
दुर्ग (शोर सन्देश)। जिले के पहले सरकारी कृषि कालेज की सौगात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले साल इसी दिन दी थी। पाटन की समृद्ध धरा में प्रगतिशील किसानों की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने, कृषि के क्षेत्र में हुनरमंद युवाओं को अवसर देने मुख्यमंत्री ने मर्रा में महाविद्यालय आरंभ करने का निर्णय लिया था। एक साल के भीतर महाविद्यालय की छोटी सी टीम ने इसका स्वरूप निखारने में कड़ी मेहनत की है। राज्य शासन ने यहां आधुनिक कृषि महाविद्यालय के लिए 87 एकड़ भूमि हस्तांतरित की। इसमें 72 एकड़ में भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र बनाने का निर्णय लिया गया। कृषि की पढ़ाई कमरों से अधिक फील्ड में होती है। इसके लिए फील्ड के आकार का चयन, फिर इसे तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का जतन इस साल भर में हुआ। प्रोफेसर छात्रों के साथ अध्यापन कक्षों में रहे, फिर मर्रा के किसानों की भूमि में उन्हें ले गए। यहां उन्होंने फील्ड में पढ़ाई कराई। फिर बचे समय में वे भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र में आए, जिसे विकसित करना था। यहां मनरेगा मजदूरों के माध्यम से प्रक्षेत्र विकसित कराया गया। साढ़े सात सौ मजदूरों को जो मर्रा, आमालोरी और गुढिय़ारी के थे, उन्हें लाकडाउन के दौरान भी रोजगार मिला। महाविद्यालय के बुनियाद खड़ी करने में डीन डॉ. अजय वर्मा का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने अपनी टीम के साथ अनुदेशक प्रक्षेत्र में साल भर कड़ी मेहनत की। प्रोफेसर धूप में पूरा दिन खड़े रहकर काम का निरीक्षण करते रहे और अनुदेशक क्षेत्र की जमीन निखरती रही। जब कृषि महाविद्यालय बनता है तो अकादमिक आयोजन भी होते हैं जिसमें विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि यहां राज्य स्तरीय कृषि मेले का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 500 किसानों ने हिस्सेदारी की। इसके संचालन और रखरखाव में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके लिए राज्य शासन ने 29 लाख रुपए महाविद्यालय को प्रदान किये। मशरूम उत्पादन के लिए 35 लाख रुपए प्रदान किये। भारत रत्न संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, मर्रा की स्थापना कर मुख्यमंत्री ने बड़ी पहल की है। इस साल यहाँ 48 छात्रों को एडमिशन मिल सकेगा। मुख्यमंत्री के मर्रा में शिक्षक रहे श्री हीरा सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां पढ़ाई की, अब यहां उन्होंने कृषि के लिए महाविद्यालय शुरू कर दिया। यह उनकी गुरु दक्षिणा है।

रायपुर (शोर सन्देश)। राजधानी रायपुर की पूर्व बैंकर प्रीति उपाध्याय ने निजी स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस के नाम पर की जा रही वसूली के विरुद्ध बिलासपुर उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है। सनद रहे की हाल ही में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को राहत देते हुए फैसला दिया था, जो निजी स्कूल ट्यूशन फ़ीस ले सकते हैं। इसी आदेश की आड़ में निजी स्कूलों ने उच्च न्यायालय के आदेश पर पालकों को गुमराह करते हुए वसूली शुरू कर दी। दरअसल निजी स्कूलों की फीस को परिभाषित करने हेतु ही यह याचिका लगाई गई है। दो बच्चों कि पालक प्रीति उपाध्याय का कहना है कि 8 घण्टे का स्कूल मोबाइल पर डेढ़ घण्टे में निपटाया जा रहा है। असेम्बली, कम्प्यूटर क्लास, लेबोरेट्री, स्पोर्ट्स जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का लाभ जब छात्र स्कूलों से नहीं ले पा रहे हैं तो किस बुनियाद पर स्कूल 100 प्रतिशत फीस वसूल सकते हैं? प्रीति कहती हैं कि कोरोना काल में सिर्फ स्कूल ही संकट में नहीं हैं। सभी पालक भी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं परंतु स्कूल जो कि एक नो प्रॉफिट नो लॉस के संस्थान हैं एक लाभदायी उद्योग की तरह का व्यवहार कर रहे हैं। प्रीति उपाध्याय ने उम्मीद व्यक्त की है कि न्याय पालकों के पक्ष में ही आएगा और स्कूल ट्यूशन फीस के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएंगे।

रायपुर (शोर सन्देश)। भारत का संविधान की अनुच्छेद 21(ए) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जाएगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या), (1) व (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है। बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार का दायित्व है। सभी बच्चे स्कूल में उपस्थित हो रहे है और नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त कर रहे है। लेकिन प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।
कोरोना महामारी में सभी वर्ग के लोग आर्थिक रूप से कमजोर हो गए हैै और स्कूल की डिमांडेड फीस और अब बोर्ड की परीक्षा फीस जमा करने में ज्यादातर पालक सक्षम नहीं है। ऐसे परिस्थिति में भी प्राईवेट स्कूलों से बच्चों को शिक्षा व परीक्षा वंचित किया जा रहा है। आरटीई के हजारों की संख्या में बच्चे प्राईवेट स्कूल छोड़ कर जा रहे है। श्री पॉल ने कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 15 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएं। पैरेंट्स एसोसियेशन ने राज्यपाल महोदिया से पत्र लिखकर आग्रह किया है।

बेमेतरा (शोर सन्देश)। ग्राम स्तर पर मुहल्ला कक्षा और लाऊडस्पीकर कक्षा का संचालन किया जा रहा है। प्राथमिक/माध्यमिक शालाओ के शिक्षक ग्राम के पढ़े लिखे युवक/युवतियों को भी प्रेरित कर रहे है। संबंधित संस्था/ग्राम के प्रधानपाठको ने ग्राम स्तर में बेहतर कक्षा संचालन के लिए पढ़ाने वालो को लपेटन, श्यामपट, चॉक, डस्टर, सिनेटाइजर, मास्क का वितरण भी किया है। जिससे कक्षा का संचालन सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। कक्षा का संचालन ग्राम के सरपंच, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के सहयोग से किया जा रहा है। वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखकर वहां के शिक्षक स्वयं कक्षा में जाकर बच्चो को शिक्षण कार्य करा रहे है।विकासखंडो में संकुल केंद्र जेवरा के ग्राम पथर्रा, विकासखंड बेरला के ग्राम मनियारी, विकासखंड नवागढ़ के संकुल केंद्र कूंरा एवं विकासखंड साजा के संकुल केंद्र बीजा के अंतर्गत संचालित प्राथमिक/माध्यमिक शालाओ मुहल्ला कक्षा आयोजित किया जा रहा है।

रायपुर (शोर सन्देश)। कोविड़-19 ने दौरान ऑनलाईन शिक्षा को आसान बनाने के लिए पढ़ई तुंहर दुवार एन्ड्राइड एप तैयार किया है। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग और एनआईसी ने मिलकर एप तैयार किया है। इस एप के माध्यम से विद्यार्थी इंटरनेट उपलब्ध होने पर अपने पाठ्यक्रम से संबंधित कन्टेंट डाउनलोड कर सकेंगे। डाउनलोड किए गए वीडियो और अन्य कन्टेंट जब इंटरनेट उपलब्ध नहीं हो, तब भी ऑफलाईन देखे जा सकेंगे। यह एप दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी है। इस एप को गुगल प्ले स्टोर से नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है। //https://play.google.com/store/apps/details?id=in.cgschools.learningapp ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्कूलों के विद्यार्थियों को घर बैठे पढ़ाई के लिए ऑनलाईन सुविधा उपलब्ध कराने, लॉकडाउन के दौरान माह अप्रैल में पढ़ई तुंहर दुवार की वेबसाइट लॉन्च की थी। ऑनलाइन शिक्षा की योजना का लाभ लगभग 22 लाख बच्चों को मिल रहा है। 2 लाख शिक्षक-शिक्षिकाएं इस व्यवस्था से जुड़े हैं।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं और 12वीं के छात्रों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं सितंबर माह के दौरान ले सकता है। हालांकि इसके लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। स्कूल और छात्रों को इस बारे में सूचित किया जा रहा है। कई राज्यों में स्कूलों ने कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए फॉर्म भी जारी कर दिए हैं। सीबीएसई ने कंपार्टमेंट परीक्षाएं के संबंध में पत्र जारी कर दिया है, जिसकी कॉपी सभी संबंधित स्कूलों को दी गई है। इससे पहले सीबीएसई ने कंपार्टमेंट परीक्षाएं कराने या न कराने को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों से सुझाव मांगे थे। सीबीएसई को मिले अधिकांश सुझावों में अधिकतर सुझाव परीक्षा रद्द कराने के पक्ष में थे, लेकिन बोर्ड ने कंपार्टमेंट परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। अगले सप्ताह परीक्षा की तारीख जारी होने की संभावना है। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण पहले बोर्ड की कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और फिर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे में भी देरी हुई। इससे पहले सीबीएसई ने अदालत में अपना जवाब दाखिल करते हुए कंपार्टमेंट परीक्षा कराने की बात कही। शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कंपार्टमेंट की ये परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में करवाई जा सकती हैं। 10वीं में अधिकांश छात्रों की गणित, सोशल साइंस और साइंस में कंपार्टमेंट आई है। वहीं 12वीं में गणित, अकाउंट और इकोनॉमिक्स में आई है। सीबीएसई ने कहा, `जेईईई मेन, नीट (यूजी) और जेईई एडवांस बड़ी परीक्षाएं हैं। इनके लिए बोर्ड रिजल्ट की जरूरत पड़ती है। इसी के आधार पर उच्चतर शिक्षा में प्रवेश मिलता है। ऐसे में कंपार्टमेंट की परीक्षाएं करवाना आवश्यक है, क्योंकि कई ऐसे छात्रों ने इन परीक्षाओं का फॉर्म भरा है, जिनकी इस वर्ष कंपार्टमेंट आई है।`

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत विश्वविद्यालय 300 से अधिक कॉलेजों को मान्यता नहीं दे पायेंगे। केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल `निशंक` `कोविड-19 के बाद शिक्षा` विषय पर डिजिटल सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है। ताकि 300 से अधिक कॉलेजों को मान्यता देने के नियम का सही से पालन हो सके। 00 कॉलेजों की गुणवत्ता और कामकाज पर नजर के लिए कदम :
मानव संसाधन विकास मंत्री ने सवाल किया, ``मैं हाल ही में एक विश्वविद्यालय गया था और जब मैंने कुलपति से पूछा कि कितने कॉलेज उस विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हैं, तो उन्होंने कहा कि 800 डिग्री कॉलेज। मुझे लगा कि मैंने गलत सुन लिया। मैंने फिर पूछा और उन्होंने कहा : 800। यह दीक्षांत समारोह था, मैं चकित था। क्या कोई कुलपति 800 डिग्री कॉलेजों के प्रिंसिपल के नाम याद रख सकता है?``
निशंक ने कहा, ``क्या वह इतने अधिक कॉलेजों की गुणवत्ता और कामकाज पर नजर रख सकते हैं। यही वजह है हम कह रहे हैं कि नई शिक्षा नीति में चरणबद्ध तरीके से इस पर काम करेंगे। एक विश्वविद्यालय 300 से अधिक डिग्री कॉलेजों को मान्यता नहीं दे सकता। उसके लिए हमें विश्वविद्यालय बढ़ाने होंगे और हम वह करेंगे।``
00 कॉलेजों को स्वायत्तता देने की प्रणाली पर काम : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने ही नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है। मान्यता प्रदान करने वाली इस व्यवस्था को अगले 15 साल में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और कॉलेजों को क्रमिक स्वायत्तता देने की चरणबद्धप्रणाली स्थापित की जाएगी। संकल्पना के अनुसार, आने वाले समय में कोई कॉलेज डिग्री देने वाला एक स्वायत्त कॉलेज या विश्वविद्यालय का घटक कॉलेज होगा।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल की परीक्षाएं इस वर्ष असाइन्मेंट पद्धति से संपन्न कराई जा रही है। जिन जिलों के परीक्षा केन्द्रों में लॉकडाउन नहीं है, उनमें 4 अगस्त तक कक्षा 12वीं के 35 हजार 933 विद्यार्थियों द्वारा असाइन्मेंट जमा किया गया। कक्षा 12वीं के 38 हजार 384 विद्यार्थियों को असाइन्मेंट वितरण किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के अधिकारियों ने बताया कि कक्षा 10वीं के 16 हजार 561 विद्यार्थियों को असाइन्मेंट वितरण किया गया। विद्यार्थी असाइन्मेंट प्राप्त करने दो दिवस में अपना असाइन्मेंट लिखकर परीक्षा केन्द्र में जमा करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि जो छात्र किसी कारणवश अपने परीक्षा केन्द्रों से असाइन्मेंट प्राप्त नहीं कर सके, वे 17 अगस्त से 22 अगस्त के मध्य राज्य कार्यालय छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल परिषद पेंशनबाड़ा रायपुर या छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की वेबसाइट पर www.cgsos.co.in से असाइन्मेंट डाउनलोड करके ए-4 साईज के कागज पर उत्तर लिखकर अपने परीक्षा में 22 अगस्त तक जमा कर सकेंगे।

रायपुर (शोर सन्देश)। केंद्रीय शिक्षा नीति को लेकर एक ओर जहां छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन और सरकार विरोध कर रही है, वहीं प्रदेश में कांग्रेस सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने नीति का समर्थन किया है। सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र के वादों के अनुरूप बहुत सारे मुद्दों को केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति में शामिल किया है। सिंहदेव ने ट्वीट करके कहा कि जनता से चर्चा के बाद तैयार कांग्रेस के जनघोषणा पत्र का असर केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति में दिखाई दे रहा है। इसे देखकर वास्तव में प्रसन्नता हो रही है। राज्य सरकार ने भी पहले शिक्षा के अधिकार को 12वीं तक बढ़ाने है और आंगनबाड़ी में प्री स्कूल की वकालत की थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद कहा था कि शिक्षा को केंद्रीकृत किया जाना उचित नहीं है। संविधान के अनुसार शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जो राज्य और केंद्र की अपनी-अपनी नीतियों से संचालित होता है। मूलभूत शिक्षा में राज्य का प्रमुख योगदान होता है। इस वजह से हर राज्य में अपनी अलग शिक्षा प्रणाली विकसित हुई है। शिक्षा के लिए नीति नियम बनाने की राज्यों को अभी स्वतंत्रता है, लेकिन नई नीति द्वारा पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस संगठन ने भी नई शिक्षा नीति का विरोध किया है। कांग्रेस ने एक बयान जारी करके कहा कि मोदी सरकार नई शिक्षा नीति द्वारा देश की भावी पीढ़ी को अपने रंग में रंगने की तैयारी में है। नई शिक्षा नीति के नाम पर अधिनायकवादी मोदी सरकार शिक्षा के बाजारीकरण, निजीकरण और पूंजीवादी व्यवस्था थोपने पर आमादा है। कोरोना आपदाकाल मोदी सरकार के लिए जनविरोधी संशोधन, अध्यादेश लादने का अवसर है। यह मोदी सरकार का संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कदम है।

रायपुर, (शोर सन्देश)। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा सत्र 2019-20 के अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर की सभी विषयों की परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में आज यहां राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत यू.जी.सी. द्वारा जारी निर्देश के पालन में विद्यार्थियों को प्रश्न प्रत्र ऑनलाइन (ई-मेल आदि) पर भेजने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय कोविड-19 की महामारी के संक्रमण को देखते हुए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया है। निर्णय लिया गया है कि प्रश्नों के उत्तर घर पर ही लिखने की समय-सीमा के साथ उत्तर भेजने की अंतिम तिथि निर्धारित की जाए। निर्धारित अंतिम तिथि तक विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन (निर्धारित ई-मेल आदि) अथवा परीक्षा केन्द्र पर स्पीड पोस्ट से पोस्ट करने का विकल्प दिया जाए। प्रेषित उत्तर पुस्तिका की पावती विद्यार्थी अपने पास सुरक्षित रखेंगे। किसी भी कारण से परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित अथवा जारी परीक्षाफल से असंतुष्ट विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने का एक अतिरिक्त अवसर दिया जाए। (इसके लिए स्थितियां सामान्य होने पर विश्वविद्यालयों द्वारा विशेष परीक्षा के आयोजन की व्यवस्था की जाए।) इसके तहत स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए प्रथम, द्वितीय एवं अंतिम तीनों वर्ष की परीक्षाएं उपरोक्त पद्धति से आयोजित की जाएं। परीक्षा आयोजन के पूर्व सभी विद्यार्थियों के ई-मेल आदि की अधिकृत जानकारी संकलित कर ली जाए। परीक्षा आयोजन तिथि की सूचना पर्याप्त समय पूर्व दी जाए। व्यक्तिगत ई-मेल आदि के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों की वेबसाइट एवं स्थानीय समाचार पत्रों में सूचना जारी की जाए। प्रथमतः स्वशासी महाविद्यालयों में परीक्षा आयोजित की जाए तथा परीक्षा के आयोजन में कठिनाई हो तो उनका निराकरण करते हुए शेष महाविद्यालयों के लिए परीक्षा आयोजित की जाए। यथा संभव उपरोक्त परीक्षाओं का आयोजन माह सितम्बर 2020 तक पूर्ण किया जाए।
कोविड-19 के कारण विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया एवं क्लास रूम टीचिंग के बारे भी आवश्यक निर्णय लिया गया है। इसके तहत कक्षा 12वीं का स्टेट बोर्ड तथा सीबीएसई का परीक्षा परिणाम घोषित हो चुका है। अतएव यू.जी. प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया एक अगस्त 2020 से प्रारंभ की जाए तथा अन्य कक्षाओं में प्रवेश पूर्ववर्ती कक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात् 15 दिवस में पूर्ण किए जाएं। माह सितम्बर से चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ करते हुए कोविड-19 के संक्रमण की स्थितियां सामान्य होने की स्थिति में क्लासरूम शिक्षण प्रारंभ करने पर विचार किया जाए।