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वाराणसी से राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ, आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन पर जोर

10-Sep-2026
नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बुधवार को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का शुभारंभ किया। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ विषय के तहत शुरू हुए महीने भर के राष्ट्रव्यापी अभियान में आहार में विविधता, भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, ताजा और गर्म पका भोजन, स्वच्छता तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए विभागों के बीच निरंतर समन्वय, सक्रिय सामुदायिक भागीदारी और अग्रिम पंक्ति के सेवा प्रदाताओं की प्रतिबद्धता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर बुनियादी ढांचे और शिक्षण वातावरण के साथ उन्नत और नवीनीकृत कर जीवंत सामुदायिक संस्थानों में बदला गया है।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे वास्तविक समय में डेटा प्रविष्टि और डिजिटल निगरानी के जरिए सेवाओं की निगरानी और वितरण को बेहतर बनाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से जमीनी स्तर पर पोषण सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने पूरक पोषण सेवाओं को मजबूत किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र पात्र लाभार्थियों को नियमित रूप से गर्म पका भोजन और घर ले जाने के लिए राशन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि पोषण पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता, क्योंकि इसका लाभ स्वस्थ बच्चों, सशक्त परिवारों और मजबूत राष्ट्र के रूप में लंबे समय तक मिलता है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के माध्यम से पोषण परिणामों में सुधार की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों, 1.10 करोड़ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा करीब 16 लाख किशोरियों को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
अन्नपूर्णा देवी ने जीवन के पहले 1000 दिनों को बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों के रूप में उन्नत कर रही है। इनमें उत्तर प्रदेश के करीब 24 हजार केंद्रों को मंजूरी दी गई है। इन केंद्रों में बेहतर बुनियादी ढांचे और सेवाओं के माध्यम से बच्चों तथा माताओं को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के कार्यान्वयन के दस वर्ष पूरे हो गए हैं। योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए अब तक देशभर में 4.65 करोड़ से अधिक माताओं को 21 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि योजना मातृ स्वास्थ्य और पोषण परिणामों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान लोगों को संतुलित और विविध आहार के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, ताजा पका भोजन, स्वच्छता और बच्चों के शुरुआती विकास से जुड़े विषय अभियान के प्रमुख केंद्र में रहेंगे। अन्नपूर्णा देवी ने पोषण संबंधी व्यवहार में स्थायी बदलाव के लिए सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
अन्नपूर्णा देवी ने लोगों से 2047 तक सुपोषित भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पोषण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यक्रमों की सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब परिवार, समुदाय और स्थानीय संस्थाएं इनमें सक्रिय रूप से भागीदारी करें।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने समुदायों, पंचायती राज संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों और परिवारों से पोषण आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर पोषण और बाल देखभाल सेवाओं को मजबूत करने में इन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
महिला एवं बाल विकास सचिव अनिल मलिक ने कहा कि पोषण अभियान अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि व्यापक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही को और मजबूत करना होगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र के संस्थागत और तकनीकी सुदृढ़ीकरण को बेहतर सेवा गुणवत्ता में बदलने पर भी उन्होंने जोर दिया।
कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ से पहले गणमान्य व्यक्तियों ने पोषण मेले का अवलोकन किया। मेले में पोषण केंद्रित नवाचार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थ और आंगनवाड़ी केंद्रों की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में ताजा पका भोजन, घर ले जाने वाले राशन, गृह भ्रमण तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा से जुड़े लाभार्थियों के अनुभवों पर वीडियो भी दिखाए गए।
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक किया जाएगा। अभियान के दौरान आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों में ताजा और गर्म भोजन, आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों एवं पूरक पोषण कार्यक्रम के मेनू बोर्डों के जरिए सामुदायिक स्वामित्व तथा बाल विकास से जुड़े पोषण और प्रारंभिक प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
 

दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में एआई और तकनीक की भूमिका अहम: उपराष्ट्रपति

10-Sep-2026
नई दिल्ली। ईटानगर में दिव्यांग बच्चों के लिए बने डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा करने पहुंचे उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से कहा कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, खुद पर भरोसा रखने और कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ के गायन को सुनकर उपराष्ट्रपति भावुक हो गए और कहा कि उन्हें बच्चों के दिल से निकलती देशभक्ति की भावना महसूस हुई।
उपराष्ट्रपति ने ईटानगर के चिम्पू स्थित डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा किया और सुनने, देखने तथा बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों से बातचीत की। उन्होंने संस्थान के विभिन्न गतिविधि क्षेत्रों का जायजा लिया और छात्रों को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान का दौरा उन्हें गहरी भावुकता और देशभक्ति की भावना से भर गया। खास तौर पर छात्रों को ‘वंदे मातरम’ गाते हुए सुनना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों ने यह गीत इतनी ईमानदारी से गाया कि उन्हें उनके दिल से निकलती देशभक्ति की भावना महसूस हुई।
सी. पी. राधाकृष्णन ने अरुणाचल प्रदेश सरकार, डोनी-पोलो मिशन, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, पुनर्वास विशेषज्ञों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में राज्य सरकार की उपलब्धियां समाज के हर पहलू को कवर करती हैं।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति अनोखा होता है और हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। उन्होंने छात्रों को खुद पर विश्वास रखने और लगातार मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने प्रेरणादायक यात्रा का उदाहरण देते हुए छात्रों से उन लोगों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया, जिन्होंने अपनी चुनौतियों पर विजय हासिल की है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की क्षमता और सपनों की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं।
सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि डोनी-पोलो मिशन स्कूल जैसे संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं। ये बच्चों को आशा, गरिमा, अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान समावेशी ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में सार्थक योगदान देते हैं।
उपराष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल उपकरण और सहायक प्रौद्योगिकियां बाधाओं को दूर करने के साथ शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकती हैं।
उन्होंने छात्रों के लिए एआई-संचालित शिक्षण सामग्री और समग्र सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में डोनी-पोलो मिशन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए सीखने के अवसरों को और बेहतर बना सकता है।
उपराष्ट्रपति ने विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए शिक्षकों तथा कर्मचारियों के असाधारण धैर्य, करुणा और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने बच्चों को सहयोग और प्रोत्साहन देने में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।
अपने संबोधन के अंत में सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों से कहा, “आज, आपने मुझे बहुत सी बातें सिखाई हैं।” उन्होंने छात्रों के दृढ़ संकल्प और उनसे मिली प्रेरणा की सराहना की।
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चौना मेन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा जनजातीय मामलों के मंत्री कोंटो जिनी, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, डोनी-पोलो मिशन और उसके प्रबंधन के प्रतिनिधि, शिक्षक, पुनर्वास विशेषज्ञ, कर्मचारी तथा संस्थान के छात्र मौजूद रहे।
इससे पहले उपराष्ट्रपति ने ईटानगर स्थित जे. एन. राज्य संग्रहालय का भी दौरा किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर की समृद्ध मानव जाति विज्ञान संबंधी विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने में संग्रहालय की भूमिका की सराहना की।

 


भारत इनोवेट्स युवा नवोन्मेषकों को वैश्विक अवसरों से जोड़ता है : प्रह्लाद जोशी

10-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विकास यात्रा के केंद्र में नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ जैसी पहल देश के युवा नवोन्मेषकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ वैश्विक हितधारकों, उद्योग जगत और नेटवर्क से जुड़ने का अवसर देती है। जोशी ने नई दिल्ली में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन करते हुए यह बात कही। पुस्तक में भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत 14 से 16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ के पहले संस्करण की यात्रा को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ प्रधानमंत्री के उस विजन का प्रतीक है, जिसके तहत युवा नवोन्मेषकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और वैश्विक हितधारकों के साथ जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल युवा भारत के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को दर्शाती है तथा उच्च शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े देश के इकोसिस्टम की क्षमता को सामने लाती है।
 केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ ने यह दिखाया है कि युवा प्रतिभाओं को यदि अवसरों, उद्योग जगत और वैश्विक नेटवर्क से जोड़ा जाए तो वे बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में मौजूद वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा को सही मंच देकर भारत नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है।
 केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने विकसित भारत के विजन को साकार करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुसंधान, नवाचार, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी गई है। ‘भारत इनोवेट्स’ जैसी पहल इन प्राथमिकताओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराती है।
स्मारक पुस्तक में ‘भारत इनोवेट्स’ की पूरी यात्रा का विवरण दिया गया है। इसमें देशभर से प्रतिभाशाली डीप-टेक नवोन्मेषकों की खोज और चयन से लेकर फ्रांस के नीस में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उनके नवाचारों के प्रदर्शन तक की प्रक्रिया को दर्ज किया गया है। पुस्तक में इस पहल के दौरान हुई सहभागिता, संवाद और सामने आए परिणामों को भी शामिल किया गया है।
‘भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की पहल है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा और अनुसंधान इकोसिस्टम से उभरने वाले उच्च क्षमता वाले डीप-टेक नवाचारों की पहचान करना और उन्हें आगे बढ़ाना है। यह पहल नवोन्मेषकों को उद्योग, निवेशकों और अन्य संबंधित हितधारकों से जोड़ने के साथ प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक इस्तेमाल को गति देने पर केंद्रित है।
इस पहल का उद्देश्य नवोन्मेषकों को वैश्विक बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच के अवसर उपलब्ध कराना भी है। ‘भारत इनोवेट्स’ प्रयोगशाला से बाजार और परिसर से दुनिया तक एक निर्बाध मार्ग तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि शोध और नवाचार को व्यावसायिक उपयोग और वैश्विक सहयोग से जोड़ा जा सके।
‘भारत इनोवेट्स’ के पहले संस्करण में पूरे भारत से 120 डीप-टेक स्टार्टअप और नवोन्मेषकों के साथ 45 अनुसंधान परियोजनाओं को एक मंच पर लाया गया। प्रतिभागियों को अपनी तकनीकों का प्रदर्शन करने, उद्योग और निवेशकों के साथ संवाद करने तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और बाजार के अवसर तलाशने का अवसर मिला।
स्मारक पुस्तक इस पूरी यात्रा के जरिए भारत के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, स्टार्टअप्स, उच्च शिक्षण संस्थानों और इकोसिस्टम से जुड़े साझेदारों की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार क्षमता को सामने लाती है। इसमें देश के युवाओं की उद्यमशीलता की भावना और नई तकनीकों के क्षेत्र में उनकी संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है।
 

 


अमेरिका ने 27 ईरानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध लगाए, तीसरे देश की कंपनियों को भी निशाना बनाया

09-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) अमेरिका के वित्त विभाग ने ईरान की 27 एयरलाइंस को अपनी ‘स्पेशली डिजाइनेटेड नेशनल्स’ (एसडीएन) सूची में शामिल कर लिया है। इस कदम के साथ अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करते हुए उसकी बची हुई सभी एयरलाइंस को निशाने पर ले लिया है।
मंगलवार (स्थानीय समय) को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा कि ‘ईरान की वाणिज्यिक एयरलाइंस लंबे समय से ईरानी सरकार की अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों का समर्थन करती रही हैं।’ विभाग के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कथित तौर पर निजी एयरलाइंस का इस्तेमाल हथियारों की खरीद और ढुलाई तथा अपने कर्मियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए करता रहा है।
स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पहली बार अक्टूबर 2011 में ईरान की एयरलाइन ‘महान एयर’ पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद 30 जुलाई को उसने उन कई कंपनियों को भी निशाना बनाया जिन्हें ‘महान एयर’ के जनरल सेल्स एजेंट के रूप में देखा जाता है। विज्ञप्ति के अनुसार, नए प्रतिबंध उन गुप्त फ्रंट कंपनियों, विदेशी बिचौलियों और भ्रामक ट्रांजिट मार्गों को भी निशाना बनाते हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान अमेरिकी मूल के विमान और संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए करता है।
खास तौर पर, वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने तुर्किये, मलेशिया और कजाकिस्तान की चार कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। अमेरिका का आरोप है कि ये कंपनियां ‘महान एयर’ को कार्गो सेवाएं और बिक्री से जुड़ी सहायता प्रदान कर रही थीं।
ओएफएसी ने उन अनुमतियों को भी निलंबित कर दिया है जिनके तहत विमान ईरान के ऊपर से उड़ान भर सकते थे और गैर-अमेरिकी एयरलाइंस अमेरिकी मूल या अमेरिकी नियंत्रण वाले वाणिज्यिक विमानों को ईरान ले जा सकती थीं।
इसके अलावा, वित्त विभाग के तहत काम करने वाले फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क ने वित्तीय संस्थानों से अपील की है कि वे ईरान के विमानन उद्योग को समर्थन देने वाले खरीद नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दें।
विज्ञप्ति के मुताबिक, माहान एयर को 2026 की गर्मियों में कम से कम तीन बी-777 विमान मिले थे, जिन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान के रास्ते भेजा गया था।
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्‍कि‍यन ने मंगलवार को कहा कि उनका देश पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि ‘आक्रमण करने वालों’ को अपने कदमों पर पूरी तरह पछतावा न हो जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा युद्ध के खिलाफ रहा है।
पेजेश्‍क‍ियन ने कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान हमेशा युद्ध का विरोध करता रहा है। हमारा मानना है कि लोगों के हितों की रक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने का रास्ता युद्ध भड़काने से बचने में है।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन जिस तरह ईरान ने अब तक साहस के साथ हर आक्रमण का मुकाबला किया है, उसी तरह वह आगे भी पूरी ताकत के साथ अपना प्रतिरोध जारी रखेगा, जब तक कि आक्रमण करने वालों को अपने किए पर पूरा पछतावा न हो जाए। ईरान अपने लोगों के अधिकारों की रक्षा करता रहेगा।”





 

दिल्ली-एनसीआर में फिर बदलेगा मौसम, 11 से 14 सितंबर तक बारिश के आसार

09-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) मानसून की सक्रियता और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब दिल्ली-एनसीआर समेत मैदानी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में बादल छाए रह सकते हैं। खासतौर पर 11 सितंबर से 14 सितंबर के बीच एनसीआर के मौसम में बदलाव की संभावना है। इस दौरान तापमान में भी धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की जा सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान में भी दिल्ली के लिए 11 सितंबर से हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार 9, सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। इस दिन अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
10 सितंबर को भी मौसम लगभग इसी तरह रहने का अनुमान है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। मौसम में वास्तविक बदलाव 11 सितंबर से देखने को मिल सकता है। इस दिन मौसम विभाग ने आम तौर पर बादल छाए रहने और हल्की बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। अधिकतम तापमान घटकर 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
12 सितंबर को बारिश की गतिविधि और बढ़ सकती है। स्थानीय पूर्वानुमान में आम तौर पर बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। इस दिन अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। 13 सितंबर को भी एनसीआर में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहने की संभावना है। आसमान में सामान्य रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश हो सकती है। अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस, जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
वहीं 14 सितंबर को भी मौसम में खास बदलाव नहीं होगा। आसमान में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। अधिकतम तापमान और नीचे आकर 30 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। इस तरह देखा जाए तो 9 और 10 सितंबर को अपेक्षाकृत गर्म और आंशिक रूप से बादल वाला मौसम, जबकि 11 से 14 सितंबर के बीच बादल और बारिश का प्रभाव अधिक रहने की संभावना है। चार दिनों में अधिकतम तापमान 32 से घटकर 30 डिग्री तक पहुंच सकता है।
बढ़ती आर्द्रता के कारण बारिश के दौरान मौसम सुहावना होने के बावजूद उमस का असर बना रह सकता है। देश के कई हिस्सों में इस समय बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं और उत्तर भारत के कई राज्यों में भी बारिश का पूर्वानुमान है। आईएमडी ने आने वाले दिनों में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है।













 

ब्रिटेन के एयर ट्रैफिक कंट्रोल में तकनीकी खराबी का भारत पर असर, एयर इंडिया की उड़ानें प्रभावित

09-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) एयर इंडिया ने बुधवार को कहा कि ब्रिटेन की एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवा प्रदाता एनएटीएस में आई तकनीकी खराबी के कारण उसके उड़ान संचालन पर असर पड़ा है। इस समस्या ने पूरे यूनाइटेड किंगडम के कई हवाई अड्डों पर सेवाओं को प्रभावित किया। एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर जारी एक बयान में कहा कि इस तकनीकी गड़बड़ी की वजह से उसे ब्रिटेन के हवाई अड्डों से आने-जाने वाली कई उड़ानों का मार्ग बदलना पड़ा, उन्हें देर से संचालित करना पड़ा या रद्द करना पड़ा।
एयर इंडिया ने चेतावनी दी कि इसका असर उसकी कुछ अन्य उड़ानों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इस व्यवधान के चलते विमान और चालक दल (क्रू) तय स्थानों पर समय पर नहीं पहुंच पाए हैं। एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें। ‘एक्‍स’ पर जारी ट्रैवल एडवाइजरी में एयर इंडिया ने कहा, “हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और व्यवधान को जितना संभव हो सके, उतना कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”
फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस तकनीकी खराबी के कारण ब्रिटेन भर में 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। इससे प्रमुख हवाई अड्डों पर आने और जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुईं। ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल का संचालन करने वाली एनएटीएस ने बताया कि यह समस्या उसके फ्लाइट प्रोसेसिंग सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के कारण हुई। इसका असर लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट, एडिनबर्ग एयरपोर्ट और मैनचेस्टर एयरपोर्ट समेत कई बड़े हवाई अड्डों पर पड़ा।
बाद में एनएटीएस ने कहा कि उसने समस्या को ठीक करने के लिए तकनीकी समाधान लागू कर दिया है और सिस्टम अब सामान्य रूप से काम कर रहा है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि प्रभावित उड़ानों का बैकलॉग साफ करने और पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल करने में कुछ समय लगेगा। एनएटीएस ने कहा, “हमारे सिस्टम की समस्या अब ठीक हो चुकी है। हम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और लंबित उड़ानों को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं।”
हीथ्रो एयरपोर्ट ने कहा कि वह एनएटीएस के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि यात्रियों और उड़ान कार्यक्रमों पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके। इस व्यवधान का असर केवल ब्रिटेन तक सीमित नहीं रहा। ब्रिटेन और आयरलैंड के बीच उड़ानें भी प्रभावित हुईं। डबलिन एयरपोर्ट ने यात्रियों को चेतावनी दी कि ब्रिटेन से आने-जाने वाली सेवाओं पर असर पड़ सकता है।


 

पीएम मोदी ने वडोदरा में 35 हजार करोड़ की परियोजनाओं का किया शिलान्यास और लोकार्पण

08-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में करीब 35 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। पीएम मोदी ने महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के मैदान में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान, अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सब कुछ एक साथ हो रहा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में गुजरात के लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।” उन्होंने वडोदरा के लोगों की तारीफ करते हुए कहा, “इस विकास पर्व में आप सभी ने जिस सेवाभाव से पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वडोदरा के हर एक नागरिक को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उनकी सराहना करता हूं।”
पीएम मोदी कहा, “जिस तरह से आपने ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान चलाया है, उसके लिए भी मैं आपको बधाई देता हूं।” उन्होंने कहा कि हर परिवार में स्वच्छता का वातावरण बन गया है। उन्होंने कहा, “इस बार जब गणेश जी पधारेंगे तो सारे आशीर्वाद बरसेंगे।”
उन्होंने कहा, “इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो।”
वडोदरा को गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर बताते हुए पीएम ने कहा, “आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2,800 किमी से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया है। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।” इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई सांसद और नेता मौजूद रहे।









 

हमने 50,000 रेल कोच बनाए, कांग्रेस 50,000 शौचालय भी नहीं बना सकी: पीएम मोदी

08-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पिछली कांग्रेस सरकार पर विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि 2014 के बाद भारत ने 50,000 आधुनिक रेल कोच बनाए, जबकि पिछली सरकार 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बना सकी। गुजरात के वडोदरा में 35,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे (WDFC) के तीन प्रमुख खंडों का उद्घाटन किया। इन खंडों के चालू होने के साथ ही जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (नवी मुंबई) को उत्तर प्रदेश के दादरी से जोड़ने वाली यह परियोजना पूरी हो गई।
पीएम मोदी ने कहा कि समर्पित माल ढुलाई गलियारे तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा हैं और इस आधुनिक नेटवर्क के कारण देश में बदलाव की रफ्तार तेज हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही पटरी पर चलना पड़ता था, जिससे दोनों की रफ्तार प्रभावित होती थी। अब समर्पित गलियारे ने इस स्थिति को बदल दिया है। पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे देश के व्यापार और कारोबार की रीढ़ बन रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि 2,800 किलोमीटर लंबे समर्पित माल ढुलाई गलियारे का पूरा होना पिछले 12 वर्षों में देश की कार्य संस्कृति में आए बदलाव का प्रमाण है। उन्होंने याद दिलाया कि इस परियोजना का विचार 2004 में सामने आया था और 2006 में विशेष कंपनी बनाई गई, लेकिन 2014 तक फाइलें एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहीं। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से इन फाइलों की किस्मत में भी कोई समर्पित गलियारा नहीं था। फाइलें कहीं अटक जाती थीं, कहीं पड़ी रहती थीं और इधर-उधर भटकती रहती थीं। 2014 के बाद आपके आशीर्वाद से दिल्ली पहुंचते ही हमने इस परियोजना के काम में तेजी लाई और आज यह पूरा हो गया है।” पीएम मोदी ने इस उपलब्धि को देश के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।













 

बाढ़ प्रभावित नेपाल में भारत-चीन की मदद से पुलों के पुनर्निर्माण, सड़क संपर्क बहाल करने की कोशिश तेज

08-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) विनाशकारी बाढ़ से टूटे महत्वपूर्ण सड़क मार्गों को बहाल करने में जुटे नेपाल ने आपदा प्रभावित इलाकों में अलग-थलग पड़े समुदायों को फिर से जोड़ने के लिए भारत और चीन से अस्थायी पुल मुहैया कराने का अनुरोध किया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, 26 अगस्त को आई आपदा में सोमवार तक 1,356 लोगों की मौत हो गई जबकि 4,994 लोग अब भी लापता हैं। अब तक कुल 13,396 लोगों को बचाया गया है।
चट्टानों के खिसकने एवं हिमस्खलन के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ से भोटेकोशी नदी में पानी का तेज बहाव आया जिसमें उत्तरी और मध्य नेपाल में मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए तथा पनबिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। नेपाल ने भारत और चीन दोनों से अस्थायी पुल देने का अनुरोध किया है और दोनों देशों ने इस अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
‘द काठमांडू पोस्ट’ की मंगलवार की खबर के अनुसार, चीन मुस्तांग में कोरला सीमा चौकी पर 100-100 मीटर लंबे दो ‘बेली ब्रिज’ (अस्थायी इस्पात पुल) पहले ही भेज चुका है। खबर में कहा गया कि सड़क विभाग ने सड़कों और पुलों को करीब 30 अरब नेपाली रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया है, जबकि इनके पुनर्निर्माण पर करीब 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने की संभावना है।
बाढ़ में रसुवा और चितवन के बीच 41 पुल नष्ट हो गए और चार अन्य आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इस मार्ग पर मौजूद 63 पुलों में से केवल 18 ही सुरक्षित बचे हैं। बाढ़ के कारण कई महत्वपूर्ण सड़क मार्ग नष्ट हो गए। रसुवा में आपदा के कारण नुवाकोट से सड़क संपर्क टूट गया, जबकि फुरके खोला पर बना कंक्रीट का पुल नष्ट हो जाने से धादिंग जिले के मुख्यालय धादिंगबेसी और पृथ्वी राजमार्ग के बीच सीधा संपर्क भी कट गया।
‘काठमांडू पोस्ट’ ने सड़क विभाग के उपमहानिदेशक एवं प्रवक्ता शुभराज न्यौपाने के हवाले से बताया कि विभाग ने बाढ़ में बहे सड़क मार्गों को साफ करने का काम शुरू कर दिया है ताकि अस्थायी पुल लगाए जा सकें। खबर के अनुसार, नेपाली सेना नुवाकोट के देवीघाट में अलग से एक ‘एक्रो ब्रिज’ (अस्थायी मॉड्यूलर पुल) लगा रही है।
भौतिक अवसंरचना एवं परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील बाबू ढकाल ने बताया कि सड़क विभाग के पास 48 मीटर तक लंबे 11 ‘बेली ब्रिज’ हैं, लेकिन उन्हें क्षतिग्रस्त स्थानों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती है क्योंकि कई स्थानों तक जाने वाली सड़कें भी बाढ़ में बह गई हैं। बताया जा रहा है कि भारत ने भी नेपाल को ‘बेली ब्रिज’ उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
इस बीच, बुनियादी ढांचे को हुए व्यापक नुकसान से बचाव एवं राहत कार्यों की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। अधिकारियों को बाढ़ के पानी से बरामद शवों की पहचान करने में भी दिक्कत हो रही है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, सोमवार तक केवल 98 शवों की पहचान कर उन्हें परिवारों को सौंपा जा सका।

















 

ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी से करेंगे द्विपक्षीय बैठक : क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव

08-Sep-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश)  दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात तय है। क्रेमलिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि करते हुए भारत को रूस का “रणनीतिक साझेदार” बताया है।
रूसी राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और राष्ट्रपति पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को मीडिया से वर्चुअल बातचीत की। उनके बयानों में भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट के साथ-साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी दिखाई दी।
पेस्कोव ने कहा, “दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक। जैसा कि आप जानते हैं, भारत और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी संबंध हैं। उनके संबंध बहुत व्यावहारिक हैं और वे एक-दूसरे के साथ इतने ईमानदार हैं कि वैश्विक एजेंडे और हमारे आपसी संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं।”
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है।
ब्रिक्स की अहमियत पर पेस्कोव ने प्रकाश डालते हुए कहा,” मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है। हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है। बल्कि, यह उन देशों का एक क्लब है जो इस बात पर एक जैसी सोच रखते हैं कि दुनिया में काम कैसे होने चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कैसे किया जाना चाहिए।”
उन्होंने ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र करते हुए कहा, “रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों – राजनीति और सुरक्षा; अर्थव्यवस्था और वित्त; और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क – के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बेशक, हमारी अपनी कई पहल हैं जिन्हें हम इस समूह के भीतर बढ़ावा दे रहे हैं। हम ब्रिक्स के भीतर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में ज्यादा से ज्यादा देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन करते हैं।”
पार्टनर कंट्री के कॉन्सेप्ट की प्रशंसा करते हुए पेस्कोव बोले, ” 2024 में, पार्टनर देशों की एक नई श्रेणी – ‘ब्रिक्स पार्टनर कंट्री’ श्रेणी – बनाई गई थी, और अब यह बहुत अच्छी तरह से विकसित हो रही है। बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है। इन देशों के प्रतिनिधियों को धीरे-धीरे अलग-अलग वर्किंग ग्रुप और फॉर्मेट में शामिल किया जा रहा है, और हम इसे एक बहुत ही सकारात्मक विकास मानते हैं।”
उन्होंने बताया कि रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की। बोले, “हम इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, और ब्रिक्स के भीतर कई देशों ने इसका समर्थन किया।”
पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच अब करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब डॉलर के प्रभुत्व और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा तेज है। भारत के रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को “अवैध” करार दिया।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत के दौरान, यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें भी अहम मुद्दा हो सकती हैं। भारत ने शुरुआत से ही युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है। भारत की इसी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा, “हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं।”
पेस्कोव ने ब्रिक्स को सिर्फ आर्थिक समूह के रूप में देखने से आगे बढ़ते हुए इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता में काफी निवेश किया है और संगठन की विचारधारा बहुध्रुवीय दुनिया की विचारधारा है। उनके अनुसार एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है।
उनके मुताबिक, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक नहीं है। इसके पीछे दुनिया की उस नई व्यवस्था की बहस भी है जिसमें रूस, भारत, चीन और दूसरे उभरते देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “कहानी केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है।”
पेस्कोव ने भारत में नए परमाणु संयंत्र के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई। उन्होंने रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया। 
 


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