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काशी-तमिल संगम से मजबूत हुई ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना, पोंगल के खास मौके पर पीएम मोदी का संदेश

16-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि काशी-तमिल संगम जैसे प्रयास भारत की सांस्कृतिक एकता को और गहरा करते हैं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाते हैं। पोंगल के विशेष अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए पीएम मोदी ने हाल ही में सोमनाथ यात्रा, काशी-तमिल संगम की उपलब्धियों और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से बात की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए बताया कि कुछ दिन पहले वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने के लिए पवित्र सोमनाथ भूमि पर गए थे। यह आयोजन वर्ष 1026 में सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण की हजारवीं बरसी के उपलक्ष्य में हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के कोने-कोने से लोग आए और इतिहास, संस्कृति तथा भारत की अटूट चेतना के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की मुलाकात ऐसे लोगों से हुई, जो पहले सौराष्ट्र-तमिल संगम और काशी-तमिल संगम में भी भाग ले चुके थे। इन लोगों ने ऐसे मंचों की सराहना की, जिससे प्रधानमंत्री ने इस विषय पर अपने विचार साझा करने का निर्णय लिया।
ब्लॉग पोस्ट में पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि तमिल भाषा न सीख पाने का उन्हें जीवनभर अफसोस रहेगा।
पीएम ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि बीते कुछ वर्षों में सरकार को तमिल संस्कृति को देशभर में लोकप्रिय बनाने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने के कई अवसर मिले हैं। काशी-तमिल संगम इसका प्रमुख उदाहरण है। भारतीय परंपरा में ‘संगम’ यानी संगम स्थल का विशेष महत्व रहा है और इसी दृष्टि से काशी-तमिल संगम एक अनोखी पहल है, जो भारत की विविध परंपराओं की जीवंत एकता को सम्मान देती है।
प्रधानमंत्री ने ब्लॉग पोस्ट में यह भी कहा कि काशी से बेहतर इस संगम के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता। काशी हजारों वर्षों से ज्ञान, अर्थ और मोक्ष की खोज का केंद्र रही है। काशी और तमिल संस्कृति का रिश्ता बेहद गहरा है। काशी में बाबा विश्वनाथ विराजमान हैं, वहीं तमिलनाडु में रामेश्वरम है। तमिलनाडु का तेनकासी ‘दक्षिण काशी’ के नाम से जाना जाता है। संत कुमारगुरुपर स्वामीगल ने अपनी साधना और विद्वता से काशी और तमिलनाडु के बीच स्थायी सेतु बनाया। महाकवि सुब्रमण्यम भारती ने काशी में बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नति पाई, जहां उनका राष्ट्रवाद और काव्य और प्रखर हुआ।
पीएम मोदी ने बताया कि काशी-तमिल संगम का पहला संस्करण 2022 में हुआ था, जिसमें वे उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसमें तमिलनाडु से विद्वान, कारीगर, छात्र, किसान, लेखक और पेशेवर लोग काशी, प्रयागराज और अयोध्या पहुंचे थे। काशी-तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जिसकी थीम थी ‘तमिल कर्कलाम: लर्न तमिल’। इसके जरिए काशी और अन्य क्षेत्रों के लोगों को तमिल भाषा सीखने का अनूठा अवसर मिला। तमिलनाडु से शिक्षक आए और काशी के छात्रों के लिए यह अनुभव यादगार रहा।
इस संस्करण में कई विशेष आयोजन हुए। प्राचीन तमिल ग्रंथ ‘तोल्काप्पियम’ का चार भारतीय और छह विदेशी भाषाओं में अनुवाद किया गया। ‘सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन’ तेनकासी से काशी तक निकाली गई, जिसके दौरान नेत्र जांच शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता और डिजिटल साक्षरता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान में पांड्य शासक आदि वीर पराक्रम पांडियन को भी श्रद्धांजलि दी गई। नमो घाट पर प्रदर्शनियां, बीएचयू में अकादमिक सत्र और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हजारों युवाओं की भागीदारी उन्हें सबसे अधिक खुशी देती है, क्योंकि यह युवाशक्ति के अपनी जड़ों से जुड़ने की चाह को दर्शाती है। यात्रा को यादगार बनाने के लिए भारतीय रेल ने विशेष ट्रेनें चलाईं, जिनमें संगीत और संवाद का माहौल रहा। उन्होंने काशी और उत्तर प्रदेश के लोगों की गर्मजोशी और प्रशासन की व्यवस्था की सराहना की।
समापन समारोह रामेश्वरम में हुआ, जिसमें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शामिल हुए और राष्ट्रीय एकता पर प्रेरक संबोधन दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी-तमिल संगम ने सांस्कृतिक समझ, शैक्षणिक आदान-प्रदान और जन-संपर्क को मजबूत किया है। अंत में उन्होंने संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल और माघ बिहू जैसे पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय एकता को और सुदृढ़ करने का आह्वान किया। 

उत्तराखंड में चमोली प्रशासन हाई अलर्ट पर, नंदा देवी वन में लगी आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात

16-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गोविंदघाट रेंज में अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा नदियों के बीच स्थित पथरीले इलाके में जंगल में आग लगने के बाद जिला प्रशासन को पूरी तरह से अलर्ट कर दिया गया है।
अधिकारी के अनुसार, “नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गोविंदघाट रेंज में अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा नदियों के बीच चट्टानी क्षेत्र में लगी जंगल की आग को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। क्षेत्र की दुर्गमता को देखते हुए, हेलीकॉप्टर का उपयोग करके हवाई टोही और अग्निशमन के लिए एक योजना तैयार की गई है।”
जिला मजिस्ट्रेट गौरव कुमार की पहल पर हेलीकॉप्टर से सर्वेक्षण की अनुमति दे दी गई है। सर्वेक्षण के बाद, डीएफओ सर्वेश दुबे ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित हैं। उत्तराखंड सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) के अनुसार, जमीनी टीमें हेलीकॉप्टर और ड्रोन की निगरानी की मदद से आग बुझाने का काम कर रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा गया कि चमोली जिले के नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के गोविंदघाट रेंज में लगी जंगल की आग को बुझाने के प्रयास जारी हैं। साथ ही, प्रभावित क्षेत्र की निगरानी और सर्वेक्षण के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इससे पहले आज गुरुवार सुबह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने उत्तराखंड के नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र में लगी जंगल की आग से निपटने के लिए कार्रवाई की। केंद्रीय वायु कमान (सीएसी) के अनुसार, राज्य सरकार के अनुरोध पर जोशीमठ में अग्निशमन कार्य के लिए भारतीय वायु सेना का एक Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर तैनात किया गया था। इस प्रतिक्रिया में, सीएसी ने रक्षा और आपदा राहत में भारतीय वायु सेना की दोहरी भूमिका पर प्रकाश डाला।
भारतीय वायु सेना की सीएसी की आधिकारिक एक्स पोस्ट में कहा गया है, “उत्तराखंड के नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र में लगी जंगल की आग से निपटने के लिए @IAF_MCC ने तेजी से प्रतिक्रिया दी, जिससे एक बार फिर भारतीय वायु सेना की परिचालन तत्परता का प्रदर्शन हुआ।” दरअसल, राज्य सरकार की मांग को पूरा करने के लिए केंद्रीय वायु कमान से भारतीय वायु सेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर को जोशीमठ में आग बुझाने के लिए तैनात किया गया था। इस प्रतिक्रिया ने एक बार फिर रक्षा और आपदा राहत में भारतीय वायु सेना की दोहरी भूमिका को उजागर किया।
उत्तराखंड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, “नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व, जिसे नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है, हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में स्थित एक शानदार वन्य क्षेत्र है।” नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व और फूलों की घाटी, दोनों ही प्रतिष्ठित यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। नंदा देवी शिखर की देखरेख में स्थित यह ऊबड़-खाबड़ और मनोरम अभ्यारण्य उत्तराखंड के तीन जिलों, अर्थात् चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में फैला हुआ है।
आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि दो प्रमुख क्षेत्र हैं- यहां दो प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनका नाम नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान है। इन पार्कों की सुंदरता को और भी बढ़ाती हैं- अलकनंदा नदी और उसकी सहायक नदियां, जिनमें ऋषि गंगा, धौली गंगा, पुष्पावती और खीरो गंगा शामिल हैं, जो इस क्षेत्र को पार करती हैं। नंदा देवी के अलावा, इस अभ्यारण्य में त्रिशूल, दुनागिरी, कलंका और नंदा घुंटी सहित कई चोटियां भी स्थित हैं।
असाधारण जैव विविधता के साथ, यह अभ्यारण्य विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजातियों की महत्वपूर्ण आबादी का समर्थन करता है, जिनमें हिम तेंदुआ, हिमालयी कस्तूरी मृग और कई प्रकार की वनस्पतियां शामिल हैं। यह एशियाई काले भालू, हिमालयी भूरे भालू, भरल और हिमालयी तहर का भी घर है। यह एक प्रमुख पक्षी-दर्शन क्षेत्र भी है।
इन पार्कों के छोटे-छोटे हिस्सों में सामुदायिक पर्यावरण पर्यटन को छोड़कर, यह क्षेत्र रखरखाव के लिए एक नियंत्रण स्थल के रूप में कार्य करता है। 

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत बना स्टार्टअप हब, फाउंडर्स ने गिनाई उपलब्धियां

16-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है। स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि पीएम मोदी ने न केवल स्टार्टअप्स को समर्थन दिया, बल्कि जेएएम ट्रिनिटी (जन धन, आधार और मोबाइल) और यूपीआई जैसे मजबूत पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए व्यापार को आसान और सुलभ बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
हेल्थकेयर स्टार्टअप 1एमजी के सीईओ प्रशांत टंडन ने कहा कि मौजूदा समय में भारत में वे सभी सुविधाएं मौजूद हैं, जिनकी एक उद्यमी को जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पहचान मिली, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो सका।
प्रशांत टंडन ने कहा कि आज केवल कारोबारी ही नहीं, बल्कि कॉरपोरेट्स, सरकारें और आम नागरिक भी स्टार्टअप्स को समझ रहे हैं और उनका महत्व स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम को न केवल सपोर्ट किया, बल्कि उसे आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
टंडन के अनुसार, भारत के स्टार्टअप सफर में जेएएम ट्रिनिटी (जन धन, आधार और मोबाइल) और यूपीआई जैसे पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन पहलों से उद्यमिता को बढ़ावा मिला और कारोबारियों को ऐसे समाधान विकसित करने का अवसर मिला, जिनकी देश को वास्तविक जरूरत थी।
अर्बन कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अभिराज सिंह बहल ने कहा कि जब उन्होंने अर्बन कंपनी की शुरुआत की थी, तब देश में केवल एक-दो यूनिकॉर्न थे। पिछले आठ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आया है और अब 110 यूनिकॉर्न के साथ हजारों स्टार्टअप्स विभिन्न सेक्टर्स में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।
प्रिस्टिन केयर के सह-संस्थापक हरसिमरबीर सिंह ने कहा कि 2015 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस भाषण से प्रेरित होकर उन्होंने भारत लौटने और यहां स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया।
हरसिमरबीर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी में एक स्टार्टअप सीईओ जैसी सभी खूबियां हैं। जब वे किसी समस्या को देखते हैं, तो उसके समाधान पर तुरंत काम शुरू कर देते हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर इसका बड़ा उदाहरण है। वैश्विक संकट के समय भारत ने इस क्षेत्र में कदम रखा और स्टार्टअप इकोसिस्टम में 20-30 अरब डॉलर का निवेश हुआ।
रेज कॉफी के संस्थापक भरत सेठी ने कहा कि वर्ष 2016 में विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्टार्टअप इंडिया मिशन का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने कहा कि उस समय बहुत कम लोग समझ पाए थे कि यह पहल भविष्य में कितना बड़ा बदलाव लाएगी।
भरत सेठी के अनुसार, भारत की मौजूदा स्टार्टअप ग्रोथ की नींव स्टार्टअप इंडिया मिशन पर टिकी है। इस पहल ने न केवल उद्यमियों को आत्मविश्वास दिया, बल्कि देश को परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कराने में भी अहम भूमिका निभाई।
 

शिक्षा मात्र आजीविका नहीं, समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

16-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि कुछ सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवा करेंगे, कुछ उच्च शिक्षा या अनुसंधान करेंगे, जबकि कई अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करेंगे या शिक्षण में अपना भविष्य बनाएंगे। हालांकि प्रत्येक क्षेत्र में अलग-अलग योग्यताओं और कौशलों की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। ये गुण हैं सीखने की निरंतर इच्छा और लगन, विपरित और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ पालन, परिवर्तन को अपनाने का साहस, असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प, टीम वर्क और सहयोग की भावना, समय और संसाधनों का अनुशासित उपयोग और ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए करना है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ये गुण न केवल उन्हें एक अच्छा पेशेवर बनाएंगे, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे। उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि शिक्षा केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन है। उन्होंने कहा कि जिस समाज ने उन्हें शिक्षा प्रदान की है, उसके प्रति वे ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है। पिछले दशक में भारत ने प्रौद्योगिकी विकास और आंत्रप्रेन्योर संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज कृषि से लेकर एआई और रक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, युवाओं के लिए अनेक उद्यमशीलता के अवसर उपलब्ध हैं। हमारे उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान को बढ़ावा देकर, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करके और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को प्रोत्साहित करके इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हाल के वर्षों में पंजाब में मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित युवा हैं। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य, बल्कि समाज के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। एक स्वस्थ समाज के लिए इस समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों को युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अगले दो दशक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत का भविष्य उन युवाओं पर निर्भर करता है, जो वैज्ञानिक सोच रखते हैं, जिम्मेदारी से कार्य करते हैं और निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों से अपने छात्रों में इन मूल्यों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा छात्रों से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि वे जो भी पेशा चुनें, उनका योगदान राष्ट्र को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने में सहायक हो। 
 

दिल्ली-एनसीआर में कम विजिबिलिटी से फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित, इंडिगो ने जारी की एडवाइजरी

15-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड के साथ बुधवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई। इसका सीधा असर फ्लाइट ऑपरेशन पर पड़ा और कई उड़ानों के संचालन में दिक्कतें सामने आईं।
एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। इंडिगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि हिंडन एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी घटने-बढ़ने के कारण उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव किया गया है। मौसम की बदलती परिस्थितियों के चलते परिचालन सामान्य से धीमा हो सकता है।
इंडिगो ने बताया कि उसकी ग्राउंड टीमें सुरक्षा और दृश्यता से जुड़ी सभी जरूरतों के अनुपालन को प्राथमिकता दे रही हैं। एयरलाइन ने यात्रियों से अनुरोध किया कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले वेबसाइट या ऐप पर अपनी उड़ान की मौजूदा स्थिति जरूर जांच लें।
एयरलाइन ने आगे कहा कि जैसे ही मौसम में सुधार होगा, परिचालन धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा और उड़ानें तय योजना के अनुसार प्रस्थान करेंगी। इंडिगो ने यात्रियों के धैर्य और सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए जल्द स्वागत करने की बात कही।
बुधवार सुबह इंडिगो ने चेन्नई और अगरतला में भी कम विजिबिलिटी के कारण उड़ानों में रुकावट की चेतावनी जारी की। एयरलाइन के अनुसार, इन शहरों से आने-जाने वाली फ्लाइट्स में मौसम की वजह से देरी हो सकती है। इंडिगो ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और उम्मीद है कि जल्द ही आसमान साफ होगा।
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी रनवे पर कम विजिबिलिटी के कारण फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित हुआ। दिल्ली एयरपोर्ट ने बुधवार सुबह ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर बताया कि कम दृश्यता के कारण प्रक्रियाएं लागू हैं, हालांकि फिलहाल सभी फ्लाइट ऑपरेशन सामान्य हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी फ्लाइट की जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें। 

दिल्ली-एनसीआर में शीतलहर का कहर, न्यूनतम तापमान 4 डिग्री तक गिरने की आशंका

15-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है और आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। सुबह और देर रात के समय ठंड का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की रिपोर्ट के मुताबिक आज दिन का अधिकतम तापमान लगभग 20 डिग्री और न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया जा सकता है। सुबह के समय शीतलहर की स्थिति बनी रहने की चेतावनी दी गई है। वहीं 15 और 16 जनवरी को भी मौसम साफ रहने के बावजूद मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इन दिनों न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री के बीच रह सकता है।
आईएमडी ने कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा और उसके बाद धीरे-धीरे 2-4°C की बढ़ोतरी होगी। नतीजतन, अगले 2 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी कम (-3.1°C से -5.0°C) रहने की संभावना है और 15 जनवरी, 2026 को सामान्य से कम (-1.6° C से -3.0°C) और उसके बाद सामान्य (-1.5°C से 1.5°C) रहेगा।
अगले 3 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान सामान्य (-1.5°C से 1.5°C) रहने की संभावना है और उसके बाद सामान्य से अधिक (1.6°C से 3.0°C) रहेगा।
मौसम विभाग के अनुसार, तापमान सामान्य रहेगा लेकिन ठंडी हवाओं से कभी-कभी ठंड बढ़ सकती है। ठंड बर्दाश्त करने लायक है, लेकिन कमज़ोर लोगों के लिए हल्की स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। कंपकंपी को नज़रअंदाज़ न करें। यह पहला संकेत है कि शरीर गर्मी खो रहा है। घर के अंदर जाएं।
लंबे समय तक ठंड में रहने से बचें। भारी कपड़े की एक परत के बजाय ढीले-ढाले, हल्के, गर्म ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें। अपने सिर, गर्दन, हाथों और पैरों को अच्छी तरह से ढकें क्योंकि शरीर की ज़्यादातर गर्मी इन्हीं हिस्सों से निकलती है।
 

इमैनुएल बोन से मुलाकात में पीएम मोदी ने दोहराया भारत-फ्रांस रणनीतिक सहयोग

15-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के डिप्लोमैटिक एडवाइजर इमैनुएल बोन से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि इमैनुएल बोन से मिलकर खुशी हुई और भारत-फ्रांस की मजबूत व भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इमैनुएल बोन के साथ हुई मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति मैक्रों के डिप्लोमैटिक एडवाइजर से मिलकर खुशी हुई और यह साझेदारी कई क्षेत्रों में करीबी सहयोग पर आधारित है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि दोनों देशों के बीच सहयोग इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और शिक्षा के क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रहा है, खासकर ऐसे समय में जब भारत और फ्रांस ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष’ मना रहे हैं। इस दौरान प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
पीएम मोदी से मुलाकात से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और फ्रांस के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार इमैनुएल बोन की सह-अध्यक्षता में 38वां भारत-फ्रांस रणनीतिक संवाद आयोजित हुआ। विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता में सुरक्षा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और नागरिक परमाणु ऊर्जा सहित द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई।
दोनों पक्षों ने भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के मार्गदर्शन में संयुक्त विकास और नवाचार के जरिए सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चा में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और साझा चिंताओं से जुड़े प्रमुख क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत और फ्रांस ने उभरती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए घनिष्ठ समन्वय और सहयोग बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया।
रणनीतिक संवाद के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत की आगामी यात्रा की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलने तथा रणनीतिक जुड़ाव के विस्तार की उम्मीद जताई गई। 

पोंगल समारोह में पीएम मोदी बोले, तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल त्योहार के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे।
पोंगल समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पोंगल एक वैश्विक पर्व बन चुका है। दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे उत्साह के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस विशेष पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि तमिल संस्कृति में पोंगल बहुत खुशी का अवसर होता है। यह हमारे अन्नदाता की मेहनत और धरती व सूर्य के प्रति कृतज्ञता का भाव दर्शाता है। साथ ही, यह त्योहार प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है।
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में तमिल संस्कृति से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेना उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा है। उन्होंने तमिलनाडु में एक हजार साल पुराने गंगई कोंडा चोलपुरम मंदिर में प्रार्थना करने, वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम’ के दौरान सांस्कृतिक ऊर्जा को महसूस करने और रामेश्वरम में पंबन ब्रिज के उद्घाटन के दौरान तमिल विरासत की समृद्धि देखने का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है, जो सदियों को जोड़ती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को पोंगल जैसे पर्व और मजबूत करते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल हमें सिखाता है कि प्रकृति के प्रति आभार सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब धरती हमें इतना कुछ देती है, तो इसकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगली पीढ़ी के लिए मिट्टी की सेहत बनाए रखना, पानी बचाना और प्राकृतिक संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी है। यही सतत विकास और समृद्ध भविष्य का आधार है।
 

नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को जल्द ही हरी झंडी दिखाई जाएगी : केंद्र

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) पश्चिम बंगाल और असम से जल्द ही नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पूरे भारत में शुरू की जाएंगी, जिससे आधुनिक और किफायती ट्रेनों का दायरा बढ़ेगा। ये ट्रेनें इन दोनों राज्यों से किफायती और लंबी दूरी की कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे आबादी वाले राज्य शामिल होंगे। ये तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दूर-दराज के राज्यों को भी कवर करेंगी, जिससे देश के कई हिस्सों को जोड़ा जा सकेगा। ये सेवाएं रेल यात्रा की बढ़ती मांग को कम करेंगी और यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव भी प्रदान करेंगी।
रेल मंत्रालय ने मंगलवार को बयान जारी इसकी जानकारी दी है। ये नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से गुज़रने वाले रूटों पर शुरू की जा रही हैं, ये ऐसे क्षेत्र है जहां भारत के प्रवासी मज़दूरों और लंबी दूरी के रेल यात्रियों की एक बड़ी संख्या रहती हैं। अधिक यात्रियों को सुविधा देने के लिए डिज़ाइन की गई ये ट्रेनें, खासकर त्योहारों के मौसम और ज्यादा भीड़भाड़ वाले समय, देश के अलग-अलग हिस्सों में रोज़गार, शिक्षा और पारिवारिक ज़रूरतों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को भरोसेमंद, किफायती और आरामदायक कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।
किफायती, लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे के निरंतर प्रयास के तहत, नौ अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं प्रमुख कॉरिडोर में शुरू की जा रही हैं। रूट इस प्रकार हैं:
1. गुवाहाटी (कामाख्या)– रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस
2. डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस
3. न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस
4. न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस
5. अलीपुरद्वार-एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस
6. अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस
7. कोलकाता (संतरागाछी) – तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस
8. कोलकाता (हावड़ा) – आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस
9. कोलकाता (सियालदह) – बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस
दरअसल, देश में पहली ट्रेन यात्रा के लगभग दो सदियों बाद, भारतीय रेलवे ने उन लाखों लोगों के लिए आवागमन को फिर से परिभाषित किया है, जो दैनिक आवश्यकताओं के लिए ट्रेनों पर निर्भर हैं। लक्जरी यात्रा से जुड़ी सुविधा और आराम को आम यात्रियों तक पहुंचाकर, इसने धीरे-धीरे आधुनिक, यात्री-अनुकूल सेवाओं का विस्तार किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि विश्वसनीयता, सुरक्षा और आराम अब केवल प्रीमियम यात्रियों तक ही सीमित नहीं हैं।
इसी विज़न के तहत, अमृत भारत एक्सप्रेस रोज़मर्रा के यात्रियों के लिए एक वरदान बनकर उभरी है। अमृत काल की एक विशेष पेशकश के रूप में शुरू की गई ये ट्रेनें बिना किसी रुकावट के, नॉन-एसी लंबी दूरी की स्लीपर श्रेणी की यात्रा की सुविधा देती है, जिसका किराया लगभग 500 रुपये प्रति 1000 किलोमीटर है, तथा छोटी और मध्यम दूरी की यात्राओं का किराया उसी हिसाब से कम होता है, जो अक्सर भूगोल और अवसरों की कमी के कारण अलग-थलग पड़े इलाकों को जोड़ती है। किराये की संरचना सरल और पारदर्शी है, जिसमें कोई डायनामिक प्राइसिंग नहीं है, जो इसे आम आदमी के लिए सुलभ बनाता है।
आपको बता दें, दिसंबर 2023 में इसकी शुरुआत के बाद से, 30 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, और सिर्फ़ एक हफ़्ते में जो नौ नई सेवाएं जोड़ी जाएंगी, इसके बाद अब अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाओं का एक नया सेट पूर्वी और उप-हिमालयी क्षेत्रों से दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य भारत के प्रमुख गंतव्य-स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा। 

पूर्व सैनिक दिवस: राष्ट्र के वीरों के साहस और बलिदान को राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री ने किया नमन

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पूर्व सैनिक दिवस पर, मैं हमारे पूर्व सैनिकों की बहादुरी, समर्पण और बलिदान को सलाम करती हूं। उनका अटूट साहस हर भारतीय को प्रेरित करता रहता है। पूर्व सैनिक दिवस और सशस्त्र सेना झंडा दिवस जैसे मौके न सिर्फ हमारे बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के अवसर हैं, बल्कि उन्हें सार्थक समर्थन देने के भी मौके हैं। मुझे विश्वास है कि हमारे पूर्व सैनिक राष्ट्र के प्रति पूरी तरह समर्पित रहेंगे।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को सशस्त्र सेना वेटरन्स डे पर पूर्व सैनिकों, सेवारत कर्मियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं, और सीमाओं की रक्षा करने और भारत की भावना को बनाए रखने के लिए उनके बलिदानों की सराहना की। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संदेश साझा करते हुए कहा कि वह देश के पूर्व सैनिकों और वर्तमान में सेवा दे रहे सभी सैन्यकर्मियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इन वीरों का जीवन साहस, सम्मान और स्वयं से पहले राष्ट्र सेवा के संकल्प को समर्पित है।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि संकल्प और अटूट विश्वास के साथ दिए गए उनके बलिदान हमारी सीमाओं की मजबूत ढाल हैं। ये बलिदान न केवल हमारे गणतंत्र की आत्मा की रक्षा करते हैं, बल्कि भारत की अटूट और शाश्वत भावना के सजीव प्रतीक भी हैं। रक्षा मंत्री ने आगे कहा, “राष्ट्र की अपने सैनिकों के प्रति कृतज्ञता शाश्वत है, और पूर्व सैनिकों, सेवारत कर्मियों और उनके परिवारों की गरिमा, कल्याण और भलाई के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पूर्ण, अटूट और दृढ़ रहेगी।”
सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस स्वर्गीय फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। फील्ड मार्शल करिअप्पा 1953 में इसी दिन सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिवस भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा देने वाले बहादुर सैनिकों के सम्मान और उनके योगदान को पहचानने के लिए समर्पित है। पूरे देश में इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम और आउटरीच गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिनके माध्यम से पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया जाता है और उनके साहस, समर्पण और देशभक्ति को श्रद्धांजलि दी जाती है।







 



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