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स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से पहाड़ी कोरवा महिला ने तीन स्वस्थ नवजात शिशुओं को दिया जन्म

08-Sep-2026
रायपुर ( शोर संदेश )  बलरामपुर जिले के दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जरूरतमंद मरीजों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। राजपुर विकासखंड की अति-जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती किसी कारणवश जिला अस्पताल अंबिकापुर से बिना उपचार कराए अपने गांव वापस लौट आई थीं। इसकी जानकारी मिलते ही विभागीय अमला तत्काल सक्रिय हुआ और महिला को त्वरित चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की गई।
स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले, मितानिन, 102 एंबुलेंस टीम तथा अस्पताल के चिकित्सकों के समन्वित एवं त्वरित प्रयासों के फलस्वरूप बसंती ने तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। वर्तमान में मां और तीनों नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकों की निगरानी में हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि अति-जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के मामले में समय पर पहचान, नियमित निगरानी और तत्काल रेफरल अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ व आदिवासी अंचलों में प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व की सुविधा उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सजग स्वास्थ्य अमले, त्वरित एंबुलेंस सेवा और मैदानी कार्यकर्ताओं के इस उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की।
 

जिला अस्पताल जशपुर में गंभीर मरीजों का सफल उपचार, विशेषज्ञ सेवाओं से बची जान

03-Sep-2026
रायपुर(शोर संदेश) जिला चिकित्सालय जशपुर में गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। चिकित्सकों एवं नर्सिंग टीम की तत्परता, त्वरित चिकित्सकीय निर्णय और बेहतर समन्वय से हाल ही में दो गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया। सेप्टिक शॉक की गंभीर स्थिति में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची को जीवनरक्षक उपचार देकर स्वस्थ किया गया, वहीं एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के गंभीर मामले में महिला का सफल ऑपरेशन कर संभावित जानलेवा जटिलताओं से बचाया गया।
इन सफल उपचारों से यह स्पष्ट हुआ है कि जिला चिकित्सालय में गंभीर एवं आपातकालीन मामलों के उपचार के लिए आवश्यक विशेषज्ञ सेवाएं और स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार सुदृढ़ हो रही हैं। इससे मरीजों को उपचार के लिए दूरस्थ बड़े चिकित्सा संस्थानों अथवा दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और समय एवं आर्थिक संसाधनों की बचत हो रही है।
पाकड़टोली, जिला गुमला निवासी 10 वर्षीय संध्या कुमारी को 28 अगस्त 2026 को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती एवं बेहोशी की गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय जशपुर लाया गया। अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची का ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर काफी कम था। जांच में किडनी एवं लिवर फंक्शन में भी गंभीर असामान्यताएं पाई गईं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसकी स्थिति को सेप्टिक शॉक के रूप में चिन्हित किया गया।
बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज प्रधान (डक् च्मकपंजतपबे) के नेतृत्व में तत्काल उपचार प्रारंभ किया गया। बच्ची को आईवी फ्लूड्स, उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स एवं आवश्यक सपोर्टिव उपचार दिया गया। लगातार कम रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए लगभग तीन दिनों तक आवश्यक वेसोएक्टिव एवं जीवनरक्षक सपोर्ट दिया गया।
उपचार के दौरान चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम द्वारा बच्ची के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, चेतना की स्थिति सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों की लगातार निगरानी की गई। समय पर उपचार और सतत निगरानी के परिणामस्वरूप बच्ची की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। वर्तमान में बच्ची हेमोडायनामिक रूप से स्थिर है, पूरी तरह सचेत एवं ओरिएंटेड है तथा उसमें कोई डेंजर साइन नहीं है।
बच्ची के उपचार में अमृता सिंह, संध्या साविता एक्का, अनुपा मिंज, वसुंधरा साय, प्रमिला भगत, रेशमा किस्पोट्टा, अमीना मिंज एवं अंकिता मिंज ने अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।
ग्राम घरमुंडा, विकासखंड कुनकुरी निवासी चंद्रिका बाई, पति श्रवण कुमार, को एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय जशपुर में उपचार के लिए लाया गया। जांच में पाया गया कि गर्भावस्था गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रही थी।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में समय पर उपचार नहीं मिलने पर फैलोपियन ट्यूब के फटने से अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर एवं जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता साय ने तत्काल सर्जिकल उपचार का निर्णय लिया। आवश्यक तैयारियों के बाद महिला का सफल ऑपरेशन किया गया और फैलोपियन ट्यूब में विकसित एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का उपचार किया गया।
ऑपरेशन के बाद महिला को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और आवश्यक उपचार एवं देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।
सिविल सर्जन ने बताया कि जिला चिकित्सालय जशपुर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। शासन द्वारा आवश्यक डीएफआर की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे गंभीर एवं आपातकालीन मामलों में आवश्यकता पड़ने पर रात्रि में भी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इससे विशेष रूप से गर्भावस्था से संबंधित आपातकालीन स्थितियों सहित अन्य गंभीर सर्जिकल मामलों में मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों से जिला चिकित्सालय में ही गंभीर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।









 

एम्स के अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े: 38.6% वयस्क और 35.4% बच्चे फैटी लिवर से प्रभावित

02-Sep-2026
नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, खराब खानपान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन ने देश में लिवर और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों को गंभीर चुनौती बना दिया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के एक अध्ययन में देश के 38.6 प्रतिशत वयस्क और 35.4 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर से प्रभावित पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अस्वस्थ खानपान इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।
एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि फास्ट फूड, अत्यधिक चीनी, डिब्बाबंद और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन के साथ शारीरिक गतिविधियों में कमी ने पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का बोझ बढ़ा दिया है। खराब जीवनशैली का असर केवल लिवर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतों के स्वास्थ्य और कैंसर के जोखिम को भी प्रभावित कर रहा है।
मधुमेह रोगियों में फाइब्रोसिस का खतरा
अध्ययन में मधुमेह से पीड़ित करीब एक चौथाई लोगों के लिवर में फाइब्रोसिस भी पाया गया। फाइब्रोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर के ऊतकों में लगातार क्षति के कारण निशान बनने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और जीवनशैली में सुधार न होने पर यह स्थिति गंभीर लिवर रोग का रूप ले सकती है।
एम्स के गैस्ट्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया के अनुसार, पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं अब काफी आम हो गई हैं। पेट फूलना, डकार आना, अपच और डायरिया जैसी शिकायतों के पीछे खानपान और जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक देश में हर तीसरे व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
प्रसंस्कृत भोजन से आंत के कैंसर की चिंता
डिब्बाबंद और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन का बढ़ता चलन भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है। ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन न केवल मोटापा और फैटी लिवर जैसी समस्याओं से जुड़ा है, बल्कि बड़ी आंत के कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बड़ी आंत में बनने वाले पॉलिप कुछ मामलों में आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं। हालांकि समय रहते उनकी पहचान कर उन्हें हटाने से कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि शौच में खून आना, लगातार पेट संबंधी परेशानी, बिना कारण वजन कम होना या लंबे समय तक मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने उल्टी में खून आना, शौच में खून आना और खाना निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों को गंभीर बीमारी का संकेत बताया है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
स्वस्थ पेट और लिवर के लिए क्या करें ?
डॉक्टरों के अनुसार पाचन तंत्र और लिवर को स्वस्थ रखने के लिए खानपान और जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। इसके लिए—
स्वच्छ और संतुलित भोजन का सेवन करें।
साफ और सुरक्षित पानी पिएं।
भोजन जरूरत के अनुसार करें और अधिक खाने से बचें।
फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
नियमित रूप से दही जैसे प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों का सेवन करें
चीनी, फास्ट फूड और प्रसंस्कृत भोजन का सेवन कम करें।
शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
रोजाना नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करें।
भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से माताओं को मिल रहा आर्थिक संबल, सुरक्षित मातृत्व को मिल रही मजबूती’

27-Aug-2026
 रायपुर: गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और मातृत्व संबंधी आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना प्रदेश में माताओं के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक संबल बन रही है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र महिलाओं तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
रायगढ़ जिले में वर्ष 2023-24 से अब तक 27 हजार 49 महिलाएं योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। वहीं वर्ष 2026-27 में 18 अगस्त 2026 तक 4 हजार 432 नई महिलाओं को योजना से जोड़ा गया है। इनमें प्रथम संतान वाली 3 हजार 324 तथा द्वितीय संतान बालिका वाली 1 हजार 108 महिलाएं शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रथम जीवित संतान के लिए कुल 5 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इसमें पहली किस्त के रूप में 3 हजार और दूसरी किस्त के रूप में 2 हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं द्वितीय संतान बालिका होने पर एकमुश्त 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है।
योजना का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण तथा प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात स्वास्थ्य देखभाल के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से योजना में पारदर्शिता के साथ लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है।
वर्ष 2026-27 में 18 अगस्त तक रायगढ़ जिले में 4,432 महिलाओं की नई एंट्री हुई है। परियोजनावार आंकड़ों के अनुसार खरसिया में सर्वाधिक 607 महिलाओं को जोड़ा गया है। इसके बाद रायगढ़ ग्रामीण में 600, धरमजयगढ़ में 528, रायगढ़ शहरी में 500, पुसौर में 495, तमनार में 457, कापू में 378, घरघोड़ा में 342, लैलूंगा में 288 और मुकडेगा में 237 महिलाओं का पंजीयन किया गया है।
जिले में योजना को लेकर गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में उत्साह देखा जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मैदानी अमले के माध्यम से पात्र महिलाओं को योजना की जानकारी देने, पंजीयन कराने और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने में सहयोग किया जा रहा है।
निर्धारित पात्रता के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाएं, 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाली महिलाएं, गरीबी रेखा से नीचे राशन कार्ड धारक, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की लाभार्थी, ई-श्रम कार्ड धारक, किसान सम्मान निधि की लाभार्थी महिला किसान, मनरेगा जॉब कार्ड धारक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के राशन कार्ड धारक तथा 8 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाली महिलाएं योजना का लाभ ले सकती हैं।
इसके अतिरिक्त पात्रता शर्तों के अनुसार गर्भवती एवं धात्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायिका और आशा कार्यकर्ता भी योजना का लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड अथवा आधार संख्या, आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर, माता एवं शिशु सुरक्षा कार्ड, बैंक खाते की जानकारी तथा निर्धारित स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज आवश्यक होते हैं। पात्रता के अनुसार राशन कार्ड, ई-श्रम कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, किसान सम्मान निधि प्रमाण, जाति प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र अथवा आय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।
प्रथम संतान के लिए निर्धारित किस्तों के अनुसार प्रसव पूर्व जांच, बच्चे के जन्म तथा 14 सप्ताह तक के टीकाकरण से संबंधित जानकारी एवं दस्तावेज की आवश्यकता होती है। द्वितीय संतान बालिका होने की स्थिति में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जन्म एवं टीकाकरण संबंधी विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। लाभार्थी का आधार आधारित भुगतान और चेहरा पहचान सत्यापन भी योजना की प्रक्रिया का हिस्सा है।
निर्धारित प्रावधानों के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की हितग्राही तथा शासकीय कर्मचारी योजना के लिए पात्र नहीं हैं। इसलिए आवेदन से पहले महिलाओं को योजना की पात्रता शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों और मैदानी अमले के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी दी जा रही है। विभाग का प्रयास है कि पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाएं योजना के लाभ से वंचित न रहें और निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकें।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मिलने वाली आर्थिक सहायता माताओं को गर्भावस्था के दौरान पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग देने के साथ ही सुरक्षित मातृत्व, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ाव और मां-बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।







 

 


छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

23-Aug-2026
रायपुर,  (शोर संदेश) ।  छत्तीसगढ़  के चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों के हितों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज और MBBS की सीटें बढ़ाने का उद्देश्य ही यही है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक बच्चों को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिले।
जायसवाल ने कहा है कि डोमिसाइल को लेकर अगर कहीं कोई शंका या शिकायत सामने आती है तो उसकी पूरी गंभीरता से जांच कराई जाएगी।व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और पुख्ता बनाया गया है। जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कहीं नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाया गया तो उसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने मेहनत की है, उनके भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाना हमारी उपलब्धि है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इसका लाभ पात्र विद्यार्थियों को ही मिले। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।
पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी काउंसलिंग, मेरिट और आवंटन की संपूर्ण प्रक्रिया प्रचलित प्रवेश नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी ढंग से संपादित की जा रही है।
छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग समिति ने नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 
छत्तीसगढ़ चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) स्नातक प्रवेश नियम, 2025 के नियम 7 के अनुसार ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में पंजीयन, प्राथमिकता क्रम का निर्धारण, आवंटन, मूल दस्तावेजों की संवीक्षा एवं प्रवेश की प्रक्रिया शामिल है। पात्रता परीक्षण के दौरान मूल निवासी प्रमाण-पत्र, श्रेणी/संवर्ग संबंधी प्रमाण-पत्र तथा नियमानुसार अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवंटन के बाद अभ्यर्थी द्वारा आवश्यक मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और उनके सत्यापन में पात्र पाए जाने के उपरांत ही प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
प्रवेश नियम के नियम 12 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा झूठी या गलत जानकारी देकर अथवा प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर प्रवेश प्राप्त किया गया हो, या प्रवेश के बाद किसी भी समय यह पाया जाए कि अभ्यर्थी को किसी त्रुटि अथवा चूक के कारण प्रवेश प्राप्त हो गया है, तो नियमानुसार उसका प्रवेश निरस्त किया जा सकता है। मूल निवासी अथवा अन्य दस्तावेजों को लेकर कोई शिकायत या तथ्य सामने आने पर नियमानुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
राज्य काउंसलिंग समिति ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि काउंसलिंग को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रम या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। किसी भी शंका, समस्या या शिकायत की स्थिति में अभ्यर्थी अधिकृत काउंसलिंग पोर्टल पर Candidate Login में उपलब्ध "Candidates Grievances and Query Redressal System" के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अथवा काउंसलिंग शाखा के ई-मेल 
cgdme.counseling@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।छत्तीसगढ़ के बच्चों के हक की एक भी सीट नहीं होगी प्रभावित: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल
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रायपुर, 23 अगस्त 2026 छत्तीसगढ़  के चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के बच्चों के हितों के साथ किसी भी तरह की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज और MBBS की सीटें बढ़ाने का उद्देश्य ही यही है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक बच्चों को मेडिकल शिक्षा का अवसर मिले।
जायसवाल ने कहा है कि डोमिसाइल को लेकर अगर कहीं कोई शंका या शिकायत सामने आती है तो उसकी पूरी गंभीरता से जांच कराई जाएगी।व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और पुख्ता बनाया गया है। जिनके दस्तावेज सही हैं, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर कहीं नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा पाया गया तो उसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने मेहनत की है, उनके भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाना हमारी उपलब्धि है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इसका लाभ पात्र विद्यार्थियों को ही मिले। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।
पिछले वर्षों की भांति इस वर्ष भी काउंसलिंग, मेरिट और आवंटन की संपूर्ण प्रक्रिया प्रचलित प्रवेश नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी ढंग से संपादित की जा रही है।
छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग समिति ने नीट यूजी प्रवेश वर्ष 2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 
छत्तीसगढ़ चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) स्नातक प्रवेश नियम, 2025 के नियम 7 के अनुसार ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में पंजीयन, प्राथमिकता क्रम का निर्धारण, आवंटन, मूल दस्तावेजों की संवीक्षा एवं प्रवेश की प्रक्रिया शामिल है। पात्रता परीक्षण के दौरान मूल निवासी प्रमाण-पत्र, श्रेणी/संवर्ग संबंधी प्रमाण-पत्र तथा नियमानुसार अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आवंटन के बाद अभ्यर्थी द्वारा आवश्यक मूल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और उनके सत्यापन में पात्र पाए जाने के उपरांत ही प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी।
प्रवेश नियम के नियम 12 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी अभ्यर्थी द्वारा झूठी या गलत जानकारी देकर अथवा प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर प्रवेश प्राप्त किया गया हो, या प्रवेश के बाद किसी भी समय यह पाया जाए कि अभ्यर्थी को किसी त्रुटि अथवा चूक के कारण प्रवेश प्राप्त हो गया है, तो नियमानुसार उसका प्रवेश निरस्त किया जा सकता है। मूल निवासी अथवा अन्य दस्तावेजों को लेकर कोई शिकायत या तथ्य सामने आने पर नियमानुसार जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
राज्य काउंसलिंग समिति ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि काउंसलिंग को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रम या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। किसी भी शंका, समस्या या शिकायत की स्थिति में अभ्यर्थी अधिकृत काउंसलिंग पोर्टल पर Candidate Login में उपलब्ध "Candidates Grievances and Query Redressal System" के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अथवा काउंसलिंग शाखा के ई-मेल 
cgdme.counseling@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

 


आयुष्मान कार्ड से नहीं रहेगा कोई पात्र वंचित, छिंदगढ़ में 24 अगस्त को मेगा कैंप

23-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश) सुकमा जिले में अधिक से अधिक पात्र लोगों को शासन की निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए 24 अगस्त, सोमवार को छिंदगढ़ विकासखंड के विभिन्न गांवों में मेगा आयुष्मान कैंप का आयोजन किया जाएगा। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन में आयोजित इस अभियान में 186 टीमें तैनात रहेंगी।
मेगा कैंप में स्वास्थ्य विभाग की टीमें पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाएंगी। कैंप का आयोजन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा, ताकि ग्रामीण अपनी सुविधा के अनुसार कैंप में पहुंचकर कार्ड बनवा सकें।
जिला समन्वयक आयुष्मान कार्ड अमृतेश ठाकुर ने बताया कि छिंदगढ़ विकासखंड के 30 गांवों में कैंप लगाए जाएंगे। इनमें कुन्ना, मिचवार, डब्बा, पुसगुन्ना, कुंदनपाल, अधिकारीरास, पालेम, पेरमारास, कावराकोपा, चिड़पाल, कंकेपाल, टाहकवाड़ा, चियुरवाड़ा, टोंगरास, बोदरास, पेदारास, कुकानार, कोडरीपाल-2, सौतनार, कोकावाड़ा, गुम्मा, नेतानार, तालनार, गंजेनार, कवासीरास, उरमापाल, गुड़रा, मेखावाया, चिपुरपाल और केरातोंग शामिल हैं।
आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र परिवारों को शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिलती है। प्रशासन का प्रयास है कि जिले का कोई भी पात्र व्यक्ति इस सुविधा से वंचित न रहे।
जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे 24 अगस्त को अपने नजदीकी मेगा आयुष्मान कैंप में पहुंचकर अपना आयुष्मान कार्ड जरूर बनवाएं। यह अभियान ग्रामीण परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने और जरूरत के समय उपचार की सुविधा आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
 

चिरायु योजना से बाल मधुमेह से जूझ रही 11 वर्षीय बच्ची को मिला निःशुल्क उपचार

20-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश) राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की चिरायु योजना ऐसे बच्चों के लिए आशा की किरण बन रही है, जो जन्मजात बीमारियों या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। समय पर पहचान, विशेषज्ञ उपचार और पूरी तरह निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से यह योजना बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से समय पर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार उपलब्ध होने से न केवल बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर उपचार का बोझ भी कम हो रहा है। मुंगेली विकासखण्ड के ग्राम नारायणपुर निवासी 11 वर्षीय किनामिका साहू के लिए भी चिरायु योजना ऐसी ही उम्मीद की किरण बनी है। किनामिका बाल मधुमेह से पीडि़त है और उसका उपचार पूर्व में बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उपचार एवं आवश्यक दवाइयों पर परिवार को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह खर्च लगातार चुनौती बन रहा था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा ने बताया कि जांच के दौरान चिरायु टीम को बच्ची के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिली। इसके पश्चात टीम ने बच्ची को जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु ध्रुव से स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर बच्ची के उपचार को आगे बढ़ाया गया। चिरायु योजना के अंतर्गत बच्ची को जिला चिकित्सालय के माध्यम से निःशुल्क ग्लूकोमीटर एवं आवश्यक इंसुलिन दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इससे बच्ची के नियमित उपचार में सुविधा मिली और परिवार पर पड़ रहा आर्थिक बोझ भी काफी कम हुआ। समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिलने से परिवार को उपचार को लेकर राहत और भरोसा मिला है। 
डीपीएम गिरीश कुर्रे ने बताया कि बाल मधुमेह में शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण नियमित चिकित्सकीय देखरेख और उपचार आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। चिरायु योजना के माध्यम से बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। किनामिका के परिजनों ने शासन की चिरायु योजना और स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निजी अस्पताल में उपचार पर होने वाला खर्च उनके लिए काफी कठिन था। योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार सामग्री मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। साथ ही परिवार को आर्थिक चिंता से राहत प्रदान कर बच्ची के नियमित उपचार को सुगम बनाया है।
 

 


एक जनवरी से राज्य के सभी अस्पतालों को डिजिटल करने का लक्ष्य लेकर करें काम: श्याम बिहारी जायसवाल

19-Aug-2026
रायपुर, 19 अगस्त 2026 राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन कार्यशाला का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में आयोजित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की मॉडल डिस्ट्रिक्ट इनिशिएटिव कार्यशाला में राज्य की डिजिटल हेल्थ प्रगति की विस्तृत जानकारी साझा की गई।
कार्यशाला में बताया गया कि ABDM का सबसे नागरिक-केंद्रित हिस्सा ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) है, जिसके ज़रिए नागरिक अपनी जांच रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और अन्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं और अपनी सहमति से डॉक्टरों के साथ साझा कर सकते हैं। राज्य में अब तक 2.63 करोड़ नागरिकों के ABHA बनाए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीकरण के लिए बनी हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) से राज्य में 34 हजार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर जुड़ चुके हैं, जबकि हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) के माध्यम से अस्पताल, क्लिनिक, लैब और ब्लड बैंक जैसे 12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थान नेटवर्क से जुड़ गए हैं।
कार्यशाला में कहा गया कि ABDM-सक्षम HMIS के प्रभावी उपयोग से मरीज़ों का पूरा रिकॉर्ड — पंजीयन से लेकर उपचार और डिस्चार्ज तक — डिजिटल रूप में दर्ज होगा। इससे मेडिकल रिकॉर्ड की जांच आसान होगी, क्लेम प्रोसेसिंग में लगने वाला समय घटेगा और ऑडिट-वेरिफिकेशन अधिक व्यवस्थित होगा।
छत्तीसगढ़ के बड़े भौगोलिक क्षेत्र और दुर्गम इलाकों को देखते हुए कार्यशाला में इस बात पर बल दिया गया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव, गरीब और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि ABDM को केवल एक IT प्रोजेक्ट के रूप में नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र को बेहतर बनाने के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। नागरिकों की स्वास्थ्य जानकारी की सुरक्षा, गोपनीयता और सहमति-आधारित उपयोग को प्राथमिकता बताया गया।
कार्यशाला में सात प्रमुख लक्ष्य तय किए गए — शेष स्वास्थ्य संस्थानों को HFR से जोड़ना, अधिक डॉक्टरों-नर्सों को HPR से जोड़ना, ABHA के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, HMIS का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, रिकॉर्ड की गुणवत्ता बढ़ाना, सरकारी-निजी संस्थानों में समन्वय मजबूत करना, और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाना।
समापन में कहा गया कि लक्ष्य एक ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था बनाना है, जो हर नागरिक के लिए सरल, तेज़, पारदर्शी और उसके पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जुड़ी हो।
इस मौक़े पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है कि हम समय के अनुसार चलें और नई तकनीकों को अपनाएं। क्योंकि जब तक हम स्वयं जानकार नहीं होंगे, तब तक बेहतर मॉनिटरिंग संभव नहीं हो पाएगी। हमारा विभाग सतत रूप से इस दिशा में काम कर रहा है और अधिकारी-कर्मचारी लगातार मेहनत कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि सारे इलाज आभा के ज़रिए लिंक हो जाए,  इसके लिए निजी अस्पतालों से भी डाटा शेयर होना बहुत ज़रूरी है । डिजिटल सिस्टम इस्तेमाल करने से हमारी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी । 
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के नए कार्ड में अब आभा आईडी को शामिल कर दिया गया है, जिससे मरीज़ों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित और सुलभ बनेगा। अटल आरोग्य लैब की रिपोर्ट अब मरीज़ के मोबाइल पर सीधे भेजी जा रही है, ताकि उन्हें त्वरित जानकारी मिले। यह हमारी प्राथमिकता है और हमें यह करना ही है। उन्होंने कहा कि  एक जनवरी से सभी कार्यों को ऑनलाइन करने के लक्ष्य को लेकर कार्य चल रहा है और इसके लिए हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं। हम काफ़ी हद तक इसमें सफल भी हो रहे हैं, और यह प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेगा। 
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, एनएचए भारत सरकार के संचालक विक्रम पगारिया, राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सह संचालक संजीव झा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

 

मेडिकल कॉलेज के हार्ट-चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग का एक और कीर्तिमान

10-Aug-2026
रायपुर: पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मात्र 20 दिनों में 9 तथा इस संख्या को मिलाकर पिछले दो महीनों में कुल 13 लोबेक्टॉमी (फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकालने की सर्जरी) सफलतापूर्वक कर मरीजों को नया जीवन दिया है। इनमें दो आपातकालीन सर्जरी ऐसे मरीजों की की गई, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से की गई इन जटिल सर्जरियों ने न केवल संस्थान की विशेषज्ञता को सिद्ध किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में अम्बेडकर अस्पताल को अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया है।
हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी का मतलब यह होता है कि इसमें मरीज के क्षतिग्रस्त फेफड़े के एक हिस्से को निकाल दिया जाता है। ​यह सर्जरी अत्यंत ही जटिल सर्जरी होती है। यह सर्जरी इस संस्थान में अत्याधुनिक तकनीक से किया जाता है जिसमें एडवांस्ड लंग स्टैपलर का उपयोग किया जाता है, जिससे भविष्य में इस सर्जरी से होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरल (Bronchopleural Fistula) फिस्टुला बनने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। ​छत्तीसगढ़ के किसी भी प्राइवेट या सरकारी संस्थान की तुलना में इस संस्थान द्वारा इतने कम समय में इतना ज्यादा लोबेक्टॉमी सर्जरी (फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी) किया जाना इस संस्थान के लिए एक कीर्तिमान है और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।
​छत्तीसगढ़ में लोबेक्टॉमी (फेफड़े की) सर्जरी का प्रमुख कारण फेफड़े में एस्परजिलोमा (Aspergilloma) एवं ब्रोन्किएक्टैसिस है। यह एस्परजिलोमा एक फंगस (Aspergillus niger) एस्परजिलस नाइजर से होता है। यह इन्फेक्शन फेफड़े के टी.बी. वाले मरीजों या ऐसे मरीजों को होता है, जिनकी इम्युनिटी बहुत ही कम हो जाती है।
​एस्परजिलोमा सामान्यतः दायें फेफड़े के ऊपरी लोब (भाग) में सबसे अधिक होता है, क्योंकि यहाँ पर टीबी के बैक्टीरिया एवं एस्परजिलोमा के फंगस को बहुत ही अच्छा वातावरण मिलता है। ​ब्रोन्किएक्टैसिस भी फेफड़े के टी.बी. संक्रमण के बाद होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है, जिसमें फेफड़े के अंदर छोटे-छोटे कैविटी (गुहा) बन जाती हैं एवं इसमें संक्रमण होने के बाद मरीजों को खांसी के समय खून निकलता है। ​वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं लंग एब्सिस (Lung Abscess) में फेफड़े में बड़ा कैविटी बन जाने से खांसी में खून आने (Hemoptysis) का सबसे बड़ा कारण है।
​वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं फेफड़े का कैंसर भी थूक या बलगम में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। एवं ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़े का कैंसर अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो तो लोबेक्टॉमी ऑपरेशन से इस बीमारी (कैंसर) से पूर्णतः निजात पाया जा सकता है।
​पूरे छ.ग. में फेफड़े की सर्वाधिक सर्जरी इसी हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में होती है, जिसमें प्रमुख रूप से फेफड़े का डिकॉर्टिकेशन सर्जरी, लोबेक्टॉमी (Lobectomy), सेगमेंटेक्टॉमी (Segmentectomy) एवं न्यूमोनेक्टॉमी (Pneumonectomy) जिसमें एक तरफ के दायें या बायें फेफड़े को पूर्णतः निकाल दिया जाता है, इत्यादि।
सामान्यतः इस संस्थान में साल में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती है। यही नहीं यहाँ पर फेफड़े की सर्जरी कराने के लिए सिर्फ छ.ग. से ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार,​ झारखंड, उड़ीस , म.प्र. एवं उ.प्र. के भी मरीज आते हैं। जो इस संस्थान के लिए गौरव का विषय है।
​ये सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जाता है। अभी भी हमारे विभाग में लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए कुछ मरीज प्रतीक्षारत हैं।
​क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी:
हमारे शरीर में फेफड़े के दो हिस्से होते हैं, जिसे दायां एवं बायां फेफड़ा कहा जाता है। बायां फेफड़ा दो लोब (भाग) से मिलकर बनता है, जिसको अपर लोब और लोअर लोब कहा जाता है। उसी प्रकार दायें फेफड़े में तीन (3) Lobe (लोब) होते हैं: अपर लोब, मिडिल लोब (Middle Lobe) एवं लोअर लोब।
​यदि फेफड़े को कोई बीमारी जैसे कि एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर (Lung Tumour) किसी एक भाग या लोब तक सीमित होती है तो उस स्थिति में उस भाग को ऑपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है, जिसको मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी कहा जाता है। इसमें दायें या बायें छाती में चीरा लगाकर संक्रमित फेफड़े को अन्य भागों से अलग किया जाता है एवं विशेष तकनीक एवं लंग स्टेपलर की सहायता से संक्रमित लोब को निकाला जाता है। आधुनिक स्टेपलर प्रयोग करने से फेफड़े के ऑपरेशन के बाद होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि  ब्रोन्कोप्लूरलफिस्टुला (Bronchopleural Fistula) में बहुत ही कमी आ जाती है।सामान्यतः 6-8 दिनों बाद मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
 

26 सप्ताह के शिशु जितने बड़े ट्यूमर का सफल ऑपरेशन, महिला को मिली नई जिंदगी

10-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय राजनांदगांव के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने एक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक संपन्न कर जिले में उपलब्ध विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उत्कृष्टता का परिचय दिया है। विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने एक महिला के गर्भाशय के बाहर विकसित हुए विशाल ब्रॉड लिगामेंट फाइब्रॉयड (ट्यूमर) का सफल ऑपरेशन कर उसे स्वस्थ जीवन की नई उम्मीद दी।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मीना आरमो ने बताया कि यह ट्यूमर ब्रॉड लिगामेंट फाइब्रॉयड था, जो कैंसर नहीं होता है। यह सामान्य फाइब्रॉयड की तरह गर्भाशय के भीतर न होकर गर्भाशय के बाहर बांई ओर स्थित था। इसका आकार लगभग 26 सप्ताह के शिशु के समान था। ट्यूमर के आसपास मूत्रवाहिनी (यूरेटर) तथा प्रमुख रक्त वाहिकाएं होने के कारण इसकी सर्जरी अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। 
उन्होंने बताया कि महिला की यूएसजी एवं सीटी स्कैन रिपोर्ट में गर्भाशय कैंसर की संभावना व्यक्त की गई थी, जिसके आधार पर स्टेजिंग लैप्रोटॉमी की योजना बनाई गई थी। लेकिन ऑपरेशन के दौरान पेट में चीरा लगाने के बाद स्पष्ट हुआ यह कैंसर नहीं, बल्कि ब्रॉड लिगामेंट फाइब्रॉयड है। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी एवं दक्षता के साथ ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया। ऑपरेशन के उपरांत गर्भाशय, ट्यूब, अंडाशय एवं ट्यूमर के नमूनों को आवश्यक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। वर्तमान में मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है तथा वह तेजी से स्वस्थ हो रही है।
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में नियमित रूप से जटिल स्त्री रोग संबंधी शल्य चिकित्साएं आधुनिक तकनीकों एवं मानक उपचार पद्धतियों के अनुरूप की जा रही हैं। इससे जिले एवं आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं को उच्चस्तरीय विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो रहा है।

 



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