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आर्मी हॉस्पिटल ने भारत में आईस्टेंट के साथ पहली 3डी फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी सफलतापूर्वक की

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) भारतीय चिकित्सा जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र विज्ञान विभाग ने भारत में पहली बार आईस्टेंट के साथ 3डी फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी सफलतापूर्वक संपन्न की है। यह एंजियोग्राफी उन्नत इमेजिंग तकनीक और न्यूनतम चीर-फाड़ वाली ग्लूकोमा सर्जरी को मिलाकर की गई।
नए स्टैंड-माउंटेड स्पेक्ट्रालिस सिस्टम और अत्याधुनिक 3डी ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की सहायता से की गई इस प्रक्रिया ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं को वैश्विक नेत्र चिकित्सा के अग्रिम पंक्ति में स्थापित किया है।
ग्लूकोमा, जो अपरिवर्तनीय अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है, अपनी धीमी प्रगति के कारण लंबे समय से चिकित्सकों के लिए एक चुनौती बना हुआ है। यह तकनीक एक्वियस आउटफ्लो पाथवे का वास्तविक समय और अत्यंत सटीक दृश्य उपलब्ध कराती है, जिससे सर्जन अधिक लक्षित और प्रभावी उपचार कर सकते हैं व रोगियों के परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार संभव हो पाता है।
देश में पहली बार 3डी फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी को आईस्टेंट (न्यूनतम इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी) के साथ एकीकृत कर ग्लूकोमा उपचार में एक नया मानदंड स्थापित किया गया है। इससे सर्जरी के दौरान बेहतर इमेजिंग और दीर्घकालिक रूप से बेहतर परिणाम सुनिश्चित होते हैं। सशस्त्र बल समुदाय के लिए यह उपलब्धि न सिर्फ एक महत्वपूर्ण चिकित्सा मील का पत्थर है, बल्कि दृष्टि संरक्षण और ऑपरेशनल तत्परता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम भी है।
 

तमिलनाडु के पश्चिमी घाट में बारिश का अनुमान, कोहरा छाने की भी संभावना

30-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज मंगलवार को पश्चिमी घाट और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है।
मौसम बुलेटिन के अनुसार, अभी केरल तट के पास दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के ऊपर एक एटमॉस्फेरिक सर्कुलेशन एक्टिव है। ऐसा ही एक और सिस्टम दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौजूद है, जबकि तीसरा सर्कुलेशन आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तटीय क्षेत्र और आस-पास के इलाकों में बना हुआ है।
इन सिस्टम के मिलेजुले असर से दक्षिण भारत के कुछ खास इलाकों में रुक-रुक कर बारिश होने की उम्मीद है। पश्चिमी घाट के किनारे के जिलों और दक्षिणी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में दिन के दौरान एक या दो जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
बाकी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में मौसम ज्यादातर सूखा रहने की उम्मीद है, हालांकि सुबह-सुबह या देर रात के घंटों में कुछ जगहों पर हल्की धुंध या कोहरा छा सकता है।
आईएमडी ने यह भी कहा है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। हालांकि कुछ जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस कम हो सकता है। रात और सुबह के शुरुआती घंटों में ठंड बनी रहने की संभावना है।
नीलगिरी जिले और डिंडीगुल जिले की कोडाइकनाल पहाड़ी शृंखलाओं में मौसम विभाग ने देर रात या सुबह के शुरुआती घंटों में हल्का पाला पड़ने या ओस जमने की संभावना जताई है। ऊंचे इलाकों में साफ आसमान और कम तापमान के कारण इस अवधि में ऐसी स्थितियां आम हैं।
चेन्नई में पूरे दिन मौसम आंशिक रूप से बादल वाला रहने की उम्मीद है। शहर में देर रात हल्के कोहरे या धुंध का अनुभव हो सकता है। अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 21 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने पहाड़ी और निचले इलाकों में रहने वालों को बदलते मौसम की स्थिति से सावधान रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही किसानों और यात्रियों को भी स्थानीय मौसम सलाह से अपडेट रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि तापमान और विजिबिलिटी में रुक-रुक कर होने वाले बदलाव रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। 

 

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम: 7,280 करोड़ की योजना से देश में दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बक निर्माण को मिलेगी नई रफ्तार

30-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘धातुमल दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बक’ के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य भारत में प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन (एमटीपीए) की एकीकृत आरईएम निर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिसमें दुर्लभ मृदा ऑक्साइड से लेकर तैयार चुम्बक तक की पूरी श्रृंखला शामिल होगी।
इस पहल का उद्देश्य घरेलू स्तर पर एकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के माध्यम से, इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक एक महत्वपूर्ण घटक में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना है। साथ ही, यह भारत को वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत सामग्री उत्पादक बाजार में एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण, रणनीतिक क्षेत्रों के लिए सशक्त एवं लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण और देश के दीर्घकालिक नेट जीरो 2070 लक्ष्य सहित व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का प्रभावी रूप से सुदृढ़ करती है।
आरईपीएम स्थायी चुम्बकों के सबसे शक्तिशाली में से हैं और इनका व्यापक रूप से उन तकनीकों में उपयोग किया जाता है, जिनमें ठोस और उच्च- कार्य क्षमता वाले चुंबकीय घटकों की आवश्यकता होती है। इनकी उच्च चुंबकीय शक्ति और स्थिरता इन्हें निम्नलिखित के लिए अभिन्न बनाती है:
इलेक्ट्रिक वाहन मोटर
पवन टरबाइन जनरेटर
उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स
एयरोस्पेस तथा रक्षा प्रणालियां
सटीक सेंसर और एक्चुएटर
छोटे आकार में भी अत्यधिक चुंबकीय प्रदर्शन प्रदान करने वाली आरईपीएम की क्षमता उन्हें उन्नत इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए अपरिहार्य बनाती है। भारत स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत गतिशीलता और रक्षा जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विनिर्माण क्षमताओं का तीव्र विस्तार कर रहा है; ऐसे में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं की लचीलापन बढ़ाने के लिए उच्च-प्रदर्शन चुम्बकों की विश्वसनीय और स्वदेशी आपूर्ति की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है।
भारत में दुर्लभ-मृदा खनिजों का पर्याप्त संसाधन आधार उपलब्ध है, विशेष रूप से मोनाजाइट के समृद्ध भंडार देश के कई तटीय और अंतर्देशीय क्षेत्रों में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इन भंडारों में लगभग 13.15 मिलियन टन मोनाजाइट की उपस्थिति का अनुमान है, जिसमें से लगभग 7.23 मिलियन टन दुर्लभ-मृदा ऑक्साइड (आरईओ) निहित हैं। ये संसाधन आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में स्थित तटीय रेतीले टीलों, लाल रेतीले टीलों तथा अंतर्देशीय जलोढ़ क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ये दुर्लभ-मृदा ऑक्साइड स्थायी चुंबक विनिर्माण सहित विविध रणनीतिक दुर्लभ-मृदा आधारित उद्योगों के लिए प्राथमिक कच्चे माल के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इसके अतिरिक्त, गुजरात और राजस्थान के कठोर चट्टानी क्षेत्रों में लगभग 1.29 मिलियन टन इन-सीटू आरईओ संसाधनों की पहचान की गई है। वहीं, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा संचालित व्यापक अन्वेषण पहलों के परिणामस्वरूप 482.6 मिलियन टन दुर्लभ-मृदा अयस्क संसाधनों का अतिरिक्त आकलन किया गया है। ये संयुक्त संसाधन अनुमान आरईपीएम विनिर्माण सहित विविध दुर्लभ-मृदा आधारित उद्योगों को दीर्घकालिक रूप से सहयोग देने हेतु पर्याप्त एवं विश्वसनीय कच्चे माल की उपलब्धता को दर्शाते हैं।
भारतमें दुर्लभ-मृदा खनिजों का सुदृढ़ संसाधन आधार उपलब्ध होने के बावजूद, स्थायी चुंबकों का घरेलू विनिर्माण अभी विकासशील चरण में है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान भारत के स्थायी चुंबक आयात का प्रमुख भाग चीन से प्राप्त हुआ, जिसमें मूल्य के आधार पर आयात निर्भरता 59.6 प्रतिशत से 81.3 प्रतिशत तथा मात्रा के आधार पर 84.8 प्रतिशत से 90.4 प्रतिशत के बीच रही है।
इसी संदर्भ में, भविष्य की मांग के अनुमान घरेलू विनिर्माण क्षमता के त्वरित विस्तार की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा विभिन्न रणनीतिक अनुप्रयोगों में निरंतर वृद्धि के परिणामस्वरूप भारत में आरईपीएम की खपत के वर्ष 2030 तक दोगुनी होने की संभावना है। इसलिए घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और लचीलापन को सुदृढ़ करने हेतु एकीकृत आरईपीएम विनिर्माण क्षमता का विकास आवश्यक हो गया है।
यह योजना भारत में आरईपीएम के संपूर्ण विनिर्माण के लिए एक समग्र और सक्षम ढांचा स्थापित करती है, जो न केवल प्रारंभिक क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करता है, बल्कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता व आत्मनिर्भरता को भी सुनिश्चित करता है।
इसका उद्देश्य उच्च-प्रदर्शन वाले चुंबकीय पदार्थों के लिए एक पूर्णतः एकीकृत उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिससे ऑक्साइड फीडस्टॉक से लेकर अंतिम उत्पाद तक 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की घरेलू विनिर्माण क्षमता का सृजन हो सके।
कुल क्षमता को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम पांच लाभार्थियों के बीच वितरित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक लाभार्थी 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक के लिए पात्र होगा, जिससे पर्याप्त पैमाने के साथ-साथ विविधीकरण सुनिश्चित होगा।
इस योजना में एक सशक्त प्रोत्साहन संरचना शामिल है, जिसके तहत पांच वर्षों में आरईएम उत्पादन के लिए बिक्री-आधारित प्रोत्साहन के रूप में 6,450 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
उन्नत, एकीकृत आरईएम विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
यह योजना सात वर्षों में लागू की जाएगी, जिसमें एकीकृत आरईएम सुविधाओं की स्थापना के लिए दो वर्ष की प्रारंभिक अवधि और उसके बाद आरईएम बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन राशि के वितरण के पांच वर्ष शामिल हैं। इस सुनियोजित समय-सीमा का उद्देश्य समय पर क्षमता निर्माण में सहायता करना और प्रारंभिक उत्पादन एवं बाजार विकास चरण के दौरान स्थिरता प्रदान करना है।
राष्ट्रीय प्राथमिकताएं और व्यापक सरकारी गतिविधियों के साथ तालमेल
घरेलू स्तर पर आरईएम उत्पादन क्षमता की व्यवस्था अनेक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाती है, क्योंकि ये चुंबक रणनीतिक एवं उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए अनिवार्य हैं, जो भारत की औद्योगिक और तकनीकी प्रगति के केंद्र में हैं। सरकार की यह पहल स्वदेशी उत्पादन के विस्तार, तीव्र गति से विकसित हो रहे उद्योगों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन और सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा साथ-ही-साथ भारत के दीर्घकालिक सतत विकास एवं अन्य लक्ष्यों में योगदान देने का उद्देश्य रखती है।
ये संबंध दर्शाते हैं कि घरेलू आरईपीएम विनिर्माण क्षमता विकसित करना न केवल एक तकनीकी अनिवार्यता है, बल्कि आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने में तेजी लाने, उन्नत गतिशीलता को सुदृढ़ करने और रक्षा तथा रणनीतिक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की भारत की रणनीति का प्रमुख घटक भी है।
आरईपीएम योजना भारत के महत्वपूर्ण खनिज व उन्नत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार की चल रही कई गतिविधियों के साथ और भी अधिक संरेखित होती है।
नीतिगत सुधारों, विशेष रूप से खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में किए गए संशोधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की एक समर्पित सूची अधिसूचित की गई है तथा सरकार को खनन पट्टों व समग्र लाइसेंसों की नीलामी का अधिकार प्रदान किया गया है। इससे निजी और सार्वजनिक—दोनों ही क्षेत्रों की भागीदारी के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दुर्लभ-मृदा चुंबक ऊर्जा-कुशल मोटरों, पवन-ऊर्जा प्रणालियों एवं अन्य हरित प्रौद्योगिकियों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं और इसलिए यह पहल देश के व्यापक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन व उसके नेट जीरो 2070 विजन के साथ निकटता से जुड़ी हुई है।
घरेलू स्तर पर आरईएम के उत्पादन को गति देना राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। चूंकि इन चुम्बक का उपयोग रक्षा व एयरोस्पेस प्रणालियों में होता है, इसलिए देश के भीतर एकीकृत उत्पादन क्षमता विकसित करने से महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित होती है और स्वदेशीकरण के निरंतर प्रयासों को बढ़ावा मिलता है।
 यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला को सशक्त करने पर भारत के व्यापक ध्यान देने का भी पूरक है, जिसका उद्देश्य उन्नत क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले दुर्लभ-मृदा तत्वों सहित प्रमुख खनिजों की उपलब्धता व प्रसंस्करण क्षमताओं में सुधार करना है।
महत्वपूर्ण खनिजों के लिए खनन सुधार
खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) खानों के विनियमन तथा खनिज संसाधनों के विकास के लिए स्थापित किया गया था। भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र (महत्वपूर्ण व गहरे भंडारों में पाए जाने वाले खनिजों के लिए) को सुदृढ़ बनाने हेतु, खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023 के माध्यम से इसमें सुधार किए गए हैं। इस संशोधन के तहत खनिज अन्वेषण के सभी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है, सरकार को खनिज रियायतों की नीलामी का अधिकार प्राप्त हुआ है और एक नई अन्वेषण लाइसेंस प्रणाली की शुरुआत की गई है।
एनसीएमएम, नियामक सुधार और आरईपीएम विनिर्माण योजना सहित ये सभी गतिविधियां मिलकर आरईपीएम की क्षमता का विस्तार करती हैं। इससे भारत की व्यापक औद्योगिक, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्राथमिकताओं में एकीकृत करने के लिए एक मजबूत घरेलू आधार तैयार होता है।
वैश्विक संदर्भ और भारत के अवसर
दुर्लभ मृदा धातुओं और स्थायी चुम्बकों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के दौर आए हैं, जिन्होंने इन रणनीतिक संसाधनों तक सुरक्षित और विविध पहुंच की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। भारत ने दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें नीतिगत सुधारों का कार्यान्वयन और घरेलू उत्पादन एवं विनिर्माण क्षमता निर्माण के प्रयास शामिल हैं।

खान मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक, मलावी और कोटे डी आइवर सहित खनिज समृद्ध देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं। भारत खनिज सुरक्षा साझेदारी (एमएसपी), हिन्द-प्रशांत आर्थिक ढांचा (आईपीईएफ) और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल (आईसीईटी) जैसे बहुपक्षीय मंचों में भी भाग लेता है, जो सामूहिक रूप से लचीली महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के प्रयासों को मजबूती प्रदान करते हैं।
इन प्रयासों के पूरक के रूप में, खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (केएबीएल) अर्जेंटीना जैसे देशों में साझेदारी के माध्यम से लिथियम और कोबाल्ट सहित रणनीतिक खनिज संपदाओं की विदेशी खोज एवं अधिग्रहण में लगी हुई है। ये उपाय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने की भारत की रणनीति का एक प्रमुख घटक हैं।
इस पृष्ठभूमि में, घरेलू आरईपीएम विनिर्माण क्षमता का विकास भारत को उन्नत सामग्रियों के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ घरेलू औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करता है।
धातुमल दुर्लभ मृदा स्थायी चुम्बक (आरईपीएम) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, प्रौद्योगिकी आधारित निवेश आकर्षित करने और दीर्घकालिक विस्तारशीलता को सुदृढ़ करना लक्षित करती है। उच्च दक्षता वाली प्रणालियों में इन सामग्रियों की भूमिका को देखते हुए यह पहल भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों में भी योगदान देती है। इस सरकार की पहल घरेलू क्षमता स्थापित करके और डाउनस्ट्रीम संबंधों को मजबूत करके रोजगार सृजन करने, औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक सिद्ध होगी।
 

पीएम मोदी ने भांडुप बस दुर्घटना में हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया

30-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मंगलवार को मुंबई के भांडुप में हुई दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर कहा कि मुंबई के भांडुप में दुर्घटना में हुई जनहानि से मन को अत्‍यंत पीड़ा हुई है।
पीएमओ इंडिया की एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि मुंबई के भांडुप में दुर्घटना में हुई जनहानि से मन को अत्‍यंत पीड़ा हुई है। अपने परिजनों को खोने वाले सभी लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं ।
कल सोमवार रात उत्तर-पूर्वी मुंबई के भांडुप वेस्ट में भीड़भाड़ वाली स्टेशन रोड पर एक बीईएसटी (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) बस ने पैदल चलने वालों को कुचल दिया। इस हादसे में कुछ लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। पुलिस के मुताबिक, बस रिवर्स करते समय बेकाबू हो गई और पास खड़े पैदल चलने वालों से टकरा गई।
मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि बस पटरी से उतरने और सड़क पर चल रहे पैदल चलने वालों को टक्कर मारने से कुछ देर पहले तेज रफ़्तार में थी। पुलिस ने कहा कि जांच के तहत इन दावों की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों ने हादसे की वजह बनने वाली घटनाओं के क्रम का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या कोई मैकेनिकल खराबी या अन्य कारण शामिल थे। घटना की जांच की जा रही है।
वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भांडुप बस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की और कहा कि मैं भगवान से उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।

















 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 से 2025 तक देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई : अमित शाह

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘युवा बिजनेस महासम्मेलन- 2025’ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 से 2025 तक देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के युवाओं के लिए ढेर सारे अवसर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश का नेतृत्व संभाला उस समय हम विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे, और 2014 से 2025 के 11 साल में ही हम 11वें से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि 2027 तक हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कल रविवार को अहमदाबाद, गुजरात में विश्व उमिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘युवा बिजनेस महासम्मेलन- 2025’ को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विश्व उमिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित युवा बिजनेस महासम्मेलन – 2025 में करीब 15 हजार युवा इकट्ठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज यहां विश्व उमिया फाउंडेशन के एक ऐप का भी उद्घाटन हुआ है, जिसके माध्यम से गुजरात सरकार ने बेहद प्रोफेशनल तरीके से पाटीदार समाज के युवाओं के लिए बिज़नेस के संरक्षण, संवर्धन और वृद्धि के लिए सारी जरूरते पूरी करने का प्रयास किया है।
अमित शाह ने कहा कि आज के युग में इनफार्मेशन बहुत बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि बेशक मन में उमंग, उत्साह, क्षमता हो, लेकिन अगर मार्गदर्शन न हो तो काफी दिक्कतें होती हैं। आज इस कार्यक्रम में समाज एकत्र हुआ है, समाज की शिक्षा की चिंता करनेवाला संगठन भी उपस्थित है और गुजरात व देश के अर्थतंत्र को गति देने का उद्देश्य भी है। शाह ने कहा कि मां उमिया का मंदिर सनातन धर्म का ऐसा केन्द्र बनने वाला है, जिसने संस्कृति को भी जमीन पर उतारा है। एक ही स्थान पर समाज, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को तकनीकी एक्सपोजर का मौका मिलेगा। आज लॉन्च हुए ऐप के माध्यम से क्लाइंट, मेन्टोर, करियर, ऑपरचुनिटी और मार्केट के बीच सीधा संपर्क हो जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि उमिया फाउंडेशन की स्थापना 16 दिसंबर, 2016 को हुई थी और तब से आज तक निरंतर इसका काम आगे बढ़ा है। उमिया फाउंडेशन ने मां उमिया के प्रति गुजरात और गुजरात के बाहर सभी लोगों में असीम श्रद्धा जगाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पाटीदार समाज और पूरे गुजरात को मां उमिया के तहत एकत्र होकर सनातन धर्म की मजबूत धरोहर और शाखा बनाने के लिए उमिया फाउंडेशन ने बहुत सुंदर कार्य किया है। शाह ने कहा कि फाउंडेशन ने सैंकड़ों युवाओं को छात्रवृत्ति देकर उच्च शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़ाने, विकास और प्रकृति के संतुलन के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाने और समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए प्रशंसनीय पुरुषार्थ किया है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने आगे कहा कि कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने युवाओं के विकास के लिए स्टार्टअप इंडिया, स्टेन्ड अप इंडिया, मुद्रा योजना, वोकल फोर लोकल और लोकल फोर ग्लोबल तक की चैन तैयार की है। शाह ने कहा कि 2014 में पूरे देश में स्टार्टअप की संख्या 500 थी, आज यह 2 लाख 6 हजार हो चुकी है। इन 2.06 लाख स्टार्टअप्स के माध्यम से आज 18 लाख स्थायी रोजगार सर्जन हुआ और लाखों लोगों को अस्थायी रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि 2014 में 500 में से चार युनिकॉर्न स्टार्टअप्स भारत में थे, आज देश में 120 युनिकॉर्न स्टार्टअप्स हैं।
अमित शाह ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि 2047 में जब देश की आज़ादी का शताब्दी उत्सव मनाया जाए तब पूरे विश्व में भारत नंबर एक पर हो। ऐसे भारत की रचना करने के लिए दो कार्य बहुत महत्त्वपूर्ण मुद्दे है -पहला आत्मनिर्भर भारत और दूसरा स्वदेशी का आग्रह। अगर हमने इन्हें पूरा कर लिया तो हमें दुनिया में हर क्षेत्र में नंबर एक पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में भारत के उत्पादों का निर्यात हो और भारत देश में बनी चीजों का इस्तेमाल करें तो भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बहुत फायदा होगा। 

 

भारतीय नौसेना हर खतरे से निपटने को तैयार: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पश्चिमी तट पर स्वदेशी पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार होकर समुद्री भ्रमण किया। इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद थे।
रविवार को कर्नाटक के कारवार स्थित नौसेना बंदरगाह से राष्ट्रपति पनडुब्बी पर सवार हुईं और दो घंटे से अधिक समय तक समुद्री यात्रा की। भ्रमण के दौरान उन्होंने पनडुब्बी के चालक दल से बातचीत की और विभिन्न ऑपरेशनल प्रदर्शनों का अवलोकन किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के बाद पनडुब्बी में यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, स्वदेशी कालवरी श्रेणी की पनडुब्बी पर यह पहली यात्रा सैन्य परिचालन परिस्थितियों में सशस्त्र बलों के साथ सर्वोच्च कमांडर की निरंतर सहभागिता को दर्शाती है। इससे पहले नवंबर 2024 में राष्ट्रपति ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर भारतीय नौसेना द्वारा किए गए एक परिचालन प्रदर्शन को भी देखा था।
राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि आईएनएस वाघशीर पर नाविकों और अधिकारियों के साथ नौकायन, गोताखोरी और समय बिताना उनके लिए एक अत्यंत विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि आईएनएस वाघशीर द्वारा सफलतापूर्वक पूरे किए गए अनेक परीक्षण और चुनौतीपूर्ण अभियान चालक दल की असाधारण तत्परता और समर्पण को दर्शाते हैं, जो इसके आदर्श वाक्य ‘वीरतापूर्ण विजय’ के अनुरूप है।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि वाघशीर के चालक दल का अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्साह यह सिद्ध करता है कि भारतीय नौसेना और उसकी पनडुब्बियां किसी भी खतरे और हर परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

















 

यूपी में शीतलहर का कहर, पहली जनवरी तक बंद रहेंगे 12वीं तक के स्कूल

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) उत्तर प्रदेश में बढ़ती ठंड और भीषण शीतलहर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत राज्य के सभी स्कूलों को पहली जनवरी तक बंद रखने, रैन बसेरों और अलाव की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने और क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने की हिदायत दी गई है।
सीएम योगी ने कहा कि मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए राज्य के सभी आईसीएसई, सीबीएसई और यूपी बोर्ड के स्कूलों को 12वीं कक्षा तक 1 जनवरी तक बंद रखा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ठंड से लोगों को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि सभी जनपदों में कंबल और अलाव की व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित की जाए, ताकि जरूरतमंद लोग सुरक्षित रह सकें। उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए और यदि कोई जरूरतमंद हो तो उसे रैन बसेरों में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए।
सीएम योगी ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे शीतलहर के दौरान लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहें, ताकि किसी भी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके और लोगों को मदद मिलती रहे।
अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि सभी रैन बसेरों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और किसी भी परिस्थिति में जनता को ठंड से बचाने के लिए तत्पर रहें। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और ठंड के इस मौसम में कोई भी जोखिम न उठाया जाए।
सीएम योगी ने कहा कि 25 करोड़ प्रदेशवासियों की सेवा और सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। शीतलहर से बचाव के लिए सरकार ने सभी जनपदों में रैन बसेरों की व्यवस्था और जरूरतमंदों को कंबल वितरण हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई है।
उन्होंने बताया कि कल रविवार को गोरखपुर महानगर के ट्रांसपोर्ट नगर और धर्मशाला बाजार क्षेत्र में रैन बसेरों का निरीक्षण किया गया और जरूरतमंदों को भोजन व कंबल वितरित किए गए। 


 

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक उड़ान: वर्ष 2025 में MoD की बड़ी उपलब्धियाँ

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्रालय (MoD) के लिए वर्ष 2025 बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने देश को मजबूत, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समावेशी बनाने के लक्ष्य की दिशा में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और सशस्त्र बलों को आधुनिक बनाने के प्रयासों को नई गति मिली। इसके परिणामस्वरूप भारत ने अब तक का सबसे अधिक रक्षा उत्पादन किया और रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पूर्व सैनिकों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया। इन सभी क्षेत्रों में तेज़ी और प्रभावी ढंग से काम हुआ। वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय (MoD) के लिए 6,81,210.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह बजट वित्त वर्ष 2024-25 के बजटीय अनुमान से 9.53 प्रतिशत अधिक है और कुल केंद्रीय बजट का 13.45 प्रतिशत हिस्सा बनता है, जो सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक है।
सरकार ने वर्ष 2025-26 को ‘सुधार वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इस पहल के माध्यम से सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर व अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे रक्षा क्षेत्र में कार्यकुशलता बढ़ेगी और देश की सुरक्षा क्षमताएं और मजबूत होंगी। साथ ही रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।  
रक्षा सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने पूंजीगत परिव्यय के तहत 1,80,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष से 4.65 प्रतिशत अधिक है।
इसमें से 1,48,722.80 करोड़ रुपये सशस्त्र बलों के लिए नए हथियार, उपकरण और तकनीक खरीदने पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 31,277.20 करोड़ रुपये अनुसंधान, विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए रखे गए हैं।
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्रोतों से खरीद के लिए तय किया गया है। इसमें से 25 प्रतिशत घरेलू निजी उद्योगों से लिया जाएगा। इससे रक्षा उत्पादन, रोजगार के अवसर और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सशस्त्र बलों के वेतन, भत्तों और रखरखाव के लिए 3,11,732.30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.24 प्रतिशत अधिक है।
इसमें से 1,14,415.50 करोड़ रुपये गैर-वेतन खर्च के लिए रखे गए हैं, जिससे ईंधन, राशन, उपकरणों के रखरखाव और सेना की परिचालन तैयारियों को मजबूत किया जा सकेगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) का बजट बढ़ाकर 26,816.82 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 12.41 प्रतिशत की वृद्धि है।
इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए आईडेक्स योजना के तहत 449.62 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे स्टार्ट-अप और नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए ईसीएचएस योजना के तहत 8,317 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
रक्षा पेंशन के लिए 1.61 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष से 13.87 प्रतिशत अधिक है। इससे लगभग 34 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।
भारतीय तटरक्षक बल के लिए 9,676.70 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें पूंजीगत खर्च में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी शामिल है।
वहीं, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को 7,146.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सड़क, सुरंग और पुल निर्माण कार्य तेजी से पूरे किए जा सकेंगे।  
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो समर्पित रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए हैं। इन गलियारों ने 8,658 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। फरवरी 2025 तक 53,439 करोड़ रुपए अनुमानित निवेश क्षमता वाले 253 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों राज्यों में 11 ईकायों में फैले ये केंद्र भारत को रक्षा विनिर्माण महाशक्ति बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में आरंभ किए गए नीतिगत सुधारों से पहले भारत का रक्षा क्षेत्र अनेक संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा था। रक्षा खरीद प्रक्रियाएं अत्यंत धीमी थीं, जिसके कारण आवश्यक क्षमताओं में गंभीर परेशानियां उत्पन्न हो रही थीं। अत्यधिक आयात निर्भरता ने न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ाया, बल्कि वैश्विक अस्थिरता के समय भारत की सामरिक कमजोरियों को भी उजागर किया। इससे पहले, प्रतिबंधात्मक नीतियों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के वर्चस्व और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच के कारण निजी क्षेत्र की भागीदारी नगण्य थी। परिणामस्वरूप, रक्षा निर्यात का स्तर अत्यंत निम्न रहा था। 
सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए एक आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग के निर्माण हेतु कई सुधार शुरू किए हैं। इनके प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
सुव्यवस्थित रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) के माध्यम से खरीद प्रक्रियाओं में गति लाना, जिससे आवश्यक स्वीकृति प्राप्त होने पर रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) द्वारा अधिग्रहण को शीघ्र अनुमोदन मिल सके।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के माध्यम से देश में रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही, 74% तक स्वचालित मार्ग और 100% तक सरकारी अनुमोदन मार्ग के तहत एफडीआई मानदंडों में उदारता लाई गई है। इसके अतिरिक्त, 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) योजना के माध्यम से डीपीएसयू, निजी क्षेत्र, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे रक्षा प्रौद्योगिकी और आत्मनिर्भरता को नई गति मिल रही है।
सरलीकृत लाइसेंसिंग के साथ रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना, जिसमें बुलेटप्रूफ जैकेट, डोर्नियर विमान, चेतक हेलीकॉप्टर, तेज गति के इंटरसेप्टर नौकाएं और हल्के वजन वाले टारपीडो जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
साल 2025 को ‘सुधारों का वर्ष’ घोषित किया गया है। इन गतिविधियों का उद्देश्य सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत, युद्ध के लिए तैयार बल में बदलना है, जो बहु-डोमेन एकीकृत संचालन में सक्षम हो। साथ ही रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) में सुधार
भारत सरकार ने आत्मनिर्भर देश के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए रक्षा खरीद पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव लाने के लिए कई ऐतिहासिक सुधार किए हैं। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 और रक्षा खरीद नियमावली (डीपीएम) 2025 जैसे दोनों ढांचे मिलकर इस परिवर्तन की मेरुदंड के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो पूंजीगत तथा राजस्व खरीद दोनों में गति, पारदर्शिता, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करते हैं। 
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 एक परिवर्तनकारी नीतिगत ढांचा है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू रक्षा उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक नियम-पुस्तिका तथा रणनीतिक रोडमैप के रूप में कार्य करती है। यह नीति देरी तथा आयात पर रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 एक परिवर्तनकारी नीतिगत ढांचा है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू रक्षा उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया के आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक नियम-पुस्तिका तथा रणनीतिक रोडमैप के रूप में कार्य करती है। यह नीति देरी तथा आयात पर अत्यधिक निर्भरता जैसी पुरानी चुनौतियों को दूर करने हेतु तैयार की गई है और अधिग्रहण के प्रत्येक चरण में स्पष्टता, पारदर्शिता एवं स्वदेशी नवाचार को केंद्र में रखती है।
भारत के रणनीतिक सहयोग और मजबूत नीतिगत फैसले केवल सुधार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रक्षा आत्मनिर्भरता और तकनीकी स्वतंत्रता की दिशा में एक नए दौर की नींव रख रहे हैं। घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात में लगातार बढ़ोतरी, साथ ही आधुनिक तकनीकों का तेजी से औद्योगिक ढांचे में शामिल होना, इस क्षेत्र में भारत की प्रगति को साफ तौर पर दिखाता है। आज भारत का एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने का सपना अब दूर नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे हकीकत बनता जा रहा है।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन के मूल्य में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान, स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों और निजी क्षेत्र के साथ मजबूत साझेदारी का परिणाम है। ‘मेक इन इंडिया’ पर विशेष जोर, मजबूत अनुसंधान एवं विकास व्यवस्था और उभरते स्टार्ट-अप इकोसिस्टम ने इस बदलाव को और तेज किया है।
रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना से लेकर रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने तक, सरकार के हर कदम का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और देश की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत बनाना है। ये सभी प्रयास मिलकर एक ऐसा आधुनिक और तकनीक-आधारित रक्षा तंत्र तैयार कर रहे हैं, जो न केवल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि देश को रक्षा निर्माण और नवाचार के क्षेत्र में एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है।
 

कोहरे की वजह से IGI एयरपोर्ट पर 128 फ्लाइट रद्द, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  दिल्ली-एनसीआर समेत लगभग पूरे उत्तर भारत को घने कोहरे ने अपनी चपेट में ले लिया है। विजिबिलिटी कम होने से ट्रेन के साथ-साथ फ्लाइट्स भी देरी से चल रही हैं। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आज सोमवार को कुल 128 उड़ानें रद्द हुई हैं। इसके चलते यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
दिल्ली एयरपोर्ट ने कहा कि घने कोहरे के कारण फिलहाल फ्लाइट ऑपरेशन सीएटी-3 स्थितियों में किए जा रहे हैं, जिससे उड़ानों में देरी हो सकती है या उन्हें रद्द किया जा सकता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “हमारी ग्राउंड टीमें मौके पर मौजूद हैं और यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव देने के लिए उनकी पूरी मदद कर रही हैं।”
घने कोहरे के कारण इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ानों का शेड्यूल बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आईएक्स1221, जो गोवा से दिल्ली आ रही थी, विजिबिलिटी कम होने के चलते अहमदाबाद डायवर्ट कर दी गई। यह फ्लाइट रात 11:55 बजे गोवा के मोपा एयरपोर्ट से रवाना हुई थी और 2:35 बजे दिल्ली पहुंचनी थी, लेकिन 4:07 बजे अहमदाबाद उतरी है। क्रू की ड्यूटी लिमिटेशन पूरी होने के कारण यात्रियों को अब दोपहर 12:30 बजे तक इंतजार करना होगा।
इसके साथ ही इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुल 128 उड़ानें रद्द हुई हैं, जिनमें 64 आने वाली हैं और 64 ही जाने वाली हैं। इसके साथ ही 8 डायवर्ट हैं और 30 से अधिक देरी से चल रही हैं।
एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले फ्लाइट स्टेटस चेक करें और अतिरिक्त समय लेकर एयरपोर्ट पहुंचें। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24 घंटे तक कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है।
वहीं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने एक बयान में कहा, “कोहरे के कारण उत्तर भारत में चुनिंदा एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी कम है, जिससे फ्लाइट शेड्यूल प्रभावित हो सकते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे फ्लाइट अपडेट के लिए आधिकारिक संचार चैनलों के माध्यम से अपनी संबंधित एयरलाइंस के संपर्क में रहें और एयरपोर्ट पर पहुंचने व चेक-इन प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त समय देकर अपनी यात्रा की योजना बनाएं।”
















 

भाषा-संस्कृति और परंपरा का संरक्षण जरूरी : राष्ट्रपति मुर्मु

29-Dec-2025
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिले के करनडीह स्थित आदिवासी पूजास्थल ‘दिशोम जाहेरथान’ परिसर में संथाली भाषा की ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए परंपरागत ज्ञान, संस्कृति और अस्मिता को संरक्षित रखने का आह्वान किया। उन्होंने ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने संबोधन से पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने संथाली भाषा में करीब तीन मिनट तक पारंपरिक ‘नेहोर गीत’ गाया। उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना गीत उन्होंने बचपन में सीखा था, जिसमें ‘जाहेर आयो’ (प्रकृति माता) से समाज को सदैव उजाले के मार्ग पर ले जाने की कामना की गई है।
ऑल इंडिया संथाली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने संथाली भाषा में पूरा संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना उनके लिए भावनात्मक क्षण है, जहां अपने लोगों का प्रेम और इष्टदेवों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ है।
आदिवासी समाज के स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा में संथाली लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आप अपने दैनिक जीवन से समय निकालकर ओल चिकी लिपि और संथाली भाषा के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं और ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु के अधूरे सपनों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर भारत सरकार की ओर से ओलचिकी लिपि में संविधान के प्रकाशन को संथाली समाज को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद यह आवश्यक है कि देश के नियम-कानून और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी संथाली भाषा में समाज के लोगों तक पहुंचे। समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 12 लोगों को सम्मानित किया।
समारोह को राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी संबोधित किया। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन के द्वार आम लोगों के लिए सदैव खुले हैं और आदिवासियों के विकास से जुड़े हर प्रयास में राज्यपाल भवन सहयोग करेगा। मुख्यमंत्री सोरेन ने भी संथाली भाषा, संस्कृति और आदिवासी पहचान के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। 

 



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