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Narayanpur

नारायणपुर जिले में 289 से अधिक परिवारों ने छत पर सोलर संयंत्र स्थापित कर पाया बिजली बिल से छुटकारा

22-Oct-2026
 नारायणपुर।( शोर संदेश ) स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला एक नई मिसाल पेश कर रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री  सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता तेजी से घट रही है। अब तक जिले के 289 से अधिक परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कर न केवल बिजली बिल से राहत पाई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
​नारायणपुर शहर के जागरूक उपभोक्ता गुलाब सिंह एवं उनकी धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह चौहान की कहानी आज पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। पर्यावरण संरक्षण और घरेलू खर्चों में कटौती का संकल्प लेकर इस दंपत्ति ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करवाया।

सोलर संयंत्र स्थापित होने के बाद जब अगस्त माह का विद्युत बिल आया, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहाकृउनका अगस्त माह का बिजली बिल पूरी तरह 'शून्य' (0 रुपये) था।
​गुलाब सिंह चौहान बताते हैं कि ​सोलर पैनल लगवाने से हमारे घर को न केवल निर्बाध बिजली मिल रही है, बल्कि बिजली बिल की चिंता भी पूरी तरह समाप्त हो गई है। यह योजना आर्थिक बचत के साथ-साथ प्रकृति को बचाने का बेहतरीन माध्यम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 फरवरी 2024 को शुरू की गई इस राष्ट्रीय योजना का लक्ष्य देश के 1 करोड़ परिवारों को रूफटॉप सोलर प्रणाली से जोड़ना है। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 75,021 करोड़ रुपये का विशाल बजट निर्धारित किया है। पात्र परिवारों को छतों पर सोलर प्लांट लगाने पर सीधे बैंक खाते में केंद्रीय सब्सिडी (वित्तीय सहायता) प्रदान की जाती है। उत्पादित अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उपभोक्ता अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को खुद पूरा कर सकते हैं।
नारायणपुर जिले में 289 से अधिक घरों पर स्थापित सोलर संयंत्र यह सिद्ध करते हैं कि दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में भी नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। छतों पर लगे ये सोलर पैनल पारंपरिक कोयला-आधारित बिजली पर निर्भरता कम करते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आती है।
​यह सफलता की कहानी शहरी के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को भी श्हर घर सोलरश् के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।जिला प्रशासन एवं विद्युत विभाग ने जिले के समस्त नागरिकों व विद्युत उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से योजना की जानकारी लें, अपनी पात्रता अनुसार आवेदन करें और सब्सिडी का लाभ उठाकर अपने घर को ऊर्जा-आत्मनिर्भर बनाएं।


 

 


बकरियों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए चलाया जा रहा है सघन पीपीआर टीकाकरण अभियान

20-Oct-2026
’नारायणपुर।( शोर संदेश ) बकरी को गरीब की गाय कहा जाता है। नारायणपुर जिला के ग्रामीण परिवेश में बकरीपालन सदैव ही पशुपालकों के आर्थिक सामाजिक विकास की धुरी रहा है। कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन के निर्देशानुसार पशुधन विकास विभाग के द्वारा 21 सितंबर 2026 से 07 नंवबर तक भेड़-बकरियों की एक बहुत ही संक्रामक रोग बकरी प्लेग (पीपीआर) रोग का सघन टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है। उपसंचालक डॉ आर के पडोटी के नेतृत्व में जिले में 11 टीकाकरण दल का गठन किया गया है। ये दल अपने संस्था क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में भ्रमण करते हुए 3 महीने से ज्यादा उम्र के भेड़ बकरियों में टीकाकरण कार्य को संपादित कर रहे हैं। टीकाकरण अभियान के दौरान 102 गांवों में 31788 टीकाकरण किया जा चुका है।
बकरी प्लेग रोग भेड़ बकरियों की बहुत ही संक्रामक एवं जानलेवा विषाणु जनित रोग है। इस बिमारी से ग्रसित होने पर इन पशुओं तेज बुखार, मुंह में छाले, नाक आंख से पानी निकलना, सांस लेने में परेशानी, दस्त और कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं। सही उपचार के अभाव में पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है। टीकाकरण के माध्यम से इस बिमारी से भेड़ बकरियों को बचाया जा सकता है।
बकरी का मांस प्रोटीन एवं वसा का एक बहुत ही अच्छा स्त्रोत होता है। इसके साथ ही बकरियों से मिलने वाला गोबर एक संपूर्ण खाद के रुप उपयोग किया जाता है। भेड़ बकरियों के आर्थिक-सामाजिक महत्व को देखते हुए छत्तीसगढ सरकार के निर्देश में यह सघन टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है एवं पशुधन विकास विभाग सभी पशुपालकों से यह अनुरोध करता है, वे अपने भेड़ बकरियों में टीकाकरण करवाकर इस सघन टीकाकरण अभियान के सहभागी बनें।


 

 


सेवा संकल्प अभियान : नियद नेल्ला नार योजना से अबूझमाड़ के ग्राम बोरानिरपी में पहली बार पहुंची बिजली, रोशन हुआ पूरा गांव

17-Oct-2026
 नारायणपुर । ( शोर संदेश )  सेवा संकल्प अभियान के तहत छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत नारायणपुर जिले के दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोरानिरपी में पहली बार बिजली पहुंचने से पूरा गांव रोशन हो गया है।   

जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित इस दुर्गम वनांचल ग्राम का विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, जिससे गांव के सभी 11 परिवारों को विद्युत सुविधा मिल गई है। वर्षों से बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित इन ग्रामीणों के लिए यह पहल उनके दैनिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगी।   

कलेक्टर नारायणपुर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड नारायणपुर संभाग द्वारा ग्राम बोरानिरपी तक विद्युत सुविधा पहुंचाने के लिए आवश्यक लाइन विस्तार एवं विद्युतीकरण का कार्य पूरा किया गया है। अबूझमाड़ की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, घने जंगलों और दूरस्थ बसाहटों के बीच विद्युत अधोसंरचना का विस्तार कर गांव के प्रत्येक परिवार तक बिजली पहुंचाई गई है।ग्रामीणों के जीवन में आएंगे सकारात्मक बदलावग्राम बोरानिरपी में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों के दैनिक जीवन में निम्नलिखित सुधार होने की उम्मीद हैरूशिक्षा को बढ़ावारू घरों में पर्याप्त रोशनी उपलब्ध होने से बच्चों को शाम और रात्रि के समय पढ़ाई करने में आसानी होगी।

ग्रामीणों को मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक विद्युत उपकरणों के उपयोग का लाभ मिलेगा। विद्युत सुविधा से संचार व्यवस्था बेहतर होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा भविष्य में पेयजल व्यवस्था, छोटे कृषि आधारित उपकरणों और स्थानीय स्वरोजगार के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों तक बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम बोरानिरपी का पूर्ण विद्युतीकरण इसी दिशा में एक मील का पत्थर है, जिससे अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
 

सेवा संकल्प से संवरती जि़ंदगी : अब नारायणपुर के दूरस्थ अबुझमाड़ (कुतुल) के नयापारा में भी पहुंचेगा शुद्ध पेयजल

12-Oct-2026
नारायणपुर। ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के तहत राज्य के अंतिम छोर पर बसे वनांचल और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाओं का विस्तार अब ज़मीनी हक़ीकत बनता जा रहा है। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र ग्राम परपा (कुतुल) के नयापारा में नलकूप खनन का कार्य तेज़ी से प्रारंभ कर दिया गया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आवागमन के बावजूद शुरू की गई इस पहल से स्थानीय ग्रामीणों को जल्द ही घर के समीप शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की सौगात मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र में विकास की एक नई किरण जगी है।
वनांचल के दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना केवल एक बुनियादी सुविधा का विस्तार नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को सीधे तौर पर बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कुतुल जैसे दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ भौगोलिक विसंगतियाँ और आवागमन की दुश्वारियाँ विकास कार्यों के क्रियान्वयन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना देती हैं, वहाँ प्रशासन की यह पहल स्थानीय लोगों के जीवन को सुगम बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। पारंपरिक स्रोतों से पानी ढोने की मजबूरी झेल रहे परिवारों के लिए यह नलकूप खनन किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा।
इस महत्वपूर्ण पहल के धरातल पर उतरने से ग्रामीण महिलाओं और परिवारों को अपनी दैनिक ज़रूरतों के लिए पानी जुटाने की लंबी और श्रमसाध्य मशक्कत से राहत मिलेगी। घर के नज़दीक ही स्वच्छ जल उपलब्ध होने से न केवल उनका बहुमूल्य समय बचेगा, बल्कि वे अपनी ऊर्जा का उपयोग अन्य रचनात्मक व आजीविका संबंधी कार्यों में कर सकेंगे। इसके साथ ही, सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों के खतरे को कम करने तथा ग्रामीण आंचल में बेहतर स्वास्थ्य संबंधी आदतों को बढ़ावा देने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
नारायणपुर जिले के इन दूरस्थ अंचलों में जल स्रोतों का विकास और उनका सुचारू रखरखाव इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य शासन हर नागरिक तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। नलकूप खनन का कार्य पूरा होने के बाद पानी की गुणवत्ता की विशेष रूप से जाँच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ग्रामीणों को पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित पेयजल प्राप्त हो। यह सकारात्मक पहल न केवल नयापारा के निवासियों के जीवन को आसान बना रही है, बल्कि यह विश्वास भी दिलाती है कि विकास की धारा अब राज्य के हर कोने तक पहुँच रही है।

 


नक्सली डंप से 6 प्रेशर कुकर आईईडी व एक पाइप बम बरामद

07-Oct-2026
नारायणपुर। (शोर संदेश) अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षाबलों की ओर से चलाए जा रहे सघन तलाशी एवं क्षेत्र को आईईडी मुक्त अभियान के दौरान मंगलवार को नारायणपुर पुलिस एवं 29वीं वाहिनी आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने भटबेड़ा क्षेत्र में तलाशी के दौरान एक नक्सली डंप से 06 प्रेशर कुकर आईईडी और एक पाइप बम बरामद की गई। बरामद विस्फोटक सामग्री को बम निरोधक एवं निष्क्रियता दल ने आवश्यक सुरक्षा सावधानियों के साथ मौके पर ही सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया।
नारायणपुर एसपी संदीप कुमार पटेल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अबूझमाड़ के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों द्वारा लगातार सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। उन्होने कहा कि क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों एवं विस्फोटक सामग्री की तलाश के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। 
नारायणपुर पुलिस से मिली जनकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, 29वीं वाहिनी आईटीबीपी के कमान अधिकारी अभिषेक सूद एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) अक्षय साबद्रा के मार्गदर्शन में संयुक्त सर्चिंग अभियान चलाया गया। संयुक्त टीम ने रैनार कैंप से माक्सोली-भटबेड़ा-रैनार क्षेत्र में सघन तलाशी ली, अभियान के दौरान जवानों को कुछ संदिग्ध वस्तुएं दिखाई दीं। इसके बाद आस-पास के क्षेत्र में विस्तृत तलाशी ली गई। इसी दौरान एक संदिग्ध नक्सली डंप से सात आईईडी बरामद हुईं। तलाशी के दौरान विस्फोटकों के अलावा आईईडी निर्माण में प्रयुक्त सामग्री भी बरामद की गई। इसमें एक मल्टीमीटर, एक पेचकस, एक सोल्डरिंग तार, एक सोल्डरिंग आयरन और तीन वाहन की चाबियां शामिल हैं।बरामद आईईडी को निष्क्रिय करने के लिए बम निरोधक एवं निष्क्रियता दल ने आवश्यक सुरक्षा मानकों और सावधानियों का पालन करते हुए बरामद विस्फोटक सामग्री को मौके पर ही सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया। संयुक्त दल का नेतृत्व सहायक उप निरीक्षक मोहन ने किया।
 

 


विशेष लेख : जहां 15 वर्षों तक था सुरक्षा बलों का ठिकाना, वहां अब बच्चे संवार रहे भविष्य

05-Oct-2026
नारायणपुर। ( शोर संदेश )  नारायणपुर जिले के भाटपाल में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का ठिकाना रहा परिसर अब विद्यार्थियों की पढ़ाई और आवास का केंद्र बन गया है। कभी क्षेत्र में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने वाला यह परिसर आज दूरस्थ गांवों के बच्चों को विद्यालय के समीप रहकर पढ़ाई जारी रखने का अवसर दे रहा है। बस्तर संभाग में पहली बार किसी पूर्व सुरक्षा कैंप को छात्रावास के रूप में विकसित करने की यह पहल अबूझमाड़ में बदलाव की नई तस्वीर सामने ला रही है।
इस बदलाव की अहमियत विद्यार्थियों के अनुभवों में झलकती है। करीब 22 किलोमीटर दूर राजबेड़ा के रहने वाले कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र को पहले विद्यालय के पास रहने के लिए स्वयं आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे परिवार पर अतिरिक्त खर्च आता था। पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास खुलने से अब उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिल गया है। हलामीमुंजमेटा से आने वाले कक्षा 9वीं के विद्यार्थी रितेश सोनी भी नए परिसर में आकर खुश हैं। वे बताते हैं कि यहां रहकर विद्यालय जाना और साथियों के साथ पढ़ाई करना अधिक सुविधाजनक हो गया है।
जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित भाटपाल का सुरक्षा कैंप लंबे समय तक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के बाद जिला प्रशासन ने इस परिसर का विद्यार्थियों के हित में उपयोग करने की पहल की। कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने इसे उन बच्चों के लिए छात्रावास में बदलने का सुझाव दिया, जिन्हें गांव से विद्यालय की दूरी और आवास की कमी के कारण पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई होती थी। परिसर में 11 अगस्त 2026 से विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू हुई। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर दूर है। विद्यालय के निकट आवास मिलने से बच्चों की आवाजाही आसान हुई है और उन्हें पढ़ाई के लिए अधिक समय मिल रहा है। अब वही परिसर जहां क्षेत्र के सुरक्षा की रणनीति बनती थी वहां अब बच्चे अपने उज्जवल भविष्य की बुनियाद तैयार कर रहे हैं।
परिसर में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास संचालित हैं। प्री-मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के 114 विद्यार्थी रह रहे हैं, जबकि पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 11वीं एवं 12वीं के 39 विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा मिल रही है। दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए कक्षा 10वीं के बाद पढ़ाई जारी रखने में आवास की उपलब्धता अहम है। विद्यालय के पास निजी आवास की व्यवस्था करने से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास खुलने से ऐसे विद्यार्थियों के लिए उच्चतर माध्यमिक शिक्षा जारी रखना आसान हुआ है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक आवासीय सुविधा बच्चों की पढ़ाई को निरंतरता देने में सहायक बन रही है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने छात्रावास का निरीक्षण कर आवास, भोजन, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी जरूरतों और समस्याओं की जानकारी ली तथा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बच्चों को परिसर और कमरों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे व्यवस्थित वातावरण में पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। रसोई में तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता का परखी तथा किचन में हमेशा स्वच्छता बनाए रखने और निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
नारायणपुर और अबूझमाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भाटपाल का छात्रावास एक महत्वपूर्ण पहल है। आवास की सुविधा से दूरी, आवागमन और निजी आवास पर होने वाले खर्च जैसी समस्याओं से राहत मिली ही। जिस परिसर की पहचान कभी सुरक्षा बलों की मौजूदगी से थी, वहां अब दूरस्थ अंचल के बच्चे साथ रहकर अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं। भाटपाल में सुरक्षा कैंप से छात्रावास तक का यह सफर अबूझमाड़ की नई पीढ़ी के लिए शिक्षा और अवसरों के विस्तार नयी इबारत लिख रहा है।







 

 


अबूझमाड़ में बदलाव की नई इबारत: जहां 15 साल रहा सुरक्षा कैंप, अब वहीं संवर रहा आदिवासी बच्चों का भविष्य

05-Oct-2026
नारायणपुर। ( शोर संदेश )  नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में बदलाव की एक नई और उम्मीद जगाने वाली तस्वीर सामने आई है। नारायणपुर जिले के भाटपाल में जिस परिसर में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप संचालित होता रहा, आज उसी परिसर में दूरस्थ आदिवासी गांवों के बच्चे रहकर अपने बेहतर भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।
बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल के तहत पुराने सुरक्षा कैंप को जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास और शिक्षा से जुड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। कभी सुरक्षा और शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह परिसर अब शिक्षा, अवसर और नई पीढ़ी के भविष्य निर्माण का आधार बन गया है।
यह केवल किसी पुराने भवन का नया उपयोग नहीं, बल्कि उस बदलते अबूझमाड़ की कहानी है, जहां विकास की प्राथमिकताएं सुरक्षा से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आजीविका और नई पीढ़ी के लिए अवसरों के विस्तार तक पहुंच रही हैं।

नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भाटपाल का यह परिसर लंबे समय तक सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण ठिकाना रहा। करीब 15 वर्षों तक यहां सुरक्षा बल तैनात रहे। क्षेत्र में परिस्थितियां बदलने के बाद परिसर खाली हुआ तो जिला प्रशासन ने इसे अनुपयोगी छोड़ने के बजाय बच्चों की शिक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया। कलेक्टर नम्रता जैन की पहल पर इस परिसर को उन जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास के रूप में विकसित किया गया, जो दूरस्थ और दुर्गम गांवों से पढ़ने आते हैं। लंबी दूरी और आवास की सुविधा नहीं होने के कारण ऐसे विद्यार्थियों के लिए नियमित पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था।
11 अगस्त 2026 से यहां विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू की गई। इसके साथ ही जिस परिसर की पहचान कभी सुरक्षा कैंप के रूप में थी, उसकी भूमिका पूरी तरह बदल गई।
भाटपाल के पूर्व सुरक्षा कैंप परिसर में वर्तमान में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां 114 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले इन बच्चों को विद्यालय के समीप सुरक्षित आवास मिलने से उनकी नियमित शिक्षा की राह आसान हुई है।
इसी परिसर में पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास भी संचालित किया जा रहा है। इसमें कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50 सीटें स्वीकृत हैं और वर्तमान में 39 विद्यार्थी निवासरत हैं। यह व्यवस्था एजुकेशन सिटी कुतुल से संबद्ध विद्यार्थियों की आवासीय आवश्यकता को भी पूरा कर रही है।
विशेष रूप से पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की शुरुआत उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जिन्हें दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय के आसपास निजी आवास तलाशना पड़ता था। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। अब छात्रावास मिलने से उन्हें सुरक्षित आवास के साथ पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण भी मिल रहा है।


दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की राह में केवल स्कूल में प्रवेश लेना ही चुनौती नहीं होती। लंबी दूरी, परिवहन और रहने की व्यवस्था भी उनकी नियमित पढ़ाई को प्रभावित करती है।
भाटपाल की नई व्यवस्था ने इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर है। इससे विद्यार्थियों को रोज लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे अपना अधिक समय पढ़ाई में लगा पा रहे हैं।
प्री-मैट्रिक से पोस्ट-मैट्रिक तक आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों की पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। प्रशासन का प्रयास है कि बच्चे केवल स्कूल में दाखिला ही न लें, बल्कि उच्च कक्षाओं तक अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।
इस बदलाव का वास्तविक अर्थ यहां रहने वाले बच्चों के अनुभवों में दिखाई देता है। हलामीमुंजमेटा से आने वाले कक्षा 9वीं के विद्यार्थी रितेश सोनी बताते हैं कि नए परिसर में आने के बाद विद्यार्थी काफी खुश हैं। सुरक्षित वातावरण में रहना, स्कूल का पास होना और साथियों के साथ पढ़ाई करना उनके लिए सुविधाजनक हो गया है।
राजबेड़ा के रहने वाले कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र करीब 22 किलोमीटर दूर से आते हैं। छात्रावास शुरू होने से पहले विद्यालय के पास रहने के लिए उन्हें अलग से आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे परिवार पर अतिरिक्त खर्च भी आता था। अब छात्रावास में सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिलने से उनकी यह चिंता दूर हुई है।

कलेक्टर नम्रता जैन ने भाटपाल पहुंचकर छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों के कमरों, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया तथा बच्चों से सीधे संवाद किया।
विद्यार्थियों ने भी खुलकर अपनी आवश्यकताओं और समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराया। जैन ने उनकी जायज मांगों पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
उन्होंने बच्चों को छात्रावास परिसर और अपने कमरों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण विद्यार्थियों को पढ़ाई पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रावास के किचन में पहुंचकर बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन का भी जायजा लिया। उन्होंने चावल एवं सब्जी की गुणवत्ता देखी तथा स्वच्छता और निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
भाटपाल का यह परिवर्तन अबूझमाड़ और नारायणपुर की बदलती विकास यात्रा की एक महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करता है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब विकास की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों में शिक्षा भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रही है। दूरस्थ गांवों के बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाने के साथ उन्हें वहीं बनाए रखने और उच्च कक्षाओं तक शिक्षा जारी रखने के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

जिस परिसर में कभी सुरक्षा बलों की गतिविधियां इसकी पहचान हुआ करती थीं, आज उसी परिसर में स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे किताबों के साथ अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।
करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा का केंद्र रहा यह परिसर अब शिक्षा का सहारा बन गया है। सुरक्षा के लिए खड़ी की गई अधोसंरचना आज नई पीढ़ी को अवसर देने के काम आ रही है।
भाटपाल की कहानी बदलते अबूझमाड़ की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां बदलाव का अर्थ केवल सड़क, भवन और दूसरी अधोसंरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा और बेहतर भविष्य के नए रास्ते खोलना भी है।
जहां कभी सुरक्षा कैंप था, वहां आज बच्चों का छात्रावास है। जहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी परिसर की पहचान थी, वहां अब विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य के सपने नई पहचान बन रहे हैं। सुरक्षा से शिक्षा तक का भाटपाल का यह सफर बदलते अबूझमाड़ की कहानी को एक नई भाषा दे रहा है।

 

 


बाढ़ का खतरा: नारायणपुर में माड़ीन नदी के बीच पेड़ पर फंसे ग्रामीण का सफल रेस्क्यू

27-Sep-2026
नारायणपुर। ( शोर संदेश ) नारायणपुर जिले में लगातार जारी मूसलाधार बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। इस बीच, माड़ीन नदी के अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण ग्राम तारागांव में बाढ़ के पानी के बीच फंसे 55 वर्षीय ग्रामीण को जिला प्रशासन, पुलिस और नगर सेना की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सकुशल बाहर निकाल लिया।
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश तथा कलेक्टर के मार्गदर्शन में चलाए गए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाव दल ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तारागांव निवासी गोपी राम पटेल (55 वर्ष) नदी किनारे स्थित अपने खेत में बंधे बैल को खोलने गए थे। उसी दौरान नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से तेजी से बढ़ गया, जिससे वे चारों तरफ से पानी से घिर गए। जान बचाने के लिए वे पास ही स्थित एक आम के पेड़ पर चढ़ गए और घंटों उसी के सहारे फंसे रहे।
सूचना मिलते ही एसडीओपी छोटेडोंगर, जिला सेनानी (नगर सेना) के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी धौड़ाई के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद टीम ने सूझबूझ से गोपी राम को सुरक्षित निकाल लिया। रेस्क्यू के बाद उन्हें तुरंत धौड़ाई स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य की जांच की और भोजन उपलब्ध कराया।

जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कलमानार में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। सम्भावित आपदा को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए नदी किनारे बसे 09 परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों और उनके रिश्तेदारों के यहाँ शिफ्ट करा दिया है। प्रशासन की टीमों द्वारा प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों को उफनते नदी-नालों, निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति या जलभराव की सूचना देने के लिए जिला कंट्रोल रूम के दूरभाष क्रमांक 07781-252214 पर संपर्क किया जा सकता है।

कुपोषण पर कड़ा प्रहार : नारायणपुर के 13 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को अब रोजाना मिलेगा मुफ़्त पौष्टिक नाश्ता

12-Sep-2026
​रायपुर। (शोर संदेश) छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले क अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और नियमित शिक्षा की दिशा में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 13 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पौष्टिक नाश्ता योजना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से पौष्टिक लड्डू वितरण कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया और स्वयं अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नाश्ता परोसकर उनका उत्साहवर्धन किया।
​यह महत्वाकांक्षी पहल नारायणपुर और ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड के कुल 476 विद्यालयों में लागू की जा रही है, जिससे 13 हजार 15 स्कूली बच्चे सीधे लाभान्वित होंगे। योजना के तहत हर विद्यार्थी को प्रतिदिन 150 ग्राम ताजा और सेहतमंद नाश्ता दिया जाएगा। बच्चों के स्वाद और पोषण का विशेष ध्यान रखते हुए दिन के हिसाब से एक संतुलित मेन्यू तय किया गया है, जिसमें पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। भोजन तैयार करने वाली व्यवस्था को मजबूती देने के लिए जिले के 676 रसोइयों को 800 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।
​यह कार्यक्रम न केवल नौनिहालों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालेगा, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ठहराव सुनिश्चित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
 

नक्सल भय का अंत, अबूझमाड़ में फिर जीवंत हुई 'घोटुल' की गौरवशाली परंपरा

28-Aug-2026
नारायणपुर। ( शोर संदेश ) बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के​ अबूझमाड़ क्षेत्र में घोटुल परंपरा आदिवासी संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक शिक्षा का एक अनूठा और जीवंत केंद्र है। अब अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों (जैसे झारावाही) में ग्रामीण अपनी प्राचीन संस्कृति को सहेजने के लिए स्थानीय लकड़ियों और प्राकृतिक सामग्रियों से दोबारा पारंपरिक घोटुल तैयार कर रहे हैं।  बुजुर्गों द्वारा युवाओं को समाज के नियम, परंपराएं, संगीत, नृत्य और जीवनोपयोगी दायित्व सिखाए जाते हैं।
अबूझमाड़ की शाम अब भय के साये से मुक्त होकर अपनी पौराणिक और सांस्कृतिक लय में लौटने लगी हैं। जिस अंचल में कभी गोलियों की तड़तड़ाहट और सन्नाटे का खौफ हुआ करता था, वहां अब सूर्य ढलते ही मांदर की थाप और 'चेलिक-मोटियारिन' के सुरीले लोकगीत गूंजने लगे हैं। सुरक्षा वातावरण में आए सकारात्मक बदलाव के साथ ही आदिवासी समाज की ऐतिहासिक धरोहर 'घोटुल' की रौनक फिर से लौट आई है।
घोटुल केवल एक सामाजिक केंद्र नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, अनुशासन, लोककला और सामुदायिक मूल्यों की महत्वपूर्ण जीवन-पाठशाला है। नक्सली हिंसा और अनिश्चितता के दौर में गांव वाले शाम ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर थे, जिससे घोटुल की गतिविधियां लगभग थम सी गई थीं।  ​सुरक्षा बलों के प्रभावी अभियानों और नक्सल प्रभाव में आई कमी के बाद ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव मजबूत हुआ है। अब युवा बेझिझक घोटुल पहुंच रहे हैं, जहां वे अपने बुजुर्गों से लोक परंपराएं, नृत्य और गीत सीखकर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
घोटुलों का पुनर्जीवन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के सांस्कृतिक अस्तित्व और आत्मसम्मान की वापसी का प्रतीक है। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने से ग्रामीणों की आवाजाही, खेती-किसानी, हाट-बाजार और त्योहारों का उत्साह फिर से लौट आया है। ग्रामीणों का मानना है कि इस शांति को स्थायी बनाने के लिए अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क कनेक्टिविटी, रोजगार और संचार सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। घोटुलों से आती मांदर की थाप इस बात की जीवंत गवाही दे रही है कि जब डर का अंधेरा छंटता है, तो परंपराएं और सामूहिक उल्लास अपने आप मुस्कुरा उठते हैं।
 


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