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भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पहुंचा श्रीलंका, पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी

06-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचे, जहां इनकी प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यह पहल गहन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व का क्षण है, जो भारत व श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत में निहित स्थायी संबंधों को और मजबूत करता है।
ये पवित्र अवशेष भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान से श्रीलंका पहुंचे और भारत-श्रीलंका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान दिया गया। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ आया था। इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी शामिल थे।
यह प्रदर्शनी पीएम मोदी की अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जिसमें उन्होंने श्रीलंका के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। इस यात्रा के दौरान, पीएम ने बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 2020 में घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त, अनुराधापुरा में पवित्र नगर परिसर परियोजना के विकास के लिए अनुदान सहायता की भी घोषणा की थी।
पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 4 फरवरी, 2026 को कोलंबो के गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने और गुजरात के राज्यपाल तथा उपमुख्यमंत्री ने मिलकर किया। इस अवसर पर गंगारामया मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. किरिंदे असाजी थेरो भी उपस्थित थे।
इस अवसर श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर में “पवित्र पिपरावा का अनावरण” और “समकालीन भारत के पवित्र अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव” शीर्षक से दो प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया गया।
पवित्र अवशेषों का पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विधिपूर्वक स्वागत किया गया और उन्हें गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया। यह प्रदर्शनी 5 फरवरी 2026 से आम जनता के लिए खुली रहेगी, जिससे श्रीलंका और दुनिया भर के श्रद्धालु श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ये पवित्र अवशेष वहां पहुंचे जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया। यह प्रदर्शनी भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी है। इससे पहले, भारत ने श्रीलंका में वर्ष 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों की प्रदर्शनी और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित की थी।
देवनीमोरी के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के दिए करुणा, शांति और अहिंसा के संदेश का जीवंत प्रमाण है। यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-संबंध और भी मजबूत होते हैं।
 

ट्रंप का बयान: चैटजीपीटी का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन एआई इंटरफेस को बताया अहम

06-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने चैटजीपीटी जैसे एआई इंटरफेस का इस्तेमाल नहीं किया, फिर भी उन्हें लगता है ये बहुत अहम है। उन्होंने ये भी कहा कि वो एआई के मामले में चीन से काफी आगे हैं और भविष्य में इस क्षेत्र में और अधिक निवेश के लिए भी तैयार हैं।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट एनबीसी न्यूज से बातचीत में माना कि एआई टूल का उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया है लेकिन इसके बारे में वो सब कुछ जानते हैं। एआई से अमेरिका में लेऑफ और अमेरिका की तैयारी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने अपनी तैयारियों पर राय रखी और माना कि वो इस मामले में बीजिंग से काफी आगे हैं।
ट्रंप ने कहा, “हम चीन से काफी आगे हैं। एआई रेस में अमेरिका चीन से ही नहीं, पूरी दुनिया से भी काफी आगे है।” उन्होंने आगे कहा, “एआई और ऑटोमोबाइल कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्रियां बना रही हैं। एआई को बहुत ज्यादा बिजली चाहिए, इसलिए उनकी योजना है कि हर नई फैक्ट्री बिजली खुद बनाएगी।”
दावा किया कि अमेरिका में एआई, ऑटो प्लांट और दूसरी इंडस्ट्रीज बड़े पैमाने पर बन रही हैं और देश हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।” एआई के कारण ले ऑफ वाले सवाल पर ट्रंप ने कहा, ” कहा गया था कि इंटरनेट नौकरियां खत्म कर देगा, रोबोट नौकरियां खत्म कर देंगे, सब कुछ नौकरियां खत्म कर देगा और अगर आप स्मार्ट हैं, तो आप आखिर में बहुत अच्छा करते हैं।”
इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने एआई टूल इस्तेमाल न करने की भी बात कही। माना कि उन्होंने चैट जीपीटी और क्लाउड जैसे बहुचर्चित एआई इंटरफेस का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने कहा, “मैंने सच में नहीं किया है, लेकिन मुझे इसके बारे में सब पता है। मुझे लगता है ये बहुत महत्वपूर्ण है।”
बुधवार रात टीवी पर प्रसारित शो में ट्रंप ने माना कि अमेरिका का राष्ट्रपति होना उनके लिए सबसे मुश्किल काम है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति बनना सबसे खतरनाक काम है। मुझे अपनी सुरक्षा की चिंता रहती है, लेकिन इस डर को मन से निकालना पड़ता है।”

9 फरवरी से बेंगलुरु मेट्रो का किराया 5 प्रतिशत होगा महंगा

06-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर किराए में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की। नई दरें 9 फरवरी से लागू होंगी। बीएमआरसीएल के जनसंपर्क अधिकारी बीएल यशवंत चौहान ने बताया, “किराया निर्धारण समिति के अनुसार, हर साल एक फॉर्मूले के तहत प्रतिशत के आधार पर गणना की जाती है। इसमें अधिकतम 5 प्रतिशत और न्यूनतम 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है। जब गणना की गई, तो 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की जरूरत थी। चूंकि इसे लागू नहीं किया जा सकता था, इसलिए एफएफसी के अनुसार, सिर्फ 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।”
उन्होंने बताया कि नई दरों के लागू होने के बाद न्यूनतम किराया 10 रुपए से बढ़ाकर 11 रुपए और अधिकतम किराया 90 रुपए से बढ़ाकर 95 रुपए होगा।
बयान में कहा गया है, “एफएफसी ने बीएमआरसीएल के लिए संशोधित किराया संरचना की सिफारिश करते हुए पाया कि 7.5 साल बाद किराए में बदलाव और किराया जोन को 29 से घटाकर 10 करने से किराए में औसतन 51.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। भविष्य में बार-बार और अचानक किराए में बढ़ोतरी जैसी स्थिति से बचने के लिए समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि किराए को सालाना आधार पर रिवाइज किया जाए, जिसके लिए एक पारदर्शी वार्षिक ऑटोमैटिक किराया संशोधन फॉर्मूला हो, जो ऑपरेशन और मैनेजमेंट लागत या 5 प्रतिशत प्रति साल, जो भी कम हो, से जुड़ा हो और इसे निकटतम रुपए में राउंड ऑफ किया जाए।”
अधिकारियों ने बताया कि एफएफसी की सिफारिशों बीएमआरसीएल पर बाध्यकारी हैं। सिफारिशों के अनुसार, यह सूचित किया जाता है कि वार्षिक ऑटोमैटिक किराया संशोधन 9 फरवरी से लागू होगा, जो बीएमआरसीएल की ओर से एफएफसी के सुझाए गए किराए को लागू करने की तारीख से 1 साल पूरा होने पर होगा।
बीएमआरसीएल ने बताया कि 96.10 किलोमीटर के अपने पूरे नेटवर्क पर 10 किराया जोन में मामूली बढ़ोतरी न्यूनतम 1 रुपए और अधिकतम 5 रुपए है। बयान में कहा गया।” वित्तीय वर्ष 2024-25 के ऑडिट किए गए वित्तीय डेटा के आधार पर फॉर्मूला-आधारित इंडेक्स 10.20 प्रतिशत की लागत वृद्धि दिखाता है। हालांकि, एफएफसी की शर्त के अनुसार, किराए में बढ़ोतरी सिर्फ 5 प्रतिशत तक सीमित रखी गई है।
नई दरों के बाद जीरो से दो किलोमीटर मेट्रो यात्रा का किराया 10 रुपए की जगह 11.2 रुपए होगा, 4 किलोमीटर के लिए 21.4 रुपए और इसी तरह आगे भी। बीएमआरसीएल ने कहा कि वह स्मार्ट-कार्ड, एनसीएमसी यूजर्स के लिए सभी मौजूदा यात्री-अनुकूल छूट जारी रखेगा, जैसे पीक आवर्स के दौरान 5 प्रतिशत छूट, रविवार को और तीन नेशनल हाईवे पर नॉन-पीक आवर्स के दौरान 10 प्रतिशत छूट। हालांकि, टूरिस्ट कार्ड और ग्रुप टिकट पर 5 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी लागू होगी।
बयान में कहा गया है, “बीएमआरसीएल का फोकस यह है कि यह छोटा सालाना बदलाव फाइनेंशियल स्थिरता और सर्विस की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि भविष्य में बड़े और अचानक किराए में बढ़ोतरी की जरूरत न पड़े। यह तरीका किराए को महंगाई और ऑपरेटिंग लागत के हिसाब से धीरे-धीरे बढ़ने देता है, जिससे यात्रियों को अचानक, बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से बचाया जा सके।”

एस. जयशंकर का अमेरिका दौरा संपन्न, भारत-यूएस व्यापार समझौते की डिटेलिंग पर दी अहम जानकारी

05-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तीन दिवसीय दौरे पर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका में थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। ईएएम जयशंकर ने अमेरिकी दौरे को प्रोडक्टिव और सकारात्मक बताया। उन्होंने ऐतिहासिक व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंध में मजबूत रफ्तार साफ दिख रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर ईएएम एस. जयशंकर ने लिखा, “अमेरिका का एक प्रोडक्टिव और सकारात्मक दौरा खत्म हुआ। सेक्रेटरी रुबियो को उनकी अच्छी मेहमान नवाजी के लिए धन्यवाद। ऐतिहासिक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता डिटेलिंग के आखिरी स्टेज में है जो बहुत जल्द पूरी हो जाएगी। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया दौर शुरू करता है, जिसमें संबंधों के लिए बहुत सारी संभावनाएं हैं।”
उन्होंने कहा कि हमारा जरूरी खनिज सहयोग भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर बातचीत की उम्मीद है। कुल मिलाकर एक मजबूत मोमेंटम दिख रहा है।
इस अहम दौरे में विदेश मंत्री ने अमेरिकी सरकार के सीनियर सदस्यों के साथ मीटिंग भी की। इसमें अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ अलग-अलग मीटिंग शामिल थीं। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर बड़े पैमाने पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि रुबियो के साथ बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध के कई अहम पहलुओं पर बात हुई। ईएएम जयशंकर ने कहा, “भारत-यूएस रणनीतिक साझेदारी के जिन पहलुओं पर बात हुई, उनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, जरूरी खनिज और तकनीक शामिल थे।”

विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष फॉलो-अप कामों पर तेजी से आगे बढ़ने पर सहमत हुए। हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों की जल्द मीटिंग पर सहमति हुई। अमेरिकी विभाग की ओर से साझा जानकारी के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर और रुबियो ने जरूरी मिनरल्स की खोज, माइनिंग और प्रोसेसिंग पर द्विपक्षीय सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो भारत-अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक संबंध का एक अहम हिस्सा बनकर उभरा है।
बुधवार को हुई यह मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद हुई, जिसका मकसद दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रुकावटों को कम करना और मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है।
 

फिर गरजेंगे भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट, ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर 27 फरवरी को होगा अभ्यास

05-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) सीमा के पास एक बार फिर भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट गरजते नजर आएंगे। ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर 27 फरवरी को अभ्यास के लिए वायुसेना अपनी पूरी ताकत मैदान में उतारेगी। ऑपरेशन सिंदूर में अपना पराक्रम दिखा चुकी भारतीय वायुसेना अब जैसलमेर में इस साल का पहला और सबसे बड़ा वायु सैन्य अभ्यास करने जा रही है। इस अभ्यास का नाम वायु शक्ति 2026 है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस अभ्यास में वायुसेना के वेस्टर्न और साउथ वेस्टर्न कमांड के एयरबेस और उनके असेट्स हिस्सा ले रहे हैं। सभी यूनिट्स को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया गया है। 100 से ज्यादा एयरक्राफ्ट इस अभ्यास में शिरकत करने वाले हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में शामिल वायुसेना के लगभग सभी लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम इस अभ्यास में भाग लेंगे। रक्षा अधिकारियों के अनुसार राफेल, सुखोई-30, तेजस, मिग-29, जगुआर, मिराज-2000 और हॉक एयरक्राफ्ट सटीक निशाना साधते नजर आएंगे। चूंकि मिग-21 विमान वायुसेना से रिटायर हो चुके हैं, इसलिए पहली बार वे इस वायु सैन्य अभ्यास में दिखाई नहीं देंगे। इसके अलावा अटैक हेलीकॉप्टर प्रचंड को भी रॉकेट दागते हुए देखा जाएगा।
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, “यह अभ्यास एक काल्पनिक युद्ध का माहौल बनाकर किया जाएगा। पूरे अभ्यास को वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) के जरिए मॉनिटर और कंट्रोल किया जाएगा।” गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आईएसीसीएस ने हर एक पाकिस्तानी जेट, मिसाइल और ड्रोन पर नजर रखी थी। थलसेना का आकाश तीर सिस्टम भी इसी आईएसीसीएस से जुड़ा हुआ था। वायुसेना के सभी हाई-पावर, लॉन्ग-रेंज, मीडियम-रेंज और शॉर्ट-रेंज रडार से मिलने वाली जानकारियों से एक कंप्लीट एयर पिक्चर तैयार की जाती रही, जिसके आधार पर हर एरियल खतरे को एंगेज किया गया।
भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स के साथ-साथ फिक्स्ड-विंग ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट यूनिट के सी-130जी और सी-295, हेलीकॉप्टर यूनिट के प्रचंड, चिनूक, एमआई-17 और एएलएच, ड्रोन तथा ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए लॉयटरिंग म्यूनिशन का भी उपयोग किया जाएगा। पहली बार वायु शक्ति अभ्यास में सी-295 नाइट असॉल्ट लैंडिंग ड्रिल को अंजाम देगा। इसके अलावा सी-130J सुपर हरक्यूलिस छोटे रनवे पर लैंड कर गरुड़ कमांडो को वॉर जोन में उतारने के बाद कुछ ही समय में दोबारा टेक-ऑफ करता नजर आएगा। इस दौरान दो अटैक हेलीकॉप्टर पूरे ऑपरेशन एरिया को सुरक्षित रखेंगे। भारतीय वायुसेना के इस अभ्यास की जानकारी पाकिस्तान को भी है, जिसके लिए एनओटीएएम जारी किया गया है। हालांकि पाकिस्तान की फितरत को देखते हुए वायुसेना ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को भी पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार आईएसीसीएस अटैक और डिफेंस दोनों के लिए पूरे एयरस्पेस की निगरानी करेगा।
एयर डिफेंस की कई लेयर तैयार की गई हैं, जिनमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और ऑपरेशनल रेडीनेस प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसमें आकाश मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ थलसेना की एल-70 गन भी तैनात रहेंगी। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक वायु शक्ति अभ्यास के लिए कई वीवीआईपी को भी आमंत्रित किया गया है। दिल्ली स्थित मित्र देशों के दूतावासों से करीब 40 अधिकारी भी इस अभ्यास को देखने के लिए मौजूद रह सकते हैं।






 

ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता, वेनेजुएला समेत किसी भी नए विकल्पों के मूल्यांकन के लिए तैयार: भारत

05-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत ने कहा है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा है। वह वेनेजुएला समेत किसी भी नए आपूर्ति विकल्प के वाणिज्यिक लाभों का मूल्यांकन करने के लिए तैयार है। भारत ने दोहराया कि वह ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने का पक्षधर है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को यहां साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में एक बार फिर ऊर्जा जरूरतों और लाभकारी मूल्यों को निर्णय का आधार बताया। उन्होंने दोहराया कि भारत आपूर्ति में विविधता लाने का पक्षधर है। भारत की इस टिप्पणी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत रूसी तेल खरीदी बंद करने पर सहमत हो गया है।
जायसवाल ने भारत अमेरिकी समझौते से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रवक्ता ने राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर कहा, “ऊर्जा आपूर्ति के संबंध में सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से बयान दिया है। सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत की रणनीति रही है कि अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बाजार स्थितियों और बदलते वैश्विक घटनाक्रम के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाए। भारत के सभी कदम इसी बात को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं और भविष्य में भी उठाए जाएंगे।”
ट्रम्प के वेनेजुएला से तेल खरीद से संबंधित दावों पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला भारत का ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार और निवेश को लेकर लंबे समय से सहयोगी रहा है। वेनेज़ुएला भारत का 2019-20 तक तेल खरीद का सबसे बड़ा स्रोत रहा है। बाद में प्रतिबंधों के चलते हमने तेल खरीद रोक दी थी। वहीं भारतीय तेल कंपनियों का वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ सहयोग पहले से रहा है। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत वेनेजुएला सहित किसी भी नए कच्चे तेल आपूर्तिकर्ता से जुड़े विकल्पों के वाणिज्यिक फायदों को जानने के लिए तैयार है।

 

एनटीपीसी 2047 तक स्थापित करेगा 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता: श्रीपद नाइक

05-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी वर्ष 2047 तक 30 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना बना रही है। यह जानकारी केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने गुरुवार को संसद में दी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद एनटीपीसी ने कंपनी अधिनियम के तहत एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीयूएनएल) नाम से एक पूर्ण स्वामित्व वाली परमाणु सहायक कंपनी का गठन किया है।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में श्रीपद नाइक ने कहा, “एनटीपीसी का 30 गीगावाट का लक्ष्य सरकार के वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के फैसले का हिस्सा है।”
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एनटीपीसी और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) का संयुक्त उद्यम अनु शक्ति विद्युत निगम लिमिटेड राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में 4X700 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया में है।
इस परियोजना को माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (एमबीआरएपीपी) कहा जाता है। मौजूदा अनुमानों के अनुसार, एमबीआरएपीपी की पहली 700 मेगावाट इकाई का प्रारंभिक परीक्षण वित्त वर्ष 2032-33 तक शुरू होने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विभिन्न विकल्पों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए एनटीपीसी लिमिटेड ने रुचि पत्र (ईओआई) जारी किया है।
एनटीपीसी ने पिछले महीने गुजरात और राजस्थान में अपनी सहायक कंपनियों की विभिन्न सौर परियोजनाओं के जरिए वाणिज्यिक क्षमता में 359.58 मेगावाट की बढ़ोतरी दर्ज की है। इसके साथ ही समूह की कुल वाणिज्यिक क्षमता 85.5 गीगावाट से अधिक हो गई है।
एनटीपीसी देश की करीब एक चौथाई बिजली जरूरतों की पूर्ति में योगदान दे रही है। कंपनी की स्थापित क्षमता 85 गीगावाट से अधिक है, जबकि 30.90 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें 13.3 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है।
कंपनी ने वर्ष 2032 तक 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिससे भारत के नेट जीरो लक्ष्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। थर्मल, हाइड्रो, सौर और पवन ऊर्जा के विविध पोर्टफोलियो के साथ एनटीपीसी देश को विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ बिजली उपलब्ध कराने पर फोकस कर रही है। 





 

भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, वॉशिंगटन पूरी तरह तैयार: सर्जियो गोर

05-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात कर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हाल ही में हुई बातचीत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन नई दिल्ली के साथ संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने वॉशिंगटन में ईएएम एस. जयशंकर की अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ हुई बैठकों की तस्वीरें साझा कीं। इसके साथ उन्होंने कहा, “इस समय सबसे ऊंचे स्तर पर बातचीत हो रही है। अमेरिका इस संबंध को और भी आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। अनलिमिटेड क्षमता।”
ईएएम जयशंकर ने बुधवार को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो द्वारा बुलाई गई क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल मीटिंग में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में जोखिम कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत का समर्थन जताया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो के साथ अलग से बैठक की। बैठक के बाद एक्स पर पोस्ट में उन्होंने कहा, “आज दोपहर अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत व्यापक रही, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग एजेंडा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे शामिल थे।”
ईएएम जयशंकर ने कहा कि बातचीत में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के कई अहम पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें व्यापार, ऊर्जा, न्यूक्लियर, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल रहे। उन्होंने कहा, “हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए जल्द अलग-अलग तरीकों से बैठकें करने पर सहमति बनी है।”
एक अलग पोस्ट में विदेश मंत्री ने अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की जानकारी देते हुए कहा, “आज वॉशिंगटन डीसी में स्कॉट बेसेंट से मिलकर खुशी हुई। भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर उपयोगी चर्चा हुई।”

 

सिख कभी गद्दार नहीं हो सकते, कांग्रेस की मानसिकता में अब भी बदलाव नहीं : मनजिंदर सिंह सिरसा

04-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को संसद के मकर द्वार पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच हुई नोकझोंक पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि कांग्रेस की मानसिकता में अब भी बदलाव नहीं हुआ है और आज हुई घटना उसका जीता जागता प्रमाण है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “राहुल गांधी ने आज संसद में सिख मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ जिस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया, उन्हें गद्दार कहा, इसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह बयान बड़ा शर्मसार करने वाला है।”
उन्होंने कहा कि सिख सरदार है, वह कभी गद्दार नहीं हो सकता। अगर कोई गद्दार है, तो वो गांधी परिवार है, जिन्होंने श्री दरबार साहब के ऊपर तोप-टैंकों से हमला किया, श्री अकाल तख्त साहिब को गिराया और बेकसूर सिखों के गले में टायर डालकर जिंदा जलाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मानसिकता आज भी नहीं बदली है।
सिरसा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं के इस तरह के अपशब्द और सिखों के प्रति नकारात्मक भाव को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि यह न केवल सिखों की तौहीन है बल्कि कांग्रेस की मानसिकता में आज भी वही जहर मौजूद है, जो 1980 के दशक में था।
उन्होंने लोकसभा के स्पीकर से तुरंत कार्यवाही करने की मांग की और कहा कि इस तरह की टिप्पणियों और भावनाओं को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिखों के प्रति यह अपमान और द्वेष कांग्रेस की मानसिकता का हिस्सा है और इसे रोकना जरूरी है।
सिरसा ने साफ कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने जो पाप किए हैं, उन्हें नकारा नहीं जा सकता और उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए। उन्होंने अपील की कि लोकसभा स्पीकर को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि सिखों के प्रति इस तरह की अपमानजनक और नकारात्मक मानसिकता को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
 

सीएम योगी का निर्देश, सीता माता के दिव्य संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगी वैदेही गैलरी

04-Feb-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश )  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीअयोध्या धाम में माता सीता के जीवन-चरित पर केंद्रित ‘वैदेही आर्ट गैलरी’ की स्थापना के निर्देश दिए हैं। बुधवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में उन्होंने कहा कि सीता मइया भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा हैं। नई पीढ़ी को उनके उज्ज्वल और दिव्य चरित्र से गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
आर्ट गैलरी की परिकल्पना साझा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह अत्याधुनिक गैलरी केवल एक कला-संग्रहालय नहीं होगी, बल्कि सीता माता के जीवन, त्याग, करुणा, मर्यादा, धैर्य और शक्ति का आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनर्पाठ प्रस्तुत करने वाली एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभव-स्थली बनेगी।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि गैलरी की कथा-वस्तु, डिजाइन, विज़ुअल भाषा, कला और तकनीक सहित सभी आयाम इस भावना को प्रकट करें कि हम एक दिव्य विरासत का पुनर्पाठ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैदेही आर्ट गैलरी का उद्देश्य यही होना चाहिए कि आगंतुक सीता माता के जीवन-संदेश को केवल देखें ही नहीं, बल्कि उसे अनुभव करें, समझें और आत्मसात करें।
अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निकट स्थित वशिष्ठ भवन परिसर में विकसित की जा सकती है, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
सीएम योगी ने कहा कि वैदेही आर्ट गैलरी का विकास अयोध्या को वैश्विक सांस्कृतिक नगर के रूप में स्थापित करने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण होगा। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिया कि मिथिला की संस्कृति, लोकपरंपरा और कला के विविध आयामों को गैलरी में प्रमुखता के साथ प्रदर्शित किया जाए। 








 



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