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मनेंद्रगढ़ में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम से मरीजों को बड़ी राहत

07-Feb-2026
रायपुर,।   ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (जीवनधारा) के अंतर्गत एमसीबी जिले में किडनी रोगियों को निःशुल्क हेमोडायलिसिस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों को लाभ मिल चुका है। यह सुविधा विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पहले उपचार के लिए अन्य जिलों अथवा राज्य के बाहर जाना पड़ता था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने बताया कि जिले में 01 अक्टूबर 2024 से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा किया गया था। बीते डेढ़ वर्ष में अब तक 5,210 से अधिक मरीजों का सफल डायलिसिस किया जा चुका है। इनमें नेगेटिव 3503, पॉजिटिव (सी) 1474 तथा पॉजिटिव (बी) 232 मरीज शामिल हैं। वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ स्थित 220 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि डायलिसिस उन मरीजों के लिए आवश्यक होती है जिनकी किडनी की कार्यक्षमता 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हो चुकी होती है। विशेष रूप से स्टेज-5 क्रोनिक किडनी रोग, अचानक किडनी फेल्योर, अनियंत्रित मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं से पीड़ित मरीजों को इस उपचार की आवश्यकता पड़ती है। 
डायलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर से अपशिष्ट पदार्थ एवं अतिरिक्त तरल को बाहर निकालकर मरीजों को राहत दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब किडनी शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाए, शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगें, अत्यधिक थकान, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ अथवा फेफड़ों में पानी भरने जैसी स्थिति उत्पन्न हो, तब डायलिसिस आवश्यक हो जाती है। यह प्रक्रिया मरीज की स्थिति के अनुसार अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार की हो सकती है। जिला अस्पताल में उपलब्ध इस निःशुल्क सुविधा से मरीजों का आर्थिक बोझ कम हुआ है तथा उन्हें समय पर उपचार मिल रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और भरोसा दोनों बढ़े हैं।

राज्य में आवश्यक दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

04-Feb-2026
रायपुर, ( शोर संदेश )। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शामिल हुए। बैठक में राज्य में दवाइयों, मेडिकल उपकरणों एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना से संबंधित विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देशित किया कि राज्य में किसी भी स्थिति में अतिआवश्यक दवाइयों की कमी नहीं होनी चाहिए तथा दवाइयों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लोक महत्व से जुड़े इस विषय में यह आवश्यक है कि आम नागरिकों को समय पर एवं गुणवत्तायुक्त दवाइयां उपलब्ध हों।
स्वास्थ्य मंत्री ने दवा आपूर्ति प्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, स्टॉक एवं एक्सपायरी की रीयल टाइम जानकारी प्राप्त करने हेतु एक लाइव ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा मांग एवं आपूर्ति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया।
बैठक में दवाइयों एवं मेडिकल उपकरणों के गुणवत्ता परीक्षण से संबंधित सभी मापदंडों का कठोरता से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही अस्पतालों के लिए आवश्यक कंज्युमेबल सामग्री की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि जिन जिलों द्वारा दवाइयों की मांग भेजे जाने के बावजूद उनका उठाव नहीं किया जा रहा है, उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक सभी अत्यावश्यक मेडिकल उपकरणों की खरीदी पूर्ण करने तथा प्रयोगशालाओं के लिए रिएजेंट की उपलब्धता शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य अधोसंरचना के संबंध में मंत्री ने महासमुंद, कांकेर एवं कोरबा मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य में 12 नवीन नर्सिंग कॉलेज एवं 6 नवीन फिजियोथेरेपी कॉलेजों के निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक की समाप्ति पर सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के ने स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति में बैठक अत्यंत उपयोगी एवं सार्थक रही। उन्होंने बताया कि बैठक में दिए गए निर्देशों की शीघ्र समीक्षा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।



 

केंद्रीय बजट 2026: एक लाख नए एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार होंगे, योगा और आयुष को मिलेगा वैश्विक विस्तार

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को बजट भाषण के दौरान युवाओं के लिए नए अवसर और योगा व डिजाइन उद्योग के विकास को लेकर कई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के लिए कुशल करियर के नए रास्ते बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े स्तर पर फोकस किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (एएचपी) के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नए एएचपी संस्थान खोले जाएंगे। यह योजना 10 चयनित विषयों को कवर करेगी, जिनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया, ओटी टेक्नोलॉजी, एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल हेल्थ शामिल हैं। अगले पांच वर्षों में इस पहल के तहत एक लाख नए एएचपी तैयार किए जाएंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “प्राचीन भारतीय योग, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में पहले से ही सम्मान मिलता है, उसे तब बड़े पैमाने पर ग्लोबल पहचान मिली जब प्रधानमंत्री इसे यूएन ले गए। बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए, कुछ और कदम उठाए जा रहे हैं। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे। सर्टिफिकेशन इकोसिस्टम के उच्च मानकों के लिए आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा और अधिक कुशल कर्मियों को उपलब्ध कराया जाएगा। पारंपरिक चिकित्सा के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को अपग्रेड किया जाएगा।”
डिजाइन सेक्टर को लेकर भी वित्त मंत्री ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय डिजाइन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन देश में कुशल डिजाइनरों की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन स्थापित किया जाएगा, जिससे डिजाइन शिक्षा और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह बजट निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट है। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बजट पेश करने के रिकॉर्ड के और करीब पहुंच गई हैं। देसाई ने 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार बजट पेश किए थे। वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में क्रमशः नौ और आठ बजट पेश किए हैं। 

कर्रेगुट्टा आईईडी विस्फोट: उपमुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायल जवानों का बढ़ाया मनोबल

31-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश ) उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा शनिवार को रायपुर के एक निजी अस्पताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेगुट्टा पहाड़ी में हुए आईईडी ब्लास्ट में घायल पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की स्थिति की जानकारी ली तथा जवानों के परिजनों से भी चर्चा की।
उपमुख्यमंत्रीशर्मा ने घायल जवानों से घटना की जानकारी ली और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि शासन एवं प्रशासन हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है। उन्होंने अस्पताल में उपस्थित अधिकारियों एवं चिकित्सकों को निर्देश दिए कि जवानों के बेहतर एवं समुचित उपचार हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
उन्होंने कहा कि नक्सल विरोधी अभियान में तैनात हमारे जवान अत्यंत साहस और समर्पण के साथ देश-प्रदेश की सुरक्षा में लगे हैं, और उनका त्याग अतुलनीय है।
ज्ञात हो कि बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र अंतर्गत कर्रेगुट्टा पहाड़ी में 25 जनवरी को एक के बाद एक कुल छह आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट हुए थे। इन विस्फोटों की चपेट में आने से डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 12 जवान घायल हो गए थे। यह घटना उस समय हुई, जब सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम तेलंगाना सीमा से लगे कर्रेगुट्टा हिल्स क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। घटना के बाद सभी घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया, जहाँ उनका उपचार एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है। इनमें से 6 जवानों को उपचार उपरांत स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि शेष जवानों की स्थिति में भी लगातार सुधार हो रहा है।



 

दर्द से राहत की नई सुबह: दंतेवाड़ा में पहली बार बदला गया घुटना, अब बड़े शहरों की मजबूरी खत्म

16-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) बरसों से घुटने के दर्द के साथ जी रही एक आदिवासी महिला के लिए यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत है। दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में पहली बार एडवांस्ड टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई—और इसी के साथ यह भरोसा भी मजबूत हुआ कि अब इलाज के लिए दूर-दराज़ के बड़े शहरों की मजबूरी नहीं रही।
कुआकोंडा विकासखंड के महारापारा की 45 वर्षीय शांति रोज़मर्रा की ज़िंदगी में संघर्ष कर रही थीं। साप्ताहिक हाट में चूड़ियों का छोटा-सा व्यवसाय चलाने वाली शांति के लिए चलना-फिरना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। दाएं घुटने के असहनीय दर्द ने काम, आमदनी और आत्मविश्वास—सब कुछ छीन लिया था।
जिला अस्पताल में जांच के बाद उन्हें गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस बताया गया। 6 जनवरी को भर्ती और 13 जनवरी को उनका टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। आज शांति के चेहरे पर सुकून है—“पहले हर कदम दर्द देता था, अब आराम है,” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा।
ऑपरेशन करने वाले ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह अत्याधुनिक प्रक्रिया घुटने के क्षतिग्रस्त जोड़ को कृत्रिम इम्प्लांट से बदलती है, जिससे लंबे समय का दर्द खत्म होता है और चलने-फिरने की क्षमता लौटती है।
इस इलाज की खास बात यह भी रही कि पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ—यानी शांति को जेब से एक रुपया भी नहीं देना पड़ा। उन्होंने सरकार और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया।
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जैसे जिले में इस स्तर की सर्जरी का होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर है। प्रशिक्षित सर्जन, एनेस्थीसिया सपोर्ट, नर्सिंग स्टाफ और मज़बूत पोस्ट-ऑपरेटिव केयर—सबकी साझा मेहनत ने यह संभव किया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सुविधा शासन की योजनाओं के तहत निःशुल्क उपलब्ध है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी अत्याधुनिक इलाज अपने जिले में ही मिल सके।दंतेवाड़ा के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं—यह भरोसे की जीत है।
 

विशेष लेख : सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान: स्वस्थ बचपन–सशक्त मातृत्व की दिशा में राज्य का संकल्प

10-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ शासन के गठन के 25 वर्ष एवं वर्तमान राज्य सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में “सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान” की प्रभावशाली शुरुआत की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रारंभ यह अभियान कुपोषण एवं एनीमिया जैसी गंभीर सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है।
यह अभियान 1 जनवरी 2026 से प्रदेश के आठ संवेदनशील एवं चयनित जिलों—बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर—में एक साथ लागू किया गया है। अभियान का मूल उद्देश्य कुपोषण मुक्त बचपन और स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने तथा 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं, विशेषकर गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया की समस्या को प्रभावी रूप से कम करने पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसके बच्चों के स्वास्थ्य और माताओं के सशक्तिकरण पर निर्भर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार कुपोषण के विरुद्ध केवल योजनागत नहीं, बल्कि संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। यह अभियान सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी का प्रतीक है।महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि अभियान के अंतर्गत आगामी छह महीनों में महिलाओं में रक्ताल्पता की दर में उल्लेखनीय कमी लाने, गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में ठोस सुधार करने तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत कुपोषण से मुक्ति के उद्देश्य से समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश में कुपोषण की दर में कमी लाने तथा एनीमिक गर्भवती महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए लक्षित प्रयास किए जाएंगे। गंभीर एवं मध्यम कुपोषित (एसएएम, एमएएम) बच्चों, संकटग्रस्त बच्चों तथा चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता वाली गर्भवती महिलाओं को विशेष समुदाय आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से कवर किया जाएगा।
अभियान के तहत सुपोषण दूतों का चयन किया जा रहा है, जो 70 प्रतिशत मध्यम कुपोषित एवं 30 प्रतिशत गंभीर कुपोषित बच्चों को गोद लेकर विभागीय योजनाओं एवं समुदाय के सहयोग से उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करेंगे। बच्चों को सामान्य पोषण स्तर में लाने पर सुपोषण दूतों को प्रति बच्चा प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार महिला स्व-सहायता समूहों को भी कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल से जोड़ा जाएगा, जिन्हें निर्धारित मानदेय के अनुसार प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
कुपोषण के प्रभावी प्रबंधन एवं सतत निगरानी के लिए जिला स्तर पर प्रबंध समिति का गठन किया गया है। साथ ही कुपोषित बच्चों को स्थानीय निधि से पोषण आहार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
जनसहयोग और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से “सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान” एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप ले रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़ों में सुधार नहीं, बल्कि व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाकर प्रत्येक बच्चे और प्रत्येक माता तक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। सतत निगरानी, पारदर्शी क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही के साथ यह अभियान कुपोषण एवं एनीमिया के विरुद्ध निर्णायक परिणाम देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।







 

अम्बेडकर अस्पताल में नए साल की शुरुआत: जटिल TAVI प्रक्रिया से बुजुर्ग महिला का हृदय स्वास्थ्य सुधरा

09-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश )   पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टिट्यूट (ACI) ने नववर्ष 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ की है। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गईं। वर्ष 2009 में मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ यह विभाग आज प्रतिवर्ष 2000 से अधिक उन्नत कार्डियक प्रक्रियाओं को अंजाम दे रहा है।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि नए वर्ष में विभाग ने एक अत्यंत जटिल ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपादित किया। रायपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने एवं हार्ट फेलियर से पीड़ित थीं। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिसके कारण हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी।
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, इस अवस्था में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण एवं लगभग असंभव थी। ऐसे में डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी विभाग की टीम और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में संयुक्त रूप से ‘हार्ट टीम’ का गठन कर बिना चीर-फाड़ के पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया गया।
प्रक्रिया की तैयारी एक माह पूर्व विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण एवं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत वित्तीय स्वीकृति के साथ शुरू हुई। जांच में यह भी पाया गया कि मरीज की पैर की नसें पतली एवं कैल्शियम युक्त थीं, जिससे वाल्व डिलीवरी सिस्टम को हृदय तक पहुँचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। साथ ही, जन्मजात संरचनात्मक विसंगति के कारण हृदय की कोरोनरी धमनियाँ वाल्व के काफी समीप थीं, जिससे वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान दोनों धमनियों के बंद होने का गंभीर खतरा था।
इस जटिलता से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर उनके और वाल्व के बीच “चिमनी” संरचना तैयार की। प्रक्रिया के अंतिम चरण में वाल्व डिलीवरी के दौरान बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज उत्पन्न हो गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह पुनः स्थापित किया गया।
लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के पश्चात ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा तथा हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर रही।
अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने इस जटिलतम प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए कार्डियोलॉजी टीम को बधाई दी।
यह प्रक्रिया डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस द्वारा संपन्न की गई। टीम में कैथलैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद तथा स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बालस्वरूप साहू एवं डॉ. संकल्प दीवान का भी विशेष सहयोग रहा।
मरीज वर्तमान में हार्ट कमांड सेंटर से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर डिस्चार्ज लेकर अपने घर जा चुकी हैं। मरीज एवं उनके परिजनों ने एसीआई की टीम, अस्पताल प्रबंधन एवं छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शासकीय चिकित्सा संस्थानों पर अपने विश्वास को पुनः सुदृढ़ किया।
हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत- ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण एवं लगभग असंभव, इसलिए पैर की नस के रास्ते वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) का निर्णय लिया गया।
पूर्व में विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण कर पतले एवं उन्नत डिलीवरी सिस्टम का उपयोग किया गया।
वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान नसों के बंद होने के खतरे को देखते हुए स्टेंट लगाकर “चिमनी” संरचना तैयार की गई।
तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर प्रभावित नस में रक्त प्रवाह पुनः स्थापित किया गया।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से ओपन हार्ट सर्जरी की टीम को स्टैंडबाई में रखा गया।
हृदय की धड़कन अनियमित होने की संभावना - 24 घंटे के लिए टेम्पररी पेसमेकर का बैकअप सुनिश्चित किया गया।
मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में अति गहन निगरानी में रखा गया, जहाँ रिमोट व्यूइंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से टेली-मॉनिटरिंग की गई।

आंबेडकर अस्पताल में बिना चीर-फाड़ हार्ट ऑपरेशन: स्टेंट से चिमनी बनाकर डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान

09-Jan-2026
रायपुर (शोर संदेश)। आंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बार फिर जटिल हार्ट प्रक्रिया कर एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई है। एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में ट्रांसकैथेटर आर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। शहर की रहने वाली महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से पीड़ित थी।
जांच में पाया गया कि उनका आर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम बनाई गई।
डॉक्टरों ने बिना चीर-फाड़ पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी के अनुसार, वर्ष 2025 में विभाग ने 2600 से अधिक जटिल हार्ट ऑपरेशन किए हैं।
टीम ने ऐसे किया ऑपरेशन
कई तरह की गंभीर जटिलताओं से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर उनके और वाल्व के बीच चिमनी संरचना तैयार की। प्रक्रिया के आखिरी स्टेज में वाल्व डिलीवरी के दौरान बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज आ गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह फिर से स्थापित किया गया।
लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के आर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया। हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा तथा हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर रही।
ऑपरेशन टीम में डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. शिवकुमार शर्मा, कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बालस्वरूप साहू, डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस, कैथलैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद, स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र शामिल थे।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जिला अस्पताल बलौदा बाजार का किया निरीक्षण

08-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) स्वास्थ्य मंत्री एवं बलौदाबाजार भाटापारा जिले के प्रभारी मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल जिले के एक दिवसीय प्रवास पर थे ।इस दौरान उन्होंने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया ।उन्होंने जिला अस्पताल स्थित इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वॉलिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत क्वॉलिटी सर्टिफिकेट मिलने पर बधाई दी।
जायसवाल ने जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर ,मातृ शिशु अस्पताल ,फिजियोथेरेपी सेंटर का निरीक्षण किया।साथ ही मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल -चाल जाना।उन्होंने संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी के लिए जिले में हो रहे काम की सराहना की और 50 बिस्तर मातृशिशु अस्पताल में बेड्स की संख्या बढ़ाने की बात कही। स्वास्थ्य मंत्री ने मुरुम तालाब के पास एक इंटीग्रेटेड यूनिट के निर्माण की बात भी कही जिसमे योग,नेचुरोपैथी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज की व्यवस्था ,सियान क्लिनिक इत्यादि की सुविधा होगी।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में यहाँ प्रतिमाह 450 से अधिक प्रसव हो रहे हैं ।जिनमें से 200 सिजेरियन प्रसव हैं। इसके अलावा यहाँ  प्रतिमाह 300 डायलेसिस हो रहे हैं।











 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को सार्वजनिक स्वास्थ्य में राष्ट्रीय उपलब्धि

08-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश )  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे  पत्र में नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है।
केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार  जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि  यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।

 




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