ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

आसियान फोरम की बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा-अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमले अस्वीकार्य, आतंकवाद को लेकर जीरो टॉलरेंस जरूरी

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मनीला में आयोजित 33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार सुरक्षित, निर्बाध और स्वतंत्र रूप से जारी रहना चाहिए।
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी जयशंकर ने कहा कि उन्होंने मनीला प्लान ऑफ एक्शन का स्वागत किया, जिसके पांचों प्रमुख स्तंभ भारत के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा, ” भारत आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने, साझा मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित करने और वास्तविक समय व टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित करने का समर्थन करता है।”
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) का समर्थन करता है। नियमित रूप से फील्ड अस्पताल, खोज एवं बचाव दल, राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा, “हाल के समय में भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस, जमैका में आए चक्रवातों के साथ ही म्यांमार, वेनेजुएला और अफगानिस्तान में आए भूकंपों के बाद पुनर्वास और राहत कार्यों में सहयोग दिया है।”
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के गंभीर परिणाम होने चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को वित्तीय सहायता पहुंचाने वाले स्रोतों पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया, ” भारत, मलेशिया के साथ मिलकर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (एडीएमएम+) के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है और आतंकवाद से निपटने की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन तैयार कर रहा है।”
समुद्री सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि भारत का इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर, इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस पहल और उत्तरी अरब सागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत तक भारतीय नौसैनिक बलों की तैनाती समुद्री डकैती, मानव एवं मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने तथा समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण को कमजोर करने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए जिम्मेदार, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने और साइबर अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की।

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस-1982) के अनुरूप एक प्रभावी, सार्थक और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है, जो सभी वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करे। दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान अपने-अपने दावे करते हैं, जिसके कारण समय-समय पर समुद्री टकराव की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

हाई-डेंसिटी रेल मार्ग पर तीसरी लाइन के लिए 440 करोड़ रुपए की परियोजना मंजूर

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारतीय रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे के निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच 14.52 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की 440 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य व्यस्त रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना, यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाना तथा परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की भारतीय रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा है। परियोजना पूरी होने के बाद इस मार्ग पर हर वर्ष अतिरिक्त लगभग 3.52 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी, जिससे उद्योगों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को गति मिलेगी।
रेलवे के अनुसार, यह सेक्शन हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क (एचयूएन-2) का हिस्सा है। वर्तमान में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन से गोकुलपुर तक का हिस्सा सिंगल लाइन है, जबकि डबलिंग का कार्य पहले से जारी है। तीसरी रेल लाइन बनने के बाद इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कॉरिडोर की क्षमता और परिचालन लचीलापन दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
इस रेल मार्ग से यात्री ट्रेनों के अलावा मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, पेलेट आयरन, लोहा-इस्पात, गेहूं, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, केमिकल सॉल्ट, चारकोल, सीमेंट, बैलेस्ट और राख जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। वर्तमान में इस मार्ग पर करीब 23.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई हो रही है।
रेलवे के मुताबिक, मौजूदा सेक्शन की लाइन क्षमता का उपयोग 115.71% तक पहुंच चुका है, जो इस मार्ग पर अत्यधिक भीड़भाड़ को दर्शाता है। तीसरी लाइन बनने से अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी, जिससे बढ़ती यात्री और माल यातायात की मांग को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
परियोजना पूरी होने के बाद आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई तेज होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी और रेलवे नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर निर्भर उद्योगों और कारोबारों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
भारतीय रेलवे ने कहा कि यह मंजूरी हाई-डेंसिटी रेल मार्गों पर क्षमता विस्तार की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य माल और यात्री ट्रेनों की तेज, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करते हुए आधुनिक, दक्ष और भविष्य के लिए तैयार रेल नेटवर्क के माध्यम से देश के आर्थिक विकास को गति देना है।




 

भारत की अध्यक्षता में 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक संपन्न, स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देने वाली घोषणा सर्वसम्मति से अपनाई

23-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत चंडीगढ़ में आयोजित 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय घोषणा को सभी सदस्य देशों द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया जाना। इस घोषणा के माध्यम से स्वास्थ्य समानता, महामारी तैयारी, डिजिटल स्वास्थ्य, अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच के लिए दीर्घकालिक सहयोग का रोडमैप तैयार किया गया।
बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्री, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” के अनुरूप स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक मजबूत, समावेशी और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
वर्चुअल माध्यम से बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जन-केंद्रित नीतियों, डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक पहुंच के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि मजबूत और समान स्वास्थ्य व्यवस्था ही सतत विकास की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि संक्रामक और गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ, जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम तथा तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सहयोग को और मजबूत बनाने की मांग करते हैं। उन्होंने भारतीय दर्शन “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार नहीं, बल्कि उनकी रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
बैठक में भारत द्वारा प्रस्तावित नौ प्राथमिकता क्षेत्रों पर सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति बनी। टीबी उन्मूलन की दिशा में ब्रिक्स टीबी रिसर्च नेटवर्क को मजबूत करने, चिकित्सा उत्पादों के नियामकीय सहयोग को बढ़ाने, भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम के उप-कार्य समूह के गठन तथा डिजिटल स्वास्थ्य सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।
बैठक में मानसिक स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता देते हुए ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन मेंटल वेलनेस की स्थापना की घोषणा की गई, जिसका समन्वय भारत का निम्हांस (NIMHANS) करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए परिचालन रूपरेखा तथा ब्रिक्स राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य संस्थानों (NPHIs) के नेटवर्क की रूपरेखा को भी मंजूरी दी गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, ई-संजीवनी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसी भारत की डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना दूर-दराज़ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। उन्होंने ब्रिक्स मिशन फॉर हेल्दी लाइफस्टाइल और वर्ष 2026-29 के संयुक्त रोडमैप का भी स्वागत किया, जिसका उद्देश्य स्वस्थ खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देना है।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने एफएसएसएआई, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और आयुष मंत्रालय के प्रदर्शनी मंडपों का भी दौरा किया। प्रतिनिधियों ने ईट राइट इंडिया पहल के अंतर्गत लाइव मिलेट सत्र में भाग लिया और भारत की डिजिटल स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, खाद्य सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली संबंधी पहलों का अनुभव किया।








 

अमेरिका और कनाडा के बीच फिर बढ़ा तनाव, ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ लागू करने का किया ऐलान

21-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के सैकड़ों उत्पादों पर 50 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ओटावा पर ऑटोमोबाइल, मादक पेय और दुग्ध उत्पाद के अमेरिकी निर्यात के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। ट्रंप के इस फैसले की वजह से उत्तरी अमेरिका में दोनों पड़ोसियों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गए हैं।
1930 के टैरिफ एक्ट की धारा 338 का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन अलग-अलग घोषणाओं पर हस्ताक्षर किए, जिनके तहत चयनित कनाडा के आयात पर 50 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया गया। व्हाइट हाउस ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कनाडा द्वारा अमेरिकी व्यापार के साथ किए जा रहे कथित भेदभाव से अमेरिकी कारोबार पर पड़ने वाले नुकसान की भरपाई करना और विशेष रूप से कारों, शराब और डेयरी उत्पादों के निर्यात के लिए अमेरिकी कंपनियों को समान प्रतिस्पर्धा वाले अवसर उपलब्ध कराना है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ये नए टैरिफ हस्ताक्षर के 30 दिन बाद लागू होंगे और अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा समझौते (यूएसएमसीए) के तहत मिलने वाली किसी भी रियायती व्यवस्था से अलग होकर लागू किए जाएंगे। हालांकि, ऊर्जा, पोटाश, सेक्शन 232 के तहत पहले से शुल्क वाले उत्पाद, मछली, महत्वपूर्ण खनिज और कुछ अन्य निर्दिष्ट वस्तुओं को इन नए शुल्कों से बाहर रखा गया है।
प्रशासन ने बताया कि यह शुल्क कनाडा से आने वाले कई प्रकार के उत्पादों पर लागू होगा। इनमें वाइन, हॉकी स्टिक और सीमेंट से लेकर विभिन्न उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हैं। इसके साथ जारी परिशिष्टों में सैकड़ों टैरिफ कैटेगरी को सूचीबद्ध किया गया है, जिन पर अतिरिक्त 50 फीसदी आयात शुल्क लगाया जाएगा।
व्हाइट हाउस का आरोप है कि कनाडा लंबे समय से ऐसी व्यापारिक नीतियां अपनाता रहा है, जो अमेरिकी निर्यातकों के साथ भेदभाव करती हैं, जबकि अन्य व्यापारिक साझेदारों को अधिक अनुकूल व्यवहार दिया जाता है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, कनाडा ने अमेरिकी मोटर वाहनों पर ऐसे शुल्क और आयात कोटा प्रतिबंध लगाए, जो अन्य देशों से आने वाले वाहनों पर लागू नहीं होते। साथ ही, कोटा प्रणाली को इस तरह संचालित किया गया कि अमेरिकी वाहन निर्माता अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के बजाय कनाडा में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों।
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कनाडा द्वारा अमेरिका से आयात किए गए मोटर वाहनों का मूल्य पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 22 फीसदी (करीब 5.6 अरब डॉलर) घट गया। वहीं, इस दौरान अन्य देशों से वाहन आयात बढ़ा, जिससे अमेरिकी निर्यात की जगह दूसरे देशों के उत्पादों ने ले ली।
व्हाइट हाउस ने अमेरिकी मादक पेय पर लगी पाबंदियों का भी जिक्र किया और कहा कि दो कनाडाई प्रांतों और इलाकों को छोड़कर बाकी सभी ने अमेरिकी शराब की खरीद, डिस्ट्रीब्यूशन या रिटेल बिक्री पर रोक लगा दी है, जबकि दूसरे देशों के प्रोडक्ट्स के लिए एक्सेस बनाए रखा है। इसने कहा कि मार्च 2025-फरवरी 2026 के समय में पिछले साल की तुलना में अमेरिका मादक पेय के कनाडाई आयात में लगभग 81 फीसदी या 582 मिलियन डॉलर की कमी आई है।
सरकार ने डेयरी को लेकर तर्क दिया कि यूएसएमसीए के तहत चीज के लिए कनाडा का टैरिफ-रेट कोटा सिस्टम, कनाडा-यूरोपीय संघ व्यापार आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी के तहत यूरोपीय संघ के ऐसे ही आयात पर लागू कोटा सिस्टम से ज्यादा रोक लगाने वाला था, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान हुआ।
व्हाइट हाउस ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में, सिर्फ दो देशों, चीन और कनाडा ने वाशिंगटन के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करने के बजाय ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने का फैसला किया।
इसमें कहा गया कि सरकार ने 18 व्यापार समझौते पक्के किए हैं, जिससे अमेरिकी निर्यात के लिए नए बाजार खुले हैं, लेकिन यह भी कहा गया कि कनाडा ने अपने व्यापार रुकावटों को दूर करने के बजाय अमेरिका के खिलाफ भेदभाव करना चुना है। नए टैरिफ ट्रंप सरकार के अपने अमेरिका फर्स्ट इकोनॉमिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए व्यापार उपायों के इस्तेमाल में एक और बड़ा कदम है।
 

दिल्ली-एनसीआर में मानसून का जोर, 21-22 जुलाई को भारी बारिश और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी

21-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मौसम ने आखिरकार करवट ले ली है। बीती देर रात हुई झमाझम बारिश के बाद लोगों को उमस और भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। बारिश के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे सुबह का मौसम सुहावना हो गया। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार 21 और 22 जुलाई को दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
इन दोनों दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 21 जुलाई को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। पूरे दिन सामान्य रूप से आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। पूर्वानुमान के मुताबिक सुबह, पूर्वाह्न और दोपहर के समय मध्यम से भारी बारिश होगी। इस दौरान गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। वहीं शाम के समय हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।
22 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहेगा। इस दिन अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। पूरे दिन सामान्य रूप से बादल छाए रहेंगे तथा मध्यम से भारी बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं की संभावना बनी रहेगी। इस दिन भी मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि 23 जुलाई से मौसम में कुछ राहत देखने को मिलेगी। इस दिन अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आसमान सामान्य रूप से बादलों से ढका रहेगा और मध्यम बारिश की संभावना है, लेकिन कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
24 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री, जबकि आर्द्रता 80 से 65 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस दिन केवल बादल छाए रहने की संभावना है और कोई मौसम संबंधी चेतावनी नहीं है। इसी तरह 25 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस रहेगा। आर्द्रता 80 से 60 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। मौसम सामान्य रूप से बादलों वाला रहेगा।
26 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। आर्द्रता 75 से 55 प्रतिशत के बीच रहेगी। इस दिन भी आसमान में बादल छाए रहेंगे। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दो दिनों तक दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण जलभराव, ट्रैफिक जाम और पेड़ों की शाखाएं टूटने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, खुले स्थानों पर बिजली चमकने के समय खड़े न रहने और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है।
 

तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में पहुंचीं उत्तरी मैसेडोनिया राष्ट्रपति मुर्मु, सहयोग के नए रास्ते पर होगी चर्चा

21-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारत की राष्ट्रपति और देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु तीन देशों के दौरे के दूसरे चरण में मोल्दोवा का दौरा सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद भारतीय समयानुसार मंगलवार को उत्तरी मैसेडोनिया पहुंचीं। वहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि स्कोप्जे एयरपोर्ट पर पहुंचने पर, प्रेसिडेंट मुर्मू का स्वागत नॉर्थ मैसेडोनिया के विदेश मामले और विदेशी व्यापार मंत्री टिमचो मुकुंस्की ने किया। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर जानकारी दी, “यह किसी भारतीय राष्ट्रपति का उत्तरी मैसेडोनिया का पहला दौरा है, जो दोनों देशों के संबंधों में बढ़ती गर्मजोशी को दिखाता है। इस दौरे से भारत-उत्तरी मैसेडोनिया के संबंध और गहरे होंगे और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।”
प्रेसिडेंट गोरडाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के निमंत्रण पर राष्ट्रपति मुर्मु 22 जुलाई तक उत्तरी मैसेडोनिया में रहेंगी। इस दौरे के दौरान, राष्ट्रपति मुर्मु अपने समकक्ष राष्ट्रपति सिलजानोव्स्का-दावकोवा और प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की से बातचीत करेंगी। उनका असेंबली के अध्यक्ष से मिलने, असेंबली को संबोधित करने और भारत-नॉर्थ मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भाषण देने का भी शेड्यूल है। दोनों देशों के बीच कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञान और तकनीक, सूचना तकनीक और आईटी-इनेबल्ड सेवाओं में ज्यादा सहयोग की उम्मीद है।
इससे पहले, मोल्दोवा में राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवन की समकक्ष माइया सैंडू से चिसीनाउ में प्रेसिडेंशियल पैलेस में द्विपक्षीय बातचीत के लिए मुलाकात की। उन्होंने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मु तकनीकी, कृषि और सस्ती दवा में साझा सहयोग को बढ़ाने से जुड़ी चर्चा में भी शामिल हुईं। दौरे के आखिरी हिस्से में प्रेसिडेंट निकुसोर डैन के निमंत्रण पर राष्ट्रपति मुर्मु 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया जाएंगी। यह तीन दशक से ज्यादा समय में किसी भारतीय राष्ट्रपति का रोमानिया का पहला दौरा होगा।





 

सिक्किम में सुरंग हादसाः पीएम मोदी ने सीएम से बात की, बचाव अभियान में हर संभव मदद का भरोसा दिलाया

21-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) पीएम मोदी ने मंगलवार को सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से नामची जिले में एनएचपीसी तीस्ता स्टेज 6 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में हुए हादसे के बाद बात की। उन्होंने राज्य को केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई और बचाव अभियान जारी है।
सिक्किम सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री ने झोलंगी के समरदुंग में निर्माणाधीन सुरंग की स्थिति का जायजा लिया और चल रहे बचाव कार्यों की समीक्षा की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस त्रासदी पर गहरी चिंता व्यक्त की और प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने राज्य सरकार को बचाव अभियान और राहत उपायों के लिए केंद्र से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री तमांग ने प्रधानमंत्री के त्वरित हस्तक्षेप और निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र के आश्वासन ने राज्य प्रशासन को शक्ति और भरोसा प्रदान किया है, क्योंकि बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया जा रहा है।
कई एजेंसियां ​​युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं। इनमें नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ), सिक्किम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, जिला प्रशासन, सिक्किम पुलिस, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, रंगपो प्राइमरी हेल्थ सेंटर की मेडिकल टीमें और स्थानीय स्वयंसेवक शामिल हैं। पाकयोंग और सिलीगुड़ी से विशेष बचाव टीमें भी इस अभियान में शामिल हो गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बचाव अभियान पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्होंने संबंधित सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे अभियान में तेजी लाएं, प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद दें और इस दौरान सुरक्षा के कड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री तमांग ने मारे गए कर्मचारियों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मुश्किल समय में राज्य सरकार उन्हें पूरा सहयोग देगी। उन्होंने जटिल बचाव अभियान में लगे बचाव कर्मियों के समर्पण, साहस और पेशेवर रवैये की भी सराहना की।
मुख्यमंत्री ने जनता से अपील करते हुए शांत रहने, भ्रामक जानकारी न फैलाने और प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया। सिक्किम सरकार ने बचाव अभियान को सुरक्षित और प्रभावी ढंग से चलाने तथा त्रासदी से प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इससे पहले अधिकारियों ने पुष्टि की कि सुरंग ढहने से सात श्रमिकों की मृत्यु हो गई है, जबकि फंसे हुए शेष श्रमिकों को निकालने के प्रयास जारी हैं।









 

भारतीय वायु सेना 20 जुलाई से डार्विन में एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026 शुरू करेगी

20-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) भारतीय वायु सेना (आईएएफ) रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (आरएएएफ) बेस डार्विन में एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026 शुरू कर रही है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 20 जुलाई 2026 से 7 अगस्त 2026 तक चलने वाला यह अभ्यास पिच ब्लैक, आरएएएफ का प्रमुख द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है।
इस अभ्यास का नाम ‘पिच ब्लैक’ उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल निर्जन क्षेत्रों में रात्रि उड़ान विशेष अभियान के कारण रखा गया है।
अभ्यास के 45 वर्षों के लंबे इतिहास में, इस संस्करण में बड़ी संख्या में प्रतिभागी बल शामिल हैं, जो जटिल बड़े बल प्रयोग और बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभियानों के लिए सैन्य कर्मियों को एक साथ ला रहे हैं।
भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, नियंत्रक और अन्य विशेषज्ञ सहित उच्च कुशल वायु योद्धा शामिल हैं। यह टुकड़ी राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमान का संचालन करेगी, जिसे सी-17 ग्लोबमास्टर-III और आईएल-78 वायु-से-वायु ईंधन भरने वाले विमानों का समर्थन प्राप्त होगा। यह अभ्यास भाग लेने वाली सेनाओं को अंतरसंचालनीयता बढ़ाने, बल एकीकरण को मजबूत करने और वैश्विक परिदृश्यों में सहयोगात्मक संचालन की दिशा में परिचालन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करेगा।
गौरतलब हो, अभ्यास पिच ब्लैक 26 लंबी दूरी पर अभियान संबंधी हवाई अभियानों को परखने, बहुराष्ट्रीय अंतर-संचालनीयता को बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेशेवर साझेदारियों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।
यह अभ्यास भाग लेने वाली वायु सेनाओं को एक वास्तविक और चुनौतीपूर्ण बहुराष्ट्रीय वातावरण में संचालन करने में सक्षम बनाएगा, जिससे परिचालन समन्‍वय और आपसी समझ को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय वायु सेना ने इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में इस अभ्यास में भाग लिया है, जो रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।






 

दिल्ली की बिजली व्यवस्था होगी स्मार्ट, सब-स्टेशन आधुनिकीकरण और सोलर अभियान की हुई शुरुआत

20-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने रविवार को पूर्वी दिल्ली में बिजली के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के मकसद से दो पहल शुरू कीं। उन्होंने गांधी नगर में अत्याधुनिक स्मार्ट पैड माउंटेड सब स्टेशन का उद्घाटन किया और ‘सोलेराइज ईस्ट’ अभियान शुरू किया। इस अभियान का मकसद ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को रूफटॉप सोलर सिस्टम से जोड़ना है।

इस कार्यक्रम में सड़क परिवहन और राजमार्ग और कॉर्पोरेट मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, विधायक, पार्षद, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रतिनिधि, हाउसिंग सोसायटियों के सदस्य, बीवाईपीएल के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुए। इस मौके पर सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार बिजली क्षेत्र के लिए एक लंबी अवधि वाली और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति लागू कर रही है।
उन्होंने बताया कि सिर्फ एक साल में बिजली क्षेत्र के कैपिटल एक्सपेंडिचर में 1,427 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इस निवेश का मकसद न सिर्फ मौजूदा जरूरतों को पूरा करना है, बल्कि दिल्ली की भविष्य में बढ़ती ऊर्जा की मांग के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि इस निवेश का इस्तेमाल ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने, नए सब स्टेशन बनाने, पुराने बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और स्मार्ट टेक्नोलॉजी को अपनाने की गति बढ़ाने में किया जा रहा है।
बिजली मंत्री ने बताया कि दिल्ली में इस साल अब तक की सबसे ज्यादा पीक पावर डिमांड (अधिकतम बिजली मांग) 8,748 मेगावाट दर्ज की गई। इतनी ज्यादा मांग के बावजूद, शहर में बिजली कटौती की कोई बड़ी समस्या नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली सरकार की प्लानिंग, बिजली वितरण कंपनियों की क्षमता, इंजीनियरों की लगन और राजधानी के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती को दिखाता है।
सूद ने कहा कि एक भरोसेमंद बिजली व्यवस्था किसी भी आधुनिक शहर का सबसे मजबूत आधार होती है। उद्योग, व्यापार, शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल सेवाएं और नागरिकों का रोजमर्रा का जीवन – ये सभी बिना रुकावट वाली और अच्छी क्वालिटी की बिजली सप्लाई पर निर्भर करते हैं। इसलिए, दिल्ली सरकार बिजली क्षेत्र को और अधिक आधुनिक, स्मार्ट, ग्रीन और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद सिर्फ बिजली देना नहीं है, बल्कि भरोसेमंद, सस्ती, स्मार्ट और अब ग्रीन बिजली पहुंचाना है।



 

अमेरिका की नजर ईरान पर, उधर चीन ने पनडुब्बी से परमाणु-सक्षम मिसाइल लांच कर बढ़ाया तनाव

20-Jul-2026
नई दिल्ली।(शोर संदेश) हाल ही में चीनी पनडुब्बी से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल के प्रक्षेपण का समय जितना ध्यान आकर्षित करना चाहिए था, उतना नहीं कर पाया। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में उलझा हुआ है, जिससे इस घटनाक्रम पर अपेक्षित स्तर की निगरानी और चर्चा नहीं हो सकी।
एशिया मीडिया सेंटर की एक रिपोर्ट में कहा गया, “इस परीक्षण के समय पर जितनी गहन जांच और ध्यान दिया जाना चाहिए था, उतना नहीं दिया गया। फरवरी के अंत से अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में व्यस्त है। चीन के इस प्रक्षेपण वाले सप्ताह में यह संघर्ष और भी तेज हो गया, जब वाशिंगटन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान के दर्जनों ठिकानों पर हमले किए। पिछले कई महीनों से अमेरिका का ध्यान, उसकी सैन्य क्षमता और कूटनीतिक संसाधन खाड़ी क्षेत्र में जारी इस संघर्ष में केंद्रित रहे हैं।”
रिपोर्ट एशिया मीडिया सेंटर की है, जो न्यूजीलैंड के पत्रकारों को एशिया से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों की राय और संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराने वाला एक संसाधन केंद्र है। लेखिका दिव्या मल्होत्रा का कहना है कि सिर्फ इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि चीन ने मौका देखकर यह परीक्षण किया। बीजिंग का कहना है कि यह उसके सालाना सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था।
मल्होत्रा ​​ने लिखा, “यह परीक्षण ऐसे समय हुआ जब चीन के परमाणु संकेतों का गंभीर जवाब देने की क्षमता रखने वाला सबसे बड़ा देश यानी अमेरिका पूरी तरह दूसरे मोर्चे पर व्यस्त था। टोक्यो, कैनबरा और नई दिल्ली में रणनीतिक मामलों पर नजर रखने वाले लोगों ने इस बात पर जरूर ध्यान दिया होगा।” मल्होत्रा ने कहा कि इससे प्रशांत क्षेत्र की चिंता कम नहीं होती। उन्होंने लिखा, “दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र के भीतर किसी मिसाइल का गिरना सबसे पहले न्यूजीलैंड के अपने रणनीतिक पड़ोस का मामला है। इस परीक्षण से पहले भी इस पूरे क्षेत्र में बढ़ती परमाणु अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई थी।”
रिपोर्ट में कहा गया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। इसमें सितंबर 2024 में चीन द्वारा प्रशांत महासागर में किया गया अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षण भी याद दिलाया गया। यह 44 साल में पहली बार था जब चीन ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसा परीक्षण किया। इसके बाद दिसंबर 2024 में जमीन में बने साइलो-बेस्ड आईसीबीएम परीक्षण भी किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, “इन सभी घटनाओं से साफ पता चलता है कि चीन अब सिर्फ सीमित और गुप्त परमाणु क्षमता रखने वाले देश की तरह नहीं रह गया है। वह अपना परमाणु भंडार बढ़ा रहा है, उसे और मजबूत बना रहा है और अब उसे खुले तौर पर दुनिया के सामने दिखाने में भी ज्‍यादा सहज हो गया है।” मल्होत्रा के अनुसार, यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि चीन अब अपने परमाणु हथियारों को पहले की तरह सिर्फ गुप्त रूप से विकसित नहीं कर रहा, बल्कि खुले तौर पर उनकी क्षमता भी दिखा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, “अगर चीन के तेजी से बढ़ते पनडुब्बी बेड़े को भी साथ में देखा जाए, तो यह परीक्षण सिर्फ एक बार की ताकत दिखाने वाली कार्रवाई नहीं लगता। बल्कि यह लगातार समुद्र में परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों की तैनाती की दिशा में उठाया गया एक सोचा-समझा कदम दिखाई देता है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन कई वर्षों से ऐसी लगातार समुद्री परमाणु गश्त करते रहे हैं।”







 


Feedback/Enquiry



Log In Your Account