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पेड़ के छांव

01-Aug-2024
( शोर संदेश )  पूछ वोला कीमत भूख के जेन ला,
कहीं कुछू खाय बर घलो नइ मिले।।
पूछ ओला कीमत पसीना के जेन ला,
थोरिक रुके बर छांय घलो नइ मिले।।

अपन स्वारथ बर जम्मो रुखराई ला,
भाजी _भाटा कस हमन काट डरेन।
जब पड़ीस मार ऊपर वाले मालिक के,
त कोरोना मा तड़प _तड़प छाँट मरेन।।

अब भीतर बाहिर के आँखी ला खोल,
कोंदा हस त थोरिक इसारा मा बोल।
कोनो भारी नींद मा हस झकना के उठ,
लोगन ला जगा हल्ला कर बजा ढोल।।

मनखे,गरुवा,छेरी,हिरण, कुकुर,बिलई,
शेर,भालू,चीता,तेंदुआ होय छोटे चिरई।
सब ला घाम ले बचे बर आज जरूरत हे।
ठंडा_ठंडा पानी अउ छोटे _मोटे रुख राई।।

एखर सेती मोर _बात ला चेत लगा के सुनौ।
आगू _पाछू के लोग लइका बर कुछु गुनौ।।
अपन घर के कोनो भी काम सुख हो चाहे दुख।
बर,पीपर,नीम संग फलदार पेड़ बर जगा चुनौ।।

पहिली के सियान मन तरिया,नदियां कोड़ावय।।
ओखर चारो कोती छोटे बड़े रुख राई लगावय।
आज के लइका मन रहिथे डिजिटल दुनियां मा।
मोबाइल,फेस बुक मा पेड़ लगा हल्ला मचावय।


                      तुलेश्वर कुमार सेन
                      सलोनी राजनांदगांव


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