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शिक्षा

छत्तीसगढ़ में कृषि शिक्षा अनुसंधान एवं प्रसार का एक मजबूत नेटवर्क तैयार: भूपेश बघेल*

20-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर सहित 4 नये उद्यानिकी महाविद्यालयों साजा (बेमेतरा जिला), अर्जुन्दा (बालोद जिला), धमतरी, जशपुर और लोरमी कृषि महाविद्यालय (जिला मुंगेली) और नवीन कृषि विज्ञान केन्द्र कोण्डागांव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य स्थापना के समय छत्तीसगढ़ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय सहित केवल 01 कृषि महाविद्यालय था। आज कृषि, उद्यानिकी के 46 महाविद्यालय, 08 अनुसंधान केंद्र एवं 27 कृषि विज्ञान केंद्र इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के उत्तर में बलरामपुर से लेकर दक्षिण में सुकमा तक कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो गया है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों को शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल किया गया है। इसका लाभ किसानों को उन्नत तकनीक से खेती करने में और कृषि से संबद्ध आर्थिक गतिविधियों को विकसित करने में मिलेगा जिससे हमारे किसानों और ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊंचा उठेगा। उनकी आर्थिक-समाजिक स्थिति और सुदृढ़ होगी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 35वें स्थापना दिवस पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदेश के कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रों और नवीन कृषि महाविद्यालयों में 115 करोड़ रूपए की लागत के अधोसंरचना विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने इनमें से 46 करोड़ 67 लाख रूपए की लागत के कार्यों का लोकार्पण और 63 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत के कार्यों का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इन कार्यों में कृषि महाविद्यालयों के भवन, बालक-बालिका छात्रावास, अनुसंधान केन्द्र, हाइटेक नर्सरी, सीड प्रोसेसिंग भवन, हैचरी, कृषि विज्ञान केन्द्रों में प्रशासनिक भवन और कृषक छात्रावास निर्माण के कार्य शामिल हैं। श्री बघेल इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए डिजिटल कृषि पंचांग और कृषि दर्शिका-2021 का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में कृषि और जलसंसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंडि़या, विधायक अमितेश शुक्ला, देवव्रत सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के.पाटिल और कुल सचिव प्रभाकर सिंह उपस्थित थे। इस प्रदेश व्यापी कार्यक्रम में 12 मंत्री और 21 विधानसभा क्षेत्रों के विधायक सहित विभिन्न कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक, शिक्षक और विद्यार्थी भी जुड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 14 कृषि महाविद्यालयों, छात्रावासों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के भवनों का भी लोकार्पण हुआ है। ये सभी भवन लगभग 47 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुए हैं। जिन कृषि महाविद्यालयों में महाविद्यालय-भवन एवं छात्रावास नहीं थे, उनके लिए हमने राशि की स्वीकृति दी है। इन महाविद्यालयों, छात्रावासों, कृषि विज्ञान केंद्रों के भवनों एवं कृषक छात्रावासों के लिए लगभग 63 करोड़ रुपए के कार्यों का शिलान्यास किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि घोषणा-पत्र में उद्यानिकी और वानिकी को बढ़ावा देने का वादा किया था। इसी को मूर्त रूप देने के लिए महात्मा गांधी के नाम पर उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की है। इस विश्वविद्यालय के लिए पदों की स्वीकृति भी दे दी गई है। पिछले 02 वर्षों में हमने सुकमा एवं कोण्डागांव में 02 नये कृषि विज्ञान केंद्र प्रारंभ करने पहल की है, जिन्हें भारत सरकार से स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। आज इनमें से कोण्डागांव में कृषि विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया गया है। हमारा प्रयास है कि इसी वर्ष गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही एवं साजा में भी नये कृषि विज्ञान केंद्र प्रारंभ हो जाएं, इसके लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कृषकों को कृषि में लगने वाली लागत के आंकलन के लिए पहले कोई केंद्र नहीं था। इस वर्ष से छत्तीसगढ़ में किसानों की लागत का अध्ययन करने के लिए एक केंद्र विश्वविद्यालय में प्रारंभ किया जा रहा है। इसके लिए 25 पदों की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण शासन की प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। इस वर्ष केवल खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय प्रारंभ किया है, वरन इस महाविद्यालय तथा कृषि विज्ञान केंद्र जगदलपुर के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपए की लागत से फूड प्रोसेसिंग इक्यूबेशन सेंटर भी प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषि शिक्षा के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले 02 वर्षों में हमने 08 महाविद्यालय स्थापित किए हैं। इस वर्ष हम 08 नये महाविद्यालय खोलने जा रहे हैं। कृषि की शिक्षा में बच्चों के रुझान को देखते हुए हमने प्रवेश क्षमता में भी वृद्धि की है। पिछले 02 वर्षों में लगभग 20 प्रतिशत सीट की वृद्धि की गई है। अगले वर्ष से प्रवेश क्षमता में 10 प्रतिशत की और वृद्धि की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा सुराजी गांव योजना के तहत राज्य में 7 हजार से अधिक गोठानों का निर्माण किया जा रहा है। 4 हजार से ज्यादा गोठान सक्रिय भी हो चुके हैं। 325 गोठानों को कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा गोद लिया गया है, जिनमें वैज्ञानिकों द्वारा वर्मी कंपोस्ट निर्माण, मशरूम उत्पादन, बटेर पालन, कड़कनाथ मुर्गी पालन, सब्जियों-फूलों की खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बाड़ी विकास के तहत विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 8000 बाडि़यों का विकास किया जा रहा है। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता छत्तीसगढ़ में कृषि, उद्यानिकी और वानिकी क्षेत्र का विकास करना है। पिछले दो वर्षाें में 8 नए कृषि महाविद्यालय प्रारंभ किया गया है। छत्तीसगढ़ के विकास में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जब कोविड के कारण देश में आर्थिक गतिविधियां ठप थी। छत्तीसगढ़ का सौभाग्य रहा कि सारी बाधाओं के बाद भी किसानों, मजदूरों और वनांचल के रहवासियों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़े रखा। दो वर्षाें में विश्वविद्यालय ने 34 नई प्रजातियों के बीज विकसित किए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने स्वागत भाषण दिया और विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने धान की सुगंधित प्रजातियों को जिलेवार दर्शाता धान से धनी छत्तीसगढ़ का नक्शा स्मृति चिन्ह के रूप में मुख्यमंत्री को भेंट किया। 


पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन 20 जनवरी तक *

15-Jan-2021

00 निर्धारित तिथि तक आवेदन की कार्यवाही पूरी नहीं होने पर संस्था प्रमुख होंगे जिम्मेदार
जगदलपुर (शोर सन्देश) अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 20 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन की जा सकती है। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त विवेक दलेला ने बताया कि जिले में संचालित सभी शासकीय अशासकीय महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग काॅलेज, आईटीआई और पाॅलिटेक्निक काॅलेज के अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को इस योजना के अंतर्गत आदिवासी विकास विभाग के माध्यम से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि शिक्षा सत्र शिक्षा सत्र 2020-21 में छात्रवृत्ति के आवेदन, स्वीकृति एवं वितरण की कार्यवाही एक जनवरी से 20 जनवरी तक की जा रही है। http://mpsc.mp.nic.in/CGPMS वेबसाईट के माध्यम से आवेदन, संस्थाओं का प्रस्ताव स्वीकृति की कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि निर्धारित तिथि के बाद शिक्षा सत्र 2020-21 की पोस्ट मैट्रिक छात्रावृत्ति के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। और प्रस्ताव स्वीकृति की कार्यवाही का अवसर भी प्रदान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहाकि निर्धारित तिथि तक कार्यवाही पूरी नहीं करने पर यदि विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित रहेंगे, तो इसके लिए संस्था प्रमुख स्वयं जिम्मेदार होंगे। 


स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में चयनित अभ्यर्थियों की जारी हुई सूची*

11-Jan-2021

 बेमेतरा (वीएनएस) .. शासन स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन, नया रायपुर अटल नगर, जिला रायपुर के आदेश द्वारा दिये गये पद के अनुसार स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट (अंग्रेजी माध्यम) विद्यालय कन्या देवकर वि..साजा जिला बेमेतरा में निम्नांकित पदो का संविदा नियुक्ति निम्नांकित शर्तो पर की जाती है। चयनित अभ्यर्थी स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट (अंग्रे्रजी माध्यम) विद्यालय कन्या देवकर में 23 जनवरी 2021 तक कार्यभार ग्रहण कर सकते है निर्धारित तिथि के बाद आदेष स्वमेव निरस्त माना जावेगा। संबंधित चयनित अभ्यर्थी कार्यभार ग्रहण करते समय मूल दस्तावेजो की छायाप्रति प्रस्तुत करेंगे। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट (अंग्रे्रजी माध्यम) विद्यालय देवकर मे चयनित अभ्यर्थी के पद एवं नाम इस प्रकार हैं-व्याख्याता हिन्दी अविनाश यादव एवं नीलीमा ठाकुर, व्याख्याता संस्कृत कुंजबिहारी डड़सेना, व्याख्याता अंग्रेजी वासुदेव जाना एवं गौरव कुमार ठाकुर, व्याख्याता रसायन हिन्दी माध्यम बीना सहारे, व्याख्याता गणित हिन्दी माध्यम पूर्णिमा साहू, व्याख्याता जीवविज्ञान हिन्दी माध्यम मयूरी सिंह, व्याख्याता भौतिक शास्त्र हिन्दी माध्यम सोबिया बानो , व्याख्याता राजनीति विज्ञान (हिन्दी माध्यम) खोरबहरा, व्याख्याता अर्थशास्त्र/भूगोल (हिन्दी माध्यम) निहारिका केशरवानी, व्याख्याता रसायन अंग्रेजी माध्यम अंजू कुमारी, व्याख्याता गणित अंग्रेजी माध्यम प्रियंका राजपूत, व्याख्याता जीवविज्ञान अंग्रेजी माध्यम शालिनी राघव, व्याख्याता भौतिक शास्त्र अंग्रेजी माध्यम देवेन्द्र चंदन, व्याख्याता सामाजिक अध्ययन (अंग्रेजी माध्यम) जे.शालिनी बी., व्याख्याता वाणिज्य (अंग्रेजी माध्यम) बरखा ठाकुर, प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला (अंग्रेजी माध्यम) नमीता सिंह इन सभी का संविदा नियुक्ति मानदेय राशि 38100रु. है। प्रधान पाठक प्राथमिक शाला (अंग्रेजी माध्यम) पायल राठी, शिक्षक हिन्दी/संस्कृत (हिन्दी माध्यम) कुंजबिहारी डड़सेना, शिक्षक अंग्रेेजी (अंग्रेजी माध्यम) इति चैबे, शिक्षक गणित (अंग्रेजी माध्यम) ईश्वर कुमार साहू, शिक्षक विज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) ठालेश्वर कुमार वर्मा इन सभी का संविदा नियुक्ति मानदेय राशि 35400 रु. है।
सहायक शिक्षक कला (अंग्रेजी माध्यम) गुंजन साहू, सहायक शिक्षक कला (अंग्रेजी माध्यम) वंदना, सहायक शिक्षक कला (अंग्रेजी माध्यम) वेदप्रकाश सिह, सहायक शिक्षक विज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) मौसमी धनगर, सहायक शिक्षक विज्ञान (अंग्रेजी माध्यम) आकांक्षा आनंद इन सभी का संविदा नियुक्ति मानदेय राशि 25300रु. है।
व्यायाम शिक्षक योगेश मानदेय राशि 38100रु. ग्रंथपाल (अंग्रेजी माध्यम) प्रगति जायसवाल मानदेय 22400 रु., कम्प्यूटर शिक्षक (अंग्रेजी माध्यम) पूनम घृतलहरे मानदेय 35400रु. प्रयोगशाला सहायक (अंग्रेजी माध्यमं) विनायक कर्ष, अक्षिता दुबे एवं नीरज सिह मरकाम, सहायक ग्रेड-02 पराग जादव इन सभी का संविदा नियुक्ति मानदेय राशि 25300रु. है। सहायक ग्रेड-03 पराग जादव मानदेय 19500 रु. होंगे। जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी ने बताया कि शर्तें इस प्रकार है, संविदा नियुक्ति ..सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 के अधीन रहेंगे। पद पूर्णतः अस्थायी होंगे। शासन के द्वारा नियुक्ति अथवा कार्य व्यवहार के आधार पर किसी भी समय पदच्युत किया जा सकेगा। संविदा पर नियुक्त व्यक्ति को नियमित कर्मियों के समान आकस्मिक एवं ऐच्छिक अवकाश की पात्रता हेागी, किन्तु अन्य किसी भी प्रकार का अवकाश नही दिया जावेगा। आकस्मिक अवकाश एवं ऐच्छिक अवकाश पूर्ण महिनों के लिए आनुपातिक आधार पर दिए जावेंगे। किसी भी अभ्यर्थी की नियुक्ति संविदा पर होने पर वह नियमितिकरण के लिए किसी भी प्रकार का दावा नही करेगा ना ही उस पद के विरूद्ध उस व्यक्ति विशेष को नियमित भर्ती के समय कोई प्राथमिकता/छूट दी जावेगी।अभ्यर्थी का कार्य संतोषप्रद होने पर एक माह का नोटिस देकर उनकी सेवाएं/प्रतिनियुक्ति समाप्त की जा सकेंगी। नियुक्त व्यक्ति भी एक माह का नोटिस देकर सेवा से त्याग पत्र दे सकता है। चयन समिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया ही मान्य किये जायेंगे। भविष्य में शासन के द्वारा उक्त पदों पर भर्ती किए जाने पर यह नियुक्ति स्वमेव निरस्त मानी जावेगी।
आपका कार्य व्यवहार एवं परीक्षा परिणाम प्रदर्शन के आधार पर भी आपकों पदच्युक्त किया जा सकेगा। संविदा नियुक्ति ..सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 के नियम 4 (1) के अन्तर्गत उल्लेखित संविदा नियुक्ति पदो पर प्रथम बार तीन वर्ष कालावधि के लिए की जाती है तथापि राज्य सरकार आवश्यकता के आधार पर तथा संविदा पर नियुक्ति व्यक्ति की उपयुक्तता का आंकलन करने के पश्चात संविदा नियुक्ति की कालावधि एक बार में अधिकतम तीन वर्ष के लिए बढ़ाते हुए संविदा नियुक्ति का नवीनीकरण का निर्णय ले सकेंगे।
संविदा नियुक्ति ..सिविल सेवा (संविदा नियुक्ति) नियम 2012 के उपनियम (2) के अन्तर्गत उल्लेखित मामलों को छोड़कर संविदा सेवा में सिर्फ एकमुश्त राशि वेतन के रूप में देय होगी। इसके अतिरिक्त कोई विशेष वेतन, मंहगाई भत्ता, क्षतिपूर्ति भत्ता, गृहभाड़ा भत्ता इत्यादि नही दिया जावेगा तथा संविदा नियुक्ति के अधीन वार्षिक वेतनवृद्धि की पात्रता नही होगी।


डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम पहुंचे वेबिनार में शिक्षकों से स्कूल खोले जाने के संबंध में ली राय*

09-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) स्कूल शिक्षा मंत्री आज समग्र शिक्षा के माध्यम से बस्तर जिले के शिक्षकों के साथ प्रारंभिक भाषाई एवं गणितीय कौशलों के विकास के संबंध में आयोजित परिचर्चा में शामिल हुए। उन्होंने बस्तर संभाग के शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली। शिक्षकों ने स्कूलों को खोले जाने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार स्थानीय निकायों विशेषकर शाला प्रबंधन समितियों को दिए जाने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर पालकों के साथ चर्चा कर उचित निर्णय लिया जा सके। स्कूल शिक्षा मंत्री ने वेबिनार के माध्यम से बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, सुकमा, बीजापुर के सुदूर अंचलों में कार्यरत शिक्षकों से सीधा संवाद कर उनके विचारों को जाना। स्कूल शिक्षा मंत्री को बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक अमिय राठिया ने संभाग के विभिन्न जिलों में संचालित सरल कार्यक्रम एवं उसके माध्यम से बच्चों के प्रारंभिक कौशलों में हुए सुधारों की जानकारी दी। मंत्री डॉ. टेकाम द्वारा शिक्षकों से स्कूलों के खोले जाने के बारे में राय ली गई। शिक्षकों ने बताया कि गांवों में कोरोना की स्थिति बहुत कम लेकिन शहरों में इसका प्रभाव अधिक है। स्कूल खुलने पर शहरों में निवासरत शिक्षक यदि गावों में पढ़ने आएंगे तो संक्रमण फैलने की संभावना होगी। स्कूल खुलने पर आधे-आधे बच्चों को रोस्टर पद्धति से या फिर कक्षाओं को अलग अलग दिनों या समय पर खोले जाने का सुझाव भी कुछ शिक्षकों द्वारा दिया गया। शिक्षकों द्वारा पोर्टा केबिन, आश्रम शाला और केजीबीवी में बच्चों की बहुत अधिक संख्या होने से इन संस्थाओं को खोलने से सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन नहीं हो पाने और संक्रमण के खतरे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।  स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने केन्द्रों, मोहल्ला कक्षाओं में कोरोना से संबंधित सावधानियों की जानकारी भी ली। सभी शिक्षकों ने अवगत कराया कि साबुन से हाथ धोने, मास्क पहनकर आने और दूरी बनाकर बिठाकर ही उनकी कक्षाएं ली जाती हैं। डॉ. टेकाम ने संकट के समय शिक्षकों द्वारा स्वेच्छा से अध्यापन करवाएं जाने पर सभी की खूब प्रशंसा की एवं बस्तर क्षेत्र में जिला प्रशासन द्वारा संचालित बुल्टू के बोल, लाउडस्पीकर स्कूल और मोहल्ला कक्षाओं को एक ऐसा सफल उपाय बताया जिसकी वजह से बच्चों की पढाई निरंतर जारी रह सकी।  वेबिनार में बस्तर संभाग में प्रथम के साथ संचालित सरल कार्यक्रम में बेहतर उपलब्धि हासिल किए हुए बच्चों एवं पीछे छूट रहे बच्चों का अध्यापन कर रहे शिक्षकों के साथ विस्तार से उनके अनुभवों को सुना गया। वेबिनार के माध्यम से राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रस्तावित फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरेसी पर कार्ययोजना बनाने हेतु जमीनी स्तर से आइडियाज निकालने का प्रयास किया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने ऐसी विषम परिस्थितियों में बच्चों को सिखाने संबंधी विधियों की जानकारी ली। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सौ दिवसीय कार्यक्रम में किस प्रकार से शिक्षक रोचक गतिविधियों का इस्तेमाल कर स्थानीय सामग्री का उपयोग कर सरल विधि से पढ़ा रहे हैं, इसकी जानकारी दी गयी। 


अच्छी खबर : कॉलेजों में दाखिले की तारीख बढ़ी अब 14 तक ले सकेंगे प्रवेश*

09-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ में कालेजों में दाखिले की तारीखों को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया गया है। 30 दिसंबर को माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने 12वीं पूरक परीक्षा-2020 का परिणाम जारी किया था। इसके बाद कालेजों में दाखिले के लिए एक बार फिर आनलाइन पोर्टल खोलने की मांग की जा रही थी। अब स्नातक स्तर पर दाखिले के लिए 4 जनवरी तक कालेजों और विश्वविद्यालयों का दाखिला पोर्टल खोला जाएगा। 


प्रयास विद्यालय में कक्षा नवमीं में प्रवेश के लिए 11 जनवरी से भरा जाएगा च्वाइस फिलिंग फाॅर्म*

07-Jan-2021

कोरबा (शोर सन्देश) प्रयास आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए चयन परीक्षा उपरांत जिले के 34 बालक 32 बालिका का चयन हुआ है। चयनित विद्यार्थियों से च्वाइस फिलिंग फाॅर्म भरवाकर प्रमाण पत्रों, जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र सहित आठवीं की अंकसूची तथा फोटो को संलग्न कर वर्गवार सूची तैयार किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों से च्वाइस फिलिंग फाॅर्म, सहमति पत्रक घोषणा पत्र भरवाने का कार्य प्रयास आवासीय विद्यालय स्याहीमुड़ी कोरबा 11 जनवरी से 14 जनवरी सुबह साढ़े दस से शाम साढ़े पांच बजे तक किया जाएगा। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा एस. के. वाहने ने बताया कि चयनित विद्यार्थियों की सूची कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, प्रयास आवासीय विद्यालय स्याहीमुड़ी एवं समस्त विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के सूचना पटल पर देखा जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए जिला के वेबसाइट डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डाॅट कोरबा डाॅट जीओवी डाॅट इन का अवलोकन किया जा सकता है। 


शिक्षा की गुणवत्ता के साथ विद्यार्थियों में समानता बनाए रखें निजी विद्यालय प्रबंधन*

07-Jan-2021

00 अशासकीय विद्यालय फीस अधिनियम पर आधारित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कलेक्टर ने दी सीख
धमतरी (शोर सन्देश) सूचना का अधिकार अधिनियम एवं छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम-2020 के संबंध में आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम सह कार्यशाला में कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने निजी स्कूल प्रबंधन एवं संचालकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसी समाज को वास्तविक दशा और दिशा शिक्षा से ही मिल सकती है। स्कूल प्रबंधन इस बात पर विशेष ध्यान दें कि शिक्षा में गुणवत्ता लाने के साथ-साथ वह शिक्षा को लाभ देने वाली व्यावसायिक संस्थान समझें, बल्कि सभी बच्चों में हरहाल में समानता बनाए रखें। स्थानीय विंध्यवासिनी वार्ड के सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम की द्वितीय पाली में निजी शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि शिक्षण संस्थानों कोनो प्रोफिट, नो लाॅसकी नीति के साथ संचालित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा कल्याणकारी नीति के तहत अनुमति दी जाती है, ताकि बच्चे अपना भविष्य बेहतर ढंग से संवार सकें। इसलिए वे अपने दिमाग से यह बात निकाल लें कि वे व्यावसायिक लक्ष्य लेकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि शुल्क के तौर पर जो राशि पालकों से ली जाती है, उसका अधिकांश हिस्सा बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और मानसिक विकास पर ही खर्च करना चाहिए। वहीं स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ पालकों को भी यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि अंकों से विद्यार्थी की योग्यता को नहीं आंका जा सकता। यह आवश्यक नहीं कि बेहतर अंक अर्जित करने वाले छात्र ही कामयाब इंसान बने। इसलिए बच्चे के मानसिक स्तर का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण कर उसके हुनर को अंजाम देने का यथासंभव प्रयास करें। कलेक्टर ने बताया कि जिला स्तर पर गठित फीस समिति प्रशासन और निजी स्कूलों के मध्य समन्वय स्थापित कर समय-समय पर शुल्क का आॅडिट भी करेगी, जिसके लिए स्कूल प्रबंधन को आवश्यक सहयोग करना होगा। इसके पहले, जिला शिक्षा अधिकारी रजनी नेल्सन ने छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम-2020 के तहत विभिन्न प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए समिति के अधिकारों एवं कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उक्त समिति का कार्यकाल दो साल का होगा, जिसके अध्यक्ष कलेक्टर होंगे पांच नामांकित सदस्य होंगे। समिति के सदस्य सचिव जिला शिक्षा अधिकारी होंगे। उन्होंने बताया कि जिले में 216 अशासकीय विद्यालय हैं जिसमें 81 प्राथमिक, 71 माध्यमिक, 18 हाई स्कूल तथा 46 हायर सेकण्डरी स्कूल शामिल हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने यह भी बताया कि उक्त अधिनियम की धारा-3 के तहत गठित समिति विद्यालय की वर्तमान फीस में अधिकतम 8 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमोदन कर सकेगी। विद्यालय प्रबंधन समिति के सभी सदस्य, वैयक्तिक तथा संयुक्त रूप से इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने के लिए जिम्मेदार होंगे। यदि विद्यालय प्रबंधन समिति अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करती है तथा सक्षम न्यायालय में दोषसिद्ध होने पर प्रथम उल्लंघन के लिए 50 हजार रूपए एवं उसके बाद भी नियमों का उल्लंघन किए जाने पर एक लाख रूपए या इसके समकक्ष जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्मुखीकरण कार्यक्रम सह कार्यशाला में जिला फीस समिति के सदस्य, अशासकीय विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य सहित पालकगण उपस्थित रहे। 


5वीं के छात्र विमल ने वेबसाइट में कहानियों का किया छत्तीसगढ़ी अनुवाद*

06-Jan-2021

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ प्रदेश मेंपढ़ई तुहार दुआरकार्यक्रम के अंतर्गत कोरोनाकाल में बच्चों को ऑनलाइन या ऑफलाइन शिक्षा उपलब्ध करायी जा रही है। बिलासपुर जिले के विकासखण्ड कोटा की तहसील रतनपुर के जमुनाही तिलकडीह प्राथमिक शाला के कक्षा 5वीं के छात्र विमल ने स्टोरीविवर के वेबसाइट में 10 कहानियों का स्थानीय भाषा छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद कर एक नई शुरूआत की। कहते हैं, “पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होतीयह अपने आप में नई मिसाल है। कोरोना के कारण देश और प्रदेश में स्कूल बंद है, ऐसी स्थिति में बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग मेंपढ़ई तुंहर दुआरकार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए विभिन्न प्रकार के कारगर उपाय किए गए। इसका लाभ सभी विद्यार्थियों को मिल रहा है।
विमल की उम्र अभी 10 वर्ष है। उसने हाल ही में अपने बड़े पिता बलदाऊ सिंह श्याम को लैपटॉप में काम करते देख प्रेरित हो स्वयं कहानी लिखने की ठानी। विमल ने पक्के इरादे के साथ स्टोरीविवर की वेबसाइट पर उपलब्ध कहानियों में 10 हिंदी भाषा की कहानी को स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा मे अनुवाद किया। वर्तमान में छात्र मोबाइल सहित कम्प्यूटर लैपटॉप में काम करने में बिना किसी प्रशिक्षण के काफी जानकारी रखने लगा है। ऑनलाइन से सम्बंधित पढ़ई तुंहर दुआर के तहत चलने वाले ऑनलाइन क्लास में भी विमल नियमित रूप से शामिल होकर पढ़ाई करता है। विमल ने स्टोरीविवर सहित ऑग्मेंटेड रियलिटी वीडियो बनाने का भी काम कर रहा है। वह लगातार ऑनलाइन सहित ऑफलाइन क्लास का लाभ लेते हुए अपनी पढ़ाई को जारी रखा हुआ है।
ग्रामीण अंचल के छात्र विमल सिंह गोंड जो माता-पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने बड़े पिता बलदाऊ सिंह श्याम के पास रहकर अपनी पढ़ाई-लिखाई सतत रूप कर रहा है। छात्र के पिता छोटे कृषक है। आर्थिक स्थिति ठीक नही होने के कारण छात्र बड़े पिता बलदाऊ सिंह के पास रहकर पढ़ाई कर रहा है, बलदाऊ सिंह द्वारा भी पढ़ाई में कभी आर्थिक स्थिति कारण बने इसका ध्यान रखते हुए विमल को आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराते हैं। छात्र विमल इस कोरोनाकाल में अपने बड़े पिता के साथ रहकर सभी ऑनलाइन तकनीकी जानकारी भी रखने लगा है। ऑफलाइन क्लास के रूप में संचालित मोहल्ला क्लास में अपने साथ पढ़ने वाले बच्चों को लगातार क्लास में आने और पढ़ाई निरंतर जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।


बच्चों के लिए स्कूलों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं: कलेक्टर*

05-Jan-2021

जशपुरनगर (शोर सन्देश) कलेक्टर ने आज अपने कक्ष में शिक्षा विभाग, राजीवगांधी शिक्षा मिशन, संकल्प, अंगे्रजी माध्यम स्कूल के प्राचार्यां की बैठक ली। कलेक्टर महादेव कावरे ने जिले में सभी विकासखंण्डों नगर मुख्यालय स्तर पर प्रस्तावित स्वामी आत्मांनंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के अधोसंरचना के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने आरईएस विभाग को सभी चिन्हांकित स्कूलों में विद्यार्थियों के पढ़ाई के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों का सुदृढ़ीकरण करने के लिए कहा है। साथ ही स्कूल में बच्चों के लिए लाईब्रेरी, प्रयोगशाला, क्लासरूम, बालक-बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक शौचालय, बच्चों और स्टाप के बैठने के लिए फर्नीचर, सायकल स्टैण्ड, इण्डोर, आउटडोर आदि निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में कार्य को प्रारंभ किया जाना अनिवार्य है। ताकि स्कूल खुलने के लिए पूर्व अंगे्रेजी माध्यम स्कूल में सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। कलेक्टर ने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों में 10 स्वामी आत्मांनंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का चिन्हांकन किया गया है। इनमें उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुनकुरी, कोतबा, सन्ना, कांसाबेल, पतराटोली दुलदुला, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक पत्थलगांव एवं बगीचा, शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय मनोरा, शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम हाईस्कूल फरसाबहार एवं संकल्प शिक्षण संस्थान जशपुर शामिल है। 


शिक्षादूत पुरस्कार से मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित हुई ललिता*

03-Jan-2021

रायगढ़ (शोर सन्देश) उत्कृष्टता अपना स्थान स्वयं बना लेती है। इसी बात को प्रमाणित किया है प्राथमिक शाला तूरेकेला की शिक्षिका ललिता चंद्रा ने। ललिता चंद्रा ने मुख्यमंत्री के हाथों शिक्षादूत पुरस्कार प्राप्त कर खरसिया विकासखंड को जिले भर में गौरवान्वित किया है। बीआरसीसी प्रदीप साहू ने बताया कि चंद्रा मैम के कबाड़ से जुगाड़ कार्यक्रम में विशिष्ट शिक्षण सामग्री निर्माण किया गया है। शैक्षिक सामग्री का प्रयोग विद्यार्थियों के अध्यापन के लिए करते हुए शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहन देकर ललिता चन्द्रा ने समझ को सहज और सरल बनाया। वहीं पिछले वर्ष ब्लॉक और जिले स्तर पर एग्जीबिशन का हिस्सा बनी थीं। इनके वीडियोज ने काफी सराहना बटोरीं हैं। इन्हीं उत्कृष्ट कार्यों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2 जनवरी रायगढ़ प्रवास के दौरान सराहा, वहीं शिक्षादूत प्रशस्तिपत्र और 5 हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया।
पूरे विकासखंड को गौरवान्वित करने वाली ललिता चंद्रा को बीआरसीसी प्रदीप साहू, संकुल समन्वयक रामचरण सिदार, प्रधानपाठक हुलसराम बंजारे, सहायक शिक्षक राजेन्द्र कुमार और अनिल भारद्वाज सहित अनेक लोगों ने बधाई दी है।



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