
रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल की परीक्षाएं इस वर्ष असाइन्मेंट पद्धति से संपन्न कराई जा रही है। जिन जिलों के परीक्षा केन्द्रों में लॉकडाउन नहीं है, उनमें 4 अगस्त तक कक्षा 12वीं के 35 हजार 933 विद्यार्थियों द्वारा असाइन्मेंट जमा किया गया। कक्षा 12वीं के 38 हजार 384 विद्यार्थियों को असाइन्मेंट वितरण किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के अधिकारियों ने बताया कि कक्षा 10वीं के 16 हजार 561 विद्यार्थियों को असाइन्मेंट वितरण किया गया। विद्यार्थी असाइन्मेंट प्राप्त करने दो दिवस में अपना असाइन्मेंट लिखकर परीक्षा केन्द्र में जमा करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि जो छात्र किसी कारणवश अपने परीक्षा केन्द्रों से असाइन्मेंट प्राप्त नहीं कर सके, वे 17 अगस्त से 22 अगस्त के मध्य राज्य कार्यालय छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल परिषद पेंशनबाड़ा रायपुर या छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की वेबसाइट पर www.cgsos.co.in से असाइन्मेंट डाउनलोड करके ए-4 साईज के कागज पर उत्तर लिखकर अपने परीक्षा में 22 अगस्त तक जमा कर सकेंगे।

रायपुर (शोर सन्देश)। केंद्रीय शिक्षा नीति को लेकर एक ओर जहां छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन और सरकार विरोध कर रही है, वहीं प्रदेश में कांग्रेस सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने नीति का समर्थन किया है। सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र के वादों के अनुरूप बहुत सारे मुद्दों को केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति में शामिल किया है। सिंहदेव ने ट्वीट करके कहा कि जनता से चर्चा के बाद तैयार कांग्रेस के जनघोषणा पत्र का असर केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति में दिखाई दे रहा है। इसे देखकर वास्तव में प्रसन्नता हो रही है। राज्य सरकार ने भी पहले शिक्षा के अधिकार को 12वीं तक बढ़ाने है और आंगनबाड़ी में प्री स्कूल की वकालत की थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद कहा था कि शिक्षा को केंद्रीकृत किया जाना उचित नहीं है। संविधान के अनुसार शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, जो राज्य और केंद्र की अपनी-अपनी नीतियों से संचालित होता है। मूलभूत शिक्षा में राज्य का प्रमुख योगदान होता है। इस वजह से हर राज्य में अपनी अलग शिक्षा प्रणाली विकसित हुई है। शिक्षा के लिए नीति नियम बनाने की राज्यों को अभी स्वतंत्रता है, लेकिन नई नीति द्वारा पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस संगठन ने भी नई शिक्षा नीति का विरोध किया है। कांग्रेस ने एक बयान जारी करके कहा कि मोदी सरकार नई शिक्षा नीति द्वारा देश की भावी पीढ़ी को अपने रंग में रंगने की तैयारी में है। नई शिक्षा नीति के नाम पर अधिनायकवादी मोदी सरकार शिक्षा के बाजारीकरण, निजीकरण और पूंजीवादी व्यवस्था थोपने पर आमादा है। कोरोना आपदाकाल मोदी सरकार के लिए जनविरोधी संशोधन, अध्यादेश लादने का अवसर है। यह मोदी सरकार का संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कदम है।

रायपुर, (शोर सन्देश)। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा सत्र 2019-20 के अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर की सभी विषयों की परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में आज यहां राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत यू.जी.सी. द्वारा जारी निर्देश के पालन में विद्यार्थियों को प्रश्न प्रत्र ऑनलाइन (ई-मेल आदि) पर भेजने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय कोविड-19 की महामारी के संक्रमण को देखते हुए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया है। निर्णय लिया गया है कि प्रश्नों के उत्तर घर पर ही लिखने की समय-सीमा के साथ उत्तर भेजने की अंतिम तिथि निर्धारित की जाए। निर्धारित अंतिम तिथि तक विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन (निर्धारित ई-मेल आदि) अथवा परीक्षा केन्द्र पर स्पीड पोस्ट से पोस्ट करने का विकल्प दिया जाए। प्रेषित उत्तर पुस्तिका की पावती विद्यार्थी अपने पास सुरक्षित रखेंगे। किसी भी कारण से परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित अथवा जारी परीक्षाफल से असंतुष्ट विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने का एक अतिरिक्त अवसर दिया जाए। (इसके लिए स्थितियां सामान्य होने पर विश्वविद्यालयों द्वारा विशेष परीक्षा के आयोजन की व्यवस्था की जाए।) इसके तहत स्वाध्यायी विद्यार्थियों के लिए प्रथम, द्वितीय एवं अंतिम तीनों वर्ष की परीक्षाएं उपरोक्त पद्धति से आयोजित की जाएं। परीक्षा आयोजन के पूर्व सभी विद्यार्थियों के ई-मेल आदि की अधिकृत जानकारी संकलित कर ली जाए। परीक्षा आयोजन तिथि की सूचना पर्याप्त समय पूर्व दी जाए। व्यक्तिगत ई-मेल आदि के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों की वेबसाइट एवं स्थानीय समाचार पत्रों में सूचना जारी की जाए। प्रथमतः स्वशासी महाविद्यालयों में परीक्षा आयोजित की जाए तथा परीक्षा के आयोजन में कठिनाई हो तो उनका निराकरण करते हुए शेष महाविद्यालयों के लिए परीक्षा आयोजित की जाए। यथा संभव उपरोक्त परीक्षाओं का आयोजन माह सितम्बर 2020 तक पूर्ण किया जाए।
कोविड-19 के कारण विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया एवं क्लास रूम टीचिंग के बारे भी आवश्यक निर्णय लिया गया है। इसके तहत कक्षा 12वीं का स्टेट बोर्ड तथा सीबीएसई का परीक्षा परिणाम घोषित हो चुका है। अतएव यू.जी. प्रथम वर्ष की प्रवेश प्रक्रिया एक अगस्त 2020 से प्रारंभ की जाए तथा अन्य कक्षाओं में प्रवेश पूर्ववर्ती कक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात् 15 दिवस में पूर्ण किए जाएं। माह सितम्बर से चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ करते हुए कोविड-19 के संक्रमण की स्थितियां सामान्य होने की स्थिति में क्लासरूम शिक्षण प्रारंभ करने पर विचार किया जाए।

नई दिल्ली/रायपुर (शोर सन्देश)। केंद्र सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। यह फैसला कैबिनेट की बैठक के दौरान लिया गया है। इस बैठक में मोदी सरकार ने 34 साल बाद नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दी है। शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी (एनएचईआरए) या हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया तय किया है। इस फैसले के बाद यूजीसी व एचआरडी खत्म हो गया है। आज शाम इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया था कि मंत्रालय का मौजूदा नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया जाए। इस प्रस्ताव पर मोदी कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दी गई है। अब पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी, ताकि शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था को खत्म किया जा सके। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण 1986 में किया गया था और 1992 में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे। तीन दशक बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश करने के दौरान नई शिक्षा नीति की जल्द घोषणा करने की बात कही थी, जिसे मोदी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस साल बजट में शिक्षा के लिए 99 हजार 300 करोड़ तथा कौशल विकास के लिए 3000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के उप सचिव ने आज यहां बताया कि ओपन स्कूल की परीक्षायें इस वर्ष असाइन्मेंट पद्धति से सम्पन्न करायी जा रहीं हैं। जिन जिलों के परीक्षा केन्द्रों में लॉकडाउन नहीं है उनमें आज दिनांक 28 जुलाई तक कक्षा बारहवीं के 35.339 छात्रों को असाइन्मेंट कार्य का वितरण किया गया है, एवं 30438. छात्रों द्वारा असाइन्मेंट जमा किया गया हैं। जिस क्षेत्र के परीक्षा केन्द्र में लॉकडाउन लागू हो जाता है वहाँ असाइन्मेंट वितरण एवं उत्तरपुस्तिका संग्रहण का कार्य लॉकडाउन के बाद किया जावेगा। असाइन्मेंट वितरण 08 दिन किया जावेगा. लॉकडाउन हो जाने की स्थिति में जितने दिन वितरण हो चुका होगा,उतने दिन 08 दिन में घटा कर बचे हुये दिनों के लिये लॉकडाउन के बाद वितरण किया जायेगा, यही व्यवस्था उत्तरपुस्तिका संग्रहण के लिये भी की जावेगी, लॉकडाउन की अवधि उत्तरपुस्तिका संग्रहण के 02 दिनों की अवधि में शामिल नहीं होगी।कक्षा-दसवीं की परीक्षा के लिये पूर्व निर्धारित तिथि के अनुसार 04 अगस्त 2020 से 09 अगस्त 2020 के मध्य किया जावेगा। परीक्षार्थी जिस दिन असाइन्मेंट प्राप्त करेगा, उसे 02 दिन के भीतर परीक्षा केन्द्र में जमा करना अनिवार्य होगा। रविवार एवं अन्य अवकाश के दिनों में भी असाइन्मेंट प्राप्त कर जमा किया जा सकेगा।जो छात्र किसी कारणवश अपने परीक्षा केन्द्रों से असाइन्मेंट प्राप्त नहीं कर सकते हैं वे 17 अगस्त 2020 से 22 अगस्त 2020 के बीच राज्य कार्यालय (छ.ग.माध्यमिक शिक्षा मंडल परिसर, पेंशन बाडा, रायपुर) या छ.ग.राज्य ओपन स्कूल,रायपुर की वेबसाईट रू-ूूू.बहेवे.बव.पद से असाइन्मेंट डाउनलोड कर के ए-4 साईज के कागजों पर उत्तर लिख कर अपने परीक्षा केन्द्र में 22 अगस्त 2020 तक जमा कर सकेंगे।

00 अधिकतम शैक्षणिक सामग्री अपलोड करने वाले व्याख्याता है रूपेश तिवारी
रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वकांक्षी योजना पढ़ई तुंहर दुआर के अंतर्गत संचालित सीजी स्कूल डॉट इन वेबपोर्टल पर अधिकतम शैक्षणिक और पाठ्य सामग्री अपलोड करने के लिए विकासखंड अंबागढ़ चैकी जिला राजनांदगांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंघाभेडी के व्याख्याता एवं इस योजना के सहायक ब्लॉक नोडल अधिकारी रुपेश तिवारी नायक के रूप में चुने गए हैं। रुपेश तिवारी शिक्षा विभाग के इस पोर्टल में नायक के रूप में चयनित होने वाले अंबागढ़चैकी विकासखंड से प्रथम व राजनांदगांव जिले से द्वितीय शिक्षक हैं।। हिंदी के व्याख्याता रुपेश तिवारी उन शिक्षकों की श्रेणी में आते हैं जिन्होंने वर्तमान समय में वैश्विक कोरोना वायरस महामारी की चुनौतियों को स्वीकार कर अपने दृढ़ संकल्प से इस विषम परिस्थितियों में भी बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं होने दिया है। इन्होंने पढ़ई तुंहर दुआर अभियान हेतु सीजी स्कूल डॉट इन पर अधिकतम शैक्षणिक सामग्री अपलोड करने का कार्य किया है। इसके साथ ही इन्होंने सहायक ब्लॉक नोडल अधिकारी के रूप में पूरे विकासखंड में सिस्को वेबैक्स मीटिंग एप्प के माध्यम से प्रत्येक विद्यालय में ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित कराने के लिए विशेष प्रयास किया। इसके लिए व्याख्याता रूपेश तिवारी चैकी विकासखंड के संकुलों में ऑनलाइन मीटिंग व ट्रेनिंग आयोजित कर शिक्षकों की समस्याओं को दूर करते हुए उन्हें ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन क्लास लेने के लिए प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं। सहायक ब्लॉक नोडल अधिकारी की भूमिका का निर्वहन करते हुए भी वह स्वयं ऑनलाइन कक्षाएं लेकर विकासखंड के अन्य शिक्षकों के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं । व्याख्याता रुपेश तिवारी अपने साथी शिक्षकों को इस बात के लिये हमेशा प्रेरित करते रहते हैं कि जब वैश्विक महामारी कोरोना के कारण पुनः विद्यालय संचालित किए जाने पर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है तब हमें अपने शिक्षकीय कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं के द्वारा नियमित रूप से शिक्षा देते रहना होगा व शासन की मंशा के अनुरूप अधिक से अधिक बच्चों को इन ऑनलाइन कक्षाओं से जोड़कर पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम से लाभान्वित कराना होगा।। शिक्षक रुपेश तिवारी की इस उपलब्धि पर इस योजना से जुड़े जिला शिक्षा अधिकारी हेतराम सोम, जिला नोडल अधिकारी भूपेश साहू, जिला मीडिया प्रभारी सतीश ब्यौहरे, जिला मीडिया के विकासखंड प्रभारी गुफरान सिद्दीकी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी अर्जुन देवांगन, विकासखंड स्रोत समन्वयक मनोज मरकाम, ब्लॉक नोडल एस के धीवर, सहित सभी संकुल समन्वयक एवम समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं ने हर्ष व्यक्त किया है और उन्हें उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनायें दी है।

00 कॉलसेंटर भी बनेगा: टोल-फ्री नम्बर पर डायल कर किसी भी कक्षा की अध्ययन सामग्री मोबाइल या लैंडलाईन पर सुन सकेंगे
00 ‘डिजिटल टाऊन हॉल फॉर चिल्ड्रन‘ विषय पर वेबीनार
रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक एन्ड्रॉयड एप तैयार किया जा रहा है। इसमें सभी प्रकार की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होगी। इस एप को इंटरनेट के जरिए कोई भी शिक्षक या विद्यार्थी डाउनलोड कर सकेंगे और इसे कभी भी बिना इंटरनेट के ऑफलाईन देख सकेंगे। इस एण्ड्रॉयड एप को 15 अगस्त तक लांच किया जाना प्रस्तावित है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने यह जानकारी आज यूनीसेफ द्वारा आयोजित ‘डिजिटल टाऊनहॉल फॉर चिल्ड्रन‘ विषय पर आयोजित वेबीनार में दी। वेबीनार में पूर्व आईएएस एवं लैंग्वेज एण्ड लर्निंग फाउन्डेशन के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झींगरण और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख क्षेत्राधिकारी जॉब जकारिया भी शामिल हुए।
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने कहा कि ‘पढ़ई तुहंर दुआर‘ ऑनलाईन शिक्षा ही नहीं बल्कि बच्चों के द्वार तक शिक्षा पहुंचाने का एक माध्यम है। शिक्षा को बच्चों के द्वार तक पहुंचाने के लिए कई प्रकार के माध्यम हो सकते है। इस पर कार्य भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि राज्य स्तर से ही योजना तैयार हो, बल्कि शिक्षकों ने भी अच्छी-अच्छी योजना बनायी है, उसे राज्य में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की शुरूआत हुई तब सबके मन में एक ही तरीका सामने आया कि सीखने की प्रक्रिया को बरकरार रखने के लिए ऑनलाईन क्लास ही सबसे सशक्त माध्यम होगा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इसी वजह से सीजीस्कूलडॉटइन नामक पोर्टल बनाया गया, जिसके माध्यम से बच्चों की पढ़ाई प्रारंभ की जा सके। राज्य के पहुंचविहीन क्षेत्रों में जहां इंटरनेट की समस्या है, जिनके पास मोबाइल नहीं है, उनके लिए दूसरे विकल्पों पर भी कार्य प्रारंभ किया गया है। डॉ. शुक्ला ने कहा कि दूरस्थ अंचल और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले शिक्षकों ने अलग-अलग तरीके अपनाए, जिसे लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। उन्हें सहयोग और समर्थन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर बहुत से शिक्षक बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। डॉ. शुक्ला ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि हमें सबसे पहले ऑनलाईन पोर्टल को विस्तार दिए जाने की अवश्यकता है, ताकि उसमें सब प्रकार की पाठ्य सामग्री उपलब्ध करायी जा सके। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक एन्ड्रॉयड एप तैयार किया जा रहा है। इसमें सभी प्रकार की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होगी। इस एप को इंटरनेट के जरिए कोई भी शिक्षक या विद्यार्थी डाउनलोड कर सकेंगे और इसे कभी भी बिना इंटरनेट के ऑफलाईन देख सकेंगे। दूसरा बस्तर में एक पत्रकार के आईडिया पर काम करना शुरू किया है, जिसका नाम है ‘बुलटू रेडियो‘ अर्थात ब्लूटूथ के जरिए ऑडियो फाइल को ट्रांसफर करना। शिक्षा के अलावा अन्य जन जागरण के लिए उनके द्वारा हॉट बाजार में जहां भी किसी के पास इंटरनेट नहीं होता, उन्हें ब्लूटूथ के माध्यम से फाइल ट्रांसफर किया जाता है और जब आवश्यकता हो उस पाठ्य सामग्री को देख लेते है। इस प्रयोग को काफी सफलता मिल रही है।
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने कहा कि शीघ्र ही एक कॉलसेंटर बनाने जा रहे है, जिसमें कोई भी विद्यार्थी टोल-फ्री नम्बर पर डायल कर किसी भी कक्षा की कोई भी अध्ययन सामग्री मोबाइल अथवा लैंडलाईन में बिना इंटरनेट के सुन सकेंगे। यह सभी सामग्री एक स्थान पर रखी जाएगी जहां से यह सुविधा प्रदान की जा सकती है। बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए लाऊड स्पीकर का उपयोग ऐसे स्थानों पर पढ़ाई के लिए किया जा रहा है, जहां मोबाइल और इंटरनेट सेवा नहीं है। इन स्थानों पर फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए विद्यार्थी लाउड स्पीकर के जरिए सुनकर अपने घरो या उसके सामने बैठकर एक निश्चित समय में अध्ययन-अध्यापन का कार्य बिना किसी बाधा के कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प नहीं है, लेकिन एक अच्छा विकल्प सिद्ध हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग लोकल टैलेंट को बढ़ावा देने के लिए ऐसे शिक्षकों की पहचान कर रहा है जो वॉलिटिंयर्स के रूप में अपने आसपास के स्कूल के दायरे में आने वाले गांव में जाकर वहां पर समुदाय के बीच में बच्चों को बैठाकर पढ़ाएंगे और होमवर्क देंगे। वहां समुदाय के बीच से पढ़े-लिख वॉलिटिंयर्स नियुक्त करेंगे, जो बच्चों को शिक्षा अध्ययन में मार्गदर्शन देंगे।
लैंग्वेज एण्ड लर्निंग फाउन्डेशन के संस्थापक एवं कार्यकारी निर्देशक डॉ. धीर झींगरण ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई पहल और रणनीति देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि स्कूल बंद रहने तक बच्चों को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया से जोड़कर रखना है। यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख जॉब जकारिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अभी लॉकडाउन के दौरान विद्यार्थियों को ऑनलाईन शिक्षा उपलब्ध कराने का जो प्रयास किया गया है, वह सराहनीय और अनुकरणीय है।

रायपुर/अहमदाबाद गुजरात (शोर सन्देश) हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जब तक स्कूल न खुले तब तक प्राइवेट स्कूलों द्वारा फीस लेने पर रोक लगा दी है। इसके बाद गुजरात के सबसे बड़े निजी स्कूलों के संगठनों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ऑनलाइन शिक्षा बंद करने का फैसला किया है। हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ किया कि स्कूल प्रशासन तब तक फीस की मांग नहीं कर सकते, जब तक दोबारा स्कूल खुल नहीं जाते। हाईकोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए फैसला सुनाया कि दोबारा स्कूल खोलने पर ही प्रशासन फीस की मांग कर सकते हैं।
वहीं दूसरी तरफ गुजरात के प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपलों ने एक बैठक की। गुजरात हाईकोर्ट ने स्कूल फीस के मुद्दे पर अभिभावकों को राहत देते हुए फैसला सुनाया कि स्कूल को दोबारा खोलने तक प्रशासक फीस की मांग नहीं कर सकते। एक अन्य घटनाक्रम में, गुजरात के निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों की एक बैठक हुई और ऑनलाइन शिक्षा को बंद करने का फैसला किया गया है। ऑनलाइन शिक्षा को बंद करने को लेकर पर निजी स्कूल प्रबंधन संगठनों में मतभेद भी सामने आ गए। स्कूल प्रशासकों ने ऑनलाइन शिक्षा बंद न करने का निर्णय किया है| राजकोट के निजी स्कूल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के उपाध्यक्ष जतिन भारडे ने कहा कि राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य में स्कूल खुलने तक फीस नहीं लेने का प्रस्ताव पारित किया है। स्कूल प्रशासकों को इस पर आपत्ति है। क्योंकि फीस के बिना स्कूल प्रशासक शिक्षक, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों को वहन नहीं कर सकते। ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने में भी स्कूलों को काफी खर्च करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उनके संगठन से जुड़े 6000 स्कूलों ने छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा देना बंद करने का फैसला किया है| अहमदाबाद-वडोदरा-राजकोट-सूरत के अलावा, क्षेत्र के निजी स्कूल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कल से ऑनलाइन शिक्षा को रोकने का फैसला किया है। गुजरात स्टेट स्कूल प्रिंसिपल्स फेडरेशन के अध्यक्ष भास्कर पटेल ने कहा कि उनके संगठन के बोर्ड ने अभी तक ऑनलाइन शिक्षा बंद करने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहाकि हमारा संगठन का मानना है कि किसी भी परिस्थिति में शिक्षा का त्याग नहीं किया जाना चाहिए।

रायपुर (शोर सन्देश)। कोरोना का असर छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूल के टीचरों पर भी पड़ा है। प्राइवेट स्कूल प्रबंधन इनके वेतन में कटौती कर रहे हैं। किसी स्कूल में 35 फ़ीसदी तो किसी स्कूल में 60 फ़ीसदी तक वेतन कटौती की जा रही है। यह वेतन कटौती मार्च से ही जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर प्राइवेट स्कूल के टीचर्स का एक दल जिला शिक्षा अधिकारी से मिला। उन्होंने मांग की है कि प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा इस तरह से वेतन कटौती की जा रही है। ऐसे में उन्हें परिवार चलाने में दिक्कत हो रही है। कटौती मार्च से शुरू हुई थी, जिसका लॉकडाउन होने की वजह से उन्होंने विरोध नहीं किया था। इसी का फायदा उठाकर स्कूल प्रबंधन हर महीने कटौती करने लगे। जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों से कहा है कि वे इस मुद्दे पर प्राइवेट स्कूल संचालकों से बात करेंगे।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत के बाद अब राज्य गीत भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है जिसके तहत छत्तीसगढ़ का राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ भी छात्र गाया करेंगे। इसके लिए शासन ने विधिवत आदेश जारी कर दिए हैं। स्कूलों में ये कब से शुरू होगा ये फिलहाल अनिश्चित है। संयुक्त संचालक संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के सभी स्कूलों में राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ को प्रार्थना में शामिल किया जाना है। इस गीत को प्रार्थना में शामिल करने का उद्देश्य है कि राज्य गीत के बारे में स्कूली बच्चों को पता चले और प्रदेश के हर बच्चे को ये गीत याद हो।
बता दें कि इस गीत के रचियता डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा है। इस छत्तीसगढ़ी गीत को वर्ष 2019 में राज्य पत्र में प्रकाशित कर राज्य गीत का दर्जा दिया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीते साल साइंस कॉलेज मैदान में हुए राज्योत्सव में डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा रचित प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत ‘अरपा पैरी के धार महानदी हे अपार’ को प्रदेश का राज्यगीत घोषित किया था। इसके बाद अब इस राज्यगीत को राज्य शासन के महत्वपूर्ण शासकीय कार्यक्रम और आयोजनों के शुभारंभ में भी बजाया जाता है। 4 नवंबर को डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की जन्म जयंती मनाई जाती है। यह गीत लोक कलाकारों में बेहद लोकप्रिय है। लोक कलाकारों ने कई मंचों के माध्यम से पिछले कई वर्षों में इसकी प्रस्तुति दी है।