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पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी, जींद से रवाना हुई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

17-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के रूट पर चलेगी। इस ऐतिहासिक मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मौजूद रहे। हरी झंडी दिखाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्टेशन पर उपस्थित लोगों और स्कूली छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया।
ट्रेन के पहले सफर पर स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लिए बेहद उत्साहित नजर आए। बच्चों ने ग्रीन ट्रांसपोर्ट का यह अनुभव बेहद यादगार बताया।
हाइड्रोजन ट्रेन को रवाना करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी जींद के एकलव्य स्टेडियम पहुंचे, जहां उन्होंने 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और कुछ को राष्ट्र को समर्पित किया।
मुख्य परियोजनाएं:
– दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (पैकेज 1-5): 157.92 किमी लंबा, 4-लेन एक्सप्रेसवे (9,680 करोड़ रुपये)
– दिल्ली-कटरा यात्रा समय: 14 घंटे से घटकर 6 घंटे
– दिल्ली-अमृतसर यात्रा समय: 8 घंटे से घटकर 4 घंटे
– अंबाला-काला अंब राजमार्ग: 33.81 किमी, 4-लेन (NH-7 और NH-344)
– जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग: 40.60 किमी (NH-352A)
– हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड राजमार्ग की आधारशिला
इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रधानमंत्री का साफा पहनाकर और उपहार भेंट कर स्वागत किया।देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का आज का यह लॉन्च स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भर भारत और ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

 

 


NCR में गर्मी और उमस का येलो अलर्ट, 18 जुलाई से बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू होने की संभावना

17-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) दिल्ली और आस-पास के लोगों को शुक्रवार 17 जुलाई को भी भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आज के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने दोपहर के समय गर्म और उमस भरे मौसम की चेतावनी दी है। हालांकि राहत की बात यह है कि 18 जुलाई से मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कई दिनों तक गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।
मौसम विभाग के अनुसार, 17 जुलाई को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) 70 से 50 प्रतिशत के बीच रह सकती है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ गरज और बिजली चमकने की संभावना जताई गई है। विभाग ने विशेष रूप से दोपहर के समय हॉट एंड ह्यूमिड परिस्थितियों के चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, 18 जुलाई से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस दिन अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आर्द्रता 70 से 55 प्रतिशत के बीच रहेगी। पूर्वानुमान में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। तेज हवाओं और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
इसके बाद 19 जुलाई को अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आर्द्रता 75 से 60 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इस दिन भी गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान है। हालांकि, विभाग ने इस दिन के लिए किसी विशेष चेतावनी की आवश्यकता नहीं बताई है।
20 जुलाई को अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस दिन भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। 21 जुलाई को तापमान और नीचे आकर 33/25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है, जबकि आर्द्रता 90 से 70 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इसी तरह 22 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में लगातार होने वाली बारिश और तेज हवाओं के कारण एनसीआर में पिछले कई दिनों से बनी भीषण गर्मी और उमस से लोगों को काफी राहत मिलेगी।





 

 


पहली हाइड्रोजन ट्रेन पर सफर कर रहे छात्रों में उत्साह, कहा- ‘भारत की पहली प्रदूषणमुक्त ट्रेन का सफर गर्व की बात

17-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)भारत रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पीएम मोदी हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उद्घाटन के दौरान ट्रेन को फूलों और गुब्बारों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। यह अत्याधुनिक ट्रेन जींद–सोनीपत रेलखंड पर नियमित रूप से संचालित की जाएगी। 
हाइड्रोजन ट्रेन में बैठे एक छात्र ने कहा, “यह हाइड्रोजन ट्रेन प्रदूषण नहीं फैलाती है। इसे ‘नमो ग्रीन ट्रेन’ का नाम भी दिया गया है। हमारे लिए यह बहुत गर्व की बात है कि यह भारत की पहली प्रदूषण-मुक्त ट्रेन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हमारे बीच होंगे और हरी झंडी दिखाकर इसका उद्घाटन करेंगे। हमें इसमें पहली बार सफर करने पर गर्व महसूस हो रहा है। यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक पल और बहुत गर्व की बात है।” एक शिक्षक ने बात करते हुए कहा, “यह हमारे बच्चों के लिए सौभाग्य की बात है कि हमें इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने का मौका मिला।”
हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रेन मैनेजर नितिन पारिख ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह हाइड्रोजन से चलने वाली दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन है और सबसे ज्यादा प्रदूषण मुक्त ट्रेनों में से एक है। यह हाइड्रोजन से चलती है और इससे सिर्फ़ पानी निकलता है, किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं होता। हमने इलेक्ट्रिक, डीज़ल और सीएनजी ट्रेनों के सफल ट्रायल पहले ही कर लिए हैं, लेकिन यह अपनी तरह की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है जिसमें 10 कोच हैं।”
बता दें कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भारत में ही डिजाइन, इंजीनियरिंग और एकीकृत की गई है। यह ट्रेन स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग में देश की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। इसके साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें परिचालन में हैं।
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है, जो हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करके ट्रेन को आगे बढ़ाती है। इस प्रक्रिया में सिर्फ जल वाष्प उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप रेल संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है।
भारत की हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच हैं। इस तरह यह अब तक विकसित की गई सबसे लंबी हाइड्रोजन-चालित यात्री ट्रेनों में से एक बन गई है। यह 3,200 एचपी प्रणोदन प्रणाली से संचालित है, जो इसे परिचालन में मौजूद सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनों में से एक है।









 

पीएम मोदी ने जींद में 14,700 करोड़ की परियोजनाओं का किया उद्घाटन-शिलान्यास, विकास की नई पटरी पर हरियाणा

17-Jul-2026
नई दिल्ली(शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूरा हरियाणा अब विकास की नई पटरी पर चल पड़ा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जींद की जनता को ‘राम-राम’ करते हुए संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा, “मेरे लिए जींद आना पुरानी यादों का झरोखा खोलने जैसा है। जींद के घी और घेवर तो नहीं बदले, लेकिन जींद के तेवर बदल गए हैं। आज जींद भाजपा-एनडीए के सुशासन मॉडल की तस्वीर बन रहा है।”
पीएम मोदी के संबोधन के प्रमुख अंश:
– “आज जींद का हरियाणा का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। आज यहां से देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली है।”
– “भविष्य में जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र आएगा, तो जींद, सोनीपत और हरियाणा का नाम आएगा।”
– स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने जींद और हरियाणा के लोगों की सराहना की और कहा कि अगर लोग तय कर लें तो जींद कभी गंदा नहीं हो सकता।
– दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (157.92 किमी)
– अंबाला-काला अंब 4-लेन राजमार्ग (33.81 किमी)
– जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग (40.60 किमी)
– हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड हाईवे (24.27 किमी) – शिलान्यास
– कुरुक्षेत्र एलिवेटेड रेलवे ट्रैक
– भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा सरकारी मेडिकल कॉलेज
– नारनौल में महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज और राव तुला राम अस्पताल
– कुरुक्षेत्र में सिख म्यूजियम – शिलान्यास
– प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चाबियां
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया था। डबल इंजन सरकार के मिशन को नई ऊर्जा देते हुए पीएम मोदी का यह दौरा हरियाणा के विकास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला साबित होगा। 













 

जगन्नाथ रथयात्रा: पीएम मोदी ने पावन रथयात्रा पर दी शुभकामनाएं, कहा- भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी अभिव्यक्ति

16-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आज से विश्व प्रसिद्ध प्रभु जगन्नाथ जी पावन रथयात्रा की शुरुआत हो रही है। ऐसे में पीएम मोदी ने श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा के शुभारंभ पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कामना की कि महाप्रभु जगन्नाथ का आशीर्वाद सभी पर सदैव बना रहे। उनकी दिव्य कृपा से सभी देशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो। साथ ही, कहा कि यह रथयात्रा भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी अभिव्यक्ति है।
पीएम मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पवित्र रथयात्रा के शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। यह भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी अभिव्यक्ति है। रथयात्रा से जुड़ी परंपराओं ने भारत और दुनिया भर में कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। ये परंपराएं विनम्रता, सामूहिक भागीदारी और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं।”
उन्होंने प्रार्थना की कि महाप्रभु जगन्नाथ सभी को उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद दें। वे हमें हमारे सभी प्रयासों के लिए शक्ति प्रदान करें और हमारे समाज में एकजुटता की भावना को और मजबूत करें।
एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन अवसर पर मेरी कामना है कि उनका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे। उनकी दिव्य कृपा से सभी देशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो।” इस अवसर पर पीएम मोदी ने ‘संस्कृति सुभाषितम्’ भी शेयर किया। उन्होंने लिखा, “देवदेव जगन्नाथ सुरासुरनमस्कृत। पुण्यश्लोकाव्ययानन्त परमात्मन्नमोऽस्तु ते।”
‘संस्कृति सुभाषितम्’ में कहा गया है, “देवताओं के भी देव और संपूर्ण जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ की देवताओं से लेकर समस्त प्राणी श्रद्धा पूर्वक उपासना करते हैं। उनका यश पवित्र और कल्याणकारी है। वे अविनाशी, अनंत और समस्त प्राणियों के हृदय में विराजमान परमात्मा हैं। ऐसे भगवान जगन्नाथ को बार-बार नमस्कार है।”
वहीं देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा के शुभारंभ पर सभी श्रद्धालुओं को बधाई और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “श्री जगन्नाथ जी की कृपा से आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। जय जगन्नाथ।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पोस्ट किया, “समस्त देशवासियों को श्री जगन्नाथ रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं। विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा अटूट आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। यह पवित्र रथयात्रा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाती है। महाप्रभु जगन्नाथ, वीर बलभद्र व माता सुभद्रा से सभी की सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करता हूं।”
 

IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च, कैप्चा, पॉप-अप, चमकती ग्राफिक्स जैसे कई अनावश्यक चीजें हटाई

16-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने अपनी नई टिकट बुकिंग वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है। रेलवे मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि पिछले दो दशकों में यह वेबसाइट का पहला बड़ा बदलाव है। नई वेबसाइट फिलहाल बीटा वर्जन में उपलब्ध है। यात्री इसका उपयोग कर सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं। अंतिम वर्जन अगले कुछ हफ्तों में जारी किया जाएगा।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, नई वेबसाइट का बीटा वर्जन मौजूदा आईआरसीटीसी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। इसके लिए होमपेज पर एक विशेष लिंक दिया गया है, जिसके माध्यम से यात्री नई वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं। यह पहल रेलवे की डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग अनुभव को बेहतर करने के उद्देश्य से की गई है।
मंत्रालय ने बताया कि वेबसाइट के नए डिजाइन को तैयार करने में मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बातचीत के दौरान छात्रों ने वेबसाइट को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए सुझाव दिए थे। इनमें से कई सुझावों को नई वेबसाइट में शामिल किया गया है।
आईआरसीटीसी की वेबसाइट पहली बार वर्ष 2002 में शुरू की गई थी। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना औसतन 14.5 लाख टिकटों की बुकिंग की जाती है। नई वेबसाइट में साफ-सुथरा इंटरफेस, आसान नेविगेशन और सरल टिकट बुकिंग प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है।
नई वेबसाइट में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिससे टिकट बुकिंग पहले की तुलना में अधिक आसान हो जाएगी। इसमें अनावश्यक कैप्चा, पॉप-अप, चमकती ग्राफिक्स और अन्य बाधक तत्वों को हटा दिया गया है। इसके अलावा यात्रियों को अब सभी श्रेणियों में सीटों की उपलब्धता एक साथ दिखाई देगी, जिससे वे आसानी से विभिन्न विकल्पों की तुलना कर सकेंगे। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, टिकट बुकिंग प्रक्रिया में चेकआउट के चरणों की संख्या कम कर दी गई है। साथ ही पहले से सेव यात्रियों की जानकारी उपलब्ध रहने से बार-बार टिकट बुक करने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
मंत्रालय ने कहा कि बीटा वर्जन लॉन्च करने का उद्देश्य यात्रियों से फीडबैक प्राप्त करना है। उपयोगकर्ताओं के सुझावों के आधार पर वेबसाइट में और सुधार किए जाएंगे। नई वेबसाइट को रेलवे के नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम से भी जोड़ा जाएगा, जिसे समानांतर रूप से अपग्रेड किया जा रहा है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, उन्नत आरक्षण प्रणाली और नई आईआरसीटीसी वेबसाइट का पूर्ण संस्करण अगले कुछ हफ्तों में शुरू किए जाने की संभावना है।

जगन्नाथ रथयात्रा पर नेताओं ने दी शुभकामनाएं, ओम बिरला से लेकर जेपी नड्डा तक ने किया महाप्रभु को नमन

16-Jul-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक श्लोक “नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः।।” साझा किया। उन्होंने आगे लिखा, “श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। महाप्रभु भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा भारतीय संस्कृति की उस शाश्वत चेतना का दिव्य उत्सव है, जहाँ आस्था, अध्यात्म और लोकमंगल का अनुपम संगम साकार होता है।”
ओम बिरला ने लिखा, “यह केवल श्रद्धा और भक्ति का महापर्व ही नहीं, बल्कि हमारी सनातन सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है, जो युगों से जन-जन में विश्वास, समरसता, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता आया है। भगवान श्री जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र एवं माता सुभद्रा की यह पावन यात्रा केवल देवविग्रहों का नगर-भ्रमण नहीं, बल्कि लोक-आस्था की गहराइयों से निकलकर राष्ट्र की आत्मा को स्पर्श करने वाला दिव्य लोकमंगल अभियान है।”
लोकसभा अध्यक्ष ने आगे लिखा, “यह महान परंपरा हमें स्मरण कराती है कि जीवन का सार निरंतर गतिशील रहते हुए धर्म, कर्तव्य, विनम्रता और समर्पण के पथ पर आगे बढ़ने में निहित है तथा समाज और राष्ट्र के व्यापक कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करना ही सच्ची साधना है। इस शुभ अवसर पर महाप्रभु श्री जगन्नाथ के श्रीचरणों में नमन करते हुए राष्ट्र की समृद्धि, समाज की सद्भावपूर्ण एकता तथा प्रत्येक नागरिक के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना करता हूं। जय जगन्नाथ!”
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा महोत्सव के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की प्रतीक यह पावन रथयात्रा सेवा, समर्पण और एकता का संदेश लेकर आती है। आस्था, श्रद्धा और भक्ति से भरी यह यात्रा देशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और आरोग्य लेकर आये, महाप्रभु से यही प्रार्थना है। जय जगन्नाथ!”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान श्री जगन्नाथ जी की पावन रथ यात्रा के शुभारंभ की सभी देशवासियों और श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी, भगवान बलभद्र और देवी मां सुभद्रा की कृपा सभी पर अनवरत बरसती रहे, हर घर-आंगन धन-धान्य से भरा रहे, सबके जीवन में अपार सुख, समृद्धि और आनंद हो, सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो; यही प्रार्थना है। जय जगन्नाथ।”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह दिव्य उत्सव हमारी सनातन आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोककल्याण की भावना का प्रतीक है। महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा से सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करता हूं।”
 

 


विदेश मंत्री एस जयशंकर की ब्रसेल्स में अहम बैठकें, भारत और यूरोपीय संघ ने भविष्य की साझेदारी पर की चर्चा

16-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने बुधवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (ईयू) की स्टार्टअप्स, रिसर्च और इनोवेशन कमिश्नर एकातेरिना जहारिएवा से मुलाकात की। इस बैठक में स्वच्छ और हरित ऊर्जा तकनीकों में रिसर्च, इनोवेशन हब, स्टार्टअप्स और ‘होरिजोन यूरोप’ से जुड़ने के अवसरों पर चर्चा हुई।
बैठक में बेल्जियम और यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत प्रणय वर्मा और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, “आज यूरोपीय संघ की स्टार्टअप्स, रिसर्च और इनोवेशन कमिश्नर एकातेरिना जहारिएवा के साथ अच्छी बैठक हुई। हमने स्वच्छ और हरित ऊर्जा तकनीकों में रिसर्च, इनोवेशन हब, स्टार्टअप्स और होराइजन यूरोप से जुड़ने के अवसरों पर चर्चा की।”
जहारिएवा ने भी ‘एक्‍स’ पर इस मुलाकात के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “ब्रसेल्स में डॉ. एस. जयशंकर और प्रोफेसर सूद का स्वागत करना मेरे लिए सम्मान की बात है। जब यूरोप और भारत मिलकर इनोवेशन करते हैं, तो हम सिर्फ नई तकनीकें विकसित नहीं करते, बल्कि भविष्य को आकार देते हैं।” उन्होंने लिखा, “भारत को होराइजन यूरोप के और करीब लाकर और करीब पांच लाख स्टार्टअप्स को जोड़कर, हम ऐसी साझेदारी बना रहे हैं जो साझा लक्ष्यों को दुनिया भर में असर पैदा करने में मदद करेगी।”
इससे पहले दिन में विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ के इंटरनेशनल पार्टनरशिप कमिश्नर जोजेफ सिकेला से भी मुलाकात की। इस दौरान कनेक्टिविटी, त्रिपक्षीय साझेदारी, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) और ग्रीन शिपिंग जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “आज सुबह यूरोपीय संघ के इंटरनेशनल पार्टनरशिप कमिश्नर जोजेफ सिका से मिलकर खुशी हुई। हमने कनेक्टिविटी, त्रिपक्षीय साझेदारी, आईएमईसी और ग्रीन शिपिंग में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।”
विदेश नंत्री ने ब्रसेल्स में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं उन्हें दीं। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कोस्टा के मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच की सराहना की।
राष्ट्रपति कोस्टा से मुलाकात के बाद जयशंकर ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात करके खुशी हुई। इस दौरान मेरे साथ वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद भी मौजूद थे। मैंने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएं दीं।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस साल की शुरुआत में हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन के बाद साझेदारी में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को सभी ने मिलकर पहचाना। उन्होंने व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कोस्टा के मार्गदर्शन और सकारात्मक भावनाओं की सराहना की। इससे पहले मंगलवार को विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास से भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक बातचीत की थी।
 

रथ यात्रा 2026: भगवान जगन्नाथ का भक्तों से मिलन, आस्था का महासागर

16-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ओडिशा की पवित्र तीर्थनगरी पुरी में दिव्य घटना घटती है। इस दिन यहां भगवान जगन्नाथ का भक्तों से मिलन का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सहित  अपने रत्न सिंहासन से बाहर निकलकर विशाल रथों पर सवार हो भक्तों के बीच आते हैं। लाखों श्रद्धालु “जय जगन्नाथ” के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान बनाते हुए इन रथों को अपनी भक्ति की शक्ति से खींचते हैं। इसलिए इस दिव्य दिन को आस्था का महासागर भी कहा जाता है।  
यह महोत्सव केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि ईश्वर और मनुष्य के बीच प्रेम का जीवंत प्रतीक है— जहां भक्त भगवान के द्वार पर नहीं, बल्कि भगवान खुद रथ पर सवार होकर भक्तों के पास आते हैं। इस बार यह रथ यात्रा आज गुरुवार 16 जुलाई को शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगी। इन नौ दिनों में ओडिशा का पुरी आध्यात्मिकता, भक्ति और सनातन संस्कृति का जीवंत केंद्र बन जाएगा।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पवित्र रथयात्रा के शुभ अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। यह भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी अभिव्यक्ति है। रथयात्रा से जुड़ी परंपराओं ने भारत और दुनिया भर में कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। ये परंपराएं विनम्रता, सामूहिक भागीदारी और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं।”
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रथ यात्रा का महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे प्राचीन, सबसे बड़े और सबसे भावपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसका इतिहास एक हजार वर्ष से भी पुराना है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं और वे मंदिर की चार दीवारियों में कैद नहीं रहते। भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का रूप), बलभद्र और सुभद्रा साल में एक बार अपने भक्तों से सीधे मिलने के लिए गुंडिचा मंदिर (अपनी मौसी के घर) की यात्रा करते हैं।इस यात्रा का सबसे गहरा संदेश समता और समावेश का है। इसलिए इस रथ यात्रा को सनातन परंपरा का अभिन्न अंग भी कहा जाता है। इस यात्रा के दौरान सभी वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के भगवान के दर्शन करते हैं। यह उत्सव समता का संदेश देता है — राजा से लेकर आम भक्त तक सब रथ खींचने में समान रूप से भाग लेते हैं। रथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर (मौसी का घर) तक ले जाना है, जहां वे सात दिन रहकर वापस लौटते हैं।
1. गुंडिचा मंदिर की कहानी (मौसी का घर) : सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, देवी सुभद्रा ने अपनी बुआ (गुंडिचा) के घर जाने की इच्छा प्रकट की। भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रथ यात्रा की। यह कथा स्कंद पुराण और स्थानीय परंपराओं में वर्णित है। यही प्रतीकात्मक यात्रा हर साल दोहराई जाती है। देवता सात दिन तक गुंडिचा मंदिर में रहकर फिर बहुड़ा यात्रा के रूप में वापस लौटते हैं।
2. वृंदावन और कृष्ण की याद: एक अन्य मान्यता गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़ी है। गौड़ीय वैष्णव परंपरा और ISKCON के अनुसार, यह यात्रा भगवान कृष्ण की वृंदावन लीला और गोपियों के प्रेम से प्रेरित मानी जाती है। कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में गोपियों ने कृष्ण को शाही रूप में नहीं, बल्कि वृंदावन के सांवले घनश्याम के रूप में वापस लाना चाहा। भक्तों की असीम प्रेम-भक्ति ने रथ को खींचा और कृष्ण को उनके प्रेम-धाम की ओर ले गई। रथ यात्रा उसी दिव्य प्रेम और विरह-मिलन की कहानी को जीवंत करती है।
3. भक्त सालबेगा की कथा: 17वीं शताब्दी के भक्त कवि सालबेगा (मुस्लिम पिता और हिंदू मां की संतान) जगन्नाथ भक्ति के प्रतीक हैं। उनकी गहरी भक्ति के कारण रथ उनकी समाधि के पास रुकता है। यह घटना धार्मिक सद्भाव का उदाहरण है और श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपरा में सम्मिलित है।
4. मानवीय स्पर्श वाली कथा: एक कथा यह भी प्रचलित है कि देवा स्नान पूर्णिमा के बाद देवता “बीमार” पड़ जाते हैं। कुछ दिनों तक वे आराम करते हैं, उनकी सेवा ठीक उसी तरह की जाती है जैसे परिवार के सदस्य की की जाती है। फिर वे मौसी के घर जाते हैं। यह कथा ईश्वर को इतना निकट और मानवीय बना देती है कि भक्त उन्हें अपना ही समझने लगते हैं।
प्रमुख रस्में
– पहांडी बिजे: देवताओं को मंदिर से बाहर लाने की भावपूर्ण रस्म, जिसमें घंटे, शंख और मंत्रों की धुन के साथ वे झूमते हुए आगे बढ़ते हैं।
– चेरा पहरा: पुरी के गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से रथ की सफाई करते हैं। यह दर्शाता है कि भगवान के सामने राजा भी सेवक है।
– गुंडिचा यात्रा: देवताओं का मौसी के घर जाना।बहुड़ा यात्रा: वापसी यात्रा।सुना बेषा: स्वर्ण आभूषणों से सजावट।
– नीलाद्रि बिजे: मंदिर वापसी की अंतिम रस्म।
रथों का निर्माण और विशेषताएं
जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं। अक्षय तृतीया से शुरू होकर दो महीने तक काम चलता है। लकड़ी दासपल्ला क्षेत्र के विशेष वृक्षों (फस्सी, धौसा इत्यादि) से ली जाती है। बढ़ई (दरुण) परिवारों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह कार्य किया जाता है।
– नंदीघोष — भगवान जगन्नाथ का रथ (लगभग 45 फीट ऊंचा, 16 पहिए, लाल-पीला रंग)।
– तालध्वज — भगवान बलभद्र का रथ (लगभग 44 फीट ऊंचा, 14 पहिए, लाल-हरा रंग)।
– दर्पदलन — देवी सुभद्रा का रथ (लगभग 43 फीट ऊंचा, 12 पहिए, लाल-काला रंग)।
रथों पर लकड़ी के घोड़े लगाए जाते हैं और पारंपरिक सजावट की जाती है।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयाम
रथ यात्रा ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर ले जाती है। इसमें महाप्रसाद, पारंपरिक संगीत, भजन और कला (जैसे पट्टचित्र, अप्लिक वर्क) सम्मिलित होते हैं। यह उत्सव भक्ति को लोकतंत्र से जोड़ता है और सभी को समान अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष 2026 की रथ यात्रा में भी यही परंपराएं निभाई जाएंगी। इस यात्रा का गहरा आध्यात्मिक महत्व है और कई लोगों का मानना ​​है कि रथों या उन्हें खींचने वाली रस्सियों को छूने मात्र से ही ईश्वरीय कृपा मिलती है और उनके जीवन के कष्ट मिट जाते हैं।
 

भारत-ब्रिटेन एफटीए के बाद ब्रिटिश एयरवेज का बड़ा फैसला, भारत के लिए बढ़ाएगी उड़ानें

15-Jul-2026
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। इसी को देखते हुए ब्रिटिश एयरवेज ने भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार करने की घोषणा की है।
ब्रिटिश एयरवेज के महाप्रबंधक डेविड राइट ने कहा कि एयरलाइन इस वर्ष शीतकालीन समय-सारिणी से भारत के लिए अपनी साप्ताहिक उड़ानों की संख्या 63 से बढ़ाकर 70 करेगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत और ब्रिटेन के मजबूत होते आर्थिक संबंधों में कंपनी के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
उन्होंने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक समझौता बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापारिक अवसरों को नई गति मिलेगी।
डेविड राइट ने कहा कि भारत, ब्रिटिश एयरवेज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है और कंपनी भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए उत्सुक है।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश एयरवेज का मुख्य उद्देश्य भारत के यात्रियों, कारोबार और समुदायों को ब्रिटेन तथा अपने वैश्विक नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ना है। साथ ही, मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले व्यापार और निवेश के अवसरों को भी बढ़ावा देना है।
राइट ने कहा कि इस समझौते का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच आपसी संपर्क को भी नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ब्रिटिश एयरवेज पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से भारत में सेवाएं दे रही है और इस दौरान दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों की साक्षी रही है।
उन्होंने कहा कि विमानन क्षेत्र व्यापार, निवेश, पर्यटन और शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।



 



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