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सुरक्षित बचपन अभियान के तहत 664 छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम एवं बाल अधिकारों की दी जानकारी

29-Oct-2026
रायपुर: बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बचपन बचाओ आंदोलन के तहत ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ अंतर्गत अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इसके तहत मनेंद्रगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (ई. संवर्ग) एवं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो अधिनियम), शिक्षा के अधिकार तथा बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
यह कार्यक्रम माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। शिविर में जीएमएफसी भूमिका ध्रुव ने विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों और किसी भी प्रकार के शोषण से बचाव के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, 2012 के प्रावधानों और बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में रहने, शिक्षा प्राप्त करने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। बच्चों के प्रति किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या शोषण की स्थिति में जागरूक रहना और उचित माध्यम से सहायता प्राप्त करना आवश्यक है।
शिविर के दौरान शिक्षा के अधिकार, बाल संरक्षण और बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को निष्ठा, ईमानदारी और जिम्मेदारी जैसे नैतिक मूल्यों का महत्व समझाया गया। साथ ही उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में विश्वसनीय व्यक्ति या संबंधित प्राधिकरण से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
दोनों विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कुल 664 छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्य अर्चना सहित विद्यालयीन स्टाफ की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को सुरक्षित बचपन, शिक्षा, सम्मान और संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में अधिकार मित्र (पीएलवी) अंजनी यादव की भी सहभागिता रही। ‘सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ संदेश के साथ आयोजित इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना तथा सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण के निर्माण के लिए प्रेरित करना रहा।
















 

17 वर्ष से अधिक तथा 18 वर्ष एवं छूटे हुए मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ने जगह-जगह लगाए जा रहे शिविर

24-Oct-2026
महासमुंद।( शोर संदेश ) कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार मतदाता जागरूकता अभियान के अंतर्गत जिले में अब विशेष अभियान के तहत 17 वर्ष से अधिक एवं 18 वर्ष तथा छूटे हुए मतदाताओं का नाम जोड़ने की कार्रवाई तेज गति से जारी है। महाविद्यालयों, मतदान केन्द्र एवं स्कूलों में जागरूकता अभियान के साथ बीएलओ द्वारा विशेष शिविर का आयोजन कर ऐसे पात्र मतदाताओं को फाॅर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। आज दिनांक तक जिले में 8 लाख 476 मतदाता है, जबकि अभियान के तहत अभी तक 5600 नए और छूटे हुए मतदाता जोड़े गए हैं।
इसी क्रम में शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल बम्हनी में अयोजित शिविर में नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए फॉर्म-6 तथा मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन के लिए फॉर्म-8 की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस दौरान ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से 60 से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीयन किया गया तथा उन्हें मतदाता पंजीयन संबंधी आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) द्वारा विशेष शिविर एवं पंजीयन के माध्यम से फाॅर्म-6 में नाम जोड़े जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार 28 एवं 29 अक्टूबर को विशेष शिविर सभी मतदान केन्द्रों में लगाए जाएंगे। यहां पात्र नागरिक अपने नाम जुड़वा सकते हैं।

 


स्वामी आत्मानंद स्कूल कन्नेवाडा में दो पालियों में आयोजित हुआ ’मिशन वात्सल्य’ एवं ’मिशन शक्ति’ जागरूकता शिविर

24-Oct-2026
बालोद।( शोर संदेश ) कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी अमित सिन्हा के आदेश एवं मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू के नेतृत्व में आज स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कन्नेवाडा में ’मिशन वात्सल्य’ एवं ’मिशन शक्ति’ के अंतर्गत दो पालियों में विशेष जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा तथा सशक्तिकरण के प्रति जागरूक कर एक जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा।

शिविर के दौरान छात्र-छात्राओं को बाल अधिकार, बाल विवाह की रोकथाम, बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के साथ होने वाले दुव्र्यवहार की रोकथाम तथा बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इसके साथ ही महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों, सुरक्षा, सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए विभागीय योजनाओं से परिचित कराया गया। मिशन वात्सल्य के तहत संचालित सेवाओं की जानकारी देते हुए आपातकालीन ’चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098’ तथा मिशन शक्ति के तहत उपलब्ध सहायता सेवाओं व ’महिला हेल्पलाइन नंबर 181’ के उपयोग के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुरक्षित परिस्थिति, समस्या या शोषण का सामना करने पर तत्काल इन नंबरों पर संपर्क करने हेतु प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान बैनर एवं पोस्टरों के माध्यम से भी बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश प्रसारित किया गया। उपस्थित अधिकारियों ने बच्चों के सर्वांगीण विकास, सुरक्षित वातावरण निर्माण तथा महिलाओं व बालिकाओं को समान अवसर प्रदान करने में समाज की भूमिका पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम में विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी उत्तम कुमार साहू, सामाजिक कार्यकर्ता  अनिल सिन्हा, परियोजना समन्वयक चाइल्ड लाइन वेद प्रकाश साहू, काउंसलर चाइल्ड लाइन पूर्णिमा साहू तथा जेंडर विशेषज्ञ (मिशन शक्ति) दिनेश्वरी सिन्हा उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि जागरूकता कार्यक्रम अंतर्गत प्रथम पाली सुबह 10 बजे से 11.40 बजे तक आयोजित हुई, जिसमें विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य वी. आर. ठाकुर, 15 शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं 200 छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए। वहीं द्वितीय पाली दोपहर 12 से 02 बजे तक संचालित की गई, जिसमें प्राचार्य विनोदिनी यादव एवं समस्त स्टाफ एच. एल. साहू, वैशाली यादव, पी. के. साहू, सुरेश देशमुख, एल. एन. साहू, प्रतिभा ठाकुर, रचना शर्मा सहित 400 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। दोनों पालियों में कुल 600 विद्यार्थियों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा प्रावधानों से सीधे अवगत कराया गया।

विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर पंचरक्षक अभियान, वॉकाथॉन एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन

17-Oct-2026
रायपुर: पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के एनेस्थीसियोलॉजी एवं पेन मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. जया ललवानी के मार्गदर्शन में विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर जनजागरूकता एवं शैक्षणिक गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की गई। इस आयोजन में विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. प्रतीक्षा अग्रवाल, डॉ. मंजुलता टंडन, डॉ. ए. शशांक, डॉ. अमृता जैन एवं डॉ. शाहिदा खातून ने सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग प्रदान किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आमजन को जीवनरक्षक कौशलों के प्रति जागरूक करना तथा सुरक्षित शल्य चिकित्सा में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम की पहली कड़ी में प्रातः 6:30 से 7:30 बजे तक रायपुर रेलवे स्टेशन पर पंचरक्षक अभियान के अंतर्गत जीवनरक्षक कौशलों का लाइव प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की तकनीक का प्रदर्शन किया। रेलवे स्टेशन पर उपस्थित यात्रियों एवं आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हैंड्स-ऑन अभ्यास में भाग लिया और आपातकालीन परिस्थितियों में सीपीआर देने की बुनियादी तकनीक सीखी। इस पहल का उद्देश्य आमजन को आपातकाल में त्वरित सहायता देने तथा बहुमूल्य जीवन बचाने के लिए प्रेरित करना था।
इसके पश्चात पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से नगर घड़ी चौक तक जागरूकता वॉकाथॉन आयोजित किया गया। इसमें आईएसए (ISA) स्टेट ब्रांच की अध्यक्ष डॉ. एस. दासगुप्ता, सचिव डॉ. जया ललवानी, आईएसए सिटी ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. विवेक गोयल एवं सचिव डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल सहित चिकित्सकों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वॉकाथॉन के माध्यम से आमजन को बताया गया कि एनेस्थीसिया केवल ऑपरेशन के दौरान बेहोशी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज की सुरक्षा, दर्द नियंत्रण और सुरक्षित उपचार का एक अभिन्न अंग है।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में पंचरक्षक थीम के अंतर्गत स्नातक विद्यार्थियों की पोस्टर प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता आयोजित की गई। पोस्टर प्रदर्शनी की थीम "बिफोर ड्यूरिंग एंड बियोन्ड सर्जरी (Before, During and Beyond Surgery)" रही, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों ने शल्य चिकित्सा से पहले, ऑपरेशन के दौरान तथा ऑपरेशन के बाद मरीज की सुरक्षा में एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया।
पंचरक्षक अभियान के अंतर्गत पाँच प्रमुख जीवनरक्षक कौशलों को शामिल किया गया:-
कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR/COLS): हृदय गति रुकने की स्थिति में जीवनरक्षक सहायता।
चोकिंग प्रबंधन (Heimlich Manoeuvre): गले में बाहरी वस्तु फँसने पर तत्काल सहायता।
बेहोशी प्रबंधन (Syncope Management): बेहोशी की स्थिति में उचित प्राथमिक सहायता।
आघात एवं रक्तस्राव नियंत्रण (Trauma & Bleeding Control): चोट लगने और रक्तस्राव होने पर त्वरित सहायता।
आपातकालीन सक्रियता एवं गोल्डन ऑवर प्रतिक्रिया (Emergency Activation & Golden Hour Response): आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय करना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना।
इन्हीं पाँच जीवनरक्षक कौशलों पर आधारित प्रतियोगिता में पाँच-पाँच स्नातक विद्यार्थियों के समूह बनाए गए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक दक्षता, टीम भावना, त्वरित निर्णय क्षमता और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया विकसित करना था।
इस अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के प्रभारी डीन डॉ. एस. बी. एस. नेताम, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल, ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. वर्षा मुंगुटवार, नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. निधि पांडेय तथा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह की उपस्थिति रही। सभी ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं जनजागरूकता संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया।
विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से चिकित्सा सेवाओं को अस्पतालों से बाहर आमजन तक पहुँचाने तथा चिकित्सा विद्यार्थियों में सुरक्षित शल्य चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। रेलवे स्टेशन पर सीपीआर का लाइव प्रदर्शन, वॉकाथॉन और पंचरक्षक प्रतियोगिता ने जीवनरक्षक कौशल, मरीज की सुरक्षा और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका का संदेश समाज तक पहुँचाया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सही समय पर दी गई जीवनरक्षक सहायता किसी की जान बचा सकती है और सुरक्षित एनेस्थीसिया बेहतर शल्य चिकित्सा का आधार है।

महिला सुरक्षा, अधिकार और करियर के गुर सीख रहीं छात्राएं, ‘बिटिया @Work’ के तहत हुआ जागरूकता कार्यक्रम

16-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश ) बालिकाओं को महिला सुरक्षा, उनके अधिकारों और भविष्य के अवसरों से परिचित कराने के उद्देश्य से सूरजपुर में ‘बिटिया @Work’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के महिला सशक्तिकरण केंद्र द्वारा भारत सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नवापारा की छात्राओं को सखी वन स्टॉप सेंटर, सूरजपुर का भ्रमण कराया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल के मार्गदर्शन में हुए इस भ्रमण के दौरान छात्राओं को सखी वन स्टॉप सेंटर की संरचना और कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि संकटग्रस्त महिलाओं को केंद्र में एक ही स्थान पर किस प्रकार सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही समाज में सेंटर की भूमिका और महिला सुरक्षा के लिए संचालित सेवाओं से भी परिचित कराया गया।

कार्यक्रम में मिशन शक्ति के अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं सेवाओं ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, घरेलू हिंसा अधिनियम, महिला कोष, महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी दी गई। छात्राओं को आत्मरक्षा और साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने के उपाय भी बताए गए।
छात्राओं को शासकीय सेवाओं में उपलब्ध रोजगार के अवसरों, विभिन्न पदों की कार्यप्रकृति तथा समाज और राष्ट्र के विकास में प्रशासनिक संस्थाओं की भूमिका के बारे में भी बताया गया। उन्हें अपने भविष्य के लिए लक्ष्य तय करने, स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ने और व्यावसायिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
‘बिटिया @Work’ अभियान बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने के कौशल और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने की दिशा में सार्थक पहल है। ऐसे कार्यक्रमों से छात्राओं को महिला सुरक्षा और सहायता तंत्र की जानकारी मिलने के साथ ही करियर के विविध अवसरों को समझने का अवसर मिलता है।

 


बिटिया @ वर्क : शासकीय कार्यालयों में पहुंचीं बेटियां, प्रशासनिक कामकाज को समझकर संजोए बड़े सपने

13-Oct-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  बेटियों को आत्मविश्वासी, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाकर उनके सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में जीपीएम जिले में एक प्रेरणादायक पहल की गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के मिशन शक्ति हब की टीम द्वारा आज ‘बिटिया @ वर्क’ अभियान के तहत विद्यालयीन बालिकाओं को विभिन्न शासकीय कार्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान बालिकाओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली, शासकीय सेवाओं और जनहित से जुड़े कार्यों की जानकारी प्राप्त की। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित कराने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान बालिकाओं को विभिन्न शासकीय विभागों की कार्यप्रणाली, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के दायित्वों तथा आम नागरिकों तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि शासन-प्रशासन किस प्रकार जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, नागरिक सुविधाओं के विस्तार और समाज के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बालिकाओं को शासकीय कार्यालयों में होने वाले कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से परिचित कराते हुए भविष्य में इन क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
भ्रमण के दौरान बालिकाओं को उच्च शिक्षा के महत्व, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा शासकीय सेवाओं में उपलब्ध विभिन्न करियर अवसरों के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि दृढ़ संकल्प, नियमित अध्ययन, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के माध्यम से वे प्रशासनिक सेवाओं सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकती हैं।
बालिकाओं को अपने जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, समय का सदुपयोग करने तथा अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप भविष्य की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बेटियां अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें और किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास के साथ प्रयास करें।

‘बिटिया @ वर्क’ अभियान के माध्यम से बालिकाओं को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला। शासकीय कार्यालयों के भ्रमण से उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था और जनसेवा से जुड़े कार्यों को नजदीक से समझने का अवसर प्राप्त हुआ। इस पहल के जरिए बालिकाओं में निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व कौशल और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता विकसित करने का संदेश दिया गया।
मिशन शक्ति हब की टीम द्वारा बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनने, अपने अधिकारों एवं अवसरों के प्रति जागरूक रहने तथा जीवन में आने वाली चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें बताया गया कि शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां न केवल अपने परिवार की प्रगति में योगदान देती हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अभियान के माध्यम से बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि उनकी प्रतिभा और क्षमताओं के विकास के लिए शिक्षा सबसे सशक्त माध्यम है। उचित मार्गदर्शन, अवसर और निरंतर प्रयास से वे भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, शिक्षक, वैज्ञानिक, उद्यमी और अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं में अपनी पहचान स्थापित कर सकती हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की यह पहल बालिकाओं को शासकीय कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के साथ ही उनके भीतर बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। ‘बिटिया @ वर्क’ अभियान के जरिए बेटियों को यह प्रेरणा दी गई कि वे अपनी शिक्षा, प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।


























 

 


सितंबर-अक्टूबर का चावल नहीं होगा लैप्स, दो माह का चावल जो नहीं ले पाए वे अब 15 अक्टूबर तक ले सकेंगे

04-Oct-2026
रायपुर। राज्य सरकार ने सितंबर-अक्टूबर का चावल एक माह में देने का फैसला लिया था। इसके लिए लोगों को 30 सितंबर तक का समय दिया गया था। लेकिन जो तय समय में राशन नहीं ले पाए हैं उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे सभी लोग अब 15 अक्टूबर तक चावल ले सकेंगे। इसके लिए 1 अक्टूबर को ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया गया है।
राशन दुकानदारों तक भी यह आदेश पहुंचा दिया गया है कि अब उन्हें दो माह का चावल 15 अक्टूबर तक देना है। कोर पीडीएस सिस्टम के तहत लोग शहर के किसी भी राशन दुकान से चावल ले सकते हैं। खाद्य संचालनालय की ओर से सभी खाद्य नियंत्रकों और खाद्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में राशन दुकानों को नई समय-सीमा की जानकारी पहुंचा दें।
कोई भी दुकानदार लोगों को चावल देने से मना करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। छूटे हुए लोगों को हर हाल में सितंबर और अक्टूबर का चावल देना ही होगा। दरअसल नागरिक आपूर्ति निगम की ओर से तय समय में सभी राशन दुकानों में दो माह का चावल नहीं पहुंचाया जा सका था।
इसके बाद ही यह तय हो गया था कि लोगों को चावल लेने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। चावल आपूर्ति समय पर नहीं होने की वजह से नान के जिला प्रबंधक को भी हटा दिया गया है। अभी नए प्रबंधक त्रिनाथ रेड्डी काम संभाल रहे हैं।

भारतीय संस्कृति ज्ञान-परीक्षा में 25 हजार विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

04-Oct-2026
रायपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 3 अक्टूबर को संपन्न हुई। रायपुर जिले में करीब 25 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। राजधानी के शासकीय जेआर दानी कन्या विद्यालय की करीब 1000 छात्राओं ने भी उत्साह के साथ परीक्षा दी।
परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। इसके माध्यम से बच्चों को अनुशासन, बड़ों का सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जाती है। साथ ही जल और ऊर्जा संरक्षण तथा पर्यावरण सुरक्षा जैसे विषयों के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया जाता है।
प्राचार्य बोले-तकनीकी शिक्षा जरूरी
शासकीय जेआर दानी कन्या विद्यालय के प्राचार्य हितेष दीवान ने कहा कि आज के समय में तकनीकी शिक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति और संस्कारों की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है। दोनों के बीच संतुलन से विद्यार्थियों का बेहतर विकास हो सकता है।
परीक्षा में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़े सवालों के जवाब दिए। आयोजकों के अनुसार परीक्षा के जरिए बच्चों में अपनी संस्कृति को जानने और समझने की रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उन्हें पढ़ाई के साथ सामाजिक और नैतिक मूल्यों की जानकारी भी मिलती है।
परीक्षा के संचालन में छत्तीसगढ़ प्रभारी डीपी चंद्राकर, रामपाल तिवारी, रविशंकर गुप्ता सहित गायत्री परिवार के प्रतिनिधियों और स्कूल स्टाफ का सहयोग रहा। इस दौरान प्राचार्य हितेष दीवान, समिधा उपासने, क्रांति चंद्रा, डॉ. वैजयंती गुप्ता, मीनू पांडेय, ज्योति सक्सेना, सुषमा शर्मा सहित स्कूल स्टाफ मौजूद रहा।
 

आत्मानंद स्कूलों में 1812 पदों पर होगी शिक्षकों की नियुक्ति, डीपीआई ने जारी किया आदेश

04-Oct-2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट स्कूलों में नौकरी का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने प्रदेश के स्कूलों में 1812 पदों पर संविदा भर्ती का विज्ञापन जारी किया है।
इन पदों पर शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया केंद्रीकृत तरीके से होगी। इच्छुक अभ्यर्थी शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

व्याख्याता के 518, सहायक शिक्षक के 590 पद
भर्ती में व्याख्याता के 518 पद हैं। इनमें वाणिज्य के 104, अंग्रेजी के 65, गणित के 49, भौतिकी के 53, हिंदी के 51, संस्कृत के 47, रसायन शास्त्र के 44 और जीव विज्ञान के 39 पद शामिल हैं। सामाजिक विज्ञान के 52 पद भी हैं।
सहायक शिक्षक के सबसे ज्यादा 590 पद हैं। इसके अलावा अंग्रेजी शिक्षक के 106, कला के 72, गणित के 68, विज्ञान के 56 और हिंदी/संस्कृत के 34 पद हैं।
गैर-शैक्षणिक और अन्य पदों में प्राथमिक प्रधानपाठक के 27, पूर्व माध्यमिक प्रधानपाठक के 24, प्रयोगशाला सहायक के 170, ग्रंथपाल के 60, व्यायाम शिक्षक के 50 और कंप्यूटर शिक्षक के 40 पद शामिल हैं।

दुर्ग में सबसे ज्यादा पद
जिलावार भर्ती में दुर्ग में सबसे ज्यादा 229 पद हैं। रायपुर में 141, बेमेतरा में 103, बिलासपुर में 97, कोरबा में 87, कांकेर में 85 और मुंगेली में 82 पद हैं। सक्ती में 73, सरगुजा में 72, बलौदाबाजार और बीजापुर में 61-61 पद हैं। सुकमा में 9 और कोरिया में सबसे कम 8 पद हैं।

इस तरह करें आवेदन

अभ्यर्थी eduportal.cg.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से पहले पदवार योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण और मानदेय की शर्तें आधिकारिक विज्ञापन में जरूर देखनी होंगी।

स्वच्छता पखवाड़ा में गूंजा स्वच्छता का संदेश, विद्यालयों में मनाया गया हाथ धुलाई दिवस

08-Sep-2026
रायपुर: स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत सूरजपुर जिले  शासकीय विद्यालयों में हाथ धुलाई दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस दौरान जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को हाथों की नियमित सफाई, व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ शौचालय और स्वच्छ विद्यालय परिसर के महत्व की जानकारी दी गई। बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ स्वच्छता को अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इसी क्रम में शासकीय माध्यमिक शाला पतरापाली में प्रार्थना सभा के दौरान हाथ धुलाई दिवस का आयोजन किया गया। शिक्षिका ने विद्यार्थियों को साबुन से हाथ धोने की सही विधि का प्रदर्शन कराते हुए हाथ धुलाई के विभिन्न चरणों का अभ्यास कराया। विद्यार्थियों को भोजन से पहले और बाद में, शौचालय के उपयोग के पश्चात तथा गंदगी के संपर्क में आने पर साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में जलजनित बीमारियों से बचाव, सुरक्षित पेयजल के उपयोग, स्वच्छ शौचालय तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के संबंध में भी जानकारी दी गई। शिक्षकों ने समझाया कि साबुन से नियमित रूप से हाथ धोने की आदत संक्रमण और कई बीमारियों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हाथ धुलाई दिवस के दौरान विद्यार्थियों को जल संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया। बच्चों को बताया गया कि हाथ धोते समय नल को अनावश्यक रूप से खुला नहीं छोड़ना चाहिए और आवश्यकता के अनुसार ही पानी का उपयोग करना चाहिए। विद्यार्थियों को पानी की प्रत्येक बूंद के महत्व को समझाते हुए घर और विद्यालय दोनों स्थानों पर जल संरक्षण की आदत अपनाने का संदेश दिया गया।
शिक्षकों ने कहा कि स्वच्छता केवल एक दिन या अभियान तक सीमित रहने वाली गतिविधि नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक दैनिक आदत है। विद्यार्थियों को नियमित हाथ धुलाई, व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ विद्यालय परिसर और जल संरक्षण को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने स्वच्छता, नियमित हाथ धुलाई, स्वच्छ वातावरण और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रधानपाठक, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
 


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