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चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब: केदारनाथ पहुंचे 14 लाख श्रद्धालु, बद्रीनाथ में बारिश के बावजूद निर्बाध दर्शन जारी

15-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है और हजारों तीर्थयात्री रोजाना पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है जबकि पहाड़ी राज्य के कई हिस्सों में मौसम की स्थिति खराब बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, हर दिन 6,000 से ज्यादा तीर्थ यात्री श्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन कर रहे हैं। वहीं मौजूदा तीर्थयात्रा सीजन के दौरान श्री केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 14 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। हालांकि, अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है क्योंकि लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड के कई इलाकों में सड़कें बंद हो गई हैं, ट्रेकिंग के रास्ते फिसलन भरे हो गए हैं, भूस्खलन हो रहा है और मौसम से जुड़ी अन्य चुनौतियां पैदा हो गई हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के विभिन्न हिस्सों, खासकर चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल जैसे पहाड़ी इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश व खराब मौसम की चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद यात्रा को सुचारू रूप से चलाने के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए व्यापक इंतजाम जारी हैं।
बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने के बाद एक श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हम यहां हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए आए थे। वहां पूजा-अर्चना करने के बाद हमें लगा कि हमें बद्रीनाथ धाम के भी दर्शन करने चाहिए। हम यहां भी आए हैं और यह एक शानदार अनुभव रहा। सब कुछ अच्छा है। लोगों को यहां आना चाहिए, पूजा-अर्चना करनी चाहिए और इस जगह का आनंद लेना चाहिए।”
एक अन्य तीर्थयात्री ने भी मौजूदा मौसम की स्थिति के बावजूद यात्रा के लिए किए गए इंतजामों की सराहना की। श्रद्धालु ने कहा कि इंतजाम अच्छे हैं। हमारी तीर्थयात्रा अच्छी रही क्योंकि मौसम की स्थिति के बावजूद सब कुछ सुचारू रूप से हुआ। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने कहा कि मंगलवार शाम तक के आंकड़ों के मुताबिक, 14 लाख से ज्यादा तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा पूरी कर चुके हैं। अभी मौसम एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। मानसून के दौरान अक्सर सड़कें बंद हो जाती हैं और भूस्खलन का खतरा रहता है। तीर्थयात्रियों को सावधानी से यात्रा करनी चाहिए। उन्हें नदियों को पार करने और झरनों या जलधाराओं के पास जाने से बचना चाहिए क्योंकि पूरे राज्य में भारी बारिश हो रही है।
इससे पहले, मौसम के हालात को देखते हुए गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की थी कि वे यात्रा के दौरान मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित सरकारी विभागों को निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चार धाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए पर्याप्त तैयारियां और जरूरी इंतजाम मौजूद रहें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन किया, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध पर दिया जोर

15-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में ‘सौश्रुतम् 2026’ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। सुश्रुत जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने AIIA के नए एमआरआई सेक्शन का भी उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने आयुर्वेद जगत से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आचार्य सुश्रुत, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है, ने सदियों पहले सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया था। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद, ट्यूमर उपचार और ईएनटी सर्जरी सहित कई जटिल शल्य तकनीकों की शुरुआत की।
राष्ट्रपति ने कहा कि आचार्य सुश्रुत द्वारा रचित ‘सुश्रुत संहिता’ ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को चिकित्सा विज्ञान की नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि मानव कल्याण से जुड़ी हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को समयानुकूल आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर समाज के हित में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का समग्र जीवन दृष्टिकोण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है और इसे वर्तमान समय में भी प्रासंगिक एवं प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत सरकार आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की परंपरा को वैज्ञानिक मानकों पर प्रमाणित करने के प्रयास कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा कि मानकीकृत दस्तावेजीकरण, डिजिटल हेल्थ इंटीग्रेशन और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान तकनीकों के प्रभावी उपयोग से आयुर्वेद को विश्व स्तर पर व्यापक स्वीकृति मिलेगी।
युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासा, ईमानदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक अनुसंधान तथा उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक साक्ष्य विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो, वहां नई तकनीकों के उपयोग से पीछे नहीं हटना चाहिए और आचार्य सुश्रुत के मार्ग पर चलते हुए चिकित्सा नैतिकता तथा मरीजों के प्रति संवेदनशील सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम 2026’ से आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नए ज्ञान का सृजन होगा तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समग्र स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद के योगदान को और सशक्त बनाएंगे।
इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीर

15-Jul-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । भारत रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन लॉन्च के लिए तैयार है। इसे स्वच्छ, हरित और शून्य-उत्सर्जन (जीरो एमिशन) परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर हाइड्रोजन ट्रेन की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन हरियाणा से शुरू होने जा रही है।” उनकी इस पोस्ट के बाद इस परियोजना को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ गया है।
यह परियोजना भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल का हिस्सा है। इस योजना के तहत रेलवे भविष्य में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है, ताकि विरासत (हेरिटेज) और ग्रामीण मार्गों पर चल रहे पुराने डीजल इंजनों की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराया जा सके।
नई ट्रेन को 10 कोच वाले हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 सीटें हैं, जबकि कुल 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी लेकिन नियमित संचालन के लिए इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। चूंकि यह अभी एक पायलट परियोजना है, इसलिए इसे नियंत्रित और सावधानीपूर्वक तरीके से शुरू किया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें चलते-फिरते बिजलीघर की तरह काम करती हैं। इनमें मौजूद हाइड्रोजन गैस और बाहरी वातावरण से मिलने वाली ऑक्सीजन को फ्यूल सेल के भीतर मिलाया जाता है। इस रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जो ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हानिकारक धुआं नहीं निकलता। इसके बजाय केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) और गर्मी उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन ट्रेनों का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क को कार्बन उत्सर्जन से मुक्त बनाना है, खासकर उन मार्गों पर जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना कठिन या बेहद महंगा है। हाइड्रोजन ट्रेनें बिना बड़े बुनियादी ढांचे के इलेक्ट्रिक ट्रेनों जैसे पर्यावरणीय लाभ प्रदान करती हैं और इन्हें डीजल ट्रेनों की तरह कुछ ही मिनटों में दोबारा ईंधन भरकर चलाया जा सकता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 15 जुलाई को करेंगी ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन

14-Jul-2026
नई दिल्ली।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार, 15 जुलाई को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन करेंगी। आयुष मंत्रालय के तहत आयोजित यह सेमिनार 15 से 17 जुलाई तक चलेगा, जबकि 14 जुलाई को पूर्व-कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
सेमिनार में आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा के एकीकरण पर देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम के दौरान एनसीआईएसएम द्वारा तैयार “आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन” विषयक राष्ट्रीय अध्ययन भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा, 14.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का उद्घाटन होगा। इस प्रणाली में एआई-सक्षम वर्कफ्लो, बायोमेट्रिक्स और उन्नत इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रस्तुतियां होंगी। मुख्य विषयों में शामिल हैं:
– मलाशय रोग विज्ञान
– पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा
– एकीकृत ऑन्कोलॉजी
– चिकित्सा-कानूनी मुद्दे
– सर्जरी में बौद्धिक संपदा
– घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्सा
सेमिनार में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के प्रमुख सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुर्वेद की प्राचीन शल्य विद्या को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







 

 


मानुका हनी से माओरी संस्कृति तक, पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड में गिनाईं दोनों देशों की समानताएं

11-Jul-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के आखिरी चरण में ऑकलैंड में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भले ही आपका शरीर न्यूजीलैंड में है, लेकिन आपकी आत्मा हिन्दुस्तान में है। भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए पीएम मोदी जैसे ही मंच पर पहुंचे, पूरा हॉल मोदी-मोदी के नारे और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उंठा।
पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड की सभ्यता और विरासत को लेकर कहा, “भारत हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता है, जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में भारत ने खुद को बदला है। इसका कारण हमारी सीखने की ललक है। भारत सबसे सीखता है। हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं, जन कल्याण की भावना मायने रखती है। इसलिए हमने न्यूजीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड दुनिया का वो देश है, जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूजीलैंड की सोसायटी में महिलाएं बहुत बड़े पैमाने पर योगदान दे रही हैं। भारत भी महिलाओं के विकास का नेतृत्व करता है, महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है, ये न्यूजीलैंड ने करके दिखाया। इसकी ताकत कृषि के इर्द-गिर्द बनाया गया इकोसिस्टम है। ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे छोटे किसानों वाले बड़े कृषि देश के लिए बड़ी सीख है।
न्यूजीलैंड के मानुका शहद का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड ने दिखाया है कि छोटे किसान भी बाजार के एक बड़े ब्रांड बन सकते हैं। न्यूजीलैंड की क्लाइमेट स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग तकनीक में भी हमारे लिए सीखने के लिए बहुत कुछ है। न्यूजीलैंड के ‘मानुका हनी’ को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां शहद ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा स्वास्थ्य से जुड़ा है, वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी शहद का बड़ा महत्व है। भारत में भी हम ‘बी कीपिंग’ को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में शहद के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई है। आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो शहद आता है, वो सोना क्या हीरा बनता जा रहा है। न्यूजीलैंड के साथ शहद के प्रोडक्शन को बढ़ाने के बारे में बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
दोनों देशों के बीच खेल के क्षेत्र में सहयोग को लेकर उन्होंने कहा कि इस साल इंडिया-न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशंस को एक साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी और उस टूर में मेजर ध्यानचंद के परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हो रही थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का दिल जीता था। कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं तो ये कोलैब का जमाना है।
रग्बी में सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “दोनों देश खेल में भी शानदार सहयोग कर सकते हैं; एक उदाहरण रग्बी का है। कुछ देर पहले ही पता चला कि ऑल ब्लैट्स ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए। इसके लिए न्यूजीलैंड हमारी बहुत मदद कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में न्यूजीलैंड रग्बी और रग्बी इंडिया के कोचिंग प्रोग्राम को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।”
स्पोर्ट्स टेक को लेकर भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां आने से पहले न्यूजीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप इवेंट में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन के नए आइडिया ने मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि इसमें भी हम साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं। भारत और न्यूजीलैंड का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण स्पेस के क्षेत्र में भी है। भारत के चंद्रयान ने जब चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड किया, तो पूरा न्यूजीलैंड नृत्य कर रहा था। उस दिन हम सबको गर्व हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। इस सफलता में और आपको गर्व दिलाने में न्यूजीलैंड की तकनीक का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। स्पेस सेक्टर यह बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूजीलैंड की इकोनॉमी एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती है, यही हमारे व्यापार समझौते की स्प्रिरिट है। यह व्यापार समझौता हमारे विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा।”
न्यूजीलैंड के माओरी समाज का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दोनों के व्यवसाय को अवसर देगा। दोनों देशों के बीच एक और बड़ी समानता है। यह समानता हमारी भारतीय संस्कृति की है, इसके संरक्षण की है। आज मैं ‘माओरी समाज’ को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं। मैंने हाक्का को केवल एक परफॉर्मेंस के रूप में नहीं देखा, मैंने इसमें एक समाज की आत्मा देखी है। इसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एक एहसास है। माओरी संस्कृति में एक बहुत ही सुंदर शब्द है, ‘मनाकितांगा,’ इसका मतलब है सम्मान देना, अपनापन देना और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं, ‘अतिथि देवो भवः।’ शब्द, परिवेश, पहनावा, और भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है। ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है, ‘फानो’, यानी कि परिवार।
उन्होंने आगे कहा कि इसमें कई पीढ़ियां होती हैं, रिश्ते और पूरा समुदाय होते हैं। भारत भी परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता। हमारे लिए परिवार एक संस्था है। माओड़डी परंपरा का एक और सुंदर विचार है, काइत्या कितांगा। यह हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं, संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। पृथ्वी हमारी माता है, इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं। मैं जानता हूं कि हजारों किमी दूर रहते हुए भी गदिल के किसी ना किसी कोने में दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही है। शरीर यहां होगा, मन वहां होगा। इसलिए आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नजर रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर देखते हैं तो बहुत सी चीजें छूट जाती है, लेकिन घर में टीवी पर देखते हैं तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसे ही आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। यही बात हमें सबसे खास बनाती है। भारतीय जिस देश में भी रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में पूरी तरह मदद करते हैं। अपने देश की विकास की भी जानकारी रखते हैं। हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।




 

दिल्ली-एनसीआर में कनेक्टिविटी होगी और बेहतर, यातायात व आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति : सीएम रेखा गुप्ता

10-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश)  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर दक्षिण दिल्ली के महत्वपूर्ण मांडी रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने और इसके विकास का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि लगभग 8.8 किलोमीटर लंबा मांडी रोड दिल्ली-एनसीआर का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सड़क गलियारा है। यह छतरपुर मेट्रो स्टेशन के निकट महरौली-गुरुग्राम रोड (एनएच-148ए) को दिल्ली-हरियाणा सीमा पर गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से जोड़ता है। यह मार्ग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और पड़ोसी आर्थिक केंद्रों गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी के रूप में कार्य करता है तथा अंतर-राज्यीय यातायात के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीएम रेखा गुप्ता ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग सेंटर (यूटीटीआईपीईसी) की गवर्निंग बॉडी ने 27 सितंबर 2023 को आयोजित अपनी 68वीं बैठक में मांडी रोड के महत्व को मान्यता देते हुए इसके चौड़ीकरण और व्यापक विकास के प्रस्ताव का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि मांडी रोड के रणनीतिक महत्व, मौजूदा और भावी यातायात मांग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-148ए के साथ इसके सीधे संपर्क को देखते हुए इस सड़क को एनएचएआई के दायरे में लाने पर विचार किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि मांडी रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर इसके विकास की जिम्मेदारी एनएचएआई को सौंपी जाए ताकि इसके विकास के लिए एकीकृत योजना बनाई जा सके, समान इंजीनियरिंग मानकों को अपनाया जा सके और इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर का समयबद्ध उन्नयन सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करने वाले यात्रियों को बेहतर और अधिक सुगम यातायात सुविधा मिलेगी। साथ ही दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में संपर्क व्यवस्था और मजबूत होगी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से सकारात्मक विचार करने का आग्रह करते हुए इस मामले को आगे बढ़ाने में उनके निरंतर सहयोग की अपेक्षा भी व्यक्त की।

 

पीएम मोदी ने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन एसी से मुलाकात की

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन एसी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की बढ़ती मजबूती और विविधता पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
पीएम मोदी और सैम मोस्टिन ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि व्यापार, निवेश, शिक्षा और नवाचार संबंधों के विस्तार से नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों के लोगों को ठोस लाभ मिलेगा।
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच बढ़ते खेल संबंधों पर भी संतोष व्यक्त किया और भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रमंडल खेल 2030 और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाले ओलंपिक 2032 से पहले घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच जीवंत संपर्क हमारे संबंधों की मजबूती का स्रोत बना हुआ है। पीएम मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए गवर्नर जनरल मोस्टिन के दृढ़ समर्थन की सराहना की।
ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि व्यापार, निवेश, शिक्षा और नवाचार संबंधों के विस्तार से नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों के लोगों को ठोस लाभ मिलेगा।
दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच बढ़ते खेल संबंधों पर भी संतोष व्यक्त किया और भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रमंडल खेल 2030 और ऑस्ट्रेलिया में आयोजित वाले ओलंपिक 2032 से पहले घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच जीवंत संपर्क हमारे संबंधों की मजबूती का स्रोत बना हुआ है। पीएम मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए गवर्नर जनरल मोस्टिन के दृढ़ समर्थन की सराहना की।
 

मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में हाउसफुल, पीएम मोदी बोले- ‘ये शो है ब्लॉकबस्टर’

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने के लिए मेलबर्न के प्रसिद्ध मार्वल स्टेडियम में हजारों भारतीय प्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। स्टेडियम पूरी तरह हाउसफुल रहा और लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। पीएम मोदी अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज़ के साथ स्टेडियम पहुंचे। वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री के सम्मान में फ्लैश लाइट जलाकर पूरा स्टेडियम जगमगा दिया। 
इस दृश्य से भावुक हुए पीएम मोदी ने कहा,
“ये शो हाउसफुल और ब्लॉकबस्टर है।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत मार्वल स्टेडियम की भूमि के पारंपरिक मालिकों (फर्स्ट नेशंस) को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि मेलबर्न एक दिन में चार मौसम दिखा देता है, लेकिन यहां के भारतीय समुदाय ने अपने सांस्कृतिक रंग से इस शहर को और ज्यादा जीवंत बना दिया है। पीएम मोदी ने मेलबर्न के भारतीय बाजारों का जिक्र करते हुए कहा, “कोई इसे लिटिल इंडिया कहता है, कोई मिनी इंडिया… नाम कोई भी हो, लेकिन रंग भारतीयता से भरे हुए हैं।”
उन्होंने 2014 की अपनी पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस समय 28 वर्षों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री यहां आया था। उन्होंने तब कहा था कि अगली बार लोगों को 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पीएम मोदी ने गर्व के साथ बताया, “पिछले 12 वर्षों में यह मेरी ऑस्ट्रेलिया की तीसरी यात्रा है। यह एक तरह से ‘हैट्रिक’ है।”
इससे दोनों देशों के बीच संबंधों में आए तेज बदलाव का पता चलता है।
इससे पहले विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा ने पीएम मोदी का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “विक्टोरिया भारतीयों का सम्मान करता है। हमारे लिए भारत ट्रेड का नहीं, बल्कि ट्रस्ट का प्रतीक है।” 
कार्यक्रम में भारत का राष्ट्रगान गूंजा और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ भी पूरे समय मौजूद रहे। यह सामुदायिक कार्यक्रम भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव, मजबूत होते रणनीतिक संबंधों और प्रवासी भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका की झलक पेश करता है। 










 

उपराष्ट्रपति ने हाई सीज फिशिंग के राष्ट्रीय कार्यक्रम का किया शुभारंभ, ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन भी लॉन्च

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में हाई सीज (गहरे समुद्र) में सतत मत्स्य दोहन के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन दस्तावेज भी लॉन्च किया और देशभर के 10 फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन तथा मछुआरों को हाई सीज फिशिंग के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन सौंपे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। इससे भारतीय मछुआरे देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और गहरे समुद्र में मौजूद अपार समुद्री संसाधनों का सतत और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, राज्य सरकार और मछुआरा समुदाय के साझा प्रयासों का परिणाम है, जो मत्स्य क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि के नए युग की शुरुआत करेगा।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि भारत के पास 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा और करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र है। इसके बावजूद समुद्र में मौजूद विशाल संसाधनों का अभी तक पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया है। अब तक मछली पकड़ने की गतिविधियां मुख्य रूप से तटीय इलाकों तक सीमित थीं, लेकिन नई व्यवस्था के तहत भारतीय मछुआरे अब समुद्र की टूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों का सतत दोहन कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। यह क्षेत्र देश के करीब तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका का आधार है। पिछले वित्त वर्ष में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 73,000 करोड़ रुपए से अधिक रहा। उन्होंने विश्वास जताया कि हाई सीज पहल से निर्यात में और वृद्धि होगी तथा मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, परिवहन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि नई व्यवस्था में मत्स्य सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन और भारतीय मछुआरों को प्राथमिकता के आधार पर लेटर ऑफ ऑथराइजेशन दिए जाएंगे। उन्होंने इसे तटीय समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सतत मत्स्य पालन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। आर्थिक विकास के साथ समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। उपराष्ट्रपति डिजिटल ऑथराइजेशन सिस्टम, जहाजों की ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और अवैध, बिना रिपोर्टिंग तथा अनियमित मत्स्य पालन पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
युवाओं से अपील करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मत्स्य पालन को केवल पारंपरिक पेशा न मानें, बल्कि विज्ञान, तकनीक, नवाचार और वैश्विक अवसरों से जुड़ा आधुनिक व्यवसाय समझें। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और संबंधित एजेंसियों से मछुआरा समुदाय को ज्ञान, तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आह्वान किया, ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी कहा कि ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन एक दूरदर्शी पहल है, जो ओडिशा को पूर्वी भारत का अग्रणी डीप-सी फिशिंग और समुद्री निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।” कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं एमएसएमई राज्य मंत्री गोकुलानंद मल्लिक, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, मत्स्य संस्थानों के प्रतिनिधि, मछुआरा संगठनों के सदस्य और अन्य हितधारक भी मौजूद रहे।

 

मेलबर्न में हुए कम्युनिटी प्रोग्राम में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की मौजूदगी ने इसे और भी खास बना दिया : प्रधानमंत्री मोदी

09-Jul-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में गुरुवार को भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेलबर्न ने सचमुच सबका दिल जीत लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि मेलबर्न में हुए कम्युनिटी प्रोग्राम में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की मौजूदगी ने इसे और भी खास बना दिया। उनका भाषण शानदार था, जिसमें भारत-ऑस्ट्रेलिया दोस्ती के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता और हमारी साझेदारी को वे कितना महत्व देते हैं, यह साफ झलकता था।
पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपने मित्र और भारत के मित्र प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ का भी बहुत आभारी हूं। आप सिडनी में हमारे साथ थे और आज आप यहां मेलबर्न में भी भारतीय समुदाय के साथ शामिल हुए हैं; एक तरह से, यह सफर पूरा हो गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम वाले शहर अहमदाबाद से लेकर मशहूर स्टेडियम वाले शहर मेलबर्न तक हम दोनों जगहों पर साथ रहे हैं। हम सबने देखा है कि जब भी प्रधानमंत्री अल्बानीज़ बोलते हैं, तो वे भारतीयों का दिल और दिमाग जीत लेते हैं। आपने सिडनी में ज़बरदस्त छाप छोड़ी और यहां भी आपने सबका दिल जीत लिया है।
भारतीय समुदाय को संबोधित करने के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्पोर्ट्स सेक्टर हम दोनों देशों की साझेदारी को अधिक मजबूती प्रदान करता है। स्पोर्ट्स की दुनिया में ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक ब्रांड है। खेलो इंडिया मिशन केवल एक स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं है। इस मिशन के तहत भारत के रिमोट इलाकों में भी स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है… 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स भारत होस्ट कर रहा है। भारत 2036 में ओलंपिक खेलों को होस्ट करने का भी दावेदार है।
वहीं, सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, धन्यवाद मेलबर्न ! धन्यवाद ऑस्ट्रेलिया! आज का दिन ज़बरदस्त था।





 


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