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स्वास्थ

नीट रिजल्ट के तनाव से जूझ रहे छात्रों को राहत, सिम्स ने शुरू की 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा

19-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) नीट यूजी 2026 परीक्षा परिणाम एवं प्रवेश प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर ने अभ्यर्थियों के लिए 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन सेवा प्रारंभ की है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार सिम्स के मनोरोग विभाग के माध्यम से यह विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे विद्यार्थियों को समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग मिल सके।
सिम्स अधिष्ठाता कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार मोबाइल नंबर 9425502353 को 18 जून 2026 से आगामी दो सप्ताह तक हेल्पलाइन नंबर के रूप में संचालित किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम, काउंसिलिंग, प्रवेश प्रक्रिया एवं भविष्य को लेकर होने वाली चिंता, तनाव, घबराहट अथवा अन्य मानसिक समस्याओं के संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सकों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका शैक्षणिक प्रदर्शन। नीट जैसी प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के दौरान अनेक विद्यार्थी मानसिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे समय में उचित परामर्श एवं सकारात्मक संवाद उन्हें तनाव से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से आवश्यकता पड़ने पर हेल्पलाइन सेवा का अधिकतम उपयोग करने की अपील की। मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुजीत नायक ने  बताया कि परीक्षा परिणाम अथवा प्रवेश प्रक्रिया के दौरान तनाव, चिंता, निराशा और असफलता का भय जैसी स्थितियां सामान्य हैं, लेकिन समय पर परामर्श मिलने से इन समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है। हेल्पलाइन सेवा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करना तथा उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखना है।



 

धड़कते दिल को मिला छत्तीसगढ़ का दुलार, 5 साल की अनुष्का को मिला नया जीवन

19-Jun-2026
​रायपुर  (शोर संदेश)  प्रोजेक्ट धड़कन' और 'चिरायु' छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य, विशेष रूप से जन्मजात हृदय रोगों और अन्य गंभीर बीमारियों की मुफ्त जांच और उपचार के लिए चलाई जा रही प्रमुख स्वास्थ्य योजनाएं हैं। इनका मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को महंगे इलाज का आर्थिक बोझ उठाने से बचाना है।
अबूझमाड़ के जंगलों से घिरे नारायणपुर जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक किसान परिवार के लिए उनकी 5 साल की बेटी की धड़कनें ही उनका संसार थीं। लेकिन जब पता चला कि उस मासूम के दिल में जन्मजात बीमारी है, तो मानो उस परिवार की दुनिया ही थम गई। इलाज का भारी-भरकम खर्च और संसाधनों की कमी के बीच जहां उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, वहां राज्य सरकार की योजनाओं ने फरिश्ते की तरह कदम रखा।
​ज़िला प्रशासन नारायणपुर के प्रोजेक्ट धड़कन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के साझा प्रयासों से ओरछा विकासखंड के कुरूषनार गांव की 5 वर्षीय अनुष्का मंडावी का सफल और पूर्णतः निःशुल्क ऑपरेशन किया गया है। यह सफलता की कहानी स्वास्थ्य विभाग के समर्पण और सरकारी योजनाओं की सार्थकता की एक जीती-जागती मिसाल है।
अनुष्का के पिता अर्जुन मंडावी पेशे से किसान हैं और माता प्रमिला मंडावी गृहिणी हैं। सीमित आय के कारण अपनी लाडली के महंगे इलाज की व्यवस्था करना उनके लिए नामुमकिन सा था। इस बीच, चिरायु दल जब नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचा, तो उनकी नज़र अनुष्का पर पड़ी। ​चिकित्सकीय जांच में बच्ची के दिल की बीमारी का खुलासा हुआ। चिरायु दल ने बिना वक्त गंवाए परिवार को ढांढस बंधाया और योजना के तहत मिलने वाले मुफ्त इलाज की पूरी जानकारी दी।
इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए चिरायु दल के सदस्य डॉ. सतीश उसेंडी, डॉ. सिलवंती सिंह, फार्मासिस्ट मदन शोरी, लैब टेक्नीशियन दिलीप उसेंडी और एएनएम जसमती कचलाम ने कागजी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा कराया।
मामला सामने आते ही जिला प्रशासन तुरंत एक्टिव मोड में आ गया। जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक  के सीधे मार्गदर्शन में अनुष्का को तत्काल श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल भेजा गया। वहां देश के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 12 जून 2026 को मासूम अनुष्का के दिल का सफल और पूरी तरह से निःशुल्क ऑपरेशन किया।
​अब अनुष्का के दिल की धड़कनें पूरी तरह सामान्य हैं और वह तेजी से रिकवर कर रही है। अपनी बेटी को हंसता-खेलता देख माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का आभार जताते हुए कहा कि अगर चिरायु योजना और प्रोजेक्ट धड़कन का साथ न मिलता, तो हम अपनी बेटी का इलाज कभी नहीं करा पाते। इस योजना ने हमारी बच्ची को एक नया जीवन और हमारे परिवार को नई खुशियां दी हैं।
इस सफल ऑपरेशन के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने छत्तीसगढ़ के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जरूर कराएं। श्चिरायु योजनाश् के तहत बच्चों की गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती दौर में ही करके उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जा सकता है, ताकि कोई भी बचपन संसाधनों की कमी के कारण मुरझाने न पाए।





 

कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए लगा विशेष शिविर, दर्जनों मरीजों की जांच

18-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) कैंसर से बचाव और शुरुआती पहचान के लिए भारत में अक्सर विभिन्न अस्पतालों, सरकारी योजनाओं और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा निःशुल्क जांच शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों के माध्यम से आमजनों को जागरूक किया जाता है। आमतौर पर शिविरों के माध्यम से मुंह, स्तन और सर्वाइकल (बच्चेदानी के मुंह) कैंसर जैसी सामान्य बीमारियों की मुफ्त जांच की जाती है।
राष्ट्रीय गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जिला स्वास्थ्य समिति जगदलपुर और बालको मेडिकल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को धरमपुरा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (आयुष्मान आरोग्य मंदिर) में एक दिवसीय निःशुल्क कैंसर जांच एवं परामर्श शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ही लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की विशेषज्ञ जांच और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना था, जिसमें कैंसर रोगियों और संभावित मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गईं।
शिविर में अपनी सेवाएं देने के लिए बालको मेडिकल सेंटर से दो कैंसर रोग विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) सहित आठ सदस्यीय विशेष टीम जगदलपुर पहुंची थी। यह टीम अपने साथ एक अत्याधुनिक चलित कैंसर स्क्रीनिंग वैन लेकर आई थी, जिसमें मैमोग्राफी मशीन की विशेष सुविधा उपलब्ध थी। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिविर में पहुंचे मरीजों की बेहद उच्च स्तरीय और सघन जांच मौके पर ही सुनिश्चित की गई। 
दिनभर चले इस शिविर के दौरान कुल 62 मरीजों की मैमोग्राफी, पेप स्मीयर और ब्रश साइटोलॉजी जैसी जटिल जांचें की गईं। इन सघन जांच में स्तन कैंसर के दो मरीज, मुख कैंसर का एक मरीज, ब्लड कैंसर का एक मरीज तथा दो अन्य मरीज मिले। इसके अतिरिक्त प्रारंभिक जांच के आधार पर डॉक्टरों ने कुछ मरीजों में कैंसर के संभावित लक्षण भी पाए, जिन्हें विशेषज्ञ द्वारा संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। इन संदिग्ध मामलों में पेट कैंसर का एक और सर्वाइकल कैंसर के आठ मरीज शामिल हैं।
शिविर के दौरान केवल बीमारियों की पहचान ही नहीं की गई, बल्कि चिन्हित और संदिग्ध पाए गए सभी मरीजों की विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा विशेष काउंसलिंग भी की गई। डॉक्टरों ने मरीजों को बीमारी से न घबराने की समझाइश देते हुए आगे के उन्नत इलाज के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही शिविर में आए अन्य आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सामान्य जांच के तहत बीपी, शुगर और बीएमआई भी मापा गया।
शिविर में बस्तर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को अगर शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए, तो इसका सफल इलाज पूरी तरह संभव है। आज के शिविर का मुख्य उद्देश्य यही था कि लोगों को उनके क्षेत्र में ही विशेषज्ञ जांच मिल सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आज जो भी मरीज चिन्हित या संदिग्ध पाए गए हैं, उन्हें आगे के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग शासन की योजनाओं के माध्यम से उनका निःशुल्क और उत्तम उपचार सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बालको मेडिकल सेंटर की अत्याधुनिक मोबाइल वैन के सहयोग से की गई सघन स्क्रीनिंग के बाद, जिला एनसीडी सेल द्वारा इन सभी मरीजों की निरंतर ट्रैकिंग और फॉलो-अप किया जाएगा ताकि उन्हें त्वरित और समुचित इलाज मिल सके। इस कार्यक्रम को सफल बनाने और इसके बेहतर प्रबंधन में शहरी कार्यक्रम प्रबंधक पीडी बस्तियां, गैर संचारी रोग के जिला सलाहकार हनी गॉटलिब सहित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के समस्त स्टाफ, मितानिनों और अन्य चिकित्सा अधिकारियों ने अपनी सक्रिय और बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले ऋषिकेश में सेना के जवानों के लिए विशेष योग शिविर आयोजित

16-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले ऋषिकेश में गंगा नदी के पवित्र तट पर स्थित नीम बीच, तपोवन आमखाला में भारतीय सेना के जवानों के लिए एक विशेष योग शिविर का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम योग गुरु और आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अमृत राज द्वारा संचालित किया गया, जो आरोग्यधाम रिट्रीट (मां योग आश्रम) से जुड़े हैं।
इस शिविर में रायवाला मिलिट्री स्टेशन, जिसे लोकप्रिय रूप से 6 माउंटेन ब्रिगेड के नाम से जाना जाता है, के अधिकारियों और जवानों ने हिस्सा लिया। इनके साथ एनसीसी कैडेट्स भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
योग नगरी ऋषिकेश में आयोजित इस सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।
डॉ. अमृत राज ने प्रतिभागियों को अपनी दैनिक दिनचर्या में योग और आयुर्वेद को शामिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने के महत्व पर जोर देते हुए स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं।
योग के आध्यात्मिक पहलू पर बात करते हुए डॉ. अमृत राज ने कहा कि हमारा सबसे बड़ा प्रश्न “मैं कौन हूं?” है और इसका उत्तर खुद को दिव्य, प्रसन्न, शांत और आनंदमय आत्मा के रूप में पहचानने में छिपा है।
यह शिविर 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का हिस्सा था।
इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने 21 जून को होने वाले 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले हरियाणा विधानसभा परिसर में आयोजित योग प्रोटोकॉल ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की वार्षिक वैश्विक तैयारियों के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगान और हरियाणा के आधिकारिक राज्य गीत के साथ हुई।
सभा को संबोधित करते हुए नायब सिंह सैनी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव रखा था, तब दुनिया ने भारत की इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया था। उन्होंने बताया कि उस समय 170 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योग को मिला वैश्विक समर्थन केवल एक प्रस्ताव का समर्थन नहीं था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विरासत को मिला सम्मान भी था।






 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला, अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी कफ सिरप

16-Jun-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्र सरकार ने आम जनता खासकर बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए खांसी की सिरप (कफ सिरप) की बिक्री पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप खरीदना असंभव हो गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम (ड्रग्स रूल्स), 1945 में संशोधन कर दिया है। राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) के माध्यम से यह बदलाव अधिसूचित किया गया है।
– औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘क’ या ‘K’ की प्रविष्टि संख्या 13 से ‘सिरप’ शब्द हटा दिया गया है।
– 1000 से कम आबादी वाले छोटे गांवों में बिना लाइसेंस के कफ सिरप बेचने की छूट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
– अब खांसी की सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से ही बिक्री होगी।
– डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) अनिवार्य कर दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह कदम खांसी की सिरप की अनियंत्रित बिक्री, दुरुपयोग और गुणवत्ता संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए उठाया गया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से यह संशोधन किया गया है।
संशोधन दिसंबर 2025 में अधिसूचित किया गया था और अब पूरे देश में लागू है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी दवा निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि नए नियमों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला दवाओं के जिम्मेदार वितरण को बढ़ावा देने और पूरे देश में नियामक मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इसे लेकर सरकार का कहना है कि कफ सिरप के दुरुपयोग को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब कफ सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के माध्यम से और वैध चिकित्सकीय सलाह के तहत ही उपलब्ध होगा।
आमतौर पर कफ सिरप में ऐसी औषधियां शामिल होती हैं जो ड्रग्स रूल्स की अनुसूची H और H1 के अंतर्गत आती हैं। इन दवाओं के लिए डॉक्टर के पर्चे और लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से वितरण की व्यवस्था पहले से लागू है। हालांकि अनुसूची K के तहत एक विशेष छूट दी गई थी, जिसके कारण एक हजार से कम आबादी वाले गांवों में घरेलू उपचार के रूप में कफ सिरप उपलब्ध कराया जा सकता था।
सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में कफ सिरप के दुरुपयोग और उससे जुड़े मामलों को देखते हुए इस छूट को जारी रखना उचित नहीं था। इसलिए अब छोटे और दूरदराज के गांवों में भी कफ सिरप केवल लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा।
इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि मरीजों को दवा के सही उपयोग, उचित खुराक, सेवन की अवधि, सावधानियों और संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी मिल सके। साथ ही उन्हें यह भी बताया जा सकेगा कि किन परिस्थितियों में दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और किन आयु वर्गों के लिए विशेष सावधानी आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप का सेवन कई बार स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। नई व्यवस्था फार्मेसियों की जवाबदेही भी बढ़ाएगी और बिना वैध पर्चे के कफ सिरप की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट पहले केवल एक हजार से कम आबादी वाले गांवों तक सीमित थी। शहरी क्षेत्रों और ऑनलाइन माध्यम से कफ सिरप की बिक्री के लिए पहले भी वैध चिकित्सकीय पर्चा और पंजीकृत फार्मेसी के माध्यम से वितरण अनिवार्य था।
नए संशोधन के बाद अब देशभर में कफ सिरप की उपलब्धता और वितरण पर अधिक प्रभावी निगरानी संभव हो सकेगी।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स रायपुर में राष्ट्रीय ऑन्कोलॉजी शिखर सम्मेलन ‘ऑन्कोस्फीयर 2.0’ का आयोजन करेगा

12-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) मध्य भारत के अग्रणी स्वास्थ्य संस्थानों में से एक, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स, रायपुर, अपने प्रमुख शैक्षणिक ऑन्कोलॉजी सम्मेलन ‘ऑन्कोस्फीयर 2.0’ का आयोजन 13 और 14 जून 2026 को होटल बैबिलोन इंटरनेशनल, रायपुर में करेगा। यह सम्मेलन देशभर से प्रमुख ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों को एक मंच पर लाएगा, जहाँ कैंसर देखभाल के क्षेत्र में नवीनतम प्रगति और नवाचारों पर चर्चा की जाएगी।
सम्मेलन में भारत के प्रतिष्ठित ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ भाग लेंगे, जो उभरती उपचार पद्धतियों, जटिल क्लिनिकल मामलों और कैंसर के निदान एवं उपचार को पुनर्परिभाषित करने वाले महत्वपूर्ण नवाचारों पर विचार-विमर्श करेंगे।
कैंसर देखभाल में प्रगति केवल चिकित्सा उपलब्धियों से नहीं, बल्कि ज्ञान, विशेषज्ञता और अनुभव के निरंतर आदान-प्रदान से भी संभव होती है। अपने प्रमुख शैक्षणिक पहल ‘ऑन्कोस्फीयर 2.0’ के माध्यम से, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने, बहु-विषयक सहयोग को प्रोत्साहित करने और कैंसर उपचार के मानकों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
दो दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिक सत्र, मुख्य व्याख्यान, बहु-विषयक पैनल चर्चाएँ और केस-आधारित शिक्षण शामिल होंगे। इनमें मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी, प्रिसिजन मेडिसिन, इम्यूनोथेरेपी और रोगी-केंद्रित कैंसर देखभाल जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह आयोजन सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे रोगियों के परिणामों में सुधार हो सके।
सम्मेलन से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए, डॉ. संदीप दवे, प्रबंध निदेशक एवं क्लिनिकल डायरेक्टर, रामकृष्ण CARE अस्पताल, के साथ डॉ. रवि जायसवाल (वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट), डॉ. मौ रॉय (वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट), डॉ. नवीन जैन (वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट), डॉ. गौरव गुप्ता (वरिष्ठ रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट) और डॉ. नीरू केरकेट्टा (वरिष्ठ सलाहकार – न्यूक्लियर मेडिसिन) उपस्थित थे।
डॉ. संदीप दवे ने कहा, “भारत में कैंसर देखभाल के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जो चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और व्यक्तिगत उपचार पद्धतियों में प्रगति के कारण संभव हुआ है। साथ ही, बढ़ते कैंसर भार के चलते निरंतर सीखने, सहयोग और बहु-विषयक उपचार की आवश्यकता भी बढ़ रही है। ‘ऑन्कोस्फीयर 2.0’ देश के अग्रणी ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों को एक मंच प्रदान करता है, जहाँ वे क्लिनिकल अनुभव साझा कर सकते हैं, नवाचारों पर चर्चा कर सकते हैं और कैंसर उपचार के मानकों को आगे बढ़ा सकते हैं। ऐसे शैक्षणिक मंच यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि ज्ञान का सही उपयोग मरीजों के बेहतर परिणामों में हो।”
डॉ. रवि जायसवाल ने कहा, “ऑन्कोलॉजी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। प्रिसिजन मेडिसिन, इम्यूनोथेरेपी, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स और टार्गेटेड थेरपी में प्रगति ने कैंसर के निदान और उपचार की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। ‘ऑन्कोस्फीयर 2.0’ चिकित्सकों और विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच होगा, जहाँ वे जटिल क्लिनिकल मामलों पर चर्चा कर सकेंगे और नए उपचार तरीकों से अपडेट रह सकेंगे, जिससे मरीजों के परिणाम बेहतर होंगे।”
विशेषज्ञों ने बताया कि ‘ऑन्कोस्फीयर 2.0’ स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए ज्ञान साझा करने, चुनौतीपूर्ण क्लिनिकल मामलों पर चर्चा करने और कैंसर निदान एवं उपचार के भविष्य को आकार देने वाले नवाचारों का पता लगाने के लिए एक अनूठा मंच साबित होगा।
इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों से ऑन्कोलॉजिस्ट, चिकित्सक, सर्जन, रेडिएशन विशेषज्ञ, स्वास्थ्य पेशेवर और स्नातकोत्तर छात्र बड़ी संख्या में भाग लेने की उम्मीद है।

 


राज्यपाल रमेन डेका के निर्देशन में बच्चों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, हृदय रोग स्क्रीनिंग पर विशेष जोर

02-Jun-2026
रायपुर, ( शोर संदेश राज्यपाल रमेन डेका के निर्देशन में लोकभवन में 1 से 17 वर्ष आयु तक के बच्चों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण आयोजित किया गया। शिविर में सामान्य बीमारियों के साथ-साथ हृदय रोग, स्त्री रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, नाक-कान-गला रोग, बी.पी. शुगर सहित बच्चों से संबंधित अन्य बीमारियों की निःशुल्क जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई गई। बच्चों में विशेष रूप से हृदय रोग से संबंधित जांच के लिए स्क्रीनिंग भी की गई।
लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में जिला प्रशासन रायपुर के ‘प्रोजेक्ट छांव’ के अंतर्गत आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में लगभग 250 बच्चों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। शिविर में खून जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। शिविर में विभिन्न शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रायपुर की टीम द्वारा लैब जांच, बीपी और शुगर जांच की गई। वहीं सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल द्वारा हदय रोग परामर्श, ईसीजी एवं ईको जांच की सुविधा दी गई। इसके अलावा बालाजी डेंटल कॉलेज, बर्नियों हॉस्पिटल, रूप जीवन हॉस्पिटल, गणेश विनायक नेत्रालय सहित विभिन्न संस्थानों द्वारा जांच और परामर्श प्रदान किया गया। राज्यपाल डेका ने स्वास्थ्य शिविर का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और चिकित्सकों से चर्चा कर आवश्यक मार्गदर्शन दिया।











 

मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान : 13 किलोमीटर पैदल चलकर स्वास्थ्य टीम पहुंची बड़ेपल्ली, 227 ग्रामीणों की जांच

31-May-2026
रायपुर, ( शोर संदेश  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप संचालित 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम 13 किलोमीटर का कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बैलाडीला क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम बड़ेपल्ली पहुंची और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कुल 227 ग्रामीणों की जांच की गई। इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह, रक्तचाप सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए गए। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं।
शिविर में गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष जांच की गई। एक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
ग्रामीणों को 'आयुष्मान भारत योजना' की जानकारी दी गई तथा सुरक्षित मातृत्व, पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से दूरस्थ अंचलों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। यह अभियान न केवल उपचार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भरोसा भी बढ़ा रहा है।







 

108 संजीवनी एक्सप्रेस कर्मियों की सूझबूझ से एम्बुलेंस में हुआ सुरक्षित प्रसव

28-May-2026
रायपुर  ( शोर संदेश  108 संजीवनी एक्सप्रेस कर्मियों की सूझबूझ से एम्बुलेंस में हुआ सुरक्षित प्रसवआपातकालीन स्वास्थ्य सेवा 108 संजीवनी एक्सप्रेस एक गर्भवती महिला के लिए जीवनदायिनी साबित हुई। 108 एम्बुलेंस कर्मियों की तत्परता, सूझबूझ एवं संवेदनशीलता से एक गर्भवती महिला का एम्बुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार बेमेतरा जिले के ग्राम आनंदगांव निवासी श्रीमती मानसी, पति दीपक, उम्र 24 वर्ष को गर्भावस्था संबंधी जटिलता होने पर जिला चिकित्सालय बेमेतरा में भर्ती कराया गया था। महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा रायपुर रेफर किया। इसके बाद 108 संजीवनी एक्सप्रेस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही 108 एम्बुलेंस के पायलट नीलमणि एवं ईएमटी कलावती गायकवाड़ तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचे और गर्भवती महिला को एम्बुलेंस में शिफ्ट कर रायपुर के लिए रवाना हुए।
रायपुर पहुंचने से पहले धरसीवां के आसपास महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईएमटी कलावती गायकवाड़ ने परिजनों की सहमति एवं पायलट नीलमणि के सहयोग से एम्बुलेंस में ही प्रसव कराने का निर्णय लिया। ईएमटी द्वारा सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं एवं सावधानियों का पालन करते हुए सुरक्षित प्रसव कराया गया। कुछ ही देर में महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।
सुरक्षित प्रसव के बाद जच्चा एवं नवजात शिशु को बेहतर देखभाल हेतु मेकाहारा रायपुर में भर्ती कराया गया, जहां दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं। परिजनों ने विपरीत परिस्थितियों में तत्परता एवं मानवता का परिचय देते हुए सुरक्षित प्रसव कराने पर 108 संजीवनी एक्सप्रेस टीम, ईएमटी कलावती गायकवाड़ एवं पायलट नीलमणि का आभार व्यक्त किया।
 

आयुष विभाग की पहल: आयुर्वेद पद्धति से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

27-May-2026
रायपुर(शोर संदेश) आयुष विभाग द्वारा चार प्रमुख राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूली बच्चों, गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं, असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों एवं जोड़ों व मांसपेशियों संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों को आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा एवं देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम ‘आयुर्विद्या‘ के तहत स्कूली बच्चों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता उत्पन्न करते हुए उनकी जीवनशैली में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच, योग के प्रति प्रशिक्षण एवं आयुर्वेद विषयक जागरूकता व्याख्यान पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों को औषधीय उद्यान एवं आयुर्वेद चिकित्सालयों के भ्रमण की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे उनमें आयुष पद्धति के प्रति रुचि उत्पन्न हो सके। 
इसी प्रकार राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम सुप्रजा के अंतर्गत गर्भवती माताओं की देखभाल, उचित गर्भिणीचर्या, नवजात एवं शिशु की देखभाल के साथ-साथ ए.एन.सी., पी.एन.सी. एवं गर्भ संस्कार के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।  इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेदिक पद्धति से माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना है, जिससे एक स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण हो सके।
राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘‘कारूण्य-पैलिएटिव केयर‘‘ (प्रशामक देखभाल) एक ऐसा संवेदनशील दृष्टिकोण है, जो जीवन-घातक बीमारियों से जूझ रहे रोगियों एवं उनके परिजनों की शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान कर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है। इस कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की टीम द्वारा घर-घर जाकर असाध्य रोगियों का उपचार एवं देखभाल की जा रही है। यह कार्यक्रम मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील एवं समाजोपयोगी सिद्ध हो रहा है तथा रोगियों के परिजनों के लिए भी एक बड़ा संबल बना है।
वहीं ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर कार्यक्रम जोड़ों एवं मांसपेशियों संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों के लिए संचालित एक विशेष पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा उन्हें जोड़ों व मांसपेशियों की समस्याओं के प्रभावी प्रबंधन में सहायता प्रदान करना है। उल्लेखनीय है कि आयुष विभाग द्वारा निरंतर शिविरों, जन-जागरूकता अभियानों एवं घर-घर पहुंच सेवाओं के माध्यम से इन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
 



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