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सुदूर बीजापुर में चिकित्सा चमत्कार : अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझते शिशु को बचाया

01-May-2026
रायपुर(शोर संदेश) जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है।
ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली।
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।

हर गुरुवार गांव के द्वार स्वास्थ्य: दूरस्थ अंचलों में पहुंची चिकित्सा सेवाएं

01-May-2026
रायपुर।(शोर संदेश) दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के लिए मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग ने एक अभिनव पहल शुरू की है। अब ऐसे गांव, जो निकटतम उप स्वास्थ्य केंद्र से 5 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर स्थित हैं, वहां प्रत्येक गुरुवार को नियमित रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना है, ताकि दूरी और संसाधनों की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे। शिविरों में अनुभवी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सामान्य व मौसमी बीमारियों की जांच, प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परामर्श और निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया जा रहा है।
यह पहल विशेष रूप से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए राहतकारी सिद्ध हो रही है, जिन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि शिविरों के माध्यम से उपचार के साथ-साथ स्वच्छता, पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और रोगों की रोकथाम को लेकर जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है।
“स्वास्थ्य सेवाएं गांव के द्वार” की अवधारणा को साकार करती यह पहल अब सकारात्मक परिणाम दे रही है। विभाग इसे पूरे जिले में विस्तार देने की तैयारी कर रहा है।





 

 


सड़क दुर्घटना में घायलों को मिल रहा पीएम-राहत योजना का लाभ

30-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश) ।भारत सरकार की पीएम-राहत (प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट) योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को तत्काल एवं कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत दुर्घटना के बाद के महत्वपूर्ण समय यानी गोल्डन ऑवर में बिना किसी देरी के अस्पताल में भर्ती कर अधिकतम 7 दिनों तक प्रति व्यक्ति 1 लाख 50 हजार रुपए तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाता है।
योजना के अंतर्गत राजनांदगांव जिले में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी क्रम में अब तक 12 सड़क दुर्घटना पीड़ितों का पंजीयन कर योजना के तहत उपचार किया गया है। इनमें से 10 मरीजों का इलाज भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव में तथा 2 मरीजों का उपचार संजीवनी नर्सिंग होम, चिखली में किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद प्रारंभिक समय में शीघ्र उपचार मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है, इसलिए योजना में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित उपचार पर विशेष बल दिया गया है।
जिले में योजना के प्रभावी संचालन के लिए 34 शासकीय अस्पतालों—जिनमें शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय पेंड्री, जिला चिकित्सालय बसंतपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डोंगरगांव, छुरिया, डोंगरगढ़, घुमका, सोमनी सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र—तथा 38 निजी अस्पतालों के प्रभारी एवं संचालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
पीएम-राहत योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नागरिक निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
 

हल्के बुखार को न करें नजरअंदाज, मलेरिया पर सतर्कता ही बचाव

25-Apr-2026
रायपुर।  (शोर संदेश) शुरुआत अक्सर मामूली ही होती है-हल्का बुखार, ठंड लगना, शरीर में कमजोरी… ऐसे लक्षण जिन्हें हम आमतौर पर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही संकेत एक गंभीर बीमारी की दस्तक होते हैं। मलेरिया भी ठीक इसी तरह धीरे-धीरे शरीर को जकड़ता है l संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के एक डंक से शुरू होकर, अगर समय पर पहचान न हो, तो स्थिति को जटिल बना सकता है। यही कारण है कि समय पर जांच और उपचार को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी मानी जाती है।
25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस हमें न सिर्फ इस बीमारी के खतरों की याद दिलाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सतर्कता और सामूहिक प्रयासों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ बसाहटों के कारण लंबे समय तक मलेरिया एक बड़ी चुनौती बना रहा।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में दर्ज कुल 144886  मामलों की तुलना में वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 28836  रह गई। यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि सुनियोजित रणनीति, समयबद्ध जांच और निःशुल्क उपचार जैसे प्रयास अब असर दिखा रहे हैं।
मलेरिया, जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, समय पर उपचार न मिलने पर गंभीर रूप ले सकता है। विशेषकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए यह अधिक जोखिमपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने मलेरिया नियंत्रण के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाई है।
राज्य में मलेरिया उन्मूलन हेतु प्रभावी रणनीति अपनायी जा रही हैं जिसके तहत हर संदिग्ध व्यक्ति की तत्काल जांच, पॉजिटिव पाए जाने पर निःशुल्क उपचार और मरीजों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर ’ जैसे अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें स्वास्थ्य अमला घर-घर पहुंचकर जांच और दवा वितरण कर रहा है।
सुदूर वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट, मितानिन  और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये टीमें न केवल जांच और उपचार कर रही हैं, बल्कि लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों के प्रति भी जागरूक बना रही हैं।
मलेरिया से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। मच्छरदानी का उपयोग, आसपास साफ-सफाई बनाए रखना, पानी का ठहराव न होने देना और बुखार आने पर तुरंत जांच कराना, ये सरल उपाय इस बीमारी के प्रसार को रोकने में प्रभावी हैं।
राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त प्रदेश के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए शासन, प्रशासन और आमजन के बीच समन्वय को और मजबूत किया जा रहा है।
विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और मलेरिया के प्रति सजग रहकर एक स्वस्थ, सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहयोग करें।

बस्तर में स्वास्थ्य अभियान ने पकड़ी रफ्तार, दूरस्थ अंचलों तक बढ़ा भरोसा

24-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश) बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।
अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।
जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।
इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है। 

कैंसर पीड़ित महिला को जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती, कलेक्टर ने बेहतर उपचार के दिए निर्देश

24-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश) काटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम जिनकी पत्नी कपूरा मरकाम थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित है और चलने फिरने में असमर्थ है। उन्हें बाइक में लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। यहां कलेक्टर गोपाल वर्मा ने मामला संज्ञान में आते ही तत्काल एम्बुलेंस बुलवा कर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपचार के लिए निर्देशित किया। महिला को बेहतर उपचार के लिए रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 11 नवंबर को ग्राम कांटाबहरा (नगवाही) के समलु मरकाम द्वारा थायराइड कैंसर पीड़ित पत्नी कपूरा मरकाम को उपचार के लिए बाइक में लिटा कर उपचार के लिए ले जाने की सूचना संज्ञान में आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम 12 नवंबर को पीड़िता के घर पहुंची और उसे 108 एम्बुलेंस में बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा रायपुर भेजा गया। यहां महिला को कैंसर रिसर्च युनिट में भर्ती कराया गया है जहां कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज हुआ। 
उन्होंने आगे बताया कि पूर्व में पीड़िता के स्वास्थ्य समस्या की जानकारी मिलने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेगांखार/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बोड़ला विकासखण्ड बोड़ला स्वास्थ्य विभाग के टीम द्वारा पीड़ित कपूरा मरकाम पति समलू मरकाम के ग्राम काटाबहरा (नगवाही) के निवास स्थान पर जाकर निरीक्षण करने पर पाया गया कि समलू मरकाम द्वारा अपनी पत्नी कपूरा मरकाम के गले का गांठ में दर्द होने पर प्राथ. स्वा. रेगांखर जंगल में ईलाज के लिए ले जाया गया। वहां पदस्थ डाक्टर द्वारा जिला स्वासस्थ्य विभाग के अधिकारियों से मरीज के बीमारी के संबंध में चर्चा कर उपचार के लिए रायपुर रिफर किया गया। जहां वर्ष 2024 में एक वर्ष तक एम्स, मेकाहारा तथा डीकेएस अस्पताल सहित कुछ निजी अस्पतालों में ईलाज चला। इसके पश्चात जनवरी 2025 में टाटा मेमोरियल मुंबई में एक माह तक ईलाज चला। वहां से ईलाज उपरांत घर लाया गया। पीड़िता की परेशानी पुनः बढ़ने पर उन्हें 12 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा रायपुर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ईलाज के लिए ले जाया गया। जहां वे 12 और 13 नवंबर को मेकाहारा में भर्ती रही और 14 से 19 नवंबर 2025 तक एम्स में भर्ती कर कीमोथेरेपी दी गई। जिसके पश्चात 20 नवंबर को मरीज को वापस घर लाया गया। जिसके पश्चात घर पर रहकर वह स्वास्थ्य लाभ ले रही थी। जिसके पश्चात महिला को आज फिर स्वास्थ्य खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां से उन्हें रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।

वर्ल्ड लिवर डे 2026 : लिवर को डिटॉक्स करने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

18-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बाहर का खाना और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे शरीर के अंदरूनी अंगों पर असर डालती है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला अंग लिवर है। यह शरीर का एक अहम हिस्सा है, जो खून को साफ करने, पाचन में मदद करने और शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। जब हम इसकी देखभाल नहीं करते, तो यह कमजोर होने लगता है। इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है, ताकि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार करें और गंभीर बीमारियों से बच सकें।
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए दवाओं से ज्यादा असर हमारी रोज की डाइट का होता है। कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जो लिवर की सफाई करने, उसे मजबूत बनाने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर इन्हें सही तरीके से रोजाना की जिंदगी में शामिल किया जाए, तो लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली लिवर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सब्जियों में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। जब हम इन्हें खाते हैं, तो ये शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनमें मौजूद क्लोरोफिल खून को साफ करने में मदद करता है, जिससे लिवर पर काम का दबाव कम हो जाता है और वह बेहतर तरीके से काम कर पाता है।
लहसुन भी लिवर के लिए एक शक्तिशाली चीज है। इसमें सल्फर तत्व पाए जाते हैं, जो लिवर के एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं। जब ये एंजाइम्स एक्टिव होते हैं, तो शरीर के अंदर मौजूद जहरीले पदार्थ बाहर निकलने लगते हैं। इसके अलावा, लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो लिवर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।
नींबू का सेवन भी लिवर के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर को साफ रखने में मदद करते हैं। नींबू शरीर में फैट के पाचन की प्रक्रिया को तेज करता है। इससे लिवर में जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती है और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा घटता है। सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना असरदार उपाय माना जाता है।
हल्दी को भी आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में खास जगह दी गई है। इसमें करक्यूमिन नाम का तत्व होता है, जो सूजन को कम करता है और लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है। जब लिवर में सूजन आती है, तो हल्दी उसे ठीक करने की प्रक्रिया को तेज करती है। साथ ही यह शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाती है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रीन टी भी लिवर हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसमें कैटेचिन्स नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं। रिसर्च बताती है कि नियमित रूप से ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और लिवर में वसा जमा होने की संभावना कम हो जाती है। इससे फैटी लिवर का खतरा भी घटता है।
 

सिंघीतराई प्लांट हादसा: मंत्री लखन देवांगन ने घायलों का जाना हालचाल

17-Apr-2026
रायपुर(शोर संदेश) प्रदेश के वाणिज्य उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के कैबिनेट मंत्री लखन देवांगन ने गुरुवार को रायगढ़ के शासकीय एवं निजी अस्पतालों का दौरा कर सिंघीतराई वेदांता प्लांट हादसे में घायल श्रमिकों का हालचाल जाना तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आईसीयू व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती एवं मरीजों की देखभाल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा चिकित्सकों की टीम से उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर निर्देशित किया कि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी भी ली। 
उल्लेखनीय है कि सक्ति जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित प्लांट में 14 अप्रैल को बॉयलर फटने से हादसा हुआ, जिसमें कई श्रमिक प्रभावित हुए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टिस हॉस्पिटल, मेट्रो, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहीं गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय घटना के बाद से लगातार सक्ति कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल भी स्थिति की सतत समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वाेत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
हादसे में मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। साथ ही प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर सहमति बनी है। मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा के बाद सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम शीघ्र ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय रूप से जुटी हुई है।
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के अनुसार इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 20 की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 16 घायल हैं और उनका उपचार जारी है। मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। वहीं प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।
इधर, कंपनी प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया है। कंपनी द्वारा मृतक श्रमिकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग तथा घायलों को 15-15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रखा जाएगा और काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। निरीक्षण के दौरान मंत्री के साथ नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू, अरुण धर दीवान सहित जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।
 

एसएनसीयू बना नवजातों का सहारा, बलौदाबाजार अस्पताल में मिली नई जिंदगी

17-Apr-2026
रायपुर(शोर संदेश) जिला अस्पताल बलौदा बाजार द्वारा संचालित मातृ-शिशु अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल की जा रही है। यहां संचालित स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू ) नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे परिजनों को हायर सेंटर या निजी अस्पतालों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। 
अस्पताल में नवजातों को निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में एक जटिल मामले में समय से पहले जन्मे मात्र 780 ग्राम वजन के शिशु को डॉक्टरों की सतत निगरानी और एसएनसीयू में विशेष देखभाल के जरिए जीवनदान मिला। करीब 68 दिनों तक उपचार के बाद शिशु का वजन बढ़कर 1 किलो 300 ग्राम हो गया, जिसके बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 
सीएमएचओ डॉ. राजेश अवस्थी ने बताया कि सितंबर 2022 से शुरू हुए एसएनसीयू में अब तक सैकड़ों नवजात शिशु स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रोशन देवांगन ने बताया कि पिछले दो वर्षों में समय से पूर्व जन्मे 11 गंभीर नवजातों को विशेष देखभाल से पूरी तरह स्वस्थ किया गया है। जिला अस्पताल की इस पहल से न केवल शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है बल्कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत भी मिल रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह यूनिट जिले के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र बनकर उभर रही है।
 










 

जिला अस्पताल कबीरधाम बना भरोसे का केंद्र, स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

15-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश)। कबीरधाम जिले का जिला अस्पताल अब केवल एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि आम जनता के विश्वास और बेहतर चिकित्सा सेवाओं का मजबूत प्रतीक बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में जो उल्लेखनीय सुधार हुआ है, उसने न केवल जिले के लोगों का भरोसा बढ़ाया है, बल्कि निजी अस्पतालों के सामने भी एक सशक्त विकल्प के रूप में इसे स्थापित किया है। 
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के सतत प्रयास, उनके मार्गदर्शन और सक्रिय पहल से अस्पताल में संसाधनों का विस्तार, नई मशीनों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं में सुधार संभव हो पाया है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग हर प्रमुख स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो अस्पताल की कार्यप्रणाली, संसाधनों और सेवाओं की गुणवत्ता में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।
जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक ओपीडी  में मरीजों की संख्या 1,19,557 रही, वहीं जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 1,64,712 तक पहुंच गई। यह लगभग 45 हजार से अधिक की वृद्धि है, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब जिला अस्पताल की सेवाओं पर अधिक भरोसा जता रहे हैं। 
इसी तरह आईपीडी के आंकड़ों में भी वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2023 में जहां 11,742 मरीज भर्ती हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 13,253 हो गई। यह दर्शाता है कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए भी लोग अब निजी अस्पतालों की बजाय जिला अस्पताल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
महिला एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी जिला अस्पताल ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2023 में जहां 3,001 प्रसव हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,925 हो गई। इससे प्रतीत होता है कि इसमें वृद्धि से अस्पताल में मातृत्व सेवाएं अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक बनी हैं।
जिला अस्पताल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सोनोग्राफी सेवाओं में हुआ सुधार है। वर्ष 2023 में जहां केवल 874 सोनोग्राफी हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 7,244 तक पहुंच गई। यह लगभग आठ गुना वृद्धि है, जो न केवल उपकरणों की उपलब्धता बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीशियनों की बेहतर व्यवस्था को भी दर्शाती है। यह उपलब्धि जिला अस्पताल के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है।
एक्स-रे सेवाओं के तहत 2023 में 9,865 एक्स-रे किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 13,920 हो गई। इससे स्पष्ट है कि डायग्नोस्टिक सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। लैब टेस्ट के आंकड़े भी प्रभावशाली हैं। वर्ष 2023 में जहां 2,10,186 जांचें की गई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,62,113 हो गई। यह लगभग डेढ़ गुना वृद्धि है, साथ ही साथ जुलाई 25 से अब तक 1462 लोगों का सिटी स्कैन किया गया है। यह बताती है कि अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाएं और तेज सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में भी जिला अस्पताल ने अपनी पकड़ मजबूत की है। वर्ष 2023 की तुलना में 2025 में मोतियाबिंद के ऑपरेशन 216 अधिक किए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि नेत्र रोगियों को भी अब बेहतर और सुलभ उपचार मिल रहा है।
जिले के विधायक एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों, उनके मार्गदर्शन और सक्रिय पहल से अस्पताल में संसाधनों का विस्तार, नई मशीनों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं में सुधार संभव हो पाया है। उन्होंने न केवल अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले। उनकी प्राथमिकता में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुधार हमेशा शीर्ष पर रहा है।
जिला अस्पताल के निष्ठावान डॉक्टरों और कर्मचारियों की मेहनत इस सफलता की कहानी का अहम हिस्सा है। संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया है। डॉक्टरों की तत्परता, नर्सिंग स्टाफ की देखभाल और अन्य कर्मचारियों की कार्यकुशलता ने मिलकर अस्पताल की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। 
जिला अस्पताल की बेहतर सेवाओं, आधुनिक उपकरणों और अनुभवी चिकित्सकों बेहतर संसाधन से निःशुल्क बेहतर इलाज मिलने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। इससे न केवल लोगों की आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि उन्हें अपने ही जिले में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
जिला अस्पताल कबीरधाम की यह सफलता सिर्फ आज तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत नींव तैयार कर रही है। नई तकनीकों का उपयोग, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और मरीजों के लिए बेहतर सुविधाओं का विस्तार ये सभी कदम इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण हैं। जिला अस्पताल की प्रगति सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के भरोसे, बेहतर इलाज और कर्मचारियों की मेहनत की कहानी है। ओपीडी, आईपीडी, प्रसव, सोनोग्राफी, एक्स-रे, सीटी स्कैन, लैब जांच और ऑपरेशन हर क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है। यह अस्पताल सिर्फ कबीरधाम जिले के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के डिंडोरी और मंडला जैसे सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए भी जीवन रेखा बन गया है।



 



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