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समग्र विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा के विजन को साकार करने का सशक्त संकल्प

29-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) नई दिल्ली में आदि विद्या फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्रथम ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन स्पिरिचुअलिटी इन स्कूल्स’ के अवसर पर भारत के पहले ‘स्पिरिचुअल साइंस करिकुलम’ का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उनके आंतरिक विकास तथा स्पिरिचुअल क्वोशेंट (SQ) को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 समग्र विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के विजन को व्यावहारिक धरातल पर उतारने का सशक्त प्रयास है।फाउंडेशन के संस्थापक शांतनु प्रकाश ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अंकों, रैंक और प्रतिशत पर अत्यधिक केंद्रित हो गई है, जबकि छात्रों की भावनात्मक स्थिति, मानसिक संतुलन और असफलताओं से जूझने की क्षमता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि SQ को IQ और EQ के समान महत्व दिया जाए।”
सम्मेलन में इस्कॉन के गौरांग प्रभु दास जी, पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज और स्वामिनी प्रमानंदी जी (अम्मा जी) सहित अनेक आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षाविदों और नीति-निर्धारकों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य विषय यह रहा कि आध्यात्मिकता को धर्म के संकीर्ण दायरे में न देखकर आत्म-जागरूकता, नैतिक मूल्यों और भावनात्मक दृढ़ता के वैज्ञानिक ढांचे के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
गौरांग प्रभु दास जी ने कहा कि आज हम बच्चों को FILE संभालना तो सिखा रहे हैं, लेकिन LIFE संभालना नहीं सिखा पा रहे हैं। उनके अनुसार वास्तविक सफलता विनय, विवेक, वैराग्य और विश्वास से प्राप्त होती है। वहीं, पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि आधुनिक शिक्षा मस्तिष्क और शरीर को तो विकसित करती है, लेकिन आत्म-चेतना को अनदेखा कर देती है, जिससे नई पीढ़ी बाहरी रूप से सक्षम होते हुए भी भीतर से दिशाहीन महसूस करती है।
आदि विद्या फाउंडेशन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय आंतरिक विज्ञान को एक संरचित, वैज्ञानिक और अकादमिक स्वरूप में विद्यालयों तक पहुंचाना है। यह केवल एक नया विषय जोड़ने की पहल नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करने का संकल्प है जो करियर में सफल होने के साथ-साथ मानसिक रूप से सुदृढ़, संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में सक्षम हो। अंततः यह सम्मेलन भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था की नींव रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां परा विद्या (सांसारिक ज्ञान) और अपरा विद्या (आत्मिक ज्ञान) का समन्वय हो। ऐसी शिक्षा छात्रों को चुनौतियों के बीच भी निराशा से दूर रखेगी और उन्हें संतुलित, सक्षम तथा आत्मविश्वासी नागरिक बनाएगी।

 



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