ब्रेकिंग न्यूज

Raipur

अगले 48 घंटे भारी वर्षा का अलर्ट, रायपुर समेत कई जिलों में झमाझम बारिश

18-Jul-2026
रायपुर । छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में आज सुबह से झमाझम बारिश हो रही है, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। लगातार बारिश के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
इसके अलावा अगले तीन दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक, तेज हवाओं और वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है।
राजधानी रायपुर में सुबह से लगातार बारिश हो रही है। बादलों की आवाजाही और रुक-रुककर हो रही तेज बारिश से मौसम सुहावना बना हुआ है। बारिश के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली है और अधिकतम तापमान में भी कमी दर्ज की गई है।
महासमुंद जिले में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, 1 जून 2026 से अब तक जिले में औसतन 370.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
जिले में सबसे अधिक बारिश पिथौरा तहसील में 486.4 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई है। इसके बाद सरायपाली में 469.4 मिमी, महासमुंद में 360.9 मिमी, बसना में 316.9 मिमी, बागबाहरा में 311.1 मिमी और सबसे कम कोमाखान में 281.2 मिमी वर्षा दर्ज हुई है।
17 जुलाई को जिले में औसतन 31.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार—
पिथौरा – 57.6 मिमी
बसना – 44.1 मिमी
सरायपाली – 35.9 मिमी
महासमुंद – 23.1 मिमी
बागबाहरा – 19.5 मिमी
कोमाखान – 8.5 मिमी
मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और बिजली गिरने की आशंका के बीच खुले स्थानों में जाने से बचने की सलाह दी है।







 

रायपुर में एक ही परिवार के पांच शव मिलने से सनसनी, जहर देने के बाद आत्महत्या की आशंका

18-Jul-2026
रायपुर। राजधानी के संजय नगर स्थित मदनी चौक में शुक्रवार देर रात एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव मिलने से सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि परिवार के मुखिया ने पहले पत्नी और तीन बच्चों को जहरीला पदार्थ दिया और बाद में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि पुलिस ने मौत के कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, परिवार पिछले करीब डेढ़ वर्ष से मदनी चौक स्थित एक किराए के मकान में रह रहा था। शुक्रवार को पूरे दिन घर का दरवाजा बंद रहने और कोई गतिविधि दिखाई नहीं देने पर पड़ोसियों को संदेह हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां पांच शव मिले।
मृतकों की पहचान सैय्यद साजिद अली (50 वर्ष), उनकी पत्नी राबिया बानो, पुत्र सैय्यद इरशाद अली (20 वर्ष), बेटी शाहिदा (15 वर्ष) और इरशाबा परवीन (12 वर्ष) के रूप में हुई है। साजिद अली का शव फंदे से लटका मिला, जबकि पत्नी और तीनों बच्चों के शव बिस्तर पर पड़े थे। पुलिस ने बताया कि चारों के मुंह से झाग निकल रहा था, जिससे जहरीले पदार्थ के सेवन की आशंका जताई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में परिवार के आर्थिक संकट और कर्ज में होने की जानकारी भी सामने आई है। साजिद अली मौदहापारा क्षेत्र में एक दुकान पर बैटरी रिपेयर का काम करता था। पड़ोसियों के मुताबिक परिवार शांत स्वभाव का था और किसी से अधिक मेलजोल नहीं रखता था।
घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य एकत्र किए हैं और सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पश्चिम जोन के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल डीसीपी) राहुल देव शर्मा ने बताया कि मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम व फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी






 

 


मानसून फिर हुआ सक्रिय, बिलासपुर में 28 सेमी बारिश; कई जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट

18-Jul-2026
रायपुर । छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को राजधानी रायपुर में दिनभर बादल छाए रहे और रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि बिलासपुर में 28 सेंटीमीटर बारिश दर्ज होने से बाढ़ जैसे हालात बन गए। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों में पानी घुसने की खबरें सामने आई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मध्य और उत्तरी छत्तीसगढ़ के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। विभाग ने रायपुर, बलौदाबाजार, बेमेतरा, दुर्ग, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरबा, महासमुंद और सक्ती जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
राजधानी रायपुर के लिए जारी स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार शनिवार को भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग ने बताया कि मानसून द्रोणिका अमृतसर से होकर पटना और बंगाल की खाड़ी तक विस्तारित है। वहीं उत्तर पाकिस्तान के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और निम्न दबाव प्रणाली के प्रभाव से प्रदेश में वर्षा की गतिविधियां तेज हुई हैं। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है।
 

 


कन्फर्म टिकट रद्द करना पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने विस्तारा को ठहराया दोषी

18-Jul-2026
रायपुर।(शोर संदेश) छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी मानते हुए विस्तारा एयरलाइंस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह राशि कांकेर में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) भूपेंद्र कुमार वासनीकर को मानसिक क्षतिपूर्ति और मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है।इसमें 10 हजार रुपये वाद व्यय शामिल हैं। आयोग ने निर्देश दिया कि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने पर एयरलाइन को सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामला 28 मई 2023 का है, जब एडीजे वासनीकर अपने परिवार के साथ कश्मीर यात्रा से लौटते समय दिल्ली से रायपुर आ रहे थे। उन्होंने पहले ही चार कन्फर्म टिकट बुक कराए थे, लेकिन समय से चार घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचने के बावजूद उन्हें तीन घंटे तक बोर्डिंग पास जारी नहीं किया गया।
बाद में ओवरबुकिंग का हवाला देकर उनका कन्फर्म टिकट रद्द कर दिया गया, जबकि उनकी पत्नी और दोनों बच्चों को रायपुर भेज दिया गया। एडीजे को दिल्ली में रुकना पड़ा और अगले दिन इंडिगो की फ्लाइट से 18,823 रुपये का नया टिकट खरीदकर रायपुर लौटना पड़ा।
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य आनंद वर्गीस की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि जिस टिकट को एडीजे ने 7,204 रुपये में खरीदा था, उसे एयरलाइन ने उड़ान के दिन कथित रूप से लगभग 40 हजार रुपये में दूसरे यात्री को बेच दिया।
आयोग ने एयरलाइन के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि कोई वैकल्पिक उड़ान उपलब्ध नहीं थी। आयोग ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए विस्तारा को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।





 

 


माटी से उपजी समृद्धि: नारायणपुर के भूपेन्द्र कुमार पुजारी की आत्मनिर्भरता का सफर

18-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) ​कृषि केवल खेतों में बीज बोकर फसल काटने का नाम नहीं है, बल्कि यह माटी के साथ सामंजस्य बिठाकर जीवन को एक नया आकार देने की साधना है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के वनांचल में आज बदलाव की एक ऐसी ही खूबसूरत बयार बह रही है, जो पारंपरिक ढर्रे को छोड़कर आधुनिक सोच को अपनाने से मुमकिन हुई है। इस बदलाव के सूत्रधार बने हैं चिहरीपारा गांव के प्रगतिशील किसान भूपेन्द्र कुमार पुजारी, जिन्होंने अपनी लगन और सरकारी योजनाओं के सही तालमेल से आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख दी है।
​एक समय था जब भूपेन्द्र अपने 2.80 हेक्टेयर के खेत में केवल पारंपरिक तरीके से धान उगाते थे। साल में सिर्फ एक बार फसल लेने के कारण आमदनी इतनी सीमित थी कि परिवार का गुजारा चलाना, बच्चों की पढ़ाई और अन्य सामाजिक जरूरतें पूरी करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। वे बदलाव की राह तलाश रहे थे, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण राह आसान नहीं थी। ​तभी जिला प्रशासन और कृषि विभाग की साझा कोशिशों ने उनके जीवन में प्रवेश किया। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जब कृषि, उद्यानिकी, पशुधन और मत्स्य पालन विभागों ने मिलकर काम शुरू किया, तो भूपेन्द्र को भी अपनी किस्मत बदलने का एक जरिया दिखाई दिया।
भूपेन्द्र के खेत में सबसे बड़ी समस्या पानी की थी, जिसका स्थायी समाधान क्रेडा विभाग की 'सौर सुजला योजना' से हुआ। खेत में जैसे ही सोलर पंप स्थापित हुआ, सिंचाई की चिंता हमेशा के लिए दूर हो गई। सिंचाई की व्यवस्था होते ही उन्होंने मनरेगा के तहत अपने खेत में एक डबरी (छोटा तालाब) का निर्माण कराया। यह डबरी सिर्फ पानी रोकने का साधन नहीं बनी, बल्कि इसने जल संरक्षण के साथ-साथ उनके लिए मत्स्य पालन का एक बिल्कुल नया और मुनाफेदार रास्ता भी खोल दिया।
​कृषि वैज्ञानिकों के तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से सीख लेकर भूपेन्द्र ने समझ लिया कि केवल एक फसल पर निर्भर रहना घाटे का सौदा हो सकता है। उन्होंने 'समन्वित कृषि प्रणाली'  (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) को अपना मूलमंत्र बनाया।  उन्होंने उन्नत तरीके से धान की पैदावार शुरू करने के साथ साथ उड़द की खेती, साग-सब्जी का उत्पादन, बैकयार्ड मुर्गीपालन और डबरी में मत्स्य पालन को भी अपनी दैनिक आजीविका का हिस्सा बना लिया।
​इस बहुआयामी दृष्टिकोण का असर उनकी आमदनी पर जादुई ढंग से दिखाई देने लगा। आज उन्हें जहां उन्नत धान की खेती से सालाना लगभग 80 हजार रुपये की कमाई हो रही है, वहीं मत्स्य पालन से लगभग 60 हजार रुपये सीधे उनके खाते में आ रहे हैं। इसके साथ ही साग-सब्जी से 24 हजार, मुर्गीपालन से 21 हजार और उड़द की फसल से मिलने वाली 17 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि ने उनकी आर्थिक स्थिति को बेहद मजबूत कर दिया है।
​भूपेन्द्र कुमार पुजारी का मानना है कि विविधता ही कृषि का असली भविष्य है। जब एक किसान अपने खेत में कई तरह के उपक्रम चलाता है, तो मौसम या बाजार के जोखिम बेहद कम हो जाते हैं और आय का जरिया साल भर बना रहता है। अपनी इस शानदार सफलता और आर्थिक आजादी के लिए वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
आज भूपेन्द्र की यह कहानी नारायणपुर जिले के बाकी किसानों के लिए उम्मीद का एक चमकता हुआ दीया बन चुकी है। 'आत्मा' योजना और कृषि विभाग के सहयोग से अब अंचल के अन्य किसान भी उनके खेत का भ्रमण कर रहे हैं और इस मॉडल को सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। भूपेन्द्र की यह यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर किसान के पास सही दृष्टिकोण, वैज्ञानिक सोच और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का संबल हो, तो वनांचल के खेतों में भी समृद्धि की सुनहरी फसल उगाई जा सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम बैगा अंचल तक पहुँची विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

18-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की प्रतिबद्धता लगातार धरातल पर दिखाई दे रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातीय बैगा समुदाय तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकासखंड गौरेला के दुर्गम बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम छिरहिट्टी (साल्हेघोरी) में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा निःशुल्क उपचार, परामर्श एवं दवाइयां उपलब्ध कराईं। इससे दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को अपने गांव में ही विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में कुल 164 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया गया। मौसमी बीमारियों की रोकथाम, समय पर रोगों की पहचान तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए इस शिविर में ग्रामीणों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिली।
विशेष स्वास्थ्य शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, खंड चिकित्सा अधिकारी गौरेला तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी पूरे समय उपस्थित रहकर शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक, चाहे वह कितने ही दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र में क्यों न रहता हो, स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। विशेष पिछड़ी जनजातियों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक स्वयं पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराना ही सुशासन की वास्तविक पहचान है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दूरस्थ एवं विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि बीमारियों की समय पर पहचान हो सके, उपचार उपलब्ध कराया जा सके तथा गंभीर मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों तक रेफर किया जा सके। साथ ही ग्रामीणों को स्वच्छता, पोषण, मौसमी बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है।
दुर्गम बैगा अंचलों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की पहुंच यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति विश्वास और जागरूकता को भी मजबूत कर रहे हैं।

एचपीवी टीकाकरण में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला बना प्रदेश में अव्वल

18-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा बालिकाओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित जनकल्याणकारी स्वास्थ्य अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित विशेष एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 17 जुलाई को आयोजित विशेष टीकाकरण दिवस पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने पूरे प्रदेश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति, प्रभावी कार्ययोजना तथा स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ कार्यप्रणाली का सशक्त उदाहरण है।
राज्य सरकार बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण जैसी पहल भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रत्येक पात्र बालिका तक यह सुरक्षा कवच पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।
13 से 18 जुलाई तक आयोजित विशेष एचपीवी टीकाकरण सप्ताह के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाकर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में अभियान की शुरुआत विकासखंड गौरेला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवसा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चुकतीपानी से की गई।
राज्य स्तर से जिले को 3,893 बालिकाओं के टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। विशेष टीकाकरण दिवस पर जिले के 74 विद्यालयों में चिकित्सा अधिकारियों एवं स्वास्थ्य अमले की उपस्थिति में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान लगभग 809 बालिकाओं का ऑनलाइन तथा 1,100 बालिकाओं का ऑफलाइन पंजीकरण एवं टीकाकरण किया गया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राज्य में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण कर नई उपलब्धि दर्ज की।
अभियान की सफलता में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभियान के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सा अधिकारी, शिक्षकों तथा विद्यालय प्रबंधन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।
स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा विद्यालय आधारित टीकाकरण अभियान के माध्यम से बालिकाओं और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम तथा टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में गंभीर बीमारियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी प्रयास भी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का यह परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावी ढंग से सफल हो रहे हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की यह उपलब्धि न केवल जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ जनस्वास्थ्य की सुरक्षा एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
 

दो नदियां पार कर सुदूर गांवों तक पहुंचे कलेक्टर, बारिश में भी सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

18-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनसेवा के संकल्प को साकार करते हुए सुकमा जिला प्रशासन लगातार दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर ने शुक्रवार को दो नदियां पार कर सुदूर वनांचल के ग्राम गुमोड़ी, कोंडासावली और तारलागुड़ा का दौरा किया।
अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर जमीन पर बैठकर जनचौपाल लगाई और उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों से सीधे संवाद कर शासन की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी ली गई तथा कई समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश मौके पर ही दिए गए।
गुमोड़ी में कलेक्टर ने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, तेन्दूपत्ता भुगतान, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि उनके जमीन संबंधी दस्तावेज गुम हो गए हैं। इस पर कलेक्टर ने गांव में विशेष राजस्व शिविर लगाकर आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी मांगों पर कलेक्टर ने बिजली, सड़क और पुलिया निर्माण के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्राथमिक शाला के निरीक्षण के दौरान बच्चों ने कलेक्टर को गिनती और एबीसीडी सुनाई। बच्चों की उत्साहपूर्ण प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्होंने स्कूल परिसर में पेवर ब्लॉक, बाउंड्रीवाल और नए रसोईघर के निर्माण को मंजूरी दी।
इसके बाद कलेक्टर और सीईओ कोंडासावली पहुंचे। यहां आम के पेड़ के नीचे ग्रामीणों से चर्चा के दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। इसके बावजूद कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनना जारी रखा। बिजली कनेक्शन से जुड़ी शिकायत पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को 3 दिन के भीतर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं, वनाधिकार पट्टे की मांग पर उन्होंने पात्र हितग्राहियों के लिए शिविर आयोजित कर 45 दिन के भीतर वनाधिकार पट्टे उपलब्ध कराने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
उप स्वास्थ्य केंद्र कोंडासावली के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों की मांग पर कलेक्टर ने एंबुलेंस वाहन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य केंद्र को बेहतर बनाने के लिए खिड़की-दरवाजों पर पर्दे, मुख्य मार्ग से स्वास्थ्य केंद्र तक पेवर ब्लॉक रैंप, योग शेड और सोकपिट निर्माण के निर्देश भी दिए गए l इससे दूरस्थ क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं अधिक आसानी से उपलब्ध होंगी और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
तारलागुड़ा में निर्माणाधीन सुशासन परिसर के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने एक ग्रामीण से स्वयं 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन करवाकर व्यवस्था की तत्परता परखी। फोन पर आवश्यक जानकारी लेने के बाद एंबुलेंस भेजने की पुष्टि होने पर कलेक्टर ने ग्रामीणों से आपातकाल में 108 सेवा का उपयोग करने की अपील की।
 इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के दो हितग्राहियों ने खाते में राशि जमा नहीं होने की समस्या बताई। जांच में बैंक खाते में तकनीकी कारणों से होल्ड की जानकारी सामने आई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल समस्या का निराकरण कर हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
बारिश के बीच भी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और उनका समाधान करने के लिए मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि सुशासन परिसर का निर्माण पूरा होने के बाद वे दोबारा गांव पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।
जिला प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि सुकमा में शासन और प्रशासन अब दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक सीधे पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। इससे ग्रामीणों में शासन के प्रति विश्वास और सुशासन की भावना और मजबूत हो रही है।
 

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026: वैज्ञानिक सोच और नवाचार से सतत विकास का संकल्प

18-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के अंतर्गत जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में किया गया। 
कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर के शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति तथा मूल्यांकन प्रणाली से अवगत कराना था, ताकि अधिकाधिक विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यशाला का आयोजन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणी बोरा तथा महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में किया गया।
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए स्थानीय समस्याओं की पहचान करते हैं, आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण करते हैं तथा नवाचार आधारित समाधान प्रस्तुत करते हैं। ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक 'ई' एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. ए. के. पाठक, वैज्ञानिक 'डी' डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू तथा वनस्पति विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की थीम "साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना है। उन्होंने शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों से आग्रह किया कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की वैज्ञानिक पहचान कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करें।
कार्यशाला में राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की संपूर्ण रूपरेखा, पात्रता, परियोजना निर्माण की प्रक्रिया, अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक परियोजनाएं केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं समाजोपयोगी विषयों पर आधारित होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित हो।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम के विभिन्न उपविषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। इनमें R5 तकनीक (Reduce, Reuse, Recover, Redesign एवं Recycle) के माध्यम से कचरा प्रबंधन, E4 मॉडल (Explore, Experiment, Enhance एवं Evolve) के जरिए ऊर्जा संरक्षण एवं नवाचार, जल संचयन, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण, तथा खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य की स्थिरता के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।
राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की थीम और उसके विभिन्न उपविषयों का विस्तार से परिचय देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल वैज्ञानिक जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण एवं समाधान आधारित सोच के लिए प्रेरित करना भी आवश्यक है। उन्होंने मार्गदर्शकों को वैज्ञानिक लेखन, परियोजना प्रस्तुतीकरण तथा मूल्यांकन के मानकों से अवगत कराते हुए Mission LiFE की भावना के अनुरूप अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
डॉ. वी. के. कानूनगो ने अपने व्याख्यान में R5 सिद्धांतों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुनः उपयोग, पुनः डिज़ाइन तथा पुनर्चक्रण की अवधारणा को अपनाकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित अनुसंधान करने का आह्वान किया।
वहीं, प्रो. नमिता ब्राह्मे ने ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को सतत विकास की आधारशिला बताते हुए शिक्षकों से विद्यालय स्तर पर ऊर्जा ऑडिट, एलईडी अध्ययन, सौर कुकर एवं अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को "एनर्जी एम्बेसडर" बनकर समाज में ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।
कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन तथा अधिक से अधिक बाल वैज्ञानिकों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। आगामी राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेशभर से चयनित बाल वैज्ञानिक अपनी शोध परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें उत्कृष्ट प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का किया वर्चुअल लोकार्पण

18-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है और इसका प्रत्यक्ष लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण प्रदेश के रेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति सोशल मीडिया हैंडल एक्स में पोस्ट कर आभार व्यक्त करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में आधारभूत अधोसंरचना का तेजी से विकास हो रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इन रेलवे स्टेशनों के विकसित होने से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बेहतर प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, स्वच्छ परिसर, आधुनिक यात्री सुविधाएं तथा उन्नत अधोसंरचना से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इससे लोगों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा और रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। प्रदेश में नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।
 


+ Load More

kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account