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Bastar

शाह बोले- बस्तर बनेगा देश का सबसे विकसित संभाग

20-May-2026
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद के खात्मे का टारगेट हासिल कर लिया गया।
बस्तर के नक्सल मुक्त होने के बाद 70 कैंपों में से लगभग एक-तिहाई कैंपों को ‘वीर शहीद गुंडाधर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
गृहमंत्री ने आगे कहा कि हर आदिवासी महिला को पशुपालन से जोड़ने की योजना है। बस्तर के हर आदिवासी नागरिक को एक गाय और एक भैंस देंगे। 6 महीने में बस्तर में बड़ा डेयरी नेटवर्क बनेगा।
बैठक में 4 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जगदलपुर में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए।
बैठक में राज्यों के विकास के साथ-साथ गंभीर सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर कड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में चारों राज्यों में अपराध नियंत्रण, विशेषकर महिलाओं के उत्पीड़न और रेप जैसे मामलों पर जल्द फैसले लेने पर चर्चा की गई।

400 सुरक्षा कैंप बनेगे सेवा केंद्र, हर आदिवासी परिवार तक पहुंचेगी सरकारी सुविधा- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

19-May-2026
जगदलपुर (शोर संदेश)। बस्तर से नक्सलवाद के पूरी तरह खात्मे के बाद पहली बार यहां पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में शांति स्थापना का श्रेय जवानों के पराक्रम, आदिवासियों के अटूट विश्वास और मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और कोबरा के जवानों ने जिस अद्भुत साहस के साथ कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाया, उसी का परिणाम है कि आज बस्तर हिंसा के दौर से उबरकर विकास की एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने दो दिवसीय बस्तर दौरे की शुरुआत बस्तर के महान आदिवासी जननायक वीर शहीद गुंडाधुर की जन्मस्थली नेतानार से की। यहां उन्होंने शहीद गुंडाधुर को नमन करने के बाद सीआरपीएफ कैंप में 'सेवा डेरा' का शुभारंभ किया। दौरे का सबसे संवेदनशील और भावुक क्षण आसना स्थित बादल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला।
यहां गृहमंत्री शाह ने नक्सल पीड़ितों और जवानों से सीधा संवाद किया। कर्रेगुट्टा के अभियानों को याद करते हुए शाह ने कहा कि हमारे जांबाज जवानों ने 45 डिग्री के भीषण तापमान में भी लगातार आपरेशनों को अंजाम दिया और नक्सलियों को पहाड़ों से नीचे उतरने पर मजबूर कर दिया। इसी रणनीति के कारण बड़े पैमाने पर नक्सलियों के सरेंडर और एनकाउंटर का दौर शुरू हुआ। इस बार गृहमंत्री के बस्तर दौरे का मिजाज बदला हुआ था। इससे पहले वे जब भी बस्तर आते थे, तो उनके संबोधन के केंद्र में नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प होता था, लेकिन इस बार उन्होंने बस्तरवासियों को विकसित बस्तर का संकल्प दिलाया। उन्होंने भरोसा दिया कि नक्सलियों ने पिछले 50 वर्षों में बस्तर को जो भी नुकसान पहुँचाया है, उसकी भरपाई सरकार अगले 5 साल में करेगी और बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा।
हर आदिवासी परिवार को मुख्यधारा से जोडेंगे
सेवा डेरा का यह अभिनव मॉडल अब बस्तर संभाग के सभी 400 सुरक्षा बल कैंपों में लागू किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य हर आदिवासी परिवार को मुख्यधारा से जोड़ना, विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाना और उन तक सरकारी सेवाओं को सीधे पहुंचाना है। नेतानार में गृहमंत्री ने स्थानीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मुलाकात की, उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की और बस्तर की प्रसिद्ध इमली का स्वाद भी चखा। इसके बाद वे जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचे, जहां उन्होंने नक्सल हिंसा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सीएम ने कहा-बस्तर उद्योगपतियों को नहीं सौंपेंगे
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष (कांग्रेस) पर कड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद विपक्ष द्वारा यह झूठा नरेटिव और भ्रम फैलाया जा रहा है कि अब बस्तर को उद्योगपतियों को सौंप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बस्तर के आदिवासी, किसान और यहां के गांव हैं। बस्तर में पारंपरिक खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए 2,000 करोड़ की वृहद सिंचाई परियोजना की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने गृहमंत्री की ओर से समस्त बस्तरवासियों को आश्वस्त किया कि यहां अब केवल स्थानीय नागरिकों के कल्याण और विकास को ही गति दी जाएगी।
डिप्टी सीएम ने रखी दो साल की रणनीति की रिपोर्ट
प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में चलाए गए अभियानों की रणनीतिक सफलता का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में बेहद आधुनिक तकनीकों और सुनियोजित उपायों के साथ बस्तर के सुदूर अंचलों में ऑपरेशन चलाए गए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से ही मार्च 2026 तक बस्तर से नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया जा सका है। अब बस्तर भय और हिंसा से मुक्त होकर देश में विकास का एक नया मॉडल बनेगा।
रायपुर में शाह ने डायल 112 व फॉरेंसिक मोबाइल वैन को दिखाई हरी झंडी
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर में एआई आधारित अत्याधुनिक डायल 112 आपातकालीन सेवा और 32 आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल वैन के बेड़े को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस विस्तार के बाद डायल 112 सेवा राज्य के 16 जिलों से बढ़कर अब सभी 33 जिलों में उपलब्ध होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी उपस्थित थे। इस नई व्यवस्था के तहत 400 नए आपातकालीन वाहन, 33 विशेष निगरानी वाहन और 60 राजमार्ग गश्ती वाहन बेड़े में शामिल किए गए हैं।
महिला सुरक्षा के लिए इसमें पैनिक बटन और विशेष निगरानी की सुविधा जोड़ी गई है। अब नागरिक स्मार्टफोन ऐप, जीपीएस, सोशल मीडिया और चैटबॉट के माध्यम से भी चौबीस घंटे मदद पा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, लगभग 65 लाख रुपए प्रति यूनिट लागत वाली फॉरेंसिक वैन घटनास्थल पर ही फिंगरप्रिंट डिटेक्शन, नार्कोटिक्स टेस्ट और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी वैज्ञानिक जांच की सुविधा प्रदान करेंगी।

विज्जा समेत 47 नक्सलियों ने किया सरेंडर

26-Apr-2026
जगदलपुर (शोर संदेश)। नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तेलंगाना में शनिवार को 47 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है। यह सरेंडर ऐसे समय में हुआ है जब नक्सलवाद के खात्मे की तय डेडलाइन पर लगातार सवाल उठ रहे थे, लेकिन इस घटना ने संकेत दिया है कि संगठन के भीतर दबाव और विघटन बढ़ रहा है।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण में कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नक्सली शामिल हैं। इनमें डीवीसी इंचार्ज हेमला आयतु उर्फ विज्जा और 9वीं बटालियन कमांडर पोडियम लच्छु उर्फ मनोज जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कुल मिलाकर लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना और हिंसा के रास्ते से दूर करना है।

स्वाद ने दिलाई पहचान! बस्तर का काजू अब देश-विदेश तक पहुंचा

26-Apr-2026
जगदलपुर (शोर संदेश)। बस्तर में काजू की खेती और व्यापार तेजी से फल-फूल रहा है। अनुकूल जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां काजू का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि इन दिनों शहर के चौक-चौराहों और सड़कों पर स्थानीय काजू की बिक्री आम हो गई है। बस्तर के काजू अब छत्तीसगढ़ से निकलकर देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचने लगे हैं। वनोपज पर निर्भर रहने वाले आदिवासी अब काजू की खेती से भी अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
जिले के बकावंड ब्लॉक में बड़े पैमाने पर काजू का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में बस्तर में प्रतिवर्ष 50 हजार क्विंटल से अधिक काजू का उत्पादन हो रहा है, जिससे करीब 10 हजार परिवार सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं और आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।
काजू उत्पादक विजय सेठिया के अनुसार काजू का पेड़ लगभग चार से पांच वर्षों में तैयार होकर फल देने लगता है। बस्तर की जलवायु इसके लिए बेहद अनुकूल है, जिससे किसान बड़ी संख्या में काजू का प्लांटेशन कर रहे हैं। पेड़ तैयार होने के बाद इसकी देखभाल में बहुत कम खर्च आता है। ग्राम पंडेनार के सरपंच विपत सिंह का कहना है कि यदि सरकार किसानों को और प्रोत्साहन दे, तो निजी भूमि में भी काजू की खेती का विस्तार तेजी से हो सकता है।
किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन
काजू की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को प्लांटेशन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मनरेगा के तहत भी काजू के पौधे लगाए जा रहे हैं, जिससे खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
ठोस और स्वादिष्ट काजू की बढ़ी मांग
बस्तर का काजू अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए विशेष पहचान बना रहा है। बिना पॉलिश के प्राकृतिक रूप में मिलने वाला यह काजू बाजार में उपलब्ध अन्य राज्यों के काजू की तुलना में अधिक स्वादिष्ट और ठोस माना जाता है। यही कारण है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। कच्चा काजू 120 से 150 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाता है, जबकि प्रोसेसिंग के बाद यही काजू 500 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
प्रोसेसिंग यूनिट और महिलाओं को रोजगार
बकावंड ब्लॉक में स्थापित प्रोसेसिंग यूनिट में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा काजू की प्रोसेसिंग की जा रही है। ‘बस्तर काजू’ के नाम से पैकेजिंग कर इसे बाजार में उतारा जा रहा है। इससे महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

उल्लास महापरीक्षा : बस्तर में 25,000 से ज्यादा लोगों ने दी परीक्षा

23-Mar-2026
बस्तर (शोर संदेश)। जिले में अशिक्षा की चुनौती को पार करते हुए शिक्षा की ओर एक नया कदम उठाया गया है। 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत आयोजित महापरीक्षा ने जिले में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत की है।
इस कार्यक्रम के तहत 25 हजार से ज्यादा परीक्षार्थियों ने भाग लिया, जिनमें बुजुर्ग, युवा, कैदी, और आत्मसमर्पित माओवादी भी शामिल थे। यह महापरीक्षा केवल एक शैक्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन सपनों को फिर से जीवित करने की कोशिश है जो शिक्षा से दूर रह गए थे।
बस्तर जिले के कलेक्टर आकाश छिकारा के नेतृत्व में आयोजित इस महापरीक्षा में 25,706 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। इसके लिए कुल 812 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। यह परीक्षा उन लोगों के लिए एक नई शुरुआत साबित हुई है, जिन्होंने किसी कारणवश शिक्षा का सामना नहीं किया था। कलेक्टर आकाश छिकारा ने इस कार्यक्रम को न केवल साक्षरता बढ़ाने का एक प्रयास बताया, बल्कि इसे आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के निर्माण का भी एक कदम माना।
बुजुर्गों और युवाओं को मिल रही नई उम्मीद
यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन बुजुर्गों और युवाओं के लिए था, जिन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी नहीं की थी। महापरीक्षा के जरिए बस्तर के हर वर्ग को शिक्षा के प्रति जागरूक किया गया, जिससे उन्हें यह एहसास हुआ कि कोई भी उम्र हो, शिक्षा का रास्ता कभी बंद नहीं होता। यह महापरीक्षा सिर्फ एक शैक्षिक परीक्षण नहीं थी, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की ओर बढ़ता हुआ कदम था।

बस्तर में 108 माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण, ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत मुख्यधारा में वापसी

11-Mar-2026
जगदलपुर।( शोर संदेश ) बस्तर में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बुधवार को 108 माओवादी कैडर समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे। ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े ये माओवादी जगदलपुर के शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करेंगे।
दोपहर दो बजे होने वाले इस कार्यक्रम में पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और समाज के वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाएंगे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक समर्पण करने वाले कैडरों से मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने बीजापुर सहित बस्तर रेंज के कई जिलों में जंगलों में छिपाकर रखे हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री की बड़ी डंप बरामद की है। इन बरामद सामग्री को कार्यक्रम में प्रदर्शित भी किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार पिछले दो वर्षों में बस्तर में 2700 से अधिक माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। शासन की पुनर्वास नीति के तहत समर्पित माओवादियों को आर्थिक सहायता, आवास, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।



 

छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया महिला सशक्तिकरण का संदेश

10-Mar-2026
जगदलपुर। ( शोर संदेश ) कुम्हरावंड स्थित शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के अंतर्गत 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण अंचल में महिलाओं के बीच शिक्षा के प्रति अलख जगाने और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक पहल की। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने अत्यंत प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया, जिसके माध्यम से उन्होंने गाँव की महिलाओं को शिक्षा के महत्व से रूबरू कराया और बेटियों को शिक्षित करने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आरएस नेताम उपस्थित रहे, जिनके मार्गदर्शन में छात्रों ने सामाजिक जागरूकता का यह अभियान चलाया। कार्यक्रम की सफलता में मातृ शक्ति के रूप में डॉ. सोनाली कर के साथ-साथ डॉ. पदमाक्षी ठाकुर, डॉ. चेतना खांडेकर, डॉ. विनीता पांडेय, डॉ. गुंजा ठाकुर, सोमा बंछोर, शालिनी मिश्रा और ऋचा धुरंधर ने अपनी विशेष भागीदारी सुनिश्चित की। इन महिला विशेषज्ञों ने ग्रामीण परिवेश में महिलाओं के अधिकारों और उनकी प्रगति पर जोर दिया।
इस अवसर पर डॉ. एके ठाकुर ,डॉ. आरआर कंवर ,डॉ. पीके सलाम और एमबी तिवारी सहित महाविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल महिला दिवस मनाना था, बल्कि धरातल पर जाकर समाज को यह संदेश देना था कि शिक्षित और सशक्त महिला ही एक उन्नत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।




 

नक्सली संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका, नेता गणपति ने किया सरेंडर

06-Mar-2026
बस्तर (शोर संदेश)। तेलंगाना में प्रतिबंधित नक्सली संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लग सकता है। संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व महासचिव उर्फ गणपति के आत्मसमर्पण की खबर सामने आ रही है। बस्तर के एक पुलिस अफसर ने मीडिया से चर्चा में कहा कि तेलंगाना से अभी ऐसी खबरें आई हैं लेकिन इसकी पुष्टि होना बाकी है।
बताया जा रहा है कि गणपति इस समय माओवादी संगठन के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए महासचिव पद छोड़ दिया था।

गार्बेज से गौरव तक: डंपिंग ग्राउंड से बनी ‘जनजातीय गौरव वाटिका’

28-Feb-2026
बस्तर।  ( शोर संदेश ) जनजातीय गौरव वाटिका बस्तर जिले में विकास, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। जगदलपुर के कुम्हड़ाकोट क्षेत्र में स्थित यह स्थान कभी गंदगी और अतिक्रमण से प्रभावित डंपिंग ग्राउंड था, लेकिन अब यह एक सुंदर पर्यटन स्थल और स्वरोजगार का केंद्र बन गया है।
इस परिवर्तन के पीछे वन विभाग की विशेष पहल और शासन की योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान है। 
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में इस क्षेत्र का व्यापक विकास किया गया। आरक्षित वनखंड कक्ष क्रमांक 1021 के इस क्षेत्र को साफ-सुथरा कर यहाँ लगभग 1700 मीटर लंबा नेचर ट्रेल बनाया गया है। साथ ही सुंदर तालाब और एक आकर्षक आइलैंड विकसित किया गया है। लोगों के स्वास्थ्य और मनोरंजन के लिए योग चबूतरा, योग शेड और ओपन जिम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बैठने के लिए पाँच सुंदर पैगोड़ा और एक आकर्षक पुल भी बनाया गया है।
इस वाटिका की खास बात इसकी समृद्ध वनस्पति है। यहाँ औषधीय पौधे, फलदार वृक्ष और बांस की विभिन्न प्रजातियाँ लगाई गई हैं। पूरी वाटिका को इको-फ्रेंडली और प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है। यह परियोजना केवल पर्यावरण सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार भी मिला है। महिला स्व-सहायता समूह द्वारा यहाँ जंगल कैंटीन का संचालन किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेते हैं।
डीएफओ उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि इस पहल से 20 महिलाओं का समूह आत्मनिर्भर बना है। अब तक 10 हजार से अधिक पर्यटक यहाँ आ चुके हैं, जिससे महिला समूह को लगभग दो लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। आज यह स्थान शहरवासियों के लिए सुबह की सैर, योग और शांति का पसंदीदा स्थल बन गया है। ‘गार्बेज से गौरव’ तक का यह सफर बताता है कि सही योजना, मजबूत नेतृत्व और जनभागीदारी से किसी भी स्थान का कायाकल्प संभव है। यह सफलता कहानी पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक मिसाल है।

बस्तर में रोजगार की सौगात : जल्द निकलेंगी 1500 भर्तियां, शिक्षा-इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा फोकस

25-Feb-2026
जगदलपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ के रायपुर ‘संकल्प’ थीम पर आधारित राज्य सरकार का बजट ‘विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को आगे बढ़ाने वाला बताया जा रहा है। शिक्षा, अधोसंरचना, औद्योगिक निवेश, कृषि आधारित उद्योग, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा को केंद्र में रखकर मिशन मोड में काम करने की रूपरेखा पेश की गई है।
सरकार ने पांच नए मुख्यमंत्री मिशन शुरू करने की घोषणा की है, जिनका लक्ष्य नीति से परिणाम तक स्पष्ट रणनीति के साथ समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। बस्तर और सरगुजा संभाग को विशेष प्राथमिकता देते हुए रोजगार, शिक्षा और कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है।
शिक्षा और रोजगार: 13.5% बजट स्कूल शिक्षा के लिए
शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कुल बजट का 13.5 प्रतिशत स्कूल शिक्षा के लिए निर्धारित किया गया है। बस्तर के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में दो एजुकेशन सिटी स्थापित की जाएंगी, जिससे दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। वाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए बस्तर फाइटर्स में 1,500 नई भर्तियां निकाली जाएंगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और सुरक्षा तंत्र भी मजबूत होगा।
औद्योगिक निवेश और शहरी विकास
प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 23 नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना हेतु 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए 200 करोड़ रुपए और भूमि विकास बैंक के सुदृढ़ीकरण के लिए 200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। साथ ही अंबिकापुर-जगदलपुर हवाई सेवा के विस्तार से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे व्यापार और पर्यटन दोनों को लाभ होगा।
कृषि और आजीविका: बस्तर-सरगुजा फोकस
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। बकरी, सूअर और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण आजीविका को सशक्त किया जाएगा। इंद्रावती नदी पर देवरगांव और मटनार बैराज निर्माण के लिए 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की स्वीकृति दी गई है, जिससे सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा
कुनकुरी, मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों के संचालन को गति दी जाएगी। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा लागू करने की घोषणा की गई है, जो स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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