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मकर संक्रांति पर प्रयागराज में आस्था का महासंगम, दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम में स्नान करने का अनुमान

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रयागराज में माघ मेला इस बार भी अपने रंग में रंगा हुआ है। मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी के शुभ संयोग की वजह से संगम पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। बुधवार सुबह 8 बजे तक ही करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर आस्था का अनुभव लिया। इस दौरान युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई संगम में डुबकी लगाता हुआ नजर आया। 
इस कड़ाके की ठंड में संगम तट पर श्रद्धालुओं की संख्या देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये सिर्फ स्नान का अवसर नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपरा का जश्न भी है। वहीं, इस बार मकर संक्रांति स्नान पर्व पर अनुमान है कि 2 करोड़ से ज्यादा लोग संगम में डुबकी लगाएंगे।
ऐसे में सुरक्षा-व्यवस्था भी बहुत सख्त है। पुलिस और सुरक्षा बल हर जगह तैनात हैं। मेला प्रशासन ने 13 जनवरी से ही चार पहिया वाहनों की एंट्री बैन कर दी है, ताकि जगह-जगह भीड़ नियंत्रण में रहे। पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि संगम तट पर घुड़सवार पुलिस, फुट पेट्रोलिंग, जल पुलिस और आरएएफ जवान पूरे एहतियात के साथ काम कर रहे हैं। साथ ही बाडराज कंपनी भी लगी हुई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने बताया कि भीड़ को सुगमता से संगम तक लाने और वहां से वापस उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष डायवर्जन प्लान बनाया गया है।
कमिश्नर ने कहा कि अभी भीड़ अच्छी है और सभी लोग सुरक्षित हैं। हालांकि यदि भविष्य में भीड़ और बढ़ती है, तो आपातकालीन योजनाएं तैयार हैं। एआई कैमरों के जरिए भीड़ की लगातार मॉनिटर की जा रही है और उसी के आधार पर प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है। गौरतलब है कि 23 साल बाद मकर संक्रांति पर एकादशी का दुर्लभ संयोग बना है, जिस वजह से इस दिन स्नान का महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस मौके पर लोग सिर्फ प्रयागराज ही नहीं, बल्कि वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक शहरों से भी अपने-अपने घाटों पर पहुंच रहे हैं। हर जगह श्रद्धालुओं का हुजूम आस्था की गूंज और भक्ति भाव का प्रतीक बनता दिख रहा है।












 

‘ऑपरेशन पवन’ के शांति सैनिकों को मिल रही सम्मानजनक पहचान : राजनाथ सिंह

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) ‘ऑपरेशन पवन’ में भारतीय सेनाओं ने अद्भुत साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया। कई सैनिकों ने कर्तव्य पथ पर चलते हुए वीरगति प्राप्त की। उनका साहस और बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। बुधवार को सशस्त्र बल पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1987 से 1990 के बीच श्रीलंका में शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय सद्भाव बनाए रखने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन पवन’ में भारतीय सेना के कई वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ‘ऑपरेशन पवन’ में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को खुले मन से स्वीकार कर रही है और हर स्तर पर उसे मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2015 में श्रीलंका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इंडियन पीस कीपिंग फोर्स मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। अब नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में भी इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के योगदान को पहचान और सम्मान दिया जा रहा है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि लगभग 40 वर्ष पहले इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के रूप में श्रीलंका में तैनात रहे सभी पूर्व सैनिकों का स्मरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस समय भारतीय सेनाओं को भेजने के निर्णय पर बहस हो सकती है, लेकिन ‘ऑपरेशन पवन’ में शामिल सैनिकों की उपेक्षा किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराई जा सकती। भारतीय सेना के संघर्ष और बलिदान का सम्मान किया जाना चाहिए था।
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी सैनिक के लिए रिटायरमेंट केवल एक शब्द है। सैनिक कभी रिटायर नहीं होता। वर्दी का रंग, कार्यस्थल या आसपास के लोग बदल सकते हैं, लेकिन दिल में देशभक्ति और सेवा की भावना हमेशा जीवित रहती है।
उन्होंने कहा कि पूरा देश हर क्षेत्र में सैनिकों और पूर्व सैनिकों के योगदान को महसूस कर रहा है। सरकार का मानना है कि सैनिक और पूर्व सैनिक देश के मजबूत स्तंभ हैं। उनकी देखभाल करना हमारा नैतिक और भावनात्मक कर्तव्य है। बीते वर्षों में पूर्व सैनिकों के लिए कई ठोस फैसले लिए गए हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की मांग को सरकार ने ईमानदारी से लागू किया। इससे पूर्व सैनिकों के जीवन में वित्तीय स्थिरता आई और यह विश्वास मजबूत हुआ कि देश उनके साथ न्याय करता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर वे सभी पूर्व सैनिकों को बधाई देते हैं और वीरगति प्राप्त सैनिकों, देश सेवा में समर्पित पूर्व सैनिकों तथा वर्तमान सैनिकों के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक केवल सेवा से रिटायर हुए जवान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं। 
 

तीन देशों के राजदूतों ने राष्ट्रपति मुर्मु को सौंपे अपने परिचय पत्र

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में तीन देशों के राजदूतों की तरफ से दिए गए उनके परिचय पत्र स्वीकार किए।
परिचय पत्र सौंपने वालों में त्रिनिदाद और टोबैगो के उच्चायुक्त एवं ऑस्ट्रिया और अमेरिका के राजदूत 
राष्ट्रपति भवन के अनुसार, परिचय पत्र सौंपने वालों में त्रिनिदाद और टोबैगो के उच्चायुक्त चंद्रदथ सिंह, ऑस्ट्रिया के राजदूत डॉ. रॉबर्ट ज़िशग और अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे। https://x.com/rashtrapatibhvn/status/2011340185196491227?s=20 इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी राजदूतों का स्वागत किया और उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। 






 

गोरखपुर महोत्सव में पहुंचे बादशाह, सीएम योगी से मुलाकात को बताया खास

14-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) रैपर और गीतकार बादशाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस मुलाकात को उन्होंने बेहद खास बताया और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर अपने अनुभव जाहिर किए।
बादशाह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के व्यक्तित्व की सराहना की। उन्होंने लिखा कि सीएम योगी से मिलकर उन्हें एक अजीब-सी गहरी शांति महसूस हुई। बादशाह ने लिखा, “योगी आदित्यनाथ जी से मिलकर आज एक शांति महसूस हुई। उनके चेहरे पर एक अलग ही रोशनी है, वो तेज जो शब्दों से नहीं, बल्कि भीतर की स्थिरता से आता है।”
बादशाह ने मुख्यमंत्री योगी को बेहद शांत और सहज स्वभाव का बताया। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ में जानवरों के प्रति गहरा प्रेम, इंसानों के लिए करुणा और जीवन का एकमात्र उद्देश्य देश की सेवा, धर्म की रक्षा और लोगों के लिए पूर्ण समर्पण साफ झलकता है।
अपने पोस्ट में बादशाह ने आगे लिखा, “जो लोग उन्हें दूर से देखते हैं, वो बहुत कुछ नहीं समझ पाते। लेकिन पास से मिलने पर पता चलता है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत सत्ता नहीं, बल्कि उनकी संवेदना है।”
गौरतलब है कि बादशाह इस साल गोरखपुर महोत्सव में शिरकत करने पहुंचे थे। 13 जनवरी को उनका लाइव कॉन्सर्ट आयोजित हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक शामिल हुए।
बादशाह के अलावा गोरखपुर महोत्सव में वरुण जैन, भोजपुरी स्टार पवन सिंह, मैथिली ठाकुर समेत कई अन्य कलाकार भी आकर्षण का केंद्र रहे। इस महोत्सव का उद्घाटन पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया था।
गोरखपुर महोत्सव उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का सबसे बड़ा वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव माना जाता है। यह गोरखपुर की विरासत, आधुनिकता और पर्यटन को बढ़ावा देता है।
यह महोत्सव हर साल जनवरी में आयोजित होता है और इस बार 2026 में 11 जनवरी से 17 जनवरी तक चंपा देवी पार्क (रामगढ़ ताल के किनारे) में आयोजित किया जा रहा है।
यह महोत्सव कला, संस्कृति, संगीत, नृत्य, व्यापार मेले और स्थानीय उत्पादों का शानदार संगम है। इसमें मेगा ट्रेड फेयर, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट प्रदर्शनी, फूड स्टॉल, बच्चों की शैक्षणिक व सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम और स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जाता है। 










 

मकर संक्रांति से पहले गंगासागर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

13-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) मकर संक्रांति से पहले गंगासागर मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। बड़ी संख्या में लोग गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के पवित्र संगम पर स्नान कर सूर्य देव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ इस पवित्र तीर्थ में पहुंच रहे हैं।
पवित्र गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम को गंगासागर कहा जाता है, जिसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पश्चिम बंगाल के गंगासागर स्थित कपिल मुनि आश्रम में यह विशाल धार्मिक मेला आयोजित होता है।
गंगासागर मेला कुंभ मेले के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा हिंदू धार्मिक मेला माना जाता है। मकर संक्रांति के मौके पर देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं और पुण्य लाभ की कामना करते हैं।
मेले का पूरा इलाका धार्मिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण से गूंज रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालु भक्ति भजन और कीर्तन गाते हुए आस्था में लीन नजर आ रहे हैं।
मेले में पहुंचे श्रद्धालु कूर्मा चैतन्य दास ने बताया कि इस पवित्र आयोजन में शामिल होकर वह बेहद खुश और उत्साहित हैं। उन्होंने बातचीत में कहा, “इस युग में पवित्र नामों का जाप हमारी चेतना को शुद्ध करने का माध्यम है। कृष्ण के पवित्र नाम और स्वयं कृष्ण में कोई अंतर नहीं है। जैसे सूर्य गंदी जगह को साफ कर देता है, वैसे ही कृष्ण के नामों का जाप हमारी चेतना को शुद्ध करता है।”
दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम कर रहा है। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, मेडिकल टीमें और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं।
एक अन्य श्रद्धालु आचार्य मनोज पांडे ने मेले के लिए किए गए प्रशासनिक इंतजामों की सराहना की। एक भक्त ने कहा, “कपिल मुनि आश्रम में इस पवित्र अवसर पर देश और विभिन्न राज्यों से आए सभी भक्तों का स्वागत है। यहां होने वाली भव्य गंगा आरती का यह तीसरा वर्ष है।”
तीर्थयात्री कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करते और आशीर्वाद लेते नजर आए। मकर संक्रांति की ठंडी सुबह में श्रद्धालु इस विश्वास के साथ पवित्र डुबकी लगाते हैं कि गंगासागर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

पीएम मोदी ने प्रेरक श्लोक उद्धृत कर युवाओं को दिया संदेश

13-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कठोपनिषद का प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक उद्धृत करते हुए आत्मजागरण, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट में श्लोक साझा किया- “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया दुर्गं पथस्तत्कवयो वदन्ति॥”
https://x.com/narendramodi/status/2010910548590985607?s=20
इस श्लोक का अर्थ है कि उठो, जागो और श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त कर ज्ञान हासिल करो। यह मार्ग आसान नहीं है, बल्कि उस्तरे की धार की तरह कठिन है, लेकिन इसी कठिन मार्ग पर चलकर सफलता और आत्मबोध प्राप्त होता है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे चुनौतियों से घबराएं नहीं, बल्कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और निरंतर प्रयास के साथ अपने सपनों को साकार करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है और ऐसे प्रेरक विचार उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं। 
 

 


कड़ाके की ठंड और कम ऑक्सीजन में भी प्रोजेक्ट हिमांक का मिशन जारी, सड़कों को चालू रखने में जुटी टीम

13-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) कड़ाके की ठंड, बेहद कम ऑक्सीजन और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच भी सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का प्रोजेक्ट हिमांक लगातार चुनौतीपूर्ण हालात को मात दे रहा है, क्योंकि भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा से जुड़े जवानों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे।
रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि 18,300 फीट से अधिक ऊंचाई पर, बेहद कठिन परिस्थितियों में भी बीआरओ की टीमें रणनीतिक सड़कों को चालू रखने में जुटी हुई हैं ताकि अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों तक हर मौसम में संपर्क बना रहे। रक्षा मंत्रालय ने इस समर्पण को ‘सेवा से ऊपर कुछ नहीं’ की भावना का प्रतीक बताया है। मंत्रालय के अनुसार, विपरीत परिस्थितियों में गढ़ा गया यह संकल्प ही प्रोजेक्ट हिमांक की असली पहचान है।
गौरतलब है कि 5 अक्टूबर को बीआरओ ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की। प्रोजेक्ट हिमांक के तहत पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास मिग ला दर्रे पर 19,400 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क का निर्माण कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। इस उपलब्धि के साथ बीआरओ ने वर्ष 2021 में उमलिंग ला (19,024 फीट) पर बनाए गए अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
इस ऐतिहासिक कार्य का नेतृत्व ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव ने किया। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद बीआरओ की टीम ने मौके पर तिरंगा और संगठन का ध्वज फहराकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।
नई सड़क लिकरू-मिग ला-फुकचे एलाइनमेंट का हिस्सा है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह हानले से लेकर सीमा के पास स्थित फुकचे गांव तक जाने वाला तीसरा महत्वपूर्ण मार्ग बनाती है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सैन्य आवाजाही और रसद आपूर्ति को बड़ी मजबूती मिलेगी।
सिर्फ रणनीति ही नहीं, यह सड़क लद्दाख में पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद जगाती है। यहां से दिखने वाला सिंधु घाटी का मनोरम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।
वर्ष 1985 में शुरू किया गया प्रोजेक्ट हिमांक, बीआरओ की एक अहम पहल है, जो लद्दाख जैसे कठिन और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और रखरखाव का कार्य करता है। उमलिंग ला और मिग ला जैसी सड़कें न केवल देश की सामरिक ताकत को मजबूत करती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाती हैं।
 

देश में मनाया जा रहा लोहड़ी का पर्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

13-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) देश में आज मंगलवार को लोहड़ी का त्योहार मनाया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने इस मौके पर देशवासियों को बधाई दी।
अमित शाह ने सभी देशवासियों को लोहड़ी की शुभकामनाएं! दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “उत्साह, उमंग व नई ऊर्जा के प्रतीक ‘लोहड़ी’ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व सभी की सुख-समृद्धि का माध्यम बने।”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हर्ष और उल्लास के पावन पर्व लोहड़ी और भोगी की हार्दिक शुभकामानाएं। यह पावन पर्व सभी को खुशहाली, सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करे।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाताओं के परिश्रम को समर्पित पावन पर्व ‘लोहड़ी’ की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां, ऊर्जा और नई उमंग लेकर आए, यही कामना है।”
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिखा, “समस्त प्रदेशवासियों को हर्ष और उल्लास के पावन पर्व लोहड़ी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। यह पर्व आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्यता और नई ऊर्जा का संचार करे, यही कामना है।”
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लिखा कि समस्त प्रदेशवासियों को खुशियों और नई उमंगों के पावन पर्व लोहड़ी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! एकता, समृद्धि, और उत्साह का संदेश देने वाला लोहड़ी का पर्व नकारात्मकता को जलाकर सकारात्मकता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आप सभी को लोहड़ी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। लोहड़ी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है, जो सह-अस्तित्व, सामूहिक उल्लास और आपसी सौहार्द की भावना को मजबूत करती है। सूर्य के उत्तरायण होने का यह शुभ संकेत और नई फसलों का आगमन हमारे अन्नदाताओं के परिश्रम और समर्पण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है।”
उन्होंने आगे लिखा कि पवित्र अग्नि की साक्षी में हम नकारात्मकताओं को त्याग कर सद्भाव, समरसता और सहयोग के मूल्यों को अपनाएं। यह पावन ज्योति दिल्ली के हर परिवार को सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य से आलोकित करे। लोहड़ी दी लख-लख बधाइयां। 






 

जर्मन चांसलर मर्ज का दो दिवसीय भारत दौरा संपन्न, स्वदेश रवाना

13-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिवसीय भारत दौरा पूरा कर आज मंगलवार को स्वदेश रवाना हो गए। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें अहमदाबाद एयरपोर्ट पर विदा किया। यात्रा के पहले दिन दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए जो रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर आधारित थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चांसलर मर्ज ने सोमवार को, गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की थी।
इस सफल वार्ता के बाद पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा: “अहमदाबाद में चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की मेजबानी करना खुशी की बात थी। उनकी यात्रा ने भारत-जर्मनी संबंधों में नई गति दी है, क्योंकि हम अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल और राजनयिक संबंधों के 75 साल मना रहे हैं। उन्होंने एशिया में अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना और इससे हम बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। यह मजबूत भारत-जर्मनी संबंधों के प्रति उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य महत्वपूर्ण और उभरती टेक्नोलॉजी में गहरे सहयोग के साथ अपने संबंधों को गुणात्मक रूप से उच्च स्तर पर ले जाने पर सहमत हुए। हमारी जलवायु, भरोसेमंद और लचीली सप्लाई चेन, कौशल विकास, शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने के संयुक्त प्रयासों पर भी बात हुई।”
इससे पहले सोमवार को पीएम मोदी और जर्मन चांसलर मर्ज ने साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी भाग लिया था, और इस वार्षिक कार्यक्रम के रंग, ऊर्जा और सांस्कृतिक जीवंतता को करीब से देखा। बाद में दोनों नेताओं ने पतंगें भी उड़ाईं।
दोनों नेताओं ने जर्मन और भारतीय सीईओ से भी बातचीत की। इसका भी जिक्र पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में किया। उन्होंने कहा, “चांसलर मर्ज और मैंने भारतीय और जर्मन सीईओ से मुलाकात की। भारत और जर्मनी के बीच घनिष्ठ सहयोग पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने हमारी साझेदारी में नई गति दी है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, और कई जर्मन कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। हम आने वाले समय में आर्थिक संबंधों को और गहरा करना चाहते हैं।”
भारत और जर्मनी ने सोमवार को व्यापार, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, दोनों पक्षों ने 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए और रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों में सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से कई नीतिगत घोषणाएं कीं।
पीएम मोदी और मर्ज ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में लगातार हो रही बढ़ोतरी की प्रशंसा की और कहा कि 2024 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है, और यह पॉजिटिव ट्रेंड 2025 में भी जारी रहेगा।
वहीं, 2024 में भारत-जर्मनी के बीच सामान और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया, जो ईयू के साथ भारत के कुल व्यापार का 25 प्रतिशत से ज्यादा है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने जर्मन-इंडियन सीईओ फोरम के जरिए द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, दूरसंचार, स्वास्थ्य और बायोइकोनॉमी सहित महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग में हुई प्रगति का भी स्वागत किया, जो इनोवेशन और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप रोडमैप को मजबूत करता है।
दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पार्टनरशिप पर एक नए संयुक्त घोषणा पत्र के माध्यम से सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक संस्थागत संवाद स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को भी स्वागत योग्य बताया। 

प्रगति मॉडल से यूपी बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन : सीएम योगी

13-Jan-2026
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का सशक्त प्रतीक बन चुका है।
मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। यह केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में आगे बढ़ाया है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था, जो आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज यूपी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है।
योगी ने बताया कि एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की निर्णायक भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपए की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपए की 128 परियोजनाएं (करीब 39%) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपए की 202 परियोजनाएं तय समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रगति पोर्टल के जरिए प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम परियोजनाओं में तेजी आई है।
आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96% है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97% है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में बदल चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। 



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