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शिक्षा

नीट 2020 : एनटीए ने रिलीज़ किया परीक्षा केंद्र, जल्द जारी हो सकता है एडमिट कार्ड*

24-Aug-2020

नई दिल्ली/रायपुर (शोर सन्देश) नीट परीक्षा को लेकर एक बड़ी खबर आई है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी एनटीए ने नीट-2020 परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र का विवरण जारी किया है। जो उम्मीदवार नीट परीक्षा में उपस्थित होना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट - ntaneet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। एडमिट कार्ड जल्द ही जारी किया जाएगा। परीक्षा 13 सितंबर को आयोजित की जाएगी। हालांकि, छात्र कोरोना वायरस महामारी के कारण परीक्षा का विरोध कर रहे थे, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को खारिज कर दिया था।

पिछले सप्ताह, एनटीए ने एक नोटिस जारी किया था कि उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों के बारे में पहले से सूचित किया जाएगा। इसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया जाएगा। इससे अभ्यर्थियों को अंतिम समय पर परेशानी नहीं होगी। चूंकि कई उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए यात्रा करना पड़ सकता है, यह उनके लिए बेहतर साबित होगा यदि उन्हें पहले से ज्ञान हो। छात्र आधिकारिक वेबसाइट से परीक्षा केंद्र के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
नीट-2020 परीक्षा सितंबर में है जिसके लिए एजेंसी ने एक विस्तृत सुरक्षा योजना जारी की है। कई दिशानिर्देशों, निर्देशों और आदेशों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक योजना बनाई गई है। इस बीच, MCI ने यह भी कहा कि परीक्षा स्थगित नहीं की जा सकती क्योंकि इससे पूरा शैक्षणिक कैलेंडर खराब हो जाएगा।

बता दें कि देशभर में फैले कोरोना वायरस की महामारी के कारण छात्रों में परीक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति है। अभी अंतिम वर्ष की परीक्षा का विरोध है, लेकिन यूजीसी ने कहा है कि परीक्षा करवाना आवश्यक है। 


प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने ऑफलाईन कक्षाओं का किया निरीक्षण*

23-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना संक्रमण के चलते स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन नहीं हो पा रहा हैं। इस विश्वव्यापी संकट की घड़ी में विद्यार्थियों को अध्ययन से जोड़े रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पढ़ई तुंहर दुआरयोजना लागू की है, जिसके अंतर्गत वेबपोर्टल में पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न आडियो-विडियो पाठ्यक्रम वेबपार्टल में अपलोड किया गया है। इस पोर्टल में पंजीकृत होकर विद्यार्थी लाभ ले रहें हैं। निश्चित ही शासन की यह योजना विद्यार्थियों के लिये अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। इस योजना के कारण विद्यार्थी ऑनलाईन क्लास में जुड़कर विषयवस्तु को आसानी से समझ पा रहे है। इस योजना को एक कदम और आगे बढ़ाते हुये प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने ऑफलाईन कक्षा पढ़ई तुंहर पारा लाउडस्पीकर, मिस्डकॉल, बुल्टू के बोल के माध्यम से जनसहयोग द्वारा अधिकाधिक विद्यार्थियों को अध्ययन से जुड़ने के अवसर प्रदान किया है। प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्लाएवं डॉ. एम. सुधीश सहायक संचालक राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा ने जिले के 4 विकासखण्डों क्रमश पलारी,बलौदाबाजार, कसडोल बिलाईगढ़ में संचालित ऑफलाईन कक्षा का निरीक्षण किया। इस दौरान विकासखण्ड पलारी अंतर्गत ग्राम खरतोरा में पढ़ई तुंहर पारा के तहत संचालित कक्षा से किया गया। यहां प्राथमिक शाला के शिक्षकों स्कूल के सफाई कर्मचारी सुरेश कुमार वर्मा द्वारा प्राथमिक शाला के बच्चों को अभ्यास करने के लिये वर्कशीट दिया गया था बच्चे रंगीन स्केच पेन आदि से चित्र को कलर करते हुये मिले। प्रमुख सचिव ने शिक्षकों एवं सफाई कर्मचारी के इस कार्य से प्रभावित होकर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर गांव के सरपंच ने गांव में चल रहे ऑफलाईन कक्षा संचालन की जानकारी दी। पलारी विकासखण्ड के ग्राम कानाकोट के प्राथमिक शाला के शिक्षकों शिक्षा सारथियों द्वारा पंचायत भवन के दो कक्ष एवं प्रांगण में अध्यापन कराया जा रहा था,यहां अध्यापन में संपर्क फांउडेशन द्वारा प्रदत्त किट, कंकड़ पत्थर आदि से विभिन्न अवधारणाओं को स्पष्ट करने अभ्यास कराया जा रहा था। साथ ही रूम टू रीड की आर्कषक पुस्तकें, मुस्कान लाईब्रेरी के उपयोग करते भी पाया गया। प्रमुख सचिव ने वहां अध्यापन कर रहे शिक्षा सारथियों एवं शिक्षक कन्हैया लाल साहू के कार्यों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त करतें हुए उनके कार्यो को सराहा। बलौदाबाजार विकासखण्ड के ग्राम बगबुड़ा में स्थित प्राथमिक शाला में ऑफलाईन कक्षा का संचालन लाउडस्पीकर के माध्यम से किया जा रहा था। बच्चें गांव के चौक चौराहे, घर के बरामदे में बैठकर लाउडस्पीकर से सुनकर अध्ययन कर रहे थे। प्रमुख सचिव ने बच्चों से मिलकर लाउडस्पीकर के माध्यम से पढ़ाये जा रहे विषय वस्तु के संबंध में प्रश्न भी पूछे। इसी तरह कसडोल विकासखण्ड मुख्यालय में संचालित इंग्लिश मिडियम स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षको से प्रमुख सचिव ने अध्ययन-अध्यापन के संबंध में अंग्रेजी भाषा में वार्तालाप की। विद्यार्थियों ने डॉ शुक्ला को उनके प्रश्नों के जवाब दिये एवं साथ ही बच्चों ने अंग्रेजी की पुस्तक फर्राटेदार पढ़कर सुनायी। बिलाईगढ़ विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम छिर्रा के प्राथमिक शाला मे सामुदायिक सहभागिता की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने पढ़ई तुंहर पारा के शत प्रतिशत क्रियान्वयन करने वहाँ उपस्थित समुदाय को प्रेरित किये। प्रमुख सचिव ने जिला मुख्यालय बलौदाबाजार में स्थित के अंग्रेजी माध्यम के उत्कृष्ट विद्यालय मनोहर दास वैष्णव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और उपस्थित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। गौरतलब हैं कि राज्य सरकार की मंशा जिले में एक बेहतरीन अंग्रेजी माध्यम के स्कूल संचालित करनें की दिशा में आगें बढ़ रही हैं जो सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक हैं। इस दौरान कलेक्टर सुनील कुमार जैन सहित जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित भी रहे। 


शासकीय अंग्रेजी स्कूल की संशोधित मेरिट सूची जारी*

21-Aug-2020

उत्तर बस्तर कांकेर (शोर सन्देश) शासकीय नरहरदेव (अंग्रेजी माध्यम) उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कांकेर द्वारा शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की संविदा भर्ती के लिए पूर्व में जारी मेरिट लिस्ट को निरस्त कर संशोधित मेरिट लिस्ट जारी किया गया है, जिसे कांकेर जिले के वेबसाईट https//:kanker.gov.in में अपलोड किया गया है, जिसका अवलोकन किया जा सकता है। 


मुख्यमंत्री ने गुरूदक्षिणा के रूप में दी कृषि महाविद्यालय की सौगात, पहले बैच ने पूरी की पहले साल की पढ़ाई*

20-Aug-2020

दुर्ग (शोर सन्देश) जिले के पहले सरकारी कृषि कालेज की सौगात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले साल इसी दिन दी थी। पाटन की समृद्ध धरा में प्रगतिशील किसानों की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने, कृषि के क्षेत्र में हुनरमंद युवाओं को अवसर देने मुख्यमंत्री ने मर्रा में महाविद्यालय आरंभ करने का निर्णय लिया था। एक साल के भीतर महाविद्यालय की छोटी सी टीम ने इसका स्वरूप निखारने में कड़ी मेहनत की है। राज्य शासन ने यहां आधुनिक कृषि महाविद्यालय के लिए 87 एकड़ भूमि हस्तांतरित की। इसमें 72 एकड़ में भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र बनाने का निर्णय लिया गया। कृषि की पढ़ाई कमरों से अधिक फील्ड में होती है। इसके लिए फील्ड के आकार का चयन, फिर इसे तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने का जतन इस साल भर में हुआ। प्रोफेसर छात्रों के साथ अध्यापन कक्षों में रहे, फिर मर्रा के किसानों की भूमि में उन्हें ले गए। यहां उन्होंने फील्ड में पढ़ाई कराई। फिर बचे समय में वे भूमि अनुदेशक प्रक्षेत्र में आए, जिसे विकसित करना था। यहां मनरेगा मजदूरों के माध्यम से प्रक्षेत्र विकसित कराया गया। साढ़े सात सौ मजदूरों को जो मर्रा, आमालोरी और गुढिय़ारी के थे, उन्हें लाकडाउन के दौरान भी रोजगार मिला। महाविद्यालय के बुनियाद खड़ी करने में डीन डॉ. अजय वर्मा का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने अपनी टीम के साथ अनुदेशक प्रक्षेत्र में साल भर कड़ी मेहनत की। प्रोफेसर धूप में पूरा दिन खड़े रहकर काम का निरीक्षण करते रहे और अनुदेशक क्षेत्र की जमीन निखरती रही। जब कृषि महाविद्यालय बनता है तो अकादमिक आयोजन भी होते हैं जिसमें विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि यहां राज्य स्तरीय कृषि मेले का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 500 किसानों ने हिस्सेदारी की। इसके संचालन और रखरखाव में भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। इसके लिए राज्य शासन ने 29 लाख रुपए महाविद्यालय को प्रदान किये। मशरूम उत्पादन के लिए 35 लाख रुपए प्रदान किये। भारत रत्न संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, मर्रा की स्थापना कर मुख्यमंत्री ने बड़ी पहल की है। इस साल यहाँ 48 छात्रों को एडमिशन मिल सकेगा। मुख्यमंत्री के मर्रा में शिक्षक रहे श्री हीरा सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यहां पढ़ाई की, अब यहां उन्होंने कृषि के लिए महाविद्यालय शुरू कर दिया। यह उनकी गुरु दक्षिणा है। 


निजी स्कूलों की वसूली के विरुद्ध हाईकोर्ट पहुंची पूर्व बैंकर*

19-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) राजधानी रायपुर की पूर्व बैंकर प्रीति उपाध्याय ने निजी स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस के नाम पर की जा रही वसूली के विरुद्ध बिलासपुर उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है। सनद रहे की हाल ही में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को राहत देते हुए फैसला दिया था, जो निजी स्कूल ट्यूशन फ़ीस ले सकते हैं। इसी आदेश की आड़ में निजी स्कूलों ने उच्च न्यायालय के आदेश पर पालकों को गुमराह करते हुए वसूली शुरू कर दी। दरअसल निजी स्कूलों की फीस को परिभाषित करने हेतु ही यह याचिका लगाई गई है। दो बच्चों कि पालक प्रीति उपाध्याय का कहना है कि 8 घण्टे का स्कूल मोबाइल पर डेढ़ घण्टे में निपटाया जा रहा है। असेम्बली, कम्प्यूटर क्लास, लेबोरेट्री, स्पोर्ट्स जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का लाभ जब छात्र स्कूलों से नहीं ले पा रहे हैं तो किस बुनियाद पर स्कूल 100 प्रतिशत फीस वसूल सकते हैं? प्रीति कहती हैं कि कोरोना काल में सिर्फ स्कूल ही संकट में नहीं हैं। सभी पालक भी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं परंतु स्कूल जो कि एक नो प्रॉफिट नो लॉस के संस्थान हैं एक लाभदायी उद्योग की तरह का व्यवहार कर रहे हैं। प्रीति उपाध्याय ने उम्मीद व्यक्त की है कि न्याय पालकों के पक्ष में ही आएगा और स्कूल ट्यूशन फीस के नाम पर मनमानी नहीं कर पाएंगे। 


ट्युशन फीस, बोर्ड परीक्षा फीस सरकार वहन करे, पालकों ने राज्यपाल से लगाई गुहार*

18-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) भारत का संविधान की अनुच्छेद 21() के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जाएगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या), (1) (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है। बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है।  छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार का दायित्व है। सभी बच्चे स्कूल में उपस्थित हो रहे है और नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त कर रहे है। लेकिन प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।
कोरोना महामारी में सभी वर्ग के लोग आर्थिक रूप से कमजोर हो गए हैै और स्कूल की डिमांडेड फीस और अब बोर्ड की परीक्षा फीस जमा करने में ज्यादातर पालक सक्षम नहीं है। ऐसे परिस्थिति में भी प्राईवेट स्कूलों से बच्चों को शिक्षा परीक्षा वंचित किया जा रहा है। आरटीई के हजारों की संख्या में बच्चे प्राईवेट स्कूल छोड़ कर जा रहे है।  श्री पॉल ने कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 15 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएं।  पैरेंट्स एसोसियेशन ने राज्यपाल महोदिया से पत्र लिखकर आग्रह किया है। 


प्राथमिक/माध्यमिक के शिक्षक मुहल्ला कक्षा का संचालन कर रहे*

17-Aug-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) ग्राम स्तर पर मुहल्ला कक्षा और लाऊडस्पीकर कक्षा का संचालन किया जा रहा है। प्राथमिक/माध्यमिक शालाओ के शिक्षक ग्राम के पढ़े लिखे युवक/युवतियों को भी प्रेरित कर रहे है। संबंधित संस्था/ग्राम के प्रधानपाठको ने ग्राम स्तर में बेहतर कक्षा संचालन के लिए पढ़ाने वालो को लपेटन, श्यामपट, चॉक, डस्टर, सिनेटाइजर, मास्क का वितरण भी किया है। जिससे कक्षा का संचालन सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। कक्षा का संचालन ग्राम के सरपंच, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के सहयोग से किया जा रहा है। वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखकर वहां के शिक्षक स्वयं कक्षा में जाकर बच्चो को शिक्षण कार्य करा रहे है।विकासखंडो में संकुल केंद्र जेवरा के ग्राम पथर्रा, विकासखंड बेरला के ग्राम मनियारी, विकासखंड नवागढ़ के संकुल केंद्र कूंरा एवं विकासखंड साजा के संकुल केंद्र बीजा के अंतर्गत संचालित प्राथमिक/माध्यमिक शालाओ मुहल्ला कक्षा आयोजित किया जा रहा है। 


पढ़ई तुंहर दुवार : विद्यार्थियों की सुविधा के लिए एन्ड्राइड एप तैयार*

16-Aug-2020

रायपुर (शोर सन्देश) कोविड़-19 ने दौरान ऑनलाईन शिक्षा को आसान बनाने के लिए पढ़ई तुंहर दुवार एन्ड्राइड एप तैयार किया है। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग और एनआईसी ने मिलकर एप तैयार किया है। इस एप के माध्यम से विद्यार्थी इंटरनेट उपलब्ध होने पर अपने पाठ्यक्रम से संबंधित कन्टेंट डाउनलोड कर सकेंगे। डाउनलोड किए गए वीडियो और अन्य कन्टेंट जब इंटरनेट उपलब्ध नहीं हो, तब भी ऑफलाईन देखे जा सकेंगे। यह एप दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी है। इस एप को गुगल प्ले स्टोर से नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है। //https://play.google.com/store/apps/details?id=in.cgschools.learningapp  ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्कूलों के विद्यार्थियों को घर बैठे पढ़ाई के लिए ऑनलाईन सुविधा उपलब्ध कराने, लॉकडाउन के दौरान माह अप्रैल में पढ़ई तुंहर दुवार की वेबसाइट लॉन्च की थी। ऑनलाइन शिक्षा की योजना का लाभ लगभग 22 लाख बच्चों को मिल रहा है। 2 लाख शिक्षक-शिक्षिकाएं इस व्यवस्था से जुड़े हैं। 


सीबीएसई 10 वीं 12 वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में संभव*

14-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं और 12वीं के छात्रों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं सितंबर माह के दौरान ले सकता है। हालांकि इसके लिए अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। स्कूल और छात्रों को इस बारे में सूचित किया जा रहा है। कई राज्यों में स्कूलों ने कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए फॉर्म भी जारी कर दिए हैं। सीबीएसई ने कंपार्टमेंट परीक्षाएं के संबंध में पत्र जारी कर दिया है, जिसकी कॉपी सभी संबंधित स्कूलों को दी गई है। इससे पहले सीबीएसई ने कंपार्टमेंट परीक्षाएं कराने या कराने को लेकर छात्रों और उनके अभिभावकों से सुझाव मांगे थे। सीबीएसई को मिले अधिकांश सुझावों में अधिकतर सुझाव परीक्षा रद्द कराने के पक्ष में थे, लेकिन बोर्ड ने कंपार्टमेंट परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। अगले सप्ताह परीक्षा की तारीख जारी होने की संभावना है।  इस बार कोरोना संक्रमण के कारण पहले बोर्ड की कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और फिर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे में भी देरी हुई।  इससे पहले सीबीएसई ने अदालत में अपना जवाब दाखिल करते हुए कंपार्टमेंट परीक्षा कराने की बात कही। शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, कंपार्टमेंट की ये परीक्षाएं सितंबर के पहले सप्ताह में करवाई जा सकती हैं। 10वीं में अधिकांश छात्रों की गणित, सोशल साइंस और साइंस में कंपार्टमेंट आई है। वहीं 12वीं में गणित, अकाउंट और इकोनॉमिक्स में आई है।  सीबीएसई ने कहा, `जेईईई मेन, नीट (यूजी) और जेईई एडवांस बड़ी परीक्षाएं हैं। इनके लिए बोर्ड रिजल्ट की जरूरत पड़ती है। इसी के आधार पर उच्चतर शिक्षा में प्रवेश मिलता है। ऐसे में कंपार्टमेंट की परीक्षाएं करवाना आवश्यक है, क्योंकि कई ऐसे छात्रों ने इन परीक्षाओं का फॉर्म भरा है, जिनकी इस वर्ष कंपार्टमेंट आई है।


नई शिक्षा नीति के तहत अब सिर्फ 300 कॉलेजों को ही मान्यता दे पाएंगे विश्वविद्यालय*

13-Aug-2020

नई दिल्ली (शोर सन्देश) नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत विश्वविद्यालय 300 से अधिक कॉलेजों को मान्यता नहीं दे पायेंगे। केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल `निशंक` `कोविड-19 के बाद शिक्षा` विषय पर डिजिटल सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है। ताकि 300 से अधिक कॉलेजों को मान्यता देने के नियम का सही से पालन हो सके।               00 कॉलेजों की गुणवत्ता और कामकाज पर नजर के लिए कदम :
मानव संसाधन विकास मंत्री ने सवाल किया, ``मैं हाल ही में एक विश्वविद्यालय गया था और जब मैंने कुलपति से पूछा कि कितने कॉलेज उस विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त हैं, तो उन्होंने कहा कि 800 डिग्री कॉलेज। मुझे लगा कि मैंने गलत सुन लिया। मैंने फिर पूछा और उन्होंने कहा : 800 यह दीक्षांत समारोह था, मैं चकित था। क्या कोई कुलपति 800 डिग्री कॉलेजों के प्रिंसिपल के नाम याद रख सकता है?``
निशंक ने कहा, ``क्या वह इतने अधिक कॉलेजों की गुणवत्ता और कामकाज पर नजर रख सकते हैं। यही वजह है हम कह रहे हैं कि नई शिक्षा नीति में चरणबद्ध तरीके से इस पर काम करेंगे। एक विश्वविद्यालय 300 से अधिक डिग्री कॉलेजों को मान्यता नहीं दे सकता। उसके लिए हमें विश्वविद्यालय बढ़ाने होंगे और हम वह करेंगे।``
00 कॉलेजों को स्वायत्तता देने की प्रणाली पर कामकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने ही नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी है। मान्यता प्रदान करने वाली इस व्यवस्था को अगले 15 साल में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और कॉलेजों को क्रमिक स्वायत्तता देने की चरणबद्धप्रणाली स्थापित की जाएगी। संकल्पना के अनुसार, आने वाले समय में कोई कॉलेज डिग्री देने वाला एक स्वायत्त कॉलेज या विश्वविद्यालय का घटक कॉलेज होगा। 




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