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Dhamtari

धमतरी में भू-जल संवर्धन को मिली नई रफ्तार

05-Sep-2026
​रायपुर(शोर संदेश) छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा 357 सामुदायिक जल स्रोतों पर सैंड फिल्टर (रीचार्ज पिट्स) के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह वैज्ञानिक संरचनाएं वर्षा जल को प्राकृतिक रूप से छानकर जमीन के भीतर पहुंचाएंगी, जिससे ग्रामीण और विशेषकर आदिवासी बहुल इलाकों में जल स्तर सुधरेगा।
धमतरी जिले में वर्षा जल के संरक्षण, भू-जल स्तर में सतत सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ी प्रशासनिक पहल की गई है। जिले में 'वीबी-जी रामजी योजना' के तहत जल संरक्षण और संवर्धन से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कुल 357 रिचार्ज पिट निर्माण कार्यों को औपचारिक मंजूरी दी गई है। स्वीकृति मिलते ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इन संरचनाओं का निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रारंभ कर दिया गया है।
​कलेक्टर धमतरी के निर्देशन में इन सभी स्वीकृत कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। मैदानी अधिकारियों और तकनीकी अमले को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, निर्धारित तकनीकी मानकों और समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए। नियमित निरीक्षण के माध्यम से कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की निरंतर समीक्षा की जा रही है।
​रिचार्ज पिट एक अत्यंत व्यावहारिक और उपयोगी जल संरक्षण संरचना है। इसके माध्यम से वर्षा काल में तेजी से बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को रोककर सीधे जमीन के भीतर पहुंचाया जाता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर बारिश के पानी का संचयन होता है, बल्कि भू-जल पुनर्भरण को भी अप्रत्याशित बढ़ावा मिलता है। ग्रामीण अंचलों में इसके दूरगामी और सकारात्मक परिणाम पेयजल स्रोतों—जैसे कुओं, हैंडपंपों और नलकूपों के जलस्तर में सुधार के रूप में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेंगे।
​कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित धमतरी जिला अपने प्राकृतिक जल संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर है। भविष्य की बढ़ती जल आवश्यकताओं को पूरा करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए वर्षा जल का संचयन बेहद अनिवार्य है। जिले में निर्मित किए जा रहे 357 रिचार्ज पिट्स के माध्यम से 'बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे भू-जल में लौटाने' के संकल्प को धरातल पर उतारा जा रहा है। ये संरचनाएं न केवल मानसून के दौरान जल भराव और कटाव को रोकेंगी, बल्कि लंबे समय तक ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता को आसान बनाकर सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन की नींव मजबूत करेंगी।
​जिला पंचायत प्रशासन का मुख्य उद्देश्य स्वीकृत सभी 357 रिचार्ज पिट्स का निर्माण निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण कराना है, ताकि आगामी वर्षा ऋतु में इनकी कार्यप्रणाली का अधिकतम लाभ जिले को मिल सके। ​मामले की जानकारी देते हुए जिला पंचायत धमतरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत जिले में 357 रिचार्ज पिट निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है। इन कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने के साथ गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। रिचार्ज पिट के माध्यम से वर्षा जल को स्थानीय स्तर पर संरक्षित कर भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा। संबंधित अधिकारियों और मैदानी अमले को सभी कार्य समय-सीमा में पूर्ण कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए है।वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत उठाया गया यह कदम धमतरी जिले को जल-सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक समन्वित और दूरदर्शी प्रयास सिद्ध हो रहा है।

धमतरी में भारी बारिश से उफान पर नदियां

04-Sep-2026
धमतरी (शोर संदेश) धमतरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित होने लगा है, वहीं क्षेत्र के सभी प्रमुख जलाशय अब पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। कैचमेंट एरिया से हो रही पानी की भारी आवक को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के तीन गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें से 3,360 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में बह रहा है, जबकि 1,410 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के रास्ते मुख्य नहर में प्रवाहित किया जा रहा है। 
मौसम विभाग द्वारा आगे भी बारिश की संभावना जताए जाने से महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है, जिसे देखते हुए कलेक्टर ने तटीय और निचले इलाकों में स्थित गांवों के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
वर्तमान में जिले के जलाशयों की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। मुरूमसिल्ली जलाशय अपनी क्षमता का 98.61 प्रतिशत भर चुका है और उसमें 362 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। वहीं गंगरेल जलाशय 97.40 प्रतिशत भरकर 3,365 क्यूसेक आवक दर्ज कर रहा है। इसके अलावा दुधावा जलाशय 86.86 प्रतिशत (437 क्यूसेक आवक) और सोंढूर जलाशय 69.25 प्रतिशत (167 क्यूसेक आवक) तक भर चुके हैं। जलाशयों में लगातार बढ़ते पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ही महानदी में जलप्रवाह बढ़ाया गया है।
बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर धमतरी ने अधिकारियों और मैदानी अमले को 24 घंटे सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी, नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास न जाएं तथा उफनती नदी को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। तटीय गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर बनाए गए राहत केंद्रों में पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल अधिकृत प्रशासनिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया गया है।
 

 


धमतरी में चलती स्कूल बस में लगी आग! 25 बच्चों समेत 28 लोगों की बाल-बाल बची जान

01-Sep-2026
धमतरी। जिले में मंगलवार को स्कूली बस में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसे के समय बस में 25 बच्चों, एक शिक्षक, ड्राइवर और हेल्पर समेत कुल 28 लोग सवार थे। बस से अचानक धुआं निकलता देख चालक ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए बस रोक दी। इसके बाद सभी बच्चों और शिक्षक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही देर में आग ने बस को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना पर दमकल और 112 की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। हादसे में सभी सुरक्षित हैं।
घटना अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम सेहराडबरी के पास की बताई जा रही है। बस बच्चों को लेकर जा रही थी, तभी अचानक उसमें से धुआं निकलने लगा। बस में धुआं देखकर बच्चों और शिक्षक के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
धुआं निकलता देख बस चालक ने तत्काल बस रोक दी। इसके बाद बिना देरी किए बस में सवार सभी बच्चों और शिक्षक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ ही देर में बस में आग फैल गई, लेकिन समय रहते बच्चों को बाहर निकाल लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और 112 की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने काफी मशक्कत के बाद बस में लगी आग पर काबू पा लिया। आग पूरी तरह बुझा दी गई। हादसे में किसी बच्चे या शिक्षक के घायल होने की सूचना नहीं है।
बताया जा रहा है कि यह बस विद्या कुंज स्कूल की है। हादसे के बाद सभी बच्चों और शिक्षक को दूसरी बस की मदद से स्कूल पहुंचाया गया। सभी बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं। घटना के बाद बस में आग लगने के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है।

पशुपालन केसीसी से धमतरी के 93 पशुपालकों को मिली 98.62 लाख की वित्तीय संजीवनी

29-Aug-2026
 धमतरी (शोर संदेश)  धमतरी जिले में पशुपालन अब केवल जीवनयापन का सहायक जरिया नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और मुनाफा देने वाले मुख्य व्यवसाय के रूप में उभर रहा है। पशुपालकों को समय पर आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए जिले में पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना का प्रभावी ढंग से संचालन किया जा रहा है। कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन और पशुधन विकास विभाग के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 93 पशुपालकों के कुल 98.62 लाख रूपए के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस पहल से पशुपालकों को अपनी दैनिक वित्तीय जरूरतों के लिए महंगे अनौपचारिक कर्ज पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।
​इस योजना की सफलता में बैंकिंग संस्थाओं का विशेष योगदान रहा है, जिसमें जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने सबसे आगे बढ़कर 82 पशुपालकों को 83.92 लाख रूपए से अधिक का ऋण प्रदान किया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक ने 5 पशुपालकों को 5.60 लाख रूपए, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4 पशुपालकों को, यूको बैंक ने 1 हितग्राही को 2 लाख रूपए और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 1 हितग्राही को 1.50 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया है। समय पर पूंजी उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालक अब पशुओं के लिए बेहतर दाना-पानी, जरूरी दवाइयां, टीकाकरण और चिकित्सा जैसी देखभाल बिना किसी आर्थिक तंगी के कर पा रहे हैं।
​कलेक्टर ने योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का मुख्य आधार बताते हुए मैदानी अमले को गांव-गांव जाकर हर पात्र हितग्राही तक पहुंचने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देशों पर अमल करते हुए पशुधन विकास विभाग की टीम ग्रामीणों से सीधे संपर्क कर उन्हें योजना की पात्रता, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दे रही है। ऋण सुविधा के साथ-साथ पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वित्तीय मदद और तकनीकी मार्गदर्शन के इस बेहतर समन्वय से जिले में दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आय में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है, जिससे ग्रामीण परिवार आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।

 


एआई और डिजिटल स्किल्स से भविष्य के रोजगार के लिए तैयार होंगे धमतरी के युवा

24-Aug-2026
धमतरी (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला प्रशासन ने मई 2026 में युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और डिजिटल स्किल्स में दक्ष बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्रांति के इस दौर में धमतरी के युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए जिला प्रशासन ने एक दूरदर्शी पहल की है। कलेक्टर की प्रेरणा से जिले के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कन्या महाविद्यालय और पॉलिटेक्निक कॉलेज में विशेष तकनीकी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इन कार्यशालाओं में करीब 1500 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेकर एआई के व्यावहारिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक इस्तेमाल के गुर सीखे।
​कन्या महाविद्यालय और पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्र-छात्राओं से आत्मीय संवाद करते हुए कलेक्टर ने कहा कि आने वाला समय पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी दक्षता का है। आज केवल पारंपरिक डिग्रियों तक सीमित रहना काफी नहीं है, बल्कि वक्त के साथ अपनी स्किल को अपडेट करना ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जो युवा सीखने की ललक बनाए रखेंगे और तकनीक को अपने कौशल में शामिल करेंगे, उनके सामने आने वाले दिनों में रोजगार, स्वरोजगार और नवाचार के नए क्षितिज खुलेंगे। एआई के सही उपयोग पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि तकनीक का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई को आसान बनाने, विषयों को गहराई से समझने और अपनी रचनात्मक क्षमता को निखारने के लिए जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर ने छात्राओं को आत्मनिर्भरता का संदेश देते हुए  ‘अजीम प्रेमजी स्कॉलरशिप’ की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पात्र छात्राओं को हर साल 30 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है, जिसका उपयोग वे अपनी ट्यूशन फीस और कौशल विकास के लिए कर सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने आदिवासी विकास विभाग की योजनाओं और इंटरनेट पर मौजूद निशुल्क ऑनलाइन कोर्सेज का पूरा फायदा उठाने का आह्वान किया।
​इस विशेष आयोजन के दौरान नगर निगम आयुक्त, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य, प्राध्यापक और भारी संख्या में युवा विद्यार्थी उपस्थित रहे।
 

विशेष लेख : स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख निर्माण में धमतरी जिला प्रदेश में अव्वल

19-Aug-2026
धमतरी, 19 अगस्त 2026 ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर निवासरत परिवारों को उनकी भूमि पर स्वामित्व का वैधानिक अधिकार प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना का जिले में प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के तहत राजस्व ग्रामीण आबादी (प्रचलित एवं सुरक्षित) भूमि में निवासरत पात्र परिवारों को उनके अधिकारों का अभिलेखीकरण कर अधिकार अभिलेख वितरित किए जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण अधिकार अभिलेख निर्माण एवं वितरण के क्षेत्र में धमतरी जिला प्रदेश में अग्रणी रहा है।
स्वामित्व योजना के अंतर्गत जिले के 501 राजस्व ग्रामों में ड्रोन फ्लाई कराया गया है। ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भारत सरकार की कार्यान्वयन एजेंसी सर्वे ऑफ इंडिया (ैव्प्) से प्राप्त मानचित्रों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इस प्रक्रिया में मैदानी स्तर पर स्थल सत्यापन, पात्र परिवारों की पहचान तथा आबादी भूमि से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया गया, ताकि तैयार किए जा रहे अधिकार अभिलेख शुद्ध, प्रमाणिक एवं त्रुटिरहित हों।
 योजना के तहत अब तक 312 ग्रामों के अभिलेख पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं तथा 50 हजार से अधिक अधिकार अभिलेखों का वितरण पात्र हितग्राहियों को किया गया है। इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी आबादी भूमि के संबंध में स्पष्ट एवं वैधानिक अभिलेख प्राप्त हुए हैं। अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण उपलब्ध होने के साथ ही भविष्य में बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने, संपत्ति संबंधी लेन-देन तथा अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं में सुविधा प्राप्त होगी।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिवत अधिकार प्रदान करने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि जिले में योजना के क्रियान्वयन में अभिलेखों की शुद्धता, पारदर्शिता और समयबद्धता को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शेष ग्रामों में भी आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर पात्र परिवारों को अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराने तथा किसी भी स्तर पर त्रुटि की गुंजाइश नहीं रखने के निर्देश दिए हैं।
स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी विवादों में कमी लाने, भूमि अभिलेखों को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने तथा ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के माध्यम से आर्थिक अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। जिले में योजना के तहत की जा रही कार्यवाही ग्रामीण विकास एवं सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



 

नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन से संवरी तकदीर, जीवनलाल बने डेयरी के रोल मॉडल

18-Aug-2026
धमतरी (शोर संदेश)।दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और आधुनिक वैज्ञानिक सोच यदि एक साथ मिल जाएं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चमत्कार की इबारत लिखी जा सकती है। इसे सच कर दिखाया है धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम मुरा निवासी प्रगतिशील पशुपालक जीवनलाल साहू ने। कभी मात्र दो गाय और दो भैंसों के साथ शुरू हुआ उनका डेयरी व्यवसाय आज पूरे क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक पशुपालन का एक मिसाल (रोल मॉडल) बन चुका है।
शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी और अनेक व्यावहारिक चुनौतियां थीं। हालांकि, जीवनलाल जी ने पारंपरिक ढर्रे पर चलने के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का फैसला किया। उन्होंने समझा कि पशुपालन में मुनाफा बढ़ाने की मुख्य कुंजी 'नस्ल सुधार' और 'उचित प्रबंधन' में छिपी है। ​उन्होंने उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली साहिवाल, गिर और मुर्रा नस्ल के पशुओं का पालन शुरू किया। इसके साथ ही, स्थानीय देशी गायों में पशुधन विकास विभाग के सहयोग से कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का उपयोग कर उन्नत नस्ल की संतति तैयार की।
वर्तमान में उनके डेयरी फार्म में 10 दुधारू एचएफ एवं जर्सी नस्ल की गायें हैं। कृत्रिम गर्भाधान से जन्मी उन्नत नस्ल की बछियों और बछड़ों को तैयार कर बेचने से ही उन्हें हर साल 1.50  से 2.00 लाख रूपए की अतिरिक्त आय मिल जाती है।
जीवनलाल साहू के डेयरी फार्म में आज रोजाना औसतन 70 लीटर दूध का उत्पादन होता है। उत्पादित दूध की आपूर्ति वे शासकीय 'देवभोग सहकारी दुग्ध संघ' तथा स्थानीय निजी होटलों में सुचारू रूप से करते हैं। ​दूध बिक्री से उनका मासिक आय 1 से 1 लाख 50 हजार रुपए की आय होती है। पशुपालन और इससे जुड़ी सभी गतिविधियों से लगभग 3 से 3 लाख 50 हजार रुपए तक वार्षिक आय हो रही है।
​पशुपालन से अर्जित इस आय ने जीवनलाल जी के जीवन में व्यापक सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने अपने दोनों बच्चों का दाखिला निजी विद्यालय में कराकर उन्हें बेहतर शिक्षा दिलाई।मिट्टी के ढांचे से निकलकर परिवार के लिए आधुनिक पक्का मकान बनवाया। दूध के दैनिक परिवहन और कृषि कार्यों की सुगमता के लिए मोटरसाइकिल खरीदी।
जीवनलाल साहू की यह सफलता साबित करती है कि अगर पशुपालक आधुनिक तकनीकों—जैसे नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार और स्वास्थ्य प्रबंधन—को अपनाएं, तो सीमित जमीन और संसाधनों के बावजूद एक समृद्ध आजीविका का निर्माण किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि राज्य के अन्य पशुपालकों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक डेयरी व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
 

जीजामगांव आईटीआई में इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेड का पहला बैच शुरू, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर

13-Aug-2026
धमतरी (शोर संदेश)।  जिले में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवीन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), जीजामगांव में सत्र 2026-27 से पहली बार मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (Mechanic Electric Vehicle) ट्रेड का प्रथम बैच प्रारंभ किया गया है। यह इस संस्था का भी प्रथम प्रशिक्षण सत्र होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए यह ट्रेड युवाओं के लिए रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर साबित होगा।
मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल दो वर्षीय पाठ्यक्रम है, जिसमें प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक के साथ-साथ बैटरी प्रबंधन प्रणाली, मोटर कंट्रोल, चार्जिंग सिस्टम, वाहन सर्विसिंग, फॉल्ट डायग्नोसिस सहित आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं उद्योग आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ट्रेड वर्तमान में छत्तीसगढ़ के चुनिंदा पांच शासकीय आईटीआई संस्थानों में ही संचालित है। ऐसे में जीजामगांव आईटीआई में इस ट्रेड का प्रारंभ जिले के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
 इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते चलन के साथ ई-व्हीकल कंपनियों, अधिकृत सर्विस सेंटर, चार्जिंग स्टेशन, बैटरी से संबंधित सेवा एवं निर्माण इकाइयों तथा ऑटोमोबाइल क्षेत्र में प्रशिक्षित तकनीशियनों की मांग बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा प्रशिक्षित युवा स्वयं का सर्विस सेंटर अथवा संबंधित तकनीकी सेवा प्रारंभ कर स्वरोजगार भी स्थापित कर सकेंगे।
जीजामगांव क्षेत्र में शासन द्वारा आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ रोजगार, कौशल और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। क्षेत्र में फॉरेस्ट पार्क, फूड पार्क सहित विभिन्न विकास एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे परिवेश में आधुनिक तकनीकी कौशल से युक्त स्थानीय युवाओं को तैयार करना क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आईटीआई में नए ट्रेड का संचालन युवाओं को स्थानीय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के साथ उन्हें बदलती औद्योगिक एवं तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा। नवीन आईटीआई  भवन के लिए जमीन का चिन्हाकित कर ली गयी है । कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने पिछले माह जमीन का निरीक्षण किया था । 
जिला धमतरी की नोडल संस्था शासकीय आईटीआई कुरूद के प्राचार्य योगेश देवांगन ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस नवीन ट्रेड में प्रवेश लें। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण युवाओं को रोजगार के बदलते स्वरूप के अनुरूप तैयार करने में सहायक होगा और वे अपने कौशल के आधार पर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।
आईटीआई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन एवं चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद नियमानुसार मेरिट एवं चयन सूची जारी कर प्रवेश की कार्यवाही की जाएगी। ट्रेड एवं प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी शासकीय आईटीआई कुरूद से संपर्क कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि  पिछले साल 23 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कुरूद विधानसभा क्षेत्र के ग्राम करेली बड़ी में आयोजित राज्य स्तरीय महतारी सदन लोकार्पण समारोह में जिले को 83 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी थी । इसमें ग्राम करेली बड़ी में महाविद्यालय की स्थापना, कुरूद के जी. जामगांव में नवीन आईटीआई, ग्राम पंचायत करेली बड़ी एवं ग्राम खट्टी को मिलाकर नगर पंचायत का दर्जा, कुरूद एवं भखारा में शहरी जल प्रदाय योजना का विस्तार, भेण्डरी से बरोंडा एनीकट निर्माण, कुरूद को नगरपालिका परिषद का दर्जा, भखारा एवं कुरूद में विकास कार्यों हेतु राशि और खट्टी एनीकट मरम्मत की स्वीकृति शामिल थी ।

पशुपालकों को सस्ती दर पर मिलेंगी जेनेरिक पशु औषधियां, धमतरी में PAVK की पहल

07-Aug-2026
धमतरी(शोर संदेश)  पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित Livestock Health and Disease Control Programme (LHDCP) के अंतर्गत पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती पशु औषधियां उपलब्ध कराने की दिशा में जिले में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में पशु औषधि विक्रय केंद्र (P.A.V.K.- Pashu Aushadhi Vikray Kendra) की स्थापना के लिए प्राप्त आवेदन के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण कर लिया गया है।
संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं, छत्तीसगढ़, रायपुर से प्राप्त निर्देशों के परिपालन में विकासखंड धमतरी से प्राप्त PAVK आवेदन पोर्टल पर स्वीकृत (Accepted) होने के पश्चात आवेदन की अर्हता पूर्ण करने के लिए प्रस्तुत आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन 6 अगस्त 2026 को उपसंचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला धमतरी द्वारा किया गया। इस दौरान PAVK आवेदक देवेश कुमार सिन्हा, सिन्हा कृषि केंद्र (पीएम किसान समृद्धि केंद्र), ग्राम कोलियरी, विकासखंड धमतरी तथा फार्मासिस्ट प्रतीक वाटवानी, धमतरी उपस्थित रहे।
पशुपालकों को सस्ती दर पर मिलेंगी जेनेरिक पशु औषधियां  उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक पोर्टल पर स्वीकृत आवेदनों में दस्तावेज सत्यापन के चरण तक पहुंचने वाला यह एकमात्र आवेदन है, जिससे जिले को इस पहल में अग्रणी अवसर मिला है।
PAVK का संचालन प्रारंभ होने के बाद विकासखंड धमतरी क्षेत्र के पशुपालकों को जेनेरिक पशु औषधियां सस्ती एवं उचित दरों पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। इससे पशुओं के उपचार में होने वाले खर्च को कम करने, समय पर दवाइयां उपलब्ध कराने तथा पशुधन के स्वास्थ्य संरक्षण में मदद मिलेगी। साथ ही पशुपालकों को आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाओं और औषधियों के लिए दूरस्थ क्षेत्रों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी |
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में पशुपालकों को बेहतर एवं सुलभ पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। पशु औषधि विक्रय केंद्र प्रारंभ होने से पशुपालकों को आवश्यक जेनेरिक पशु औषधियां उचित एवं सस्ती दरों पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। इससे समय पर उपचार की सुविधा मिलने के साथ पशुपालकों के उपचार संबंधी खर्च में भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दवाइयों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना पशुपालकों की आय और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में उपयोगी कदम है। उन्होंने संबंधित विभाग को केंद्र के संचालन की प्रक्रिया निर्धारित मापदंडों के अनुरूप शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों को मिल सके।
  यह पहल जिले में पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पशुपालकों में पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा पशुधन आधारित आजीविका को और मजबूत करने में भी सहायता मिलेगी।

 


सामूहिक मेहनत से आत्मनिर्भरता की उड़ान, छिपली की महिलाओं ने रचा सफलता का मॉडल

07-Aug-2026
धमतरी।  (शोर संदेश) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम छिपली की स्वावलंबी महिला स्व-सहायता समूह ने उल्लेखनीय मिसाल कायम की है। कभी छोटे-छोटे संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बीच अपनी आजीविका शुरू करने वाली समूह की महिलाएं आज बकरी पालन सहित विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना रही हैं।
समूह की अध्यक्ष दुर्गेश नंदनी साहू बताती हैं कि समूह की शुरुआत चुनौतियों से भरी रही। सबसे पहले सभी महिलाओं को एकजुट कर सामूहिक रूप से काम करने की भावना विकसित करना चुनौती थी। आपसी समन्वय, विश्वास और निरंतर प्रयासों से संगठन मजबूत हुआ और महिलाओं ने बकरी पालन को आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया। शुरुआती दौर में कभी लाभ तो कभी नुकसान की परिस्थितियां भी आईं, लेकिन महिलाओं ने हार नहीं मानी। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपनी गतिविधियों को विस्तार दिया।
आज यही मेहनत उनकी सफलता की पहचान बन गई है। समूह की प्रत्येक दीदी लगभग 8 से 10 हजार रुपए प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर रही हैं। बकरी पालन के क्षेत्र में समूह पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बेहतर प्रबंधन, पशुओं की देखभाल, विभागीय मार्गदर्शन और सामूहिक निर्णयों ने समूह को मजबूती प्रदान की है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि “गांवों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छिपली की महिलाओं ने सामूहिकता, मेहनत और नवाचार के माध्यम से यह साबित किया है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं अपनी आजीविका को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि ऐसे समूहों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, बाजार और आवश्यक विभागीय सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो और वे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनें।”
समूह ने अपनी आजीविका को केवल बकरी पालन तक सीमित नहीं रखा। महिलाएं फलदार वृक्षों की खेती, दलहन-तिलहन फसलों का उत्पादन, मखाना उत्पादन के लिए तालाब की तैयारी, बकरी एवं गाय पालन से दुग्ध उत्पादन, मिनी राइस मिल तथा कैंटीन संचालन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ी हैं। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समूह ने आय के अनेक स्रोत विकसित किए हैं।
दुर्गेश नंदनी साहू कहती हैं कि “कभी हम अपने सपनों को लेकर असमंजस में थे। कई बार लाभ हुआ तो कई बार नुकसान भी उठाना पड़ा, लेकिन हमने साथ मिलकर आगे बढ़ना नहीं छोड़ा। पशुपालन विभाग, जिला प्रशासन और अधिकारियों के सकारात्मक सहयोग ने हमारा आत्मविश्वास बढ़ाया। आज हमें गर्व है कि हमारे समूह की पहचान जिले से लेकर राज्य स्तर तक बनी है।”
समूह की उपलब्धियों को व्यापक पहचान भी मिली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों सम्मानित होने का अवसर समूह की महिलाओं के लिए गौरव का क्षण रहा। यह सम्मान उनके संघर्ष और सामूहिक प्रयासों की सफलता का प्रतीक है।
छिपली की इन महिलाओं की कहानी बताती है कि जब महिलाएं एकजुट होकर आगे बढ़ती हैं, तो सीमित संसाधन भी बड़े अवसर में बदल जाते हैं। आज उनका समूह न केवल आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण, सामूहिक उद्यम और बहुआयामी आजीविका का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

 



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