ब्रेकिंग न्यूज

देश-विदेश

पीएम मोदी से मिले हरियाणा के सीएम सैनी, विकास एजेंडे पर हुई चर्चा

02-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट की तस्वीरें प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गईं।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों, भविष्य की प्राथमिकताओं और कई समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर, सशक्त और समावेशी विकास की दिशा में देश को आगे बढ़ाने वाला ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रस्तुत ‘विकसित भारत बजट’ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और मजबूत करता है।
इस दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास महाराज के नाम पर किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता, सम्मान और समावेशी राष्ट्र निर्माण का सशक्त संदेश बताया। 
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्नेहिल शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों तथा भविष्य की प्राथमिकताओं के साथ कई समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।”
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने इसके बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। इस भेंट के बाद उन्होंने एक्स पर लिखा, “नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट हुई। इस अवसर पर संगठन की मजबूती, आगामी राजनीतिक गतिविधियों तथा केंद्र-राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा












 

बजट 2026: देश में बनेंगी 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप, शिक्षा-रिसर्च और स्किल का होगा एकीकृत मॉडल

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा को लेकर एक बड़ी और दूरगामी घोषणा की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी। खास बात यह है कि ये सभी यूनिवर्सिटी टाउनशिप प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास विकसित की जाएंगी। ऐसे में इसका सीधा लाभ यहां पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा। यह पहल इसलिए की जा रही है ताकि इंडस्ट्री और रोजगार सीधे उच्च शिक्षा के साथ जुड़ सकें।
सरकार ने साफ किया है कि इन यूनिवर्सिटी टाउनशिप को बनाने में केंद्र सरकार विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी। यानी यूनिवर्सिटी बनाने, ढांचा खड़ा करने और सुविधाएं विकसित करने में राज्यों को केंद्र की मदद मिलेगी। इस पूरी योजना का मकसद यह है कि हर क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से आधुनिक और मजबूत शिक्षा संस्थान तैयार किए जाएं। इन यूनिवर्सिटी टाउनशिप में छात्रों के लिए हर तरह की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां रहने के लिए बड़े रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स होंगे, ताकि बाहर से आने वाले छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि इसके साथ-साथ इन विश्वविद्यालयों में स्किल सेंटर बनाए जाएंगे, जहां पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा टाउनशिप यूनिवर्सिटी में हाईटेक लेबोरेटरी, आधुनिक कॉलेज, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब भी होंगे। छात्रों और शोधार्थियों को अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाएं मिलेंगी, जिससे रिसर्च, स्टार्ट-अप और नए आइडियाज को बढ़ावा मिलेगा। यहां सरकार का फोकस सिर्फ डिग्री देने पर नहीं होगा, बल्कि छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाने पर ध्यान केंद्रित करना है।
सरकार का मानना है कि ये पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी पैदा करेंगी। आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, बजट में की गई यह घोषणा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की युवा शक्ति को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में यह भी बताया कि पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) खोला जाएगा।
इसका सीधा मकसद है कि इस क्षेत्र में डिजाइन की पढ़ाई, क्रिएटिव सोच और इनोवेशन को मजबूती मिले। अभी तक डिजाइन से जुड़े अधिकांश बड़े और नामी संस्थान देश के कुछ चुनिंदा हिस्सों तक ही सीमित रहे हैं। ऐसे में पूर्वी भारत के छात्रों को या तो बाहर जाना पड़ता है या अच्छे मौके नहीं मिल पाते। नया एनआईडी खुलने से स्थानीय छात्रों को अपने ही इलाके में विश्वस्तरीय डिजाइनिंग की शिक्षा मिल सकेगी। इस संस्थान में प्रोडक्ट डिजाइन, फैशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग और डिजिटल डिजाइनिंग जैसे कोर्स कराए जाने की उम्मीद है। यहां से निकलने वाले युवा न सिर्फ नौकरी के लिए तैयार होंगे, बल्कि स्टार्ट-अप शुरू करने और नए प्रोडक्ट विकसित करने में भी सक्षम होंगे।
सरकार का मानना है कि डिजाइन आज सिर्फ कला तक सीमित नहीं है, बल्कि मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों का अहम हिस्सा बन चुका है। अच्छा डिजाइन होने से भारतीय प्रोडक्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा पसंद किए जाते हैं। नया एनआईडी इस दिशा में बड़ा सहारा बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके साथ ही, इस संस्थान से पूर्वी भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी। स्थानीय उद्योगों को बेहतर डिजाइन सपोर्ट मिलेगा, रोजगार के नए मौके बनेंगे और क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में मदद मिलेगी। शिक्षाविदों के मुताबिक पूर्वी भारत में एनआईडी की स्थापना को क्रिएटिव इंडस्ट्री को बढ़ावा देने, युवाओं को नए अवसर देने और देश के संतुलित विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा सकता है।

केंद्रीय बजट 2026 में लघु तथा मध्यम उद्यम के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए का एक समर्पित निधि का प्रस्ताव

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने हमेशा निर्णायक रूप से अस्पष्टता की जगह काम को, बातों की जगह सुधार को और लोक-लुभावन नीतियों की जगह लोगों को प्राथमिकता दी है। आज रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार तीन कर्तव्यों से प्रेरित है। इनमें से पहला कर्तव्य- आर्थिक विकास को गति देते हुए इसे निरंतर कायम रखना है तथा उत्पादकता व प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हुए अस्थिर वैश्विक स्थिति के इस दौर में मजबूती कायम रखना है।
सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को विकास का मत्वपूर्ण इंजन करार देते हुए वित्त मंत्री ने इसके विकास के लिए तीन सूत्रीय दृष्टिकोण का प्रस्ताव रखा। इनमें पहला इक्विटि समर्थन है जिसमें उन्होंने लघु तथा मध्यम उद्यम के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए का एक समर्पित निधि का प्रस्ताव रखा है। इसके अंतर्गत चुनिंदा मानकों पर भविष्य में उत्कृष्ट उद्यमों का सृजन करना है।
वित्त मंत्री ने वर्ष 2021 में स्थापित आत्मनिर्भर भारत कोष में बढ़ोतरी के लिए 2,000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों को मदद पहुंचाना और जोखिम पूंजी तक उनकी पहुंच बनाए रखना है।
वित्तीय उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के दूसरे दृष्टिकोण पर वित्त मंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए 7 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रकम की व्यवस्था की गई है। इसकी क्षमता का पूरा फायदा उठाने के लिए उन्होंने चार उपायों का प्रस्ताव रखा है- (i) एमएसएमई से सावर्जनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा समस्त खरीदों के लिए ट्रेड्स को लेन-देन निपटान प्लेटफॉर्म के रूप में उपयोग करने का अधिदेश करना, (ii) ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर बीजक छूट के लिए सीजीटीएमएसई के जरिये ऋण गारंटी सहायता तंत्र की शुरुआत करना, (iii) एमएसएमई से सरकारी खरीदों के बारे में फाइनेंसर्स तक जानकारी साझा करने के लिए जीईएम को टीआरईडीएस को जोड़ना, (iv) ट्रेड्स प्राप्तियों को आस्ति-समर्थित प्रतिभूतियों के रूप में प्रस्तुत करना। इसका उद्देश्य नगदी एवं लेनदेनों के निपटान करते हुए एक दूसरा बाजार विकसित करना है।
साथ ही, व्यवसायगत सहायता पर बोलते हुए, सीतारमण ने कहा कि खासकर टियर-2 और टियर-3 नगरों में ‘कॉर्पोरेट मित्रों’ के समूह का विकास के लिए के लिए अल्पावधि की मॉड्यूलर पाठ्यक्रमों और व्यवहारिक टूल्स की डिजाइन के लिए सरकार आईसीएआई, आईसीएसआई, आईसीएमएआई जैसे संस्थानों की मदद करेगी। ये यह प्रणाणित अर्ध-पेशेवर एमएसएमई को कम लागत पर अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेंगे।

केंद्रीय बजट 2026: चीन की पकड़ तोड़ने के लिए भारत बनाएगा रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को भारत में अहम खनिजों से जुड़ी एक बड़ी और खास पहल का ऐलान किया। इसका मकसद देश में रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र को मजबूत करना है।
लोकसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिजों से भरपूर राज्यों को रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने में मदद करेगी। ये कॉरिडोर ऐसे खास केंद्र होंगे, जहां रेयर अर्थ मिनरल्स से जुड़ा पूरा काम एक ही जगह होगा।
इन रेयर अर्थ कॉरिडोर में खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक सभी काम शामिल होंगे। यानी जमीन से खनिज निकालने से लेकर उनसे आधुनिक चीजें बनाने तक का पूरा सफर भारत में ही होगा।
यह घोषणा नवंबर 2025 में शुरू की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना को आगे बढ़ाने का कदम है। इसका उद्देश्य है कि भारत इस क्षेत्र में अपनी घरेलू ताकत बढ़ाए और आयात पर निर्भरता कम करे।
फिलहाल भारत रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए काफी हद तक चीन से आयात पर निर्भर है। यह चिंता का विषय है, क्योंकि रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा तकनीक और आधुनिक उद्योगों में होता है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त कच्चे माल हैं और तटीय क्षेत्र इन खनिजों से भरपूर हैं। सरकार चाहती है कि भारत खुद इन जरूरी खनिजों का उत्पादन करे, ताकि देश की सप्लाई चेन सुरक्षित रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा व आर्थिक विकास को मजबूती मिले।
ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को ऐसे ही नहीं चुना गया है। इन राज्यों के समुद्री तटों पर मोनाजाइट और अन्य बीच सैंड मिनरल्स बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं, जिनमें रेयर अर्थ तत्व भरपूर होते हैं।
ये कॉरिडोर केवल खनिज निकालने तक सीमित नहीं रहेंगे। यहां हाई-वैल्यू प्रोसेसिंग और रेयर अर्थ मैग्नेट बनाने का काम भी होगा, जिससे भारत को अपने ही खनिजों से ज्यादा फायदा मिलेगा।
उद्योग विशेषज्ञों ने इस कदम को चीन के लगभग एकाधिकार के खिलाफ भारत की मजबूत रणनीति बताया है। उनका कहना है कि इससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति बेहतर होगी।
यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के उद्देश्यों से मेल खाती है और खनन क्षेत्र में हाल के सुधारों को भी आगे बढ़ाती है, जिनका मकसद काम को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाना है।
यह ऐलान दिखाता है कि भारत जरूरी खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनना चाहता है, जो देश की औद्योगिक और ऊर्जा बदलाव की योजना का अहम हिस्सा है।
वित्त मंत्री के इस फैसले से निवेश बढ़ने, नए रोजगार पैदा होने और खनिज तकनीक में नवाचार आने की उम्मीद है। इससे भारत ग्रीन एनर्जी और एडवांस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी मजबूत होगा। हालांकि अभी फंडिंग, समयसीमा और प्रोत्साहनों की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन ये रेयर अर्थ कॉरिडोर सरकार की रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग योजना में एक बड़ा और साहसिक कदम माने जा रहे हैं।

केंद्रीय बजट 2026: रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित, राजनाथ सिंह ने जताया पीएम मोदी का आभार

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय बजट की तारीफ करते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक संदेश में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पेश इस शानदार बजट के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूं। यह जनभावनाओं और जन-अपेक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है। साथ ही, यह बजट प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त आधार देता है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं।”
उन्होंने कहा, “इस बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किए जाने पर मैं प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद आए इस बजट ने देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के हमारे संकल्प को सुदृढ़ किया है।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि इस साल हमारी सेनाओं के कुल पूंजीगत व्यय के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हमारी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का है। इसके लिए इस साल 1.85 लाख करोड़ रुपए की प्रोविजनिंग की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा, “भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी इस बजट में प्रमुख स्थान मिला है। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत वर्तमान वर्ष की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 12,100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के संतुलन को मजबूत करता है।”



 

राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का फोकस, रक्षा बजट में 15% की बढ़ोतरी; आवंटन 7.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा

01-Feb-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के रक्षा क्षेत्र के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है। बजट में रक्षा बलों के लिए सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। यह रकम पूंजीगत खर्च का हिस्सा है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में दिए गए 1.80 लाख करोड़ रुपए से लगभग 21.8 प्रतिशत अधिक है।
रक्षा बजट में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब हाल ही में भारत ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। यह कदम सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के अनुरूप है, जिसमें देश में ही रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पुर्जों को बनाने में लगने वाले कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी। इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा मिलेगा।
बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाता है।
इस बजट का रुख पहले से चल रही उस रणनीति को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेना के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है।
कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण फाइटर जेट, युद्धपोत, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ज्यादा बजट दिया जाना है। रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए ज्यादा बजट मिलने से सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सप्लायर कंपनियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पूरे सेक्टर में ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं।
सरकारी क्षेत्र की जिन कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं, जो सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपकरण बनाती हैं।
इसके अलावा मिधानी, बीईएमएल, भारत डायनामिक्स जैसी छोटी निजी कंपनियों और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। यह सब भारत में ही रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का हिस्सा है।


 

पीएम मोदी ने एटा और कच्छ की वेटलैंड्स को रामसर मान्यता मिलने पर जताई प्रसन्नता

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के एटा स्थित पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ स्थित छारी-ढांड को रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह मान्यता जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण इकोसिस्टम की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि एटा (उत्तर प्रदेश) में पटना बर्ड सेंचुरी और कच्छ (गुजरात) में छारी-ढांड का रामसर साइट बनना खुशी का विषय है। उन्होंने स्थानीय समुदाय और वेटलैंड संरक्षण के लिए कार्य कर रहे सभी लोगों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि ये वेटलैंड्स प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में आगे भी फलते-फूलते रहेंगे।
इससे पहले पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी थी कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पटना बर्ड सेंचुरी और गुजरात के कच्छ जिले में छारी-ढांड को रामसर साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने यह घोषणा दो फरवरी को मनाए जाने वाले विश्व वेटलैंड्स दिवस से पहले की।
भूपेंद्र यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क 2014 में 26 साइट्स से बढ़कर अब 98 साइट्स तक पहुंच गया है। यह लगभग 276% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है, जो वेटलैंड संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
मंत्री ने बताया कि इन दोनों वेटलैंड्स में सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके साथ ही ये क्षेत्र चिंकारा, भेड़िया, कैरकल, रेगिस्तानी बिल्ली और रेगिस्तानी लोमड़ी जैसी प्रजातियों तथा कई लुप्तप्राय पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करते हैं। 

 

अरुणाचल में सेना-आईटीबीपी का संयुक्त अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’, युद्ध तैयारियों को मिली नई धार

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने अरुणाचल प्रदेश में चार दिवसीय संयुक्त फायरिंग अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ के दूसरे चरण (फेज-II) का सफल आयोजन किया है। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों बलों के बीच समन्वय बढ़ाना और युद्धक तैयारियों को और अधिक मजबूत करना रहा।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने शुक्रवार को बताया कि ‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास का दूसरा चरण 25 से 28 जनवरी के बीच अरुणाचल प्रदेश के तेजू क्षेत्र में आयोजित किया गया। इस चरण का मुख्य उद्देश्य अंतर-बल युद्धक तालमेल और परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करना था।
चार दिन चले इस संयुक्त अभ्यास में स्पीयर कॉर्प्स के स्पीयरहेड गनर्स के साथ आर्टिलरी रेजिमेंट, इन्फैंट्री बटालियनों और आईटीबीपी के जवानों ने हिस्सा लिया। इस दौरान लाइव आर्टिलरी फायरिंग के जरिए संयुक्त फायरपावर ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
अभ्यास का प्रमुख फोकस गैर-गनर कर्मियों को आर्टिलरी प्रक्रियाओं और विभिन्न फायरिंग मिशनों के संचालन से परिचित कराना रहा। लेफ्टिनेंट कर्नल रावत के अनुसार, इन्फैंट्री और आईटीबीपी के जवानों को अनुभवी गनर्स की निगरानी में स्वतंत्र रूप से कई आर्टिलरी फायरिंग ड्रिल का प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने कहा कि यथार्थपरक युद्ध परिस्थितियों में किए गए इस प्रशिक्षण से भाग लेने वाले बलों के बीच आपसी विश्वास, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे युद्धक्षेत्र में फायरपावर के प्रभावी एकीकरण की समझ और क्षमता को मजबूती मिली है।
‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास का दूसरा चरण भारतीय सेना की संयुक्तता (जॉइंटमैनशिप), अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) और यथार्थवादी प्रशिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह अभ्यास उभरती परिचालन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतर-एजेंसी सहयोग को लगातार सशक्त करने के संकल्प को भी रेखांकित करता है।
गौरतलब है कि इससे पहले ‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास का पहला चरण (फेज-I) 19 से 24 जनवरी के बीच अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के सिगार क्षेत्र में आयोजित किया गया था। छह दिवसीय इस अभ्यास में भी भारतीय सेना और आईटीबीपी ने संयुक्त परिचालन एकीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की थी। 








 

 


पीएम मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति की फोन पर बातचीत, सहयोग बढ़ाने पर सहमति

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला गणराज्य की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज के बीच शुक्रवार को फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-वेनेजुएला संबंधों को और मजबूत करने तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विस्तृत चर्चा की।
फोन पर हुई बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट कर बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से सकारात्मक और उपयोगी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देश सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत और विस्तारित करने पर सहमत हुए हैं तथा भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, बातचीत के दौरान व्यापार और निवेश, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि और जन-जन संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने इन क्षेत्रों में आपसी संभावनाओं को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।
पीएमओ ने बताया कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इसके साथ ही वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी और कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज भविष्य में भी संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को निरंतर आगे बढ़ाया जा सके।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचारों की समानता के कारण भारत और वेनेजुएला के बीच हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर भी सक्रिय सहयोग करते हैं। भारत और वेनेजुएला ने वर्ष 2023 में अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 64वीं वर्षगांठ मनाई थी। कराकास और नई दिल्ली में दोनों देशों के स्थायी दूतावास चार दशकों से अधिक समय से कार्यरत हैं।
वेनेजुएला भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बनकर उभरा है। इसके अलावा आईटीईसी कार्यक्रम के तहत हर वर्ष वेनेजुएला के विशेषज्ञ भारत आते हैं। आईसीसीआर ने शैक्षणिक वर्ष 2017 से वेनेजुएला के छात्रों के लिए चार छात्रवृत्तियों को मंजूरी दी है। वर्तमान में वेनेजुएला में लगभग 50 अनिवासी भारतीय और करीब 30 व्यक्तिगत प्रवासी निवास करते हैं।









 

पंजाब के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा, पीएम मोदी करेंगे अहम उद्घाटन

31-Jan-2026
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पंजाब का दौरा करेंगे। इस दौरान वे दोपहर करीब 3:45 बजे आदमपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे, जहां एयरपोर्ट का नया नाम ‘श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट, आदमपुर’ अनावरण करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री लुधियाना स्थित हलवारा एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन भी करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण उस महान संत और समाज सुधारक के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिनकी समानता, करुणा और मानवीय गरिमा की शिक्षाएं आज भी भारत के सामाजिक मूल्यों को प्रेरित करती हैं।
पीएमओ के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हलवारा एयरपोर्ट पर जिस नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया जाएगा, वह पंजाब के लिए एक नया एविएशन गेटवे साबित होगा। इससे लुधियाना और आसपास के औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्रों की कनेक्टिविटी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि हलवारा लुधियाना जिले में स्थित एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारतीय वायुसेना स्टेशन भी है।
लुधियाना के पुराने एयरपोर्ट पर रनवे छोटा होने के कारण केवल छोटे विमानों का संचालन संभव था। कनेक्टिविटी में सुधार और बड़े विमानों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए हलवारा में एक नया सिविल एन्क्लेव विकसित किया गया है। यहां बना लंबा रनवे ए320 जैसे विमानों के संचालन में सक्षम है।
बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के सतत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास के विजन के अनुरूप इस टर्मिनल भवन में कई हरित और ऊर्जा-कुशल सुविधाएं शामिल की गई हैं। इनमें एलईडी लाइटिंग, इंसुलेटेड छत, रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम, सीवेज और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तथा लैंडस्केपिंग के लिए रिसाइकल वाटर का उपयोग शामिल है।
टर्मिनल का आर्किटेक्चरल डिजाइन पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करता है, जिससे यात्रियों को एक विशिष्ट और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा यात्रा अनुभव मिलेगा।










 



kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account