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सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर साधारण किसान बने प्रगतिशील: महावीर पुषाम की सफल खेती की कहानी

29-Oct-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) महावीर पुषाम अब प्रगतिशील किसान के रूप में उभर कर आ रहे हैं। वे एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम, लगन और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से न सिर्फ अपनी खेती को लाभकारी बनाया, बल्कि अन्य किसानों को प्रेरित कर रहे हैं। महावीर पुषाम की मेहनत और विभागीय सहयोग से उनके खेतों में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने बीज और खाद के संतुलित उपयोग पर ध्यान दिया। पहले जहाँ वे 2 एकड़ में तिल, 2 एकड़ में रामतिल और 1 एकड़ में मूंगफली उगाते थे, अब उन्होंने सही बीज, उन्नत खेती तकनीक और उचित खाद का प्रयोग किया। इस बदलाव से उत्पादन लागत में भी कमी आई, और कुल आय में वृद्धि हुई। 
गुणवतायुक्त बीज और संतुलित खाद के उपयोग से बढ़ी पैदावार
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड रामचन्द्रपुर के ग्राम विमलापुर निवासी महावीर पुषाम कई वर्षों से खेती कर रहे हैं और लगभग पाँच एकड़ भूमि पर तिलहन और मूंगफली की फसल उगाते हैं। प्रारंभ में वे केवल अपनी पारंपरिक तकनीकों और अपने द्वारा संरक्षित बीजों का उपयोग करते थे। लेकिन समय के साथ उन्होंने समझा की पारंपरिक तरीके हर वर्ष बेहतर आय के साथ बढ़ोतरी नहीं ला सकते। महावीर की खेती में प्रारंभिक वर्षों में कई समस्याएँ थीं। वे बताते हैं कि उनके पास गुणवत्तायुक्त बीज नहीं थे और उन्होंने अपनी परंपरा के अनुसार बीजों का चयन किया। इससे उत्पादन सीमित था और कई बार फसल में घट-बढ़ होने लगी। तिल, मूंगफली और रामतिल की खेती में उन्हें केवल कुछ ही उत्पादन मिलता था, जिससे आय सीमित रहती थी। कृषि के आधुनिक तरीकों की जानकारी न होने के कारण लागत नियंत्रण और उत्पादन की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता था और महावीर केवल 55 से 60 हजार रुपये की आय अर्जित कर पाते थे।
आय बढी और आर्थिक स्थिति हुई मजबूत 
महावीर अपने गांव और आसपास के किसानों से बात की और जानकारी जुटाई। उसी दौरान उन्हें कृषि विभाग की राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना (एनएमईओ) के बारे में पता चला। कृषि विभाग से संपर्क करने के बाद उन्होंने योजना की विस्तार से जानकारी ली। विभाग ने उन्हें गुणवत्तायुक्त बीज, उन्नत कृषि तकनीकों और संतुलित खाद के उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया। उनकी आमदनी पहले लगभग 55-60 हजार रुपये से बढ़कर करीब 1 लाख रुपये हो गई। इस सफलता ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, साथ ही अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना दिया।
नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती को और अधिक लाभकारी बनाऊँगा
महावीर पुषाम का कहते हैं कि मैं कृषि विभाग की सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इच्छुक हूं। मेरी कोशिश है कि मैं नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती को और अधिक लाभकारी बनाऊँ और अपने अनुभव के माध्यम से अन्य किसानों को भी मार्गदर्शन दूं। महावीर कहते हैं सरकारी योजनाओं का सही जानकारी मिले तो कोई भी किसान अपने जीवन को बेहतर बना सकता है।

किसान हैं विकसित भारत की रीढ़, तिलहन उत्पादन से बढ़ेगी आत्मनिर्भरता : मंत्री टंकराम वर्मा

27-Oct-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सारंगढ़ कृषि उपज मंडी प्रांगण में ‘‘तिलहन कृषक मेला सह सम्मेलन’’ का आयोजन किया गया। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के अंतर्गत कृषि कार्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व, आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा शामिल हुए।      
मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर अग्रसर हैं। इस दिशा में दलहन-तिलहन का अधिक उत्पादन देश को खाद्य तेल के आयात से मुक्ति दिलाएगा और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करेगा।
इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी एवं मत्स्य विभाग द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन करते हुए हितग्राहियों, महिला स्व-सहायता समूहों और विभागीय अधिकारियों से उत्पादों एवं तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने किसानों को नई कृषि तकनीकें अपनाने, मृदा परीक्षण शिविरों में भाग लेने तथा कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि सारंगढ़ क्षेत्र की मिट्टी तिलहन उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। तिलहन नगदी फसल है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार किसानों के लिए घोषित अधिकांश वादों को पूरा कर चुकी है, जिनमें भूमिहीन कृषकों को 10 हजार रुपये की सहायता राशि एक प्रमुख उपलब्धि है।
कार्यक्रम में जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष  संजय भूषण पांडेय एवं कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों को संबोधित किया। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों और हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया तथा अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। 
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय, अपर कलेक्टर प्रकाश सर्वे, पूर्व विधायक केराबाई मनहर तथा कृषि, मत्स्य, उद्यानिकी एवं पशुधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

जिला स्तरीय किसान मेला : फसल विविधीकरण और जैविक खेती के नवाचारों से किसानों को मिला नया मार्गदर्शन

25-Oct-2025
अम्बिकापुर।  ( शोर संदेश ) कृषि विज्ञान केन्द्र अजिरम अम्बिकापुर में आज जिला स्तरीय किसान मेले का  आयोजन किया गया। मेले में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, पशुधन विकास विभाग एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं एवं नवीन तकनीकों की जानकारी हेतु स्टॉल लगाए गए, जिनका जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में किसानों ने अवलोकन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज, लूण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, जिला पंचायत सदस्य राधा रवि, नानमनी पैकरा, कृषि स्वामित्व समिति की अध्यक्ष श्रीमती दिव्या सिंह सिसौदिया, पूर्व हस्तशिल्प बोर्ड अध्यक्ष अनिल सिंह मेजर, कृषि मंत्री के प्रतिनिधि रवीन्द्र तिवारी, निगम पार्षद कमलेश तिवारी, कलेक्टर विलास भोसकर तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जिले के कृषकगण उपस्थित रहे।
कृषि वैज्ञानिकों ने मेले में फसल विविधीकरण के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक धान की खेती की तुलना में गन्ना, सब्जी एवं उद्यानिकी फसलों से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। वैज्ञानिकों ने उदाहरण देते हुए बताया कि जहां धान की खेती में एक रुपए की लागत पर लगभग 50 पैसे का लाभ मिलता है, वहीं गन्ने की खेती में एक रुपए की लागत पर 75 पैसे का लाभ प्राप्त होता है। वहीं शासन द्वारा संचालित किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि की राशि अब सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों को बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से बचने और मृदा की पोषकता बनाए रखने पर किसानों से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशुधन विकास विभाग के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को गति दी जा रही है, जिससे 90 प्रतिशत बछिया प्राप्त होने की संभावना बढ़ी है। उन्होंने मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी किसानों को प्रेरित किया गया।
सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया। लूण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि किसान मेला किसानों के लिए नवाचार एवं तकनीकी ज्ञान का मंच है। यहां विभिन्न विभागों द्वारा अपनी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है, जिससे किसानों को खेती-बाड़ी में आधुनिक तकनीक अपनाने का अवसर मिलेगा।
कलेक्टर विलास भोसकर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी 15 नवम्बर से धान खरीदी प्रारंभ होने जा रही है। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से बैंक संबंधी सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत की कमाई पसीना बहाकर अर्जित करते हैं, लेकिन कई बार बैंक धोखाधड़ी के मामलों में उनकी गाढ़ी कमाई चली जाती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपने बैंक पासबुक का स्टेटमेंट हर 15 से 30 दिनों में अवश्य जांचें, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या संदेहास्पद लेन-देन का तुरंत पता चल सके। उन्होंने ने कहा कि फ्रॉड का शिकार होने के बाद अपराधी भले ही जेल चला जाए, लेकिन किसान की मेहनत की कमाई वापस नहीं होती। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने बताया कि सभी बैंक प्रबंधकों को इस संबंध में निर्देशित किया गया है कि यदि किसी किसान को बैंक लेन-देन में समस्या होती है या किसी प्रकार की धोखाधड़ी की आशंका होती है, तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें ताकि शीघ्र कार्रवाई की जा सके।
वहीं कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत 5 किसानों को टमाटर के ग्राफ्टेड पौधे, 5 किसानों को सरसों बीज, 5 किसानों को स्वॉयल हेल्थ कार्ड एवं बीमा पॉलिसी प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 7 लाभार्थियों को आईस बॉक्स एवं मछली पकड़ने के जाल का वितरण किया गया। साथ ही जनप्रतिनिधियों ने ए हेल्प पुस्तक का विमोचन किया।
अंत में जिले के सर्वश्रेष्ठ पशुपालकों को सम्मानित किया गया। किसान मेले के माध्यम से किसानों को कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में नवाचार अपनाने तथा आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया गया।
कृषि विज्ञान केन्द्र अजिरमा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ संदीप शर्मा, कृषि विभाग उप संचालक पितांबर सिंह दिवान, उद्यानिकी विभाग से उप संचालक जयपाल सिंह मरावी, मत्स्य पालन विभाग उप संचालक सतीश अहिरवार, पशुधन विकास विभाग से डॉ रुपेश सिंह, समस्त विभाग के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
 

उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से किसान सायो बने आत्मनिर्भर, मिर्च फसल से बढ़ी आमदनी

19-Oct-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कृषि के साथ अन्य फसलों को लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के द्वारा किसानों को उद्यानिकी फसलों एवं साग सब्जी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो सके। उद्यानिकी विभाग के द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को उद्यानिकी विभाग द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्नत फसल उत्पादन करने के लिए बढ़ावा भी दिया जा रहा है।
जिससे प्रेरित होकर किसान पारंपरिक फसलों की जगह बागवानी एवं सब्जी की खेती की ओर आगे बढ़ रहे है। इसी तरह मनोरा विकासखण्ड के ग्राम केराकोना निवासी किसान सायो ने भी उद्यानिकी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन लेकर उद्यानिकी फसलों की ओर अग्रसर हुए हैं। जहां उद्यानिकी विभाग द्वारा उनके खेत का परिक्षण एवं परिस्थितियों की जांच कर उन्हें मिर्च खेती का सुझाव दिया गया, जिसका अनुसरण करते हुए सायो ने अपने खेत में मिर्च की खेती प्रारंभ की।
इस संबंध में किसान सायो ने बताया कि उद्यानिकी विभाग के द्वारा उन्हें मिर्च के महत्व एवं लाभ के विषय के बारे में तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने अपने कुल 3.6 हेक्टेयर की भूमि में से 0.3 हेक्टेयर भूमि पर मिर्च उत्पादन प्रारंभ किया। स्थानीय बाजार के साथ आस-पास की मंडियों में मिर्च की अच्छी मांग को देखते हुए विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने कार्य किया। जिस पर उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक फसलों की जगह मिर्च के उत्पादन से मुझे दुगुनी आमदनी हो रही है। अगले फसल वर्ष में मिर्च की फसल और अधिक रकबे में करने के लिए उत्साहित हूं।

धान खरीदी में नई पारदर्शिता: बायोमैट्रिक प्रणाली से होगा किसानों का सत्यापन

17-Oct-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )  समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बायोमैट्रिक पद्धति से की जाएगी। किसानों की सुविधा के लिए धान उपार्जन केन्द्रों में ऑफलाईन के अलावा मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाईन टोकन जारी किए जाएंगे। सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंध संचालक विपणन संघ एवं संचालक खाद्य विभाग के मार्गदर्शन में सरगुजा एवं दुर्ग संभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से धान खरीदी सम्पन्न कराने के लिए पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। अलग-अलग संभागों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम 17 अक्टूबर तक चलेगी। धान खरीदी का कार्य 15 नवंबर से प्रारंभ होगा।  
प्रशिक्षण में अधिकारियों ने बताया कि विपणन संघ मुख्यालय स्तर पर इन्टीग्रेटेड कन्ट्रोल एंड कमांड सेन्टर की स्थापना की जाएगी एवं मोबाईल एप्प के माध्यम से विभिन्न प्रकार के एलर्ट आदि भेजे जाएंगे। उपार्जन केन्द्रों में धान के उचित रखरखाव, किसानों की सुविधाओं के संबंध में व्यवस्था किये जाने हेतु उपार्जन केन्द्र प्रभारियों और इससे जुड़े अधिकारियों को प्रशिक्षण में जानकारी दी गई। उपार्जन केन्द्रों को गतवर्षों में दर्ज प्रकरणों एवं संभावित अनियमितताओं के आधार पर संवेदनशील तथा सामान्य में वर्गीकृत किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशील उपार्जन केन्द्रों में विशेष निगरानी रखी जावेगी। इन केन्द्रों में पृथक से नोडल अधिकारी भी नियुक्त किये जायेगें। जिनके द्वारा समय-समय पर उपार्जन केन्द्रों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा इन्टीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेन्टर से प्राप्त अलर्ट मैसेज के आधार पर उड़नदस्ता द्वारा तत्काल कार्यवाही की जाएगी। प्रदेश के सीमावर्ती उपार्जन केन्द्रों में पर्याप्त चेक पोस्ट की स्थापना की जा रही है, जिससे अवैध धान के आवक को रोका जा सके। 
जिलों में धान उपार्जन वर्ष 2025-26 का प्रशिक्षण कार्य 31 अक्टूबर 2025 तक जिला एवं अनुविभाग में पूर्ण करा लिया जावे। गतवर्ष की भाँति इस वर्ष भी बायोमेट्रिक आधारित धान उपार्जन किया जाएगा। वहीं 3 नवंबर से 6 नवंबर के मध्य उपार्जन केन्द्रों में ट्रायल रन का आयोजन होगा एवं 9 नवंबर से टोकन आवेदन किया जा सकेगा। धान खरीदी के लिए सीमांत एवं लघु कृषकों को 02 टोकन एवं दीर्घ कृषकों को अधिकतम 03 टोकन प्रदाय किया जा सकेगा। अतः सभी जिलों को 30 अक्टूबर तक धान उपार्जन से संबंधित सभी तैयारी पूर्ण करने हेतु निर्देशित किया गया है। 
प्रशिक्षण में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष समितियों को शार्टेज की मात्रा निरंक करने तथा शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सुचारू रूप से धान उपार्जन पूर्ण करने पर नियमानुसार इन्सेटिव का भी प्रावधान रखा गया है। भारत सरकार द्वारा उपार्जन केन्द्रों के स्वमूल्यांकन हेतु उपलब्ध पोर्टल पीसीएसएपी में उपार्जन केन्द्रों द्वारा धान खरीदी के संबंध मे आवश्यक व्यवस्था पूर्ण कर लेने के उपरांत प्रविष्टि करनी होगी। प्रविष्टि के आधार पर एल-4 ग्रेडिंग पाये जाने पर ही इन्सेटिव की पात्रता उप समिति को होगी। समितियों में डाटा एन्ट्री आपरेटरों का नियोजन 06 माह के लिए समितियों के माध्यम से किये जाने का प्रावधान इस वर्ष की पॉलिसी में किया गया है। ऐसी समितियां जहां अनियमितताएं पाई गई हो, वहां के डाटा एन्ट्री आपरेटरों का नवीन नियोजन किये जाने के निर्देश दिए गये है। 






 

 


एनईपी-2020 नए छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम — राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा

17-Oct-2025
रायपुर ( शोर संदेश )  राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020)  के प्रभावी क्रियान्वयन विषय आयेाजित कार्यशाला केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि नए छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 के अनुरूप भारत को विकसित एवं समृद्ध राष्ट्र बनाने में नई शिक्षा नीति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को व्यावहारिक, कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति से छत्तीसगढ़ राज्य में तकनीकी शिक्षा को नई ऊँचाइयाँ मिले
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं इस विषय पर मार्गदर्शन के उद्देश्य से आज रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला तकनीकी शिक्षा विभाग एवं स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई।
मंत्री वर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की शिक्षा व्यवस्था को 21 वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अधीनस्थ तथा स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 से तकनीकी शिक्षा को नई दिशा मिली है, जिसमें कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को विशेष प्राथमिकता दी गई है। मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और इंडस्ट्री लिंक्ड करिकुलम जैसी व्यवस्थाएं शिक्षा को अधिक लचीला और उपयोगी बना रही हैं। श्री वर्मा ने कहा कि कोई भी नीति या योजना तभी सफल होती है जब हम सब मिलकर उस पर कार्य करें। उन्होंने शिक्षकों को परिवर्तन के वास्तविक वाहक बताते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी से ही नीति के उद्देश्यों की पूर्ति संभव है। 
मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार और कौशल विकास को प्रायोगिक स्तर पर सम्मिलित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों और संस्थानों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को प्रयोग, अनुसंधान और उद्यमिता के लिए प्रेरित करें, ताकि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 के माध्यम से तकनीकी शिक्षा का ढांचा अधिक लचीला, उद्योगोन्मुखी और समकालीन बनाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट और इंडस्ट्री लिंक्ड करिकुलम जैसी सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा।
कार्यशाला में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राध्यापकगण, तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में साझा समझ, समन्वय और नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण आवश्यक है, ताकि छत्तीसगढ़ राज्य में तकनीकी शिक्षा को नई ऊँचाइयाँ मिल सकें।














 

आकाशीय बिजली से सुरक्षा और मौसम की सटीक जानकारी अब मोबाइल पर—‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ ऐप बने ग्रामीणों के सहायक

17-Oct-2025
रायपुर ( शोर संदेश ) दामिनी (Damini) भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक मोबाइल ऐप है जो लोगों को आकाशीय बिजली गिरने से पहले सचेत करता है, जिससे जान-माल की हानि को कम किया जा सके। यह ऐप मौसम विभाग के उपकरणों जैसे इसरो सैटेलाइट और रडार सेंसर का उपयोग करता है और उपयोगकर्ता के स्थान के 20-40 किलोमीटर के दायरे में बिजली गिरने से पहले अलर्ट भेजता है। इसी प्रकार मेघदूत ऐप एक मोबाइल एप्लिकेशन है जो किसानों को मौसम-आधारित कृषि सलाह देता है। यह ऐप किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान, तापमान, वर्षा और आर्द्रता जैसी जानकारी के साथ-साथ फसल की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक सलाह प्रदान करता है।
भारत सरकार के दामिनी एप एवं मेघदूत एप के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए  हैं। प्रदेश में आए दिन आकाशीय बिजली की घटना घटित होने के कारण अधिक संख्या में जन एवं पशु हानि की सूचना प्राप्त होती है। दामिनी एप के माध्यम से आकाशीय बिजली का पूर्वानुमान में आवश्यक तैयारी, उपाय आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसी तरह मेघदूत एप मुख्य रूप से मौसम पूर्वानुमान (तापमान, वर्षा की स्थिति, हवा की गति एवं दिशा इत्यादि)से संबंधित है, जिससे किसान अपने क्षेत्र की मौसम से संबंधित पूर्वानुमान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 
आपदा के समय नागरिकों को तत्काल सहायता पहुँचाने हेतु जारी टोल फ्री आपदा सहायता नंबर 1070 के प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। एप के उपयोग के संबंध में जिला, तहसील तथा ग्रामों में निवासरत पटवारी, सरपंच, सचिव, शासकीय शिक्षक, आशा कार्यकर्ता के माध्यम से वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार तथा कोटवार के द्वारा मुनादी करवाकर मोबाइल फोन पर डाउनलोड करवाने के लिए जनसामान्य को जागरूक किया जाएगा।
मौसम विभाग में मेघदूत नाम का एक ऐप विकसित किया गया है जो किसान की फसलों का सुरक्षा कवच साबित हो रहा है। मेघदूत ऐप डिजिटल इंडिया के तहत किसानों को तकनीक से जोडने के लिए भारत सरकार द्वारा लांच किया गया है। इसका उपयोग बेहद सरल है, इसके माध्यम से मौसम की जानकारी के आधार पर किसानों को फसल जोखिम प्रबंधन से संबंधित सलाह मिलती है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से किसानों को डाउनलोड करना होगा और फिर अपने मोबाइल नंबर से पंजीकरण करके मौसम की जानकारी का अलर्ट पा सकते हैं।
दामिनी एपके माध्यम से किसानों को आकाशीय बिजली से बचाव के तरीकों के संबंध में आधे घंटे पहले ही सूचना उपलब्ध हो जाएगी। इस एप पर रजिस्ट्रेशन करने के उपरांत किसान की लोकेशन के अनुसार उस स्थान से 40 किलोमीटर के दायरे में आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी के बारे में ऑडियो संदेश एवं एसएमएस के माध्यम से अलर्ट मिलेगा।


















 

 


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के लिए ऐतिहासिक धान खरीदी नीति घोषित

16-Oct-2025
रायपुर  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की विस्तृत नीति घोषित की है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के हितों और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
खाद्य विभाग की सचिव रीना कंगाले ने जानकारी दी कि धान की खरीदी 3100 प्रति क्विंटल की दर पर की जाएगी। धान उपार्जन का कार्य 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। इस वर्ष भी प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा। 
धान खरीदी का सम्पूर्ण कार्य छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) के माध्यम से किया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली हेतु चावल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की नोडल एजेंसी छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड होगी।धान खरीदी केवल उन्हीं प्राथमिक कृषि साख समितियों और लेम्पस के माध्यम से होगी जो मार्कफेड के कम्प्यूटरीकरण कार्यक्रम से जुड़ी होंगी।
प्रदेश के सभी जिलों में विगत वर्ष संचालित 2739 खरीदी केन्द्रों और नए स्वीकृत केन्द्रों के माध्यम से खरीदी होगी। इसके साथ ही 55 मंडियों और 78 उपमंडियों का उपयोग धान उपार्जन केन्द्र के रूप में किया जाएगा।
धान खरीदी के लिए आवश्यक साख-सीमा की व्यवस्था मार्कफेड द्वारा राज्य शासन के निर्देशानुसार की जाएगी, ताकि किसानों को समय पर भुगतान में कोई विलंब न हो।
प्रदेश में धान उपार्जन प्रक्रिया पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत एवं पारदर्शी होगी। किसान अपने निकटस्थ समितियों में पंजीकरण कर एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से धान विक्रय कर सकेंगे। पोर्टल पर ऋण पुस्तिका आधारित फार्म आईडी से खरीदी की अनुमति दी जाएगी। 
भारत सरकार कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टैक पंजीयन आईडी के आधार पर एकीकृत किसान पंजीयन पोर्टल में कराए पंजीयन फार्मर आईडी से होगा किसान लिंकिंग खरीदी एवं समिति में एग्रीस्टैक पंजीयन होने से समिति में ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता नहीं होगी।
धान खरीदी प्रक्रिया में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को जारी रखा गया है, जिससे पारदर्शिता और वास्तविक किसान की पहचान सुनिश्चित की जा सके। केवल किसान स्वयं, या उनके माता-पिता, पति/पत्नी, या पुत्र/पुत्री ही धान विक्रय कर सकेंगे। विशेष परिस्थितियों में एसडीएम द्वारा प्रमाणित “विश्वसनीय व्यक्ति” को अधिकृत किया जा सकेगा।
धान खरीदी के लिए किसानों को टोकन जारी कर नियंत्रित और व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सीमांत व लघु किसानों को दो टोकन और दीर्घ किसानों को तीन टोकन दिए जाएंगे। अंतिम दिन नई पर्ची जारी नहीं होगी और शाम 5 बजे तक पहुँचे धान की खरीदी उसी दिन की जाएगी।
धान की खरीदी 50:50 अनुपात में नये और पुराने जूट बोरे (Gunny Bags) में की जाएगी। नये जूट बोरे मार्कफेड द्वारा जूट कमिश्नर, कोलकाता से क्रय किए जाएंगे। पुराने बारदानों को उपयोग योग्य बनाकर नीले रंग में “Used Bag allowed for KMS 2025-26” का स्टेंसिल लगाया जाएगा।
सभी उपार्जन केन्द्रों में कांटे-बांट का विधिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसानों को पारदर्शी प्रक्रिया का भरोसा दिलाने के लिए सत्यापन प्रमाणपत्र खरीदी केन्द्रों पर प्रदर्शित किए जाएंगे। धान की नमी 17% से अधिक नहीं होनी चाहिए। हर केन्द्र पर आर्द्रतामापी यंत्र उपलब्ध रहेंगे।
धान के संग्रहण हेतु ऐसे केन्द्र चुने जाएंगे जो ऊँचे एवं जलभराव-रहित हों। सभी केन्द्रों में पॉलिथीन कवर, सीमेंट ब्लॉक, और ड्रेनेज सुविधा अनिवार्य रूप से होगी ताकि बारिश में धान सुरक्षित रहे।
किसानों के खाते में भुगतान पीएफएमएस सिस्टम के माध्यम से सीधे किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि राशि केवल किसान के खाते में ही अंतरण हो; किसी अन्य व्यक्ति के खाते में भुगतान नहीं किया जाएगा।
हर उपार्जन केन्द्र में कम्प्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, और नेटवर्क सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। डाटा-एंट्री ऑपरेटरों का नियोजन 6 माह के लिए ₹18,420 प्रतिमाह के मानदेय पर किया जाएगा। सभी खरीदी केन्द्रों के डाटा का अपलोडिंग 72 घंटे के भीतर अनिवार्य किया गया है।
धान खरीदी प्रारंभ होने से पूर्व सभी केन्द्रों का निरीक्षण, उपकरणों की जांच और सॉफ्टवेयर ट्रायल रन 31 अक्तूबर तक पूरा किया जाएगा। एनआईसी और मार्कफेड की टीम द्वारा यह तैयारी सुनिश्चित की जाएगी।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26: धान खरीदी की उन्नत व्यवस्था—ट्रायल रन, प्रशिक्षण, गुणवत्ता व पर्यवेक्षण के सख्त प्रोटोकॉल लागू
राज्य शासन ने समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया को और पारदर्शी, तकनीकी एवं जवाबदेह बनाने हेतु नए चरण की विस्तृत व्यवस्थाएँ लागू की हैं। मार्कफेड के नेतृत्व में प्रशिक्षण, ट्रायल-रन, गुणवत्ता-निगरानी, भंडारण-परिवहन, नियंत्रण कक्ष और बीमा से जुड़ी स्पष्ट समयसीमाएँ तय की गई हैं।
मार्कफेड द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार धान उपार्जन से जुड़े सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को कम्प्यूटरीकरण का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिलाया जाएगा। प्रशिक्षण में खरीदी सॉफ्टवेयर, भुगतान प्रविष्टि, गुणवत्ता/नमी एंट्री, टोकनिंग व PFMS प्रक्रियाएँ शामिल रहेंगी।
जिले के प्रत्येक धान उपार्जन और संग्रहण केन्द्र में 3 से 6 नवंबर 2025 तक ट्रायल-रन होगा। सभी स्वीकृत केन्द्रों में 31 अक्तूबर 2025 तक कम्प्यूटरीकरण का कार्य पूर्ण कर ट्रायल-रन में शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
भारत सरकार के निर्देशानुसार PCSAP (Procurement Centers Self-Assessment Portal) पर खरीदी केन्द्रों की ग्रेडिंग हेतु जारी SOP का पालन अनिवार्य रहेगा, जिससे केन्द्र-वार प्रदर्शन की नियमित स्वयं-मूल्यांकन और निगरानी संभव होगी।
भारत सरकार की FAQ विनिर्दिष्टियों और कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था पर FCI/NIC के साथ संभाग-स्तरीय प्रशिक्षण कराए जाएंगे। इसके बाद उपखंड-स्तर पर समितियों के अध्यक्ष/प्राधिकृत अधिकारी, प्रबंधक, मार्कफेड/राजस्व अमला (निरीक्षक/पटवारी) को प्रशिक्षण दिया जाएगा। अनुविभाग-स्तरीय प्रशिक्षण 25 अक्तूबर 2025 तक पूर्ण होगा।
गुणवत्ता नियंत्रण की दो-स्तरीय समितियाँ संग्रहण केंद्र स्तर पर और समिति स्तर पर कार्य करेंगी। संग्रहण केन्द्र-स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में गठित दल निगरानी करेगा और आवश्यकता पर ही धान को रिजेक्ट घोषित करेगा—प्रभारी अपने स्तर पर अमान्य नहीं कर सकेंगे।
समिति-स्तर पर अध्यक्ष/प्राधिकृत अधिकारी, सरपंच, कलेक्टर नामित प्रतिनिधि और प्रभारी मंत्री द्वारा अनुमोदित 02 जनप्रतिनिधियों (राइस मिलर नहीं) की समिति केवल पंजीकृत किसानों से FAQ अनुरूप धान खरीदी सुनिश्चित करेगी।
किसानों को भुगतान केवल पीएफएमएस के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में होगा। मार्कफेड खरीदी अवधि में समर्थन मूल्य, प्रासंगिक व्यय और भंडारण/सुरक्षा व्यय की अग्रिम राशि समितियों को उपलब्ध कराएगा; प्रथम प्राथमिकता किसानों के भुगतान को ही रहेगी और मद-वार व्यय की कम्प्यूटर एंट्री अनिवार्य होगी।
भंडारण केन्द्रों पर कैप-कवर, ड्रेनेज सामग्री, नमी-मापी (कैलिब्रेशन सहित) और जहाँ संभव हो धर्मकांटा की व्यवस्था रहेगी। खरीदी केन्द्रों में संचित समस्त धान का 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य उठाव कराया जाएगा। सुरक्षित भंडारण हेतु विभाग का SOP लागू रहेगा।
परिवहन दरें राज्य-स्तरीय समिति की अनुशंसा के अनुसार होंगी; चावल का परिवहन-दर भी धान के परिवहन-दर पर आधारित रहेगा। केन्द्र-वार बफर-लिमिट संयुक्त दल के भौतिक परीक्षण से कलेक्टर द्वारा निर्धारण कराई जाएगी। त्वरित निराकरण हेतु अधिक क्षमता वाले जिलों/मिलर्स से पूर्व-संलग्नीकरण किया जाएगा और जहाँ संभव हो सीधा मिलर्स को उठाव बढ़ाया जाएगा।
पड़ोसी राज्यों से धान की अनधिकृत आमद रोकने सीमाई चेकिंग दल तैनात होंगे। 30 अप्रैल 2026 तक अन्य राज्यों से धान का आयात संचालक (खाद्य) की अनुमति से ही होगा।
पंजीकृत मिलों द्वारा समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया से होगी। विकेन्द्रीकृत उपार्जन योजनांतर्गत PDS हेतु चावल का उपार्जन छ.ग. स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन करेगा; सरप्लस चावल एफसीआई को प्रदाय किया जाएगा।
धान उपार्जन के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु प्रत्येक जिले में प्रभारी सचिव को जिम्मेदारी दी जाएगी। राज्य व जिला-स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित होंगे। शिकायतों के लिए कॉल सेंटर: 1800-233-3663 प्रदर्शित रहेगा, शिकायत का निवारण 3 दिवस में कराया जाएगा। प्रत्येक केन्द्र/समूह-केन्द्र के लिए नोडल अधिकारी तैनात होंगे। संवेदनशील केन्द्र कलेक्टर के प्रस्ताव पर अधिसूचित कर वहाँ वरिष्ठ अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाएगी। अभिलेख-प्रपत्रों का एकरूप मुद्रण मार्कफेड कराएगा।
धान खरीदी की एंड-टू-एंड निगरानी और रिसाइक्लिंग रोकथाम हेतु मार्कफेड मुख्यालय में इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर स्थापित होगा (व्यय राज्य शासन वहन करेगा)। बैंक-राशि परिवहन के दौरान आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया जाएगा। धान और उपार्जन केन्द्रों में कार्यरत समस्त व्यक्तियों का बीमा मार्कफेड कराएगा (आवश्यक विवरण 31 अक्तूबर 2025 तक उपलब्ध कराना होगा)। समितियाँ/बैंक/मार्कफेड द्वारा खरीदी केन्द्रों का मिलान 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा।
पारदर्शिता, जवाबदेही और किसान हित सर्वोपरि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के हर अन्नदाता को उसके परिश्रम का पूरा मूल्य मिले,  यही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य शासन ने इस बार भी यह सुनिश्चित किया है कि खरीदी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, बायोमेट्रिक-आधारित और तकनीकी रूप से मजबूत हो। किसानों को समय पर भुगतान, गुणवत्तायुक्त प्रक्रिया और निष्पक्ष अवसर मिलना इस नीति का मूल उद्देश्य है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि हर अन्नदाता को उसके परिश्रम का पूरा मूल्य समय पर मिले—यही हमारी सर्वोच्च प्रतिबद्धता है।

जशपुर बना राज्य का पहला जिला, जहाँ 744 गांवों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण पूरा

16-Oct-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जशपुर जिले के सभी तहसीलों में एग्रीस्टैक परियोजना अंतर्गत डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसके तहत जिले के कुल 744 गांवों के 4 लाख 3 हजार से अधिक खसरों में डीसीएस के माध्यम से तथा शेष खसरों में मैन्युअल गिरदावरी कर फसलों की ऑनलाइन प्रविष्टि की गई है। इसका उद्देश्य भूमि पर लगी फसल एवं उसके क्षेत्रफल का सटीक आंकलन कर पारदर्शिता एवं उत्पादकता का अनुमान सुनिश्चित करना है। डीसीएस एवं मैन्युअल गिरदावरी से प्राप्त डाटा का उपयोग राज्य शासन द्वारा धान खरीदी सहित अन्य कृषि योजनाओं में किया जाएगा। विशेष अभियान के तहत चलाए गए सर्वे कार्य में सर्वेक्षण कर्ताओं द्वारा किसानों के खेतों में पहुंचकर मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से किस रकबे में कौन सी फसल लगाई गई है, इसकी जानकारी ऑनलाइन अपलोड की गई।
किसान अपने गांव का गिरदावरी डाटा राजस्व विभाग के वेबसाइट में तथा भुइयां पोर्टल के माध्यम से मैन्युअल गिरदावरी का डाटा देख सकते है। यदि किसी किसान को डीसीएस अथवा मैन्युअल गिरदावरी के डाटा में त्रुटि दिखाई देती है, तो वे संबंधित तहसीलदार के समक्ष लिखित आवेदन देकर दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जाएगा।
इसके तहत मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से सीधे खेत से डाटा एकत्र करने हेतु डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली स्थापित की गई। यह प्रणाली प्रत्येक कृषि भूखंड की वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे सटीक उत्पादन अनुमान लगाया जा सकेगा। 
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप एग्रीस्टैक विकसित किया गया है, जो किसानों के डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करता है। किसानों का अपने डेटा पर पूरा नियंत्रण होता है, जिसे केवल उनकी सहमति से अधिकृत संस्थाओं के साथ साझा किया जाता है। एग्रीस्टैक के माध्यम से सुरक्षित एपीआई और टोकन आधारित प्रमाणीकरण से डेटा तक नियंत्रित पहुंच सुनिश्चित की गई है।
जिन किसानों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, उनके लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), कृषि सखियों एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से पंजीयन और सेवा प्राप्ति की सुविधा दी गई। जिले में विशेष शिविरों का आयोजन भी किया गया, ताकि कोई भी किसान एग्रीस्टैक के लाभ से वंचित न रहे। डिजिटल क्रॉप सर्वे से जिले में गिरदावरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है तथा किसानों को धान खरीदी, फसल बीमा और अन्य योजनाओं के लिए पात्रता की पुष्टि में सुविधा मिल रही है।

छत्तीसगढ़ की धरती से महाराष्ट्र की रसोई तक — जयवती की मेहनत से टमाटर बना समृद्धि का प्रतीक

14-Oct-2025
रायपुर ( शोर संदेश ) टमाटर की खेती से कई किसान परिवारों ने आत्मनिर्भरता हासिल की है, जिनमें से कुछ ने इसे सफलतापूर्वक एक लाभदायक व्यवसाय बना लिया है। यह खेती, खासकर जब उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों और आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाता है, अच्छी आय प्रदान कर सकती है और परिवार के लिए वित्तीय स्थिरता ला सकती है। कोरिया जिले के सोनहत विकासखण्ड के ग्राम बसवाही की जयवती आज क्षेत्र की उन प्रेरक महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर अपनी पहचान बनाई है। जयवती ने बताया ‘मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि कोरिया की धरती पर उगाई गई टमाटर महाराष्ट्र तक पहुंचेंगी, लेकिन यह सच है।
जयवती ‘चमेली स्व सहायता समूह’ से जुड़ी हैं और अपने पति गोपाल चेरवा के साथ मिलकर तीन एकड़ भूमि में टमाटर की खेती करती हैं। उनके पति धान की खेती के साथ-साथ अन्य कृषि कार्यों में भी उनका सहयोग करते हैं। जयवती बताती हैं कि टमाटर की पैदावार अच्छी होने से अब उनकी उपज बिलासपुर, रायपुर से लेकर महाराष्ट्र तक पहुंच रही है। सालभर में करीब तीन लाख रुपये की आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। 
जयवती ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं  बेटी कक्षा छठवीं में और बेटा कक्षा बारहवीं में अध्ययनरत है। अब वे बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पूरी निष्ठा से सहयोग करने का संकल्प रखती हैं।
निश्चित ही जयवती जैसी महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रही हैं।










 


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