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वर्ल्ड लिवर डे 2026 : लिवर को डिटॉक्स करने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय

18-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बाहर का खाना और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे शरीर के अंदरूनी अंगों पर असर डालती है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला अंग लिवर है। यह शरीर का एक अहम हिस्सा है, जो खून को साफ करने, पाचन में मदद करने और शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है। जब हम इसकी देखभाल नहीं करते, तो यह कमजोर होने लगता है। इसी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है, ताकि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार करें और गंभीर बीमारियों से बच सकें।
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, लिवर को स्वस्थ रखने के लिए दवाओं से ज्यादा असर हमारी रोज की डाइट का होता है। कुछ प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जो लिवर की सफाई करने, उसे मजबूत बनाने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर इन्हें सही तरीके से रोजाना की जिंदगी में शामिल किया जाए, तो लिवर लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों और ब्रोकली लिवर के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इन सब्जियों में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। जब हम इन्हें खाते हैं, तो ये शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनमें मौजूद क्लोरोफिल खून को साफ करने में मदद करता है, जिससे लिवर पर काम का दबाव कम हो जाता है और वह बेहतर तरीके से काम कर पाता है।
लहसुन भी लिवर के लिए एक शक्तिशाली चीज है। इसमें सल्फर तत्व पाए जाते हैं, जो लिवर के एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं। जब ये एंजाइम्स एक्टिव होते हैं, तो शरीर के अंदर मौजूद जहरीले पदार्थ बाहर निकलने लगते हैं। इसके अलावा, लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो लिवर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।
नींबू का सेवन भी लिवर के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर को साफ रखने में मदद करते हैं। नींबू शरीर में फैट के पाचन की प्रक्रिया को तेज करता है। इससे लिवर में जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती है और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा घटता है। सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना असरदार उपाय माना जाता है।
हल्दी को भी आयुर्वेद और विज्ञान दोनों में खास जगह दी गई है। इसमें करक्यूमिन नाम का तत्व होता है, जो सूजन को कम करता है और लिवर की कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है। जब लिवर में सूजन आती है, तो हल्दी उसे ठीक करने की प्रक्रिया को तेज करती है। साथ ही यह शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाती है, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
ग्रीन टी भी लिवर हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसमें कैटेचिन्स नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करते हैं। रिसर्च बताती है कि नियमित रूप से ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और लिवर में वसा जमा होने की संभावना कम हो जाती है। इससे फैटी लिवर का खतरा भी घटता है।
 

सिंघीतराई प्लांट हादसा: मंत्री लखन देवांगन ने घायलों का जाना हालचाल

17-Apr-2026
रायपुर(शोर संदेश) प्रदेश के वाणिज्य उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के कैबिनेट मंत्री लखन देवांगन ने गुरुवार को रायगढ़ के शासकीय एवं निजी अस्पतालों का दौरा कर सिंघीतराई वेदांता प्लांट हादसे में घायल श्रमिकों का हालचाल जाना तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आईसीयू व्यवस्था, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती एवं मरीजों की देखभाल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा चिकित्सकों की टीम से उपचार संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर निर्देशित किया कि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी स्थिति की जानकारी भी ली। 
उल्लेखनीय है कि सक्ति जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित प्लांट में 14 अप्रैल को बॉयलर फटने से हादसा हुआ, जिसमें कई श्रमिक प्रभावित हुए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टिस हॉस्पिटल, मेट्रो, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहीं गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय घटना के बाद से लगातार सक्ति कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल भी स्थिति की सतत समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वाेत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
हादसे में मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। साथ ही प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर सहमति बनी है। मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा के बाद सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम शीघ्र ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय रूप से जुटी हुई है।
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के अनुसार इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 20 की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 16 घायल हैं और उनका उपचार जारी है। मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। वहीं प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।
इधर, कंपनी प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया है। कंपनी द्वारा मृतक श्रमिकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग तथा घायलों को 15-15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रखा जाएगा और काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। निरीक्षण के दौरान मंत्री के साथ नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू, अरुण धर दीवान सहित जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।
 

एसएनसीयू बना नवजातों का सहारा, बलौदाबाजार अस्पताल में मिली नई जिंदगी

17-Apr-2026
रायपुर(शोर संदेश) जिला अस्पताल बलौदा बाजार द्वारा संचालित मातृ-शिशु अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल की जा रही है। यहां संचालित स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू ) नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे परिजनों को हायर सेंटर या निजी अस्पतालों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। 
अस्पताल में नवजातों को निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में एक जटिल मामले में समय से पहले जन्मे मात्र 780 ग्राम वजन के शिशु को डॉक्टरों की सतत निगरानी और एसएनसीयू में विशेष देखभाल के जरिए जीवनदान मिला। करीब 68 दिनों तक उपचार के बाद शिशु का वजन बढ़कर 1 किलो 300 ग्राम हो गया, जिसके बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 
सीएमएचओ डॉ. राजेश अवस्थी ने बताया कि सितंबर 2022 से शुरू हुए एसएनसीयू में अब तक सैकड़ों नवजात शिशु स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रोशन देवांगन ने बताया कि पिछले दो वर्षों में समय से पूर्व जन्मे 11 गंभीर नवजातों को विशेष देखभाल से पूरी तरह स्वस्थ किया गया है। जिला अस्पताल की इस पहल से न केवल शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है बल्कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत भी मिल रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और आधुनिक सुविधाओं से लैस यह यूनिट जिले के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र बनकर उभर रही है।
 










 

जिला अस्पताल कबीरधाम बना भरोसे का केंद्र, स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव

15-Apr-2026
रायपुर,(शोर संदेश)। कबीरधाम जिले का जिला अस्पताल अब केवल एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि आम जनता के विश्वास और बेहतर चिकित्सा सेवाओं का मजबूत प्रतीक बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में जो उल्लेखनीय सुधार हुआ है, उसने न केवल जिले के लोगों का भरोसा बढ़ाया है, बल्कि निजी अस्पतालों के सामने भी एक सशक्त विकल्प के रूप में इसे स्थापित किया है। 
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के सतत प्रयास, उनके मार्गदर्शन और सक्रिय पहल से अस्पताल में संसाधनों का विस्तार, नई मशीनों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं में सुधार संभव हो पाया है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग हर प्रमुख स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो अस्पताल की कार्यप्रणाली, संसाधनों और सेवाओं की गुणवत्ता में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।
जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक ओपीडी  में मरीजों की संख्या 1,19,557 रही, वहीं जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 1,64,712 तक पहुंच गई। यह लगभग 45 हजार से अधिक की वृद्धि है, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब जिला अस्पताल की सेवाओं पर अधिक भरोसा जता रहे हैं। 
इसी तरह आईपीडी के आंकड़ों में भी वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2023 में जहां 11,742 मरीज भर्ती हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 13,253 हो गई। यह दर्शाता है कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए भी लोग अब निजी अस्पतालों की बजाय जिला अस्पताल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
महिला एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी जिला अस्पताल ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2023 में जहां 3,001 प्रसव हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,925 हो गई। इससे प्रतीत होता है कि इसमें वृद्धि से अस्पताल में मातृत्व सेवाएं अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक बनी हैं।
जिला अस्पताल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सोनोग्राफी सेवाओं में हुआ सुधार है। वर्ष 2023 में जहां केवल 874 सोनोग्राफी हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 7,244 तक पहुंच गई। यह लगभग आठ गुना वृद्धि है, जो न केवल उपकरणों की उपलब्धता बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीशियनों की बेहतर व्यवस्था को भी दर्शाती है। यह उपलब्धि जिला अस्पताल के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई है।
एक्स-रे सेवाओं के तहत 2023 में 9,865 एक्स-रे किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 13,920 हो गई। इससे स्पष्ट है कि डायग्नोस्टिक सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। लैब टेस्ट के आंकड़े भी प्रभावशाली हैं। वर्ष 2023 में जहां 2,10,186 जांचें की गई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,62,113 हो गई। यह लगभग डेढ़ गुना वृद्धि है, साथ ही साथ जुलाई 25 से अब तक 1462 लोगों का सिटी स्कैन किया गया है। यह बताती है कि अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाएं और तेज सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में भी जिला अस्पताल ने अपनी पकड़ मजबूत की है। वर्ष 2023 की तुलना में 2025 में मोतियाबिंद के ऑपरेशन 216 अधिक किए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि नेत्र रोगियों को भी अब बेहतर और सुलभ उपचार मिल रहा है।
जिले के विधायक एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों, उनके मार्गदर्शन और सक्रिय पहल से अस्पताल में संसाधनों का विस्तार, नई मशीनों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं में सुधार संभव हो पाया है। उन्होंने न केवल अस्पताल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिले। उनकी प्राथमिकता में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुधार हमेशा शीर्ष पर रहा है।
जिला अस्पताल के निष्ठावान डॉक्टरों और कर्मचारियों की मेहनत इस सफलता की कहानी का अहम हिस्सा है। संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया है। डॉक्टरों की तत्परता, नर्सिंग स्टाफ की देखभाल और अन्य कर्मचारियों की कार्यकुशलता ने मिलकर अस्पताल की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। 
जिला अस्पताल की बेहतर सेवाओं, आधुनिक उपकरणों और अनुभवी चिकित्सकों बेहतर संसाधन से निःशुल्क बेहतर इलाज मिलने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। इससे न केवल लोगों की आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि उन्हें अपने ही जिले में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
जिला अस्पताल कबीरधाम की यह सफलता सिर्फ आज तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत नींव तैयार कर रही है। नई तकनीकों का उपयोग, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और मरीजों के लिए बेहतर सुविधाओं का विस्तार ये सभी कदम इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण हैं। जिला अस्पताल की प्रगति सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के भरोसे, बेहतर इलाज और कर्मचारियों की मेहनत की कहानी है। ओपीडी, आईपीडी, प्रसव, सोनोग्राफी, एक्स-रे, सीटी स्कैन, लैब जांच और ऑपरेशन हर क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है। यह अस्पताल सिर्फ कबीरधाम जिले के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के डिंडोरी और मंडला जैसे सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए भी जीवन रेखा बन गया है।



 

जिला चिकित्सालय मुंगेली में 03 वर्षीय मासूम के गले से सफल ऑपरेशन कर निकाला गया सिक्का

09-Apr-2026
रायपुर( शोर संदेश )।जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की सजगता और त्वरित चिकित्सा व्यवस्था से एक 03 वर्षीय मासूम की जान बचाने में बड़ी सफलता मिली है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा ने बताया कि मुंगेली विकासखंड के ग्राम कोसमतरा निवासी 03 वर्षीय हिमांशी साहू ने खेल-खेल में अचानक एक सिक्का निगल लिया, जो उसके गले की आहार नली में सिक्का फंस गया। परिजनों ने तत्काल बच्ची को जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां एक्स-रे जांच में पुष्टि हुई कि बच्ची के गले की आहार नली में सिक्का फंसा हुआ है। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने बिना देर किए दूरबीन (एंडोस्कोपिक) तकनीक से सफल ऑपरेशन कर बच्ची के गले से सिक्का सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
सिविल सर्जन डॉ. एम.के. राय ने बताया कि समय पर मिली चिकित्सा सहायता से बच्ची सुरक्षित है और अब पूरी तरह स्वस्थ है। जिला चिकित्सालय के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कमलेश सत्यपाल, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार बेलदार एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु ध्रुव सहित पूरी टीम ने दूरबीन (एंडोस्कोपिक) तकनीक से सफल ऑपरेशन कर बच्ची के गले से सिक्का सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्ची के परिजनों ने डॉक्टरों एवं अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

 

जहां गोलियों की गूंज थी, अब इलाज की राहत: सुकमा में मेगा हेल्थ कैंप की बड़ी पहल

08-Apr-2026
रायपुर, ।  शोर संदेश )  जहाँ नामी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर कैंसर, हृदय रोग, स्त्री रोग, और नेत्र रोग जैसी बीमारियों का मुफ्त इलाज, जांच और दवाइयां प्रदान करते हैं। इसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा, दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग वितरण और आधुनिक जांचकी सुविधाएं भी मिलती हैं। लाल आतंक की समाप्ति के इस दौर में जब क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बना है, तब प्रशासन की पहुँच अंतिम छोर के व्यक्ति तक आसान हुई है। 
जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर का गत दिवस आयोजन किया गया। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री एवं सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के द्वारा शुभारंभ पश्चात इस मेगा स्वास्थ्य शिविर में उन संवेदनशील और अंदरूनी क्षेत्रों के 3,700 से अधिक ग्रामीण बेखौफ होकर पहुँचे, जो कभी मुख्यधारा से कटे हुए थे। कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह के निर्देशानुसार कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित उक्त मेगा स्वास्थ्य शिविर में कुल 6,500 से अधिक लाभार्थियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि अब ग्रामीण बंदूकों के साये से निकलकर आधुनिक चिकित्सा और विशेषज्ञ परामर्श पर भरोसा जता रहे हैं। शिविर के दौरान 21 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 40 स्वास्थ्य योद्धाओं की टीम ने इन वनवासियों के लिए देवदूत बनकर काम किया।
बस्तर के सुदूर अंचलों में कभी लाल आतंक की धमक से सहमे रहने वाले सुकमा जिले की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। दशकों पुराने संघर्ष और भय के बादलों को चीरकर अब यहाँ विकास और खुशहाली की नई किरणें बिखर रही हैं। जिला प्रशासन सुकमा और बेंगलुरु के एनटीआर फाउंडेशन के साझा प्रयासों से आयोजित दो दिवसीय सुपर स्पेशलिटी मेगा स्वास्थ्य शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अब सुकमा नक्सलवाद की बेड़ियों को तोड़कर स्वस्थ और सशक्त होने की राह पर निकल पड़ा है। मिनी स्टेडियम में विगत 28 और 29 मार्च को आयोजित इस शिविर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जहाँ कभी गोलियों की गूँज थी, आज वहाँ सेवा और संकल्प के गीत गाए जा रहे हैं।
शिविर में केवल सामान्य बीमारियों का ही नहीं, बल्कि कैंसर, हृदय रोग और न्यूरोलॉजी जैसी गंभीर समस्याओं का भी विशेषज्ञ उपचार किया गया। नक्सलवाद के दौर में स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहे बुजुर्गों के लिए 989 चश्मों का वितरण किया गया, जिससे उनकी धुंधली दुनिया एक बार फिर रोशनी से भर उठी। वहीं 1,500 बच्चों का व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण कर आने वाली पीढ़ी को कुपोषण और बीमारियों से मुक्त करने का संकल्प लिया गया। विशेष रूप से 85 महिलाओं की कैंसर स्क्रीनिंग और 2,300 आभा आईडी का निर्माण इस बात का प्रतीक है कि सुकमा अब डिजिटल स्वास्थ्य और सुरक्षा कवच से लैस हो रहा है।
लाल आतंक के खात्मे के बाद सुकमा का यह बदलाव पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल है। यह शिविर केवल एक चिकित्सकीय आयोजन नहीं था, बल्कि शासन-प्रशासन के प्रति जनता के अटूट विश्वास का उत्सव था। 153 आयुष्मान कार्डों का मौके पर निर्माण यह सुनिश्चित करता है कि अब सुदूर अंचल का गरीब से गरीब व्यक्ति भी पैसे के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रहेगा। सुकमा आज नक्सलवाद की पहचान को पीछे छोड़कर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है, जहाँ हर चेहरा मुस्कुरा रहा है और हर कदम एक खुशहाल भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

 

बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, लाइफस्टाइल में बदलाव से बचाव संभव

07-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश जिम करते-करते अचानक मौत, खेलते समय दिल की धड़कन रुक जाना या नाचते-गाते जिंदगी का थम जाना—COVID-19 के बाद और सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसी घटनाएं तेजी से सामने आई हैं। इन मामलों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है और दिल की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या किया जाए, यह आज हर किसी के लिए अहम मुद्दा बन चुका है।
इंस्टिट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग डिजीजेज (IHLD) के चेयरमैन और कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉक्टर राहुल चंदोला के मुताबिक खराब जीवनशैली हार्ट संबंधी बीमारियों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। उन्होंने बताया कि संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद और तनाव से बचाव दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही 40 की उम्र के बाद नियमित हार्ट हेल्थ स्क्रीनिंग कराना भी अनिवार्य हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 50% हार्ट अटैक के मामले ऐसे होते हैं जिनमें पहले कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। यही वजह है कि लोग अक्सर समय रहते सावधानी नहीं बरत पाते। ऐसे में नियमित जांच और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
कम नींद लेना, ज्यादा तनाव में रहना, अनियमित दिनचर्या, प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और एक्सरसाइज की कमी—ये सभी दिल की बीमारियों को तेजी से बढ़ा रहे हैं। कई शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि आधुनिक जीवनशैली हार्ट हेल्थ पर सीधा असर डाल रही है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान लेकिन असरदार आदतें अपनाई जा सकती हैं। रोजाना 7 से 7:30 घंटे की पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर और दिल दोनों को आराम देती है। इसके साथ ही नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक करना चाहिए, जिससे शरीर सक्रिय रहता है और पसीना निकलने से फिटनेस बनी रहती है। हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। वहीं, समय पर और संतुलित आहार लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि सही खानपान दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है।
डॉक्टर राहुल चंदोला, जो iLiveConnect के फाउंडर भी हैं, बताते हैं कि अब लोग बीमारी के बाद ही नहीं, बल्कि पहले से ही जांच कराने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। ईसीजी, इको और ब्लड टेस्ट जहां सामान्य जानकारी देते हैं, वहीं एंजियोग्राफी दिल की स्थिति का अधिक सटीक आकलन करती है, हालांकि यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल और असुविधाजनक हो सकती है।
हार्ट हेल्थ की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब नई तकनीक का सहारा भी लिया जा रहा है। iLive Connect का बायोसेंसर डिवाइस शरीर पर पैच की तरह लगाया जाता है, जो लगातार 5 दिनों तक 24 घंटे व्यक्ति की गतिविधियों के दौरान स्वास्थ्य की निगरानी करता है और सटीक रिपोर्ट देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल की बीमारियों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता और समय पर सावधानी है। यदि लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें और नियमित जांच कराएं, तो हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में सर्वाइकल कैंसर से बचाव की पहल, एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू

07-Apr-2026
रायपुर,।  शोर संदेश )  सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध प्रारंभ किए गए राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान को छत्तीसगढ़ की साय सरकार प्रदेशभर में प्रभावी रूप से क्रियान्वित कर रही है। इसी क्रम में सरगुजा जिले के लखनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम हेतु एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई।  कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज लखनपुर पहुंचकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने टीकाकरण के लिए आई बेटियों से मुलाकात कर उनसे आत्मीय बातचीत की और उन्हें एचपीवी वैक्सीन के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए इस टीके को लगाने के लिए प्रेरित किया। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि यह टीकाकरण भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का प्रभावी उपाय है और सभी पात्र बालिकाओं को इसका लाभ अवश्य लेना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों एवं स्टाफ से चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि अभियान को पूरी गंभीरता, सतर्कता और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किशोरियों तक इसका लाभ पहुंच सके। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में उपचाररत अन्य मरीजों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में फीडबैक भी लिया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का उद्देश्य किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से सुरक्षित करना है, जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण बनता है। यह टीका विशेष रूप से 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है और इसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार “स्वस्थ नारी, सशक्त राष्ट्र” के संकल्प के साथ महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। एचपीवी टीकाकरण अभियान इसी सोच का सशक्त उदाहरण है, जो प्रदेश को सर्वाइकल कैंसर मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल साबित होगा।
 

 


मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता

06-Apr-2026
रायपुर,।  शोर संदेश ) सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।
देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई। 
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।




 

ग्रीन एनेस्थीसिया: सिम्स में इलाज के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई पहल

29-Mar-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देते हुए “ग्रीन एनेस्थीसिया” की पहल की जा रही है। इस पहल के तहत मरीजों को सुरक्षित उपचार प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण और चिकित्सकों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली एनेस्थीसिया गैसों के दुष्प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से सिम्स द्वारा आधुनिक और पर्यावरण हितैषी तकनीकों को अपनाया जा रहा है।
सर्जरी के दौरान उपयोग की जाने वाली गैसें, जैसे डेसफ्लुरेन और नाइट्रस ऑक्साइड, ग्रीनहाउस गैसों के रूप में जानी जाती हैं। इनका प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना अधिक होता है और ये लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती हैं।
हर वर्ष बड़ी संख्या में होने वाली सर्जरी से निकलने वाली ये गैसें ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
एनेस्थीसिया का प्रभाव केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता। जहां एक मरीज को ऑपरेशन के दौरान एक बार एनेस्थीसिया दिया जाता है, वहीं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ चिकित्सक दिनभर में 10 से 12 घंटे तक लगातार कई मरीजों को एनेस्थीसिया प्रदान करते हैं।
इस दौरान वे बार-बार इन गैसों के संपर्क में आते हैं, जिससे लंबे समय में उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में ग्रीन एनेस्थीसिया चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
ग्रीन एनेस्थीसिया एक ऐसी पद्धति है, जिसमें मरीज को सुरक्षित बेहोशी देने के साथ-साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जाता है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है।
सिम्स में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं—
टी.आई.वी.ए. (Total Intravenous Anesthesia)
इस तकनीक में प्रोपोफोल, मिडाज़ोलम आदि दवाओं को इंट्रावेनस (रक्त शिरा द्वारा) दिया जाता है, जो बेहद प्रभावी एवं सुरक्षित माना जाता है। इससे गैसों के उपयोग में कमी आती है और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव भी कम होता है।
कम मात्रा में गैस देकर भी सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे गैस की खपत और प्रदूषण दोनों में कमी आती है।
नई तकनीकों के माध्यम से गैस लीकेज को नियंत्रित कर ऑपरेशन थिएटर के बाहर प्रदूषण को कम किया जा रहा है।
यह पद्धति पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी (Cost Effective) साबित हो रही है।
निश्चेतना में उपयोग होने वाली गैसों का अत्यधिक प्रयोग ग्लोबल वार्मिंग और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। ग्रीन एनेस्थीसिया के माध्यम से इन दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सिम्स इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
ग्रीन एनेस्थीसिया सिम्स की एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है, जो यह दर्शाती है कि बेहतर इलाज के साथ पर्यावरण और मानव दोनों की सुरक्षा संभव है। यह प्रयास भविष्य में अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।



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