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सीएम उमर अब्दुल्ला ने की घोषणा, कुलगाम आतंकी हमले में मारे गए मजदूरों के परिवारों को 10-10 लाख का मुआवजा

01-Aug-2026
नई दिल्ली(शोर संदेश)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम जिले के केल्लम गांव में शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है। इसके साथ पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की है।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम के देवसर इलाके में दो बाहरी मजदूरों की बर्बर हत्या की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही कहा, “हम पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति और साहस मिले। कमजोर लोगों को निशाना बनाना पूरी तरह से अमानवीय कृत्य है जिसकी कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने मारे गए लोगों के परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख मुआवजा राशि देने की घोषणा की। यह राशि जिला प्रशासन की ओर से दी जाने वाली 6-6 लाख की तत्काल सहायता के अलावा होगी। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
शुक्रवार शाम को आतंकवादियों ने केल्लम गांव में ईंट भट्ठे के दो मजदूरों पर करीब से गोली चलाकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। दोनों घायल मजदूरों को अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दीपक रात्रे (24) ने दम तोड़ दिया, जबकि डॉक्टरों ने गंभीर रूप से घायल बोपिंदर (28) को विशेष उपचार के लिए एसकेआईएमएस रेफर कर दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि बोपिंदर को शुक्रवार देर शाम अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से श्रीनगर शहर के सौरा स्थित सुपर स्पेशियलिटी शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) में गंभीर हालत में स्थानांतरित किया गया था। इलाज के दौरान शनिवारसुबह बोपिंदर की मौत हो गई।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा था, “कुलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले में छत्तीसगढ़ के एक मजदूर की मौत हो गई। मैंने डीजीपी नलिन प्रभात और सुरक्षा के शीर्ष अधिकारियों से बात की। मैं इस कायरतापूर्ण हरकत की कड़ी निंदा करता हूं। मैंने सुरक्षा बलों को अपने ऑपरेशन तेज़ करने और आतंकवादियों को खत्म करने का निर्देश दिया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर ली है और दोषियों को सजा दिलाने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ के एक और घायल मजदूर को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। पीड़ित परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं और मैं घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पूरा देश इन परिवारों के साथ खड़ा है।”
 

 


प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है : पीएम मोदी

30-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए देशवासियों को भारतीय संस्कृति के गूढ़ दर्शन, पर्यावरण संरक्षण और सनातन परंपराओं से जुड़ने का एक खास संदेश दिया है। संस्कृत श्लोकों (सुभाषित) और उनके मर्मस्पर्शी हिंदी अर्थों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने प्रकृति के प्रति सेवाभाव और कृतज्ञता व्यक्त करने की बात कही। उन्होंने लिखा, “प्रकृति, पर्यावरण और समस्त सृष्टि का सम्मान हमारे अस्तित्व के मूल में है। आइए, हम इनके प्रति पूरी कृतज्ञता और सेवाभाव के साथ एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहभागी बनें।”
इससे पहले बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पीएम मोदी ने गुरु-शिष्य परंपरा को नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुसंस्कारित भी करते हैं।
इससे पूर्व बीते दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा गया था, “प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।” उन्होंने संस्कृत श्लोक, “लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः ॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः ॥” भी साझा किया था।
जिसका हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। अतः दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों। वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।
 

सावन माह के शुभारंभ के साथ महाकाल मंदिर में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब, ‘जय महाकाल’ जयघोष से गूंजा मंदिर

30-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भगवान शिव को समर्पित सावन मास के शुभारंभ के साथ आज गुरुवार को उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सावन के पहले दिन तड़के आयोजित बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। देर रात से ही भक्त दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए। मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद पंचामृत अभिषेक, दिव्य शृंगार और भोग की प्रक्रिया संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। आरती का अलौकिक दृश्य देखकर भक्तों ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि सावन के पहले दिन भस्म आरती में शामिल होना उनके लिए महाकाल का विशेष आशीर्वाद है।
भस्म आरती में पहली बार शामिल हुए एक श्रद्धालु ने बताया कि वह स्वयं को बेहद सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा कि जन्मदिन के अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन होना उनके जीवन का सबसे अनमोल उपहार है। उन्होंने इस दिव्य अनुभव को शब्दों से परे बताते हुए कहा कि महाकाल की कृपा से उन्हें आत्मिक शांति की अनुभूति हुई।
इस दौरान पंजाबी गायक दीप मनी भी महाकाल मंदिर पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया। उन्होंने न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए बाबा महाकाल के दर्शन को बेहद शांतिपूर्ण और दिव्य अनुभव बताया। सावन के पहले दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर महाकाल मंदिर की धार्मिक महत्ता और भक्तों की अटूट आस्था को उजागर किया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं, जिससे दर्शन और पूजा-अर्चना का क्रम सुचारु रूप से चलता रहा।
एक भक्त ने कहा कि यह सदियों पुरानी परंपरा है। मंदिर के दरवाज़े सुबह 3 बजे खुले और बाबा महाकाल की विशेष पूजा और पंचामृत अभिषेक (दही, दूध, शहद, चीनी और घी से) किया गया, जिसके बाद केसर से स्नान कराया गया। भस्म आरती से पहले बाबा को भांग से विशेष रूप से सजाया गया। एक भक्त ने न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा कि आज से सावन की शुरुआत हो रही है, जो भगवान शिव का प्रिय महीना है। महाकाल के भक्तों के लिए ऐसा लग रहा है जैसे कोई बड़ा त्योहार शुरू हो गया हो। बाबा महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए और ऐसा महसूस हुआ मानो वे स्वयं हमारे बीच मौजूद हों।

 


दिल्ली-एनसीआर में आज हो सकती है तेज बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

30-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए आज गुरुवार को येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार गुरुवार को दिनभर आसमान में बादलों का डेरा रहेगा और कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं का भी सामना लोगों को करना पड़ सकता है। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 30 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। वहीं, अधिकतम आर्द्रता 95 प्रतिशत और न्यूनतम 80 प्रतिशत तक रह सकती है, जिससे उमस भी महसूस होगी। हालांकि, बारिश और तेज हवाओं के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
आईएमडी के अनुसार 30 जुलाई को सुबह, दोपहर और रात, तीनों समय गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि दिनभर अलग-अलग स्थानों पर थंडरस्टॉर्म, बिजली चमकने और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। ऐसे में वाहन चालकों को सावधानी बरतने, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों या खुले स्थानों पर खड़े न होने की सलाह दी गई है। इसके बाद 31 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही बना रहेगा।
पूर्वानुमान के अनुसार, इस दिन अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। आर्द्रता 85 से 65 प्रतिशत के बीच रह सकती है। पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होने का अनुमान है। इस दिन किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
वहीं, 1 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री, जबकि आर्द्रता 95 से 75 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार दिनभर बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। इस दिन भी कोई विशेष चेतावनी नहीं है। 2 अगस्त को भी मौसम लगभग समान रहेगा। तापमान 33/25 डिग्री सेल्सियस रहेगा। पूर्वानुमान के अनुसार आंशिक नहीं बल्कि सामान्य रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होती रहेगी।
3 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन भी मौसम विभाग ने बादल और हल्की बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। वहीं 4 अगस्त को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। इस दिन भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान से साफ है कि 30 जुलाई से लेकर 4 अगस्त तक पूरे दिल्ली-एनसीआर में मानसून सक्रिय रहेगा। 30 जुलाई को येलो अलर्ट के चलते तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना सबसे अधिक रहेगी, जबकि इसके बाद के दिनों में हल्की बारिश और बादलों का सिलसिला जारी रहेगा।

राष्ट्रपति मुर्मु की रोमानिया यात्रा में तीन समझौते, 2028 होगा ‘भारत-रोमानिया इनोवेशन वर्ष’

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की रोमानिया की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और रोमानिया ने अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वर्ष 2028 को ‘भारत-रोमानिया इनोवेशन वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने विशेष ब्रीफिंग में बताया कि दोनों राष्ट्रपतियों की मौजूदगी में तीन एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और रोमानिया के नेशनल अथॉरिटी फॉर साइंटिफिक रिसर्च के बीच 2026-2029 की अवधि के लिए विज्ञान एवं तकनीक सहयोग को लेकर हुआ। इसके तहत प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं तकनीक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान तथा कृषि विज्ञान के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
दूसरा समझौता बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी में भारतीय अध्ययन के लिए ‘इंडिया चेयर/आईसीसीआर चेयर’ की स्थापना से संबंधित है। इसका उद्देश्य शिक्षा, भारतीय भाषाओं, संस्कृति और अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
तीसरा समझौता भारत के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय तथा रोमानिया की नेशनल स्पोर्ट्स एजेंसी के बीच खेल सहयोग को लेकर हुआ। जिम्नास्टिक और तैराकी जैसे खेलों में रोमानिया की विशेषज्ञता को देखते हुए खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, अनुभवों के आदान-प्रदान और खेल सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सिबी जॉर्ज ने बताया कि दोनों देशों ने 2028 में राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे वर्ष को ‘भारत-रोमानिया इनोवेशन वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस दौरान नवाचार, विज्ञान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वार्ता के दौरान दोनों राष्ट्रपतियों ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। रोमानिया ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत के प्रति एकजुटता व्यक्त की थी। राष्ट्रपति मुर्मु ने वर्ष 2022 में यूक्रेन से भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी में रोमानिया सरकार द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार भी जताया।
दोनों देशों ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। राष्ट्रपति मुर्मु ने रोमानिया को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को अपनाने की संभावनाएं तलाशने का निमंत्रण दिया, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने रोमानिया के लिए भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या दोगुनी करने की घोषणा की। इन कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहित आधुनिक विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही रोमानियाई राजनयिकों को सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस में एआई और साइबर डिप्लोमेसी जैसे विषयों पर आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया गया।





 

शिक्षा जन्मस्थान नहीं, मेहनत और सपनों की उड़ान देखती है : राष्ट्रपति मुर्मु

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को रोमानिया की बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज से मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद कहा कि शिक्षा उनके जीवन में परिवर्तन लाने वाली सबसे बड़ी शक्ति रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में समान अवसर प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और यह व्यक्ति की पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और आगे बढ़ने की इच्छा को महत्व देती है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म एक छोटे से गांव में सीमित संसाधनों वाले परिवार में हुआ था। वह अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली लड़की थीं। उन्होंने कहा, “इस अनुभव ने मुझे किसी भी किताब से अधिक यह सिखाया कि शिक्षा सबसे बड़ा बराबरी का माध्यम है। यह नहीं पूछती कि आपका जन्म कहां हुआ है, बल्कि यह देखती है कि आप कितनी दूर तक जाने की कोशिश करते हैं।”
राष्ट्रपति मुर्मु को शिक्षा, जनसेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए विश्वविद्यालय के सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान, मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय के रेक्टर, सीनेट और पूरे शैक्षणिक समुदाय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह यह सम्मान 1.4 अरब भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर रही हैं। उन्होंने इसे भारत और रोमानिया के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति ने अपने शिक्षक के रूप में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि एक साधारण-सी कक्षा भी किसी परिवार और पूरे समुदाय का भविष्य बदलने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सकारात्मक असर पूरे समाज पर पड़ता है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के साथ-साथ समझदारी, नैतिकता और इंसानियत को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि तकनीकी प्रगति मानव कल्याण के लिए उपयोगी साबित हो। 
 

 


आयकर दिवस पर निर्मला सीतारमण का 5R मंत्र, टैक्स विवाद घटाने और करदाता सुविधा पर जोर

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित 167वें आयकर दिवस समारोह में जवाबदेह और करदाता-केंद्रित टैक्स व्यवस्था के लिए ‘5R’ की रूपरेखा पेश की। उन्होंने टैक्स व्यवस्था में अधिक निश्चितता लाने, कानूनी विवादों को कम करने और ईमानदार करदाताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इस दौरान आयकर अधिनियम, 2025 को कर प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार बताते हुए विभाग की तकनीक आधारित पहलों और सेवा सुधारों की भी सराहना की।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आयकर विभाग अब केवल कर संग्रह करने वाली संस्था नहीं रह गया है, बल्कि यह निष्पक्ष, कुशल, पारदर्शी और करदाता-केंद्रित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आयकर अधिनियम, 2025 को कानून को सरल बनाने, अनुपालन लागत घटाने और कारोबार सुगमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण सुधार बताया। उन्होंने ई-फाइलिंग पोर्टल की बेहतर क्षमता, रिटर्न प्रोसेसिंग में तेजी, शीघ्र रिफंड और शिकायत निवारण में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग को केवल शिकायतों का समाधान ही नहीं, बल्कि उनकी मूल वजहों की पहचान कर स्थायी समाधान विकसित करना चाहिए।
वित्त मंत्री ने करदाता सेवाओं के लिए ‘रिस्पॉन्सिव टैक्स गवर्नेंस’ के 5R सिद्धांत प्रस्तुत किए—
पहचानना (Recognise)
प्रतिक्रिया देना (Respond)
समाधान करना (Resolve)
विचार करना (Reflect)
सुधार करना (Reform)
उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाताओं को सुविधा मिलनी चाहिए, अनजाने में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए तथा कर प्रशासन को अपने अधिकारों का उपयोग विनम्रता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि करदाता भारत के विकास के भागीदार हैं और टैक्स संबंधी निश्चितता बढ़ाकर मुकदमों में कमी लाने की दिशा में निरंतर कार्य होना चाहिए।
निर्मला सीतारमण ने आधुनिक बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन में निवेश को संस्थागत क्षमता मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, फोरेंसिक अकाउंटिंग, अंतरराष्ट्रीय कराधान, ट्रांसफर प्राइसिंग, डिजिटल एसेट्स, साइबर सुरक्षा और नेतृत्व विकास जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर बल दिया। उन्होंने विभाग से स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देने, करदाता अनुभव को सरल बनाने, तकनीक का जिम्मेदार उपयोग करने और जनता का विश्वास मजबूत करने का आह्वान किया।
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने आयकर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 तथा नए नियम और प्रपत्र सरल, स्पष्ट और करदाता-अनुकूल कर प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार हैं। उन्होंने करदाताओं तक पहुंच बढ़ाने, शिकायतों के समाधान, कानूनी विवादों के बेहतर प्रबंधन और प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं को मजबूत करने के विभागीय प्रयासों की सराहना की। निर्मला सीतारमण ने कहा कि सुधारों के केंद्र में करदाता होने चाहिए और अनुपालन में आसानी, कर निश्चितता तथा गुणवत्तापूर्ण सेवाओं पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए।
सीबीडीटी के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि विभाग ने कानूनी विवादों में कमी, अपीलों के शीघ्र निपटारे और एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट्स के माध्यम से कर निश्चितता बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। निर्मला सीतारमण ने रिटर्न प्रोसेसिंग, रिफंड, अपील-प्रभाव आदेश और शिकायत निवारण में सुधार का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘प्रारंभ’ और ‘संवाद’ जैसी पहलों के माध्यम से करदाताओं से संवाद मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि पैन 2.0, आईटीबीए 2.0, आईईसी 3.0, कर साथी और सक्षम नज जैसी तकनीकी पहलों के जरिए कर अनुपालन को आसान बनाने और करदाता अनुभव बेहतर करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
समारोह के दौरान वित्त मंत्री ने आयकर विभाग के छह प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन किया। इनमें अंतरराष्ट्रीय कराधान पर एफटीएंडटीआर डिवीजन की पहली वार्षिक रिपोर्ट, सूचना के आदान-प्रदान संबंधी नियमावली, एफएटीसीए और सीआरएस गाइडेंस नोट, क्रिप्टो-एसेट सेवा प्रदाताओं के लिए भारत का पहला व्यापक गाइडेंस नोट, एपीए कार्यक्रम की वार्षिक रिपोर्ट तथा कर प्रशासन के डिजिटलीकरण पर आधारित प्रकाशन शामिल हैं। कार्यक्रम में कराधान के इतिहास पर आधारित चार लघु फिल्में, कर्मयोगी शिक्षा पथ पोर्टल, वित्त वर्ष 2025-26 में आयकर विभाग की उपलब्धियां तथा डिजिटल युग में करदाता संवाद की नई पहलों का भी प्रदर्शन किया गया। 

 

कैबिनेट ने ‘भव्य-रसायन योजना’ को दी मंजूरी, तीन समर्पित रासायनिक पार्क होंगे विकसित : पीएम मोदी

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भव्य-रसायन योजना को मिली मंजूरी भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, साझा सुविधाओं और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ रासायनिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक और उत्पादन लागत घटेगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
सरकार ने योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपए पार्कों की आंतरिक अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू रहेगी।
योजना के तहत संबंधित राज्य सरकार को प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करना होगा। इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इस योजना से कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और सहायक उद्योगों सहित रसायन क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूती मिलेगी। साझा बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा परिवहन और प्रबंधन लागत में कमी आएगी, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
योजना के माध्यम से भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में घरेलू और विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा।
भव्य-रसायन योजना के तहत विकसित होने वाले पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधाएं तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और रसायन उद्योग का सतत विकास संभव हो सकेगा।
सरकार का कहना है कि रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का विस्तार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों को भी गति देगा। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योजना के तहत विकसित किए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा। इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप साझा अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को एकीकृत और आधुनिक औद्योगिक वातावरण मिल सके।
 

‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव में दिख रही भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत, 116 पारंपरिक बुनाई शैलियों का प्रदर्शन

25-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हथकरघा) का कार्यालय नई दिल्ली के जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम (सीसीआईई) में ‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव का आयोजन कर रहा है। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (7 अगस्त) के उपलक्ष्य में आयोजित यह महोत्सव 24 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। महोत्सव का उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा परंपराओं, बुनकरों की उत्कृष्ट कारीगरी और देश की विविध वस्त्र विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत करना है।
महोत्सव में देशभर की 116 पारंपरिक बुनाई शैलियों पर आधारित उत्कृष्ट हस्तनिर्मित वस्त्र और परिधान प्रदर्शित किए गए हैं। यह प्रदर्शनी भारतीय बुनकरों की पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला, कलात्मक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है।
प्रदर्शनी में ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा सहित कई राज्यों की प्रसिद्ध हथकरघा परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है। यहां बनारसी, जामदानी, कांचीपुरम सिल्क, संबलपुरी इकत, पैठणी, कानी पश्मीना, बावन बूटी, कोटपाड, इलकल, कासरगोड, हिम्रू और रिषा जैसी विशिष्ट बुनाई शैलियों को देखा जा सकता है, जो अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान और वस्त्र परंपरा को दर्शाती हैं।
उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ महोत्सव का उद्देश्य हस्तनिर्मित वस्त्रों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और टिकाऊ, कारीगर-आधारित उत्पादन प्रणाली को प्रोत्साहित करना भी है। यह आयोजन बुनकरों, डिजाइनरों, शोधकर्ताओं, संग्राहकों, खरीदारों और आम नागरिकों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध करा रहा है।
केंद्र सरकार ने कहा है कि वह कारीगरों को निरंतर सहयोग, डिजाइन नवाचार, बाजार विस्तार और उपभोक्ता जागरूकता के माध्यम से देश की समृद्ध हथकरघा विरासत के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन के लिए प्रतिबद्ध है। ‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो भारत की जीवंत वस्त्र परंपराओं का उत्सव मनाने के साथ नागरिकों को स्थानीय बुनकरों और हस्तनिर्मित उत्पादों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करता है।
‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव 24 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली के जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एम्पोरियम में आयोजित किया जा रहा है। आम जनता इस अवधि के दौरान महोत्सव का भ्रमण कर भारत की कालजयी हथकरघा विरासत और अद्वितीय शिल्पकला का अनुभव कर सकती है।







 

प्रधानमंत्री मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने देवशयनी एकादशी पर देशवासियों को दी शुभकामनाएं

25-Jul-2026

नई दिल्ली।(शोर संदेश) देशभर में शनिवार को देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आषाढ़ी एकादशी के पवित्र मौके पर बधाई। यह शुभ दिन भक्ति और दया के हमेशा रहने वाले संदेश के बारे में है। भगवान विट्ठल का आशीर्वाद खुशी, मेलजोल और खुशहाली लाए और हमें एक बेहतर समाज की ओर ले जाए। वह हर इंसान की भलाई और इज्जत के लिए बिना थके सेवा करने और काम करने के हमारे इरादे को और मजबूत करें।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद सभी पर बना रहे। यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए तथा हमें सेवा, करुणा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे।”
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संदेश में कहा, “देवशयनी आषाढ़ी एकादशी पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान विट्ठल की कृपा सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पर श्लोक “सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत्सुप्तं भवेदिदम्, विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत्सर्वं चराचरम्॥” साझा करते हुए लिखा, “आप सभी को देवशयनी (आषाढ़ी) एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं। पावन चातुर्मास के शुभारंभ का यह अवसर आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपादृष्टि आप सभी पर सदैव बनी रहे।”
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने संदेश में कहा, “सभी लोगों को आषाढ़ी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं। श्री पांडुरंग विट्ठल और माता रुक्मिणी देवी की कृपा सभी पर बनी रहे। यह पावन पर्व राज्य में सुख, शांति, खेती-बाड़ी में समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए।”
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने लिखा, “सभी को टोली एकादशी (आषाढ़ी एकादशी) के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान महाविष्णु का दिव्य आशीर्वाद प्रत्येक घर में शांति, समृद्धि, खुशी, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करे। यह पावन अवसर हमें भक्ति, करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहे।” 








 


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