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Mahasamund

ओडिशा से महाराष्ट्र जा रहा 300 किलोग्राम गांजा पकड़ाया

11-Apr-2026
महासमुंद (शोर संदेश)। सरायपाली के सिंघोड़ा पुलिस ने एक ट्रक से 312.590 किलोग्राम गांजा जब्त करते हुए दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया है। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत 1 करोड़ 56 लाख 34 हजार 500 रुपए बताई गई है। इस मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचना मिली थी कि ओडिशा से गांजा लेकर तस्कर महाराष्ट्र जा रहे हैं।
सूचना के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग-53 स्थित रेहटीखोल के पास नाकाबंदी की गई। कुछ समय बाद बताए गए नंबर का ट्रक पहुंचा, जिसे रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रक में रखी बोरियों से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। ट्रक में सवार चालक इम्तियाज खान (कर्नाटक) और सह-चालक रवि प्रकाश राउतकर (बालाघाट, मध्यप्रदेश) को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में उन्होंने बताया कि गांजा ओडिशा के सोनपुर जिले से मुंबई ले जाया जा रहा था। पुलिस ने ट्रक और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जांच में जम्मू, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के लोगों की संलिप्तता सामने आई है, जिससे यह संगठित अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह प्रतीत होता है।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 (बी) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

महासमुंद में प्रेग्नेंट मूकबधिर युवती की हत्या, आरोपी प्रेमी गिरफ्तार

25-Mar-2026
महासमुंद( शोर संदेश )। महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपनी दो महीने की गर्भवती मूकबधिर प्रेमिका की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी लोकनाथ पटेल को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
पत्थर से कुचलकर की हत्या
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने युवती के सिर और चेहरे पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी और शव को खेत में फेंक दिया। मंगलवार सुबह खेत में शव मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
शादी के दबाव को बना कारण
जांच में सामने आया कि आरोपी और युवती के बीच पिछले एक साल से संबंध थे। युवती के गर्भवती होने के बाद उसने आरोपी पर शादी का दबाव बनाया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया।
पूछताछ में कबूला गुनाह
पुलिस ने परिजनों से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। बताया जा रहा है कि वह बदनामी के डर से इस वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार कर चुका है।
जांच जारी
पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक का माहौल है।

खल्लारी मंदिर में बड़ा हादसा: रोप-वे का केबल टूटा, 8 श्रद्धालु घायल

22-Mar-2026
महासमुंद।   ( शोर संदेश )  जिले के खल्लारी मंदिर में रविवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जब मंदिर परिसर में संचालित रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। घटना के वक्त ट्रॉली में श्रद्धालु सवार थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। केबल टूटते ही ट्रॉली झटके के साथ नीचे की ओर आ गई, जिससे उसमें बैठे लोग घायल हो गए।
इस हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों, मंदिर प्रबंधन और पुलिस की मदद से तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और हालात का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी को हादसे की वजह माना जा रहा है, हालांकि मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि नवरात्र के चलते मंदिर में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे इस हादसे ने चिंता और बढ़ा दी है।
 

महासमुंद : डॉ. आई नागेश्वर राव ने बताया लू के उपचार एवं जरूरी उपाय

05-Mar-2026
महासमुंद ( शोर संदेश )। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई नागेश्वर ने छत्तीसगढ़ शासन के गाइड लाइन के अनुरूप लू से बचाव के सम्बंध में सलाह दी है। जिले में लगातार बढ़ते तापमान के कारण लू (हीट वेव) का खतरा भी बढ़ गया है। जब वातावरण का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 फैरेनहाइट) या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे हीट वेव या लू कहा जाता है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ता है। मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस भाग शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, लेकिन अत्यधिक गर्मी में यह तंत्र प्रभावित हो जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक या लू लगने की स्थिति उत्पन्न होती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई नागेश्वर राव ने बताया कि लू लगने पर सिर में भारीपन और दर्द, तेज बुखार के साथ मुंह सूखना, चक्कर आना, उल्टी होना और भूख कम लगना, कमजोरी और शरीर में दर्द, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीना न आना एवं अधिक प्यास लगना और पेशाब कम आना आदि लक्षण दिखाई पड़ते है।
उन्होंने बताया कि लू लगने पर प्राथमिक उपचार के लिए मरीज के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें। उसे अधिक मात्रा में पानी और पेय पदार्थ दें, जैसे कच्चे आम का पना, जलजीरा आदि। मरीज को हवादार स्थान पर लिटाएं और उसके शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करें तथा तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं और ओ.आर.एस घोल दें। डॉ. राव ने लू से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें। बाहर जाने से पहले सिर और कानों को कपड़े से अच्छी तरह ढंकें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और लंबे समय तक धूप में रहने से बचें। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें, अधिक पसीना आने पर ओ.आर.एस घोल का सेवन करें। चक्कर या मितली आने पर छायादार स्थान पर आराम करें और शीतल पेय पिएं तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए 104 आरोग्य सेवा केंद्र से निःशुल्क सलाह लें।
 

पाम ऑयल खेती से किसान कमा रहे प्रति एकड़ सवा लाख

26-Feb-2026
महासमुंद ( शोर संदेश )।  पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। जिले में इस योजना तहत लगभग 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।
इसी क्रम में सरायपाली भलेसर गांव के उन्नत किसान मुकेश चंद्राकर, जिन्होंने वर्षों से बंजर पड़ी अपनी 33 एकड़ भूमि पर वर्ष 2016 में ऑयल पाम की खेती प्रारंभ की। वे शासन की योजना से पाम खेती के लिए प्रेरित हुए और अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के अंतर्गत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव तथा ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिला। तीन से चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहेगा। वर्तमान में चंद्राकर एक पौधे से औसतन 3000 रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केले की खेती की, जिससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। चंद्राकर बताते है कि कम पानी, कम खाद एवं कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिलने के कारण किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए। चंद्राकर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, जबकि अब वर्षभर यहीं नियमित कार्य उपलब्ध हो रहा है।
सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग पायल साव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन एवं विक्रय में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। जिले में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। यहां किसानों के रूझान और भूमि की प्रकार को देखते हुए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिकाधिक संख्या में पाम की खेती करने अपील की है।
गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन तथा औषधि निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी एवं अधिक आय देने वाली पाम खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। यह पहल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रही है।

सोनाक्षी के साहस और चिरायु योजना ने बदल दी ज़िंदगी

24-Feb-2026
महासमुंद ( शोर संदेश )। महासमुंद जिले के ग्राम कुल्हरिया में रहने वाली 12 वर्षीय सोनाक्षी एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है। उनके पिता किशन लाल दीवान मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सोनाक्षी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पथर्री में कक्षा सातवीं की छात्रा है और अन्य बच्चों की तरह वह भी अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देखती थी। लेकिन बचपन से ही उसकी कमजोर सेहत उसके सपनों की राह में बाधा बन रही थी।
जब सोनाक्षी कक्षा पाँचवीं में पढ़ती थी, तब स्कूल में हुए चिरायु स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उसमें हृदय रोग के लक्षण पाए गए। उसे अक्सर सांस फूलने, जल्दी थक जाने, पैरों में सूजन, अनियमित दिल की धड़कन और बार-बार सर्दी-खांसी की समस्या रहती थी। चिरायु टीम के आयुष चिकित्सकों द्वारा परिजनों को इसकी जानकारी दी गई और निःशुल्क इलाज के बारे में समझाया गया। हालांकि सोनाक्षी देखने में स्वस्थ लगती थी, इसलिए शुरुआत में परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। विद्यालय के प्रधान पाठक मोहन लाल साहू और चिरायु टीम के सदस्यों ने लगातार परिवार को जागरूक किया। फार्मासिस्ट धनेश्वर दीवान और एएनएम विशाखा साहू समय-समय पर सोनाक्षी की स्थिति पर नज़र रखते रहे और उसके माता-पिता को इलाज के लिए प्रेरित करते रहे। धीरे-धीरे सोनाक्षी ने स्वयं हिम्मत दिखाई और अपने माता-पिता को हृदय जांच के लिए तैयार किया।
चिरायु टीम के सहयोग से सोनाक्षी को रायपुर स्थित एम एम आई नारायणा अस्पताल, रायपुर ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा उसकी विस्तृत जांच की गई। जांच में यह पाया गया कि उसके दिल में 24 × 19 मिमी का छेद है, जो उसके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक था। डॉक्टरों ने परिजनों को इसकी गंभीरता समझाते हुए जल्द सर्जरी कराने की सलाह दी। परिवार के लिए यह समय बहुत कठिन था, लेकिन चिरायु योजना ने उन्हें उम्मीद दी। योजना के अंतर्गत सोनाक्षी की सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की गई। अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसके दिल के छेद को ठीक किया। यह सर्जरी सोनाक्षी के लिए एक नया जीवन लेकर आई।
आज सोनाक्षी पूरी तरह स्वस्थ है। उसके चेहरे पर फिर से रौनक लौट आई है और वह पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ स्कूल जाती है। समय पर लिया गया सही निर्णय और सरकारी योजनाओं का लाभ किसी की भी ज़िंदगी बदल सकता है। स्कूल में हुए चिरायु स्वास्थ्य परीक्षण ने एक गंभीर बीमारी को समय रहते पकड़ लिया, जिससे सोनाक्षी को नया जीवन मिलने के साथ ही अन्य बच्चों और अभिभावकों में भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी। सोनाक्षी और उसका परिवार आज पूरे दिल से चिरायु योजना और उससे जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने एक मासूम बच्ची को फिर से मुस्कुराने का मौका दिया।


 

बागबाहरा 132/33 केवी उपकेंद्र की क्षमता बढ़कर 126 एमवीए हुई, बिजली आपूर्ति होगी अधिक सुदृढ़

23-Feb-2026
महासमुंद ( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश के परिपालन में महासमुंद जिले के बागबाहरा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को और अधिक स्थिर व भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने 132/33 केवी उपकेंद्र बागबाहरा में 40 एमवीए क्षमता वाले पुराने पावर ट्रांसफार्मर की जगह 63 एमवीए का नया पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर उसका ऊर्जीकरण कर दिया है। खास बात यह है कि यह इस उपकेंद्र का दूसरा 63 एमवीए ट्रांसफार्मर है। 
पहले यहां 63 एमवीए और 40 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगे थे, जिससे कुल क्षमता 103 एमवीए थी। अब 40 एमवीए ट्रांसफार्मर को हटाकर 63 एमवीए का ट्रांसफार्मर लगाए जाने से उपकेंद्र की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 126 एमवीए हो गई है। पिछले साल पीक लोड सीजन में यहां करीब 90 एमवीए तक लोड दर्ज किया गया था, जिससे ओवरलोड की स्थिति बनने लगी थी। नई क्षमता जुड़ने के बाद अब ओवरलोड की समस्या से राहत मिलेगी और बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर रहेगी।
बागबाहरा उपकेंद्र को 132 केवी परसवानी और 132 केवी झलप से विद्युत आपूर्ति होती है। यहां से 33 केवी के नौ फीडरों क्रमशः बागबाहरा (महासमुंद), टेमरी, सुनसुनिया, गोयनबहरा, टाउन, तेंदुकोना, मुंगसेर और खलारी के माध्यम से 150 से अधिक गांवों में बिजली पहुंचाई जाती है। क्षेत्र में उन्नत खेती, कृषि आधारित उद्योगों और अन्य औद्योगिक इकाइयों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में क्षमता वृद्धि से इन सभी को सीधा लाभ मिलेगा।
कंपनी के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने नए ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण कर आपूर्ति प्रारंभ की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कंपनी अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह के मार्गदर्शन में प्रदेश के पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं। खासकर आदिवासी, वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। क्षमता बढ़ने से अब क्षेत्र के किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को बेहतर व गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।



 

शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं: बिलाईगढ़ के कोरकोटी गांव में पुलिया टूटने से दुल्हन की मां की मौत

15-Feb-2026
बिलाईगढ़।   ( शोर संदेश )  सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कोरकोटी गांव में एक शादी समारोह के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। नाले पर बनी छोटी पुलिया अचानक टूट गई, जिससे चार-पांच महिलाएं पानी में गिर गईं। हादसे में दुल्हन की मां की मौत हो गई, जबकि तीन महिलाएं घायल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरकोटी गांव में पटेल परिवार के यहां चौथिया कार्यक्रम चल रहा था। गिरौदपुरी से आए लड़की पक्ष के लोग रात में भोजन के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान नाले पर बनी छोटी पुलिया से चार से पांच महिलाएं एक साथ गुजर रही थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महिलाएं जैसे ही पुल के बीच पहुंचीं, वह अचानक भरभराकर टूट गई। पुल टूटते ही सभी महिलाएं नीचे नाले में गिर गईं। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया।
स्थानीय लोगों की मदद से तीन महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिन्हें चोटें आई हैं। हालांकि एक महिला पुल के मलबे के नीचे दब गई। सूचना मिलते ही बिलाईगढ़ पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में बलौदाबाजार और बिलाईगढ़ की संयुक्त पुलिस टीम तथा एनडीआरएफ ने महिला का शव बाहर निकाला।
बताया जा रहा है कि मृत महिला दुल्हन की मां थीं। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है और शादी का माहौल मातम में बदल गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा पुलिया के कमजोर होने और अचानक टूटने के कारण हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।





 

कोसीर एवं सरिया क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन पर सख्त कार्रवाई, ट्रैक्टर जब्त

08-Feb-2026
सारंगढ़-बिलाईगढ़  ( शोर संदेश )। जिले में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। खनिज अमले द्वारा विगत दिनों कोसीर एवं सरिया तहसील क्षेत्रों में अवैध रेत परिवहन में संलिप्त वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई है। सारंगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम मल्दा, दहिदा एवं जसपुर क्षेत्र में गौण खनिज रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त 02 ट्रैक्टरों को जब्त कर उन्हें थाना कोसीर के सुपुर्द किया गया, जबकि सरिया तहसील के पिहरा क्षेत्र में रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त 03 ट्रैक्टरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें थाना सरिया के सुपुर्द किया गया है।
जिला प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर नियंत्रण हेतु यह जांच-पड़ताल और कार्रवाई का अभियान निरंतर जारी रहेगा तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त ढोकरा शिल्प कलाकारों ने राज्यपाल रमेन डेका से की सौजन्य भेंट

04-Feb-2026
सारंगढ़  ( शोर संदेश )। सारंगढ़ जिले के जनजातीय बाहुल्य ग्राम बैगनडीह (सालर) के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित जनजाति समुदाय के ढोकरा-बेलमेटल शिल्पकारों ने राज्यपाल रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कलाकारों ने पारंपरिक ढोकरा शिल्प कला से निर्मित बेल मेटल की आकर्षक मूर्ति राज्यपाल को भेंट की।
राज्यपाल ने शिल्पकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ढोकरा शिल्प जैसी पारंपरिक जनजातीय कलाएं भारत की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कलाकारों की सृजनात्मक क्षमता और समर्पण की सराहना करते हुए आश्वस्त किया कि ऐसे प्रतिभावान शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने और उनकी कला को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ग्राम बैगनडीह (सालर) के ढोकरा शिल्पी मीन केतन बघेल को वर्ष 2018 में तथा उनकी धर्मपत्नी हीराबाई बघेल को वर्ष 2023 में उनके उत्कृष्ट ढोकरा-बेलमेटल शिल्प कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दोनों कलाकारों ने ढोकरा (बेलमेटल) शिल्पकला की विशिष्ट पहचान स्थापित करने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। सौजन्य भेंट के दौरान पूर्व विधायक केराबाई मनहर सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।







 


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