह के बेटे विजय किसानी करते थे। इससे उनके घर की हालत बेहतर नहीं हो पाती थी। ऐसे में वह ऊंटों को जुताई के लिए ट्रेंड करते थे। ट्रेंड ऊंट को वह पुष्कर मेले में बेचने का काम करते थे। इससे घर का खर्च चल जाता था लेकिन, फिर भी बड़ी जगह से पढ़ाई के लिए पूरा नहीं था।