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शिक्षा

राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत 200 विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण शुरू

05-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत जिले के प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थियों के लिए आयोजित शैक्षणिक भ्रमण को कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह भ्रमण कलेक्टर एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत सूरजपुर जिले के लगभग 200 छात्र-छात्राओं को सरगुजा संभाग के प्रमुख शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों इंदिरा गांधी कृषि अनुसंधान केंद्र, आकाशवाणी केंद्र, दरिमा हवाई पट्टी, ठिनठिनी पत्थर तथा संजय पार्क का भ्रमण कराया जा रहा है। छात्र-छात्राएं महिला एवं पुरुष गाइड शिक्षकों के नेतृत्व में इन संस्थानों का अवलोकन कर आधुनिक कृषि तकनीक, रेडियो प्रसारण प्रणाली तथा हवाई यातायात संचालन से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे।
इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, नवाचार और व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है, जिससे उनका शैक्षणिक विजन व्यापक हो और वे पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन के अनुभव प्राप्त कर सकें। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।
इस अवसर पर पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री भीमसेन अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवीजन सर्वश्री मुरली मनोहर सोनी, राम कृपाल साहू, शशिकांत गर्ग, संदीप अग्रवाल,  कौशल प्रताप सिंह, संत सिंह, अरविंद मिश्रा, राजेश महलवाला, शंकर जिंदिया, अजय अग्रवाल, राजेश्वर तिवारी, शैलेश अग्रवाल, देव गुप्ता, अशोक अग्रवाल, संस्कार अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थित रही। 
शैक्षणिक विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी अजय कुमार मिश्रा, जिला मिशन समन्वयक मनोज कुमार साहू, एपीसी शोभनाथ चौबे, बीआरपी गाइड शिक्षक टंडन, विनोद यादव, हर्ष नारायण शर्मा, गौतम शर्मा, अजीत कुमार गुप्ता, अजय उपाध्याय, श्रीकांत पाण्डेय, लौकेश साहू एवं श्रीमती ज्योति साहू उपस्थित थी। 












 

परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि, पालक सहभागिता में देश में प्रथम

05-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को तनावमुक्त उत्सव के रूप में मनाने की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ ने पालकों की भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है। 
अब तक छत्तीसगढ़ से 25.16 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन किया है, जिनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य में परीक्षा प्रबंधन, समय प्रबंधन, पालकों को अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने हेतु अनावश्यक दबाव देने से बचने तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुनियोजित प्रयासों को दर्शाती है।
'परीक्षा पे चर्चा' में पालकों की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है।  बलोदाबाजार जिले में 14,658 तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 9,952 पालकों द्वारा पंजीयन किया गया है, जो इस अभियान के प्रति अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता, सहभागिता और विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल संख्यात्मक सफलता नहीं है, बल्कि यह परीक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का भी संकेत देती है।
इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे राज्य में अपनाई गई नवाचारपूर्ण रणनीतियाँ महत्वपूर्ण रही हैं। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की गई, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-साइट पंजीयन की व्यवस्था की गई तथा युवा क्लब और “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के माध्यम से समुदाय को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया। 
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” से एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन दर्ज हुए, जबकि इससे पहले प्रतिदिन औसत पंजीयन लगभग 1500 के आसपास था। पिछले प्रयासों के रूप में आयोजित शिक्षक-पालक सम्मेलन और मेगा पीटीएम ने भी अभिभावकों की सजगता और सहभागिता को नई दिशा दी है।
परीक्षा पे चर्चा से जुड़े प्रेरक अनुभव भी लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में शामिल हुई कु. युक्तामुखी ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस वर्ष अधिक से अधिक विद्यार्थियों से पंजीयन कर अपने प्रश्न पूछने की अपील की है। उनका प्रेरक संदेश विद्यार्थियों में उत्साह, आत्मविश्वास और सक्रिय सहभागिता की भावना जागृत कर रहा है। 
इसी प्रकार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में शीतकालीन अवकाश के दौरान आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” में सभी विद्यालयों, समुदाय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और इस आयोजन के परिणामस्वरूप एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन हुए। इस सफलता से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी परीक्षा पे चर्चा मेलों का आयोजन किया जा रहा है और लोग उत्साहपूर्वक इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में परीक्षा पे चर्चा में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण स्थलों पर ही पंजीयन की व्यवस्था की गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को पंजीयन प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई गई और वहीं पर पंजीयन कराने में सहयोग दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में पंजीयन किया गया। 
पंजीयन प्रक्रिया 11 जनवरी 2026 तक खुली रहेगी और इस बात की पूरी संभावना है कि छत्तीसगढ़ में 30 लाख से अधिक पंजीयन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि “परीक्षा पे चर्चा” माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का वार्षिक संवाद कार्यक्रम है, जिसमें वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों से सीधे संवाद करते हैं। इस संवाद में परीक्षा से जुड़ी चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया जाता है तथा पालकों को यह संदेश भी दिया जाता है कि वे अधिक अंक लाने के लिए अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि बच्चों का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाएँ। यह पहल अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है और परीक्षा को तनाव का विषय न मानकर उत्सव के रूप में मनाने की व्यापक सामाजिक चेतना विकसित कर रही है।
“परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ द्वारा प्राप्त की गई यह उपलब्धि पूरे राज्य के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा परीक्षा को तनाव नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाने का जो संदेश दिया गया है, उसे छत्तीसगढ़ ने दिल से अपनाया है। कुल पंजीयन में देश में चौथा स्थान और पालक सहभागिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे यहां अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है और वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इसी उत्साह के साथ हम 30 लाख से अधिक पंजीयन के लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे और परीक्षा को तनावमुक्त बनाने के इस अभियान को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहेंगे।” - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
 

सूरजपुर में बाल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, बच्चों के अधिकारों पर दी गई शिक्षा

03-Jan-2026
रायपुर,( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ में बाल अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सूरजपुर जिले के ओडगी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत विशालपुर में बाल संरक्षण पर केंद्रित व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, यूनिसेफ तथा एग्रिकॉन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला विशालपुर एवं हाई सेकेंडरी स्कूल नवाटोला में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का संचालन ओडगी ब्लॉक के नवनियुक्त समन्वयक कृष्ण कुमार गुर्जर एवं धनराज जगते के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर दोनों विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
जागरूकता सत्रों के दौरान बाल विवाह की कुप्रथा, लिंग आधारित हिंसा, घरेलू हिंसा, गुड टच-बैड टच की समझ, शिक्षा का महत्व, बच्चों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य, गुणों की महत्ता तथा ‘पढ़ाई का कोना’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही बच्चों को चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, आपातकालीन सेवा 112 एवं महिला हेल्पलाइन 181 की जानकारी देकर आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों ने “बाल विवाह मुक्त भारत” के संकल्प की शपथ ली और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। ग्रामीण क्षेत्रों में बाल संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम है।







 

 


सीखेगा बचपन सुकमा जिले में एफएलएन मिडलाइन असेसमेंट सफलतापूर्वक संपन्न

16-Dec-2025
सुकमा( शोर संदेश )। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत निपुण भारत योजना एवं एफएलएन लक्ष्य मिशन 2026-27 के तहत 15 दिसंबर को सुकमा जिले की सभी शासकीय एवं अनुदान प्राथमिक शालाओं में “सीखेगा बचपन - एफएलएन मिडलाइन असेसमेंट” का सफल आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कक्षा तीसरी तक के बच्चों में भाषा एवं गणित के आवश्यक लर्निंग आउटकम का आकलन करना था।
यह आयोजन कलेक्टर  देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में जिला शिक्षा अधिकारी  जी.आर. मण्डावी के आदेशानुसार संपन्न हुआ। मिडलाइन मूल्यांकन में कक्षा पहली के 6653, दूसरी के 7575 एवं तीसरी के 7417 विद्यार्थियों सहित कुल 21645 बच्चों ने सहभागिता की।
जिला समन्वयक समग्र शिक्षा  उमाशंकर तिवारी के अनुसार प्रश्नपत्रों का वितरण जिला स्तर से किया गया तथा सभी विद्यालयों में मूल्यांकन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया गया। जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों द्वारा विद्यालयों का निरीक्षण कर मूल्यांकन प्रक्रिया, बच्चों की भागीदारी एवं एफएलएन शिक्षण सामग्री के उपयोग का अवलोकन किया गया तथा आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।

दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए सुखद अनुभूति से भरा रामगढ़ और सैनिक स्कूल का शैक्षणिक भ्रमण

15-Dec-2025
अम्बिकापुर( शोर संदेश )। कलेक्टर  विलास भोसकर के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में आज मानव जीवन ज्योति दृष्टि बाधित विद्यालय, बतौली के दिव्यांग विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं भ्रमणात्मक यात्रा पर उदयपुर स्थित रामगढ़ पर्यटन केंद्र ले जाया गया। बच्चों को बस के माध्यम से सुरक्षित रूप से भ्रमण कराया गया।
रामगढ़ पहुंचकर विद्यार्थियों को वहां स्थित विभिन्न पर्यटन स्थलों का परिचय कराया गया। भले ही दृष्टि बाधित बच्चे भगवान राम को नेत्रों से नहीं देख सके, लेकिन रामगढ़ की पावन हवा, वृक्षों की सरसराहट, बहते जल की मधुर ध्वनि, शीतल समीर और पक्षियों के मधुर कलरव में उन्होंने भगवान “राम” की उपस्थिति को आत्मिक रूप से महसूस किया। यह अनुभव बच्चों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत प्रेरक रहा।
भ्रमण के दौरान बच्चों के लिए खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन गतिविधियों से बच्चों के आत्मविश्वास, आनंद और सामाजिक सहभागिता की वृद्धि होगी।
इसके पश्चात विद्यार्थियों को सैनिक स्कूल अम्बिकापुर का भ्रमण कराया गया। यहां बच्चों को सैन्य अनुशासन, परिसर की जानकारी दी गई तथा टैंक और तोप जैसे सैन्य संसाधनों को स्पर्श कर उनके बारे में बताया गया, जिससे बच्चों में देशभक्ति और साहस की भावना विकसित हुई।
समस्त भ्रमण कार्यक्रम के उपरांत विद्यार्थियों को सुरक्षित रूप से विद्यालय वापस छोड़ा गया। इस अवसर पर उप संचालक समाज कल्याण  व्ही.के. उके सहित विद्यालय एवं संबंधित कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। विद्यालय प्रबंधन ने इस मानवीय और संवेदनशील पहल के लिए जिला प्रशासन एवं कलेक्टर  विलास भोसकर के प्रति आभार व्यक्त किया।











 

नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा संपन्न

15-Dec-2025
एमसीबी ( शोर संदेश )।  मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में पीएम  जवाहर नवोदय विद्यालय, कक्षा छठवीं में प्रवेश हेतु आयोजित चयन परीक्षा रविवार को उत्साहपूर्ण, शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। ठंड के मौसम की परवाह किए बिना ग्रामीण एवं शहरी अंचलों से बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को परीक्षा केंद्रों तक लेकर पहुंचे, जिससे परीक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता और रुचि स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
परीक्षा आयोजन के लिए जिले में कुल 11 केंद्र स्थापित किए गए थे। इनमें भरतपुर विकासखंड में 4, खड़गवां विकासखंड में 4 तथा मनेन्द्रगढ़ विकासखंड में 3 परीक्षा केंद्र शामिल थे। सभी केंद्रों पर प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। परीक्षा के दौरान सुरक्षा, अनुशासन तथा समय-प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
इस वर्ष नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के लिए जिले से कुल 3570 छात्र-छात्राओं ने पंजीयन कराया था। इनमें से 2877 विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिसमें लगभग 81 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। चयन परीक्षा में शामिल सभी विद्यार्थी पीएम  जवाहर नवोदय विद्यालय, केनापारा, बैकुंठपुर में कक्षा छठवीं में प्रवेश हेतु अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर रहे थे। परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित अभिभावकों ने नवोदय विद्यालय की गुणवत्ता पूर्ण आवासीय शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह विद्यालय उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। इसी क्रम में कई अभिभावकों द्वारा मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शीघ्र ही पृथक जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना किए जाने की मांग भी की गई, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही जिले में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त हो सके। कुल मिलाकर जिले में नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा का आयोजन सफल, सुव्यवस्थित और उत्साहवर्धक रहा, जो भविष्य में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का सकारात्मक संकेत है।

 

प्रधानमंत्री की ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ की शुरुआत, विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा संवाद का अवसर

14-Dec-2025
रायपुर,( शोर संदेश ) परीक्षा पे चर्चा 2026 का नौवां संस्करण जनवरी 2026 में आयोजित होगा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह कार्यक्रम पीएम मोदी का एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है, जिसमें देश-विदेश के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक परीक्षा से जुड़े तनाव, अनुभव और सकारात्मक तैयारी पर चर्चा करते हैं। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन  MyGov पोर्टल (innovateindia1.mygov.in ) पर शुरू हो चुके हैं और इसकी अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 है। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थीए शिक्षक और अभिभावक ऑनलाइन डब्फ आधारित प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों को सीधे संवाद करने का एक और सुनहरा अवसर मिल रहा है। प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी परीक्षा पे चर्चा के भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जो इस श्रंखला का 9 वाँ संस्करण होगा। इस मंच के माध्यम से  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों से चयनित बच्चों द्वारा परीक्षा से संबंधित पूछे गए सवालों के जवाब देकर उनका मार्गदर्शन करेंगे और उनके तनाव को कम करने का प्रयास करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी माता-पिता और शिक्षकों के साथ बातचीत भी करते हैं, ताकि वे छात्रों के सभी सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनकी मदद कर सकें और अपने बच्चों और छात्रों को एग्जाम के तनाव को दूर करने में मदद कर सकें।  परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में केवल कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के छात्र एवं कक्षा 6 से 12 छात्रों के पेरेंट्स रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन करके वे अपना सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं। गौरतलब है कि पीपीसी 2025 के 8 वें संस्करण ने भारत और विदेशों में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से पंजीकरण के मामले में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर स्थापित किया है। कार्यक्रम की अपार लोकप्रियता छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करने और परीक्षाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में इसकी सफलता को उजागर करती है।
इस कार्यक्रम में कक्षा 6 से 12 वीं के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सभी अपने प्रश्न अधिकतम 500 शब्दों में तैयार कर सकते हैं। प्रश्न अपलोड करने की सुविधा भारत सरकार के पोर्टल   http://innovateindia1.mygov.in  पर उपलब्ध है।  परीक्षा पे चर्चा विकल्प में प्रतिभागी पुरस्कारों से जुडी तिथियों और अन्य दिशा-निर्देशों की जानकारी देख सकते हैं। कार्यक्रम के लिए प्रश्न अपलोड करने की प्रक्रिया 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और प्रतिभागी अपने प्रश्न 11 जनवरी 2026 तक जमा (अपलोड)कर सकते हैं।
 

स्कूलों के प्रति प्रेम और समर्पित शिक्षकों की जरूरत—संसाधनों की कोई कमी नहीं : मंत्री गजेन्द्र यादव”

12-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )।  स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा है कि राज्य में शिक्षक एवं शैक्षणिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। जरूरत अपने स्कूल के प्रति प्रेम ओर समर्पण करने वाले और पढ़ाई में रूचि दिखाने वाले समर्पित शिक्षकों की है। राज्य सरकार अच्छे शिक्षकों को जहां पुरस्कृत करेगी वहीं लापरवाह शिक्षकों को सजा देने में भी कोई कोताही नहीं बरतेगी। यादव जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की संभाग स्तरीय बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। यादव ने इस अवसर पर स्कूलों के निरीक्षण हेतु जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के उपयोग के लिए तैयार ऐप को भी लांच किया। 
मंत्री यादव नेे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए स्कूलों के निरंतर निरीक्षण पर जोर दिया। यादव ने जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर संकुल समन्वयक तक निरंतर स्कूलों का दौरा करने के निर्देश दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परेदशी, समग्र शिक्षा की एमडी डॉ. प्रियंका शुक्ला, डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी सहित संभाग के सभी आठों जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, बीईओ, बीआरसी शामिल थे।
मंत्री यादव ने सभी जिलों को अगले तीन वर्षों के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय अधोसंरचना के मजबूत विकास, शैक्षणिक माहौल के संवर्धन और शिक्षण गुणवत्ता में ठोस सुधार को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों की बेहतर शिक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी और दीर्घकालिक योजनाएँ ही स्थायी सुधार की नींव बनेंगी।
शिक्षा मंत्री यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिक्षक एवं कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की जाए। उन्होंने बताया कि समय पर उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए विभाग द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही डीईओ, बीईओ और बीआरसी अधिकारियों को विद्यालयों के नियमित निरीक्षण, दौरा चार्ट तैयार करने और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार हो सके।
वार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए मंत्री यादव ने कक्षा 10 वीं का परिणाम 85 प्रतिशत तथा 12 वीं का परिणाम 90 प्रतिशत लाने का लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल उत्तीर्ण तक सीमित नहीं रहे बल्कि विद्यार्थियों को उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण कराना है। उन्होंने सभी जिलों को मासिक परीक्षा की सतत निगरानी, ब्लूप्रिंट आधारित अध्ययन, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और कुशल शिक्षकों द्वारा गुणवत्तापूर्ण अध्यापन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कमजोर बच्चों को चिन्हित कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करने को कहा है।
मंत्री ने कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए धारा- प्रवाह हिंदी पढ़ने को बढ़ावा देने हेतु विशेष योजना तैयार करने को कहा। साथ ही माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों की बेसिक गणित और अंग्रेजी दक्षता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों के अपार आईडी को 100 प्रतिशत पूरा करने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्कूलों की यू-डाइस को भी अपडेट करने के निर्देश दिए।  बिलासपुर और सक्ति जिले में अपार आईडी के निर्माण की कम प्रगति पर नाराजगी जाहिर की और इसमें अगले एक सप्ताह में सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए। ड्रॉपआउट रोकने को सर्वाेच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही और समुदाय व पालकों के साथ नियमित संवाद को भी आवश्यक बताया।
बैठक में मंत्री यादव ने निर्देश दिए कि सेवानिवृत्ति के दिन ही शिक्षकों की सेवा पुस्तिका, पासबुक और स्वत्वों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य को अत्यंत गंभीरता से लेने के लिए कहा, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
मंत्री ने भवनविहीन विद्यालयों के अधोसंरचना कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने तथा इस वर्ष मॉडल स्कूलों के चयन की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीईओ के लिए लक्ष्य आधारित गोपनीय प्रतिवेदन प्रणाली लागू करने की बात कही। पीएम विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रगतिरत कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। इन विद्यालयों को उत्कृष्ट शिक्षण के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने प्रयास किया जाए।
 मंत्री यादव ने स्कूल मरम्मत के छोटे-छोटे काम स्थानीय ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराने को कहा है। उन्होंने कहा कि स्कूल में आमतौर पर शौचालय निर्माण, शौचालय मरम्मत, पोताई, बिजली, पानी के काम होते है। देखा गया है कि अन्य एजेंसियों के माध्यम से कार्य कराने पर काफी विलंब होता है। पंचायतों के माध्यम से काम होने से स्थानीय समुदाय का इसमें लगाव भी होता है और बहुत सारी समस्याएं अपने आप ठीक हो जाती है। उन्होंने 31 जनवरी तक शौचालय संबंधी सभी काम पूर्ण कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
 
 

माओवादी प्रभावित बच्चों के जीवन में नई रोशनी: आस्था आवासीय विद्यालय बना उम्मीद का केन्द्र

11-Dec-2025
रायपुर ( शोर संदेश )  दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में स्थित आस्था आवासीय विद्यालय आज उन बच्चों के लिए जीवन का नया अध्याय लिख रहा है, जो माओवादी हिंसा, असुरक्षा और ग़रीबी की वजह से शिक्षा से दूर थे। यह संस्थान न केवल अनाथ और निराश्रित बच्चों को सुरक्षित वातावरण दे रहा है, बल्कि उन्हें सक्षम, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में अनोखी पहल कर रहा है। संवेदनशीलता और आधुनिक शिक्षा का यह संगम आज जिले की पहचान बन चुका है।
आस्था आवासीय विद्यालय की शुरुआत वर्ष 2007-08 में जिला मुख्यालय में गुरुकुल आवासीय विद्यालय के रूप में हुई थी। सीमित साधनों से शुरू हुआ यह प्रयास धीरे-धीरे विस्तारित होकर अब जावंगा एजुकेशन सिटी के आधुनिक रूप में विकसित हो चुका है। विद्यालय में बच्चों का चयन जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, जिससे केवल पात्र और जरूरतमंद बच्चों को ही प्रवेश मिल सके। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि हर बच्चा न सिर्फ शिक्षा पाए, बल्कि उसे वह वातावरण भी मिल,े जिसकी उसे सबसे अधिक आवश्यकता है, एक सुरक्षित, संवेदनशील और प्रेरणादायी माहौल।
समय के साथ जावंगा एजुकेशन सिटी अत्याधुनिक सुविधाओं वाला शिक्षण केंद्र बन गया है, जहाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास का ध्यान रखा जाता है। विशाल एवं सुरक्षित परिसर, आधुनिक कक्षाएँ, सुव्यवस्थित पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब और खेल मैदान यहाँ की प्रमुख विशेषताएँ हैं। संगीत और योग जैसी गतिविधियाँ बच्चों के मानसिक संतुलन और शारीरिक विकास को दिशा देती हैं। छात्रावास में पूर्णकालिक अधीक्षक बच्चों की सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित करते हैं, जिससे बच्चे परिवार के स्नेह जैसा वातावरण महसूस कर सकें। यहाँ पढ़ने वाला हर बच्चा यह विश्वास कर पाता है कि वह सुरक्षित है और उसकी देखभाल ईमानदारी से की जा रही है।
संस्थान का मूल उद्देश्य बच्चों को केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें एक संतुलित और अनुशासित जीवन जीना सिखाना भी है। संतुलित और पौष्टिक भोजन, समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ यूनिफॉर्म और दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तुएँ प्रदान की जाती हैं, ताकि बच्चे बिना किसी चिंता के अपने अध्ययन और सपनों साकार करने मंे ध्यान दे सकें। यहाँ का वातावरण बच्चों को आत्मनिर्भर बनाता है और उनमें यह विश्वास विकसित करता है कि वे कठिनाईयों के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुँच सके।
आस्था आवासीय विद्यालय में कौशल विकास को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। कम्प्यूटर शिक्षा, मल्टीमीडिया प्रशिक्षण, कला-कौशल, शारीरिक शिक्षा और विभिन्न खेल गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की प्रतिभाओं को उभारने का अवसर मिलता है। शैक्षणिक भ्रमण और सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उनके व्यक्तित्व में नई चमक लाते हैं। अवकाश के समय आयोजित विशेष गतिविधियाँ बच्चों को नए अनुभवों से जोड़ती हैं, जो उनके भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वाेपरि रखा जाता है। “स्वस्थ तन, स्वस्थ मन” योजना के अंतर्गत नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय जाँच और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे न केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट हों, बल्कि शारीरिक रूप से भी स्वस्थ और सक्रिय रहें। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास संभव है और इस सिद्धांत को विद्यालय पूरी निष्ठा के साथ अपनाता है।
आस्था आवासीय विद्यालय ने कई ऐसे बच्चों की सफलता की कहानियाँ लिखी हैं, जो जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। वर्ष 2024-25 में कक्षा 9 वीं के दो प्रतिभाशाली छात्र रविन्द्र नेताम और श्रेयांश भास्कर का चयन राज्य के प्रतिष्ठित प्रयास आवासीय विद्यालय में हुआ। यह उपलब्धि न केवल विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रमाण है, बल्कि उन बच्चों की मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति का प्रतीक भी है। वर्तमान शिक्षण सत्र 2025-26 में यहाँ 100 बालक और 100 बालिकाएँ अध्ययनरत हैं, जो इस सशक्त योजना का लाभ उठाते हुए अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
आस्था आवासीय विद्यालय आज उस सत्य का जीवंत उदाहरण है कि संवेदनशीलता और सही दिशा मिल जाए तो कोई भी बच्चा अपनी परिस्थितियों से ऊपर उठकर अपनी पहचान बना सकता है। यह संस्थान केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक नई उम्मीद है, जो कभी शिक्षा और सुरक्षित जीवन से दूर थे। यहाँ से निकलने वाला हर बच्चा यह संदेश देता है कि अवसर मिले तो बच्चे सिर्फ अपने जीवन को नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को भी बदल सकते हैं।

 
 

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएँ शुरू, मरीजों को मिलेगा बड़ा लाभ

10-Dec-2025
रायगढ़.( शोर संदेश )। स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ में दिवंगत अधिष्ठाता डॉ विनीत जैन के द्वारा किए गए प्रयासो के उपरांत शहर के सुप्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ नितीश नायक ,यूरोसर्जन डॉ के.डी. खरे एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मीना पटेल सप्ताह में एक दिन चिकित्सा परामर्श देकर इलाज करेंगे। 
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति को रायगढ़ मेडिकल कालेज में आने वाले मरीजों के लिए लाभदायक बताया है। उन्होंने कहा कि शासन का प्रयास है कि लोगों को उनके शहरों और गांवों के आसपास ही बेहतर और उच्च चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हों ताकि उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी न तय करनी पड़े और त्वरित तथा बेहतर इलाज से उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिले। 
अस्पताल अधीक्षक डॉ एम. के. मिंज ने बताया कि न्यूरोसर्जन डॉ. नितीश नायक  (मस्तिष्क/रीढ़ की हड्डी के सर्जन),प्रत्येक मंगलवार प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक , यूरो सर्जन डॉ  के.डी. खरे  (मूत्ररोग विशेषज्ञ )शुक्रवार को चिकित्सालय के भूतल में सर्जरी विभाग की ओ.पी .डी .कक्ष क्रमांक 01 में और नेफ्रोलॉजिस्ट  डॉ मीना पटेल  (किडनी / गुर्दा रोग विशेषज्ञ ) चिकित्सालय के प्रथम तल में मेडिसिन विभाग के ओ. पी.डी. कक्ष क्रमांक 01 में सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार प्रातः (सुबह )10:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक  चिकित्सा परामर्श के लिए उपलब्ध रहेगे । इसका लाभ रायगढ़ अंचल सहित आसपास के क्षेत्रों के संबंधित मरीजों को मिलेगा। इससे इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी ।
डॉ. नितीश नायक  न्यूरोसर्जन (मस्तिष्क/रीढ़ की हड्डी के सर्जन "मस्तिष्क की गांठ,  ब्रेन ट्यूमर,स्पाइनल इंज्यूरी,साईटिका, मस्तिष्क की गंभीर चोट, दिमाग का इन्फेक्शन होना, रक्त का थक्का (स्ट्रोक), कमर दर्द, लकवा की बीमारी, रीढ़ की हड्डी का दर्द, मांसपेशी (नसों) के दर्द चलने में कठिनाई, मांसपेशी का कमजोर होना, सिरदर्द, हाथ पांव में दर्द, उठने-बैठने में परेशानी होना और मिर्गी चक्कर आना आदि गंभीर बीमारियों का परामर्श देकर इलाज करेंगे।
डॉ के.डी. खरे  यूरो सर्जन (मूत्ररोग विशेषज्ञ ) पुरुषों और महिलाओं की मूत्र प्रणाली (गुर्दे, मूत्राशय, मूत्रवाहिनी, मूत्रमार्ग) और पुरुषों के प्रजनन अंगों (प्रोस्टेट, लिंग, अंडकोश, वृषण) से जुड़ी बीमारियों का इलाज जैसे कि गुर्दे की पथरी, मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI), प्रोस्टेट की समस्याएँ, मूत्र असंयम, बांझपन, कैंसर (मूत्राशय, किडनी, प्रोस्टेट), और स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन). इत्यादि गंभीर बीमारियों का परामर्श देकर इलाज करेंगे।
इसी तरह से डॉ.मीना पटेल नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी / गुर्दा रोग विशेषज्ञ) गुर्दे से जुड़ी बीमारियों, जैसे क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD), किडनी फेलियर, किडनी स्टोन, किडनी इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर,डायलिसिस और मधुमेह और उच्च रक्तचाप से होने वाली किडनी समस्याओं से संबंधित गंभीर बीमारियों का परामर्श देकर इलाज करेंगी।









 



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