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Dhamtari

मखाना की खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं धमतरी की महिलाएं

29-Oct-2026
धमतरी, 29 अक्टूबर 2026 धमतरी जिले में कृषि विविधीकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में मखाना की खेती नई संभावनाएं पैदा कर रही है। तालाबों में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल अब परिणाम देने लगी है। इसी कड़ी में ग्राम छाती और डांडेसरा में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 29 एकड़ क्षेत्र में उत्पादित मखाना का संग्रहण शुरू हो गया है। साथ ही, महिलाओं को मखाना के संग्रहण और संग्रहण-पश्चात प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। इससे उपज की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
केंद्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना के तहत वर्ष 2025-26 में धमतरी जिले को तालाबों में मखाना की खेती के लिए 165 एकड़ का लक्ष्य दिया गया था। इसके मुकाबले जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में 105 एकड़ क्षेत्र में मखाना की खेती शुरू की गई। ग्राम राखी, छाती, डांडेसरा और पीपरछेड़ी के साथ नगरी विकासखंड के ग्राम सांकरा में भी इस फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ग्राम छाती और डांडेसरा में शैलपुत्री स्व-सहायता समूह तथा नई किरण स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए 26 अक्टूबर को मखाना संग्रहण की शुरुआत और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर ग्राम छाती-सेनचुवा की सरपंच दानेश्वरी साहू, जितेन्द्र कुमार साहू, पंचगण, कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ दीपिका चंद्रवंशी, उप संचालक उद्यानिकी पूजा कश्यप साहू, उद्यान विकास अधिकारी राहुल साहू और ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी नर्मदा प्रसाद भारती उपस्थित रहे।
उप संचालक उद्यानिकी पूजा कश्यप साहू ने बताया कि महिला समूहों को कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में आगामी दिनों में मखाना के संग्रहण-पश्चात प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में उपज की उचित देखभाल, प्रसंस्करण और गुणवत्ता बनाए रखने की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, ताकि महिलाएं इस गतिविधि को आजीविका और उद्यमिता के रूप में आगे बढ़ा सकें।
मखाना की कटाई मुख्य रूप से तीन चरणों में की जाती है। पहली कटाई को लहसर कहा जाता है। इसमें लगभग 70 प्रतिशत मखाना निकाल लिया जाता है। इस काम के लिए श्रमिकों को सामान्यतः प्रति किलोग्राम के आधार पर मजदूरी दी जाती है। इसके बाद दूसरी और तीसरी कटाई मरकट और कर्कट कहलाती है। इन चरणों में बचे हुए लगभग 30 प्रतिशत बीज निकाले जाते हैं, जिसके लिए अधिक मेहनत और समय की जरूरत होती है।
तालाब से मखाना के बीज निकालने के बाद उन्हें अच्छी तरह साफ किया जाता है। काले बीजों को धोकर लगभग 2 से 30 दिनों तक तेज धूप में सुखाया जाता है, ताकि उनकी नमी कम हो सके। इसके बाद बीजों को भट्ठी या मिट्टी की कढ़ाई में भुना जाता है। भुनाई के बाद लकड़ी की थापी से बीजों को फोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया से बीज के अंदर का सफेद और कुरकुरा मखाना बाहर निकलता है, जिसे स्थानीय रूप से लावा कहा जाता है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप कृषि की नई गतिविधियों को बढ़ावा देना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। मखाना की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम बन सकती है। इसके लिए उत्पादन के साथ वैज्ञानिक तकनीक, प्रसंस्करण, गुणवत्ता और बाजार से जुड़ाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़े और वे आत्मनिर्भर आजीविका की दिशा में आगे बढ़ें।
मखाना उत्पादन की यह पहल धमतरी जिले में पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ नए विकल्प जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उचित प्रशिक्षण, गुणवत्ता आधारित प्रसंस्करण और बाजार से बेहतर जुड़ाव मिलने पर यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और सामूहिक उद्यमिता के नए अवसर पैदा करने में सहायक होगी।  
 

 


गंगरेल में संकट के बीच मददगार बनी ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन की टीम, बबलू निषाद को सुरक्षित पहुंचाया गांव

29-Oct-2026
धमतरी। ( शोर संदेश )  गंगरेल जलाशय में अचानक बदले मौसम और तेज लहरों के बीच संकट में फंसे एक मछुआरे के लिए गंगरेल ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ की टीम मददगार साबित हुई। टीम ने तत्परता दिखाते हुए ग्राम बरारी निवासी बबलू निषाद को सुरक्षित उनके गांव पहुंचाया। संकट की इस घड़ी में टीम की सक्रियता, स्थानीय लोगों की सूचना और जिला प्रशासन के सहयोग से एक संभावित हादसे को गंभीर परिणामों में बदलने से बचाने में मदद मिली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरारी निवासी बबलू निषाद पेशे से मछुआरे हैं। बीते दिनों वे लकड़ी चुनने के लिए नाव से ठेमली आइलैंड गए थे। इसी दौरान मौसम में बदलाव और हवा की गति बढ़ने से जलाशय में लहरें तेज हो गईं। परिस्थितियां प्रतिकूल होते देख उन्हें नाव पलटने का अंदेशा हुआ। उन्होंने अपने परिवार से संपर्क कर स्थिति की जानकारी दी, लेकिन इसी बीच नाव अनियंत्रित होकर पलट गई।
मुश्किल परिस्थितियों में भी बबलू ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने लगभग 100 मीटर तक तैरकर दूसरे टापू पर पहुंचकर आश्रय लिया। अंधेरा होने के कारण जंगल में रास्ता तलाशना भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया। उधर, परिवार के सदस्य और ग्रामीण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। उनके द्वारा दी गई सूचना के बाद गंगरेल ब्लू एडवेंचर स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ की टीम सक्रिय हुई। टीम ने वाटर एम्बुलेंस की मदद से बबलू को सुरक्षित बाहर निकाला और उनके गांव पहुंचाया। इस अभियान में सत्येंद्र शिव, राजेश मुकेश सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जिला प्रशासन के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्यों को मिला संबल
गंगरेल जलाशय जैसे विस्तृत जलक्षेत्र में अचानक उत्पन्न होने वाली आपात परिस्थितियों में त्वरित सूचना, आपसी समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है। इस घटना में स्थानीय लोगों की सतर्कता और बचाव दल की तत्परता के साथ जिला प्रशासन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। ऐसे समन्वित प्रयास आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने और उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने में सहायक होते हैं।
यह घटना संदेश देती है कि जलाशय में नाव से आवागमन के दौरान मौसम की स्थिति पर विशेष ध्यान देना, सुरक्षा के आवश्यक उपाय अपनाना और प्रतिकूल परिस्थितियों में जोखिम लेने से बचना जरूरी है। समय पर मिली सूचना और सामूहिक प्रयासों से बबलू निषाद की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी।









 

ग्राम तुमड़ीबहार में महिलाओं को दिया गया शहद प्रसंस्करण का व्यावहारिक प्रशिक्षण

25-Oct-2026
धमतरी ।( शोर संदेश )  जिले के वनांचल क्षेत्र में महिलाओं को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में ग्राम तुमड़ीबहार, विकासखंड नगरी में महिलाओं को शहद प्रसंस्करण (हनी प्रोसेसिंग) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को शहद के प्रसंस्करण, गुणवत्ता बनाए रखने, सुरक्षित पैकेजिंग तथा विपणन के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी देकर स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. अमित सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को शहद प्रसंस्करण में उपयोग होने वाली मशीनों के संचालन, रखरखाव और उनके सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी गई। इसमें शहद गर्म करने, छानने, स्थिरीकरण तथा पैकेजिंग से संबंधित इकाइयों के संचालन का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। महिलाओं ने फिल्टर को जोड़ने, उसके सही उपयोग तथा सफाई की प्रक्रिया भी सीखी। इससे उन्हें शहद को स्वच्छ एवं व्यवस्थित तरीके से प्रसंस्कृत करने की तकनीकी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे पूर्व, 17 सितंबर 2026 को भी इसी प्रकार का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।
 उन्होंने  बताया कि शहद प्रसंस्करण का कौशल ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का एक उपयोगी माध्यम बन सकता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध शहद का उचित प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग और बाजार की मांग के अनुरूप विक्रय करने से उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सामूहिक रूप से यह गतिविधि अपनाकर स्थानीय बाजारों, दुकानों, मेलों तथा अन्य संभावित विक्रय माध्यमों तक अपनी पहुंच बना सकती हैं। इससे स्वरोजगार के अवसर सृजित होने के साथ परिवार की आय बढ़ाने और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
  कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा महिलाओं को व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण महिलाओं को स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने, उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी जानकारी का उपयोग आजीविका गतिविधियों में करने तथा उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
  इस प्रकार के कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं की क्षमताओं को निखारने, स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने और गांवों में रोजगार एवं आय के नए अवसर विकसित करने की दिशा में उपयोगी पहल हैं।

आईटीआई मेघा और सद्भाव रिन्यूएबल्स लिमिटेड के बीच कौशल प्रशिक्षण के लिए एमओयू

25-Oct-2026
धमतरी ।( शोर संदेश ) जिले के युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी रूप से दक्ष बनाने तथा उनके लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) मेघा, जिला धमतरी और सद्भाव रिन्यूएबल्स लिमिटेड, रायपुर के मध्य कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया है। एमओयू कलेक्टर अबिनाश मिश्रा एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा उपस्थित में  हुआ । आईटीआई, मेघा की प्राचार्य  भूमिका साहू और सद्भाव रिन्यूएबल्स लिमिटेड से ललित नाहटा थे । 
इस एमओयू के तहत आईटीआई मेघा के इलेक्ट्रिशियन ट्रेड के 20 तथा सोलर टेक्नीशियन ट्रेड के 40 प्रशिक्षणार्थियों सहित कुल 60 युवाओं को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप 150-150 घंटे का औद्योगिक प्रशिक्षण (ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग) प्रदान किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक कार्यस्थल पर उपयोग करने, आधुनिक तकनीकों को समझने तथा उद्योगों की कार्यप्रणाली से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि युवाओं को केवल शैक्षणिक एवं सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक कौशल और उद्योगों में काम करने का अनुभव उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उद्योगों के साथ प्रशिक्षण संस्थानों का समन्वय युवाओं को रोजगार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में सहायक होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से प्रशिक्षणार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उनकी तकनीकी दक्षता विकसित होगी और रोजगार के लिए उनकी तैयारी अधिक प्रभावी बनेगी। उन्होंने युवाओं को बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने तथा उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने कहा कि युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण देना आवश्यक है। आईटीआई मेघा और सद्भाव रिन्यूएबल्स लिमिटेड के बीच हुआ यह एमओयू प्रशिक्षणार्थियों को कार्यक्षेत्र का अनुभव प्रदान करने तथा उनकी तकनीकी दक्षताओं को निखारने में उपयोगी साबित होगा। इससे युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के साथ ही भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर भी मिल सकेंगे।
वर्तमान समय में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता की आवश्यकता बढ़ रही है। ऐसे में सोलर टेक्नीशियन और इलेक्ट्रिशियन ट्रेड के प्रशिक्षणार्थियों के लिए यह औद्योगिक प्रशिक्षण विशेष उपयोगी होगा। इसके माध्यम से वे विद्युत प्रणालियों, सौर ऊर्जा से संबंधित तकनीकी कार्यों तथा औद्योगिक कार्यप्रणाली की व्यावहारिक समझ विकसित कर सकेंगे। यह अनुभव उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठानों में रोजगार के अवसर तलाशने के साथ-साथ अपनी दक्षता के आधार पर स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित करने में भी मदद करेगा।
यह पहल जिले में कौशल विकास को उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने, युवाओं को कार्य के लिए तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण संस्थान और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से युवाओं को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा और वे बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित कर सकेंगे।

ग्राम पंचायत सिहावा में बालिका शौचालय निर्माण से स्वच्छता और सम्मान की नई पहल

24-Oct-2026
धमतरी।( शोर संदेश ) स्वच्छता केवल स्वस्थ जीवन का आधार नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसी भावना को साकार करते हुए धमतरी जिले में ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में सार्थक पहल की जा रही है। नगरी विकासखंड की ग्राम पंचायत सिहावा में वीबी-रामजी योजना के माध्यम से बालिका शौचालय का निर्माण ग्रामीण विकास की ऐसी ही सकारात्मक पहल है, जो बालिकाओं की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने के साथ स्वच्छता और गरिमापूर्ण वातावरण की अवधारणा को मजबूती प्रदान करती है।
बालिकाओं के लिए पृथक, स्वच्छ एवं सुविधाजनक शौचालय की उपलब्धता उनके स्वास्थ्य, निजता और आत्मसम्मान से सीधे जुड़ी है। ऐसी सुविधाएं दैनिक आवश्यकताओं की सहज पूर्ति सुनिश्चित करने के साथ व्यक्तिगत स्वच्छता की अच्छी आदतों को विकसित करने में भी सहायक होती हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास बालिकाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
ग्रामीण विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसी परिसंपत्तियों का सृजन करना है, जिनसे समुदाय को दीर्घकालिक लाभ मिले। वीबी-रामजी योजना के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयास इसी सोच को प्रतिबिंबित करते हैं। ग्राम पंचायत सिहावा में बालिका शौचालय का निर्माण स्वच्छता, सुविधा और जनहित को केंद्र में रखकर किए गए प्रयास का उदाहरण है।
शौचालय निर्माण का महत्व सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उसके नियमित उपयोग और साफ-सफाई की आदतों को प्रोत्साहित करने में भी निहित है। शौचालय परिसर की स्वच्छता, पर्याप्त पानी की उपलब्धता तथा उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोने जैसी आदतें संक्रमण से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार की आधारभूत सुविधाएं समुदाय में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं।
जिला पंचायत धमतरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने बताया कि जिले के कुरुद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धूमा एवं परसट्ठी तथा नगरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सिहावा में बालिका शौचालयों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय की सुविधा स्वच्छता, स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित वातावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे निर्माण कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक हैं।
ग्राम पंचायत सिहावा में बालिका शौचालय निर्माण इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित की गई छोटी-छोटी सुविधाएं भी सामाजिक बदलाव की मजबूत आधारशिला बन सकती हैं। यह पहल स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, बालिकाओं की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और ग्रामीण विकास को अधिक समावेशी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 


धमतरी शहर में AI आधारित निगरानी से मजबूत होगी सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

23-Oct-2026
धमतरी। ( शोर संदेश )  धमतरी शहर में नागरिकों की सुरक्षा, सुगम यातायात और सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) विकसित किया जा रहा है। इसके तहत शहर के प्रमुख चौक-चौराहों एवं महत्वपूर्ण स्थानों पर आधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन पर नजर रखी जाएगी तथा नियमानुसार ई-चालान के जरिए कार्रवाई की जा सकेगी। महापौर रामू रोहरा की पहल पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के सहयोग से इस व्यवस्था को मूर्त रूप दिया जा रहा है। आगामी दिनों में नगर निगम क्षेत्र में इसके संचालन की तैयारी है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत अर्जुनी चौक, सिहावा चौक, मकई चौक, रत्नाबांधा चौक और अंबेडकर चौक सहित शहर के प्रमुख यातायात स्थलों पर कैमरे लगाए जाएंगे। इससे यातायात व्यवस्था की निगरानी, नियमों के उल्लंघन की पहचान तथा जरूरत के अनुसार त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी। साथ ही, शहर में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और पुलिस को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में भी यह प्रणाली उपयोगी होगी।
महापौर रामू रोहरा ने कहा कि धमतरी शहर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाना नगर निगम की प्राथमिकता है। आईसीसीसी की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जिला एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से विकसित की जा रही यह व्यवस्था यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने, नियमों के पालन को प्रोत्साहित करने और नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगी। हमारा प्रयास है कि शहरवासियों को सुरक्षित आवागमन का बेहतर वातावरण मिले।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग शहरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आईसीसीसी के माध्यम से प्रमुख चौराहों की निगरानी और यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, यातायात नियमों के प्रति नागरिकों को जागरूक करने और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करेंगे।
पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने कहा कि यातायात नियमों का पालन सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और नागरिकों की जान सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। AI आधारित कैमरा प्रणाली से नियमों के उल्लंघन की पहचान और ई-चालान के माध्यम से नियमानुसार कार्रवाई में सहायता मिलेगी। इससे वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ेगी। पुलिस का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक कर सुरक्षित यातायात संस्कृति विकसित करना भी है।
आईसीसीसी के प्रभावी संचालन से धमतरी में तकनीक आधारित शहरी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल सुरक्षित यातायात, बेहतर कानून-व्यवस्था और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों का सर्वोच्च प्राथमिकता से करें निराकरण : कलेक्टर अबिनाश मिश्रा

22-Oct-2026
धमतरी।( शोर संदेश )  कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों सहित विभिन्न विभागीय योजनाओं एवं शासकीय कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें। विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना एवं राजस्व विभाग से संबंधित लंबित प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतें आम नागरिकों की समस्याओं और अपेक्षाओं से जुड़ी होती हैं। इसलिए अधिकारी शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें। प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रकरणों में पात्र हितग्राहियों की समस्याओं, आवास निर्माण एवं योजना से संबंधित शिकायतों का परीक्षण कर नियमानुसार निराकरण किया जाए। इसी प्रकार राजस्व संबंधी मामलों में अनावश्यक विलंब न हो तथा प्रकरणों का नियमानुसार समय पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा कर निराकरण की प्रगति पर सतत निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।
बैठक में कलेक्टर ने कृत्रिम गर्भाधान, पशु उपचार, बैंक संबंधी प्रकरणों तथा एग्रीस्टेक की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने आगामी धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके अलावा मत्स्य पालन, मखाना उत्पादन तथा औषधीय फसलों का रकबा बढ़ाने सहित कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की प्रगति की जानकारी लेकर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
कलेक्टर मिश्रा ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 2 नवंबर 2026 को जिला मुख्यालय धमतरी में आयोजित होने वाले एक दिवसीय जिला स्तरीय राज्योत्सव की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों का आपसी समन्वय से निर्वहन करते हुए सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
राज्योत्सव में विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष प्रदर्शनी की मुख्य थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ होगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विभागीय स्टॉलों में योजनाओं की जानकारी आकर्षक, सुव्यवस्थित एवं जनोपयोगी ढंग से प्रस्तुत की जाए। स्टॉलों में एकरूपता बनाए रखने के लिए समान डिजाइन एवं आकार के फ्लेक्स लगाए जाएं। साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने आयोजन स्थल पर मंच, बैठक व्यवस्था, विद्युत, साउंड सिस्टम, पेयजल, स्वच्छता, पार्किंग एवं सुरक्षा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने को कहा। स्कूल एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शालीन एवं गरिमामय रखने तथा आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। दर्शकों, अतिथियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के लिए समुचित बैठक व्यवस्था के साथ स्वास्थ्य सेवाएं, एम्बुलेंस एवं अन्य आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध रखने पर भी जोर दिया।
राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 1 से 3 नवंबर 2026 तक प्रतिदिन रात्रि में जिला मुख्यालय के शासकीय भवनों एवं अन्य स्थलों पर आकर्षक रोशनी की जाएगी। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को प्रकाश व्यवस्था के साथ ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की थीम को भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। निजी संस्थानों को भी स्थापना दिवस के अवसर पर भवनों में रोशनी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पर होने वाला व्यय संबंधित प्रशासकीय विभाग अपने विभागीय बजट से वहन करेंगे।

कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विकास उपलब्धियों को जनसामान्य के समक्ष प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय एवं नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाया जाए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर इंदिरा देवहारी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

 


विशेष लेख : सामुदायिक डबरी निर्माण से जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया आधार

21-Oct-2026
धमतरी, 21 अक्टूबर 2026 जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका के साधनों को मजबूत बनाने की दिशा में सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों को महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में 34 सामुदायिक डबरी निर्माण जिनकी स्वीकृत राशि - 172.13 लाख रुपए महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत संचालित इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन की क्षमता बढ़ाने के साथ ही कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य केवल जल संचयन तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग ग्रामीण आवश्यकताओं और आजीविका संवर्धन से जोड़ना भी है।

वर्षा जल संचयन से जल उपलब्धता बढ़ाने की पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और अन्य गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। विशेषकर वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले किसानों के लिए जल संरक्षण की संरचनाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं। सामुदायिक डबरी के माध्यम से वर्षा जल को एकत्रित कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उसका उपयोग किया जा सकता है। इससे जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ ही पानी की उपलब्धता के वैकल्पिक साधन विकसित करने में सहायता मिलेगी।
सामुदायिक डबरी का महत्व इस बात में भी है कि एक ही जल संरचना का लाभ नियमानुसार अनेक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है। सामूहिक उपयोग की व्यवस्था से जल संसाधनों के प्रति साझा जिम्मेदारी विकसित होती है और ग्रामीण समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभा सकता है।

कृषि एवं आजीविका के विविध अवसरों को मिलेगा प्रोत्साहन

सामुदायिक डबरी में संचित जल का उपयोग स्थानीय परिस्थितियों, जल उपलब्धता और तकनीकी उपयुक्तता के आधार पर कृषि एवं अन्य अनुमेय गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इससे किसानों को खेती की बेहतर योजना बनाने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहयोग मिल सकता है।
जहां पर्याप्त जल उपलब्धता, उपयुक्त परिस्थितियां और आवश्यक तकनीकी सुविधाएं हों, वहां नियमानुसार मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों की संभावनाओं का भी आकलन किया जा सकता है। इस प्रकार जल संरचनाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ जल उपलब्धता, संरचना की उपयोगिता और संबंधित विभागीय प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष ध्यान

सामुदायिक डबरी की दीर्घकालीन उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है। इसके साथ ही कार्यों की नियमित निगरानी, समयबद्ध पूर्णता तथा निर्माण के बाद उचित रखरखाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जल संरचनाओं का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उनके संरक्षण और संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो।
ग्रामीणों को जल संचयन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष है। सामुदायिक सहभागिता से जल संरचनाओं के संरक्षण की जिम्मेदारी मजबूत होगी और निर्मित परिसंपत्तियों का लाभ लंबे समय तक प्राप्त किया जा सकेगा।

ग्रामीण विकास को मिलेगी स्थायी मजबूती

वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत सामुदायिक डबरी निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संसाधनों के विकास और प्राकृतिक संपदा के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन संरचनाओं से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि आधारित आजीविका को सहयोग देने की संभावनाएं विकसित होंगी। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परिसंपत्तियों का निर्माण, उनका उचित रखरखाव और सामूहिक उपयोग ग्रामीण विकास को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकते हैं।

गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता पर जोर

इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा ने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल का संचयन बढ़ाने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जल संसाधनों की उपयोगिता विकसित करना है। ऐसी संरचनाएं वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। जनपद पंचायतों एवं मैदानी अमले को कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित समय-सीमा में निर्माण पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के उचित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को इनका दीर्घकालीन लाभ मिल सके।
सामुदायिक डबरी निर्माण की यह पहल जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को परस्पर जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। गुणवत्तापूर्ण निर्माण, जनभागीदारी और सुनियोजित उपयोग के माध्यम से ये संरचनाएं गांवों को जल संरक्षण के प्रति अधिक सक्षम बनाने तथा ग्रामीण परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं।


 

 


यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने सड़क पर उतरे एनसीसी, स्काउट गाइड और एनएसएस कैडेट

20-Oct-2026
धमतरी।( शोर संदेश ) सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने, यातायात नियमों के पालन को बढ़ावा देने और नागरिकों में सुरक्षित यातायात के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने के उद्देश्य से धमतरी शहर में यातायात पुलिस के सहयोग के लिए एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) स्काउट गाइड और एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) के कैडेट सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों, धार्मिक स्थलों पर कैडेट वाहन चालकों को यातायात नियमों की जानकारी देकर उनका पालन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
इस जागरूकता अभियान में विशेष रूप से कम उम्र के बच्चों और युवाओं को यातायात नियमों के प्रति सचेत किया जा रहा है। कैडेट उन्हें समझा रहे हैं कि नाबालिग अवस्था में वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह स्वयं और दूसरों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। अभिभावकों से भी अपील की जा रही है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को दोपहिया या चारपहिया वाहन चलाने की अनुमति न दें तथा उन्हें यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन चालकों और यात्रियों को सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने, यातायात संकेतों का पालन करने तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने की समझाइश दी जा रही है। कैडेट लोगों को यह भी बता रहे हैं कि सड़क पर थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए जल्दबाजी से बचना, सुरक्षित दूरी बनाए रखना और पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
एनसीसी और एनएसएस कैडेटों की सहभागिता से यातायात जागरूकता अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप मिल रहा है। युवा स्वयं आगे आकर नागरिकों को नियमों के प्रति जागरूक कर रहे हैं और समाज में जिम्मेदार नागरिकता का संदेश दे रहे हैं।
यातायात नियमों का पालन केवल चालानी कार्रवाई से बचने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं और दूसरों के जीवन की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। सामूहिक प्रयास, जागरूकता और अनुशासित व्यवहार से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। सुरक्षित यातायात के लिए प्रत्येक नागरिक की सजगता और जिम्मेदारी ही सबसे प्रभावी उपाय है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा  ने कहा कि “सड़क सुरक्षा समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यातायात नियमों का पालन कर हम न केवल अपनी, बल्कि दूसरों की जिंदगी भी सुरक्षित रख सकते हैं। एनसीसी और एनएसएस के कैडेटों द्वारा यातायात पुलिस के सहयोग से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना को मजबूत करेगा। अभिभावकों से भी अपील है कि वे नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने न दें और स्वयं यातायात नियमों का पालन कर उनके सामने आदर्श प्रस्तुत करें। हमारा उद्देश्य जनजागरूकता और जनभागीदारी के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।”
“सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही है। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाना, निर्धारित गति सीमा का पालन करना और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करना बेहद जरूरी है। नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना उनके साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी जोखिम पैदा करता है। एनसीसी और एनएसएस के कैडेटों की सहभागिता से यातायात जागरूकता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से आम नागरिकों तक पहुंचेगा। सभी नागरिक यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित सड़क व्यवहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।”






 

दस साल बाद लौटेगी रायपुर-धमतरी रेल सेवा, 20 अक्टूबर से रायपुर-कुरूद के बीच दौड़ेंगी ट्रेनें

19-Oct-2026
धमतरी। रायपुर-अभनपुर-कुरूद के बीच बड़ी रेल लाइन पर यात्री ट्रेन चलने का बहुप्रतीक्षित सपना अब साकार होने जा रहा है। करीब दस साल के लंबे इंतजार के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन अवसर पर इस रेल सेवा का विधिवत शुभारंभ प्रस्तावित है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रायपुर-कुरूद और रावघाट-रायपुर रेल यात्री सेवा की शुरुआत करेंगे।
इस ऐतिहासिक अवसर पर रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिमंडल के सदस्य, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी और कुरूद विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति प्रस्तावित है। कार्यक्रम को लेकर रेलवे प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कुरूद रेलवे स्टेशन को भी सजाकर तैयार किया जा रहा है। रायपुर से कुरूद तक बड़ी रेल लाइन पर यात्री सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक सुविधाएं पूरी कर ली गई हैं। बीते दिनों इस रेल मार्ग पर ट्रेन चलाकर सफल ट्रायल भी किया गया था। पहले रेल सेवा का शुभारंभ 12 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन केंद्रीय रेल मंत्री के छत्तीसगढ़ दौरे का कार्यक्रम स्थगित होने के कारण इसे टाल दिया गया। अब नए कार्यक्रम के अनुसार 20 अक्टूबर को रेल सेवा शुरू करने की तैयारी है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल के प्रबंधक दयानंद ने रविवार काे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिमंडल के सदस्यों, सांसदों और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर को आमंत्रण भेजकर रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-7 पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया है। दस साल बाद फिर दौड़ेगी ट्रेन, क्षेत्रवासियों में उत्साह: छोटी रेल लाइन को बंद कर बड़ी रेल लाइन में बदलने की योजना के तहत वर्ष 2016 में रायपुर-धमतरी रेल सेवा बंद कर दी गई थी। इसके बाद से ही क्षेत्रवासी बड़ी रेल लाइन पर यात्री ट्रेन शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब लगभग दस साल बाद इस मार्ग पर रेल सेवा बहाल होने जा रही है। इससे रायपुर, अभनपुर और कुरूद सहित आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। ट्रेन शुरू होने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और रोजाना रायपुर आने-जाने वाले यात्रियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
रायपुर-कुरूद रेल सेवा की बहाली और बड़ी रेल लाइन के विस्तार को लेकर कुरूद विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर लगातार प्रयासरत रहे हैं। बताया जाता है कि कुरूद प्रवास के दौरान उन्होंने तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष इस रेल मार्ग को लेकर मांग रखी थी। अब बड़ी रेल लाइन का काम पूरा होने और यात्री सेवा शुरू करने की तैयारी के साथ क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा समाप्त होने जा रही है। रायपुर-कुरूद रेल सेवा का शुभारंभ न केवल क्षेत्र की परिवहन सुविधा को मजबूत करेगा, बल्कि धमतरी अंचल के विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जगाएगा।
 


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