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रायगढ़ जिला अस्पताल में निःशुल्क कैंसर जांच शिविर, सैकड़ों लोगों ने उठाया लाभ

24-Oct-2026
रायगढ़।( शोर संदेश ) कैंसर की समय पर पहचान, जांच और उचित उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को किरोड़ीमल शासकीय जिला चिकित्सालय, रायगढ़ में निःशुल्क कैंसर जांच एवं परामर्श शिविर आयोजित किया गया। जिला स्वास्थ्य समिति के तत्वावधान में आयोजित शिविर में रायपुर के रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया। शहर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने शिविर का लाभ उठाया।
शिविर में बताया गया कि कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। शरीर में गांठ या सूजन, लंबे समय तक ठीक न होने वाला घाव, मुंह में सफेद या लाल धब्बे, बिना कारण वजन कम होना, खून आना या लगातार खांसी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शिविर में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि जायसवाल, मेडिकल ऑन्कोलॉजी एवं हेमेटोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नवीन जैन तथा सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रुचिर धाकड़, डॉ.राहुल पाण्डेय, डॉ.सुरेन्द्र पटेल एवं डॉ.उमेश चंद्रा ने मरीजों को परामर्श दिया। चिकित्सकों ने मरीजों की स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार जांच की और जरूरत के मुताबिक आगे की जांच, उपचार के विकल्पों तथा उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी दी। यह शिविर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
सिविल सर्जन डॉ.दिनेश कुमार पटेल ने बताया कि शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होने से उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलती है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र हितग्राही नियमानुसार उपचार की सुविधा का लाभ ले सकते हैं। कैंसर के उपचार के लिए विभिन्न चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर समय पर जांच कराएं और चिकित्सकीय परामर्श लें, ताकि बीमारी की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सके। इस अवसर पर  जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

 


मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला लाने की मिसाल बने 23 वर्षीय यश गुप्ता

24-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश ) जीवन की अंतिम यात्रा के बाद भी किसी के लिए नई रोशनी की उम्मीद बन जाना मानवता की अनमोल मिसाल है। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम विजयपुर निवासी 23 वर्षीय स्वर्गीय यश गुप्ता के परिजनों ने इसी भावना को साकार किया है। युवा अवस्था में यश के असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन इस कठिन घड़ी में भी परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानव सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। जिले में यह दूसरा नेत्रदान है, जो समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक संदेश देता है।

ग्राम विजयपुर निवासी स्वर्गीय यश गुप्ता, पिता स्वर्गीय अरविन्द गुप्ता के निधन के बाद उनके परिजनों ने 22 अक्टूबर को नेत्रदान की सहमति दी। परिजनों का यह संवेदनशील निर्णय उन जरूरतमंद लोगों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आया है, जो दृष्टिबाधिता के कारण जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया के प्रत्यारोपण द्वारा पात्र जरूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
नेत्रदान की प्रक्रिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोटाटोला एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला के स्वास्थ्य अमले के सहयोग से संपन्न हुई। राजनांदगांव जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्ने, जिला सहायक नोडल अधिकारी सुनील कुमार वर्मा एवं सुदेश कुमार रामटेके तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय खोबरागड़े और जिला अंधत्व नोडल अधिकारी डॉ. आर.आर. धुर्वे के मार्गदर्शन में यह प्रक्रिया पूरी की गई।

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश ठाकुर की निगरानी में मेडिकल कॉलेज पेंड्री, राजनांदगांव की नेत्रदान टीम ने आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया संपन्न कराई। टीम में डॉ. शिवानी, डॉ. जयंत, डॉ. पवन एवं नेत्र सहायक अधिकारी संजीव कुमार यादव शामिल रहे। इस कार्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोटाटोला के नेत्र सहायक अधिकारी आकाश साहू, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौड़ीकसा के नेत्र सहायक अधिकारी छबल नेताम, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला के चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद बेडकर, एमएलटी विनोद साहू एवं ग्रामीण चिकित्सा सहायक विष्णु गुप्ता ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

नेत्रदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगाने का माध्यम भी है। स्वर्गीय यश गुप्ता के परिजनों ने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर समाज के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है। उनका यह निर्णय बताता है कि मानव सेवा की भावना जीवन के बाद भी दूसरों के लिए उपयोगी बन सकती है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में संपन्न दूसरा नेत्रदान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। यह पहल समाज को संदेश देती है कि नेत्रदान का एक संकल्प किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला ला सकता है। यश गुप्ता की स्मृति अब मानवता की इस अनुकरणीय पहल के माध्यम से भी जीवित रहेगी।

निजी कार्यक्रम छोड़ केल्हारी बस दुर्घटना के घायलों से मिलने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

23-Oct-2026
रायपुर, 23 अक्टूबर 2026 । ( शोर संदेश )  केल्हारी बस दुर्घटना में घायल लोगों का हालचाल जानने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज अपने सभी निजी कार्यक्रम स्थगित कर मनेन्द्रगढ़ स्थित सिविल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने उपचाररत मरीजों से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना और बेहतर उपचार का आश्वासन दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सकों से प्रत्येक घायल की स्वास्थ्य स्थिति एवं उपचार की जानकारी ली तथा समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार संवेदनशीलता और सेवा भाव के साथ कार्य कर रही है। संकट की इस घड़ी में सरकार दुर्घटना से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की कमी न हो और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी की जाए।
उल्लेखनीय है कि कल हुई केल्हारी बस दुर्घटना में कई लोगों की मृत्यु हो गई थी और अनेक लोग घायल हुए थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की थी।
जायसवाल ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सभी घायलों के शीघ्र एवं पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की कामना की।

 


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधायक रायमुनी भगत का जाना कुशलक्षेम : शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की

20-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहीं जशपुर विधायक रायमुनी भगत से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य एवं उपचार की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री साय ने प्रभु श्रीराम से रायमुनि भगत के शीघ्र पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करते हुए कामना की कि वे जल्द स्वस्थ होकर नई ऊर्जा और समर्पण के साथ पुनः जनसेवा में सक्रिय हों।








 

कैंसर मरीजों को राहत, 137 दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर लगी लगाम

19-Oct-2026
नई दिल्ली। कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 प्रतिशत पर सीमित कर दिया है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) के इस फैसले से कई कैंसर की दवाओं की कीमत 70 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है। यह कदम रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग के तहत ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (टीएमआर) का हिस्सा है, जिसका मकसद वितरण शृंखला में अत्यधिक मार्जिन को रोकना है।
सभी निर्माताओं को गजट अधिसूचना के प्रकाशन के 7 दिनों के भीतर एनपीपीए को अपनी संशोधित कीमतों के बारे में सूचित करना होगा। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से प्रभावी होंगी। निर्माताओं को अपनी वेबसाइट पर मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी और सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को इसकी जानकारी देनी होगी। सभी खुदरा विक्रेता और अस्पताल 9 नवंबर 2026 से कम कीमतें वसूल करेंगे और अपनी फार्मेसियों में संशोधित कीमतों को प्रदर्शित करेंगे। अस्पताल भी अपनी वेबसाइटों पर संशोधित कीमतों को प्रमुखता से दिखाएंगे। उपभोक्ता संशोधित कीमतों की जांच के लिए फार्मा सही दाम ऐप और एनपीपीए वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।
सरकार का कहना है कि कैंसर रोधी दवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाकर यह पहल मरीजों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेगी। 137 चिह्नित दवाओं में 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली इम्यूनोथेरेपी दवाएं, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डेनोसुमैब, कैंसर रोगियों में न्यूट्रोपेनिया को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पेगफिलग्रास्टिम और कोलन, अंडाशय और सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए स्वीकृत बेवासिजुमैब शामिल हैं।
इस अधिसूचना के साथ पेम्ब्रोलिज़ुमैब, डुरवलुमैब और ओसिमर्टिनिब जैसी व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली कैंसर रोधी दवाओं की एमआरपी मरीजों के लिए अधिक सुलभ होने की उम्मीद है। यह हस्तक्षेप एनपीपीए के 2019 के पायलट अभ्यास पर आधारित है, जिसके तहत 42 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत पर सीमित किया गया था। उस अभ्यास के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के 526 ब्रांडों की एमआरपी 90 प्रतिशत तक कम हो गई थी।
 

आयुष्मान भारत योजना से रचना बख्शी का हुआ नि:शुल्क उपचार

19-Oct-2026
राजनांदगांव ।( शोर संदेश ) । अचानक होने वाली दुर्घटना किसी भी परिवार के लिए शारीरिक पीड़ा के साथ आर्थिक चिंता का कारण बन सकती है। ऐसे कठिन समय में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जरूरतमंद लोगों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराकर राहत प्रदान कर रही है। योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना राजनांदगांव निवासी रचना बख्शी के लिए भी मुश्किल समय में मददगार साबित हुई।
रचना बख्शी ने बताया कि स्कूटी से अपने घर की ओर जा रही थी, तभी उनका सड़क पर दुर्घटना हो गया। दुर्घटना में उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए राजनांदगांव शहर के निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति के अनुसार उपचार किया और हाथ का ऑपरेशन किया। उनका ऑपरेशन सफल रहा और बेहतर उपचार सुविधा प्राप्त हुई। इस पूरे उपचार के दौरान आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उनका इलाज पूरी तरह नि:शुल्क हुआ। इससे उपचार में होने वाले खर्च की चिंता से राहत मिली। उन्हें दुर्घटना जैसी अप्रत्याशित परिस्थिति में नि:शुल्क इलाज की सुविधा मिलने से आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। उन्होंने अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ के सहयोग एवं देखभाल की भी सराहना की। रचना बख्शी ने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मिले नि:शुल्क उपचार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु भैया के प्रति आभार व्यक्त किया है।
 

 


जिला अस्पताल सूरजपुर में 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जटिल कूल्हे की सफल सर्जरी

17-Oct-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  जिला अस्पताल सूरजपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयास से 73 वर्षीय महिला की जटिल कूल्हे की सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यह उपलब्धि जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ओड़गी निवासी 73 वर्षीय राजकुमारी, बढ़ती उम्र के कारण दोनों कूल्हों के खराब होने की समस्या से पीड़ित थीं। उपचार के लिए वे जिला अस्पताल सूरजपुर के हड्डी रोग विभाग पहुंचीं, जहां हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू द्वारा उनकी प्रारंभिक जाँच एवं एक्स-रे कराया गया। जाँच में दोनों कूल्हों के खराब होने की पुष्टि हुई। साथ ही, उनके शरीर में खून की कमी भी पाई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने तथा उचित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के लिए तत्काल पहल की गयी। मरीज की स्थिति को देखते हुए उन्हें सर्जिकल वार्ड में भर्ती किया गया। वार्ड के नर्सिंग स्टाफ ने चिकित्सकों के निर्देशानुसार उनका उपचार किया। स्वास्थ्य में सुधार होने तथा ऑपरेशन के लिए उपयुक्त स्थिति बनने के बाद निश्चेतना विभाग द्वारा आवश्यक जांच की गई और सर्जरी की तिथि निर्धारित की गई।
निर्धारित तिथि पर ऑपरेशन की आवश्यक तैयारियां पूरी की गईं। डॉ. अजय साहू ने बताया कि यह मामला काफी जटिल था, लेकिन पूरी टीम के समन्वय एवं सहयोग से सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की जा सकी। उन्होंने बताया कि 12 अक्टूबर 2026 को भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं सिविल सर्जन के सहयोग से सूरजपुर निवासी 60 वर्षीय राजकुमार का सफल ऑपरेशन किया गया था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने कहा कि कलेक्टर रेना जमील के निर्देशानुसार जिला अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पताल की व्यवस्थाओं का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाता है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सके और उन्हें इलाज के लिए अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े। हमारा प्रयास है कि जिले के मरीजों को अधिक से अधिक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकें।
जिला अस्पताल सूरजपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, निश्चेतना विभाग एवं ऑपरेशन थिएटर टीम के संयुक्त प्रयासों से जटिल मामलों में भी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे जिले के मरीजों को अपने ही जिले में उपचार प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है और बड़े ऑपरेशन के लिए दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता कम करने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आमजन को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के मरीजों को अपने ही जिले में बेहतर उपचार का लाभ मिल रहा है।

 


छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं ने रचा जीवन रक्षा का नया अध्याय, महज 900 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन

16-Oct-2026
रायपुर, 16 अक्टूबर 2026 छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे महज 900 ग्राम वजन के एक नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग दो माह तक लगातार उपचार एवं विशेष देखभाल प्रदान कर नया जीवन दिया है। अत्यंत कम वजन, समय से पूर्व जन्म, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे इस नवजात की सफल चिकित्सा ने जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता और चिकित्सकीय टीम के समर्पण को रेखांकित किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जिला चिकित्सालयों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात का सफल उपचार इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

’महज 900 ग्राम वजन के साथ जिंदगी की जंग लड़ रहा था नवजात’

गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पूर्व हुआ था। जन्म के बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। इसके साथ ही उसे श्वसन संबंधी परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या भी थी। इतनी कम उम्र और अत्यंत कम वजन के कारण शिशु को विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। नवजात के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई और उसकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार एवं पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई।

’दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया’

उपचार के दौरान नवजात को सांस लेने में हो रही परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। गंभीर एनीमिया की स्थिति में दो यूनिट रक्त ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। इसके अतिरिक्त शिशु के शारीरिक तापमान को संतुलित रखने, पोषण सुनिश्चित करने और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी), नियमित फीडिंग तथा अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी एवं लगभग दो माह के उपचार से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए और शिशु का वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर 8 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

’दूरस्थ वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना जीवनरक्षक सहारा’

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे वनांचल बहुल जिले में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का जिला स्तर पर सफल उपचार होना विशेष महत्व रखता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है।
जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं और आवश्यक उपचार सुविधाओं के माध्यम से नवजात के स्वास्थ्य में सुधार संभव हो सका। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जिला स्तर पर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

’मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर’

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा जरूरतमंद नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेष रूप से नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए जिला चिकित्सालयों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में नवजात शिशु का सफल उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित करती है।
इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता, मरीजों की सतत निगरानी तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

’चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से मिली सफलता’

नवजात शिशु के सफल उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम सहित एसएनसीयू के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग दो माह तक शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी, आवश्यक उपचार, पोषण प्रबंधन और विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई। चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयासों और समर्पित सेवाओं से गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार संभव हुआ।

’नवजात की मुस्कान बनी शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की सार्थकता का प्रतीक’

मात्र 900 ग्राम वजन के साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। यह सफलता न केवल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को दर्शाती है, बल्कि शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध नवजात देखभाल सुविधाओं के महत्व को भी सामने लाती है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रेरक उदाहरण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में जारी प्रयासों के बीच इस नवजात को मिला नया जीवन शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था की सार्थकता और मानवीय संवेदनशीलता की एक उल्लेखनीय कहानी बनकर सामने आया है।

जशपुर विधायक रायमुनि भगत का कुशलक्षेम जानने अस्पताल पहुंचे पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल

16-Oct-2026
रायपुर, 16 अक्टूबर 2026 छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचकर जशपुर विधायक रायमुनि भगत से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान मंत्री अग्रवाल ने विधायक भगत के स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की।
मंत्री अग्रवाल ने विधायक भगत से  संवाद करते हुए उनके स्वास्थ्य के प्रति अपनी चिंता और संवेदनशीलता व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि भगत जल्द से जल्द पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने परिवार, शुभचिंतकों और क्षेत्र की जनता के बीच लौटें तथा पूर्व की भांति जनसेवा एवं क्षेत्र के विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
पर्यटन मंत्री अग्रवाल ने कहा कि विधायक रायमुनि भगत जनसेवा के प्रति समर्पित जनप्रतिनिधि हैं। उन्होंने जशपुर क्षेत्र की जनता के प्रति उनके समर्पण और सक्रियता का उल्लेख करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
मंत्री अग्रवाल ने कहा कि माता रानी की असीम कृपा और आशीर्वाद से भगत को उत्तम स्वास्थ्य, नई ऊर्जा एवं दीर्घायु प्राप्त हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे शीघ्र स्वस्थ होकर पुनः जनसेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी।
अग्रवाल ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के बीच आत्मीयता, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण विशेषता है। उन्होंने विधायक भगत के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखमय जीवन की कामना की।

मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने छत्तीसगढ़ में ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर मंथन: रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

16-Oct-2026
रायपुर।( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 'झपाइगो' (JHPIEGO) के तकनीकी सहयोग से ‘सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) रोडमैप 2030’ पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन रायपुर के होटल बेबीलोन इंटरनेशनल में किया गया।
यह आयोजन संजीव कुमार झा आयुक्त सह संचालक (स्वास्थ्य सेवाएं) एवं मिशन संचालक एन.एच.एम.छत्तीसगढ़ के निर्देशन तथा संयुक्त संचालक (मातृ स्वास्थ्य) डॉ. निर्मला यादव एवं उपसंचालक (मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम) डॉ. स्मृति देवांगन के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ‘सुमन रोडमैप 2030’ की कार्ययोजना को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप धरातल पर क्रियान्वित करना रहा। इस दौरान विशेषज्ञों ने मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्राथमिकताओं की समीक्षा करते हुए व्यावहारिक अनुभवों और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों (Best Practices) को साझा किया।

प्रदेश के 12 प्राथमिकता वाले जिलों—बेमेतरा, बीजापुर, धमतरी, दंतेवाड़ा, कांकेर, केसीजी (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई), कोंडागांव, महासमुंद, एमएमएसी (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी), नारायणपुर, राजनांदगांव एवं सरगुजा के प्रथम संदर्भन इकाइयों (FRUs/DH/CHC) में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और 'जिला कार्ययोजना' (District Action Plan) तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाएं: प्रसव पूर्व जांच (ANC), संस्थागत प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल (PNC) को शत-प्रतिशत सुरक्षित बनाना।
आपातकालीन प्रसूति प्रबंधन: जटिल प्रसव और आपात स्थितियों में त्वरित उपचार के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRUs) को सुदृढ़ करना।
अंतर-विभागीय समन्वय: जिला स्तर पर स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा तकनीकी व सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करना।

इस उच्चस्तरीय कार्यशाला में एम्स (AIIMS) रायपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग (OBGY) विभागाध्यक्ष, प्रदेश के सभी 10 शासकीय व 5 निजी मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला आरसीएच (RCH) नोडल अधिकारी, ब्लॉक नोडल अधिकारी, फॉग्सी (FOGSI) के प्रतिनिधि तथा प्रमुख सहयोगी संस्थाओं (WHO, UNICEF, JHPIEGO, Nutrition International, KPMG, IPAS, Piramal Foundation, Wadhwani AI, Azim Premji Foundation, ARMANN, YosAid) के राज्य प्रमुख उपस्थित रहे। सभी ने वर्ष 2030 तक मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी लाने के लिए समन्वित प्रयास करने का संकल्प लिया।


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