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शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का मैनपुर में औचक निरीक्षण—विद्यालयों की व्यवस्था और शिक्षण गुणवत्ता की की विस्तृत समीक्षा

26-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )  स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। उनका यह दौरा केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने स्वयं बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने शिक्षण प्रक्रिया, विद्यार्थियों की स्थिति और स्कूल व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया।
शिक्षा मंत्री सबसे पहले प्राथमिक शाला धवलपुर पहुँचे, जहाँ उन्होंने विद्यालय की सभी गतिविधियों का विस्तार से अवलोकन किया। उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति रजिस्टर की जाँच की और नियमितता एवं समयपालन पर जोर दिया। मंत्री ने मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था की जानकारी ली तथा यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी बच्चा पाठ्यपुस्तकों और गणवेश जैसी आवश्यक सामग्री से वंचित न रहे। बच्चों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके पसंदीदा विषय, पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में पूछा तथा उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद यादव हायर सेकेंडरी स्कूल धवलपुर पहुँचे। यहाँ उन्होंने सभी कक्षाओं का निरीक्षण कर विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता, विशेषकर विज्ञान और गणित जैसे प्रमुख विषयों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने शिक्षकों से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी संबंधी योजनाओं की जानकारी ली और समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने निर्देश दिए। मंत्री ने अधोसंरचना विकास और अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया तथा निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा का पालन अनिवार्य रूप से करने पर जोर दिया। साथ ही शिक्षकों के ऑनलाइन अवकाश प्रबंधन की भी जाँच की ताकि शिक्षण कार्य सुचारू रूप से चलता रहे।
निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई छात्रों ने अपनी समस्याएँ और सुझाव मंत्री के समक्ष रखे। शिक्षा मंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि सरकार बच्चों की शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है तथा शिक्षा व्यवस्था में निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।
शिक्षा मंत्री ने स्कूल से लौट रही हायर सेकेंडरी स्कूल मैनपुर की छात्राओं से भी बातचीत की। छात्राओं ने स्कूल भवन एवं विज्ञान विषय के शिक्षकों की आवश्यकता बताई। इस पर मंत्री यादव ने उनकी माँगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।
 शिक्षा मंत्री के औचक निरीक्षण से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में सरकार के प्रति विश्वास और उत्साह और अधिक बढ़ा है। यह निरीक्षण शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।














 

10वीं-12वीं बोर्ड एग्जाम का टाइम टेबल जारी, इस तारीख से शुरू होंगी परीक्षाएं, जानें पूरा शेड्यूल

22-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। बोर्ड एग्जाम के स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। बता दें छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CGBSE) ने नए साल से पहले 10वीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम (CG Board Time Table) का पूरा टाइमटेबल जारी कर दिया है। बोर्ड सेक्रेटरी पुष्पा साहू ने बताया कि इस साल एग्जाम फरवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू होंगे।
12वीं बोर्ड परीक्षा
शुरुआत: 20 फरवरी 2026
समाप्ति: 18 मार्च 2026
10वीं बोर्ड परीक्षा
शुरुआत: 21 फरवरी 2026
समाप्ति: 13 मार्च 2026
6 लाख छात्र-छात्राएँ होंगे शामिल
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि होली पर कोई एग्जाम नहीं है। इस साल, लगभग 6,00,000 स्टूडेंट्स 10वीं और 12वीं क्लास के एग्जाम देंगे। टाइम टेबल जारी होने के बाद, स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने अपनी तैयारी तेज़ कर दी है। बोर्ड का कहना है कि एग्जाम शांति से और आसानी से कराने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं।

बच्चे देश का भविष्य, इन्हें संवारना हम सबकी जिम्मेदारी” — सचिव आफरीन बानो

15-Nov-2025
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) नालसा एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के स्टेट प्लान आफ एक्शन के तहत विशेष राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दिवसों के अवसर पर आयोजित होने वाले शिविर व कार्यक्रम के तहत आज ’’बाल दिवस’’ के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिता डहरिया के मार्गदर्शन पर शिविर आयोजित किया गया। बाल दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव आफरीन बानो द्वारा शासकीय मिडिल स्कूल बरोंडा बाजार और व्यवहार न्यायालय बागबाहरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अविनाश टोप्पो द्वारा कार्मेल स्कूल बागबाहरा में कानून के प्रति जागरूकता विषयों पर अधारित शिविर आयोजित की गयी।      
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महासमुंद की सचिव आफरीन बानो ने कहा कि प्रतिवर्ष देशभर में 14 नवंबर के दिन बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन के मौके पर मनाया जाता है क्योकि उन्हें बच्चे बेहद प्रिय थे। उनका मानना था कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। वह अक्सर कहा करते थे कि बच्चे उन कलियों की तरह होते हैं जिन्हे पुरी तरह से खिलने के लिए देखभाल और पोषण की आवश्यकता होती है। बच्चे ही देश का कल है, बच्चे राष्ट्र निर्माता होते हैं। बाल दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि एक अवसर है जब हमें बच्चों के अधिकारों उनके कल्याण और उनके भविष्य की सुरक्षा के बारे में सोचने हेतु प्रेरणा मिलता है। 
बच्चे देश और दुनिया का भविष्य हैं, ऐसे में उन्हें संवारना और आने वाले कल के लिए तैयार करना, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। बाल दिवस का मकसद बच्चों को उनके अधिकारों, उनके कल्याण और उनकी खुशहाली के बारे में समाज को जागरूक करने का है। इसके अलावा बच्चों के साथ कानून से संबंधित सामान्य जानकारियों पर तर्कसंगत चर्चा की गई। बाल श्रम, बाल तस्करी एवं बच्चों से संबंधित होने वाले अपराधों के बारे में बच्चों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी साथ ही नालसा हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर 15100 के माध्यम से भी विधिक सलाह एवं सहायता पाने की जानकारी प्रदान की गई। इसी प्रकार आरक्षी केन्द्रों में पदस्थ अधिकार मित्रों के द्वारा अपने-अपने थाना क्षेत्रों के स्कूलों में जाकर बाल दिवस के अवसर पर शिविर आयोजित किये गये।





 

 


पीजी कोर्स बीच में छोड़ने वालों को नहीं देना होगा पेनल्टी, शिक्षा विभाग ने हटाया नियम

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में 2024 बैच की दो छात्राओं ने एमडी कोर्स बीच में ही छोड़कर चली गई हैं। उन्हें पेनल्टी के रूप में 20 से 25 लाख रुपए देने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पेनल्टी वाला प्रावधान ही हटा दिया। जबकि इस साल यह प्रावधान रखा है। दो छात्राओं के कोर्स छोड़ने से दूसरे छात्रों को नुकसान हुआ है, जो एडमिशन लेकर पढ़ाई कर सकते थे।

पीडियाट्रिक व बायो केमेस्ट्री की एक-एक छात्रा कोर्स बीच में ही छोड़कर चली गई हैं। कॉलेज ने उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया है। कोर्स छोड़ने का कारण छात्राओं ने व्यक्तिगत व वजन बढ़ने को बताया है। 2023 में भी पीडियाट्रिक की एक छात्रा ने पीजी की पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्हें कॉलेज में 25 लाख रुपए पेनल्टी के रूप में जमा करना पड़ा था। मार्कशीट समेत ओरिजनल दस्तावेज नहीं देने पर छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई थी। तब हाईकोर्ट ने पेनल्टी जमा कर ओरिजनल दस्तावेज कॉलेज से लेने को कहा था। वहीं, पीएसएम की एक छात्रा ने दो साल बाद भी पेनल्टी जमा नहीं की है।

67 से 75 हजार रुपए हर माह स्टायपेंड: पीजी छात्रों को हर माह 67500 से लेकर 75 हजार रुपए स्टायपेंड दिया जाता है। इसमें कोई भी छात्र या छात्रा काउंसलिंग के बाद सीट नहीं छोड़ सकता। दरअसल, सीटें खाली होने से इसे दोबारा नहीं भरा जा सकता। इससे ये सीटें खाली ही चली जाती हैं। पीजी कोर्स बहुत महत्वपूर्ण है। इसे पास करने पर छात्र विशेषज्ञ डॉक्टर बनता है। एक-एक सीट के लिए मारामारी रहती है। वहीं, निजी कॉलेजों में एक साल की ट्यूशन फीस 8 से 10 लाख रुपए है। जबकि सरकारी में महज 20 हजार सालाना है। ऐसे में तीन साल के कोर्स की ट्यूशन फीस महज 60 हजार रुपए है। निजी व सरकारी कॉलेजों में स्टायपेंड समान दिया जाता है।

ब्रेकेज बॉन्ड के तहत कोर्स छोड़ने पर पेनल्टी पटाने का नियम है। पीडिया की छात्रा ने दावा किया था कि जब वह एडमिशन लिया, तब ब्रेकेज बॉन्ड का प्रावधान नहीं था। इसलिए उन्होंने पीजी सीट से इस्तीफा दिया है। ओडिशा की रहने वाली छात्रा ने पीडियाट्रिक फर्स्ट ईयर की सीट अचानक छोड़ दी थी। उन्होंने लंबी ड्यूटी के कारण नींद पूरी न होने व कई बातें पत्र में लिखीं थीं। उन्होंने ड्यूटी ज्यादा कराने का आरोप भी पत्र में लगाया था। डॉक्टरों की समझाइश भी काम नहीं आई और वह कॉलेज छोड़कर चली गई। विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि छात्रा को पीडियाट्रिक जैसे विषय में रुचि ही नहीं थी। वह डर्मटोलॉजी विषय में पीजी करने की इच्छुक है। दरअसल पीडियाट्रिक विभाग में इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ती है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का ज्यादातर समय अस्पताल में ही बीतता है।

मेडिकल स्टूडेंट और डॉक्टर भी करेंगे रक्तदान, मरीजों को नहीं होगी ब्लड की कमी

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज संबद्ध आंबेडकर अस्पताल समेत सभी चिकित्सालय में अब डॉक्टर समेत स्टूडेंट्स नियमित रूप से ब्लड डोनेशन करेंगे। इससे जरूरतमंद मरीजों के लिए ब्लड की कमी नहीं होगी। कई बार गंभीर मरीजों को ब्लड मिलने में परेशानी होती है। नई पहल से ब्लड की कमी दूर होने की संभावना है।
राजभवन के पत्र के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग नियमित शिविर लगा रहा है। अब मेडिकल एजुकेशन से जुड़े कॉलेजों के विद्यार्थी नियमित रक्तदान करेंगे। इससे ब्लड बैंक में रक्त की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। सिकलसेल, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, ल्यूकेमिया, कैंसर के मरीज, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व डिलीवरी के दौरान महिलाओं को ब्लड ट्रांसयूजन की जरूरत पड़ती है। ब्लड की कमी न हो, इसके लिए राजभवन ने पहले ही हेल्थ साइंस विवि को पत्र लिखा था। डीन व प्राचार्यों को लिखे पत्र में छात्र-छात्राओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने को कहा है। शिविर लगाकर ब्लड एकत्रित किए जाएंगे।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में बचाव भी
ब्लड से जुड़ी बीमारी व बोन मेरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल व पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार नियमित अंतराल में ब्लड डोनेशन करने से खून साफ होने के साथ शरीर को नए खून बनाने का मौका मिलता है। कई कैंसर जैसे गंभीर बीमारियों से बचाव भी होता है। यह मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।
सिकलसेल, हीमोफीलिया के मरीजों को ब्लड की पूर्ति रक्तदान से होती है। यही नहीं नियमित रक्तदान करने से हार्ट अटैक की संभावना 88 फीसदी तक कम हो जाती है। हार्ट संबंधी बीमारी होने की संभावना भी 33 फीसदी घट जाती है। शरीर से ब्लड निकलने से 350 मिग्रा आयरन कम हो जाता है।

रिक्त डीएलएड–बीएड सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसलिंग शुरू

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ के निजी शिक्षा महाविद्यालयों में डीएलएड, बीएड, बीए–बीएड और बीएससी–बीएड की रिक्त सीटों को भरने के लिए अंतिम चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थी 14 से 16 नवंबर शाम 5 बजे तक ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे।
पहले चरण के बाद बीएड में 1400, डीएलएड में 600 और बीए–बीएड व बीएससी–बीएड में करीब 24 सीटें रिक्त हैं। पूर्व में पंजीकृत लेकिन प्रवेश नहीं लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए पंजीयन निशुल्क रहेगा, जबकि नए अभ्यर्थियों को शुल्क जमा करना होगा।
अभ्यर्थी अपनी पसंद का एक कॉलेज ऑनलाइन चुन सकेंगे। अंतिम चरण की पहली सूची 18 नवंबर को जारी होगी, जिसमें 20 नवंबर तक प्रवेश लिया जा सकेगा। दूसरी सूची 21 नवंबर को जारी होगी, जिसके आधार पर 24 नवंबर तक प्रवेश मिलेगा। अंतिम सूची 26 नवंबर को आएगी और प्रवेश की अंतिम तिथि 27 नवंबर तय की गई है।

युक्तियुक्तकरण नीति से बदली चचरेल प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर — अब शिक्षा में दिख रहा नया उत्साह

13-Nov-2025
 रायपुर,।  ( शोर संदेश )  युक्तियुक्तकरण नीति एक ऐसी व्यवस्था है जिसका उद्देश्य स्कूलों और शिक्षकों के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसके तहत शिक्षकों को आवश्यकतानुसार विभिन्न स्कूलों में तैनात किया जाता है ताकि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी न हो और सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह नीति खासतौर पर उन ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में शिक्षा में सुधार लाने पर केंद्रित है, जहां पहले शिक्षकों की भारी कमी थी। 
विकासखंड बिलाईगढ़ के शासकीय प्राथमिक शाला चचरेल में युक्तियुक्तकरण नीति लागू होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में बहुत सुधार देखने को मिला है। कभी एकमात्र प्रधान पाठक के भरोसे संचालित यह विद्यालय अब दो शिक्षकों की उपस्थिति से नई ऊर्जा और उत्साह से भर गया है। विद्यालय में वर्तमान में 35 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिनकी उपस्थिति और रुचि दोनों में वृद्धि हुई है। पहले शिक्षकों की कमी के कारण न तो पढ़ाई सुचारू रूप से चल पा रही थी और न ही अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने में रुचि दिखा रहे थे। अब अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना से कक्षाओं का संचालन व्यवस्थित हुआ है और बच्चों की पढ़ाई में निरंतर सुधार हो रहा है।
पालक नोहर सिंह ने बताया कि पहले एक शिक्षक होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, पर अब तीन शिक्षक होने से बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगा है। उन्होंने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब वे निश्चिंत होकर बच्चों को विद्यालय भेज रहे हैं। युक्तियुक्तकरण से बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए “सकारात्मक और दूरदर्शी निर्णय” बताया। 
वहीं ग्रामीण नरसिंह नाग ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद शिक्षण व्यवस्था में जो सुधार आया है, वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शिक्षक बच्चों को समर्पण भाव से पढ़ा रहे हैं और ग्रामीण भी समय-समय पर विद्यालय जाकर प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की यह पहल न केवल विद्यालय बल्कि पूरे गांव में शिक्षा के प्रति विश्वास और उम्मीद का संचार कर रही है।

शासकीय हाईस्कूल सिथरा की 24 छात्राओं को मिली साइकिलें

12-Nov-2025
रायुपर,  ( शोर संदेश )।  शासन की महत्वाकांक्षी निःशुल्क सरस्वती सायकल योजना अंतर्गत विकासखण्ड धरमजयगढ़ के शासकीय हाईस्कूल सिथरा में लोकसभा सांसद रायगढ राधेश्याम राठिया ने विद्यालय की 24 छात्राओं को साइकिल का वितरण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है जो ग्रामीण अंचल की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है।
इस अवसर पर सांसद राठिया ने छात्राओं को मेहनत, निष्ठा और ईमानदारी के साथ अध्ययन करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है जो ग्रामीण अंचल की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है। उन्होंने उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे मेहनत कर अध्ययन कर समाज और देश का नाम रोशन करें। विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों की मांग पर सांसद राठिया ने विद्यालय परिसर में साइकिल स्टैण्ड निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। बालिकाओं ने साइकिल प्राप्त होने पर सांसद का आभार व्यक्त किया और बेहतर भविष्य के सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, अभिभावक, प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।



 

शिक्षिका ने जन्मदिन पर बच्चों को करवाया स्नेहिल भोज, विद्यालय में छाया हर्ष का माहौल

12-Nov-2025
रायपुर ( शोर संदेश )।  प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतरापाली में उस समय हर्ष और उल्लास का वातावरण बन गया, जब विद्यालय की शिक्षिका अनिता सिंह ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर विद्यालय के सभी बच्चों और शिक्षकों को न्यौता भोज दिया। इस अवसर पर बच्चों को सामान्य मध्यान्ह भोजन के साथ-साथ केला, समोसा, क्रीम ब्रेड और मीठा लड्डू परोसा गया, जिससे सभी विद्यार्थियों के चेहरों पर प्रसन्नता झलक उठी। 
शिक्षिका ने अपने जन्मदिवस पर दिया न्यौता भोज
कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के अंतर्गत किया गया, जिसके माध्यम से बच्चों को अतिरिक्त पोषण प्रदान करने का भी उद्देश्य रहा। सूरजपुर जिले के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतरापाली के विद्यालय परिवार ने इस प्रेरणादायी पहल की सराहना की। शिक्षक योगेश साहू ने शिक्षिका अनिता सिंह को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, “इस प्रकार का मानवीय और स्नेहपूर्ण प्रयास न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संबंध को भी सुदृढ़ करता है।” बच्चों ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए बहुत खास रहा। सभी ने शिक्षिका के प्रति आभार जताते हुए उन्हें दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं दीं। विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएँ और छात्र-छात्राएं इस आयोजन में सम्मिलित हुए और कार्यक्रम को सफल बनाया।
 

ज्ञान का नया द्वार: कोरबा के स्कूलों में विद्यार्थियों तक रोज पहुंच रही खबरें

09-Nov-2025
रायपुर ( शोर संदेश )।  कोरबा जिले के स्कूलों में अब एक नई सुबह की शुरुआत होती है- हाथों में किताबों के साथ-साथ अखबार भी। यह बदलाव आया है जिला प्रशासन की पहल से, जिन्होंने विद्यार्थियों को समसामयिक घटनाओं से जोड़ने और करियर निर्माण में सहयोग देने के उद्देश्य से एक अभिनव कदम उठाया है। उन्होंने डीएमएफ फंड से सभी हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में न्यूज़ पेपर स्टैंड लगवाया है।
पहले स्कूलों में बच्चे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब जब वे स्कूल के गेट से भीतर प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले न्यूज़ पेपर स्टैंड में सजे अखबारों पर उनकी नज़र जाती है। देश-दुनिया, राज्य और अपने जिले की खबरें पढ़ते हुए उनमें एक नई जिज्ञासा, नई दृष्टि और आत्मविश्वास का संचार होता है। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम लेंगी के हाईस्कूल की छात्रा समीना कहती है कि “अब हमें सिर्फ किताबों से ही नहीं, बल्कि अखबार से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। देश-विदेश की खबरें पढ़कर समझ आता है कि बाहर की दुनिया कितनी बड़ी है और हम उसमें क्या बन सकते हैं।” समीना की सहपाठी सोनी मार्काे और कल्याणी भी हर सुबह स्टैंड पर लगे अखबार को पढ़ती हैं। वे बताती हैं कि इससे उन्हें परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है और उनका सामान्य ज्ञान भी बढ़ता है। वहीं, कोरबा ब्लॉक के ग्राम अजगरबहार के हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं की छात्रा आरती, ममता, सुनीता और लक्षमनिया बताती हैं कि “हम कॉलेज की पढ़ाई करना चाहती हैं। अखबार पढ़कर हमें पता चलता है कि आगे कौन-कौन से कोर्स हैं, कौन-से कॉलेज अच्छे हैं और देश में क्या नई योजनाएं चल रही हैं। यह हमारे लिए बहुत उपयोगी है।” इस छोटे से प्रयास ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों में जागरूकता, आत्मविश्वास और भविष्य की सोच को जगाया है।‘‘ अब सुबह की घंटी सिर्फ स्कूल शुरू होने का संकेत नहीं देती वह यह भी बताती है कि ज्ञान का नया द्वार खुल चुका है।
जिला प्रशासन की यह पहल कोरबा जिले के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ विचार और दृष्टिकोण को समृद्धि भी दे रही है। यह कहानी बताती है कि अगर अवसर और संसाधन सही दिशा में लगाए जाएं, तो हर बच्चे में समाज को बदलने की ताकत होती है। यह केवल अखबार पढ़ने की पहल नहीं है, यह भविष्य गढ़ने की शुरुआत है।
 







 



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