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Delhi

दिल्ली के हरित अभियान को नई दिशा देने की पहल, औषधीय पौधों के रोपण पर केंद्रीय मंत्री प्रताप राव का विशेष जोर

10-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने दिल्ली सरकार की ओर से दिल्ली रिज इकोसिस्टम के संरक्षण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान की सराहना की है। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर इस पहल को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जाधव ने कहा कि दिल्ली में 70 लाख से अधिक स्वदेशी एवं जलवायु-अनुकूल पेड़ लगाने, 70 से अधिक जल निकाय विकसित करने और लगभग 6,000 हेक्टेयर भूमि को वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना राजधानी के पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि यह अभियान शहरी वायु गुणवत्ता सुधारने और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित वातावरण तैयार करने में सहायक होगा। केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से दिल्ली रिज क्षेत्र में विलायती किकर और बाबूल जैसी आक्रामक प्रजातियों को हटाकर पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन और जामुन जैसी देशी प्रजातियों को बढ़ावा देने के निर्णय का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी वृक्ष प्रजातियों का विस्तार दिल्ली के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगा और रिज क्षेत्र को शहर के “फेफड़ों” के रूप में और अधिक प्रभावी बनाएगा। पर्यावरण संरक्षण के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जाधव ने सुझाव दिया कि दिल्ली में प्रस्तावित आठ वनों में कम से कम 20 प्रतिशत क्षेत्र औषधीय पौधों के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह संभव न हो तो कम से कम दो वनों को पूरी तरह समर्पित औषधीय वन के रूप में विकसित किया जाए। जाधव ने कहा कि औषधीय वन आयुष क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का स्थायी स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं। साथ ही, वे जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक बहाली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए औषधीय पौधों की एक सूची भी साझा की। इसमें अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, ब्राह्मी, शतावरी, आंवला, अर्जुन, अशोक, नीम, बेल और जामुन जैसी प्रजातियां शामिल हैं। प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष मंत्रालय औषधीय पौधों के संरक्षण और सतत स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली का यह अभियान शहरी वनीकरण, पारंपरिक चिकित्सा और पर्यावरण प्रबंधन को एक साथ जोड़ने वाला देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बन सकता है।



















 

पीएम मोदी पहुंचे ऑकलैंड, एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री लक्सन ने किया स्वागत

10-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के आखिरी चरण के लिए शुक्रवार को ऑकलैंड पहुंचे। पीएम मोदी के यहां पहुंचने पर न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन ने उन्हें गले लगाकर उनका स्वागत किया।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इसकी जानकारी दी, उन्होंने कहा, “कुछ देर पहले ही ऑकलैंड पहुंचा। एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए प्रधानमंत्री लक्सन का आभारी हूं ।” प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरे को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि चार दशकों में किसी प्रधानमंत्री का न्यूज़ीलैंड का यह पहला दौरा है। मैं प्रधानमंत्री लक्सन के साथ बातचीत करने और भारत-न्यूज़ीलैंड दोस्ती के सभी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूँ। मैं कल ऑकलैंड में एक कम्युनिटी प्रोग्राम को भी संबोधित करूंगा।
तीन देशों (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) की राजकीय यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में पीएम मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन के निमंत्रण पर, मेलबर्न से ऑकलैंड के दौरे पर पहुंचे हैं।
वहीं, इन देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि मेरी यह यात्रा मार्च 2025 में प्रधानमंत्री लक्सन की भारत यात्रा के बाद हमारे द्विपक्षीय संबंधों में आई मजबूती को और आगे बढ़ाएगी। इस यात्रा के दौरान, मैं प्रधानमंत्री लक्सन के साथ आर्थिक, व्यापारिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करूंगा। मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है।
उन्होंने कहा कि हमारे द्विपक्षीय संबंधों में भारतीय प्रवासी समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और इस यात्रा के दौरान, मैं भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करने के लिए उत्सुक हूं, जिन्होंने जीवन के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।










 

भारत और ऑस्ट्रिलया के बीच सीएसआईआर के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय तक पहुंच के लिए समझौता

10-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और आईपी ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान सीएसआईआर के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (सीएसआईआर-टीकेडीएल) तक पहुंच के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज एमपी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
भारत ने गलत पेटेंट आवंटन की वजह से अपने समृद्ध पारंपरिक ज्ञान के दुरुपयोग को रोकने के लिए अपनी तरह का पहला पूर्व-कला डेटाबेस, पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) विकसित किया है। इस समझौते के तहत, आईपी ऑस्ट्रेलिया को टीकेडीएल डेटाबेस तक पहुंच प्राप्त होगी ताकि ऑस्ट्रेलिया के पेटेंट कानूनों और जांच प्रक्रियाओं के अनुसार पेटेंट आवेदनों की जांच करते समय प्रासंगिक पूर्व-कला की पहचान की जा सके। यह समझौता अधिक जानकारीपूर्ण और कुशल पेटेंट जांच को सुगम बनाएगा तथा भारत की प्रलेखित पारंपरिक विरासत का हिस्सा बन चुके ज्ञान पर पेटेंट के आवंटन को रोकने में मदद करेगा।
दरअसल, भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही समृद्ध स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, पारंपरिक प्रथाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के भंडार हैं जो सदियों से विकसित हुई हैं और दुरुपयोग के प्रति संवेदनशील हैं। समझौते पर हस्ताक्षर दोनों देशों की पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करने और प्रलेखित पूर्व कला के प्रभावी उपयोग के माध्यम से बौद्धिक संपदा प्रणालियों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, भारत सरकार ने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (सीएसआईआर-टीकेडीएल) की स्थापना वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और आयुष मंत्रालय की संयुक्त पहल के माध्यम से वर्ष 2001 में की थी। यह पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए समर्पित विश्व का पहला डेटाबेस है।
भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर आधारित पेटेंटों के गलत अनुदान को रोकने के उद्देश्य से विकसित सीएसआईआर-टीकेडीएल में अभी आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा और योग से संबंधित 5.2 लाख से अधिक सूत्रों और प्रथाओं की जानकारी शामिल है। इसका पांच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं – अंग्रेजी, जर्मन, फ्रेंच, जापानी और स्पेनिश में अनुवाद किया गया है, ताकि विश्व भर के पेटेंट परीक्षकों द्वारा इसका उपयोग किया जा सके।
आईपी ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते पर हस्ताक्षर के साथ अठारह पेटेंट कार्यालयों को अब गोपनीयता समझौतों (एनडीए) के तहत डेटाबेस तक पहुंच प्राप्त है। सीएसआईआर-टीकेडीएल ने भारत के पारंपरिक ज्ञान की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और डेटाबेस से प्राप्त पूर्व कला साक्ष्यों के आधार पर दुनिया भर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदनों को रद्द, अस्वीकृत, संशोधित, वापस लिया या त्याग दिया गया है।
गौरतलब हो, टीकेडीएल पहुंच समझौता शिखर सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय चर्चाओं के अठारह प्रमुख नतीजों में से एक है, जिसमें रक्षा और सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी सहित कई क्षेत्रों को शामिल किया गया था।

एक जुलाई से हो रहे हैं कई बदलाव, एलपीजी से लेकर पासपोर्ट तक, होगा सीधा असर

02-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) जून के समाप्त होने के साथ ही नया महीना शुरू हो गया है। हर महीने की शुरुआत में कुछ न कुछ बदलाव होते हैं। ऐसे में बुधवार से आधार, पासपोर्ट, गाड़ियों की कीमतों से लेकर एलपीजी में बड़ा बदलाव हुआ है, जिनका असर आपके जीवन पर पड़ेगा।
–तेल वितरक कंपनियों ने एक जुलाई से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती का ऐलान किया है। इससे राष्ट्रीय राजधानी में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का दाम 183.50 रुपए घटकर 2,930 रुपए हो गया है, जो कि पहले 3,113.50 रुपए था। हालांकि, 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और उसे 942 रुपए पर स्थिर रखा गया है।
–भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने ऐलान किया है कि अगर आप अपने आधार में ईमेल आईटी अपडेट करना चाहते हैं तो एक जुलाई-31 दिसंबर तक निशुल्क कर सकते हैं। इससे पहले आधार में ईमेल अपडेट करने के लिए 75 रुपए देने होते थे। इस कदम के जरिए आधार का संचालन करने वाली संस्था यूआईडीएआई की ओर से लोगों को आधार में लेटेस्ट जानकारी अपडेट करने के लिए प्रेरित करना है।
–सरकार की ओर से पासपोर्ट बनाने की फीस को बढ़ा दिया गया है। अब सामान्य पासपोर्ट को बनवाने के लिए 1,500 रुपए की जगह 2,500 रुपए देने होंगे। वहीं, तत्काल पासपोर्ट को बनवाने के लिए 5,000 रुपए देने होंगे, जो फीस पहले 3,500 रुपए थी। यह नई फीस 1 जुलाई से लागू हो गई है।
कई वाहन कंपनियों द्वारा कीमतों में की गई बढ़ोतरी एक जुलाई से लागू हो रही है। इनमें टाटा मोटर्स, किआ मोटर्स, एमजी मोटर्स और बीएमडब्ल्यू का नाम शामिल है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (पीवी) ने अपने वाहनों की कीमतों को 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। वहीं, टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल (सीवी) ने कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। इसके अलावा किआ मोटर्स और बीएमडब्ल्यू ने कीमतों में 2-2 प्रतिशत और एमजी मोटर्स ने 3 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।
इसके अलावा, कई क्रेडिट कार्ड के नियमों में एक जुलाई से बदलाव लागू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसबीआई कार्ड ने कुछ चुनिंदा फोनपे एसबीआई कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव किया गया है। इसके तहत कई नई सीमाएं लगाई गई हैं और कुछ ट्रांजैक्शन को रिवॉर्ड पॉइंट्स की कैटेगरी से हटाया गया है। वहीं, एचडीएफसी ने रेगलिया गोल्ड क्रेडिट कार्ड होल्डर्स अब हर कैलेंडर वर्ष की तिमाही में तीन बार मुफ्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए उन्हें हर तिमाही में कम से कम 60,000 रुपए खर्च करने होंगे।
 

‘डॉक्टर्स डे’ पर पीएम मोदी ने वेनेजुएला में सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों को किया नमन

02-Jul-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे भारतीय चिकित्सा पेशेवर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा, “आज, जब हम डॉक्टर्स डे मना रहे हैं, मैं ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत वेनेजुएला में अथक सेवा दे रहे भारत के सभी डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों की सराहना करता हूं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए उनके प्रयास इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि जब भी समाज किसी चुनौती का सामना करता है, हमारे चिकित्सा पेशेवर हमेशा आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।”
पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय डॉक्टरों की प्रतिबद्धता, सेवा भावना और मानवीय दृष्टिकोण पूरी दुनिया में भारत की सकारात्मक पहचान को मजबूत कर रहा है। उन्होंने चिकित्सा समुदाय के योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। इससे पहले की एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, करुणा और अथक सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ही भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉक्टर्स डे पर हमारे समर्पित चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएं। उनकी कड़ी मेहनत, करुणा और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उनके अथक प्रयासों ने करोड़ों लोगों का विश्वास और आभार अर्जित किया है।”
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है, जबकि स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल सीटों में भी बड़े पैमाने पर वृद्धि की गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह अभूतपूर्व विस्तार भावी डॉक्टरों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है, देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूत मानव संसाधन तैयार कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं देश के हर कोने तक पहुंचें।
उन्होंने कहा, ” विकसित भारत के निर्माण की दिशा में डॉक्टरों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। डॉक्टर न केवल निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) को बढ़ावा देंगे, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने, नवाचार को अपनाने तथा सभी नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगे।”
प्रधानमंत्री ने देश के सभी डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अमूल्य है।
ज्ञात हो, ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ भारत सरकार की ओर से वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप के बाद शुरू की गई मानवीय पहल है। एचएडीआर मिशन के तहत भारत ने 41 सदस्यीय चिकित्सा दल, दो ‘भीष्म’ पोर्टेबल अस्पताल और 66 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री और दवाइयां वेनेजुएला भेजी हैं।

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का ‘गार्ड ऑफ ऑनर्स समारोह, पिता को किया सैल्यूट, परिजनों का लिया आशीर्वाद

02-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  भारतीय सेना के नए थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के ‘गार्ड ऑफ ऑनर्स’ समारोह में एक भावुक और गौरवपूर्ण दृश्य देखने को मिला। रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में बुधवार को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्राप्त करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ (सेवानिवृत्त) को सेल्यूट किया। इसके जवाब में उनके पिता ने भी सैल्यूट किया।
इसके बाद उन्होंने अपने पिता समेत यहां मौजूद अपने परिजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य वहां उपस्थित सैन्य अधिकारियों, जवानों और अतिथियों के लिए विशेष आकर्षण व प्रेरणा का केंद्र रहा। समारोह में जनरल धीरज सेठ के छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी मौजूद थे। इस अवसर पर छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने जनरल सेठ को सैल्यूट किया।
भारतीय सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं में सेवा दे चुके और दे रहे इस परिवार की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक विशेष बना दिया। सैन्य परंपरा, पारिवारिक संस्कार और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का यह अनूठा संगम यहां देखने को मिला। जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व और विनम्रता का विषय है। उन्होंने ‘कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि’ के सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने का संकल्प व्यक्त किया। नए थलसेना प्रमुख ने राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस, समर्पण और निस्वार्थ सेवा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना प्रमुख बनने से पहले सेना के उपप्रमुख के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 30 जून 2026 को सेना प्रमुख का कार्यभार संभाला है। उन्होंने सेना में रेगिस्तानी क्षेत्र से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम मंगलवार को सेवा से सेवानिवृत्त हो गए थे।
जनरल धीरज सेठ ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को नमन किया। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार है। जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1986 में उन्होंने भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त किया था। अपने चार दशकों के शानदार सैन्य करियर के दौरान, उन्होंने ऑपरेशनल, रणनीतिक, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। उनके इस अनुभव ने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जनरल सेठ कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में विभिन्न स्तर पर कमान संभाल चुके हैं। उनके कमांड असाइनमेंट में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवाद-विरोधी बल शामिल हैं। जनरल धीरज सेठ ने लेफ्टिनेंट जनरल के रहते हुए सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली।
गौरतलब है कि सुदर्शन चक्र कोर, भारतीय सेना की एक प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन है। उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया है। यहां तैनाती के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों और औपचारिक जिम्मेदारियों की देखरेख की। 
 

कैबिनेट की बड़ी मंजूरी उत्तर प्रदेश में 7,145 करोड़ रुपये से बनेगा कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे

02-Jul-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने उत्तर प्रदेश में कानपुर-कबरई सेक्शन (NH-34) को 4/6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में विकसित करने को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत 7,145.14 करोड़ रुपये होगी।
यह 117.7 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड हाईवे होगा, जिसे National Highways Authority of India द्वारा BOT (टोल) मॉडल पर बनाया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा।
इस हाईवे के बनने से कानपुर से कबरई के बीच यात्रा समय 3.5 घंटे से घटकर सिर्फ 1.5 घंटे रह जाएगा, यानी करीब 58 प्रतिशत समय की बचत होगी।
यह कॉरिडोर 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के हिसाब से डिजाइन किया गया है, जिससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, वाहन संचालन लागत कम होगी और यात्री व माल ढुलाई तेज होगी।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करेगी और आगे सागर व भोपाल जैसे शहरों तक तेज संपर्क उपलब्ध कराएगी।
हाईवे को NH-34, NH-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और कई राज्य राजमार्गों से जोड़ा जाएगा। इससे क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा।
यह परियोजना कबरई के खनन क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी देगी, जिससे खनिज, औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही आसान होगी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को फायदा मिलेगा।
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत यह कॉरिडोर 16 आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा। इनमें उन्नाव, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी और कानपुर नगर के औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा यह 9 सामाजिक केंद्रों जैसे कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्धा पार्क, जे.के. टेंपल, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर और महoba पर्यटन स्थल को भी बेहतर कनेक्टिविटी देगा।
परियोजना 10 लॉजिस्टिक हब को भी मजबूत करेगी, जिनमें कानपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा रेलवे स्टेशन और कानपुर, चकेरी व खजुराहो एयरपोर्ट शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, निर्माण के दौरान इस परियोजना से करीब 1.2 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार पैदा होंगे। इसमें 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष व्यक्ति-दिवस रोजगार प्रति लेन प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलने का अनुमान है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 तक इस मार्ग पर 18,069 पैसेंजर कार यूनिट (PCU) का औसत दैनिक ट्रैफिक होगा।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स सुधार और आर्थिक वृद्धि को नई गति देगी।
 

ईस्ट कोस्ट रेलवे के 631 रूट किलोमीटर पर ‘कवच’ सिस्टम को मंजूरी, 270 करोड़ रुपये होंगे खर्च

23-Jun-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) रेल मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार ने ईस्ट कोस्ट रेलवे नेटवर्क के 631 किलोमीटर (आरकेएम) मार्ग पर स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ लगाने को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 270 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह परियोजना ईस्ट कोस्ट रेलवे के छह महत्वपूर्ण रेल सेक्शन्स को कवर करेगी, जिनमें बाघुआपाल-बुढ़ापंक, हरिदासपुर-पारादीप, खुर्दा रोड-बलांगीर, नौपाड़ा-गुनुपुर, लांजीगढ़ रोड-जूनागढ़ और बोब्बिली-सलूर रेल सेक्शन शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार, यह स्वीकृत परियोजना भारतीय रेलवे के उस बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत पूरे रेल नेटवर्क पर एलटीई-आधारित संचार व्यवस्था के साथ ‘कवच’ प्रणाली लागू की जा रही है। ‘कवच’ भारत में विकसित की गई स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) प्रणाली है, जिसे सिग्नल तोड़ने (एसपीएडी), अधिक गति और ट्रेन टक्करों जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तैयार किया गया है।
यह प्रणाली लगातार ट्रेनों की गतिविधियों पर निगरानी रखती है और आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगा देती है। इससे रेल संचालन की सुरक्षा में काफी सुधार होता है। रेल मंत्रालय ने कहा कि इन रेल सेक्शन्स पर ‘कवच’ प्रणाली लागू होने से ट्रेनों को स्वचालित सुरक्षा और टक्कर-रोधी सुविधा मिलेगी, जिससे परिचालन सुरक्षा का स्तर और मजबूत होगा।
मंत्रालय के अनुसार, दुर्घटनाओं को रोकने के अलावा यह प्रणाली खराब मौसम, विशेषकर घने कोहरे के दौरान भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में मदद करेगी। रेल अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से ओडिशा और ईस्ट कोस्ट रेलवे के अधीन आने वाले आसपास के क्षेत्रों में यात्री और मालगाड़ी दोनों सेवाओं को लाभ मिलेगा।
यह पहल ट्रेनों की समयपालन क्षमता और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेगी। यह मंजूरी भारतीय रेलवे द्वारा देश भर में सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणालियों के आधुनिकीकरण के व्यापक अभियान के तहत दी गई है।
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने घोषणा की थी कि पूर्वी रेलवे को हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) और हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) मार्गों पर स्थित 32 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली लगाने की मंजूरी मिल गई है। सरकार ने इस सिग्नल उन्नयन परियोजना के लिए 405 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोरों में विश्वसनीयता, सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाना है। 
 

IMD ने जारी किया अलर्ट, पूर्वोत्तर, असम और मेघालय में भारी बारिश का पूर्वानुमान

23-Jun-2026
नई दिल्ली।   (शोर संदेश) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों (खासकर असम और मेघालय) में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आईएमडी के अनुसार, 28 जून तक अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में काफी व्यापक स्तर पर बारिश होने की संभावना है।
इसके अलावा, 22 जून से 26 जून के बीच इन राज्यों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी इस दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। आईएमडी ने अलग से नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी आने वाले दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, बिजली और तेज हवाएं चल सकती हैं।
रविवार को मेघालय और त्रिपुरा के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में इन दोनों राज्यों में और अधिक तेज बारिश का अनुमान लगाया है। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में 24 घंटे के दौरान 102.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे शहर और आसपास के इलाकों में जलभराव हो गया और यातायात प्रभावित हुआ। वहीं, मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले के मावसिनराम में 24 घंटे में 530 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। आईएमडी के एक अधिकारी ने बताया कि मावसिनराम में एक रात में हुई यह बारिश जोधपुर या बीकानेर जैसे शहरों में छह महीने से अधिक समय में होने वाली कुल बारिश के बराबर है।
अधिकारी के अनुसार, इसी अवधि में आरकेएम सोहरा में 470 मिमी और मावकिरवाट में 390 मिमी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण, शिलांग को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित डावकी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, शेला (100 मिमी), विलियमनगर (90 मिमी), मावरिंगक्नेंग (90 मिमी), जोवाई (80 मिमी), बारापानी (70 मिमी) और रताछेरा (70 मिमी) में भी भारी बारिश दर्ज की गई।
इस बीच, दक्षिण-पश्चिम मानसून 7 जून को पूर्वोत्तर भारत के बड़े हिस्से में पहुंचा, जो सामान्य तिथि से दो दिन देर से था। मानसून के आगे बढ़ने से पूरे क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई और सामान्य या सामान्य से बेहतर मानसून की उम्मीद बढ़ी। बाद में मानसून ने सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को पूरी तरह कवर कर लिया।
आईएमडी अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष 2025 में मानसून 26 मई को ही पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में पहुंच गया था, इसलिए इस साल मानसून का आगमन अपेक्षाकृत देर से हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल क्षेत्र में मौसम की परिस्थितियां अनुकूल हैं, जिससे अगले कुछ दिनों में मानसून के मजबूत होने तथा आगे बढ़ने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश सामान्य से लेकर सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है।
आईएमडी अधिकारी के मुताबिक, हालांकि इस वर्ष भारत के कुछ हिस्सों में ‘अलनीनो’ के प्रभाव की आशंका जताई गई है, लेकिन पूर्वोत्तर के पहाड़ी इलाकों पर इसका ज्यादा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है। इसका कारण यहां का घना वन क्षेत्र, विविध भू-आकृति और अनुकूल जलवायु है। अधिकारी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत की विशेष भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां अक्सर बड़े मौसमीय प्रभावों के असर को कम कर देती हैं, जिससे देश के कई अन्य हिस्सों की तुलना में यहां मानसून की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर बनी रहती है।

ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक: NSA अजित डोभाल ने ईरान के साथ पश्चिम एशिया और द्विपक्षीय संबंधों पर की बातचीत

23-Jun-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने सोमवार को नई दिल्ली में हुई 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक के दौरान ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) के रक्षा मामलों के उप सचिव गदीर नेजामी से मुलाकात की।
दोनों के बीच पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, ब्रिक्स मंच के तहत सहयोग और भारत-ईरान के आपसी संबंधों को लेकर बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर जानकारी देते हुए कहा, “एनएसए अजित डोभाल ने सोमवार को 16वीं ब्रिक्स एनएसए बैठक के दौरान ईरान के एसएनएससी के रक्षा मामलों के उप सचिव गदीर नेजामी से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। इसके अलावा ब्रिक्स के तहत सहयोग और भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई।”
भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में दो दिवसीय ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में सदस्य देशों के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी शामिल हो रहे हैं, जो दुनिया में बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं और रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं।
एनएसए अजित डोभाल ने इथियोपिया की नेशनल इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सर्विस के एनालिसिस विभाग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिलियन लेमा टैडेसे से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत और इथियोपिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए सहयोग के क्षेत्रों पर बातचीत हुई।
एमईए ने बताया कि इस बैठक में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख ‘आज दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों’ के विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।
अधिकारी तेजी से बदलती राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों और नई तकनीकों के कारण पैदा हो रहे सुरक्षा खतरों में उनकी भूमिका पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा हाल ही में हुई ब्रिक्स की आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह और सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी) के सुरक्षित इस्तेमाल से जुड़े संयुक्त कार्य समूह की बैठकों के नतीजों की भी समीक्षा की जाएगी।


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