ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने में देरी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने ममता पर निशाना साधा

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा करने के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं कराई।
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के अपने दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को यहां सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के फ्रंटियर मुख्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सीमा पर बीएसएफ द्वारा बाड़ लगाए जाने के लिए जमीन मुहैया कराने को लेकर कई बार गुहार लगाई लेकिन ममता बनर्जी ने इसे अनसुना कर दिया। मैं सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 1,129 एकड़ जमीन की मांग 2014 से कर रहा था। राज्य में (मुख्यमंत्री) शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद ही हमें यह जमीन मिली।’’
अमित शाह ने कहा कि राज्य के किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने एसएसबी या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कार्यक्रमों में कभी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने मंच पर उनके साथ मौजूद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को इस चलन को तोड़ने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद एसएसबी के समारोहों में कभी शामिल नहीं हुए। एसएसबी कोई राजनीतिक संगठन नहीं है। यह बल ऐसी बातों से ऊपर है।’’
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों के प्रति इस तरह की उदासीनता से गलत संदेश जाता है।
राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद गुरुवार शाम बागडोगरा पहुंचे अमित शाह ने केंद्र की सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए जो भी चाहिए था, वह शुभेंदु अधिकारी के सत्ता में आने के बाद से मिला। अब तो परियोजनाओं के लिए औपचारिक पत्र भेजे जाने से पहले ही राज्य की मंजूरी मिल जाती है।’’
अमित शाह ने कहा, ‘‘अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा मजबूत करने के लिए हमें 560 एकड़ जमीन की जरूरत थी लेकिन ममता बनर्जी की (पूर्व) सरकार ने इतने वर्षों तक यह जमीन नहीं दी। मैं सत्ता में आने के तुरंत बाद जमीन देने की मंजूरी के लिए (शुभेंदु) अधिकारी को धन्यवाद देना चाहता हूं। आज इस कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी हमारे लिए सोने पर सुहागा है।’’



 

सरकार उन स्पेस स्टार्टअप्स के साथ खड़ी रहेगी, जो भविष्य के लिए भारत की क्षमताएं विकसित कर रहे हैं : पीएम मोदी

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेस स्टार्टअप्स को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी, वे भविष्य के लिए भारत की क्षमताएं विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत स्पेस सेक्टर में दुनिया को एक मज़बूत, इनोवेटिव और कमर्शियली फायदेमंद मॉडल दे सकता है।
पीएम मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ में 20 अंतरिक्ष स्टार्टअप के सीईओ और संस्थापकों के साथ बातचीत की। इसके बाद, सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “भारत के स्पेस सेक्टर की ‘युवा ऊर्जा’ से मिलकर बहुत अच्छा लगा… ऐसे युवा उद्यमी और इनोवेटर जिन्होंने एक नए और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखकर अद्भुत साहस दिखाया है। उन्होंने जोखिम उठाए, सुधार प्रक्रिया पर भरोसा किया और अपनी कोशिशों में लगातार लगे रहे। इसी वजह से, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में बहुत कुछ हासिल किया है।”
पीएम मोदी ने आगे कहा कि स्टार्टअप्स ने अपने काम के बारे में जानकारीपूर्ण प्रेजेंटेशन दिए। उन्होंने सरकार के अंतरिक्ष सुधारों की भी सराहना की और बताया कि कैसे इन सुधारों ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
एक अन्य एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “मैंने स्टार्टअप्स से यह भी आग्रह किया कि वे इस बारे में सोचें कि स्पेस टेक्नोलॉजी किस तरह खेती, पशुपालन, डेयरी, पर्यावरण और रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े कई अन्य क्षेत्रों में बड़ा योगदान दे सकती है। वे अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ जुड़ सकते हैं, स्कूली बच्चों में जिज्ञासा जगा सकते हैं और अगली पीढ़ी को स्पेस सेक्टर में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। हमारा प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम भारत और दुनिया के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है!”
इससे पहले, पीएम मोदी के साथ अंतरिक्ष स्टार्टअप के सीईओ और संस्थापकों ने भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग द्वारा की जा रही तीव्र प्रगति पर प्रकाश डाला और इस सेक्टर के भविष्य के लिए अपना विजन साझा किया।
इसमें रॉकेट और रियूजेबल सेमी-क्रायोजेनिक लॉन्च व्हीकल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट, एडवांस प्रोपल्शन सिस्टम, स्पेस और डिफेंस इंटेलिजेंस, स्पेस मलबा हटाने, AI-पावर्ड हाइपरलोकल मौसम और जलवायु इंटेलिजेंस जैसे विविध क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों ने हिस्सा लिया।
पीएम मोदी ने स्पेस सेक्टर के प्रमुखों को हिम्मत दिखाने और एक नए क्षेत्र में पहल करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर ने जो भरोसा दिखाया है, उससे उस विज़न को और मजबूती मिली है, जिसके तहत स्पेस सेक्टर को प्राइवेट भागीदारी के लिए खोला गया था। उन्होंने स्पेस कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी के नए इस्तेमाल खोजने और इस बात पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया कि वे लोगों की ज़िंदगी को कैसे आसान बना सकती हैं।
 

मेडटेक में भारत को ‘मेड इन इंडिया’ से आगे बढ़कर डिजाइन, इनोवेशन और निर्यात का केंद्र बनना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत को मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में केवल ‘मेड इन इंडिया’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ‘भारत में डिजाइन, इनोवेशन और भारत से निर्यात’ की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल टेक्नोलॉजी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ-साथ देश में नवाचार और स्वदेशी विनिर्माण को नई गति दे सकती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह आज नई दिल्ली में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सहयोग से आयोजित 18वें CII ग्लोबल मेडटेक समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियों का समाधान करने का अवसर है—स्वास्थ्य सेवा की सीमाओं को आगे बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना कि नई तकनीक और उपचार हर नागरिक तक किफायती दरों पर पहुंचें।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सामने एक ऐसा मॉडल पेश कर सकता है, जिसमें उच्च गुणवत्ता, अत्याधुनिक तकनीक और व्यापक प्रभाव के साथ लोगों की वहन क्षमता का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने बताया कि भारत का मेडटेक क्षेत्र वर्ष 2030 तक करीब 20 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारत को मेडिकल टेक्नोलॉजी, नवाचार और विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का बड़ा अवसर प्रदान करता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 तक 96.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) बनाए जा चुके हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 5.47 लाख से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं और 10.50 लाख से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हैं।
उन्होंने कहा कि अब अगला कदम मेडिकल टेक्नोलॉजी को डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम के साथ सहज रूप से जोड़ना है। मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरऑपरेबल हेल्थ डेटा का एकीकरण देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बदल सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली बड़ी स्वास्थ्य क्रांति सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के सहयोग से आएगी। स्टार्टअप से लेकर अस्पतालों, प्रयोगशालाओं से लेकर बाजार तक सभी को मिलकर नवाचार को तेज करना होगा, ताकि नई तकनीक का लाभ हर मरीज तक पहुंच सके।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि मेडिकल डिवाइस के विनिर्माण चरण में ही उत्पादों की पर्याप्त जांच सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में अपनी जरूरतों के अनुरूप एक विशिष्ट यानी ‘सुई जेनेरिस’ नियामकीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार अगली पीएलआई योजनाओं को अधिक घरेलू वैल्यू एडिशन पर केंद्रित करने की तैयारी कर रही है। मौजूदा लाभार्थियों के लिए वैल्यू एडिशन की सीमा को शुरुआती निम्न स्तरों से बढ़ाकर 40 से 45 प्रतिशत तक ले जाने का प्रस्ताव है, जबकि ऐसे नए उत्पादों के विनिर्माताओं को शुरुआती स्तर पर वैल्यू एडिशन की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है, जिनका उत्पादन वर्तमान में भारत में नहीं हो रहा है।
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि मेडटेक केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा का एक रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले और जीवनरक्षक उपकरण विकसित करने के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने तथा अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
वहीं, CDSCO के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि ICMR और CDSCO के सहयोग तथा नीति आयोग के मार्गदर्शन में चल रहे MedTech Mitra को अब तक 850 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि नवाचार और मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में बाधाओं को दूर करने के लिए ऐसे और प्लेटफॉर्म की जरूरत है।
उन्होंने उद्योग से उन्नत मेडिकल डिवाइस को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल हेल्थ की वास्तविक सफलता तभी होगी, जब अत्याधुनिक स्वास्थ्य तकनीक देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंचे।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के संयुक्त सचिव अमन शर्मा ने मेडिकल डिवाइस के लिए देश में मजबूत परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक परीक्षण सुविधाएं देश में उपलब्ध होनी चाहिए, क्योंकि विदेशों में परीक्षण कराने से भारतीय निर्माताओं की लागत बढ़ती है।
CII नेशनल मेडिकल टेक्नोलॉजी फोरम के चेयरमैन और Terumo India के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर अग्रवाल ने कहा कि भारत के मेडटेक क्षेत्र की अगली विकास यात्रा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने से आगे बढ़कर डिजाइन, नवाचार, विकास और भारत से निर्यात पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने नियामकीय प्रक्रियाओं में अधिक पूर्वानुमेयता और उद्योग, अकादमिक जगत, स्टार्टअप तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
 

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी से की मुलाकात, असम बाढ़ राहत पर मिला पूरा भरोसा

21-Aug-2026
नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में बाढ़ से निपटने के प्रयासों और आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री से आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने लिखा कि बाढ़ राहत कार्यों के दौरान प्रधानमंत्री लगातार संपर्क में रहे, स्थिति की बारीकी से समीक्षा करते रहे और हरसंभव सहायता प्रदान करते रहे।
हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री के साथ अगले चरण का रोडमैप साझा किया। इसमें प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और व्यापक सुधार सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को सफल बनाने में भारत सरकार के अटूट समर्थन को दोहराया।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा असम की जनता के जनादेश को पूरा करने के लिए पहले 100 दिनों में शुरू की गई प्रमुख पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने ‘विकसित असम’ के साझा विजन को साकार करने के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर मार्गदर्शन और प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने एनडीए 3.0 सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर अलग-अलग पोस्ट में अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि असम की नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं को मजबूत किया गया है, ताकि बेटियां स्वस्थ, आत्मविश्वासी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र रह सकें।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि विकसित असम के निर्माण के लिए लोगों की सेवा पूरी ईमानदारी से करने और विकास व कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने का संकल्प दोहराया जा रहा है।

 


दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में परिसीमन का मुद्दा भी उठा

20-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को चेन्नई के निकट कोवलम में दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में चर्चा का नेतृत्व किया। बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने परिसीमन का मुद्दा उठाया, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के बीच ‘महत्वपूर्ण बातचीत’ हुई।
कावेरी नदी जल बंटवारे के मुद्दे और मेकेदातु बांध विवाद की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में कर्नाटक के अपने समकक्ष शिवकुमार के साथ बातचीत की। दोनों मुख्यमंत्री बैठक में एक-दूसरे के बगल में बैठे थे।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हैं। बैठक में केरलम के मुख्यमंत्री सतीशन सहित अन्य नेता शामिल हुए।
बैठक में अपने संबोधन में शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से एक प्रस्ताव पारित करने की मांग की, जिसमें केंद्र सरकार से 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बरकरार रखने और इन्हीं सीटों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का आग्रह किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में दक्षिणी राज्यों की सफलता उनकी राजनीतिक आवाज कम करने का कारण नहीं बननी चाहिए।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘हम इस आश्वासन का स्वागत करते हैं कि किसी भी दक्षिणी राज्य की सीट कम नहीं होगी। लेकिन प्रतिनिधित्व केवल संख्या का विषय नहीं है। यह प्रभाव और आवाज से जुड़ा मुद्दा है।’’ उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने देश के आह्वान पर जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को अनुशासन और सफलता के साथ पूरा किया है और परिसीमन प्रक्रिया में इस उपलब्धि के लिए उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 की जनसंख्या को आधार माना जाना चाहिए और लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि यहां मौजूद सभी मुख्यमंत्री मेरी बात का समर्थन करेंगे। 1971 के आधार का सम्मान किया जाए और हमारी आवाज की ताकत सुरक्षित रखी जाए।’’
शिवकुमार ने परिसीमन को महिला आरक्षण से भी जोड़ते हुए कहा कि नए परिसीमन के कारण महिला आरक्षण लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने परिषद से अगले 25 वर्षों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 पर स्थिर रखने और इन्हीं सीटों में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने मेकेदातु परियोजना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह केवल उनके राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘बैठक के लिए आते समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मुझसे कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद का समाधान जरूरी है। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि मेकेदातु परियोजना से पानी की हर बूंद तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों की मदद करेगी। हमारी मदद करें ताकि हम आपकी मदद कर सकें।’’ तमिलनाडु सरकार कावेरी नदी पर प्रस्तावित संतुलन जलाशय परियोजना का विरोध करती रही है। उसका कहना है कि इसे लागू करने से राज्य के हित प्रभावित होंगे।
इस बीच, शिवकुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह बैठक दक्षिणी क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श का अवसर थी।
वहीं, केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात की। सतीशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘‘ चेन्नई के महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक से इतर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ महत्वपूर्ण बातचीत हुई। केरल के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पी. के. कुन्हालीकुट्टी भी मौजूद थे।’



 

परिचालन से रक्षा उद्योग तक, भारत-जापान के बीच सहयोग के लिए बनेगा कार्य समूह

20-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत और जापान ने परिचालन, खुफिया, रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और रक्षा उद्योग के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के महानिदेशक या संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी इस कार्य समूह की अध्यक्षता करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में यह जानकारी दी।
कार्य समूह दोनों रक्षा मंत्रियों की ओर से तय सहयोग के क्षेत्रों में समग्र समन्वय करेगा। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाने और सहयोग से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद करना है। इसके जरिए परिचालन और खुफिया सहयोग के साथ रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और रक्षा उद्योग से जुड़े प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
भारत और जापान ने समुद्री जहाज निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इससे भारत को जापान की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों रक्षा मंत्रियों ने समुद्री जहाजों पर लगाए जाने वाले यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना तंत्र से जुड़ी परियोजना को महत्वपूर्ण बताया।
यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना तंत्र दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जुड़ी पहली परियोजना है। दोनों पक्षों ने इसे भारत-जापान रक्षा सहयोग की गहराती साझेदारी का प्रतीक बताया और परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
भारत और जापान ने रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अन्य परियोजनाओं पर चर्चा आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और जापान के एटीएलए के बीच अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
दोनों देशों ने रक्षा उद्योग मंच आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं की तलाश करना है।
दोनों मंत्रियों ने फरवरी 2026 में भारत, जापान और इंडोनेशिया के बीच हुए पहले त्रिपक्षीय नौसैनिक पासेक्स अभ्यास का स्वागत किया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक सहयोग के दृष्टिकोण के तहत दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए तीसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही। इसमें उच्चस्तरीय वार्ता, सैन्य अभ्यास और अन्य संबंधित पहल शामिल होंगी।
भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत लॉजिस्टिक नेटवर्क के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इस नेटवर्क का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं के समय साझेदार देशों तक लोगों और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए किया जाएगा। दोनों पक्षों ने सितंबर में जापान के रक्षा मंत्रालय में होने वाले नेटवर्क के दूसरे टेबलटॉप अभ्यास का स्वागत किया।
दोनों देशों ने जरूरत पड़ने पर सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपसी विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के विभिन्न माध्यमों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
द्विपक्षीय बैठक से पहले जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारत के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
जापानी रक्षा मंत्री ने बुधवार को मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा भी किया था। इस दौरान वह भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस चेन्नई पर गए। दोनों देशों के बीच बढ़ते नौसैनिक और समुद्री सहयोग के लिहाज से इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-जापान के बीच हुए इन फैसलों से रक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को एक साझा संस्थागत ढांचे के तहत आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, जहाज निर्माण, सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है। 


 

प्रयागराज में जलभराव से रामबाग स्टेशन पर ट्रेनों का परिचालन फिलहाल निलंबित

20-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पिछले कई दिनों से संगम नगरी में हो रही मूसलाधार वर्षा के कारण उत्तर पूर्व रेलवे (एनईआर) के रामबाग स्टेशन पर ट्रैक पर जलभराव होने से इस स्टेशन से प्रारंभ और समाप्त होने वाली ट्रेनों का परिचालन झूंसी स्टेशन स्थानांतरित कर दिया गया है। उत्तर पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार ने बताया कि रामबाग रेलवे स्टेशन पर जलभराव होने के चलते यहां से प्रारंभ और समाप्त होने वाली ट्रेनों का परिचालन झूंसी स्टेशन स्थानांतरित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “पिछले 24 घंटे में हुई भारी बारिश से पूरा प्रयागराज शहर ही डूबा हुआ है और रामबाग स्टेशन निचले इलाके में स्थित होने के कारण वहां यार्ड में पानी भरा हुआ है। पानी निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पानी वापस आ जा रहा है।” उन्होंने कहा कि पानी निकालने की कोशिश लगातार जारी है और रामबाग स्टेशन से प्रारंभ और समाप्त होने वाली चार पैसेंजर ट्रेनें अल्पकाल के लिए झूंसी से प्रारंभ और समाप्त हो रही हैं।
वहीं, उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डाक्टर शिवम शर्मा ने कहा कि प्रयागराज में वर्षा से एनसीआर के प्रयागराज जंक्शन, नैनी और छिवकी स्टेशनों पर किसी तरह के जलभराव की सूचना नहीं है और सभी ट्रेनें अपने समय पर चल रही हैं।उल्लेखनीय है कि प्रयागराज में पिछले कई दिनों से जारी भारी वर्षा से नगर के ज्यादातर निचले इलाके जलमग्न हैं और जिला प्रशासन और नगर निगम जल निकासी के प्रयासों में लगा हुआ है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी शहर में जलभराव की समस्या का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम को फटकार लगाते हुए जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।














 

चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा

20-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को अपने राज्य, कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा। नायडू ने अमरावती, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाले परिवहन नेटवर्क की मांग करते हुए बुलेट ट्रेन को कुप्पम (उनका निर्वाचन क्षेत्र) से गुजारने का सुझाव दिया। महाबलीपुरम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में बोलते हुए उन्होंने दक्षिणी राज्यों में एक साझा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ड्राई पोर्ट स्थापित करने का सुझाव दिया।उन्होंने दक्षिणी बिजली ग्रिड को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने का भी आह्वान किया।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिणी राज्यों के विश्वविद्यालयों और कौशल विकास संस्थानों के एक संयुक्त संघ का प्रस्ताव रखा। उन्होंने आपदाओं के दौरान अंतर-राज्यीय सहयोग के लिए एक पारस्परिक सहायता बल स्थापित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ों परियोजना के माध्यम से 500 टीएमसी से अधिक पानी के डायवर्जन का भी प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि गोदावरी-कावेरी जोड़ो तमिलनाडु की जल समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है और उन्होंने नदी जल संबंधी मुद्दों पर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु से समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने गंगा-कावेरी नदी जोड़ने के लिए एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय योजना का समर्थन किया और नदी-जोड़ो परियोजनाओं के लिए समयबद्ध डीपीआर और अनुमोदन की मांग की।
चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति को काशी, अयोध्या और चार धाम से जोड़ने वाले एक साझा आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य भारत की जीडीपी में लगभग 31 प्रतिशत का योगदान देते हैं और 2047 तक दक्षिणी अर्थव्यवस्था 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में दक्षिणी राज्यों को एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभरना चाहिए। उन्होंने केंद्र से संयुक्त आंध्र प्रदेश के विभाजन से उत्पन्न मुद्दों के समाधान में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत अनुसूची-9 और 10 के संस्थान 12 साल बाद भी अनसुलझे हैं।
मुख्यमंत्री ने संसाधन घाटे और पुनर्गठन अधिनियम की धारा 56 से संबंधित मुद्दों के समाधान की अपील की। आंध्र प्रदेश और अन्य दक्षिणी राज्यों के विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने दक्षिणी राज्यों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मुद्दों के समाधान के लिए केंद्र-राज्य विश्वास और पारस्परिक सहयोग आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के सहयोग से पोलावरम, दक्षिण तटीय रेलवे जोन और अमरावती परियोजनाएं आकार ले रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि अमरावती को राजधानी का कानूनी दर्जा प्राप्त हो चुका है।
चंद्रबाबू नायडू ने दुर्गराज पटनम बंदरगाह और रिफाइनरी प्रस्तावों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने का आह्वान किया। उन्होंने विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा मेट्रो रेल परियोजनाओं और कडप्पा दक्षिण पश्चिम पश्चिम रेलवे लिंक के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी मांगी। तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री उपस्थित थे।

भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ के लिए भारतीय सेना का दल रवाना

17-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारतीय सेना का दल भारत और थाईलैंड के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ में हिस्सा लेने के लिए सोमवार को थाईलैंड रवाना हुआ। यह अभ्यास 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के सूरत थानी स्थित विभावदी रंगसित कैंप में आयोजित किया जाएगा।
यह भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास का 15वां संस्करण है। इससे पहले इसका आयोजन सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में किया गया था।
अभ्यास में भारतीय सेना और रॉयल थाई सेना के 85-85 जवान हिस्सा लेंगे। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के जवान शामिल हैं, जबकि थाईलैंड की ओर से 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की 3वीं बटालियन के सैनिक हिस्सा लेंगे।
इस अभ्यास में कंपनी स्तर पर संयुक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मुख्य ध्यान जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में सैन्य अभियान चलाने पर रहेगा।
‘मैत्री’ अभ्यास का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त रूप से उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने की क्षमता को बेहतर करेंगी।
प्रशिक्षण के दौरान मैदानी अभ्यास, सैन्य चर्चा, व्याख्यान, प्रदर्शन और अंतिम संयुक्त अभ्यास आयोजित किया जाएगा। दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभियानों के दौरान इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों और तकनीकों की जानकारी भी साझा करेंगे।
‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। यह भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच अनुभव और बेहतर सैन्य तरीकों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच है।
अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, समझ और सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करेगा।

 

राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने लखीसराय मंदिर भगदड़ को लेकर जताया गहरा शोक, पीड़ित परिवारों के प्रति व्यक्त की संवेदनाएं

17-Aug-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) बिहार के लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ की दुर्घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है और 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बिहार सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बिहार के लखीसराय जिले में भगदड़ की दुर्घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएमओ ने एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, “बिहार के लखीसराय में भगदड़ से हुई मौतों से दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है।”
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर लिखा, “बिहार के लखीसराय में हुई घटना हृदयविदारक है। इस दुःखद हादसे से मन व्यथित है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने एवं शोकाकुल परिजनों को कठिन घड़ी में संबल देने की प्रार्थना करता हूं।”
बिहार सरकार में मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा, “लखीसराय की हृदयविदारक घटना में सात महिलाओं के निधन से मन अत्यंत व्यथित है। प्रभु दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान दें, परिजनों को धैर्य तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें।”
जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा, “यह बेहद दुखद घटना है और कई श्रद्धालुओं की मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। एसडीपीओ ने कुछ अफवाहों का जिक्र किया है, लेकिन जब तक सरकार पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक पक्ष नहीं रखती, तब तक कुछ भी पक्के तौर पर कहना ठीक नहीं होगा।”













 


Feedback/Enquiry



Log In Your Account