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दर्द से राहत की नई सुबह: दंतेवाड़ा में पहली बार बदला गया घुटना, अब बड़े शहरों की मजबूरी खत्म

16-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) बरसों से घुटने के दर्द के साथ जी रही एक आदिवासी महिला के लिए यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत है। दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में पहली बार एडवांस्ड टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई—और इसी के साथ यह भरोसा भी मजबूत हुआ कि अब इलाज के लिए दूर-दराज़ के बड़े शहरों की मजबूरी नहीं रही।
कुआकोंडा विकासखंड के महारापारा की 45 वर्षीय शांति रोज़मर्रा की ज़िंदगी में संघर्ष कर रही थीं। साप्ताहिक हाट में चूड़ियों का छोटा-सा व्यवसाय चलाने वाली शांति के लिए चलना-फिरना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। दाएं घुटने के असहनीय दर्द ने काम, आमदनी और आत्मविश्वास—सब कुछ छीन लिया था।
जिला अस्पताल में जांच के बाद उन्हें गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस बताया गया। 6 जनवरी को भर्ती और 13 जनवरी को उनका टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। आज शांति के चेहरे पर सुकून है—“पहले हर कदम दर्द देता था, अब आराम है,” उन्होंने मुस्कराते हुए कहा।
ऑपरेशन करने वाले ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह अत्याधुनिक प्रक्रिया घुटने के क्षतिग्रस्त जोड़ को कृत्रिम इम्प्लांट से बदलती है, जिससे लंबे समय का दर्द खत्म होता है और चलने-फिरने की क्षमता लौटती है।
इस इलाज की खास बात यह भी रही कि पूरा खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ—यानी शांति को जेब से एक रुपया भी नहीं देना पड़ा। उन्होंने सरकार और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया।
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जैसे जिले में इस स्तर की सर्जरी का होना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर है। प्रशिक्षित सर्जन, एनेस्थीसिया सपोर्ट, नर्सिंग स्टाफ और मज़बूत पोस्ट-ऑपरेटिव केयर—सबकी साझा मेहनत ने यह संभव किया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सुविधा शासन की योजनाओं के तहत निःशुल्क उपलब्ध है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी अत्याधुनिक इलाज अपने जिले में ही मिल सके।दंतेवाड़ा के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं—यह भरोसे की जीत है।
 

विशेष लेख : सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान: स्वस्थ बचपन–सशक्त मातृत्व की दिशा में राज्य का संकल्प

10-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ शासन के गठन के 25 वर्ष एवं वर्तमान राज्य सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में “सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान” की प्रभावशाली शुरुआत की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रारंभ यह अभियान कुपोषण एवं एनीमिया जैसी गंभीर सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाता है।
यह अभियान 1 जनवरी 2026 से प्रदेश के आठ संवेदनशील एवं चयनित जिलों—बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर—में एक साथ लागू किया गया है। अभियान का मूल उद्देश्य कुपोषण मुक्त बचपन और स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने तथा 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं, विशेषकर गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया की समस्या को प्रभावी रूप से कम करने पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि किसी भी राज्य का भविष्य उसके बच्चों के स्वास्थ्य और माताओं के सशक्तिकरण पर निर्भर करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार कुपोषण के विरुद्ध केवल योजनागत नहीं, बल्कि संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। यह अभियान सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी का प्रतीक है।महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि अभियान के अंतर्गत आगामी छह महीनों में महिलाओं में रक्ताल्पता की दर में उल्लेखनीय कमी लाने, गंभीर एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में ठोस सुधार करने तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत कुपोषण से मुक्ति के उद्देश्य से समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश में कुपोषण की दर में कमी लाने तथा एनीमिक गर्भवती महिलाओं एवं कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए लक्षित प्रयास किए जाएंगे। गंभीर एवं मध्यम कुपोषित (एसएएम, एमएएम) बच्चों, संकटग्रस्त बच्चों तथा चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता वाली गर्भवती महिलाओं को विशेष समुदाय आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से कवर किया जाएगा।
अभियान के तहत सुपोषण दूतों का चयन किया जा रहा है, जो 70 प्रतिशत मध्यम कुपोषित एवं 30 प्रतिशत गंभीर कुपोषित बच्चों को गोद लेकर विभागीय योजनाओं एवं समुदाय के सहयोग से उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित करेंगे। बच्चों को सामान्य पोषण स्तर में लाने पर सुपोषण दूतों को प्रति बच्चा प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार महिला स्व-सहायता समूहों को भी कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी देखभाल से जोड़ा जाएगा, जिन्हें निर्धारित मानदेय के अनुसार प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
कुपोषण के प्रभावी प्रबंधन एवं सतत निगरानी के लिए जिला स्तर पर प्रबंध समिति का गठन किया गया है। साथ ही कुपोषित बच्चों को स्थानीय निधि से पोषण आहार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
जनसहयोग और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से “सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान” एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप ले रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़ों में सुधार नहीं, बल्कि व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाकर प्रत्येक बच्चे और प्रत्येक माता तक पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। सतत निगरानी, पारदर्शी क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही के साथ यह अभियान कुपोषण एवं एनीमिया के विरुद्ध निर्णायक परिणाम देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।







 

अम्बेडकर अस्पताल में नए साल की शुरुआत: जटिल TAVI प्रक्रिया से बुजुर्ग महिला का हृदय स्वास्थ्य सुधरा

09-Jan-2026
रायपुर,  ( शोर संदेश )   पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टिट्यूट (ACI) ने नववर्ष 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ की है। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गईं। वर्ष 2009 में मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ यह विभाग आज प्रतिवर्ष 2000 से अधिक उन्नत कार्डियक प्रक्रियाओं को अंजाम दे रहा है।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि नए वर्ष में विभाग ने एक अत्यंत जटिल ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपादित किया। रायपुर निवासी एक बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने एवं हार्ट फेलियर से पीड़ित थीं। जांच में सामने आया कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिसके कारण हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी।
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, इस अवस्था में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण एवं लगभग असंभव थी। ऐसे में डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी विभाग की टीम और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में संयुक्त रूप से ‘हार्ट टीम’ का गठन कर बिना चीर-फाड़ के पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया गया।
प्रक्रिया की तैयारी एक माह पूर्व विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण एवं मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत वित्तीय स्वीकृति के साथ शुरू हुई। जांच में यह भी पाया गया कि मरीज की पैर की नसें पतली एवं कैल्शियम युक्त थीं, जिससे वाल्व डिलीवरी सिस्टम को हृदय तक पहुँचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। साथ ही, जन्मजात संरचनात्मक विसंगति के कारण हृदय की कोरोनरी धमनियाँ वाल्व के काफी समीप थीं, जिससे वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान दोनों धमनियों के बंद होने का गंभीर खतरा था।
इस जटिलता से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर उनके और वाल्व के बीच “चिमनी” संरचना तैयार की। प्रक्रिया के अंतिम चरण में वाल्व डिलीवरी के दौरान बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज उत्पन्न हो गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह पुनः स्थापित किया गया।
लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के पश्चात ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा तथा हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर रही।
अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने इस जटिलतम प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए कार्डियोलॉजी टीम को बधाई दी।
यह प्रक्रिया डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस द्वारा संपन्न की गई। टीम में कैथलैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद तथा स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र सहित अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बालस्वरूप साहू एवं डॉ. संकल्प दीवान का भी विशेष सहयोग रहा।
मरीज वर्तमान में हार्ट कमांड सेंटर से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर डिस्चार्ज लेकर अपने घर जा चुकी हैं। मरीज एवं उनके परिजनों ने एसीआई की टीम, अस्पताल प्रबंधन एवं छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शासकीय चिकित्सा संस्थानों पर अपने विश्वास को पुनः सुदृढ़ किया।
हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत- ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण एवं लगभग असंभव, इसलिए पैर की नस के रास्ते वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) का निर्णय लिया गया।
पूर्व में विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण कर पतले एवं उन्नत डिलीवरी सिस्टम का उपयोग किया गया।
वाल्व प्रत्यारोपण के दौरान नसों के बंद होने के खतरे को देखते हुए स्टेंट लगाकर “चिमनी” संरचना तैयार की गई।
तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर प्रभावित नस में रक्त प्रवाह पुनः स्थापित किया गया।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से ओपन हार्ट सर्जरी की टीम को स्टैंडबाई में रखा गया।
हृदय की धड़कन अनियमित होने की संभावना - 24 घंटे के लिए टेम्पररी पेसमेकर का बैकअप सुनिश्चित किया गया।
मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में अति गहन निगरानी में रखा गया, जहाँ रिमोट व्यूइंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से टेली-मॉनिटरिंग की गई।

आंबेडकर अस्पताल में बिना चीर-फाड़ हार्ट ऑपरेशन: स्टेंट से चिमनी बनाकर डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान

09-Jan-2026
रायपुर (शोर संदेश)। आंबेडकर अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक बार फिर जटिल हार्ट प्रक्रिया कर एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई है। एडवांस्ड कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में ट्रांसकैथेटर आर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। शहर की रहने वाली महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से पीड़ित थी।
जांच में पाया गया कि उनका आर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम बनाई गई।
डॉक्टरों ने बिना चीर-फाड़ पैर की नस के माध्यम से वाल्व प्रत्यारोपण का निर्णय लिया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी के अनुसार, वर्ष 2025 में विभाग ने 2600 से अधिक जटिल हार्ट ऑपरेशन किए हैं।
टीम ने ऐसे किया ऑपरेशन
कई तरह की गंभीर जटिलताओं से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट डालकर उनके और वाल्व के बीच चिमनी संरचना तैयार की। प्रक्रिया के आखिरी स्टेज में वाल्व डिलीवरी के दौरान बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज आ गया, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह फिर से स्थापित किया गया।
लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के आर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया। हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई। दोनों कोरोनरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य रहा तथा हृदय की धड़कन पूरी तरह स्थिर रही।
ऑपरेशन टीम में डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. शिवकुमार शर्मा, कार्डियक एनेस्थेसियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बालस्वरूप साहू, डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव एवं डॉ. प्रिंस, कैथलैब टेक्नीशियन जितेंद्र, बद्री, प्रेमचंद, स्टाफ नर्स आनंद, डिगेन्द्र शामिल थे।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जिला अस्पताल बलौदा बाजार का किया निरीक्षण

08-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) स्वास्थ्य मंत्री एवं बलौदाबाजार भाटापारा जिले के प्रभारी मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल जिले के एक दिवसीय प्रवास पर थे ।इस दौरान उन्होंने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया ।उन्होंने जिला अस्पताल स्थित इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वॉलिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत क्वॉलिटी सर्टिफिकेट मिलने पर बधाई दी।
जायसवाल ने जिला अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर ,मातृ शिशु अस्पताल ,फिजियोथेरेपी सेंटर का निरीक्षण किया।साथ ही मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल -चाल जाना।उन्होंने संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी के लिए जिले में हो रहे काम की सराहना की और 50 बिस्तर मातृशिशु अस्पताल में बेड्स की संख्या बढ़ाने की बात कही। स्वास्थ्य मंत्री ने मुरुम तालाब के पास एक इंटीग्रेटेड यूनिट के निर्माण की बात भी कही जिसमे योग,नेचुरोपैथी और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज की व्यवस्था ,सियान क्लिनिक इत्यादि की सुविधा होगी।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में यहाँ प्रतिमाह 450 से अधिक प्रसव हो रहे हैं ।जिनमें से 200 सिजेरियन प्रसव हैं। इसके अलावा यहाँ  प्रतिमाह 300 डायलेसिस हो रहे हैं।











 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को सार्वजनिक स्वास्थ्य में राष्ट्रीय उपलब्धि

08-Jan-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश )  केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिला अस्पताल रायपुर स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी (IPHL) को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स (NQAS) का प्रमाणन प्राप्त होने पर छत्तीसगढ़ सरकार को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल करने के लिए बधाई दी है।
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लिखे  पत्र में नड्डा ने उल्लेख किया कि रायपुर IPHL देश में अपनी तरह की पहली प्रयोगशाला बन गई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की विश्वसनीय एवं क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सेवाएँ प्रदान करने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और रायपुर जिला अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को मजबूत किया है और सेवा-प्रदाय के नए मानक स्थापित किए हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने आगे कहा कि IPHL की स्थापना प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन (PM-ABHIM) का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह मिशन पूरे देश में स्वास्थ्य निगरानी, प्रयोगशाला नेटवर्क और आपदा तैयारी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस मिशन का मूल उद्देश्य गुणवत्ता-सुनिश्चित, अस्पताल-विशिष्ट एवं रोग-विशिष्ट प्रयोगशाला निदान उपलब्ध कराना है। रायपुर IPHL को प्रदान किया गया यह प्रमाणन इस बात की पुष्टि करता है कि प्रयोगशाला ने अपने मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत अधो संरचना का सफलतापूर्वक एकीकरण करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया है।
केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से आग्रह किया कि वह रायपुर मॉडल को श्रेष्ठ अभ्यास (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में अपनाते हुए राज्य के अन्य जिलों और क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार  जिलों में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला एवं डायग्नोस्टिक सेवाओं का निरंतर विस्तार करती रहेगी। उन्होंने कहा कि  यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी-सक्षम और मानक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को भी दर्शाती है। यह प्रमाणन संस्थागत परिपक्वता और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्ता आश्वासन की सुदृढ़ होती संस्कृति का परिचायक है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर IPHL को प्राप्त NQAS प्रमाणन छत्तीसगढ़ की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह सफलता दर्शाती है कि राज्य में प्रयोगशाला सेवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरणों और मजबूत अवसंरचना के क्षेत्र में सतत एवं परिणाममूलक सुधार किए गए हैं। जायसवाल ने कहा कि यह प्रमाणन केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों, लैब तकनीशियनों, पैरामेडिकल स्टाफ और जिला अस्पताल रायपुर की समर्पित टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य के अन्य जिलों में भी IPHL को इसी मॉडल पर विकसित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध, सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पुनः आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार और गुणवत्ता संवर्धन के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य परिवर्तन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपना स्थान सुदृढ़ करेगा।

 


एक धड़कन, जिसने ज़िंदगी बदल दी : प्रोजेक्ट धड़कन से अरमान को मिला नया जीवन

07-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  गांव में मितानिन ने एक दिन कहा था, “आपके बच्चे की धड़कन बाकी बच्चों से तेज है,” यह वाक्य आज भी रजनी यादव के कानों में गूंजता है। वे बोलते-बोलते रो पड़ती हैं, “हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया अब लगता है, क्यों नहीं दिया!”
गोगांव, रायपुर की रहने वाली रजनी यादव का तीसरा बेटा अरमान, अपने दोनों बड़े भाईयों और दोस्तों के साथ हंसता-खेलता बड़ा हो रहा था। कभी पिट्टूल खेलता, कभी दौड़ लगाता, सब कुछ सामान्य लगता था। बस बार-बार होने वाला सर्दी-बुखार माता- पिता को थोड़ा परेशान जरूर करता था, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि उस मासूम सी हंसी के पीछे एक गंभीर खतरा छिपा है। फिर 13 दिसंबर 2025 का दिन आया। सरोरा स्थित शासकीय स्कूल में, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार पहुँची चिरायु टीम ने जब बच्चों की जांच शुरू की, तो अरमान की बारी पर डॉक्टर ठिठक गए। उसके हृदय की धड़कन सामान्य नहीं थी। यही वह पल था, जिसने एक परिवार की ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
प्रोजेक्ट धड़कन छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की एक स्वास्थ्य पहल है, जिसका उद्देश्य मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों (Congenital Heart Diseases - CHDs) का जल्द पता लगाना और उनका मुफ्त इलाज कराना है, जिसमें सत्य साई हॉस्पिटल और जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं, विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर बच्चों की जांच की जाती है और उन्हें आवश्यक डिजिटल उपकरण (जैसे स्टेथोस्कोप) प्रदान किए जाते हैं। टीम अरमान को तत्काल सत्य साईं नारायण अस्पताल, नया रायपुर लेकर गई। विस्तृत जांच हुई और रिपोर्ट ने माता-पिता के पैरों तले ज़मीन खिसका दी। अरमान के दिल में 18 मिमी का छेद था। डॉक्टरों ने बिना देर किए कहा, “ऑपरेशन जरूरी है।” ईंट-भट्ठे में काम करने वाले पिता श्री रंगनाथ यादव और मां रजनी के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा था कि पैसे का इंतजाम कैसे होगा?
बच्चा का स्वास्थ्य, उसका भविष्य कैसा होगा? लेकिन उस घड़ी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। चिरायु टीम की सलाह पर भरोसा किया और अपने बेटे को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। ज़िला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ‘धड़कन’ के अंतर्गत 28 दिसंबर 2025 को विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में अरमान का जटिल हृदय ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क सफलतापूर्वक किया गया। लगातार निगरानी और देखभाल के बाद कुछ ही दिनों में वह डिस्चार्ज होकर घर वापिस आ गया।
आज जब अरमान पिट्टूल खेलता है, दोस्तों के पीछे भागता है, तो यह विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि सिर्फ एक हफ्ते पहले वह अस्पताल में एक जटिल सर्जरी प्रक्रिया से गुजर रहा था। चिरायु टीम द्वारा लगातार फॉलो-अप किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार अरमान की सेहत में उल्लेखनीय सुधार है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसके चेहरे की मुस्कान आज सिर्फ उसके परिवार की नहीं, पूरे मोहल्ले की खुशी बन गई है।
भावुक होकर रजनी यादव कहती हैं, “अगर समय पर जांच और ईलाज नहीं मिलता, तो शायद आज मेरा बच्चा मेरे सामने न होता।” वहीं पिता रंगनाथ यादव कहते हैं, ष्मेरे पास न पैसा था, न साधन३ लेकिन प्रोजेक्ट धड़कन ने मेरे बेटे को नई ज़िंदगी दे दी।” आज अरमान केवल अपने माता-पिता का सहारा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आशा, विश्वास और समय पर मिली मदद की ताकत का प्रतीक बन चुका है। रजनी और रंगनाथ, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और ज़िला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते नहीं थकते।
यह कहानी सिर्फ एक बच्चे के बचने की नहीं है - यह कहानी है संवेदनशील शासन, समय पर हस्तक्षेप और उस भरोसे की, जो एक मासूम दिल को फिर से धड़कने का मौका दे सका।
 

 


फटी गर्दन की नस, आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई मरीज की जान

06-Jan-2026
रायपुर (शोर संदेश) । जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष का नजारा डॉ. आंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में देखने को मिला। 40 वर्षीय मरीज घर पर दांत साफ कर रहा था, तभी अचानक उसके गले में तेज दर्द हुआ और गर्दन में सूजन फैल गई। कुछ ही मिनटों में वह बेहोश हो गया।
परिजन उसे तुरंत डॉ. आंबेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे। जांच में पता चला कि मरीज की दायीं कैरोटिड धमनी, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह सुनिश्चित करती है, अपने आप फट गई थी। इस दुर्लभ स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में स्पान्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना बेहद दुर्लभ है और विश्व मेडिकल जर्नल में ऐसे केवल 10 मामले ही दर्ज हैं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि मरीज की जान हर पल खतरे में थी। डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम ने तुरंत ऑपरेशन की योजना बनाई। गर्दन में खून का जमाव और धमनी की स्थिति के कारण आपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। छोटी सी चूक भी मरीज के लिए लकवा या ब्रेन डेड होने तक का कारण बन सकती थी।
कई घंटे की जटिल प्रक्रिया में टीम ने बोवाइन पैच की मदद से फटी धमनी की मरम्मत की गई। हर कदम पर सावधानी बरती गई। ऑपरेशन सफल रहा और राहत की बात यह रही कि मरीज को किसी भी तरह का लकवा नहीं हुआ। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।
चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर कैरोटिड धमनी फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, चोट या संक्रमण के कारण होती हैं, लेकिन यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। इसलिए यह मामला और भी दुर्लभ माना जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर चिकित्सालय की टीम को बधाई दी और इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की सफल सर्जरी ने छत्तीसगढ़ में जीवन रक्षक चिकित्सा क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।

खैरागढ़–छुईखदान–गण्डई में डायलिसिस सेवा से मरीजों को मिली बड़ी राहत

02-Jan-2026
रायपुर( शोर संदेश )। जिले के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सिविल अस्पताल खैरागढ़ में 3 बिस्तरों वाली डायलिसिस यूनिट संचालित की जा रही है। इस यूनिट में 03 आधुनिक डायलिसिस मशीनों का इंस्टॉलेशन किया गया है।
डायलिसिस सेवा का संचालन मार्च 2025 से प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रतिमाह अनुमानित 30 डायलिसिस सेशन किए जा रहे हैं। दिनांक 12 फरवरी 2025 से वर्तमान तिथि तक कुल 17 मरीजों को डायलिसिस सेवा प्रदान की जा चुकी है, जबकि वर्तमान में 09 सक्रिय केस नियमित रूप से उपचार प्राप्त कर रहे हैं।
इस डायलिसिस यूनिट का मुख्य उद्देश्य जिले के मरीजों को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराना है। यूनिट में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों एवं प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों के माध्यम से मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
इस सुविधा के शुरू होने से अब जिले के नागरिकों को डायलिसिस जैसे महंगे उपचार के लिए निजी अस्पतालों या अन्य जिलों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों में कमी आएगी।
डायलिसिस से संबंधित मरीज अथवा हितग्राही मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से अथवा स्वयं सिविल अस्पताल खैरागढ़ में उपस्थित होकर जांच एवं उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।














 

दूरस्थ आदिवासी अंचलों को स्वास्थ्य की नई राह: मुख्यमंत्री साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट को दिखाई हरी झंडी

31-Dec-2025
रायपुर। ( शोर संदेश ) दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गाँवों व बसाहटों तक पहुँचाएगी।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जाँच की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पहल को आदिवासी समुदायों की “सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार” बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का दिन है। समाज में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रत्येक दृष्टिकोण से पिछड़े लोग विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में निवासरत 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 21 सौ बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होगा। इन सर्वसुविधा-संपन्न 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से यह कार्य आसान होगा। इस यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर उपस्थित होंगे। इस यूनिट में 25 तरह की जाँच सुविधाएँ तथा 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी। 
मुख्यमंत्री साय ने इस नवीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के सहित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जाति के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रयासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे सुदूर वनांचलों के लिए हैं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम है। आज 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरे प्रदेश के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूर्ण करेगा। मंत्री जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पुनीत कार्य में छत्तीसगढ़ को सहभागी बनकर योगदान देने का अवसर प्रदान किया।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को सीधे बसाहटों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को इन यूनिट के माध्यम से निकट स्वास्थ्य केंद्रों में पहुँचाना आसान होगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ मशीनें ही नहीं, अपितु कुशल एवं संवेदनशील कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। ये यूनिटें हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिनमें 25 से अधिक प्रकार की जाँच और रोगों  का उपचार किया जाएगा और आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जाएगा। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से नहीं पहुँच पाती थीं। अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता के साथ यह व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकेगी। इस पहल से टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व रोकथाम में मदद मिलेगी।






 



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