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क्यों मनाया जाता है 10 अक्टूबर को भारतीय डाक दिवस, जाने भारतीय डाक का इतिहास*

09-Oct-2020

रायपुर (शोर सन्देश) चिट्ठियों का भी क्या जमाना था। कागज के टुकड़े पर लोग लम्हे-लम्हे के एहसास को समेट देते थे। एक मुकम्मल यादों का पिटारा हुआ करती थीं चिट्ठियां। मोबाइल और इंटरनेट के युग में भले ही चिट्ठियों का वजूद कम हो गया है, लेकिन डाक घरों की व्यस्तताएं और बढ़ गई हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि अब दस्तावेजों की हार्ड कॉपियां आती हैं, पहले दिलों के जज्बात शब्दों में पिरोकर भेजे जाते थे। कागज के टुकड़े पर शब्दों की जादूगरी के चिट्ठी युग को याद दिलाने के लिए हर साल नौ अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है, वहीं भारत में यह दिवस 10 अक्टूबर को मनाया जाता है।

भारतीय डाक का इतिहास डेढ़ सौ साल पुराना है। भारत में पहली बार वर्ष 1766 में डाक व्यवस्था की शुरुआत की गई। भारत में एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना 1 अक्टूबर, 1854 को हुई। भारतीय डाक विभाग 9 से 14 अक्टूबर के बीच विश्व डाक सप्ताह मनाता है। वारेन हेस्टग्सिं ने कोलकाता में प्रथम डाकघर वर्ष 1774 को स्थापित किया।
भारत में सन 1852 में पहली बार चिट्ठी पर डाक टिकट लगाने की शुरुआत हुई तथा महारानी विक्टोरिया के चित्र वाला डाक टिकट 1 अक्टूबर 1854 को जारी किया गया। इंडिया पोस्ट की स्थापना 1854 में लॉर्ड डलहौजी ने की थी। यह संचार मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। मंत्री जिम्मेदार रविशंकर प्रसाद हैं। भारत में अब तक का सबसे बड़ा डाक टिकट पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर 20 अगस्त 1991 को जारी किया गया था। डाक दिवस मनाने का उद्देश्य है कि ग्राहकों को अच्छी जानकारी देना। डाक दिवस पर बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत भी किया जाता है।
पत्र लिखना -मेल और ऑनलाइन मैसेजिंग की शुरुआत से पहले संचार का एक महत्वपूर्ण रूप था। भारतीय डाक सेवा भारत का अभिन्न अंग है। भारत में डाक सेवाओं ने संस्कृति, परंपरा और कठिन भौगोलिक इलाकों में विविधता के बावजूद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया है।
00 भारत का पिन कोड सिस्टम

पिनकोड में पिन पोस्टल इंडेक्स नंबर के लिए है। 6-अंकीय पिन प्रणाली को श्रीराम भीकाजी वेलणकर द्वारा 15 अगस्त 1972 को केंद्रीय संचार मंत्रालय में एक अतिरिक्त सचिव द्वारा पेश किया गया था। पिन कोड के पहले अंक में इस क्षेत्र के निशान हैं। दूसरा अंक उप-क्षेत्र को दर्शाता है। तीसरा अंक जिले को चिन्हित करता है। अंतिम तीन अंक डाकघर को दिखाते हैं जिसके तहत एक विशेष पता होता है। 



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