ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

वंदे मातरम के विरोध पर राजनाथ का कांग्रेस पर हमला, कहा- देशभक्ति पर उठता है सवाल

22-Aug-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम के सम्मान से औपचारिक रूप से इंकार करने और इसके विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण तथा संवैधानिक दृष्टि से गंभीर विषय बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का सम्मान करने से इनकार करने पर देशभक्ति पर सवाल उठता है और संविधान के प्रति निष्ठा भी संदेह के घेरे में आ जाती है।
राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि भारत के संविधान के अनुसार संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और संसद से पारित कोई भी कानून हर व्यक्ति के लिए बाध्यकारी होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कानून को मानने से इनकार करता है तो संविधान के प्रति उसकी निष्ठा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि कोई राष्ट्रगीत का सम्मान करने से मना करता है तो उसकी देशभक्ति पर भी सवालिया निशान लग जाता है। उन्होंने कांग्रेस के वंदे मातरम को लेकर लिए गए निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संवैधानिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से गंभीर बताया।
दरअसल, कांग्रेस ने वर्ष 1937 में पार्टी द्वारा पारित एक प्रस्ताव का हवाला देते हुए वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही गाने का निर्णय किया है। कांग्रेस का कहना है कि उस समय यह निर्णय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे शीर्ष नेताओं की सहमति से लिया गया था।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के 1937 के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रस्ताव मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के आगे झुककर पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा देश को आगे चलकर विभाजन के रूप में भुगतना पड़ा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि कट्टरपंथी तत्वों के आगे समझौता करना हमेशा देश के लिए घातक साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज कांग्रेस भी कट्टरपंथी तत्वों के आगे उसी प्रकार समर्पण कर रही है और यह देश के भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय पूरी तरह असंवैधानिक और निंदनीय है। उन्होंने इसे राजनीतिक दृष्टि से भी भविष्य में गंभीर संकट पैदा करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम का विरोध कर कांग्रेस ने अपने खतरनाक इरादों को देश के सामने जाहिर कर दिया है।
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न संसद के मानसून सत्र में राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया था। विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक दर्जा और सुरक्षा प्रदान करना था। विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और सदन से वॉकआउट भी किया था।
विधेयक के तहत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय बनाने का प्रावधान किया गया है। यानी राष्ट्रीय गीत का अपमान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है।

 


प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस स्टार्टअप्स के CEO और फाउंडर्स से बातचीत की

22-Aug-2026
नई दिल्ली (शोर संदेश) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ में 20 स्पेस स्टार्टअप्स के CEO और फाउंडर्स के साथ बातचीत की। इस बातचीत में स्पेस सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के CEO शामिल हुए। पीएम मोदी के साथ बातचीत के दौरान, उन्होंने भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग द्वारा की जा रही तीव्र प्रगति पर प्रकाश डाला और इस सेक्टर के भविष्य के लिए अपना विजन साझा किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (सेवा तीर्थ) ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। इसमें रॉकेट और रियूजेबल सेमी-क्रायोजेनिक लॉन्च व्हीकल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट, एडवांस प्रोपल्शन सिस्टम, स्पेस और डिफेंस इंटेलिजेंस, स्पेस मलबा हटाने, AI-पावर्ड हाइपरलोकल मौसम और जलवायु इंटेलिजेंस जैसे विविध क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों ने हिस्सा लिया।
इन कंपनियों के सीईओ ने बताया कि उन्होंने देश में ही अपनी क्षमताएं और ज़रूरी टेक्नोलॉजी विकसित करने में काफी समय और मेहनत की है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मिले सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने सरकार से मिलने वाले मज़बूत समर्थन और इंडस्ट्री के भीतर आपसी सहयोग पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी टीमें बहुत प्रेरित हैं और स्पेस सेक्टर में बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पूरे संकल्प के साथ काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि स्पेस सेक्टर को प्राइवेट भागीदारी के लिए खोलने से काफी उत्साह पैदा हुआ था और इंडस्ट्री के लिए नए मौके बने थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई कंपनियों ने भारत के उभरते प्राइवेट स्पेस इंडस्ट्री द्वारा विकसित टेक्नोलॉजी को अपनाने और उनका इस्तेमाल करने में दिलचस्पी दिखाई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पेस सेक्टर के प्रमुखों को हिम्मत दिखाने और एक नए क्षेत्र में पहल करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर ने जो भरोसा दिखाया है, उससे उस विज़न को और मजबूती मिली है, जिसके तहत स्पेस सेक्टर को प्राइवेट भागीदारी के लिए खोला गया था। उन्होंने कहा कि कई देश या तो स्पेस सेक्टर में निवेश नहीं कर सकते या निवेश करना नहीं चाहते। इससे भारत को ग्लोबल स्पेस सेक्टर में अपनी स्थिति तेज़ी से मजबूत करने का एक बड़ा मौका मिलता है।
पीएम मोदी ने स्पेस कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी के नए इस्तेमाल खोजने और इस बात पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया कि वे लोगों की ज़िंदगी को कैसे आसान बना सकती हैं।
प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनियों और दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के बीच ज़्यादा सहयोग का सुझाव दिया। अंतरिक्ष मलबे (space debris) पर काम करने वाली कंपनियां अपनी टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए पर्यावरण संगठनों के साथ मिलकर काम कर सकती हैं। एग्रीकल्चर सेक्टर में काम करने वाली स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनियां, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज़ और विभागों के साथ मिलकर किसानों की मदद कर सकती हैं, ताकि वे बेहतर जानकारी के साथ फ़ैसले ले सकें और अपनी पैदावार बढ़ा सकें।
स्पेस सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के CEO के साथ बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा इकोसिस्टम और माहौल बनाने का आह्वान किया जिसमें जब दुनिया अंतरिक्ष के बारे में सोचे, तो उसकी नज़र भारत पर हो। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र दुनिया भर के टैलेंट, कंपनियों और निवेश को देश की ओर आकर्षित करने के लिए एक चुंबक की तरह काम कर सकता है।
पीएम मोदी ने उनसे अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ मिलकर और बेहतर ढंग से काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि इससे कम उम्र के बच्चों में स्पेस सेक्टर के प्रति जिज्ञासा और रुचि पैदा हो सकती है।
इस बातचीत में स्पेस सेक्टर में काम करने वाले जिन स्टार्टअप्स के CEO और फाउंडर्स ने हिस्सा लिया, उनमें स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सआई, पियरसाइट, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, दिगंतरा, सैटश्योर, सुहोरा टेक्नोलॉजीज, मनस्तु स्पेस, एस्ट्रोबेस, टेकमी2स्पेस, व्योमआईसी, कॉस्मोसर्व स्पेस, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, स्काईसर्व (हाइस्पेस), सेरेंडिपिटी स्पेस, वासर लैब्स और मिस्टईओ शामिल थे।

 


सीएम योगी का भारत-जापान युवाओं से आह्वान, बोले- शिक्षा और संस्कृति से मजबूत होंगे रिश्ते

22-Aug-2026
नई दिल्ली(शोर संदेश) । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को भारत और जापान के युवाओं के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने का आह्वान किया। लखनऊ में जापान और भारत के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंधों को मजबूत बनाने में युवा पीढ़ी की अहम भूमिका होगी। प्रतिनिधिमंडल में यामानाशी के गवर्नर कोतारो नागासाकी, जापान के 13 हाईस्कूल छात्र और लखनऊ के विभिन्न स्कूलों के 20 छात्र शामिल थे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत-जापान के बीच दीर्घकालिक संबंधों की नींव शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साझा अनुभवों के जरिए मजबूत की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे मजबूत रिश्ते कक्षाओं, विश्वविद्यालय परिसरों, प्रयोगशालाओं और युवा मनों के बीच बनते हैं। दोनों देशों के बच्चों को एक-दूसरे की संस्कृति, मूल्यों और जीवन-दृष्टि को समझना चाहिए और साथ मिलकर सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बच्चे भविष्य में भारत-जापान साझेदारी के सबसे प्रभावी राजदूत बनेंगे। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होंगे। यह दोनों देशों के लिए अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
योगी ने कहा कि जापान तकनीक, परंपरा और प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। जापान की ‘इकिगाई’, टीमवर्क और आपसी सम्मान जैसी खूबियों को भारत के युवा कार्यबल और प्रतिभा के साथ जोड़ने से दुनिया के लिए नई संभावनाएं पैदा होंगी। उन्होंने छात्रों से कहा कि आज वे विद्यार्थी हैं, लेकिन कल वैज्ञानिक, कलाकार, खेल चैंपियन, नीति निर्माता और वैश्विक नेता बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने भारत-जापान साझेदारी को भारत की पारंपरिक विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, से जोड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का मंत्र इसी विचार का विस्तार है।
योगी ने जापानी छात्रों की उत्तर प्रदेश यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश भारत के आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने बताया कि छात्र अवध क्षेत्र में हैं और अयोध्या, भगवान राम की जन्मभूमि, यहां से करीब है। छात्रों ने आगरा में ताजमहल का भी दौरा किया है। इसके बाद वे वाराणसी और सारनाथ जाएंगे, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। उन्होंने कहा कि इस तरह उत्तर प्रदेश भारत की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।
यामानाशी के गवर्नर कोतारो नागासाकी ने भारत और जापान के बीच समृद्ध भविष्य के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दोनों देशों के छात्रों से टीमवर्क की भावना अपनाने और भारत-जापान संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। जापानी छात्रों ने भी भारत यात्रा को लेकर उत्साह जताया और भारतीय छात्रों के साथ भविष्य में अधिक संवाद और सहयोग की उम्मीद व्यक्त की।
 

भारत के पूर्व राजदूत हर्षवर्धन श्रृंगला ने जम्मू-कश्मीर को ‘भारत का अहम हिस्सा’ बताने पर अमेरिकी राजदूत गोर की तारीफ की

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत और भाजपा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने शुक्रवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की सराहना की। उन्होंने कहा कि गोर ने इस सप्ताह की शुरुआत में श्रीनगर के दौरे के दौरान जम्मू-कश्मीर को “भारत का अहम हिस्सा” बताकर इस मुद्दे पर सही नजरिया पेश किया है। अमेरिकी राजदूत ने 19 अगस्त को श्रीनगर का दौरा किया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में केंद्र शासित प्रदेश को भारत का अहम हिस्सा बताते हुए जम्मू-कश्मीर पर भारत के रुख का जोरदार समर्थन किया।
पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला ने कहा कि गोर का बयान दो वजहों से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया, “एक तो यह कि अमेरिका की तरफ से पहले ऐसा कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। उनके पिछले बयान नपे-तुले और अन्य कारकों से प्रभावित रहते थे, जिनमें संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे का होना और भारत-पाकिस्तान के बीच इसे देखने का उनका नजरिया शामिल था। इसलिए उन्होंने जो साफ-साफ बयान दिया है, वह बहुत अहम है।” 
श्रृंगला ने आगे कहा, “दूसरी बात, सर्जियो गोर अमेरिका के कोई आम प्रतिनिधि नहीं हैं। वे अमेरिकी राष्ट्रपति के बहुत करीबी सहयोगी हैं। वे सिर्फ भारत में राजदूत नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण और मध्य एशिया का काम देखते हैं। इसलिए उनका बयान सिर्फ भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में नहीं, बल्कि उससे कहीं बड़ी भूमिका में है।”
उन्होंने याद दिलाया कि भारत में अमेरिका के पिछले राजदूतों—जैसे रॉबर्ट ब्लैकविल और केनेथ जस्टर (जिन्होंने 2020 में 14 अन्य देशों के राजनयिकों के साथ श्रीनगर का दौरा किया था)—की कश्मीर यात्राओं के बाद अब काफी प्रगति हुई है। जस्टर की भागीदारी अनुच्छेद 370 हटाने पर भारत के रुख के लिए अमेरिकी समर्थन का मजबूत संकेत थी, जिससे अमेरिकी कांग्रेस और अन्य जगहों पर उठ रहे कई सवाल भी खत्म हो गए थे। श्रृंगला ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं रह गई है। इससे कश्मीर राजनीति और अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में आ गया है और वहां के लोग देश के बाकी हिस्सों के साथ पूरी तरह जुड़ गए हैं।
भारत की G20 अध्यक्षता के मुख्य समन्वयक रहे श्रृंगला ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के लोग प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हो रहे आर्थिक विकास और प्रगति का सीधा लाभ ले रहे हैं। पर्यटन में उछाल आया है और श्रीनगर में आयोजित G20 बैठक भी इसमें मददगार साबित हुई। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री का जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में G20 बैठक कराने का फैसला गेम चेंजर साबित हुआ।”
उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का जिक्र करते हुए कहा कि वहां आजादी और आर्थिक विकास की कमी साफ दिखती है। लोग सीमा पार की मुश्किलों को देखते हैं और वैसा भविष्य नहीं चाहते। गोर का श्रीनगर दौरा ऐसे समय हुआ जब PoK में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और पाकिस्तानी बलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।
श्रृंगला ने कहा, “पूरा PoK कह रहा है कि वे भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं। तो आप ऐसी जगह क्यों जाना चाहेंगे जब आप पहले से ही सही पक्ष में हैं? यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने गोर को सोच-समझकर बयान देने वाला व्यक्ति बताया और कहा कि वे पुराने करियर डिप्लोमैट्स की तुलना में चीजों को ज्यादा राजनीतिक नजरिए से देखते हैं। श्रृंगला ने कहा, “मैं निश्चित रूप से उन्हें सही नजरिया पेश करने का श्रेय दूंगा। यह अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत संकेत देता है कि अब जम्मू-कश्मीर कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।”
 

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने में देरी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने ममता पर निशाना साधा

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा करने के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं कराई।
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के अपने दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को यहां सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के फ्रंटियर मुख्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सीमा पर बीएसएफ द्वारा बाड़ लगाए जाने के लिए जमीन मुहैया कराने को लेकर कई बार गुहार लगाई लेकिन ममता बनर्जी ने इसे अनसुना कर दिया। मैं सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 1,129 एकड़ जमीन की मांग 2014 से कर रहा था। राज्य में (मुख्यमंत्री) शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद ही हमें यह जमीन मिली।’’
अमित शाह ने कहा कि राज्य के किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने एसएसबी या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कार्यक्रमों में कभी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने मंच पर उनके साथ मौजूद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को इस चलन को तोड़ने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद एसएसबी के समारोहों में कभी शामिल नहीं हुए। एसएसबी कोई राजनीतिक संगठन नहीं है। यह बल ऐसी बातों से ऊपर है।’’
उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों के प्रति इस तरह की उदासीनता से गलत संदेश जाता है।
राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद गुरुवार शाम बागडोगरा पहुंचे अमित शाह ने केंद्र की सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए जो भी चाहिए था, वह शुभेंदु अधिकारी के सत्ता में आने के बाद से मिला। अब तो परियोजनाओं के लिए औपचारिक पत्र भेजे जाने से पहले ही राज्य की मंजूरी मिल जाती है।’’
अमित शाह ने कहा, ‘‘अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारे की सुरक्षा मजबूत करने के लिए हमें 560 एकड़ जमीन की जरूरत थी लेकिन ममता बनर्जी की (पूर्व) सरकार ने इतने वर्षों तक यह जमीन नहीं दी। मैं सत्ता में आने के तुरंत बाद जमीन देने की मंजूरी के लिए (शुभेंदु) अधिकारी को धन्यवाद देना चाहता हूं। आज इस कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी हमारे लिए सोने पर सुहागा है।’’



 

सरकार उन स्पेस स्टार्टअप्स के साथ खड़ी रहेगी, जो भविष्य के लिए भारत की क्षमताएं विकसित कर रहे हैं : पीएम मोदी

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेस स्टार्टअप्स को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी, वे भविष्य के लिए भारत की क्षमताएं विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत स्पेस सेक्टर में दुनिया को एक मज़बूत, इनोवेटिव और कमर्शियली फायदेमंद मॉडल दे सकता है।
पीएम मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ में 20 अंतरिक्ष स्टार्टअप के सीईओ और संस्थापकों के साथ बातचीत की। इसके बाद, सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “भारत के स्पेस सेक्टर की ‘युवा ऊर्जा’ से मिलकर बहुत अच्छा लगा… ऐसे युवा उद्यमी और इनोवेटर जिन्होंने एक नए और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखकर अद्भुत साहस दिखाया है। उन्होंने जोखिम उठाए, सुधार प्रक्रिया पर भरोसा किया और अपनी कोशिशों में लगातार लगे रहे। इसी वजह से, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में बहुत कुछ हासिल किया है।”
पीएम मोदी ने आगे कहा कि स्टार्टअप्स ने अपने काम के बारे में जानकारीपूर्ण प्रेजेंटेशन दिए। उन्होंने सरकार के अंतरिक्ष सुधारों की भी सराहना की और बताया कि कैसे इन सुधारों ने उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
एक अन्य एक्स पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, “मैंने स्टार्टअप्स से यह भी आग्रह किया कि वे इस बारे में सोचें कि स्पेस टेक्नोलॉजी किस तरह खेती, पशुपालन, डेयरी, पर्यावरण और रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े कई अन्य क्षेत्रों में बड़ा योगदान दे सकती है। वे अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ जुड़ सकते हैं, स्कूली बच्चों में जिज्ञासा जगा सकते हैं और अगली पीढ़ी को स्पेस सेक्टर में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। हमारा प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम भारत और दुनिया के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है!”
इससे पहले, पीएम मोदी के साथ अंतरिक्ष स्टार्टअप के सीईओ और संस्थापकों ने भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग द्वारा की जा रही तीव्र प्रगति पर प्रकाश डाला और इस सेक्टर के भविष्य के लिए अपना विजन साझा किया।
इसमें रॉकेट और रियूजेबल सेमी-क्रायोजेनिक लॉन्च व्हीकल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट, एडवांस प्रोपल्शन सिस्टम, स्पेस और डिफेंस इंटेलिजेंस, स्पेस मलबा हटाने, AI-पावर्ड हाइपरलोकल मौसम और जलवायु इंटेलिजेंस जैसे विविध क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों ने हिस्सा लिया।
पीएम मोदी ने स्पेस सेक्टर के प्रमुखों को हिम्मत दिखाने और एक नए क्षेत्र में पहल करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर ने जो भरोसा दिखाया है, उससे उस विज़न को और मजबूती मिली है, जिसके तहत स्पेस सेक्टर को प्राइवेट भागीदारी के लिए खोला गया था। उन्होंने स्पेस कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी के नए इस्तेमाल खोजने और इस बात पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया कि वे लोगों की ज़िंदगी को कैसे आसान बना सकती हैं।
 

मेडटेक में भारत को ‘मेड इन इंडिया’ से आगे बढ़कर डिजाइन, इनोवेशन और निर्यात का केंद्र बनना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

21-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत को मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में केवल ‘मेड इन इंडिया’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ‘भारत में डिजाइन, इनोवेशन और भारत से निर्यात’ की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि मेडिकल टेक्नोलॉजी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण बनाने के साथ-साथ देश में नवाचार और स्वदेशी विनिर्माण को नई गति दे सकती है।
डॉ. जितेंद्र सिंह आज नई दिल्ली में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सहयोग से आयोजित 18वें CII ग्लोबल मेडटेक समिट को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियों का समाधान करने का अवसर है—स्वास्थ्य सेवा की सीमाओं को आगे बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना कि नई तकनीक और उपचार हर नागरिक तक किफायती दरों पर पहुंचें।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सामने एक ऐसा मॉडल पेश कर सकता है, जिसमें उच्च गुणवत्ता, अत्याधुनिक तकनीक और व्यापक प्रभाव के साथ लोगों की वहन क्षमता का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने बताया कि भारत का मेडटेक क्षेत्र वर्ष 2030 तक करीब 20 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारत को मेडिकल टेक्नोलॉजी, नवाचार और विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का बड़ा अवसर प्रदान करता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 तक 96.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) बनाए जा चुके हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 5.47 लाख से अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं और 10.50 लाख से अधिक स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हैं।
उन्होंने कहा कि अब अगला कदम मेडिकल टेक्नोलॉजी को डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम के साथ सहज रूप से जोड़ना है। मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरऑपरेबल हेल्थ डेटा का एकीकरण देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बदल सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली बड़ी स्वास्थ्य क्रांति सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के सहयोग से आएगी। स्टार्टअप से लेकर अस्पतालों, प्रयोगशालाओं से लेकर बाजार तक सभी को मिलकर नवाचार को तेज करना होगा, ताकि नई तकनीक का लाभ हर मरीज तक पहुंच सके।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि मेडिकल डिवाइस के विनिर्माण चरण में ही उत्पादों की पर्याप्त जांच सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में अपनी जरूरतों के अनुरूप एक विशिष्ट यानी ‘सुई जेनेरिस’ नियामकीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार अगली पीएलआई योजनाओं को अधिक घरेलू वैल्यू एडिशन पर केंद्रित करने की तैयारी कर रही है। मौजूदा लाभार्थियों के लिए वैल्यू एडिशन की सीमा को शुरुआती निम्न स्तरों से बढ़ाकर 40 से 45 प्रतिशत तक ले जाने का प्रस्ताव है, जबकि ऐसे नए उत्पादों के विनिर्माताओं को शुरुआती स्तर पर वैल्यू एडिशन की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है, जिनका उत्पादन वर्तमान में भारत में नहीं हो रहा है।
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि मेडटेक केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा का एक रणनीतिक स्तंभ है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले और जीवनरक्षक उपकरण विकसित करने के लिए उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने तथा अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया।
वहीं, CDSCO के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि ICMR और CDSCO के सहयोग तथा नीति आयोग के मार्गदर्शन में चल रहे MedTech Mitra को अब तक 850 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि नवाचार और मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में बाधाओं को दूर करने के लिए ऐसे और प्लेटफॉर्म की जरूरत है।
उन्होंने उद्योग से उन्नत मेडिकल डिवाइस को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल हेल्थ की वास्तविक सफलता तभी होगी, जब अत्याधुनिक स्वास्थ्य तकनीक देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंचे।
फार्मास्यूटिकल्स विभाग के संयुक्त सचिव अमन शर्मा ने मेडिकल डिवाइस के लिए देश में मजबूत परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक परीक्षण सुविधाएं देश में उपलब्ध होनी चाहिए, क्योंकि विदेशों में परीक्षण कराने से भारतीय निर्माताओं की लागत बढ़ती है।
CII नेशनल मेडिकल टेक्नोलॉजी फोरम के चेयरमैन और Terumo India के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर अग्रवाल ने कहा कि भारत के मेडटेक क्षेत्र की अगली विकास यात्रा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने से आगे बढ़कर डिजाइन, नवाचार, विकास और भारत से निर्यात पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने नियामकीय प्रक्रियाओं में अधिक पूर्वानुमेयता और उद्योग, अकादमिक जगत, स्टार्टअप तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
 

सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी से की मुलाकात, असम बाढ़ राहत पर मिला पूरा भरोसा

21-Aug-2026
नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में बाढ़ से निपटने के प्रयासों और आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री से आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने लिखा कि बाढ़ राहत कार्यों के दौरान प्रधानमंत्री लगातार संपर्क में रहे, स्थिति की बारीकी से समीक्षा करते रहे और हरसंभव सहायता प्रदान करते रहे।
हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रधानमंत्री के साथ अगले चरण का रोडमैप साझा किया। इसमें प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण, आजीविका की बहाली और व्यापक सुधार सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन को सफल बनाने में भारत सरकार के अटूट समर्थन को दोहराया।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा असम की जनता के जनादेश को पूरा करने के लिए पहले 100 दिनों में शुरू की गई प्रमुख पहलों की भी जानकारी दी। उन्होंने ‘विकसित असम’ के साझा विजन को साकार करने के प्रति प्रधानमंत्री के निरंतर मार्गदर्शन और प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने एनडीए 3.0 सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर अलग-अलग पोस्ट में अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि असम की नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाओं को मजबूत किया गया है, ताकि बेटियां स्वस्थ, आत्मविश्वासी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र रह सकें।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि विकसित असम के निर्माण के लिए लोगों की सेवा पूरी ईमानदारी से करने और विकास व कल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने का संकल्प दोहराया जा रहा है।

 


दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में परिसीमन का मुद्दा भी उठा

20-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को चेन्नई के निकट कोवलम में दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में चर्चा का नेतृत्व किया। बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने परिसीमन का मुद्दा उठाया, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के बीच ‘महत्वपूर्ण बातचीत’ हुई।
कावेरी नदी जल बंटवारे के मुद्दे और मेकेदातु बांध विवाद की पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में कर्नाटक के अपने समकक्ष शिवकुमार के साथ बातचीत की। दोनों मुख्यमंत्री बैठक में एक-दूसरे के बगल में बैठे थे।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरलम, तमिलनाडु और तेलंगाना के अलावा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हैं। बैठक में केरलम के मुख्यमंत्री सतीशन सहित अन्य नेता शामिल हुए।
बैठक में अपने संबोधन में शिवकुमार ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से एक प्रस्ताव पारित करने की मांग की, जिसमें केंद्र सरकार से 1971 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाए रखने, अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बरकरार रखने और इन्हीं सीटों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का आग्रह किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में दक्षिणी राज्यों की सफलता उनकी राजनीतिक आवाज कम करने का कारण नहीं बननी चाहिए।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘हम इस आश्वासन का स्वागत करते हैं कि किसी भी दक्षिणी राज्य की सीट कम नहीं होगी। लेकिन प्रतिनिधित्व केवल संख्या का विषय नहीं है। यह प्रभाव और आवाज से जुड़ा मुद्दा है।’’ उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने देश के आह्वान पर जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्य को अनुशासन और सफलता के साथ पूरा किया है और परिसीमन प्रक्रिया में इस उपलब्धि के लिए उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 की जनसंख्या को आधार माना जाना चाहिए और लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि यहां मौजूद सभी मुख्यमंत्री मेरी बात का समर्थन करेंगे। 1971 के आधार का सम्मान किया जाए और हमारी आवाज की ताकत सुरक्षित रखी जाए।’’
शिवकुमार ने परिसीमन को महिला आरक्षण से भी जोड़ते हुए कहा कि नए परिसीमन के कारण महिला आरक्षण लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने परिषद से अगले 25 वर्षों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 पर स्थिर रखने और इन्हीं सीटों में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने मेकेदातु परियोजना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह केवल उनके राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘बैठक के लिए आते समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मुझसे कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद का समाधान जरूरी है। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि मेकेदातु परियोजना से पानी की हर बूंद तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों की मदद करेगी। हमारी मदद करें ताकि हम आपकी मदद कर सकें।’’ तमिलनाडु सरकार कावेरी नदी पर प्रस्तावित संतुलन जलाशय परियोजना का विरोध करती रही है। उसका कहना है कि इसे लागू करने से राज्य के हित प्रभावित होंगे।
इस बीच, शिवकुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह बैठक दक्षिणी क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श का अवसर थी।
वहीं, केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात की। सतीशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘‘ चेन्नई के महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक से इतर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ महत्वपूर्ण बातचीत हुई। केरल के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री पी. के. कुन्हालीकुट्टी भी मौजूद थे।’



 

परिचालन से रक्षा उद्योग तक, भारत-जापान के बीच सहयोग के लिए बनेगा कार्य समूह

20-Aug-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) भारत और जापान ने परिचालन, खुफिया, रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और रक्षा उद्योग के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के महानिदेशक या संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी इस कार्य समूह की अध्यक्षता करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में यह जानकारी दी।
कार्य समूह दोनों रक्षा मंत्रियों की ओर से तय सहयोग के क्षेत्रों में समग्र समन्वय करेगा। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाने और सहयोग से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद करना है। इसके जरिए परिचालन और खुफिया सहयोग के साथ रक्षा उपकरण, प्रौद्योगिकी और रक्षा उद्योग से जुड़े प्रयासों को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
भारत और जापान ने समुद्री जहाज निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इससे भारत को जापान की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों रक्षा मंत्रियों ने समुद्री जहाजों पर लगाए जाने वाले यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना तंत्र से जुड़ी परियोजना को महत्वपूर्ण बताया।
यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना तंत्र दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जुड़ी पहली परियोजना है। दोनों पक्षों ने इसे भारत-जापान रक्षा सहयोग की गहराती साझेदारी का प्रतीक बताया और परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
भारत और जापान ने रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अन्य परियोजनाओं पर चर्चा आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और जापान के एटीएलए के बीच अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
दोनों देशों ने रक्षा उद्योग मंच आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई संभावनाओं की तलाश करना है।
दोनों मंत्रियों ने फरवरी 2026 में भारत, जापान और इंडोनेशिया के बीच हुए पहले त्रिपक्षीय नौसैनिक पासेक्स अभ्यास का स्वागत किया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक सहयोग के दृष्टिकोण के तहत दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए तीसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही। इसमें उच्चस्तरीय वार्ता, सैन्य अभ्यास और अन्य संबंधित पहल शामिल होंगी।
भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत लॉजिस्टिक नेटवर्क के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इस नेटवर्क का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं के समय साझेदार देशों तक लोगों और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए किया जाएगा। दोनों पक्षों ने सितंबर में जापान के रक्षा मंत्रालय में होने वाले नेटवर्क के दूसरे टेबलटॉप अभ्यास का स्वागत किया।
दोनों देशों ने जरूरत पड़ने पर सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपसी विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के विभिन्न माध्यमों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
द्विपक्षीय बैठक से पहले जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारत के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें तीनों सेनाओं की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
जापानी रक्षा मंत्री ने बुधवार को मुंबई स्थित पश्चिमी नौसेना कमान का दौरा भी किया था। इस दौरान वह भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस चेन्नई पर गए। दोनों देशों के बीच बढ़ते नौसैनिक और समुद्री सहयोग के लिहाज से इस दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-जापान के बीच हुए इन फैसलों से रक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को एक साझा संस्थागत ढांचे के तहत आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी, जहाज निर्माण, सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है। 


 


Feedback/Enquiry



Log In Your Account