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स्वतंत्रता दिवस समारोह से पूर्व कश्मीर घाटी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

11-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) कश्मीर घाटी में स्वतंत्रता दिवस समारोहों के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए बहुस्तरीय मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की गई है। घाटी के पुलिस प्रमुख वी के बिरदी ने मंगलवार को यहां यह जानकारी दी।
यहां ‘बलिदान स्तंभ’ पर तैयारियों का जायजा लेने के बाद कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) बिरदी ने पत्रकारों से कहा कि सुरक्षा के सभी इंतजाम कर लिए गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर पुलिस न सिर्फ श्रीनगर में, बल्कि घाटी के विभिन्न जिलों में भी हमेशा मज़बूत सुरक्षा प्रबंध बनाये रखती है। न सिर्फ खास आयोजन स्थलों पर , बल्कि शहर के आस-पास के इलाकों में भी कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की गई है।’’
वहीं, अनंतनाग और पुलवामा में हाल में हुए हमलों की जांच के बारे में पूछे जाने पर आईजीपी ने कहा, ‘‘जांच चल रही है, इसलिए अभी इस बारे में कुछ बताना सही नहीं होगा। जब भी हमारे पास आपके साथ साझा करने के लिए कोई स्पष्ट जानकारी या ब्योरा होगा, तो हम सही समय पर उसे आपके साथ साझा करेंगे।’’
उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता दिवस समारोहों में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की। आईजीपी ने कहा, ‘‘ यह एक सार्वजनिक कार्यक्रम है। इसमें पुलिस केवल सहायक या आयोजक की भूमिका निभाती है। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में भाग लें और इन्हें सफल बनाएं।’’
उन्होंने घाटी के सभी जिलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह और अन्य कार्यक्रमों के लिए सुरक्षा एवं अन्य इंतजामों का जायज़ा लेने के लिए यहां एक सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक, अतिरिक्त आयुक्त (एसबी श्रीनगर) और संबद्ध सुरक्षा एजेंसियों के अन्य अधिकारी शामिल हुए।
वरिष्ठ अधिकारियों ने बिरदी को सुरक्षा इंतज़ामों के बारे में बताया। जिला पुलिस प्रमुखों ने भी स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए अपने-अपने ज़िलों में की जा रही तैयारियों और सुरक्षा इंतज़ामों के बारे में उन्हें जानकारी दी। बैठक के दौरान पुलिस महानिरीक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खास तौर पर संवेदनशील और जोखिम वाले इलाकों में नियंत्रण और गश्त बढ़ाएं।
उन्होंने श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में होने वाले मुख्य कार्यक्रम के लिए सुरक्षा इंतज़ामों का भी जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सभी तैयारियां समय से पहले पूरी कर लें। पुलिस महानिरीक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संवेदनशील जगहों और शहर में आने-जाने के रास्तों एवं सुरक्षा चौकियों को और मज़बूत करें। सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के तहत, पुलिस ने लाल चौक और शहर के अन्य इलाकों में अचानक चेकिंग और तलाशी ली।
























 

विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा में केरल का नाम बदलने वाला बिल पास, अब ‘केरलम’ नाम से जाना जाएगा

11-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) लोकसभा में विपक्ष के सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच आज मंगलवार को ‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ को ध्वनि मत से पास कर दिया गया। इस बिल में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में यह बिल पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी करते रहे।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि, हंगामा जारी रहा। नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने वाले बिल पर चर्चा न करने के लिए विपक्ष की आलोचना की।
रिजिजू ने कहा, “यह दुखद है कि केसी वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी इस बिल पर नहीं बोलेंगे।” जब हंगामा नहीं थमा, तो बिना चर्चा के ही ध्वनि मत से बिल पास कर दिया गया। इससे पहले इस साल फरवरी में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
गौरतलब है कि केरल विधानसभा ने 24 जून, 2024 को ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्‍ताव में कहा गया,”मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम ‘केरलम’ है।”
पास प्रस्‍ताव में कहा गया था,”1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया गया था। 1 नवंबर को ‘केरल पिरवी दिवस’ भी मनाया जाता है। देश की आजादी की लड़ाई के समय से ही मलयालम भाषा बोलने वाले लोगों के लिए ‘संयुक्त केरल’ के गठन की जोरदार मांग रही है। हालांकि, संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। केरल विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से अपील करती है कि वह संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए तत्काल कदम उठाए।”
इसके बाद, केरल सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
 

दिल्ली-एनसीआर में देर रात से हो रही बारिश, बादलों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)दिल्ली-एनसीआर में बीती रात से जारी हल्की से मध्यम बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। लगातार हो रही बारिश और आसमान में छाए घने बादलों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को पिछले कई दिनों से पड़ रही गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग ने 6 अगस्त के लिए यलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
विभाग के अनुसार गुरुवार को पूरे दिन अलग-अलग समय पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार 6 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
वहीं हवा में नमी का स्तर काफी अधिक रहेगा। अधिकतम आर्द्रता 95 प्रतिशत और न्यूनतम 90 प्रतिशत रहने की संभावना है, जिसके चलते बारिश के बीच कुछ समय के लिए उमस का भी एहसास हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार आज सुबह के समय गरज और बिजली चमकने के साथ हल्की से मध्यम बारिश, पूर्वाह्न में भी इसी तरह का मौसम, दोपहर के दौरान भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा तथा शाम और रात के समय हल्की बारिश या फुहारें पड़ने की संभावना है। आने वाले दिनों के पूर्वानुमान पर नजर डालें तो 7 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन भी आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
7 अगस्त के लिए किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है। 8 अगस्त को अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इस दिन सामान्य रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश हो सकती है। 9 अगस्त को भी अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन हल्की बारिश या बूंदाबांदी के आसार हैं।
इसके बाद 10 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम सामान्य रूप से बादलों से ढका रहेगा और हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं 11 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस दिन भी बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश का पूर्वानुमान है। 7 से 11 अगस्त तक मौसम विभाग ने किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दिल्ली-एनसीआर में मानसून सक्रिय बना हुआ है, जिसके कारण अगले कई दिनों तक बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। बारिश से तापमान नियंत्रित रहेगा और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन अधिक नमी के कारण उमस पूरी तरह खत्म नहीं होगी। वहीं लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।








 

सुषमा स्वराज की विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, केंद्रीय मंत्रियों ने पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह सहित अन्य केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेताओं ने आज गुरुवार को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय कूटनीति, संसदीय परंपराओं और सार्वजनिक जीवन में उनके उत्कृष्ट योगदान को याद किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, “पूर्व विदेश मंत्री एवं भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सुषमा स्वराज एक प्रभावी वक्ता होने के साथ-साथ अपने सहज और सौम्य व्यवहार के लिए जानी जाती थीं। उन्होंने अपने प्रभावी व्यक्तित्व, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के प्रति अपने समर्पण से भारतीय राजनीति और राजनय पर अमिट छाप छोड़ी। भारत की आवाज को विश्व मंच पर मजबूत करने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।”
गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “ओजस्वी वक्ता, सौम्यता व सादगी की प्रतिमूर्ति सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन। सुषमा जी ने अपने अनुशासन, कर्मठता व संघर्षशीलता के बल पर संगठन से लेकर सरकार तक सभी दायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन किया। विदेश मंत्रालय को आम जन से जोड़ने वाली सुषमा जी का सादगीपूर्ण जीवन सदैव स्मरणीय रहेगा।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा, “पूर्व विदेश मंत्री पद्म विभूषण सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। अपने प्रखर उद्बोधन, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति अटूट समर्पण से सुषमा ने भारतीय राजनीति में एक विशिष्ट स्थान बनाया। राष्ट्रसेवा के प्रति उनकी निष्ठा, कार्यशैली और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव प्रेरक रहेगी।”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, “नेतृत्व, करुणा व नारी शक्ति की प्रतिमूर्ति, ओजस्वी वक्ता, पूर्व विदेश मंत्री एवं ‘पद्मविभूषण’ आदरणीय बहन सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पर पोस्ट किया, “नेतृत्व, करुणा व नारी शक्ति की प्रतिमूर्ति, ओजस्वी वक्ता, पूर्व विदेश मंत्री एवं ‘पद्मविभूषण’ आदरणीय बहन सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र प्रथम के ध्येय और जनसेवा के संकल्प के साथ सुषमा जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन देश सेवा में समर्पित कर दिया। संगठन के विस्तार के साथ ही राष्ट्रोत्थान के लिए उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्पद है।”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा, “कुशल राजनीतिज्ञ, ओजस्वी वक्ता, पूर्व विदेश मंत्री, ‘पद्म विभूषण’ श्रद्धेय बहन सुषमा स्वराज की आज पुण्यतिथि है। सुषमा दीदी बड़ी बहन की तरह स्नेह रखती थीं। उनके चेहरे पर तेज और वाणी में ओज था, सरस्वती उनकी जिह्वा पर विराजती थीं। दीदी के साथ बीते अनमोल क्षण और उनकी स्मृतियां मेरे जीवन की अमूल्य निधि हैं। दीदी, आपके मंगल विचारों की पुण्य ज्योत सदैव जनसेवा के पथ को आलोकित कर राष्ट्र व समाज सेवा के लिए हमें प्रेरित करती रहेगी। पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!”
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज सुषमा स्वराज को उनकी पुण्यतिथि पर सादर याद करते हैं। उनके शालीन व्यवहार, आत्मीयता और उपस्थिति की बहुत कमी महसूस होती है।”
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट किया, “सुषमा स्वराज को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। एक असाधारण नेता और प्रेरणादायक सांसद के तौर पर, सुषमा जी ने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी विनम्रता, वाकपटुता और सार्वजनिक जीवन में उनके उल्लेखनीय योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारतीय राजनीति की एक सशक्त, संवेदनशील और प्रेरणादायी व्यक्तित्व, पद्म विभूषण सुषमा स्वराज के स्मृति दिवस पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि। अपनी प्रभावशाली वाणी, विलक्षण नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण से उन्होंने जनसेवा की ऐसी अमिट मिसाल स्थापित की, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।”



 

भारत की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों की प्रमाणिक कहानियां दिखाने लिए सरकार और नेटफ्लिक्स के बीच समझौता

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को अतुल्य भारत पोर्टल पर ‘ऐज सीन ऑन नेटफ्लिक्स’ सेक्शन का शुभारंभ किया। इसे पर्यटन मंत्रालय और नेटफ्लिक्स इंडिया के बीच चल रहे सहयोग के तहत विकसित किया गया है। इस पहल का मकसद दुनिया भर के दर्शकों को नेटफ्लिक्स इंडिया की फिल्मों और सीरीज में दिखाई गई वास्तविक स्थलों, सांस्कृतिक परंपराओं और असल अनुभवों को जानने का मौका देना है, जिससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा मिल सके।
भारत में नेटफ्लिक्स के दस साल पूरे होने के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में स्थित नैशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में इसका शुभारंभ किया गया। नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी सारंडोस ने केंद्रीय मंत्री के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में कहानी कहने (स्टोरीटेलिंग) की अहम भूमिका पर बातचीत की।
इस अवसर पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की कहानियों ने हजारों वर्षों से दुनिया को प्रेरित किया है और प्रौद्योगिकी अब इन कहानियों को दुनिया के हर कोने तक ले जाने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था भारत की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करते हुए रोजगार के अवसर सृजित करके विकास के एक शक्तिशाली वाहक के रूप में उभर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने ऐसी साझेदारियों का स्वागत किया जो भारतीय प्रतिभा को सशक्त बनाती हैं, देश की विविधता का उत्सव मनाती हैं और उसकी सभ्यतागत विरासत को असल रूप में दुनिया के सामने लाती हैं। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि संस्कृति केवल भारत की विरासत नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकतों में से एक है और हर ऐतिहासिक महत्व का स्थान, त्योहार, भाषा और लोक-परंपरा में ऐसी कहानियां छिपी हैं जो दुनिया भर के लोगों तक पहुंचने लायक हैं।
कार्यक्रम में नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सारंडोस ने कहा कि एक भारत नहीं बल्कि कई भारत हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अनूठी कहानियां और परंपराएं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी कहानियों ने दुनिया भर के दर्शकों को प्रभावित किया है और लोगों को भारत की जगहों और संस्कृतियों का खुद अनुभव करने के लिए प्रेरित किया है।
उन्होंने भारत की कहानियों और स्थलों को वैश्विक दर्शकों तक ले जाने के लिए संस्कृति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के साथ अपनी साझेदारी जारी रखने के लिए नेटफ्लिक्स की प्रतिबद्धता जताई। वहीं, केंद्रीय मंत्री और सारंडोस ने देश की रचनात्मक अर्थव्यवस्था (क्रिएटिव इकॉनमी) को मजबूत करते हुए और भारत के वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को बढ़ाते हुए भारत की विविध संस्कृतियों, परिवेश और परंपराओं पर आधारित सच्ची कहानियों को बढ़ावा देने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।


 

संसद में हंगामा, सभापति बोले- वेल में आने और प्लेकार्ड दिखाने पर होगी कार्रवाई

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश)राज्यसभा व लोकसभा दोनों ही सदनों में बुधवार को भी हंगामा जारी रहा। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने के कुछ ही देर बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी को देखते हुए कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
वहीं, राज्यसभा में भारी हंगामे व नारेबाजी के बीच कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही संचालित की गई। लेकिन कुछ ही देर बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
12 बजे राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा, ”मैं सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे सहयोग करें। मेरी आप सभी से दो विनम्र प्रार्थनाएं हैं। पहली, सदन के वेल में कभी न आएं। दूसरी, तख्तियां (प्लेकार्ड) कभी न दिखाएं। इन दोनों बातों का सभी सदस्यों को पालन करना होगा। यदि कोई सदस्य इन दोनों निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो मैं उसकी बात नहीं सुनूंगा। मैं उसे बोलने का अवसर नहीं दे पाऊंगा और मुझे उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ेगा। इसलिए इन दोनों बातों से परहेज करें। यह मेरा आप सभी से अनुरोध है।”
हालांकि सभापति के इस निर्देश के बावजूद सदन में लगातार नारेबाजी होती रही। राज्यसभा में दिन की शुरुआती कार्यवाही शुरू होने पर भी सदन में गतिरोध दिखाई दिया। 11 बजे सबसे पहले राज्यसभा की कार्यवाही की शुरुआत में विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित आवश्यक विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए। इसके उपरांत शून्यकाल की कार्यवाही प्रारंभ हुई। अभी कुछ ही सांसदों ने अपने वक्तव्य शून्यकाल के दौरान सदन में रखे थे, लेकिन जल्द ही हंगामा बढ़ गया और शून्यकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी।
विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर आगे गए और नारेबाजी करने लगे। इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी सदस्यों को अपनी सीटों पर वापस जाने के लिए कहा, लेकिन नारेबाजी जारी रही। कई विपक्षी सांसद हाथों में नारे लिखे हुए प्लेकार्ड लेकर सदन में आए। इस पर सभापति ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सही नहीं है और नियम के खिलाफ है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
इससे सदन में शून्यकाल की कार्यवाही बाधित हुई। शून्यकाल में केवल कुछ ही सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। यही स्थिति प्रश्नकाल में भी बनी रही। गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में संसद के दोनों सदन, लोकसभा और राज्यसभा में यही स्थिति बनी हुई है। सदन में शून्यकाल के साथ-साथ प्रश्नकाल की कार्यवाही भी लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रही है।
 

370 हटने के 7 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने कहा- श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नया अध्याय

06-Aug-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने कहा कि इन वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की प्रगति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
पीएम मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “सात साल पहले इसी दिन (5 अगस्त को) अनुच्छेद 370 और 35(A) इतिहास बन गए, जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की यात्रा में एक निर्णायक नया अध्याय शुरू हुआ। तब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्यमिता व खेल जैसे क्षेत्रों में अवसर बढ़े हैं। चाहे महिलाएं हों या हाशिए पर रहने वाले समुदाय, जिन्हें दशकों तक उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया था, उन्हें भारत के संविधान के पूर्ण कार्यान्वयन के कारण सशक्त बनाया गया है।”
पीएम मोदी ने कहा कि इस साल 5 अगस्त का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी वर्ष हमारा देश श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहा है। राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी आजीवन प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रही है। दशकों पहले उन्होंने जो सपना देखा था, वह 5 अगस्त 2019 को ऐतिहासिक रूप से साकार हुआ। सप्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर नागरिक को बड़े सपने देखने, उन्हें हासिल करने और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में योगदान देने का अवसर मिले।”
बता दें कि 5 अगस्त 2019 को संसद ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने को मंजूरी दी थी। नोटिफिकेशन जारी करते ही 31 अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेश में पुनगठित कर दिया गया। तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘ऐतिहासिक भूल को ठीक करने वाला ऐतिहासिक कदम’ कहा था। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए। जम्मू-कश्मीर के 334 कानूनों में से 164 कानूनों को निरस्त किया गया, 167 कानूनों को भारतीय संविधान के अनुरूप अनुकूलित किया गया।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने असम में बाढ़ प्रभावित इलाकों और राहत शिविरों का दौरा किया

05-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने बुधवार को असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर प्रभावित लोगों से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए राज्य को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए किसी भी तरह के संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ शिवसागर जिले के बाढ़ प्रभावित बिहुबोर और नेपाली खुती क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों से बातचीत की और जमीनी हालात का जायजा लिया।
प्रभावित लोगों को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार असम के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा, “भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मैं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम के सभी लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि राहत कार्यों के लिए धन या संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। केंद्र सरकार राज्य को पूरी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।”
नड्डा ने बताया कि केंद्र सरकार की टीमें पहले से ही बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही हैं, ताकि पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया में पूरी तरह सक्रिय है।
शिवसागर जिले के बिहुबोर और नेपाली खुती क्षेत्रों में आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और बड़ी संख्या में लोगों का पशुधन भी नष्ट हुआ है। बाढ़ के कारण सड़कें और अन्य सार्वजनिक ढांचा भी प्रभावित हुआ, जिससे कई परिवारों को राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों से मुलाकात की तथा उनके घर, घरेलू सामान, फसल और आजीविका को हुए नुकसान की जानकारी ली। दोनों नेताओं ने अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।
गौरतलब है कि असम सरकार बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत कार्यों और नुकसान के आकलन का अभियान चला रही है। राज्य सरकार ने क्षतिग्रस्त मकानों, फसलों, पशुधन और आजीविका के नुकसान के लिए मुआवजा एवं वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही क्षतिग्रस्त सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम भी जारी है।
केंद्र सरकार के इस आश्वासन से राज्य में चल रहे पुनर्वास कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है, ताकि बाढ़ प्रभावित हजारों परिवारों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके। 





 

फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो, मानसून पर असर कई कारकों पर निर्भर: जितेंद्र सिंह

05-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) के नवीनतम आकलन के अनुसार मई 2026 में विकसित अल नीनो की स्थिति जून 2026 से फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना है। स्वदेशी एआई/एमएल आधारित पूर्वानुमान प्रणाली के मुताबिक इसकी संभावना 70 से 90 प्रतिशत के बीच है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अल नीनो को भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून में कम बारिश से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन यह मानसून का एकमात्र निर्धारक नहीं है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आईएनसीओआईएस ने पूर्वानुमान और अनिश्चितता के आकलन के साथ स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली वैश्विक महासागर डेटा प्रणाली के साथ मिलकर अल नीनो जैसी समुद्री-वायुमंडलीय स्थितियों की निगरानी और पूर्वानुमान में मदद कर रही है।
उन्होंने कहा कि अल नीनो के इतिहास को देखते हुए इसे देश के कुछ हिस्सों में भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की कम वर्षा से जोड़ा गया है, लेकिन मानसून कई परस्पर क्रिया करने वाले जलवायु कारकों से प्रभावित होता है। इनमें हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी), मैडेन-जूलियन दोलन (एमजेओ) और क्षेत्रीय महासागर-वायुमंडल अंतःक्रियाएं प्रमुख हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौजूदा पूर्वानुमान अल नीनो के बने रहने की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन भारतीय मानसून पर इसका अंतिम प्रभाव मानसून के दौरान विकसित होने वाली महासागर-वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। हिंद महासागर द्विध्रुव और प्रचलित पवन पैटर्न भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार उन्नत पूर्वानुमान प्रणालियों के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
उन्होंने बताया कि विकसित हो रहा अल नीनो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित कर सकता है। इन क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तापमान से समुद्री लू की संभावना भी बढ़ सकती है। ऐसे बदलाव महासागरीय मिश्रण, पोषक तत्वों की उपलब्धता और जैविक उत्पादकता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे मछलियों के वितरण और तटीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
मंत्री ने कहा कि लहरों और ज्वार की स्थितियों में बदलाव से नौवहन, अपतटीय संचालन और अन्य तटीय गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इन संभावित जोखिमों को देखते हुए महासागरीय स्थिति की निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि आईएनसीओआईएस ने तूफान, ऊंची लहरों, समुद्री जलप्रपात और तेज समुद्री धाराओं के लिए उच्च-विभेदन पूर्वानुमान मॉडल विकसित किए हैं। उन्नत डेटा एसिमिलेशन प्रणालियों के साथ एकीकृत महासागरीय ग्लाइडर, लंगरयुक्त तैरते हुए प्लैटफॉर्म, आर्गो फ्लोट, ज्वार गेज और उपग्रह प्रेक्षणों के जरिए महासागरीय अवलोकन नेटवर्क को भी विस्तार दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने तटीय समुदायों की तैयारी और आपदा-रोधी क्षमता बढ़ाने के लिए हितधारक प्रशिक्षण कार्यक्रम, मॉक अभ्यास और जागरूकता अभियान चलाए हैं। चौबीसों घंटे परिचालन निगरानी, विभिन्न प्लेटफॉर्म के जरिए सलाह का प्रसार और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि दीप महासागर मिशन के तहत चालू वित्त वर्ष में समुद्री संसाधनों के मानचित्रण के लिए 145.06 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। भारतीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र में समुद्री पर्वतों के जैव विविधता सर्वेक्षणों का विस्तार किया जा रहा है। जलतापीय उद्गम स्थलों, खनिज समृद्ध क्षेत्रों और समुद्री संसाधनों की खोज के लिए स्वायत्त जलमग्न वाहन (एयूवी) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी) भी तैनात किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु सहित तटीय राज्यों के लिए आईएनसीओआईएस 10 दिन पहले तक लहरों, हवाओं, ज्वार-भाटे, समुद्री धाराओं और समुद्र की सतह के तापमान से संबंधित महासागरीय स्थिति पूर्वानुमान सेवाएं उपलब्ध कराता है। राज्य अधिकारियों को आपदा तैयारी और समुद्री सुरक्षा के लिए ऊंची लहरों, ज्वार-भाटे और तेज धाराओं से संबंधित नियमित सलाह जारी की जाती है।
केंद्र ने राज्य सरकारों के सहयोग से ज्वार-भाटा मापने वाले स्टेशन, तटीय लहर चालक बुआ और सुनामी तैयारी कार्यक्रम भी स्थापित किए हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार स्वदेशी पूर्वानुमान तकनीकों, उन्नत महासागरीय अवलोकन और वैज्ञानिक निर्णय-सहायता प्रणालियों में निवेश जारी रखे हुए है, ताकि सरकारों, तटीय समुदायों, मछुआरों और अन्य हितधारकों को समय पर सटीक सलाह दी जा सके और जलवायु परिवर्तनशीलता के बीच भारत की लचीलापन क्षमता मजबूत हो। 

 

भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कंटेंट से मुक्त रखना सरकार की प्राथमिकता: एल. मुरुगन

05-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कंटेंट से मुक्त रखते हुए महिलाओं, बच्चों समेत सभी यूजर्स के लिए खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 के जरिए डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार किया गया है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि आईटी नियमावली, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समेत सभी मध्यस्थों की जिम्मेदारी है कि उनके कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाला या लिंग के आधार पर अपमानजनक एवं उत्पीड़नकारी कंटेंट होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित, प्रसारित या साझा न करें।
उन्होंने कहा कि आईटी नियमावली, 2021 के कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करने पर मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत थर्ड पार्टी सूचना के लिए मिली छूट खो सकते हैं। इसके अलावा वे लागू कानूनों के तहत परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
राज्य मंत्री ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को सरकार ने कृत्रिम रूप से तैयार जानकारी (एसजीआई) से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए आईटी नियमों में संशोधन कर नियामक ढांचे को मजबूत किया। इसमें डीपफेक और एआई से तैयार कंटेंट भी शामिल है।
संशोधित नियमों के तहत मध्यस्थों और बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को अवैध एआई से तैयार कंटेंट के निर्माण और प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होंगे। इसमें अश्लील, भ्रामक, किसी व्यक्ति का प्रतिरूपण करने वाला या बच्चों के लिए हानिकारक कंटेंट शामिल है। प्लेटफॉर्मों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के तहत आने वाले संबंधित अपराधों की सूचना सक्षम अधिकारियों को देनी होगी।
डॉ. मुरुगन ने कहा कि इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) शुरू किया गया है। इसके जरिए आम नागरिक सभी तरह के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की कुछ श्रेणियों में गुमनाम शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि एनसीआरपी के ‘रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट’ मॉड्यूल के जरिए नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सऐप नंबर या टेलीग्राम हैंडल, फोन नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर या नंबर, डीपफेक और सोशल मीडिया यूआरएल की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे नागरिकों को संदिग्ध डिजिटल संस्थाओं और डीपफेक से संबंधित गतिविधियों को चिह्नित करने में मदद मिलती है।
राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार ने ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम’ (सीसीपीडब्ल्यूसी) योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। इसका इस्तेमाल साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने, जूनियर साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों तथा न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच और फोरेंसिक समेत विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया है।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि गृह मंत्रालय के आई4सी ने देशभर में दो लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस के छात्रों को साइबर स्वच्छता का प्रशिक्षण दिया है। इसका उद्देश्य युवाओं को साइबर अपराधों से बचाव और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना है।
आई 4 सी ने छात्रों को साइबर अपराध की रोकथाम के बारे में जागरूक करने के लिए ‘किशोरों/शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक’ जारी की है। महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक’ भी जारी की गई है।
राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करने और आम जनता के बीच साइबर स्वच्छता तथा साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता’ (आईएसईए) परियोजना लागू कर रही है।
डॉ. एल. मुरुगन ने यह जानकारी आज लोकसभा में श्री प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।


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