ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को नमन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम नरेंद्र मोदी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

13-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानियों को देश नमन कर रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीदों को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना का एक शक्तिशाली स्मरण है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। इस घटना ने देशवासियों में स्वतंत्रता के प्रति नई चेतना और दृढ़ संकल्प का संचार किया था। राष्ट्र उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा। मुझे विश्वास है कि उनकी देशभक्ति की भावना सभी को राष्ट्र सेवा के पथ पर समर्पण और निष्ठा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “आज के दिन हम जलियांवाला बाग के वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना का एक सशक्त प्रतीक है। उन्होंने जिस साहस और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया, वह आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।”
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “जलियांवाला बाग नरसंहार के सभी अमर बलिदानियों को मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। विदेशी हुकूमत की बर्बरता के खिलाफ उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।”
इसके साथ ही, पीएम मोदी ने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ भी शेयर किया, जिसमें लिखा, “इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्णः॥” इस ‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “हे कर्मशील मनुष्यों, अपने समाज में उन कल्याणकारी शक्तियों का संवर्धन करो, जो राष्ट्र को समृद्ध, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाती हैं। साथ ही, उन विनाशकारी शक्तियों का दृढ़तापूर्वक प्रतिरोध करो, जो समाज में विभाजन, अन्याय और असंतोष उत्पन्न करती हैं।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जलियांवाला बाग में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर बलिदानियों को नमन किया। उन्होंने लिखा, “आज ही के दिन पंजाब के जलियांवाला बाग में क्रूर अंग्रेजी हुकूमत का अमानवीय चेहरा बेनकाब हुआ था, जब शांतिपूर्ण सभा कर रहे निहत्थे देशवासियों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं। इस जघन्य कृत्य ने पूरे देश को झकझोर दिया और भगत सिंह, ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों के मन में स्वतंत्रता की ज्वाला को और प्रज्वलित किया। यह वह ऐतिहासिक मोड़ था, जहां से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांति की भावना को और अधिक बल मिला।
 

तमिलनाडु चुनाव: भीषण गर्मी में बदला प्रचार का तरीका, सतर्क हुए नेता-कार्यकर्ता

12-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । तमिलनाडु के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। विधानसभा चुनाव प्रचार पर मौसम का उतना ही प्रभाव पड़ रहा है, जितना कि राजनीतिक रणनीति का। उम्मीदवार और पार्टी कार्यकर्ता भीषण गर्मी से निपटने के लिए अपनी दिनचर्या में बदलाव कर रहे हैं। साथ ही मतदाताओं तक पहुंचने के प्रयासों को भी जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।
तिरुचि और मदुरै जैसे जिलों में प्रचार अब दो भागों में हो रहा है। गतिविधियां सुबह जल्दी शुरू होती हैं, दोपहर की भीषण गर्मी के दौरान रुकती हैं और सूर्यास्त के बाद ही फिर से शुरू होती हैं। पहले रैलियों और घर-घर जाकर प्रचार करने का जो सिलसिला चलता था, अब वह सावधानीपूर्वक निर्धारित कार्यक्रमों में बदल गया है, जिनका उद्देश्य गर्मी से बचाव करना है।
राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। समर्थकों के बीच टोपी, स्कार्फ और पीने का पानी व्यापक रूप से वितरित किया जा रहा है जबकि नेता सार्वजनिक संवादों के दौरान लोगों से बार-बार हाइड्रेटेड रहने का आग्रह कर रहे हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों और बाजारों में प्रचार जारी है लेकिन गति और अवधि में स्पष्ट बदलाव किए गए हैं।
अत्यधिक गर्मी का असर अभी से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। तंजावुर में हाल ही में एआईएडीएमके उम्मीदवार एलामाथी सुब्रमणियन प्रचार के दौरान बेहोश हो गईं, जिससे उच्च तापमान में लंबे समय तक रहने से होने वाले शारीरिक तनाव का पता चलता है। इस घटना ने सभी दलों के उम्मीदवारों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया है। वरिष्ठ नेता विशेषकर अधिक उम्र वाले सबसे अधिक सतर्क हैं।
डीएमके के एक 75 वर्षीय वरिष्ठ नेता ने बताया कि उन्होंने अपने दैनिक कार्यक्रम में काफी बदलाव किया है। सुबह 7 बजे प्रचार शुरू करते हैं और दोपहर होने से पहले ही समाप्त करते हैं। वे चाय और कॉफी जैसे गर्म पेय पदार्थों से परहेज करते हैं और हाइड्रेटेड रहने के लिए जूस का सेवन करते हैं। चुनाव व्यय नियमों के अनुसार बड़ी सभाओं में जलपान की व्यवस्था सीमित है, इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं को अपना पानी और आवश्यक वस्तुएं साथ रखने की सलाह दी गई है। दोबारा दोपहर 3:30 बजे के बाद ही चुनाव प्रचार फिर से शुरू होता है, जब तापमान थोड़ा कम होने लगता है।
गर्मी की लहर से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, चुनाव प्रचार की तीव्रता में कोई कमी नहीं आई है। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आक्रामक रूप से प्रचार कर रहे हैं। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, वोटों की लड़ाई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और भीषण गर्मी के खिलाफ धीरज की परीक्षा बनती जा रही है।




 

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर सर्वसम्मति की अपील, पीएम मोदी ने दलों के नेताओं को पत्र लिखा

12-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर लोकसभा और राज्यसभा में सभी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर उनसे समर्थन का आग्रह किया है। पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी को एक स्वर में इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट होना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा सांसदों को इस विषय पर अपने विचार संसद में रखने चाहिए। यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लिखे अपने पत्र में कहा, “16 अप्रैल से देश की संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है। ये विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने का अवसर है। ये सबको साथ लेकर चलने की हम सभी की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है।”
उन्होंने कहा, “कोई भी समाज तभी आगे बढ़ता है, जब वहां महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। देश ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसकी सिद्धि के लिए आवश्यक है कि इस यात्रा में नारी शक्ति अपनी पूरी क्षमता और पूरी भागीदारी के साथ जुड़े। हम सभी साक्षी हैं कि सार्वजनिक जीवन में हमारी बहनों-बेटियों की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। भारत की बेटियां स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स और सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप्स तक, हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। अपनी बड़ी सोच और पूरे जज्बे के साथ वे कड़ी मेहनत करती हैं और खुद को साबित कर रही हैं।”
पीएम मोदी ने कहा कि देश की संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण की चर्चा दशकों से होती आ रही है। उन्होंने पत्र में लिखा, “साल 2023 में संसद में सभी दलों के सांसदों ने एक साथ आकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था। यह हमारी एकजुटता को दिखाने वाला एक अविस्मरणीय अवसर था। ऐसा करके हमने देश की नारी शक्ति के प्रति अपने वचन को पूरा किया था। उस समय पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे भारत के लोकतंत्र में सामूहिक इच्छाशक्ति से एक बड़ा फैसला लिया गया।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति हमारी आबादी के करीब आधे हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। इस कदम के द्वारा राजनीति में उनकी ज्यादा से ज्यादा भागीदारी पर हम सबने अपनी सहमति जताई थी। मैं उस दिन को भारत की संसदीय यात्रा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरक अवसर के रूप में देखता हूं।
उन्होंने आगे कहा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा में संसद के सभी सदस्यों का योगदान रहा था। और जब ये चर्चा चल रही थी, तब उस समय इसे लागू करने के समय पर भी विचार हुआ था। तब सबने सहमति से ये विचार रखा था कि नए कानून के प्रावधान जल्द से जल्द लागू हो जाने चाहिए। सभी दलों के नेताओं ने मुखर होकर इस विचार का समर्थन किया था। पिछले कुछ समय में हमने इस विषय पर जानकारों से विमर्श किया। संविधान की बारीकियों को समझने वाले विशेषज्ञों से हमें सुझाव और मार्गदर्शन मिले। हमने राजनीतिक दलों से भी इस बारे में संवाद किया है।”
राजनीतिक दलों के नेताओं को लिखे अपने पत्र में पीएम मोदी ने यह भी लिखा कि गहन मंथन के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अब समय आ गया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम अपनी पूर्ण भावना के साथ देश में लागू हो। यह उचित होगा कि 2029 का लोकसभा चुनाव और सभी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण को पूरी तरह लागू करने के बाद हों। इससे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और जन-विश्वास गहरा होगा। इसके साथ ही शासन व्यवस्था में सबकी भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा, “हम सभी एक स्वर में इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट हों। ज्यादा से ज्यादा सांसद इस विषय पर अपने विचार संसद में रखें। यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है। यह नारी शक्ति और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी भी है। हम सभी दल काफी समय से चाहते रहे हैं कि राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़े। इस आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने का यही सही समय है।”
पीएम मोदी ने कहा कि यह देश की नारी शक्ति की सिद्धि का विषय है, 140 करोड़ देशवासियों की सिद्धि का विषय है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे और संसद में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में लिखा, “नारी शक्ति बंदन अधिनियम को लागू करने वाली संसद के सदस्य हमेशा इस बात पर गौरव करेंगे कि उन्होंने इस महान कार्य में अपना योगदान दिया है। इसलिए इस अवसर को हमें छोड़ना नहीं है। नारी शक्ति बंदन अधिनियम में संशोधन को आपका समर्थन देश की माताओं-बहनों और बेटियों के प्रति असीम दायित्वों का निर्वहन होगा।” उन्होंने अपील करते हुए कहा, “आइए, हम अपने लोकतंत्र की महान परंपराओं को और जीवंत बनाएं और इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए कदम उठाएं।
 

गगनयान मिशन 2027 में होगा लॉन्च, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो को आईएडीटी-02 के सफल समापन पर दी बधाई

10-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) को भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के दूसरे एकीकृत वायु अपवाह परीक्षण (आईएडीटी-02) के सफल समापन पर बधाई दी। गगनयान मिशन 2027 में लॉन्च होने वाला है। उन्होंने इस उपलब्धि को महत्वाकांक्षी मिशन की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिंह ने लिखा, “भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान, गगनयान के लिए दूसरे एकीकृत वायु निकासी परीक्षण के सफल समापन के लिए इसरो को बधाई, जो अगले साल निर्धारित है।” उन्होंने आगे कहा, “सतीश धवन अंतरिक्ष स्टेशन, श्रीहरिकोटा में दूसरा एकीकृत वायु निक्षेप परीक्षण (आईएडीटी-02) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह गगनयान मिशन की तैयारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन 2027 में श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। तकनीकी जटिलता के कारण मिशन में कई बार देरी हुई है, लेकिन भारत स्वदेशी रूप से इसकी क्षमता विकसित कर रहा है। गौरतलब है कि अंतरिक्ष मिशन से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां गोपनीय रखी जाती हैं और कोई भी देश इन्हें साझा नहीं करता है। सरकार ने गगनयान कार्यक्रम के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में है और पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में होने की उम्मीद है।
इससे पहले, 8 अप्रैल को, इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा था कि मानवरहित गगनयान मिशन की सभी तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं। स्मार्ट स्पेसक्राफ्ट मिशन ऑपरेशंस पर दूसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा, “हम पहले मानवरहित गगनयान मिशन से ठीक पहले मिल रहे हैं। यह कोई साधारण मिशन नहीं, बल्कि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन है। अंतिम मानवयुक्त प्रक्षेपण से पहले तीन मानवरहित मिशन होंगे। पहले मिशन की सभी गतिविधियां अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं, हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।”
इस सम्मेलन में आईएसआरओ के पूर्व प्रमुख ए.एस. किरण कुमार और एस. सोमनाथ के साथ-साथ आईएसआरओ केंद्र के निदेशक, छात्र और अंतरिक्ष स्टार्टअप के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस बीच, भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियों में 4 अप्रैल को और प्रगति हुई, जब चयनित चार अंतरिक्ष यात्रियों ने लद्दाख में “मिशन मित्रा” (अंतरसंचालनीय विशेषताओं का मानचित्रण और विश्वसनीयता मूल्यांकन) के तहत उच्च ऊंचाई वाला प्रयोग शुरू किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चरम वातावरण में मानव प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और पी. बालकृष्णन नायर समेत अंतरिक्ष यात्री अनुकूलन के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में लेह पहुंचे। इस मिशन को वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, चिकित्सा विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की एक बहुविषयक टीम का समर्थन प्राप्त है, जो मानव अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में भारत की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

 

पीएम मोदी ने धैर्य और विवेकपूर्ण सोच का दिया संदेश

10-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कठिन परिस्थितियों में शांत रहने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि युवाशक्ति का सामर्थ्य ही है, जो राष्ट्र को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ा रहा है।
“व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥”
https://x.com/narendramodi/status/2042446117363966383?s=20
इस सुभाषित का अर्थ है कि विपत्ति, आर्थिक संकट, भय या जीवन के अंतिम क्षणों जैसी कठिन परिस्थितियों में जो व्यक्ति धैर्य बनाए रखते हुए अपनी बुद्धि से विचार करता है, वह कभी विचलित नहीं होता। शांत और सोच-समझकर लिए गए निर्णय व्यक्ति को दुःख और हानि से बचाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संदेश मानसिक दृढ़ता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को दर्शाता है।

 

पश्चिम बंगाल चुनाव: अमित शाह ने भाजपा का ‘भरोसा पत्र’ जारी किया, महिलाओं-युवाओं-किसानों पर खास फोकस

10-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने शुक्रवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया, जिसे पार्टी ने ‘भरोसा पत्र’ नाम दिया है। अमित शाह ने कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में इस संकल्प पत्र का अनावरण किया।
घोषणापत्र में महिलाओं, युवाओं और किसानों समेत सभी प्रमुख वर्गों को ध्यान में रखा गया है। इसमें विभिन्न योजनाओं के साथ नकद सहायता के वादे भी शामिल किए गए हैं, जिससे हर वर्ग को सीधा लाभ देने की रणनीति नजर आती है।
इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि यह संकल्प पत्र बंगाल को निराशा से बाहर निकालने का रास्ता दिखाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह दस्तावेज कानून का राज स्थापित करने, रोजगार बढ़ाने और ‘सोनार बंगला’ के निर्माण का भरोसा देता है। उन्होंने कहा कि यह बंगाल के विकास का स्पष्ट रोडमैप है।
अमित शाह ने राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने वामपंथी शासन से परेशान होकर उन्हें सत्ता में लाया था। बावजूद इसके, सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।
उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी शासन में सिंडिकेट राज, गुंडाराज और घुसपैठ जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। शाह ने कहा कि अब वही जनता, जिसने कभी ममता बनर्जी का समर्थन किया था, खुद को असुरक्षित और निराश महसूस कर रही है और बदलाव चाहती है।
अमित शाह ने कहा कि यह संकल्प पत्र किसानों को कृषि संकट से उबारने, बेरोजगार युवाओं को अवसर देने और महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने की दिशा में काम करेगा। साथ ही यह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का भी संकल्प लेता है।
उन्होंने कहा कि यह घोषणापत्र नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन के अनुरूप तैयार किया गया है और राज्य के लिए विकास का ठोस खाका पेश करता है।
अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने का वादा किया गया है।
घोषणापत्र में कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा किया गया है। चावल, आलू और आम की खेती के लिए सहायता, मछुआरों के पंजीकरण और पश्चिम बंगाल को औद्योगिक व मछली-निर्यात केंद्र बनाने की योजना भी शामिल है।
भाजपा ने हर महिला और बेरोजगार युवाओं को 3,000 रुपए मासिक सहायता देने का वादा किया है। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना लागू करने, मुफ्त एचपीवी टीकाकरण और ब्रैस्ट कैंसर स्क्रीनिंग जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात कही गई है।
घोषणापत्र में उत्तर बंगाल में एम्स, आईआईटी और आईआईएम की स्थापना, ‘वंदे मातरम संग्रहालय’ बनाने और धार्मिक रीति-रिवाजों के पालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कानून लाने का भी वादा किया गया है। 
 

पीएम मोदी ने नीतीश कुमार को दी बधाई, कहा- ‘एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा’

10-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संसद में एक बार फिर नीतीश कुमार को देखना अत्यंत सुखद अनुभव होगा। आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव से संसद की गरिमा और बढ़ेगी।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”नीतीश कुमार जी देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। सुशासन को लेकर उनकी प्रतिबद्धता की हर तरफ सराहना हुई है। उन्होंने बिहार के विकास में अमिट योगदान दिया है। उन्हें एक बार फिर संसद में देखना बहुत सुखद होगा। सांसद और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव से संसद की गरिमा और बढ़ेगी। राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने पर उन्हें हार्दिक बधाई और आगे के कार्यकाल के लिए ढेरों शुभकामनाएं।”
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। नई दिल्ली में राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें उच्च सदन के सांसद के तौर पर शपथ दिलाई। इस मौके पर राज्यसभा में नेता सदन और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कांग्रेस के जयराम रमेश, जेडीयू और भाजपा नेता मौजूद रहे।
इसके साथ ही पीएम मोदी ने हरिवंश नारायण सिंह को भी राज्यसभा का सदस्य बनने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”हरिवंश जी ने पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में अमूल्य योगदान दिया है। वे एक सम्मानित बुद्धिजीवी और विचारक हैं। उन्होंने अपने गहन विचारों और अंतर्दृष्टि से पिछले कुछ वर्षों में सदन की कार्यवाही को समृद्ध किया है। मुझे प्रसन्नता है कि माननीय राष्ट्रपति जी ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। आगामी संसदीय कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।”
बीते कई वर्षों से हरिवंश नारायण राज्यसभा के उपसभापति रहे हैं। उनका कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी थी।
 

भारत के विकास मॉडल की विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा ने की सराहना, PM Modi ने की पोस्ट शेयर

10-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा ने भारत के सहकारिता मॉडल की सराहना करते हुए इसे स्केलेबल ग्रोथ का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने रोजगार सृजन को विकास रणनीति का मूल आधार भी बताया।पीएमओ इंडिया द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा इस लेख में रोजगार-आधारित विकास के महत्व तथा भारत के विकास दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर मिल रही बढ़ती मान्यता को रेखांकित किया गया है।
बंगा ने कहा कि विकास प्रयासों को व्यक्तिगत परियोजनाओं तक सीमित न रहकर रोजगार सृजन और आर्थिक अवसरों जैसे व्यापक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, “विकास कोई दान नहीं है, यह एक रणनीति है।” बंगा आगे कहा कि रोजगार सृजन विकास और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वाशिंगटन में विश्व बैंक और आईएमएफ की वसंतकालीन बैठकों से पहले बोलते हुए, बंगा ने बढ़ती हुई जनसांख्यिकीय चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्षों में लगभग 1.2 अरब युवाओं के कार्यबल में शामिल होने की उम्मीद है, जबकि रोजगार सृजन उस गति से नहीं हो पाएगा। उन्होंने रोजगार बढ़ाने के लिए तीन सूत्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें बुनियादी ढांचे में निवेश, व्यापार-अनुकूल शासन सुधार और वित्त तक बेहतर पहुंच शामिल है।
उन्होंने बुनियादी ढांचे, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को रोजगार सृजन के प्रमुख चालक के रूप बताया। अपने स्वयं के अनुभव से उदाहरण देते हुए, बंगा ने भारत के डेयरी सहकारी मॉडल को एक सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया कि कैसे प्रौद्योगिकी और संगठन ग्रामीण आजीविका में सुधार लाने और छोटे उत्पादकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, “मैं भारत में पला-बढ़ा हूं।” डेयरी क्षेत्र जैसी सहकारी संरचनाएं छोटे उत्पादकों को बेहतर बाजारों और कीमतों तक पहुंच बनाने में मदद करती हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करने में विफलता वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रवासन दबाव और सामाजिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। उन्होंने रोजगार की कमी को व्यापक वैश्विक चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा, “कल्पना कीजिए कि इसका क्या प्रभाव होगा… यदि 8 करोड़ लोग… आशा और सम्मान प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे।
 

उपराष्ट्रपति ने किया संविधान का सिंधी संस्करण लॉन्च, भाषाई विविधता पर जोर

10-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में सिंधी भाषा में संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया। यह विमोचन सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर किया गया।
उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषी समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सिंधी दुनिया की प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसकी साहित्यिक परंपरा वेदांतिक दर्शन और सूफी विचारों के अनूठे संगम को दर्शाती है, जो प्रेम, एकता और भाईचारे के मूल्यों को बढ़ावा देती है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार विशेष रूप से देवनागरी लिपि में सिंधी भाषा में संविधान का प्रकाशन भाषाई समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने संविधान को केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की जीवंत आत्मा बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में संविधान उपलब्ध होने से नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है। इससे लोकतांत्रिक भागीदारी और शासन में विश्वास भी मजबूत होता है।
उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संविधान को विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों और शासन के बीच की दूरी कम होती है।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि संविधान को बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली सहित कई भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, जो भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं।
सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभाजन के कठिन दौर में यह भाषा एकता और दृढ़ता का प्रतीक बनी रही। उन्होंने बताया कि 1967 में 21वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में निहित है और भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की महत्वपूर्ण वाहक हैं। सभी भाषाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्रालय और क्षेत्रीय भाषा अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि इस तरह की पहल नागरिकों को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूत करने में सहायक होगी।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, सांसद शंकर लालवानी और विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। 

महिला आरक्षण नारी शक्ति की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

09-Apr-2026
नई दिल्ली शोर संदेश । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण पर लिखे अपने विचार आधारित लेख की कुछ झलकियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की नारी शक्ति की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने संबंधी विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करना सिर्फ कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की महिलाओं की अपेक्षाओं और सपनों को साकार करने का माध्यम है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं की प्रगति सुनिश्चित हो। महिलाओं को आगे बढ़ाना राष्ट्र के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक जीवन में भागीदारी का आधार मजबूत करना जरूरी है, ताकि वे हर क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब महिलाएं प्रशासन और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेती हैं, तो उनके अनुभव और अंतर्दृष्टि से नीतियां अधिक प्रभावी बनती हैं और शासन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सुझाव दिया कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए, जिससे महिलाओं का प्रतिनिधित्व और बढ़े।
उन्होंने सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने में होने वाली हर देरी, लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता को मजबूत करने में देरी के समान है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पर अधिकतम व्यापक सहमति होनी चाहिए और इसे राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में इन विचारों को साझा किया और लोगों से अपील की कि वे संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने और नारी शक्ति को सशक्त करने के लिए मिलकर आगे बढ़ें।



kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account