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पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में उतरेंगे यूपी के मुख्यमंत्री योगी, कूच बिहार और जलपाईगुड़ी में करेंगे रैली

18-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में शनिवार को एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय मौजूदगी देखने को मिलेगी। पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल योगी का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें वे उत्तर से दक्षिण तक फैले तीन जिलों में लगातार कार्यक्रमों के जरिए चुनावी माहौल को धार देंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री कल दोपहर 12 बजे कूच बिहार जिले की माथाभांगा विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा प्रत्याशी निशीथ प्रमाणिक के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। सीमावर्ती इस क्षेत्र में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और मुख्यमंत्री योगी की सभा को इसी दिशा में एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर जलपाईगुड़ी जिले की धूपगुड़ी विधानसभा की ओर रुख करेगा, जहां वे दोपहर 1:20 बजे भाजपा उम्मीदवार नरेश चंद्र राय के पक्ष में जनसभा करेंगे। उत्तर बंगाल की इस बेल्ट में पार्टी ने पिछले चुनावों में जो आधार तैयार किया था, उसे और सुदृढ़ करने पर इस बार खास जोर है।
दिन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री शाम 4:15 बजे बांकुरा पहुंचेंगे, जहां भाजपा प्रत्याशी नीलाद्री शेखर दाना के समर्थन में उनका रोड शो प्रस्तावित है। बांकुरा, जो कि जंगलमहल क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, वहां रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। स्थानीय स्तर पर इसकी व्यापक तैयारियां की गई हैं और बड़ी भीड़ जुटने के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ की सभाओं में हाल के दिनों में उमड़ रही भीड़ ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है। सभास्थलों पर हालात ऐसे बन रहे हैं कि लोगों में मुख्यमंत्री की एक झलक पाने की जबरदस्त उत्सुकता दिखाई दे रही है। कई जगहों पर भीड़ इतनी अधिक हो रही है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही है। सभा शुरू होने से काफी पहले ही लोग पहुंचकर अपनी जगह सुनिश्चित कर रहे हैं और अंत तक डटे रहते हैं। यह नजारा न केवल स्थानीय स्तर पर भाजपा के बढ़ते जनाधार की ओर इशारा करता है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा दे रहा है। 
 

हरिवंश के नेतृत्व में सदन और प्रभावी बनेगा, युवाओं से जुड़ाव सराहनीय: पीएम नरेन्द्र मोदी

18-Apr-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) राज्यसभा में उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह के तीसरी बार निर्वाचित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सदन के उनके प्रति गहरे विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह उनके अनुभव, सहज कार्यशैली और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता का सम्मान भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश के नेतृत्व में सदन की कार्यवाही अधिक प्रभावी हुई है। वे केवल संचालन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने जीवन के अनुभवों से सदन को समृद्ध करते हैं। उनका संतुलित दृष्टिकोण और परिपक्वता सदन के माहौल को गरिमामय बनाती है।
पीएम मोदी ने कहा कि 17 अप्रैल को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जन्म जयंती है और इसी दिन हरिवंश का तीसरा कार्यकाल शुरू होना एक विशेष संयोग है। उन्होंने चंद्रशेखर के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया है।
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हरिवंश का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कार्यों तक सीमित नहीं रहा। पत्रकारिता में भी उन्होंने उच्च मानदंड स्थापित किए। उनकी लेखनी में दृढ़ता और व्यवहार में सौम्यता झलकती है, जो उन्हें एक विशिष्ट व्यक्तित्व बनाती है।
पीएम मोदी ने कहा कि हरिवंश ने युवाओं के बीच व्यापक संवाद किया है। 2018 के बाद से उन्होंने देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 350 से अधिक कार्यक्रम किए, जो राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। वे युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और विकसित भारत के सपने को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश ने MPLAD फंड का उपयोग शिक्षा, शोध और नवाचार के लिए एक मिसाल के रूप में किया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना में भारतीय भाषाओं के संरक्षण और भूकंप इंजीनियरिंग अध्ययन केंद्र स्थापित करने में योगदान दिया। साथ ही, आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी में नदी अध्ययन केंद्र, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान में इनोवेशन सेंटर और मगध विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र की स्थापना में सहयोग किया।
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हरिवंश का अपने गांव से गहरा जुड़ाव आज भी बना हुआ है। वे अपने गांव के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं, जो उनके व्यक्तित्व की खास पहचान है।
पीएम मोदी ने बताया कि नई संसद भवन के निर्माण के दौरान हरिवंश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सदन की पहचान, कला और विभिन्न द्वारों के नामकरण जैसे विषयों पर उन्होंने गहराई से काम किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश ने केवल संसद ही नहीं, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के संचालन में भी मार्गदर्शन दिया। कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन जैसे मंचों पर भी उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि हरिवंश के नए कार्यकाल में सदन की गरिमा और प्रभावशीलता और बढ़ेगी। उन्होंने सभी सदस्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से संसद देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती, पीएम मोदी ने बताया-साहस और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक

17-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)  पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 100वीं जयंती के अवसर पर देशभर के नेताओं ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें एक सच्चा जननेता बताया, जो अपने साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा के लिए जाने जाते थे। 
पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। इस वर्ष उनकी 100वीं जयंती वर्ष की शुरुआत हो रही है और यह एक समृद्ध एवं न्यायपूर्ण भारत के उनके स्वप्न को साकार करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।”
उन्होंने कहा, “चंद्रशेखर जी को एक ऐसे जननेता के रूप में याद किया जाता है, जो साहस, दृढ़ विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी निष्ठा से परिपूर्ण थे। भारत की माटी से गहराई से जुड़े हुए और आम नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील, उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सादगी और स्पष्टता का संचार किया।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे वे अवसर भली-भांति याद हैं, जब मुझे उनसे मिलने और हमारे राष्ट्र के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मैं भारत के युवाओं से आह्वान करता हूं कि वे भारत की प्रगति की दिशा में उनके विचारों और प्रयासों के बारे में अधिक से अधिक पढ़ें।”
इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी उन्हें याद करते हुए विनम्र अभिवादन किया। उन्होंने अपने संदेश में चंद्रशेखर के योगदान को नमन किया। वहीं, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें एक लोकप्रिय राजनेता और प्रखर वक्ता बताया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “लोकप्रिय राजनेता, प्रखर वक्ता, पूर्व प्रधानमंत्री, श्रद्धेय चंद्रशेखर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों एवं वंचितों के समग्र उत्थान हेतु समर्पित आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा, “जनसंघर्षों से निकले प्रखर समाजवादी नेता, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। स्पष्टवादी व्यक्तित्व, सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाली आपकी राजनीति भारतीय लोकतंत्र के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।”
 

दिल्ली में आज से पहले चरण के लिए शुरू होगी जनगणना

16-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)  दिल्ली में जनगणना का पहला चरण आज गुरुवार से शुरू होने जा रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह का काम शुरू होगा जो आने वाले दशक में शासन और नीतिगत निर्णयों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अधिकारी भारत के जनसंख्या डेटाबेस की नींव रखने की प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय राजधानी में घर-घर जाकर व्यापक सर्वेक्षण करने की तैयारी कर रहे हैं।
पहले चरण को हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के नाम से जाना जाता है, जिसमें घरों, इमारतों और जीवन स्थितियों के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जनसंख्या गणना चरण के विपरीत, इस चरण का उद्देश्य व्यक्तियों की गणना करने के बजाय शहर में प्रत्येक संरचना और घर का मानचित्रण करना है। इस चरण के दौरान, निवासियों से बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, घर के स्वामित्व की स्थिति और घर के मुखिया के बारे में जानकारी, जिसमें नाम और लिंग शामिल हैं, जैसे पहलुओं को कवर करने वाले 33 प्रश्नों के एक सेट का उत्तर देने के लिए कहा जाएगा।
अधिकारियों ने कहा कि यह अभ्यास पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों से संचालित किया जाएगा, जिसमें गणनाकर्ता अपने उपकरणों पर एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके प्रतिक्रियाएं दर्ज करेंगे। इससे डेटा संग्रह में अधिक दक्षता और सटीकता सुनिश्चित होगी।
पहला चरण दो अलग-अलग 30 दिवसीय चक्रों में चलाया जाएगा। यह अभ्यास नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली छावनी के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगा, इसके बाद आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में 16 मई से 15 जून तक इसे लागू किया जाएगा।
जनगणना कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें पूरे शहर में व्यवस्थित रूप से सर्वेक्षण करने के लिए विशिष्ट ब्लॉक आवंटित किए गए हैं। जनगणना का दूसरा चरण, जिसमें व्यक्तियों की गणना शामिल होगी, राष्ट्रव्यापी जनगणना की समय-सीमा के अनुसार बाद में आयोजित किया जाएगा।

शहर को कई गणना ब्लॉकों में विभाजित किया गया है
यह सर्वेक्षण दिल्ली के सभी जिलों को कवर करेगा, जिनमें शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया है कि इस अभ्यास में घनी आबादी वाली कॉलोनियों, अनधिकृत बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ी वाले क्षेत्रों को भी शामिल किया जाए, ताकि कोई भी इलाका छूट न जाए। प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए, शहर को कई गणना ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जिसमें उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों और बार-बार प्रवास वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि डेटा संग्रह में अंतराल को रोका जा सके। 

संसद में आज पेश होंगे महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयक

16-Apr-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) केंद्र सरकार आज गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में देश में अहम बदलाव लाने वाले विधेयक पेश करेगी। यह विधेयक महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से प्रभावी रूप से लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित हैं। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव है। 
इसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण (33 प्रतिशत ) को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को सक्रिय करना है। सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया है। सरकार का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को अतिशीघ्र अमली जामा पहनाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्राविधान किया गया है। संभव है कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध न करे। 
लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी के लिए परिसीमन के प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव होना तय माना जा रहा है। दक्षिण के राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण नए परिसीमन में उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं। सरकार ने इस आशंका को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सीटों की बढ़ोतरी हर राज्य के लिए एक समान 50 प्रतिशत होगी। लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा 850 तय की गई है और किसी भी राज्य की सीटों में कटौती का सवाल ही नहीं उठता।
सरकार ने कहा कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए स्पष्ट और नया परिसीमन समय की सबसे बड़ी मांग है। परिसीमन प्रक्रिया आखिरी प्रकाशित जनगणना (2011) के आधार पर पूरी की जाएगी। राज्यों के लिए सीटों की संख्या तय नहीं है। हर राज्य के लिए परिसीमन आयोग बनेगा। आयोग राज्य के सभी दलों से चर्चा के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा। 
आज लोकसभा में तीनों विधेयकों पर चर्चा होगी। इसका समय 18 घंटे तय है। 17 अप्रैल को मतदान के साथ लोकसभा में यह प्रक्रिया पूरी होगी। 18 अप्रैल को लोकसभा से पास होने के बाद इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। 10 घंटे की चर्चा के बाद मतदान होगा। उल्लेखनीय है मौजूदा लोकसभा में 543 सीटें हैं।

पटरियों पर दौड़ती प्रगति, समय, समाज और संस्कृतियों को जोड़ने वाली जीवनरेखा

16-Apr-2026
नई दिल्ली।  शोर संदेश मानव सभ्यता के इतिहास में कुछ आविष्कार ऐसे होते हैं, जो केवल तकनीकी उपलब्धि बनकर नहीं रहते, बल्कि समय की दिशा और समाज की गति दोनों को ही परिवर्तित कर देते हैं। रेल उसी श्रेणी का एक अद्भुत, जीवंत और युगांतरकारी आविष्कार है। लोहे की पटरियों पर दौड़ती यह सशक्त धारा मानो गति का मूर्त रूप है, जिसने दूरियों को चुनौती दी, समय को अनुशासन का पाठ पढ़ाया और विविधताओं से भरे मानव समाज को एक अदृश्य सूत्र में पिरो दिया। 16 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व रेल दिवस इस महान प्रणाली के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और स्मरण का एक पावन, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण अवसर है।
भारत जैसे विशाल, बहुरंगी और बहुभाषी देश में रेल केवल एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि जनजीवन की धड़कन, राष्ट्र की नाड़ी और संवेदनाओं का प्रवाह है। यह खेतों की हरियाली से महानगरों की चहल-पहल तक, हिमालय की ऊंचाइयों से सागर की गहराइयों तक, और भाषाओं की विविधता से संस्कृतियों की समृद्धि तक एक सजीव सेतु बनकर निरंतर प्रवाहित होती है। भारतीय रेल केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जाती, बल्कि यह उनके सपनों, उम्मीदों और भावनाओं को भी अपने साथ संजोए आगे बढ़ती है मानो हर डिब्बा एक कहानी है, हर यात्रा एक अनुभव।आज भारतीय रेल विश्व के सबसे विशाल रेल नेटवर्कों में से एक होकर केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय की आधारशिला बन चुकी है। यह पटरियों पर दौड़ती मशीनों का समूह मात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का विस्तार है। एक ऐसा सशक्त प्रतीक, जो हर दिन, हर पल भारत को जोड़ता है, संवारता है और प्रगति की नई दिशाओं की ओर अग्रसर करता है।
रेल यात्रा एक साधारण यात्रा नहीं, बल्कि जीवन का चलता-फिरता दर्पण है। प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन जैसे ही गति पकड़ती है, यात्रियों के मन में भी नई उम्मीदों की लहर दौड़ पड़ती है। खिड़की के बाहर बदलते दृश्य हरी-भरी फसलें, बहती नदियां, दूर तक फैले पहाड़ मानो प्रकृति की एक निरंतर चलती हुई चित्रकला हो। गांधी जी ने ठीक ही कहा था कि रेलवे ने भारत को एक राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई है। एक रेल डिब्बे में बैठा तमिल भाषी, बांग्‍ला भाषी और पंजाबी भाषी जब अपनी रोटी साझा करते हैं, तब “विविधता में एकता” का जीवंत रूप प्रकट होता है। यहां एक ही सीट पर अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और जीवन के अनुभव मिलते हैं। सहयात्रियों के साथ होने वाली छोटी-छोटी बातचीत, साझा भोजन और अनायास बने रिश्ते इस यात्रा को और भी यादगार बना देते हैं। यह यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मीयता और अनुभवों का विस्तार है।
18वीं और 19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति ने परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसी दौर में भाप इंजन का विकास हुआ। 1804 में रिचर्ड ट्रेविथिक ने पहला भाप चालित इंजन बनाया। 1825 में जॉर्ज स्टीफेंसन ने पहली सार्वजनिक रेलवे लाइन (स्टॉकटन-डार्लिंगटन) शुरू की। 1830 में लिवरपूल से मैनचेस्टर के बीच पहली यात्री रेलवे सेवा शुरू हुई। यह समय रेलवे के वास्तविक जन्म का काल माना जाता है।
भाप इंजन से बुलेट ट्रेन तक रेलवे का उद्भव औद्योगिक क्रांति के साथ हुआ, जब भाप इंजन ने परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। भारत में पहली रेलगाड़ी 1853 में मुंबई से ठाणे के बीच चली, जिसने एक नए युग की शुरुआत की। औपनिवेशिक काल में रेलवे का विस्तार मुख्यतः ब्रिटिश हितों के लिए हुआ। कच्चे माल की ढुलाई और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए। लेकिन भारत की आज़ादी के बाद रेलवे ने जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का स्वरूप धारण कर लिया। आज भारत में रेलवे का आधुनिकीकरण तीव्र गति से हो रहा है। हाई-स्पीड रेल और बुलेट ट्रेन परियोजनाएं,जैसे मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर देश को तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
भारत में रेल यात्रा आम जनता के लिए सबसे किफायती और सुलभ साधन है। यह गरीब, मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग ,सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है। लंबी दूरी की यात्रा को सस्ता और सुविधाजनक बनाकर रेलवे ने सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दिया है। अर्थव्यवस्था की रीढ़-रेलवे देश की माल ढुलाई का प्रमुख साधन है। कोयला, लौह अयस्क, खाद्यान्न, उर्वरक, सीमेंट और पेट्रोलियम पदार्थों की बड़े पैमाने पर ढुलाई रेलवे के माध्यम से होती है। इससे उद्योगों को निरंतर गति मिलती है और उत्पादन चक्र बाधित नहीं होता।
समय के साथ रेलवे ने सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं। आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रैक मॉनिटरिंग और डिजिटल निगरानी के माध्यम से दुर्घटनाओं में कमी आई है। सुरक्षा तकनीक: ‘कवच’ जैसी स्वदेशी सुरक्षा प्रणालियों का विकास रेल दुर्घटनाओं को शून्य पर लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। वंदे भारत एक्सप्रेस: यह ‘मेक इन इंडिया’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो गति और सुविधा का नया मानक स्थापित कर रही है। यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
ब्रिटिश शासन में रेलवे का उद्देश्य आर्थिक शोषण और प्रशासनिक नियंत्रण था। रेल नेटवर्क का विस्तार बंदरगाहों और व्यापारिक केंद्रों तक सीमित था। स्वतंत्रता के बाद रेलवे का राष्ट्रीयकरण हुआ और इसे जनहित के लिए विकसित किया गया। नए रेल मार्गों का निर्माण, विद्युतीकरण, डबल लाइनिंग और आधुनिक तकनीकों का समावेश इन सबने रेलवे को नई ऊचाइयों तक पहुंचाया। रीबी उन्मूलन में रेलवे की भूमिका-रेलवे ने आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। यह लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में। छोटे व्यापारी, स्टॉल संचालक, कुली और सेवा प्रदाता रेलवे से जुड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़कर रेलवे ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को सुलभ बनाया है, जिससे गरीबी उन्मूलन में सहायता मिली है। भारत के विकास में रेलवे का योगदान- रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की धुरी है। यह कृषि, उद्योग और व्यापार को जोड़ने वाला माध्यम है। बिना रेलवे के संसाधनों का वितरण और आर्थिक संतुलन संभव नहीं होता।
रेल भारत की “एकता में अनेकता” का जीवंत प्रतीक है। एक ही डिब्बे में विभिन्न राज्यों के लोग साथ यात्रा करते हैं, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है और आपसी समझ बढ़ती है।उत्तर में हिमालय की चोटियों से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी के तटों तक, और उत्तर-पूर्व के दुर्गम पहाड़ों से लेकर पश्चिम के रेगिस्तान तक, रेलवे ने भारत के हर कोने को जोड़ा है। पर्यटन में रेलवे की भूमिका-रेलवे ने पर्यटन को नई दिशा दी है। धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों तक आसान पहुंच ने पर्यटन उद्योग को बढ़ावा दिया है। विशेष ट्रेनें और लक्ज़री सेवाएं भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं। भारत के एकीकरण में रेलवे की भूमिका-रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों को एक सूत्र में बांधा है। यह भौगोलिक दूरी को कम करने के साथ-साथ भावनात्मक एकता को भी सुदृढ़ करता है। भौगोलिक समावेशन में योगदान-रेलवे ने दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा है। पहाड़ी, रेगिस्तानी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में रेल संपर्क ने विकास के नए द्वार खोले हैं। हाई-स्पीड रेल और बुलेट ट्रेन भविष्य की ओर बढ़ते कदमों के उदाहरण हैं। भारत में हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं आधुनिक तकनीकी विकास का प्रतीक हैं। बुलेट ट्रेन परियोजना देश की परिवहन प्रणाली को नई दिशा देगी जहां गति, सुरक्षा और सुविधा का अद्वितीय संगम होगा।
 

पीएम मोदी ने पोइला बोइशाख, रोंगाली बिहू और रोंगाली बिहू के पावन अवसर पर शुभकामनाएं दीं

15-Apr-2026
नई दिल्लीशोर संदेश )। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को पोइला बोइशाख, रोंगाली बिहू और विशु के पावन अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। 
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर बंगाली समुदाय के लोगों से कहा कि मेरी प्रार्थना है कि आने वाला वर्ष आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति लेकर आए। सुख और भाईचारे की भावना सदा बनी रहे। आपको अच्छे स्वास्थ्य और ढेर सारी खुशियों की शुभकामनाएं। उन्होंने आगे कहा कि यह पश्चिम बंगाल की उस शाश्वत समृद्ध संस्कृति का जश्न मनाने का भी अवसर है जिसने भारत की सभ्यतागत भावना को आकार दिया है।
पोइला बोइशाख, जिसे बंगला नोबो बोरशो के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से बंगाली कैलेंडर की शुरुआत होती है। बंगाली समुदाय के लोग इस दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं। पोइला बैसाख का अर्थ है बैसाख का पहला दिन, बंगाली चंद्र-सौर कैलेंडर का प्रारंभिक महीना जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष 14 या 15 अप्रैल को पड़ता है। 
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अलग-अलग पोस्टों के माध्यम से इन त्योहारों की शुभकामनाएं दी हैं। वहीं असम के लोगों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आप सभी को रोंगाली बिहू की शुभकामनाएं!” 
उन्होंने कहा कि यह जीवंत त्योहार नई शुरुआत, समृद्धि और एकजुटता की भावना का उत्सव मनाता है। यह त्योहार असमिया संस्कृति को खूबसूरती से प्रदर्शित करता है, जो पूरे विश्व में लोकप्रियता हासिल कर रही है। मैं आपके लिए सफलता, खुशी और उत्तम स्वास्थ्य से भरे वर्ष की प्रार्थना करता हूं।
वहीं एक अन्य एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने केरल के लोगों को विशु कि शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप सभी को विशु की हार्दिक शुभकामनाएं ! उन्होंने कहा कि यह त्योहार आशा और खुशी का प्रतीक है। यह सभी के प्रति सकारात्मकता और कृतज्ञता पर बल देता है। आने वाला वर्ष आनंद, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से परिपूर्ण हो। यह वर्ष नए अवसर, सफलता और चारों ओर शांति लेकर आए।


 

सम्राट चौधरी ने बिहार के 24 वे मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ

15-Apr-2026
नई दिल्लीशोर संदेश )। बिहार में मंगलवार को भाजपा के मुख्यमंत्री ने शपथ ली। सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाल ली है। राज्यपाल सैयद अताउल हसनैन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। बिहार में मुख्यमंत्री के पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी के नाम पर आधिकारिक मुहर लगी थी।
बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (राकेश कुमार) का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड स्थित लखनपुर गांव में हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, वहीं उनकी माता पार्वती देवी भी बिहार विधानसभा की सदस्य रही हैं। पिछड़ा वर्ग (कुर्मी समुदाय) से संबंध रखने वाले सम्राट चौधरी को राज्य की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ रखने वाला एक कद्दावर नेता माना जाता है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने 1990 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से राजनीति की शुरुआत की। 1999 में कम उम्र में राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने थे। वे बिहार के सबसे युवा मंत्रियों में से एक थे। वर्ष 2000 और 2010 में सम्राट परबत्ता से विधायक चुने गए। कुछ दिन जेदयू में रहने के बाद वर्ष 2017 में वे भाजपा में शामिल हो गए।
वर्ष 2023 में वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। जनवरी 2024 में नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए गए और वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास, पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभाला। फिर 2025 के विधानसभा चुनाव में तारापुर से जीत दर्ज की। सिर्फ आठ से नौ साल में भाजपा में उनकी तेज तरक्की को पार्टी की ओबीसी आउटरीच रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। 


 

ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर का भारत का आधिकारिक दौरा, दोनों देशों की पार्टनरशिप’ को और बढ़ावा मिलेगा

15-Apr-2026
नई दिल्लीशोर संदेश )। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर बुधवार को अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे। क्रिश्चियन स्टॉकर इस दौरे पर व्यापार, निवेश और नई तकनीक जैसे खास क्षेत्रों में आपसी संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे। 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर का भारत के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर गर्मजोशी से स्वागत है। एयरपोर्ट पर युवा मामले और खेल मंत्री रक्षा खडसे ने उनका स्वागत किया। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच अच्छे और दोस्ताना संबंध हैं। चांसलर स्टॉकर के दौरे से ‘बेहतर भारत-ऑस्ट्रिया पार्टनरशिप’ को और बढ़ावा मिलेगा।”
स्टॉकर पहली बार चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं और 2025 में ऑफिस संभालने के बाद एशिया का उनका पहला आधिकारिक दौरा है। इस दौरे के दौरान, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापार, निवेश, ग्रीन टेक्नोलॉजी और जरूरी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर फोकस करते हुए कई तरह की बातचीत करेंगे।
स्टॉकर के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है, जिसमें वरिष्ठ मंत्री, सरकारी अधिकारी और बिजनेस लीडर शामिल हैं, जो इस दौरे के मजबूत इकोनॉमिक फोकस को दिखाता है। दोनों पक्षों से एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इनोवेशन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने के मौके तलाशने की उम्मीद है। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक जुड़ाव के बीच हो रहा है। चर्चा में आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ मल्टीलेटरल फोरम में सहयोग पर भी बात होने की उम्मीद है।
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। यह दौरा 2024 में पीएम मोदी के ऑस्ट्रिया दौरे से बने मोमेंटम को आगे बढ़ाएगा और उम्मीद है कि इससे भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी और मजबूत होगी, जिससे रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
इससे पहले 2025 में, 12 दिसंबर को वियना में हुए भारत-ऑस्ट्रिया फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन के आठवें राउंड में, विदेश मंत्रालय में सचिव (वेस्ट) सिबी जॉर्ज और ऑस्ट्रिया के फॉरेन अफेयर्स के सेक्रेटरी जनरल निकोलस मार्शिक ने आपसी संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की थी। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने भारत-ईयू संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की और आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

हिमाचल दिवस: प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने दी शुभकामनाएं

15-Apr-2026
नई दिल्लीशोर संदेश )। देवभूमि हिमाचल प्रदेश आज स्थापना दिवस मना रहा है। 15 अप्रैल 1948 को 30 छोटी-बड़ी पहाड़ी रियासतों को मिलाकर एक मुख्य आयुक्त प्रांत के रूप में हिमाचल का गठन हुआ था। 25 जनवरी 1971 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ, लेकिन स्थापना का मुख्य दिवस 15 अप्रैल को मनाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है, “समस्त हिमाचलवासियों को हिमाचल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन देवभूमि अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर और यहां के लोगों की कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण विशेष पहचान रखती है। इस पुनीत अवसर पर मैं प्रदेश के सभी परिवारजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं ।”
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा है, “हिमाचल दिवस के अवसर पर हम अपने किसानों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त करते हैं, जिनके परिश्रम से हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ और जीवंत बनी हुई है। हमारी सरकार ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार अदरक को एमएसपी के दायरे में शामिल किया है, जिसके लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य निर्धारित किया गया है। साथ ही, किसानों के हितों को सशक्त और व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए पहली बार किसान आयोग का गठन किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जाए तथा उनके अधिकारों को और अधिक मजबूत किया जाए।”
हिमाचल प्रदेश सरकार की सरकारी वेबसाइट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश 15 अप्रैल, 1948 को भारतीय संघ के एक भाग-राज्य (सी) के रूप में अस्तित्व में आया, जिसमें बघत, भज्जी, बघल, बीजा, बलसेन, बुशहर, चंबा, दरबोटी, देलोठ-धाड़ी, धामी, घुंड, जुब्बल, खानेती, क्यारहोटी, कुमारसैन, कुनिहार, कुठार, मंडी, मधान, महलो, मंगल, कोट (रतेश), क्योंथल, राविनीगढ़, संगरी, सिरमौर, सुहेत, थारोच, थियोग आदि 30 छोटे-बड़े पहाड़ी राज्यों को एकीकृत किया गया था। उस समय ये सभी क्षेत्र चार जिलों का हिस्सा थे।
1954 में पड़ोसी राज्य बिलासपुर को हिमाचल प्रदेश में शामिल किया गया। हिमाचल प्रदेश 1956 तक भारतीय संघ का ‘सी’ राज्य बना रहा था। 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग ने राज्यों को भाग ए, बी, सी आदि श्रेणियों में वर्गीकृत करने की प्रथा को समाप्त करने की सिफारिश की। 25 जनवरी 1971 को राज्य का दर्जा मिलने तक हिमाचल प्रदेश का केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा बना रहा। 1960 में महासू जिले की सीमावर्ती चीनी तहसील को एक अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में गठित किया गया और किन्नौर जिले का गठन हुआ, जिससे जिलों की कुल संख्या में वृद्धि हुई।
1 नवंबर, 1966 को तत्कालीन पंजाब राज्य का पुनर्गठन किया गया, जिसमें हरियाणा को एक अलग राज्य के रूप में गठित किया गया और कुल्लू, कांगड़ा, शिमला और होशियारपुर जिले के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों तथा गुरदासपुर जिले के डलहौजी का हिमाचल प्रदेश में विलय कर दिया गया तथा चार नए जिले कुल्लू, लाहौल-स्पीति, कांगड़ा और शिमला बनाए गए। 
 



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