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शिक्षा

पीजी कोर्स बीच में छोड़ने वालों को नहीं देना होगा पेनल्टी, शिक्षा विभाग ने हटाया नियम

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में 2024 बैच की दो छात्राओं ने एमडी कोर्स बीच में ही छोड़कर चली गई हैं। उन्हें पेनल्टी के रूप में 20 से 25 लाख रुपए देने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पेनल्टी वाला प्रावधान ही हटा दिया। जबकि इस साल यह प्रावधान रखा है। दो छात्राओं के कोर्स छोड़ने से दूसरे छात्रों को नुकसान हुआ है, जो एडमिशन लेकर पढ़ाई कर सकते थे।

पीडियाट्रिक व बायो केमेस्ट्री की एक-एक छात्रा कोर्स बीच में ही छोड़कर चली गई हैं। कॉलेज ने उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया है। कोर्स छोड़ने का कारण छात्राओं ने व्यक्तिगत व वजन बढ़ने को बताया है। 2023 में भी पीडियाट्रिक की एक छात्रा ने पीजी की पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्हें कॉलेज में 25 लाख रुपए पेनल्टी के रूप में जमा करना पड़ा था। मार्कशीट समेत ओरिजनल दस्तावेज नहीं देने पर छात्रा ने हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई थी। तब हाईकोर्ट ने पेनल्टी जमा कर ओरिजनल दस्तावेज कॉलेज से लेने को कहा था। वहीं, पीएसएम की एक छात्रा ने दो साल बाद भी पेनल्टी जमा नहीं की है।

67 से 75 हजार रुपए हर माह स्टायपेंड: पीजी छात्रों को हर माह 67500 से लेकर 75 हजार रुपए स्टायपेंड दिया जाता है। इसमें कोई भी छात्र या छात्रा काउंसलिंग के बाद सीट नहीं छोड़ सकता। दरअसल, सीटें खाली होने से इसे दोबारा नहीं भरा जा सकता। इससे ये सीटें खाली ही चली जाती हैं। पीजी कोर्स बहुत महत्वपूर्ण है। इसे पास करने पर छात्र विशेषज्ञ डॉक्टर बनता है। एक-एक सीट के लिए मारामारी रहती है। वहीं, निजी कॉलेजों में एक साल की ट्यूशन फीस 8 से 10 लाख रुपए है। जबकि सरकारी में महज 20 हजार सालाना है। ऐसे में तीन साल के कोर्स की ट्यूशन फीस महज 60 हजार रुपए है। निजी व सरकारी कॉलेजों में स्टायपेंड समान दिया जाता है।

ब्रेकेज बॉन्ड के तहत कोर्स छोड़ने पर पेनल्टी पटाने का नियम है। पीडिया की छात्रा ने दावा किया था कि जब वह एडमिशन लिया, तब ब्रेकेज बॉन्ड का प्रावधान नहीं था। इसलिए उन्होंने पीजी सीट से इस्तीफा दिया है। ओडिशा की रहने वाली छात्रा ने पीडियाट्रिक फर्स्ट ईयर की सीट अचानक छोड़ दी थी। उन्होंने लंबी ड्यूटी के कारण नींद पूरी न होने व कई बातें पत्र में लिखीं थीं। उन्होंने ड्यूटी ज्यादा कराने का आरोप भी पत्र में लगाया था। डॉक्टरों की समझाइश भी काम नहीं आई और वह कॉलेज छोड़कर चली गई। विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि छात्रा को पीडियाट्रिक जैसे विषय में रुचि ही नहीं थी। वह डर्मटोलॉजी विषय में पीजी करने की इच्छुक है। दरअसल पीडियाट्रिक विभाग में इमरजेंसी ड्यूटी भी करनी पड़ती है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का ज्यादातर समय अस्पताल में ही बीतता है।

मेडिकल स्टूडेंट और डॉक्टर भी करेंगे रक्तदान, मरीजों को नहीं होगी ब्लड की कमी

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज संबद्ध आंबेडकर अस्पताल समेत सभी चिकित्सालय में अब डॉक्टर समेत स्टूडेंट्स नियमित रूप से ब्लड डोनेशन करेंगे। इससे जरूरतमंद मरीजों के लिए ब्लड की कमी नहीं होगी। कई बार गंभीर मरीजों को ब्लड मिलने में परेशानी होती है। नई पहल से ब्लड की कमी दूर होने की संभावना है।
राजभवन के पत्र के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग नियमित शिविर लगा रहा है। अब मेडिकल एजुकेशन से जुड़े कॉलेजों के विद्यार्थी नियमित रक्तदान करेंगे। इससे ब्लड बैंक में रक्त की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। सिकलसेल, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, ल्यूकेमिया, कैंसर के मरीज, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व डिलीवरी के दौरान महिलाओं को ब्लड ट्रांसयूजन की जरूरत पड़ती है। ब्लड की कमी न हो, इसके लिए राजभवन ने पहले ही हेल्थ साइंस विवि को पत्र लिखा था। डीन व प्राचार्यों को लिखे पत्र में छात्र-छात्राओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने को कहा है। शिविर लगाकर ब्लड एकत्रित किए जाएंगे।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में बचाव भी
ब्लड से जुड़ी बीमारी व बोन मेरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल व पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार नियमित अंतराल में ब्लड डोनेशन करने से खून साफ होने के साथ शरीर को नए खून बनाने का मौका मिलता है। कई कैंसर जैसे गंभीर बीमारियों से बचाव भी होता है। यह मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।
सिकलसेल, हीमोफीलिया के मरीजों को ब्लड की पूर्ति रक्तदान से होती है। यही नहीं नियमित रक्तदान करने से हार्ट अटैक की संभावना 88 फीसदी तक कम हो जाती है। हार्ट संबंधी बीमारी होने की संभावना भी 33 फीसदी घट जाती है। शरीर से ब्लड निकलने से 350 मिग्रा आयरन कम हो जाता है।

रिक्त डीएलएड–बीएड सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसलिंग शुरू

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ के निजी शिक्षा महाविद्यालयों में डीएलएड, बीएड, बीए–बीएड और बीएससी–बीएड की रिक्त सीटों को भरने के लिए अंतिम चरण की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थी 14 से 16 नवंबर शाम 5 बजे तक ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे।
पहले चरण के बाद बीएड में 1400, डीएलएड में 600 और बीए–बीएड व बीएससी–बीएड में करीब 24 सीटें रिक्त हैं। पूर्व में पंजीकृत लेकिन प्रवेश नहीं लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए पंजीयन निशुल्क रहेगा, जबकि नए अभ्यर्थियों को शुल्क जमा करना होगा।
अभ्यर्थी अपनी पसंद का एक कॉलेज ऑनलाइन चुन सकेंगे। अंतिम चरण की पहली सूची 18 नवंबर को जारी होगी, जिसमें 20 नवंबर तक प्रवेश लिया जा सकेगा। दूसरी सूची 21 नवंबर को जारी होगी, जिसके आधार पर 24 नवंबर तक प्रवेश मिलेगा। अंतिम सूची 26 नवंबर को आएगी और प्रवेश की अंतिम तिथि 27 नवंबर तय की गई है।

युक्तियुक्तकरण नीति से बदली चचरेल प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर — अब शिक्षा में दिख रहा नया उत्साह

13-Nov-2025
 रायपुर,।  ( शोर संदेश )  युक्तियुक्तकरण नीति एक ऐसी व्यवस्था है जिसका उद्देश्य स्कूलों और शिक्षकों के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसके तहत शिक्षकों को आवश्यकतानुसार विभिन्न स्कूलों में तैनात किया जाता है ताकि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी न हो और सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह नीति खासतौर पर उन ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में शिक्षा में सुधार लाने पर केंद्रित है, जहां पहले शिक्षकों की भारी कमी थी। 
विकासखंड बिलाईगढ़ के शासकीय प्राथमिक शाला चचरेल में युक्तियुक्तकरण नीति लागू होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में बहुत सुधार देखने को मिला है। कभी एकमात्र प्रधान पाठक के भरोसे संचालित यह विद्यालय अब दो शिक्षकों की उपस्थिति से नई ऊर्जा और उत्साह से भर गया है। विद्यालय में वर्तमान में 35 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिनकी उपस्थिति और रुचि दोनों में वृद्धि हुई है। पहले शिक्षकों की कमी के कारण न तो पढ़ाई सुचारू रूप से चल पा रही थी और न ही अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने में रुचि दिखा रहे थे। अब अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना से कक्षाओं का संचालन व्यवस्थित हुआ है और बच्चों की पढ़ाई में निरंतर सुधार हो रहा है।
पालक नोहर सिंह ने बताया कि पहले एक शिक्षक होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, पर अब तीन शिक्षक होने से बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगा है। उन्होंने शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब वे निश्चिंत होकर बच्चों को विद्यालय भेज रहे हैं। युक्तियुक्तकरण से बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए “सकारात्मक और दूरदर्शी निर्णय” बताया। 
वहीं ग्रामीण नरसिंह नाग ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद शिक्षण व्यवस्था में जो सुधार आया है, वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शिक्षक बच्चों को समर्पण भाव से पढ़ा रहे हैं और ग्रामीण भी समय-समय पर विद्यालय जाकर प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की यह पहल न केवल विद्यालय बल्कि पूरे गांव में शिक्षा के प्रति विश्वास और उम्मीद का संचार कर रही है।

शासकीय हाईस्कूल सिथरा की 24 छात्राओं को मिली साइकिलें

12-Nov-2025
रायुपर,  ( शोर संदेश )।  शासन की महत्वाकांक्षी निःशुल्क सरस्वती सायकल योजना अंतर्गत विकासखण्ड धरमजयगढ़ के शासकीय हाईस्कूल सिथरा में लोकसभा सांसद रायगढ राधेश्याम राठिया ने विद्यालय की 24 छात्राओं को साइकिल का वितरण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है जो ग्रामीण अंचल की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है।
इस अवसर पर सांसद राठिया ने छात्राओं को मेहनत, निष्ठा और ईमानदारी के साथ अध्ययन करते हुए जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह साधन है जो ग्रामीण अंचल की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है। उन्होंने उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे मेहनत कर अध्ययन कर समाज और देश का नाम रोशन करें। विद्यालय परिवार और विद्यार्थियों की मांग पर सांसद राठिया ने विद्यालय परिसर में साइकिल स्टैण्ड निर्माण के लिए 3 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। बालिकाओं ने साइकिल प्राप्त होने पर सांसद का आभार व्यक्त किया और बेहतर भविष्य के सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक, अभिभावक, प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।



 

शिक्षिका ने जन्मदिन पर बच्चों को करवाया स्नेहिल भोज, विद्यालय में छाया हर्ष का माहौल

12-Nov-2025
रायपुर ( शोर संदेश )।  प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतरापाली में उस समय हर्ष और उल्लास का वातावरण बन गया, जब विद्यालय की शिक्षिका अनिता सिंह ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर विद्यालय के सभी बच्चों और शिक्षकों को न्यौता भोज दिया। इस अवसर पर बच्चों को सामान्य मध्यान्ह भोजन के साथ-साथ केला, समोसा, क्रीम ब्रेड और मीठा लड्डू परोसा गया, जिससे सभी विद्यार्थियों के चेहरों पर प्रसन्नता झलक उठी। 
शिक्षिका ने अपने जन्मदिवस पर दिया न्यौता भोज
कार्यक्रम का आयोजन प्रधानमंत्री पोषण आहार योजना के अंतर्गत किया गया, जिसके माध्यम से बच्चों को अतिरिक्त पोषण प्रदान करने का भी उद्देश्य रहा। सूरजपुर जिले के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पतरापाली के विद्यालय परिवार ने इस प्रेरणादायी पहल की सराहना की। शिक्षक योगेश साहू ने शिक्षिका अनिता सिंह को जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, “इस प्रकार का मानवीय और स्नेहपूर्ण प्रयास न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है, बल्कि शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संबंध को भी सुदृढ़ करता है।” बच्चों ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए बहुत खास रहा। सभी ने शिक्षिका के प्रति आभार जताते हुए उन्हें दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की शुभकामनाएं दीं। विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएँ और छात्र-छात्राएं इस आयोजन में सम्मिलित हुए और कार्यक्रम को सफल बनाया।
 

ज्ञान का नया द्वार: कोरबा के स्कूलों में विद्यार्थियों तक रोज पहुंच रही खबरें

09-Nov-2025
रायपुर ( शोर संदेश )।  कोरबा जिले के स्कूलों में अब एक नई सुबह की शुरुआत होती है- हाथों में किताबों के साथ-साथ अखबार भी। यह बदलाव आया है जिला प्रशासन की पहल से, जिन्होंने विद्यार्थियों को समसामयिक घटनाओं से जोड़ने और करियर निर्माण में सहयोग देने के उद्देश्य से एक अभिनव कदम उठाया है। उन्होंने डीएमएफ फंड से सभी हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में न्यूज़ पेपर स्टैंड लगवाया है।
पहले स्कूलों में बच्चे केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब जब वे स्कूल के गेट से भीतर प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले न्यूज़ पेपर स्टैंड में सजे अखबारों पर उनकी नज़र जाती है। देश-दुनिया, राज्य और अपने जिले की खबरें पढ़ते हुए उनमें एक नई जिज्ञासा, नई दृष्टि और आत्मविश्वास का संचार होता है। पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम लेंगी के हाईस्कूल की छात्रा समीना कहती है कि “अब हमें सिर्फ किताबों से ही नहीं, बल्कि अखबार से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। देश-विदेश की खबरें पढ़कर समझ आता है कि बाहर की दुनिया कितनी बड़ी है और हम उसमें क्या बन सकते हैं।” समीना की सहपाठी सोनी मार्काे और कल्याणी भी हर सुबह स्टैंड पर लगे अखबार को पढ़ती हैं। वे बताती हैं कि इससे उन्हें परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है और उनका सामान्य ज्ञान भी बढ़ता है। वहीं, कोरबा ब्लॉक के ग्राम अजगरबहार के हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं की छात्रा आरती, ममता, सुनीता और लक्षमनिया बताती हैं कि “हम कॉलेज की पढ़ाई करना चाहती हैं। अखबार पढ़कर हमें पता चलता है कि आगे कौन-कौन से कोर्स हैं, कौन-से कॉलेज अच्छे हैं और देश में क्या नई योजनाएं चल रही हैं। यह हमारे लिए बहुत उपयोगी है।” इस छोटे से प्रयास ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के विद्यार्थियों में जागरूकता, आत्मविश्वास और भविष्य की सोच को जगाया है।‘‘ अब सुबह की घंटी सिर्फ स्कूल शुरू होने का संकेत नहीं देती वह यह भी बताती है कि ज्ञान का नया द्वार खुल चुका है।
जिला प्रशासन की यह पहल कोरबा जिले के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ विचार और दृष्टिकोण को समृद्धि भी दे रही है। यह कहानी बताती है कि अगर अवसर और संसाधन सही दिशा में लगाए जाएं, तो हर बच्चे में समाज को बदलने की ताकत होती है। यह केवल अखबार पढ़ने की पहल नहीं है, यह भविष्य गढ़ने की शुरुआत है।
 







 

युक्तियुक्तकरण नीति से विद्यार्थियों तक पहुँच रही शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ

08-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) प्रदेश सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति के तहत विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की पदस्थापना से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, लैंगा में हिंदी विषय के शिक्षक  गोरेलाल कंवर की नियुक्ति हुई है। विद्यालय में उनके आने के बाद से हिंदी विषय विद्यार्थियों के लिए रोचक और प्रेरणादायक बन गया है।
कंवर की शिक्षण शैली अत्यंत रोचक, जीवंत और प्रभावशाली है। वे गद्य, पद्य, व्याकरण और साहित्य के हर पहलू को बच्चों तक सरल और रचनात्मक ढंग से पहुँचाते हैं। नाट्य रूपांतरण, संवाद, कहानी, गीत और गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से वे बच्चों को सीखने में सम्मिलित करते हैं।
कक्षा 8 वीं के छात्रों ने बताया कि जब कंवर ने इतिहास विषय में तैमूर लंग के भारत आक्रमण से संबंधित पाठ का मंचन कराया, तो इतिहास जैसे विषय जीवंत हो उठा। बच्चों की आँखों में जिज्ञासा की चमक और सीखने का उत्साह देखने लायक था।
शिक्षक गोरेलाल कंवर के प्रयासों से अब हिंदी विषय विद्यार्थियों के लिए कठिन नहीं बल्कि मनोरंजक और ज्ञानवर्धक बन गया है। रस, छंद, अलंकार जैसे व्याकरण के अंश अब बच्चों को सहज लगने लगे हैं। छात्र-छात्राएँ — कु. अनुसुइया, अंश, रश्मि, कल्पना, महिमा और लवकेश — ने बताया कि अब उन्हें हिंदी पढ़ना आनंददायक लगता है और वे कविता पाठ, कहानी लेखन व भाषण जैसी गतिविधियों में भी भाग लेने लगे हैं।
कंवर केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बच्चों में अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। वे छात्रों को कहानी रचना, पत्र लेखन, कविता पाठ और भाषण देने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो रहा है।
विद्यालय के प्रधानपाठक एवं अभिभावकों ने राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति की सराहना करते हुए कहा कि विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षा की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। यह नीति शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ सही रूप में विद्यार्थियों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम सिद्ध हो रही है।






 

युक्तियुक्त करण से शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ सही रूप में पहुँच रही विद्यार्थियों तक

07-Nov-2025
कोरबा। ( शोर संदेश )  प्रदेश सरकार की युक्तियुक्त करण की नीति छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की दिशा में सार्थक प्रयास है। प्रकिया के तहत पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला लैंगा में हिंदी विषय के शिक्षक गोरेलाल कंवर की पदस्थापना हुई है। विद्यालय में उनके आने से हिंदी विषय बच्चों को रोचक और प्रेरणादायक लगने लगा है।
कंवर का शिक्षण शैली इतनी रोचक, जीवंत और प्रभावशाली है कि बच्चों का मन हिंदी विषय में रम गया है। चाहे कविता हो या गद्य, व्याकरण हो या साहित्य , वे हर पहलू को नाट्य रूपांतरण, संवाद, कहानी, गीत, या रचनात्मक शिक्षण शैली के माध्यम से बच्चों के मन में उतार देते हैं। कक्षा 8वीं में जब उन्होंने तैमूर लंग के आक्रमण से संबंधित गद्यांश पढ़ाया और मंचन के जरिए तैमूर और एक नन्हे बालक के संवाद को प्रस्तुत किया, तब बच्चों की आँखों में जिज्ञासा की चमक साफ दिखाई दी। इससे बच्चे इतिहास को अनुभव कर पाए। बच्चों को हिंदी की रस, छंद, अलंकार जैसे व्याकरण के अंश सरल लगने लगे हैं। साथ ही हिंदी साहित्य का इतिहास और व्याकरण के नियम की उन्हें गहनता से समझ आ रही है। कक्षा 8वीं के छात्र-छात्राएं कृ अनुसुइया, अंश, रश्मि, कल्पना, महिमा और लवकेश जैसे बच्चों ने बताया कि अब उन्हें हिंदी विषय पढ़ना मनोरंजन और ज्ञान“ का स्रोत लगता है। कंवर बच्चों को केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई तक सीमित नहीं रखते, वे उनमें अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास की भावना भी भरते हैं। बच्चों को पत्र लेखन, कहानी रचना, कविता पाठ और भाषण देने के लिए भी प्रेरित करते है, जिससे उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो रहा है।
विद्यालय के प्रधानपाठक और अभिभावकों ने राज्य सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि विषय शिक्षक की नियुक्ति से ही शिक्षा का असली उद्देश्य पूरा होता है। यह नीति शिक्षकों की विशेषज्ञता का लाभ सही रूप में विद्यार्थियों तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है।

 

पीएम श्री विद्यालय बना परिवर्तन की मिसाल: स्मार्ट क्लास से योग और समर कैंप तक, बच्चों का सर्वांगीण विकास

29-Oct-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )  पीएम श्री विद्यालय योजना के अंतर्गत पीएम शासकीय प्राथमिक शाला बुड़ार के चयन के बाद विद्यालय में अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। विद्यालय का वातावरण अब अधिक अनुशासित, बेहतर और तकनीकी रूप से सशक्त बन चुका है। विद्यालय में स्मार्ट क्लास एवं डिजिटल कक्षाओं की स्थापना से शिक्षण प्रक्रिया में आधुनिकता आई है। विद्यार्थी अब वीडियो, चित्र और इंटरैक्टिव माध्यमों से विषयों को आसानी से समझ रहे हैं, जिससे उनमें आत्मविश्वास और सीखने की रुचि बढ़ी है।
विद्यालय परिसर में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना ने विद्यालय को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक कदम सिद्ध हुआ है। ग्रीन स्कूल के तहत विद्यालय परिपर में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए जिससे विद्यालय का वातावरण हरा-भरा सुसज्जित हुआ। विद्यालय में योग शिक्षक की नियुक्ति के बाद विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। योगाभ्यास से बच्चों में एकाग्रता, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास हुआ है।
ग्रीष्मावकाश के दौरान समर कैम्प तथा शीतकाल में विंटर कैम्प के आयोजन से बच्चों को कला, खेल, विज्ञान, संगीत और व्यक्तित्व विकास से जुड़ने के अवसर प्राप्त हुए हैं। विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन एवं संगीत सामग्री की उपलब्धता से विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिला है। मंच पर प्रस्तुति देने से बच्चों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ है।
विद्यालय में भौतिक संसाधनों में वृद्धि होने से विद्यार्थियों को बहुत सारी सुविधाएं मिली है बच्चो को पीने के लिए शुद्ध व शीतल जल की उपलब्धता हुई है। बबजअ कैमरे लगने से विद्यालय की व विद्यार्थियों की सुरक्षा और भी अधिक मजबूत हुई है, जिससे पालको में निश्चिन्तता आई है और पालको का विश्वास बड़ा है। इन सभी प्रयासों से विद्यालय का वातावरण जीवंत, प्रेरणादायक और तकनीकी दृष्टि से समृद्ध बन गया है। पीएम श्री योजना के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बुढ़ार अब वास्तव में एक “आदर्श एवं मॉडल विद्यालय” के रूप में उभर रही है, जहाँ शिक्षा के साथ संस्कार, सृजनशीलता और आत्मनिर्भरता का समन्वय होता है। इसके साथ निजी विद्यालयों से बच्चो का पलायन पीएम श्री विद्यालय की ओर भी हो रहा है जो सबसे सुखद पहलू है।


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