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ब्रिटेन-फ्रांस ने सीरिया में की एयर स्‍ट्राइक, बमों से उड़ाया आतंकियों का भूमिगत हथियार डिपो

04-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) ब्रिटेन और फ्रांस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में सीरिया के अंदर आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक की है। लड़ाकू विमानों ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट ग्रुप के एक संदिग्ध भूमिगत हथियार डिपो पर बमबारी की। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि इस हमले में किसी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी एयरक्राफ्ट ऑपरेशन के बाद सुरक्षित लौट आए हैं।
सीरिया में इस्लामिक स्टेट ग्रुप (दाएश आतंकवादी संगठन) फिर से उभरने की कोशिश में है, जिसने 2019 तक सीरिया के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसे रोकने के लिए ब्रिटेन ने फ्रांस के साथ मिलकर ऑपरेशन किया।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा, “रॉयल एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट मार्च 2019 में अपनी सैन्य हार के बाद दाएश आतंकवादी ग्रुप के किसी भी संभावित पुनरुत्थान को रोकने के लिए सीरिया के ऊपर गश्त करना जारी रखे हुए हैं। सावधानीपूर्वक खुफिया विश्लेषण ने पलमायरा के प्रमुख स्थल से कुछ मील उत्तर में पहाड़ों में एक भूमिगत ठिकाने की पहचान की। इस ठिकाने पर दाएश का कब्जा था, जिसका इस्तेमाल हथियार और विस्फोटक जमा करने के लिए किया जाता था। ठिकाने के आसपास के क्षेत्र में कोई नागरिक बस्ती नहीं है।”
रॉयल एयरफोर्स के टाइफून एफजीआर4एस फाइटर जेट्स ने फ्रांसीसी विमानों के साथ एक संयुक्त कार्रवाई में 3 जनवरी की शाम को भूमिगत ठिकाने पर हमला किया। विमानों ने ठिकाने तक जाने वाली कई सुरंगों को निशाना बनाने के लिए पेववे-4 गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया। रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि शुरुआती संकेत हैं कि लड़ाकू विमानों ने लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।
रक्षा मंत्रालय ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें विमानों को वॉयेजर एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर से ईंधन सपोर्ट लेते दिखाया गया।
रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा, “यह कार्रवाई हमारे ब्रिटेन के नेतृत्व और अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने के हमारे पक्के इरादे को दिखाती है, ताकि मिडिल ईस्ट में दाएश और उसकी खतरनाक व हिंसक विचारधारा के फिर से उभरने को खत्म किया जा सके। मैं इस ऑपरेशन में शामिल हमारी सेना के सभी सदस्यों को उनकी दक्षता और साहस के लिए धन्यवाद देता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “वे क्रिसमस और नए साल के दौरान तैनात किए गए हजारों ब्रिटिश जवानों में से थे। हमारे जीवन के तरीके को खतरा पहुंचाने वाले खतरनाक आतंकवादियों को खत्म करने के लिए किया गया यह ऑपरेशन दिखाता है कि हमारी सेना पूरे साल कैसे तैयार रहती है व ब्रिटेन को घर पर सुरक्षित और विदेश में मजबूत रखती है।”












 

प्रकृति के प्रति प्रेम को सुंदर रूप से दिखाता है अहमदाबाद फ्लावर शो: पीएम मोदी

03-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) पीएम मोदी ने शुक्रवार को अहमदाबाद फ्लावर शो की जमकर तारीफ की। पीएम ने कहा कि यह शहर की जीवंत भावना व प्रकृति के प्रति प्रेम को सुंदर रूप से दर्शाता है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अहमदाबाद फ्लावर शो रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ लाता है और शहर की जीवंत भावना व प्रकृति के प्रति प्रेम को सुंदर रूप से दर्शाता है।
उन्होंने लिखा कि यह भी सराहनीय है कि यह फूलों की प्रदर्शनी हर साल अपने आकार और कल्पनाशीलता में बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह प्रतिक्रिया गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के इस एक्स पोस्ट पर दी, जिसमें उन्होंने फ्लावर शो से जुड़ी तस्वीरें साझा की थीं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि गुजरात की खुशबू, पूरी दुनिया में।
अपने एक्स पोस्ट में भूपेंद्र पटेल ने लिखा कि अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित 14वें फ्लावर शो में इस वर्ष दो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का सृजन होना हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा फ्लावर मंडला और सरदार वल्लभभाई पटेल जी का विश्व का सबसे बड़ा फ्लावर पोर्ट्रेट—इन उपलब्धियों के साथ अहमदाबाद फ्लावर शो ने लगातार तीसरे वर्ष वर्ल्ड रिकॉर्ड की हैट्रिक दर्ज की है।
सीएम ने यह भी लिखा कि वर्ष 2024 में विश्व का सबसे लंबा फ्लावर स्ट्रक्चर तथा वर्ष 2025 में विश्व का सबसे बड़ा फ्लावर बुके बनाकर अहमदाबाद फ्लावर शो ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। वर्ष 2026 में दो नए वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ यह आयोजन रचनात्मकता और उत्कृष्ट आयोजन क्षमता का अनुपम उदाहरण बना है।
सीएम ने इसे प्रधानमंत्री से मिली प्रेरणा बताते हुए कहा कि यह फ्लावर शो वर्ल्ड हेरिटेज सिटी अहमदाबाद को वैश्विक मंच पर विशिष्ट पहचान दिला रहा है। यह फ्लावर शो केवल पुष्पों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय एकता और आधुनिक भारत की रचनात्मक शक्ति का भव्य उत्सव है।


 

सावित्रीबाई फुले की जयंती पर पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें नमन किया

03-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) नारी सशक्तिकरण की प्रतीक और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की शनिवार को जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों के लिए सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को स्मरण करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं। उनका मानना ​​था कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे शक्तिशाली साधन है। उन्होंने ज्ञान और अध्ययन के जरिए जिंदगी में परिवर्तन लाने पर जोर दिया। जरूरतमंदों के लिए उनका काम भी सराहनीय है।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए कहा, “सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तिकरण को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए देश के पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की और समाज सुधार की अलख जगाई। उनका प्रेरणादायी जीवन राष्ट्र निर्माण में सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “नारी शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करने वाली महान समाज सुधारिका, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, श्रद्धेय माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों-वंचितों और नारी उत्थान के लिए आपने जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं, वे सदैव समाज के नवनिर्माण के लिए हम सबको प्रेरित करते रहेंगे।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले ने अपने साहस, संघर्ष और दूरदर्शिता से समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों की अलख जगाई। उनका जीवन सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा का प्रतीक है। नारी सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।”






 

प्रयागराज में माघ मेला-2026 का भव्य शुभारंभ, स्नान पर्व में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

03-Jan-2026
प्रयागराज में शुक्रवार को माघ मेला-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। संगम तट की ओर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाकर लोगों ने पुण्य लाभ अर्जित किया। पहले ही दिन मेले क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस दौरान प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया।
माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस दौरान कई प्रमुख स्नान पर्व और धार्मिक आयोजन होंगे। पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने व्यापक तैयारियां की थीं, जिनका असर जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दिया।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व बताई जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से भी भीड़ और यातायात की लगातार निगरानी की जा रही है। जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के गोताखोरों को संगम और आसपास के घाटों पर तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए एटीएस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भी तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटकर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा ने बताया कि माघ मेला 2026 के पहले बड़े स्नान पर्व को लेकर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, आज माघ मेला 2026 का पहला बड़ा स्नान पर्व है। इसे देखते हुए इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन, एआई-इनेबल्ड कैमरे और एआई-आधारित सिस्टम लगाए गए हैं, जिनके जरिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। हमारी ट्रैफिक और सुरक्षा टीमें जमीन पर मौजूद हैं ताकि सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहे।
उन्होंने आगे बताया कि सभी पुलिसकर्मियों को एक महीने से अधिक समय तक विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ी तमाम तरह की ट्रेनिंग पहले ही पूरी कर ली गई थी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हर जगह हमारी टीमें तैनात हैं और सभी श्रद्धालु सुगमता के साथ स्नान कर वापस जा रहे हैं।
 

दिल्ली शब्दोत्सव 2026’ का आज होगा उद्घाटन, सीएम रेखा गुप्ता समेत अजीत डोभाल भी होंगे शामिल

02-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) तीन दिवसीय भारतीय साहित्यिक और सांस्कृतिक उत्सव “दिल्ली शब्दोत्सव 2026” का उद्घाटन समारोह आज शुक्रवार को नेशनल स्टेडियम में होगा, जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहेंगी। दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
इससे पहले, 29 दिसंबर को इवेंट के पोस्टर लॉन्च के बाद, सीएमआज गुप्ता को कला और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने इवेंट के शेड्यूल और दूसरी संबंधित कैंपेन एक्टिविटीज के बारे में बताया।
सीएम गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “‘दिल्ली शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के पोस्टर लॉन्च के बाद, कैबिनेट सहयोगी कपिल मिश्रा के नेतृत्व में आयोजकों की टीम मिली।”
दिल्ली सीएम ने आगे लिखा, “2 से 4 जनवरी तक, दिल्ली सरकार और सुरुचि प्रकाशन द्वारा मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ में देश भर के जाने-माने विचारक, लेखक और वक्ता हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान, किताबों का विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और एक कवि सम्मेलन भी होग।”
इस मौके पर मुख्यमंत्री के कैबिनेट सहयोगी आशीष सूद, विधायक अभय वर्मा और राजकुमार भाटिया, साथ ही अन्य मौजूद थे।
कपिल मिश्रा ने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली सरकार का कला और संस्कृति विभाग और एक पब्लिशिंग हाउस मिलकर देश का सबसे बड़ा साहित्य और सांस्कृतिक उत्सव आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार 2, 3 और 4 जनवरी को देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और साहित्यिक उत्सव आयोजित कर रही है। अब से, यह संस्कृति मंत्रालय के तहत सालाना आयोजित किया जाएगा और इसे ‘दिल्ली शब्दोत्सव’ के नाम से जाना जाएगा।”
इस इवेंट में 100 से ज्यादा जाने-माने वक्ता शामिल होंगे, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सुनील आंबेकर, मनमोहन वैद्य और सच्चिदानंद जोशी शामिल हैं, साथ ही 40 से ज्यादा किताबों का विमोचन, छह सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और दो कवि सम्मेलन होंगे।
उन्होंने कहा, “दिल्ली एनसीआर के लगभग 40 विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।” मिश्रा ने कहा कि इस इवेंट में भरतनाट्यम, कथक, भजन संध्या, कवि सम्मेलन और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन जैसे कार्यक्रम होंगे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री इस उत्सव का उद्घाटन करेंगे, जबकि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।







 

70 साल की उम्र में 702 किमी साइकिल यात्रा, पीएम मोदी ने विधायक सुरेश कुमार की सराहना की

02-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 वर्ष की आयु में बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करने वाले कर्नाटक के विधायक एस. सुरेश कुमार से फोन पर बातचीत की और उनके साहस व जज्बे की जमकर तारीफ की।
पीएम मोदी ने कहा कि बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक साइकिल से यात्रा करना न केवल तारीफ के काबिल है, बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से उबरने के बाद यह उपलब्धि हासिल करना उनकी हिम्मत और कभी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है। साथ ही, यह फिटनेस को लेकर एक मजबूत संदेश भी देता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं सुरेश कुमार से फोन पर बात कर उनके इस प्रयास के लिए बधाई दी। वहीं, एस. सुरेश कुमार ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर साइकिल चलाने के लिए मुझे बधाई दी। उन्हें यह जानकर भी खुशी हुई कि 51 वर्षों बाद यह मेरी कन्याकुमारी तक दूसरी साइकिल यात्रा थी, वह भी एक गंभीर बीमारी से उबरने के बाद।”
बेंगलुरु के राजाजीनगर से विधायक सुरेश कुमार एक दुर्लभ बीमारी चिकनगुनिया एन्सेफेलोपैथी (सीई) से पीड़ित हो गए थे। बीमारी के कारण वह महीनों तक बिस्तर पर रहने को मजबूर थे और अपनी उंगलियां तक हिलाने में असमर्थ थे। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने 12 लोगों के एक समूह के साथ ‘राजाजीनगर पेडल पावर’ के बैनर तले बेंगलुरु से कन्याकुमारी तक 702 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की, जिसे उन्होंने पांच दिनों में सफलतापूर्वक पूरा किया।











 

जनजातीय समाज सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाए: राष्ट्रपति मुर्मू

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को झारखंड के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड में अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की अस्मिता और विरासत को संरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि शिक्षा विकास की सबसे बड़ी पूंजी है और इसके विस्तार-प्रसार से ही समाज तथा राज्य का समग्र विकास संभव है। झारखंड के गुमला निवासी महान जनजातीय नायक पंखराज साहेब कार्तिक उरांव की स्मृति को नमन करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे सभी के लिए प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने विदेश में शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद अपनी सोच को अपनी माटी और अपने लोगों के लिए समर्पित रखा और शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना। आज उसी भावना के साथ ‘कार्तिक जतरा’ के माध्यम से लोग उन्हें याद कर रहे हैं, जो अपने आप में एक सार्थक पहल है।
राष्ट्रपति ने कहा कि गुमला जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना पंखराज उनका सपना था, जिसे शीघ्र साकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाला यह क्षेत्र नदियों, पहाड़ों, पठारों और जंगलों से समृद्ध है और देश की प्राचीनतम परंपराओं का साक्षी रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि और कर्मभूमि झारखंड में आकर उन्हें तीर्थ यात्रा जैसा अनुभव होता है। बिरसा मुंडा आज पूरे देश में सामाजिक न्याय और जनजातीय गौरव के महान प्रतीक के रूप में सम्मानित हैं।
गुमला जिले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी जतरा टाना भगत का जन्म भी इसी धरती पर हुआ था। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों के अनुरूप ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसक आंदोलन का नेतृत्व किया। इसके अलावा, उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद एल्बर्ट एक्का को भी श्रद्धापूर्वक याद किया, जिनकी जन्मस्थली गुमला जिला है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संगीत, नाटक, नृत्य और कला परंपराएं अत्यंत समृद्ध हैं। यही कारण है कि देशभर से 100 से अधिक आदिवासी कलाकारों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आई आदिवासी पारंपरिक नृत्य मंडलियों ने अपनी लोक कला और संस्कृति का आकर्षक और रंगारंग प्रदर्शन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
 

भारत में वर्ष 2024-25 में हुए रिकॉर्ड 5.5 लाख से ज्यादा ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन : पीयूष गोयल

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में 5.5 लाख से ज्यादा घरेलू ट्रेडमार्क आवेदन दर्ज किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यह आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाने और नए विचार लाने वाले लोगों के साथ ही रचनाकारों के हितों की रक्षा करने में देश की संस्थाओं की मजबूती को दर्शाता है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को यह जानकारी साझा की।
पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘आईडिएट इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 पिछले 26 वर्षों से नवाचार करने वालों की सुरक्षा का मजबूत आधार बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के लगातार प्रयासों से भारत का इनोवेशन सिस्टम मजबूत हुआ है। इससे भारत की पहचान वैश्विक बौद्धिक संपदा यानी ग्लोबल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) क्षेत्र में और बेहतर हुई है और इससे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को फायदा मिल रहा है।
पीयूष गोयल ने बताया कि सबसे ज्यादा ट्रेडमार्क दवाइयों, पशु चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़े उत्पादों में दर्ज किए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत सुधार, डिजिटलीकरण और नए कदमों की वजह से भारत की स्थिति वैश्विक आईपी प्रणाली में लगातार मजबूत हो रही है।
ट्रेडमार्क अधिनियम ऐसा कानून है, जो कंपनियों और व्यापारियों की ब्रांड पहचान को चोरी या नकल से बचाता है। इससे बाजार में न्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलता है। इस कानून में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, ताकि यह बदलते वैश्विक व्यापार और आधुनिक जरूरतों के अनुसार बना रहे।
जब कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती हैं, तब ट्रेडमार्क की सुरक्षा और ज्यादा जरूरी हो जाती है। ऐसे में यह कानून इस बात का भी ध्यान रखता है, ताकि कंपनियों को सही सुरक्षा मिल सके।
एक बार ट्रेडमार्क 10 साल के लिए पंजीकृत होता है और इसके बाद इसे हर 10 साल में नवीनीकृत किया जा सकता है। अगर कोई ट्रेडमार्क बहुत सामान्य हो, गलत जानकारी देता हो या पहले से मौजूद ट्रेडमार्क से बहुत मिलता-जुलता हो, तो उसे मंजूरी नहीं मिलती।
इस कानून के तहत ट्रेडमार्क को किसी और को बेचा या लाइसेंस पर दिया भी जा सकता है। अगर कोई ट्रेडमार्क की नकल करता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना, नुकसान की भरपाई और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। 
 

भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस का प्राइमरी इंजन युवा आबादी और लोगों का साहस : पीएम मोदी

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस का प्राइमरी इंजन देश की जनसांख्यिकी, हमारी युवा पीढ़ी और हमारे लोगों का अदम्य साहस है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर पीएम मोदी ने लिखा कि 2025 हर सेक्टर में सुधारों के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण रहा है और इससे देश की विकास यात्रा को रफ्तार मिली और साथ ही विकसित भारत यात्रा के प्रयासों को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने पोस्ट में लिखा कि 2025 को भारत के लिए एक ऐसे वर्ष के रूप में याद किया जाएगा, जब सरकार ने पिछले 11 वर्षों में हासिल की गई उपलब्धियों के आधार पर निरंतर राष्ट्रीय मिशन के रूप में सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। हमने संस्थानों का आधुनिकीकरण किया, शासन व्यवस्था को सरल बनाया और दीर्घकालिक, समावेशी विकास की नींव को मजबूत किया।
इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने में सक्षम बनाना, उद्यमियों को आत्मविश्वास के साथ इनोवेशन करने में सक्षम बनाना और संस्थानों को स्पष्टता और विश्वास के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करना है।
पीएम ने पोस्ट में आगे लिखा कि जीएसटी 2.0 ने टैक्स स्लैब की संख्या को घटाकर दो – 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे एमएसएमई, किसानों और अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स के साथ आम लोगों पर टैक्स का बोझ कम हुआ है।
इसके अलावा, सरकार ने 12 लाख रुपए तक कमाने वालों पर इनकम टैक्स शून्य कर दिया है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को फायदा हुआ है। वहीं, सरकार ने पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 को इनकम टैक्स एक्ट 2025 से प्रतिस्थापित कर दिया है।
यह सभी सुधार मिलकर भारत को एक पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित कर प्रशासन की ओर ले जाएंगे।पीएम ने पोस्ट में बताया कि छोटी कंपनियों के लिए अब टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपए तय कर दी गई है। इससे कई छोटी कंपनियों पर अनुपालन का बोझ कम हुआ है।
इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनियों में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लोग को बेहतर उत्पाद मिल पाएंगे।संसद में प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक पेश किया गया है। इससे सेबी में शासन के मानदंडों में सुधार होगा, निवेशकों की सुरक्षा बढ़ेगी, अनुपालन का बोझ कम होगा और विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी आधारित प्रतिभूति बाजार सक्षम होगा।
वहीं, संसद के एक ही सत्र (मानसून सत्र में) पांच ऐतिहासिक समुद्री कानून पारित किए गए, जिसमें बिल ऑफ लैडिंग अधिनियम, 2025; माल ढुलाई विधेयक, 2025; तटीय जहाजरानी विधेयक, 2025; व्यापारिक जहाजरानी विधेयक, 2025; और भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025 शामिल हैं। इन सुधारों से दस्तावेजीकरण सरल हो जाता है, विवाद समाधान आसान हो जाता है और रसद लागत कम हो जाती है। साथ ही, 1908, 1925 और 1958 के पुराने कानूनों को भी प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, भारत ने न्यूजीलैंड, ओमान और यूके के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को साइन किया है। इससे निवेश, रोजगार के अवसरों और स्थानीय उद्योगों को फायदा मिलेगा। साथ ही, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के संगठन यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के साथ हुआ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू हो चुका है। यह विकसित यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।
उन्होंने आगे बताया कि विकसित भारत- जी राम जी अधिनियम, 2025 ने रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। इससे ग्राम अवसंरचना और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में खर्च में वृद्धि होगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने को उच्च आय और बेहतर संपत्ति सुनिश्चित करने का साधन बनाना है।
2025 के सुधारों की अहमियत न केवल उनके व्यापक दायरे में है, बल्कि उनकी अंतर्निहित विचारधारा में भी है। हमारी सरकार ने आधुनिक लोकतंत्र की सच्ची भावना के अनुरूप नियंत्रण की जगह सहयोग और नियमन की जगह सुविधा प्रदान करने को प्राथमिकता दी है।
इन सुधारों का उद्देश्य एक समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। विकसित भारत का निर्माण हमारी विकास यात्रा का मार्गदर्शक सिद्धांत है। हम आने वाले वर्षों में भी सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाते रहेंगे।
पीएम मोदी ने अंत में कहा कि मैं भारत और विदेश में सभी से आग्रह करता हूं कि वे भारत के विकास से अपना जुड़ाव और मजबूत करें। भारत पर भरोसा बनाए रखें और हमारे लोगों में निवेश करते रहें!

काशी तमिल संगमम: भारत की शाश्वत आध्यात्मिक, सांस्कृतिक चेतना का जीवंत सेतु

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को रामेश्वरम की पवित्र भूमि पर आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए इस पहल को भारत की शाश्वत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक बताया। 
उपराष्ट्रपति ने काशी–तमिलनाडु संबंध को गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता बताया, जो साझा विरासत के माध्यम से भारत की राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाता है
काशी और तमिलनाडु के बीच अटूट बंधन पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संबंध केवल ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि एक गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता है, जिसने हजारों वर्षों से भारत को एकजुट रखा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आदान-प्रदान भारत की साझा विरासत की पुष्टि करते हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना को गहरा करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी तमिल संगमम महाकवि सुब्रमण्यम भारती के एकजुट भारत के स्वप्न को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल से साकार करता है
उपराष्ट्रपति ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम एकजुट, एकीकृत और आत्मविश्वासी भारत के बारे में कवि के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीजी का यह सपना आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और लक्षित पहलों के माध्यम से साकार हो रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, काशी-तमिल संगम जैसी पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत कर विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करती हैं
प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी-तमिल संगम जैसी पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान, साझा विरासत और आपसी सम्मान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रयास देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर कर रहे हैं।
समापन समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि सहित केंद्रीय मंत्री, विधायक और आईआईटी मद्रास के निदेशक उपस्थित रहे
समापन समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने भाग लिया। साथ ही इस समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन, नैनार नागेंद्रन, विधायक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि समेत कई लोग मौजूद थे।
काशी तमिल संगमम सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों, विचारों के प्रवाह और जीवित परंपराओं से भारत की सांस्कृतिक एकता का उत्सव है
काशी तमिल संगमम एक ऐसे रिश्ते का जश्न है जो सदियों से भारतीय कल्पना में बसा हुआ है। अनगिनत तीर्थयात्रियों, विद्वानों और साधकों के लिए तमिलनाडु और काशी के बीच का सफर कभी भी सिर्फ शारीरिक तौर पर आने-जाने का रास्ता नहीं था। यह विचारों, सोच, भाषाओं और जीवित परंपराओं का एक आंदोलन था। संगमम इसी भावना से प्रेरित है, एक ऐसे बंधन को जिंदा करता है, जिसने पीढ़ियों से भारत के सांस्कृतिक माहौल को शांतिपूर्वक आकार दिया है।
आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान काशी तमिल संगमम भारत की सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक निरंतरता सुदृढ़ करने का प्रयास बना
जब भारत आजादी के 75 साल पूरे होने पर पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाए जाने के महत्व के बारे में गहराई और गंभीरता से सोच रहा था और अपनी सभ्यतागत विरासत की गहराई को फिर खोज रहा था, संगमम देश को जोड़ने वाली सांस्कृतिक निरंतरता को फिर से पक्का करने के लिए एक उद्देश्यपूर्ण कोशिश के तौर पर सामने आया।
 



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