ब्रेकिंग न्यूज

किसान

डिजिटल क्रॉप सर्वे से खेत-खेत दर्ज हो रही फसल की वास्तविक जानकारी, धान खरीदी की राह होगी आसान

26-Aug-2026
रायपुर( शोर संदेश ) किसानों की फसलों की वास्तविक एवं अद्यतन जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज करने के उद्देश्य से बलरामपुर जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य तेजी से जारी है। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में राजस्व अधिकारियों एवं सर्वे टीम द्वारा खेतों तक पहुंचकर मौके पर बोई गई फसल का सत्यापन किया जा रहा है और उसकी जानकारी डिजिटल एप में दर्ज की जा रही है।
डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान सर्वे टीम खेत में मौजूद फसल का प्रत्यक्ष अवलोकन कर फसल का सत्यापन करती है। इसके बाद संबंधित खेत में बोई गई फसल की फसलवार जानकारी एप के माध्यम से डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जा रही है। कलेक्टर के निर्देशन में राजस्व अधिकारी भी फील्ड में पहुंचकर सर्वे कार्य की प्रगति का निरीक्षण कर रहे हैं तथा आवश्यकतानुसार मौके पर सत्यापन सुनिश्चित किया जा रहा है।
डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से जिले में फसलों की वास्तविक और फसलवार जानकारी उपलब्ध होगी। इससे कृषि क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों को अधिक सटीक एवं अद्यतन बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और फसल आधारित नीतियों के लिए विश्वसनीय डिजिटल डाटा उपलब्ध हो सकेगा।
डिजिटल रूप से दर्ज फसल संबंधी जानकारी आगामी धान खरीदी व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में सहायक होगी। खेत में वास्तव में कौन-सी फसल बोई गई है, इसकी अद्यतन जानकारी उपलब्ध होने से धान खरीदी से संबंधित प्रक्रियाओं को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे टीम के खेत पर पहुंचने पर सही फसल की जानकारी उपलब्ध कराएं और सर्वे कार्य में आवश्यक सहयोग करें। किसानों के सहयोग से उनके खेत का डिजिटल रिकॉर्ड सही एवं अद्यतन दर्ज किया जा सकेगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे किसानों की फसल संबंधी वास्तविक जानकारी को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने के साथ कृषि व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 


जैविक खेती की ओर बढ़ा जीपीएम, 160 पंचायतों में तैयार किए गए जीवामृत मॉडल फार्म

25-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) ।  राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर किसानों को जागरूक कर रही है। कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर जैविक खेती के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिले की कुल 171 पंचायतों में से अब तक 160 पंचायतों में जीवामृत के उपयोग से मॉडल किसान फार्म तैयार किए गए हैं, जिनका आसपास एवं अन्य गांवों के किसानों को भ्रमण कराकर जैविक खेती के लाभों से अवगत कराया जा रहा है।
गौरेला विकासखंड में जीवामृत के उपयोग एवं जैविक खेती पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लिया। किसानों को जीवामृत, मृदा परीक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार, जैविक खेती तथा उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। किसानों को गौरेला के कृषक बृजलाल राठौर के फार्म का भ्रमण भी कराया गया, जहां म्यूटेंट विष्णुभोग धान की फसल में जीवामृत का उपयोग किया गया है। मात्र 22 दिन की फसल में सुगंध आने के साथ ही फसल की बेहतर वृद्धि देखी गई तथा कीट एवं बीमारी का प्रकोप नहीं पाया गया। किसानों ने जीवामृत के उपयोग से प्राप्त सकारात्मक परिणामों को देखकर जैविक खेती अपनाने में विशेष रुचि दिखाई।

 


प्रदेश में खरीफ बोनी का लक्ष्य 97 प्रतिशत पूरा, 47.40 लाख हेक्टेयर में बुआई

25-Aug-2026
रायपुर, 25 अगस्त 2026 प्रदेश में खेती किसानी का कार्य जोरों पर है। राज्य में 25 अगस्त की स्थिति में राज्य के 47.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 97 प्रतिशत बोनी पूर्ण हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश किसानों को सुगमता से मिले खाद-बीज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 12.07 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.58 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। खेती का प्रारंभिक कार्य लगभग अंतिम चरण में है। राज्य में अब तक 47.40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 97 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। 
प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 16.67 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 12.07 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 72 प्रतिशत है।   
इसी प्रकार खरीफ सीजन 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.80 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.58 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 93 प्रतिशत है। 
अधिकारियों ने बताया कि 25 अगस्त सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 839.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। गौरतलब है कि औसत दर्ज वर्षा जिलों की आज तक की औसत वर्षा पिछले 10 वर्षाे के आधार पर 810.2 मिमी. से 29.2 मिली मीटर अधिक है। गत वर्ष इसी अवधि में 821.0 मिली मी. वर्षा दर्ज की गई थी। 
जरूरतमंद किसानों को 7778.76 करोड़ रूपये का निःशुल्क अल्पकालीन कृषि ऋण
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 24 अगस्त की स्थिति में 7778.76 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 6449.95 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।

खेतों में खीरे की फसल से खिली खुशियां, बिहान से कल्पना बनीं ‘लखपति दीदी’

24-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘बिहान’ योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। समूहों के माध्यम से महिलाएं ऋण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग प्राप्त कर कृषि सहित विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के सकालो ग्राम पंचायत की श्रीमती कल्पना सिंह की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है।
मां महामाया महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कल्पना सिंह ने समूह के माध्यम से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि कार्य शुरू किया। उन्होंने इस राशि का उपयोग खीरे की खेती के लिए किया। वर्तमान में उनके खेत में खीरे की तुड़ाई चल रही है और फसल से उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।
कल्पना सिंह हर वर्ष मौसम के अनुसार अलग-अलग फसलों और सब्जियों की खेती करती हैं। इनमें बैंगन, टमाटर, खीरा, तरबूज सहित अन्य फसलें शामिल हैं। अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाने से उन्हें आय के विविध स्रोत मिले हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है।
बिहान से जुड़ना कल्पना सिंह के लिए केवल आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व में आए आत्मविश्वास का भी सफर है। वे बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनका अधिकांश समय घर की जिम्मेदारियों तक सीमित था। घर से बाहर निकलने, बाजार जाने और लोगों से बातचीत करने में उन्हें झिझक महसूस होती थी।
समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बैंकिंग, बाजार और कृषि व्यवसाय से जुड़ी गतिविधियों को समझना शुरू किया। अब वे बैंक के काम से लेकर बाजार में अपनी उपज बेचने तक के कार्य स्वयं करने में सक्षम हैं। लोगों से बातचीत करने और अपने हित-अहित को समझने का आत्मविश्वास भी उनमें बढ़ा है।
कल्पना सिंह बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से समय-समय पर ऋण लेकर अलग-अलग सब्जियों की खेती करने से उनकी आमदनी में लगातार वृद्धि हुई है। मेहनत और नियमित कृषि गतिविधियों के बल पर वे अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं और इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
वे कहती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे आजीविका में बदलने का अवसर मिला है। समूह के माध्यम से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ाने के साथ स्वयं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
कल्पना सिंह ने महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग और ऋण की सुविधा ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। आज वे आत्मविश्वास के साथ कृषि कार्य कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अपना योगदान दे रही हैं।
कल्पना सिंह की कहानी इस बात की मिसाल है कि स्व-सहायता समूह का साथ, ऋण की सुविधा और मेहनत का हुनर मिलकर ग्रामीण महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकता है। खेत में लहलहाती सब्जियों के साथ उनके आत्मविश्वास की फसल भी तैयार हो रही है-जो उन्हें आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई राह पर आगे बढ़ा रही है।
 

ड्रिप सिंचाई ने बदली हरीशचन्द्र की तकदीर, सब्जी खेती से बढ़ी आमदनी

18-Aug-2026
​रायपुर (शोर संदेश)। ड्रिप सिंचाई (टपका सिंचाई) तकनीक ने आधुनिक खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति और तकदीर को पूरी तरह बदल दिया है। छत्तीसगढ़ के किसानों ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर इस आधुनिक प्रणाली के जरिए सब्जियों और फलों की खेती में बंपर मुनाफा कमाया है। ​कहते हैं कि अगर सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक का साथ मिल जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि आर्थिक समृद्धि का जरिया बन सकती है। इसे सच कर दिखाया है नारायणपुर विकासखण्ड के सुदूर ग्राम तारागांव निवासी कृषक हरीशचन्द्र पिता भादूराम ने। कभी सीमित आमदनी और पारंपरिक धान की खेती से जूझने वाले हरीशचन्द्र आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।
पहले हरीशचन्द्र मुख्य रूप से धान की पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। मेहनत के मुकाबले आमदनी बहुत सीमित होती थी, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए वे खेती में कुछ नया और लाभप्रद करना चाहते थे।
हरीशचन्द्र की सोच को धरातल पर उतारने का काम किया उद्यानिकी विभाग ने। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों और विशेष रूप से ड्रिप (टपक) सिंचाई प्रणाली के फायदों से अवगत कराया। मार्गदर्शन से उत्साहित होकर हरीशचन्द्र ने 1 हेक्टेयर क्षेत्र में बरबटी, करेला और लौकी जैसी उच्च मांग वाली सब्जी फसलों की खेती शुरू की।
​ड्रिप सिंचाई अपनाने से खेत में पानी और पोषक तत्वों की बर्बादी रुकी और फसलों को जरूरत के हिसाब से संतुलित पानी मिला। इसका सीधा असर उत्पादन और सब्जियों की गुणवत्ता पर दिखाई देने लगा।
हरीशचन्द्र की बाड़ी में तैयार लौकी, करेला और बरबटी की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन रही कि स्थानीय बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी। धान की फसल का महीनों इंतजार करने के बजाय, अब सब्जी उत्पादन से उन्हें नियमित आधार पर नकद आय प्राप्त होने लगी है।कम समय में बेहतर मुनाफा मिलने से उनके परिवार का जीवनस्तर सुधरा है और आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
​कृषक हरीशचन्द्र ने कहा कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और ड्रिप सिंचाई तकनीक ने खेती के प्रति मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया। अब मैं पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कम समय में अधिक लाभ देने वाली व्यावसायिक फसलों पर ध्यान दे रहा हूँ। इस बदलाव ने मेरे परिवार को आर्थिक सुरक्षा दी है।
​हरीशचन्द्र की इस सफलता ने सिर्फ उनकी जिंदगी ही नहीं बदली, बल्कि ग्राम तारागांव और आसपास के अन्य किसानों में भी नई उम्मीद जगाई है। उनकी सफलता को देखकर अब गाँव के अन्य कृषक भी वैज्ञानिक कृषि तकनीकों और सब्जी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हरीशचन्द्र भी एक सजग किसान की भूमिका निभाते हुए अपने अनुभवों के जरिए दूसरों को आधुनिक एवं उन्नत खेती अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं।

ड्रोन ने बदली आरती की राह, आत्मनिर्भरता की नई उड़ान भर रहीं नमो ड्रोन दीदी

18-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश)  बलौदाबाजार के विकासखंड सिमगा के ग्राम रानीजरौद  की आरती साहू आज नमो ड्रोन दीदी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। पिछले दो वर्षों से आरती ड्रोन के जरिए किसानों के खेतों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव कर रही हैं। प्रति एकड़ 300 रुपये की दर से सेवा देकर वह न केवल किसानों का समय और मेहनत बचा रही हैं, बल्कि खुद भी आर्थिक रूप से सशक्त होकर लखपति दीदी बनने की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
आरती साहू बताती हैं कि पिछले वर्ष उन्होंने करीब 1154 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरकों का छिड़काव किया, जिससे उन्हें लगभग साढ़े तीन लाख रुपये की आमदनी हुई। उनके लिए ड्रोन अब सिर्फ खेती में आधुनिक तकनीक का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का माध्यम बन गया है। तकनीक से जुड़कर आरती ने यह साबित किया है कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो गांव की महिलाएं भी नई तकनीक को अपनाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं।
आरती साहू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि नमो ड्रोन दीदी योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वह ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरकों का छिड़काव कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। आरती की यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर वे भी रोजगार के नए अवसरों से जुड़ सकती हैं और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान भर सकती हैं।
 

अपनी माटी और खेती-किसानी से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आत्मीय जुड़ाव

17-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव आज एक बार फिर देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सुबह जशपुर जिले के अपने गृहग्राम बगिया में खेत पहुंचे और पारंपरिक रूप से बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाकर बियासी की। खेत में उतरकर हल की मूठ थामे मुख्यमंत्री साय सहज ही एक किसान की भूमिका में नजर आए। इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी स्मृतियों को भी साझा किया।
मुख्यमंत्री साय ने हरे-भरे खेत में मिट्टी की सौंधी सुगंध और बैलों के साथ खेती करते हुए कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ाव का सुख ही अलग है। हल की मूठ थामते ही खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी स्मृतियां एक बार फिर जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताया समय मन को असीम सुकून देने के साथ नई ऊर्जा से भर देता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और बचपन से खेती-किसानी को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया है। खेती उनके लिए केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है। गांव और खेतों ने ही उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में खेती का महत्वपूर्ण स्थान है। पीढ़ियों से हमारे किसान अपने परिश्रम से धरती को सींचते हुए प्रदेश की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार, परंपराएं और ग्रामीण जीवन भी कृषि से गहराई से जुड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। खेती हमें परिश्रम, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है। किसान खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी संबल देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, हमारी समृद्ध कृषि परंपरा और हमारे मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव उनके हृदय के सबसे करीब हैं। किसानों की खुशहाली और कृषि की समृद्धि ही प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली तथा खेतों में भरपूर फसल की कामना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे अपने गांव, खेत और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर आत्मीयता का अनुभव करते हैं। आज सुबह गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री की सहजता में अपनी माटी और कृषि परंपरा के प्रति उनका यही गहरा लगाव दिखाई दिया।

बिहान ने बदली शकुंतला की जिंदगी, खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाए कदम

13-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को कृषि, पशुपालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ कृषि आदान, गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम अब ग्रामीण महिलाओं की आय और आत्मविश्वास में दिखाई दे रहा है।
सरगुजा जिले के झूमरपारा की शकुंतला राजवाड़े इसकी प्रेरक मिसाल हैं। गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़कर वे कृषि गतिविधियों को नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उत्पादक समूह के माध्यम से उन्हें बाजार मूल्य की तुलना में कम लागत पर धान बीज उपलब्ध हुआ, जिसका उपयोग उन्होंने एक एकड़ खेत में किया है।
शकुंतला राजवाड़े बताती हैं कि उत्पादक समूह के माध्यम से उन्हें 20 रुपये से कम की दर पर धान बीज प्राप्त हुआ। इससे खेती की प्रारंभिक लागत कम हुई और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। कृषि सखी एवं पशु सखी के मार्गदर्शन से उन्होंने खेती में नई पद्धतियों को अपनाते हुए उत्पादन और आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
शकुंतला ने एक एकड़ क्षेत्र में धान की खेती के लिए लाइन विधि अपनाई है। इस पद्धति से खेत में फसल का बेहतर प्रबंधन, पौधों की उचित दूरी और कृषि कार्यों को व्यवस्थित तरीके से करने में सुविधा मिल रही है। उनका कहना है कि नई कृषि पद्धतियों और तकनीकी मार्गदर्शन से खेती को अधिक लाभकारी बनाने का अवसर मिला है।
अम्बिकापुर विकासखंड में बिहान के अंतर्गत 25 गांवों की 19 ग्राम पंचायतों के 505 स्व-सहायता समूहों से 5,540 परिवार जुड़े हुए हैं। स्व-सहायता समूहों को केवल बचत और ऋण तक सीमित न रखते हुए उन्हें आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 16 उत्पादक समूह गठित किए गए हैं, जिनसे लगभग 300 सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हैं।
इसी क्रम में 22 उत्पादक समूहों ने एफपीसी के माध्यम से धान बीज का व्यवसाय किया। इन समूहों ने किसानों की मांग के अनुसार धान बीज की खरीद, भंडारण और बिक्री की व्यवस्था की। इससे किसानों को उचित दर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हुआ, वहीं महिला समूहों को कृषि आधारित व्यवसाय और बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।
कृषि सखी और पशु सखी के माध्यम से महिलाओं को आधुनिक एवं बेहतर कृषि पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। शकुंतला राजवाड़े भी इसी मार्गदर्शन का लाभ लेकर अपनी खेती को व्यवस्थित कर रही हैं। उनका कहना है कि बिहान से जुड़ने के बाद उनके सामने आजीविका के नए अवसर खुले हैं। पहले वे घर तक सीमित थीं, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद कृषि गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने और स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ा है।
बिहान से जुड़कर शकुंतला राजवाड़े ने न केवल अपनी कृषि गतिविधियों को मजबूत किया, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ी हैं। वे ‘लखपति दीदी’ अभियान से जुड़ी हैं और इस उपलब्धि को अपने लिए गर्व का विषय मानती हैं। अब वे अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
शकुंतला राजवाड़े ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपनी नई पहचान बनाने का अवसर दिया है।
प्रदेश में बिहान के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को कृषि, पशुपालन, लघु उद्यम और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। शकुंतला राजवाड़े जैसी महिलाएं इस बदलाव की प्रेरक बनकर अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह आसान कर रही हैं।
 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से संवर रही किसानों की खेती, बढ़ रही आमदनी की उम्मीद

12-Aug-2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।
कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।
 

नैनो यूरिया से बदली सब्जी की खेती की तस्वीर, किसान सम्मेलाल बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

10-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)शासन द्वारा किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब सक्ति जिले के किसानों के खेतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ नैनो यूरिया के उपयोग से किसान कम लागत में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 
सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती के ग्राम भद्रीपाली के प्रगतिशील किसान  सम्मेलाल सिदार इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। वे लगभग 5 से 6 एकड़ कृषि भूमि में बैंगन, टमाटर सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करते हैं। सम्मेलाल सिदार ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने अपनी फसल में नैनो यूरिया का उपयोग किया। इसके परिणामस्वरूप पौधों की बढ़वार बेहतर हुई, फसल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया और उत्पादन भी अच्छा प्राप्त हुआ। 
सम्मेलाल सिदार ने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम हुआ, जिससे खेती की लागत में कमी आई और उन्हें अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआत में नैनो यूरिया के उपयोग को लेकर उनके मन में कुछ संदेह था, लेकिन फसल में मिले सकारात्मक परिणामों ने उनका विश्वास मजबूत कर दिया। अब वे अपने अनुभव गांव एवं आसपास के अन्य किसानों के साथ साझा कर उन्हें भी आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सम्मेलाल सिदार ने कहा कि बदलते समय के साथ किसानों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। नैनो यूरिया जैसी तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम करने के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने नैनो यूरिया के उपयोग से मिले सकारात्मक परिणामों के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
 

 



Feedback/Enquiry



Log In Your Account