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स्वच्छता पखवाड़ा में युवाओं का संकल्प, MY Bharat ने चलाया जनजागरूकता अभियान

05-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)  युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत मेरा युवा भारत (MY Bharat) जशपुर द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा (1 से 15 अगस्त 2026) के तहत जिलेभर में स्वच्छता जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम और स्वच्छता शपथ का आयोजन किया जा रहा है।
इसी कड़ी में जशपुर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) घोलेंग में विद्यार्थियों एवं युवाओं की सहभागिता से व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान विद्यालय परिसर की साफ-सफाई की गई तथा सभी प्रतिभागियों को स्वच्छता की शपथ दिलाकर स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प कराया गया।
स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत बगीचा विकासखंड के रामकृष्ण आश्रम, तपकरा स्थित छात्रावास, फरसाबहार विकासखंड तथा मनोरा विकासखंड में भी MY Bharat के स्वयंसेवकों ने स्वच्छता अभियान चलाया। इन कार्यक्रमों में स्थानीय युवाओं, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई की और स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।
MY Bharat के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों से दैनिक जीवन में स्वच्छता को व्यवहार का हिस्सा बनाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने तथा अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। अभियान का उद्देश्य युवाओं में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से स्वच्छ भारत के संकल्प को और अधिक मजबूत करना है।

 

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान: जशपुर के पीवीटीजी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं घर-घर

05-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)  प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जशपुर जिले के दूरस्थ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन के उद्देश्य से विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान, नियमित उपचार, पोषण सहायता तथा स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अभियान के अंतर्गत जिले के सभी पीवीटीजी टीबी मरीजों को गोद लेकर उपचार अवधि के दौरान नियमित रूप से निक्षय पोषण आहार किट उपलब्ध कराई जा रही है तथा आवश्यक सहयोग एवं स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
इसी क्रम में 1 अगस्त 2026 को बगीचा विकासखंड के ग्राम गायबुड़ा, महादेवजोबला, रोकड़ापाठ एवं भट्टीकोना में नव-पंजीकृत चार टीबी मरीजों के घर पहुंचकर स्वास्थ्य दल ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान मरीजों को पोषण आहार किट वितरित की गई। साथ ही पीवीटीजी हेल्पडेस्क के सहयोग से उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, आवश्यक दवाइयों का वितरण किया गया तथा परिवार के सदस्यों की टीबी स्क्रीनिंग भी की गई।
स्वास्थ्य टीम ने मरीजों एवं ग्रामीणों को टीबी के लक्षणों की पहचान, नियमित रूप से दवा लेने, उपचार बीच में न छोड़ने तथा समय पर जांच कराने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अभियान के सकारात्मक परिणामस्वरूप समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा है तथा टीबी उन्मूलन सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी लोगों की सहभागिता मजबूत हुई है।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इस प्रकार के जनजागरूकता एवं पोषण सहायता अभियान आगे भी निरंतर संचालित किए जाएंगे।













 

चार महीनों में 130 सफल ऑपरेशन, सुकमा जिला अस्पताल बना नई उम्मीद का केंद्र

31-Jul-2026
रायपुर: सुकमा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की जनहितैषी सोच और वन एवं प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार कलेक्टर अमित कुमार के प्रयासों से जिला अस्पताल सुकमा में तीन वर्षों से बंद पड़ा ऑर्थाे (हड्डी रोग) ऑपरेशन थिएटर मार्च 2026 से दोबारा शुरू किया गया। इसके बाद से अस्पताल में मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिलना शुरू हुआ है।
जनवरी 2026 में एमएस ऑर्थाे विशेषज्ञ डॉ. संदीप वर्मा की पदस्थापना के बाद अस्पताल में हड्डी रोग के उपचार और ऑपरेशन की सुविधा मजबूत हुई। पिछले चार महीनों में यहाँ 130 सफल ऑपरेशन किए गए हैं। इससे जिले के सैकड़ों मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिली है।
ग्राम कुकानार की 13 वर्षीय छात्रा कु. सोनमती पेड़ से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उसके दोनों पैरों की जाँघ की हड्डियाँ टूट गई थीं। जिला अस्पताल में समय पर उपचार, ब्लड बैंक से रक्त की उपलब्धता और सफल ऑपरेशन के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो रही है। इसी तरह, मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल हुए कुम्हाररास निवासी चार वर्षीय अनुराग माड़वी का भी सफल ऑपरेशन किया गया। अब वह भी स्वस्थ है और सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
पहले सुकमा के मरीजों को हड्डी रोग के इलाज के लिए जगदलपुर, रायपुर या ओडिशा के मलकानगिरी जाना पड़ता था। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था और इलाज में देरी भी होती थी। अब जिला अस्पताल में ही निःशुल्क ऑपरेशन, दवाइयाँ, भोजन और भर्ती की सुविधा उपलब्ध है। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बच रहे हैं।
सुकमा जिला अस्पताल की बेहतर चिकित्सा व्यवस्था का असर अब पड़ोसी राज्य ओडिशा के मलकानगिरी क्षेत्र तक दिखाई दे रहा है। वहाँ के मरीज भी हड्डी रोग के उपचार के लिए सुकमा आ रहे हैं। यह अस्पताल की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है।
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और आधुनिक संसाधनों के कारण जिला अस्पताल की सेवाएँ लगातार बेहतर हो रही हैं। सोनमती और अनुराग जैसे बच्चों की मुस्कान इस बात का प्रमाण है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। सुकमा जिला अस्पताल आज क्षेत्र के लोगों के लिए नई उम्मीद और भरोसे का केंद्र बन चुका है।
 

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कांकेर जिला अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य केन्द्रों का निरीक्षण

29-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आज कांकेर जिला प्रवास के दौरान कोमलदेव शासकीय जिला चिकित्सालय पहंुचे, जहां पर उन्होंने विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। साथ ही इस दौरान मरीजों व उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री ने अलबेलापारा स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया।
जिला पंचायत के सभाकक्ष में आज आयोजित संभाग स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक के उपरांत स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने जिला अस्पताल में हाल ही में शुरू किए गए एमआरआई सेवाओं का अवलोकन किया तथा प्रतिदिन आने वाले औसतन मरीजों की जानकारी ली। साथ ही मरीजों के साथ आए उनके परिजनों से भेंट कर जिला अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं के संबंध में फीडबैक लिया। इसके उपरांत प्रथम तल में स्थित आईपीडी कक्ष में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर सेहतपुर्सी की जानकारी ली। कांकेर विकासखण्ड के ग्राम बारदेवरी से आई मरीज श्रीमती कलावती प्रधान, ग्राम लेण्डारा की मलेरिया से पीडि़त मरीज श्रीमती श्यामबाई यादव तथा श्री प्रवीण तारम का हालचाल जाना तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। इसके उपरांत वे अलबेलापारा स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केन्द्र पहंुचे जहां पर उन्होंने चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कर्मियों से चर्चा कर आवश्यक जानकारी ली। इस दौरान शिशु चिकित्सा कक्ष में जाकर भर्ती मरीजों से उनकी सेहत का हालचाल जाना तथा मलेरिया से ग्रसित कक्षा चौथी का मरीज समीर उईके से भेंट की। 
स्वास्थ्य मंत्री ने शिशुओं की माताओं से भी मिलकर चर्चा की और घरों के आस-पास साफ सफाई रखने, गड्ढों मे पानी जमा न होने देने व लार्वा न पनपने देने की समझाइश भी दी। इस अवसर पर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, स्वास्थ्य संचालक डॉ. संजीव झा, जिला पंचायत की अध्यक्ष किरण नरेटी, कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर, मेडिकल कॉलेज कांकेर की डीन डॉ. यास्मीन खान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरसी ठाकुर सहित स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक व स्टाफ मौजूद थे। 












 

मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल : पक्षाघात से पीड़ित दिव्यांग मरीज के घर पहुंचकर उपलब्ध कराई गई आधार सेवा

27-Jul-2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 27 जुलाई 2026 जिले में आमजन को सुगम एवं सहज शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए मरवाही निवासी पक्षाघात से पीड़ित रामकली गुप्ता को उनके घर पहुंचकर आधार संबंधी आवश्यक सेवा प्रदान की गई। इस पहल से गंभीर रूप से बीमार एवं दिव्यांग नागरिकों के प्रति प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली का परिचय मिला। जानकारी के अनुसार रामकली गुप्ता के परिवार द्वारा आधार संबंधी सेवा की आवश्यकता व्यक्त की गई थी। मरीज की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनका आधार सेवा केंद्र तक पहुंच पाना संभव नहीं था। ऐसे में आधार ऑपरेटर अंशु गुप्ता ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए स्वयं उनके निवास पहुंचकर आवश्यक आधार संबंधी प्रक्रिया पूर्ण कराने में सहयोग किया।
इस पहल से न केवल मरीज एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली, बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ कि आवश्यक शासकीय सेवाओं का लाभ किसी भी नागरिक से केवल शारीरिक असमर्थता के कारण वंचित नहीं रहे। जिला प्रशासन का प्रयास है कि शासन की जनकल्याणकारी सेवाएं प्रत्येक पात्र नागरिक तक समय पर और सहज रूप से पहुंचें। विशेष रूप से दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों की सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल सेवा, संवेदनशीलता और सुशासन के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का एक प्रेरक उदाहरण है।


 

दूरस्थ कोर्रा में स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान, ग्रामीणों को मिली स्वास्थ्य सुरक्षा

27-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) सुकमा जिले के दूरस्थ ग्राम पंचायत कोर्रा में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ दिलाया। जिला प्रशासन की पहल से आयोजित विशेष अभियान के दौरान 100 आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए, जबकि 14 बुजुर्गों के वय वंदन कार्ड भी तैयार किए गए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह के मार्गदर्शन और जिला परियोजना समन्वयक अमृतेश सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के पात्र हितग्राहियों को स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ना था।
इस अभियान की खास बात यह रही कि स्वास्थ्य विभाग की टीम केवल शिविर तक सीमित नहीं रही। टीम ने गांव में घर-घर जाकर पात्र हितग्राहियों का सत्यापन किया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाया।
इस दौरान पात्र ग्रामीणों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए। वहीं बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 14 वय वंदन कार्ड भी बनाए गए।
आयुष्मान कार्ड मिलने से पात्र परिवारों को योजना के तहत उपचार संबंधी सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। वहीं वय वंदन कार्ड बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले ने ग्रामीणों को दोनों योजनाओं के लाभ और उपयोग की जानकारी भी दी।
दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मितानिनों और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें मौके पर ही योजनाओं से जोड़ा गया।
कोर्रा में चलाया गया यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि जब प्रशासन और मैदानी अमला मिलकर काम करते हैं, तो शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। अब गांव के ग्रामीण और बुजुर्ग स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति पहले से अधिक जागरूक और सशक्त महसूस कर रहे हैं।

 


जिला अस्पताल में निःशुल्क कैंसर जांच शिविर, विशेषज्ञों ने दी जांच और उपचार संबंधी सलाह

23-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) रायगढ़ जिले में कैंसर की समय पर पहचान और उपचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किरोड़ीमल शासकीय जिला चिकित्सालय में बुधवार को निःशुल्क कैंसर जांच एवं परामर्श शिविर आयोजित किया गया। राष्ट्रीय गैर संचारी रोग कार्यक्रम के अंतर्गत जिला अस्पताल और बालको मेडिकल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर आवश्यक सलाह दी। शिविर का शुभारंभ महापौर जीवर्धन चौहान ने किया।
शिविर में महिलाओं के लिए स्तन कैंसर की जांच हेतु मैमोग्राफी मशीन एवं थर्मल स्केनर तथा गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही मुंह एवं मुखगुहा के कैंसर की जांच, आवश्यक नमूना संग्रहण तथा बीपी, ब्लड सुगर एवं बीएमआई  की निःशुल्क जांच भी की गई।
शिविर के दौरान 10 स्तन कैंसर, 10 मुंह एवं मुखगुहा कैंसर, 2 प्रोस्टेट कैंसर, 2 रक्त कैंसर तथा 3 गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के मरीजों की जांच कर विशेषज्ञों ने उपचार संबंधी सलाह दी। इसके अलावा 40 महिलाओं की स्वाईकल कैंसर की स्क्रीनिंग तथा 10 महिलाओं की मैमोग्राफी जांच भी की गई। महापौर जीवर्धन चौहान ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे शिविरों से जिले के लोगों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, जो सराहनीय पहल है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने कहा कि कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर उसका सफल उपचार संभव है। ऐसे शिविर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ जोखिम वाले मरीजों की समय पर जांच सुनिश्चित करते हैं। सिविल सर्जन डॉ. दिनेश कुमार पटेल ने बताया कि यदि स्तन में गांठ, मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, निगलने में कठिनाई, आवाज में बदलाव, लगातार खांसी, बिना कारण वजन घटना या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। शिविर में बालको मेडिकल सेंटर से रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र प्रसाद पटेल एवं मेडिकल ऑफिसर डॉ. हेमलता उपस्थित रहे। वहीं स्वास्थ्य विभाग से जिला कार्यक्रम प्रबंधक रंजना पैंकरा, गैर संचारी रोग कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. जाविद मारिकर, डॉ. सुमित कुमार, डॉ. शैलेंद्र मंडल, सीमा बरेठ सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
 

 


धड़क उठा मासूमों का दिल- ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के तीन नौनिहालों को दिया नया जीवन

17-Jul-2026
रायपुर: प्रोजेक्ट धड़कन छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बच्चों के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल है। इसके तहत 1 से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की पहचान कर, सत्य साई हॉस्पिटल जैसे विशिष्ट संस्थानों में उनका निःशुल्क उपचार (और सर्जरी) कराया जाता है।  ​छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्र नारायणपुर से आई एक बेहद सुखद और मानवीय संवेदनाओं से भरी खबर ने यह साबित कर दिया है कि अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो स्वास्थ्य सुविधाएं समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक भी पहुंच सकती हैं। 
जिला प्रशासन नारायणपुर की अनूठी पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ और आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के साझा प्रयासों से आज तीन मासूम बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे इन बच्चों को रायपुर के प्रतिष्ठित सत्य साईं हॉस्पिटल में नया जीवन मिला है, वह भी पूरी तरह निःशुल्क। ​अक्सर पहुंचविहीन और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जागरूकता या संसाधनों की कमी के कारण बच्चों में जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) की पहचान समय पर नहीं हो पाती। 
इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए नारायणपुर जिला प्रशासन ने 23 फरवरी 2026 को ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की।  ​इसका मुख्य उद्देश्य जिले के कोने-कोने में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करना और गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज मुहैया कराना है। आरबीएसके की टीमों ने मैदानी स्तर पर उतरकर जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सघन जांच अभियान चलाया। अभियान के तहत अब तक 6,224 बच्चों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है।
जांच अभियान के दौरान टीम को तीन ऐसे मासूम मिले, जिनके दिल में गंभीर समस्या थी। समय रहते की गई इस पहचान ने इन बच्चों के लिए संजीवनी का काम किया।​ पारुल दुग्गा उम्र 1.5 वर्ष,​ नायशा उम्र 3 वर्ष और ​अनुष्का मंडावी उम्र 5 वर्ष ​इन तीनों बच्चियों की गंभीर स्थिति को देखते हुए आरबीएसके टीम ने त्वरित कार्रवाई की। प्राथमिक जांच और परामर्श के बाद इन्हें तत्काल सत्य साईं हॉस्पिटल, रायपुर रेफर किया गया। यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तीनों बच्चियों का सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद तीनों बच्चियां अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनके माता-पिता की आंखों में अब आंसुओं की जगह अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की खुशी और संतोष साफ देखा जा सकता है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का यह अभियान थमा नहीं है। बच्चों की स्क्रीनिंग और नियमित जांच का काम लगातार जारी है ताकि भविष्य में भी किसी भी बच्चे को इलाज के अभाव में दम न तोड़ना पड़े। यह सफलता समय पर स्क्रीनिंग, सटीक रेफरल और संवेदनशील प्रशासन के बीच बेहतरीन तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की नियमित जांच जरूर कराएं। यदि बच्चों में खेलने या सामान्य गतिविधि के दौरान सांस फूलना,बहुत जल्दी थक जाना,उम्र के हिसाब से वजन न बढ़ना या कम बढ़ना और बार-बार बीमार पड़ना या सर्दी-खांसी होना लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
 

 


सिम्स बिलासपुर में डॉक्टरों का कमाल, अन्ननली में फंसा सिक्का निकाला

17-Jul-2026
रायपुर( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए एक 6 वर्षीय मासूम की जान बचा ली है। बैगा जनजाति के इस बालक ने खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया था, जो उसकी आहार नली (अन्ननली) में फंस गया था। डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और आपातकालीन स्थिति में सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला।
पेंड्रा से सिम्स बिलासपुर किया गया था रेफर
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के कोटा तहसील अंतर्गत ग्राम सरगोंड का निवासी 6 वर्षीय बालक नरेंद्र खेलते समय सुबह करीब 7 बजे अचानक सिक्का निगल गया। इसके तुरंत बाद उसे कुछ भी निगलने में अत्यधिक परेशानी होने लगी। परिजन आनन-फानन में उसे पेंड्रा के एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के समन्वित प्रयास से मिली सफलता
बालक को शाम करीब 6.30 बजे सिम्स लाया गया, जिसके बाद अस्पताल का पूरा अमला सक्रिय हो गया। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने तत्काल एक्स-रे कर अन्ननली के ऊपरी भाग (श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे) में फंसे सिक्के की सटीक लोकेशन की पहचान की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने रिजिड इसोफैगोस्कोपी तकनीक के जरिए अत्यंत सावधानी से सिक्के को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और ऑपरेशन के बाद बालक की स्थिति पूरी तरह सामान्य और संतोषजनक है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का परिणाम
इस सफल उपचार पर सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ईएनटी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता, आधुनिक तकनीकों और आपसी तालमेल के कारण ही इस जटिल आपातकालीन मामले को समय पर सुलझाया जा सका। सिम्स का लक्ष्य हर मरीज को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं देना है।
चिकित्सा अधीक्षक और डॉक्टरों ने अभिभावकों के लिए जारी की सलाह
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने आगाह किया कि छोटे बच्चों द्वारा सिक्का, बटन, बैटरी या चुंबक जैसी चीजें निगलना एक गंभीर आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे अपनाने के बजाय सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचना चाहिए। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से सिक्के, छोटी बैटरी और छोटे खिलौने दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल लेता है और उसे लार टपकने, गले में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें।
 

 


राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि : जिला अस्पतालों में बढ़ी जटिल ऑपरेशन की क्षमता

15-Jul-2026
रायपुर, 15 जुलाई 2026 छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विकेंद्रीकरण और जिला अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सूरजपुर जिला चिकित्सालय ने सफलतापूर्वक 6 टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ऑपरेशन कर यह साबित किया है कि अब जटिल अस्थि शल्य चिकित्सा जैसी अत्याधुनिक सेवाएं भी जिला स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं।
इस उपलब्धि से न केवल सूरजपुर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगे इलाज के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी तीनों की बचत होगी।
सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा और सिविल सर्जन डॉ. अजय मरकाम के नेतृत्व में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय साहू एवं डॉ. अमन गुप्ता ने इन जटिल शल्यक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विकास भगत और डॉ. अनिल कुमार ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस उपलब्धि में नर्सिंग एवं ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम का भी उल्लेखनीय योगदान रहा। समर्पित टीमवर्क और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के कारण सभी ऑपरेशन सफल रहे।
ऑपरेशन के बाद सभी मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और बेहतर स्वास्थ्य अधोसंरचना पर किए जा रहे निवेश का सकारात्मक परिणाम अब आम नागरिकों तक पहुंच रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिला अस्पतालों में टीएचआर जैसी जटिल शल्य चिकित्सा की उपलब्धता से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इससे गंभीर अस्थि रोगों के उपचार की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
सीएमएचओ डॉ. कपिल देव पैकरा ने पूरी चिकित्सा टीम, नर्सिंग स्टाफ एवं सहयोगी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में भी जिला चिकित्सालय सूरजपुर में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जाएगा, ताकि प्रदेश के नागरिकों को अपने जिले में ही बेहतर और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सके।
 


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