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स्वास्थ

10 साल से खाँसी में खून की समस्या झेल रहे युवक को अम्बेडकर अस्पताल में मिली नई जिंदगी

14-May-2026
रायपुर, (शोर संदेश)। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक अत्यंत जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी कर 25 वर्षीय युवक की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। मरीज लंबे समय से खांसी के साथ खून आने की गंभीर समस्या से पीड़ित था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि प्रत्येक बार खांसने पर लगभग 50 से 70 एमएल तक खून निकल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते ऑपरेशन नहीं किया जाता तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की जान भी जा सकती थी।
अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में छाती एवं फेफड़ों के अधिकांश ऑपरेशन उन्नत तकनीक से की जा रही है। अभनपुर के पास चटौद निवासी 25 वर्षीय युवक को पिछले लगभग 10 वर्षों से खांसी के साथ बलगम में खून आने की शिकायत थी। प्रारंभ में यह समस्या कम थी, लेकिन पिछले एक माह से लगातार बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो गई तथा हर बार खांसने पर अत्यधिक मात्रा में खून आने लगा।
मरीज ने पूर्व में टीबी की दवाइयों का सेवन भी किया था तथा उपचार के लिए कई बड़े अस्पतालों में परामर्श लिया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। जांच के दौरान मरीज का सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें दाएं फेफड़े के निचले हिस्से (लोअर लोब) में बड़ी कैविटी बनने एवं उसमें एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण होने की पुष्टि हुई। यह बीमारी सामान्यतः टीबी से पीड़ित मरीजों में देखने को मिलती है।
सीटी स्कैन रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद डॉ. साहू ने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक था। इस सर्जिकल प्रक्रिया को मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी (लोअर लोब ऑफ राइट लंग) कहा जाता है, जिसमें फेफड़े के संक्रमित हिस्से को काटकर निकाला जाता है। यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल एवं हाई-रिस्क सर्जरी की श्रेणी में आता है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान फेफड़ों की प्रमुख रक्त वाहिनियों- पल्मोनरी आर्टरी एवं पल्मोनरी वेन, को क्षति पहुंचने का खतरा बना रहता है।
परिजनों की सहमति मिलने के बाद मरीज का अगले ही दिन आपातकालीन ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान अत्याधुनिक लंग स्टेपलर गन तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे ऑपरेशन के बाद एयर लीक जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो सके। सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और कुछ दिनों बाद उसे पूर्णतः स्वस्थ होने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। यह संपूर्ण उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया।
डॉ. साहू ने बताया कि खांसी के साथ खून आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में हीमोप्टाइसिस कहा जाता है। इसके प्रमुख कारणों में फेफड़ों की टीबी, फेफड़ों का कैंसर, पल्मोनरी एवी मालफॉर्मेशन, ब्रोंकाइटिस तथा अन्य गंभीर फेफड़ा संबंधी रोग शामिल हैं।
 पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि चिकित्सकों की टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए समय पर सफल सर्जरी कर मरीज को नया जीवन दिया। भविष्य में भी हमारा संस्थान इसी प्रकार मरीजों को बेहतर, सुलभ एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन का निरंतर यह प्रयास रहा है कि आयुष्मान योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को उच्चस्तरीय एवं निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए और इस दिशा में हमें सफलता भी मिल रही है। वर्तमान में इस योजना से कई मरीज लाभांवित भी हो रहे हैं।

 


सुशासन शिविर में मेडिकल मोबाइल यूनिट की तैनाती से ग्रामीणों को मिली निःशुल्क जांच व ईलाज

12-May-2026
रायपुर,(शोर संदेश)।बलौदाबाजार के विशेष पिछडी जनजाति कमार बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार एवं औराई में प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत एवं नग मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देशानुसार इस एमएमयू को विकासखंड कसडोल अंतर्गत आयोजित प्रथम समाधान शिविर मोहतरा (क )में तैनात किया गया। शिविर में आये बड़ी संख्या में लोगों ने एमएमयू में निःशुल्क जांच, ईलाज व दवाई प्राप्त क़ी।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने मोहतररा शिविर के पास ही लगाए गए एमएमयू  कैम्प का जायजा लिया। उन्होंने तैनात चिकित्सक एवं स्टॉफ से पूछताछ कर ओपीडी की संख्या, जांच सुविधा, दवाई की उपलब्धता की जानकारी ली।
इस दौरान जांच कराने पहुंचे ग्रामीणों से बातचीत की। ग्राम चांटीडीह की करीब 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला रामबाई  ने बताया कि इस वाहन में फ्री में जांच, ईलाज व दवाई मिल रही है। कलेक्टर ने हाथ में रखे दवाई संभाल रही रामबाई से पूछा कि यह सब दवाई इसी वाहन से मिला हैं, किसी प्रकार कि समस्या तो नहीं हैं। रामबाई ने कहा कि इसमें सब सुविधा हैं, फ्री में ईलाज हो रहा हैं, बस एक सुविधा हो जाता तो ठीक था। यहां से मिलने वाली दवाई को लिफाफा या पैकेट में देने की व्यवस्था हो, हाथ में रखने से कहीं गिर न जाए। इस पर कलेक्टर ने सीएमएचओ  को निर्देशित किया कि अब से दवाई को पैकेट में देने कि व्यवस्था किया जाए।उन्होंने इलाज़ के लिये वाहन में चढने के लिये एक छोटी सीढ़ी की भी व्यवस्था करने के निर्देश दिये।
















 

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान बना जीवन रक्षक संजीवनी

11-May-2026
रायपुर, । (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में सुकमा जिले में मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच और उपचार कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों के जरूरतमंद नागरिकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में कोंटा विकासखंड के दूरस्थ नियद नेल्लानार क्षेत्र के अरलमपल्ली, पोलमपल्ली, दोरनापाल, बगड़ेगुड़ा, रंगाईगुड़ा, कोलईगुड़ा एवं पेंटापाड़ जैसे गांवों से कुल 39 मरीजों को जिला चिकित्सालय सुकमा लाकर जांच एवं उपचार कराया गया।
जिला चिकित्सालय में इन मरीजों का समुचित परीक्षण कर उपचार सुनिश्चित किया गया, जिसमें 16 लोगों को प्रेसबायोपिक चश्मा प्रदान किया गया तथा 8 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। वहीं नियद नेल्लानार के गोगुंडा पहाड़ी क्षेत्र से 5 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित लाकर जांच कराई गई और आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श के साथ वापस भेजा गया। इसके अतिरिक्त कोसागुड़ा से 6 मरीजों को अल्ट्रासाउंड एवं रक्त चढ़ाने हेतु भेजा गया था, जबकि 4 मरीज हाथ-पैर सूजन की समस्या से पीडि़त थे, जिनका भी उपचार कर राहत प्रदान की गई।
जिला चिकित्सालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में कुल स्वास्थ्य जांच का लक्ष्य 2,93,386 निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1,54,157 लोगों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है। जांच के दौरान कुल 4990 मरीजों को मोतियाबिंद, मलेरिया, कुष्ठ, टीबी, खून की कमी, उच्च जोखिम गर्भवती महिला, कुपोषित बच्चे, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों से चिन्हांकित कर प्राथमिक, सामुदायिक एवं जिला अस्पतालों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। 
कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं अंदरूनी क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद नागरिक इलाज से वंचित न रहे। अभियान के अंतर्गत चिन्हांकित मरीजों को समय पर जिला चिकित्सालय लाकर जांच, उपचार, ऑपरेशन एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  
मानवीय संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता का परिचय देते हुए सभी मरीजों का इलाज पूर्ण कराने के बाद उन्हें सुरक्षित घर वापस भेजने की व्यवस्था भी की गई। सुबह 6 बजे जिला अस्पताल में 4 एम्बुलेंस लगाकर मरीजों को नाश्ता कराया गया और फिर उन्हें उनके गांवों तक पहुंचाया गया। यह व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि शासन-प्रशासन दूरस्थ अंचलों के लोगों की स्वास्थ्य जरूरतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें सम्मान और सुरक्षा के साथ इलाज उपलब्ध करा रहा है।

सुदूर बीजापुर में चिकित्सा चमत्कार : अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझते शिशु को बचाया

01-May-2026
रायपुर(शोर संदेश) जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है।
ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली।
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।

हर गुरुवार गांव के द्वार स्वास्थ्य: दूरस्थ अंचलों में पहुंची चिकित्सा सेवाएं

01-May-2026
रायपुर।(शोर संदेश) दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के लिए मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग ने एक अभिनव पहल शुरू की है। अब ऐसे गांव, जो निकटतम उप स्वास्थ्य केंद्र से 5 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर स्थित हैं, वहां प्रत्येक गुरुवार को नियमित रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना है, ताकि दूरी और संसाधनों की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे। शिविरों में अनुभवी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सामान्य व मौसमी बीमारियों की जांच, प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श और निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया जा रहा है।
यह पहल विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए राहतकारी सिद्ध हो रही है, जिन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि शिविरों के माध्यम से उपचार के साथ-साथ स्वच्छता, पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और रोगों की रोकथाम को लेकर जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है।
“स्वास्थ्य सेवाएं गांव के द्वार” की अवधारणा को साकार करती यह पहल अब सकारात्मक परिणाम दे रही है। विभाग इसे पूरे जिले में विस्तार देने की तैयारी कर रहा है।





 

 


सड़क दुर्घटना में घायलों को मिल रहा पीएम-राहत योजना का लाभ

30-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश) ।भारत सरकार की पीएम-राहत (प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट) योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को तत्काल एवं कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत दुर्घटना के बाद के महत्वपूर्ण समय यानी गोल्डन ऑवर में बिना किसी देरी के अस्पताल में भर्ती कर अधिकतम 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति 1 लाख 50 हजार रुपए तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाता है।
योजना के अंतर्गत राजनांदगांव जिले में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी क्रम में अब तक 12 सड़क दुर्घटना पीड़ितों का पंजीयन कर योजना के तहत उपचार किया गया है। इनमें से 10 मरीजों का इलाज भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव में तथा 2 मरीजों का उपचार संजीवनी नर्सिंग होम, चिखली में किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद प्रारंभिक समय में शीघ्र उपचार मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है, इसलिए योजना में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित उपचार पर विशेष बल दिया गया है।
जिले में योजना के प्रभावी संचालन के लिए 34 शासकीय अस्पतालों—जिनमें शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय पेंड्री, जिला चिकित्सालय बसंतपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डोंगरगांव, छुरिया, डोंगरगढ़, घुमका, सोमनी सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र—तथा 38 निजी अस्पतालों के प्रभारी एवं संचालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
पीएम-राहत योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नागरिक निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
 

हल्के बुखार को न करें नजरअंदाज, मलेरिया पर सतर्कता ही बचाव

25-Apr-2026
रायपुर।  (शोर संदेश) शुरुआत अक्सर मामूली ही होती है-हल्का बुखार, ठंड लगना, शरीर में कमजोरी… ऐसे लक्षण जिन्हें हम आमतौर पर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही संकेत एक गंभीर बीमारी की दस्तक होते हैं। मलेरिया भी ठीक इसी तरह धीरे-धीरे शरीर को जकड़ता है l संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के एक डंक से शुरू होकर, अगर समय पर पहचान न हो, तो स्थिति को जटिल बना सकता है। यही कारण है कि समय पर जांच और उपचार को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी मानी जाती है।
25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस हमें न सिर्फ इस बीमारी के खतरों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सतर्कता और सामूहिक प्रयासों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ बसाहटों के कारण लंबे समय तक मलेरिया एक बड़ी चुनौती बना रहा।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में दर्ज कुल 144886  मामलों की तुलना में वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 28836  रह गई। यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि सुनियोजित रणनीति, समयबद्ध जांच और निःशुल्क उपचार जैसे प्रयास अब असर दिखा रहे हैं।
मलेरिया, जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, समय पर उपचार न मिलने पर गंभीर रूप ले सकता है। विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए यह अधिक जोखिमपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाई है।
राज्य में मलेरिया उन्मूलन हेतु प्रभावी रणनीति अपनायी जा रही हैं जिसके तहत हर संदिग्ध व्यक्ति की तत्काल जांच, पॉजिटिव पाए जाने पर निःशुल्क उपचार और मरीजों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर ’ जैसे अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर जांच और दवा वितरण कर रहा है।
सुदूर वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट, मितानिन  और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये टीमें न केवल जांच और उपचार कर रही हैं, बल्कि लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों के प्रति भी जागरूक बना रही हैं।
मलेरिया से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। मच्छरदानी का उपयोग, आसपास साफ-सफाई बनाए रखना, पानी का ठहराव न होने देना और बुखार आने पर तुरंत जांच कराना, ये सरल उपाय इस बीमारी के प्रसार को रोकने में प्रभावी हैं।
राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त प्रदेश के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए शासन, प्रशासन और आमजन के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है।
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और मलेरिया के प्रति सजग रहकर एक स्वस्थ, सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहयोग करें।

बस्तर में स्वास्थ्य अभियान ने पकड़ी रफ्तार, दूरस्थ अंचलों तक बढ़ा भरोसा

24-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश) बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।
अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।
जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।
इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है। 

कैंसर पीड़ित महिला को जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती, कलेक्टर ने बेहतर उपचार के दिए निर्देश

24-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश) काटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम जिनकी पत्नी कपूरा मरकाम थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित है और चलने फिरने में असमर्थ है। उन्हें बाइक में लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। यहां कलेक्टर गोपाल वर्मा ने मामला संज्ञान में आते ही तत्काल एम्बुलेंस बुलवा कर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपचार के लिए निर्देशित किया। महिला को बेहतर उपचार के लिए रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 11 नवंबर को ग्राम कांटाबहरा (नगवाही) के समलु मरकाम द्वारा थायराइड कैंसर पीड़ित पत्नी कपूरा मरकाम को उपचार के लिए बाइक में लिटा कर उपचार के लिए ले जाने की सूचना संज्ञान में आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम 12 नवंबर को पीड़िता के घर पहुंची और उसे 108 एम्बुलेंस में बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा रायपुर भेजा गया। यहां महिला को कैंसर रिसर्च युनिट में भर्ती कराया गया है जहां कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज हुआ। 
उन्होंने आगे बताया कि पूर्व में पीड़िता के स्वास्थ्य समस्या की जानकारी मिलने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेगांखार/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बोड़ला विकासखण्ड बोड़ला स्वास्थ्य विभाग के टीम द्वारा पीड़ित कपूरा मरकाम पति समलू मरकाम के ग्राम काटाबहरा (नगवाही) के निवास स्थान पर जाकर निरीक्षण करने पर पाया गया कि समलू मरकाम द्वारा अपनी पत्नी कपूरा मरकाम के गले का गांठ में दर्द होने पर प्राथ. स्वा. रेगांखर जंगल में ईलाज के लिए ले जाया गया। वहां पदस्थ डाक्टर द्वारा जिला स्वासस्थ्य विभाग के अधिकारियों से मरीज के बीमारी के संबंध में चर्चा कर उपचार के लिए रायपुर रिफर किया गया। जहां वर्ष 2024 में एक वर्ष तक एम्स, मेकाहारा तथा डीकेएस अस्पताल सहित कुछ निजी अस्पतालों में ईलाज चला। इसके पश्चात जनवरी 2025 में टाटा मेमोरियल मुंबई में एक माह तक ईलाज चला। वहां से ईलाज उपरांत घर लाया गया। पीड़िता की परेशानी पुनः बढ़ने पर उन्हें 12 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा रायपुर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ईलाज के लिए ले जाया गया। जहां वे 12 और 13 नवंबर को मेकाहारा में भर्ती रही और 14 से 19 नवंबर 2025 तक एम्स में भर्ती कर कीमोथेरेपी दी गई। जिसके पश्चात 20 नवंबर को मरीज को वापस घर लाया गया। जिसके पश्चात घर पर रहकर वह स्वास्थ्य लाभ ले रही थी। जिसके पश्चात महिला को आज फिर स्वास्थ्य खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां से उन्हें रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।

वर्ल्ड लिवर डे 2026 : लिवर को डिटॉक्स करने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

18-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बाहर का खाना और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे शरीर के अंदरूनी अंगों पर असर डालती है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला अंग लिवर है। यह शरीर का एक अहम हिस्सा है, जो खून को साफ करने, पाचन में मदद करने और शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। जब हम इसकी देखभाल नहीं करते, तो यह कमजोर होने लगता है। इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है, ताकि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार करें और गंभीर बीमारियों से बच सकें।
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए दवाओं से ज्यादा असर हमारी रोज की डाइट का होता है। कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जो लिवर की सफाई करने, उसे मजबूत बनाने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर इन्हें सही तरीके से रोजाना की जिंदगी में शामिल किया जाए, तो लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली लिवर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सब्जियों में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। जब हम इन्हें खाते हैं, तो ये शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनमें मौजूद क्लोरोफिल खून को साफ करने में मदद करता है, जिससे लिवर पर काम का दबाव कम हो जाता है और वह बेहतर तरीके से काम कर पाता है।
लहसुन भी लिवर के लिए एक शक्तिशाली चीज है। इसमें सल्फर तत्व पाए जाते हैं, जो लिवर के एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं। जब ये एंजाइम्स एक्टिव होते हैं, तो शरीर के अंदर मौजूद जहरीले पदार्थ बाहर निकलने लगते हैं। इसके अलावा, लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो लिवर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।
नींबू का सेवन भी लिवर के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर को साफ रखने में मदद करते हैं। नींबू शरीर में फैट के पाचन की प्रक्रिया को तेज करता है। इससे लिवर में जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती है और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा घटता है। सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना असरदार उपाय माना जाता है।
हल्दी को भी आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में खास जगह दी गई है। इसमें करक्यूमिन नाम का तत्व होता है, जो सूजन को कम करता है और लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है। जब लिवर में सूजन आती है, तो हल्दी उसे ठीक करने की प्रक्रिया को तेज करती है। साथ ही यह शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाती है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रीन टी भी लिवर हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसमें कैटेचिन्स नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं। रिसर्च बताती है कि नियमित रूप से ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और लिवर में वसा जमा होने की संभावना कम हो जाती है। इससे फैटी लिवर का खतरा भी घटता है।
 


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