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खरीफ सीजन में किसानों का रुझान बढ़ा, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी बने पसंद

12-Jun-2026
रायपुर,  (शोर संदेश)  एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के ग्राम लालपुर के किसान प्रयाग सिंह इस खरीफ सीजन में खेती की नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। आसपास के किसानों की सफलता और बेहतर उत्पादन से प्रेरित होकर उन्होंने पहली बार अपनी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
प्रयाग सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने गांव और आसपास के कई किसानों की फसलों में नैनो उर्वरकों के उपयोग के सकारात्मक परिणाम देखे हैं। फसलों की बेहतर वृद्धि, पौधों का स्वस्थ विकास और संतोषजनक उत्पादन ने उनके मन में इन आधुनिक उर्वरकों के प्रति विश्वास पैदा किया। उनका मानना है कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना रहती है।
वे कहते हैं कि नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी उपयोगिता और सुविधा है। जहां पारंपरिक उर्वरकों के भारी-भरकम बोरे ढोना किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, वहीं नैनो उर्वरक छोटी बोतलों में उपलब्ध होने के कारण उन्हें ले जाना, संग्रहित करना और उपयोग करना आसान है। इससे समय, श्रम और परिवहन लागत में भी कमी आती है।
प्रयाग सिंह को उम्मीद है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उनका मानना है कि वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि नवाचारों को अपनाकर किसान खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बना सकते हैं।  
 

किसान चैतराम को नैनो उर्वरकों से मिला सकारात्मक परिणाम, कम लागत हुआ अधिक उत्पादन

11-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश) छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिल रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से खाद, बीज एवं कृषि आदान राशि की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने से किसान नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला अंतर्गत ग्राम झरन के प्रगतिशील कृषक चैतराम भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जो आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक उन्नत और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 16 एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करने वाले चैतराम का परिवार लंबे समय से कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ उन्होंने अपनी खेती की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 
हाल ही में सहकारी समिति से खाद, बीज एवं अन्य आवश्यक कृषि सामग्री प्राप्त करने पहुंचे चैतराम ने नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया भी लिया। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग एवं सहकारी समिति के माध्यम से उन्हें इन उर्वरकों की जानकारी मिली थी। पिछले वर्ष उन्होंने अपनी फसलों में नैनो उर्वरकों का उपयोग किया था, जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। इससे फसल की वृद्धि बेहतर हुई और उत्पादन क्षमता में भी सुधार देखने को मिला।
चैतराम के अनुसार वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया किसानों के लिए एक प्रभावी और नवाचारपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके बेहतर अवशोषण में भी सहायक हैं। उन्होंने बताया कि इन उर्वरकों के उपयोग से फसलों को संतुलित पोषण मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि एवं विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
चैतराम ने कहा कि किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और अधिक से अधिक किसान इनके उपयोग में रुचि दिखा रहे हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से खेती अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और लाभकारी बन रही है। साथ ही, समय पर खाद एवं बीज की उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष उन्हें सहकारी समिति में आवश्यक कृषि सामग्री आसानी से उपलब्ध हो गई, जिससे खेती की तैयारी समय पर पूरी करने में मदद मिली।
चैतराम का मानना है कि कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचार किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक उर्वरकों के उपयोग से खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वें अपने आस पास के किसान भाइयों को भी बदलते समय के साथ नई तकनीकों को अपनाने को प्रेरित करते हैं, ताकि वें भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सके।
चैतराम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को खाद, बीज, नैनो डीएपी, नैनो यूरिया सहित आदान राशि समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे खेती के कार्यों में सुविधा हो रही है और किसान बिना किसी बाधा के अपने कृषि कार्यों को आगे बढ़ा पा रहे हैं।









 

नैनो यूरिया से आसान हुई खेती, किसान गुलाबचंद राठौर को मिल रहे बेहतर परिणाम

10-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश) राज्य शासन द्वारा कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब किसानों के खेतों में दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाकर किसान खेती को अधिक सुविधाजनक, किफायती और लाभकारी बना रहे हैं। सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती अंतर्गत ग्राम अचानकपुर के प्रगतिशील किसान गुलाबचंद राठौर भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया (तरल) का सफल उपयोग कर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त किए हैं तथा अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
गुलाबचंद राठौर ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष अपनी कृषि भूमि में नैनो यूरिया का उपयोग किया था, जिसके परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यूरिया की 45 किलोग्राम की भारी बोरियों की तुलना में नैनो यूरिया का परिवहन, भंडारण एवं उपयोग कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक है। इसकी छोटी शीशी को किसान आसानी से खेत तक ले जा सकते हैं, जिससे समय, श्रम और परिवहन व्यय में उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि एवं विकास में सहायता मिलती है।
उर्वरकों की उपलब्धता से किसानों को मिल रही सुविधा राठौर ने बताया कि वर्तमान खरीफ सीजन के लिए सेवा सहकारी समिति में शासन के मानकों के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्हें भी आवश्यकता के अनुसार यूरिया एवं डीएपी खाद सहजता से प्राप्त हुआ है, जिससे कृषि कार्यों के संचालन में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे खेती-किसानी के कार्य सुचारु रूप से संपादित किए जा सकते हैं।
किसान गुलाबचंद राठौर का मानना है कि नैनो यूरिया खेती की लागत को नियंत्रित करने, उर्वरक प्रबंधन को सरल बनाने तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने से संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हो रही है। नैनो उर्वरकों का उपयोग कृषि को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
राठौर ने जिले एवं प्रदेश के किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत खेती पद्धतियों तथा नैनो उर्वरकों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने और नवाचारों को अपनाने से कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
राज्य शासन द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्नत बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और समृद्ध बना रहे हैं।



 

करेले की खेती ने बदली तकदीर धान से सात गुना अधिक हुई आय

08-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश) कभी पारंपरिक धान की खेती तक सीमित रहने वाले किसान दीपक आज अपने क्षेत्र में उद्यानिकी खेती की नई मिसाल बन चुके हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत मिली तकनीकी सहायता और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उन्होंने न केवल अपनी आय में कई गुना वृद्धि की है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने हैं।
जिले के महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बंसुलीडीह निवासी प्रगतिशील किसान दीपक ने वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम से जुड़कर करेला उत्पादन की शुरुआत की। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी एक हेक्टेयर सिंचित भूमि पर आधुनिक तकनीकों के साथ खेती की नई राह चुनी।
दीपक बताते हैं कि करेला उत्पादन में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से उन्हें अपेक्षा से बेहतर परिणाम मिले। इन तकनीकों के कारण फसल की गुणवत्ता सुधरी, उत्पादन लागत नियंत्रित रही और उपज में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
पहले वे अपनी भूमि पर धान की खेती करते थे, जिससे सालाना लगभग 42 हजार रुपये का लाभ प्राप्त होता था। उन्होंने करेला की व्यावसायिक खेती अपनाई। उन्हें प्रति एकड़ लगभग 18 टन करेला उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में करेला का औसत मूल्य 30 रुपये प्रति किलोग्राम मिलने से उनकी आय में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई।
बेहतर उत्पादन और अनुकूल बाजार मूल्य के कारण उन्हें करीब 2.95 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह आय उनकी पूर्व की खेती से कई गुना अधिक है। दीपक का कहना है कि उद्यानिकी खेती ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है। 
 

नैनो उर्वरकों ने बढ़ाया भरोसा कम लागत में बेहतर उत्पादन से मिली नई राह

08-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश) कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का बढ़ता उपयोग किसानों की आय और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरगुजा जिले के लुंड्रा विकासखंड के ग्राम पसेना निवासी प्रगतिशील किसान गोविंद कुमार बेहरा इसकी मिसाल बनकर उभरे हैं। लगभग 17.75 एकड़ भूमि में खेती करने वाले गोविंद पिछले दो-तीन वर्षों से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणामों से उत्साहित हैं।
गोविंद बताते हैं कि उन्होंने शुरुआत में नैनो उर्वरकों का प्रयोग परीक्षण के रूप में किया था, लेकिन बेहतर परिणाम मिलने के बाद इसका उपयोग नियमित रूप से करने लगे। विशेष रूप से धान की फसल में उन्हें उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिला। उनके अनुसार नैनो उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों की प्रभावी आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।
वे धान के साथ खीरा, बैंगन जैसी सब्जी फसलों की भी खेती करते हैं। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें कम मात्रा में आसानी से परिवहन और उपयोग किया जा सकता है। इससे किसानों का श्रम, समय और लागत तीनों की बचत होती है।
गोविंद का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किए जाने पर नैनो उर्वरक उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं। वे अन्य किसानों से भी आधुनिक तकनीकों को अपनाने और नैनो उर्वरकों के उपयोग के माध्यम से टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ने की अपील करते हैं।







 

 


कम बारिश में भरपूर धान उत्पादन में कतार बोनी और नैनो डीएपी मददगार

08-Jun-2026
रायपुर, (शोर संदेश) मौसम वैज्ञानिकों द्वारा वर्ष 2026 के मानसून को लेकर जारी पूर्वानुमानों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। एल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून सामान्य से कमजोर रहने और जून माह में भी अपेक्षाकृत कम बारिश होने के संकेत हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को जल संरक्षण आधारित वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम वर्षा की स्थिति में धान की सीड ड्रिल से कतार बोनी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है। इस पद्धति में बीज निर्धारित गहराई और समान दूरी पर बोए जाते हैं, जिससे अंकुरण बेहतर होता है तथा पौधों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित होती हैं। मजबूत जड़ प्रणाली मिट्टी में उपलब्ध सीमित नमी का प्रभावी उपयोग करती है, जिससे सूखे जैसी परिस्थितियों में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।
कतार बोनी का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि पौधों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होती है। परिणामस्वरूप उपलब्ध पानी, पोषक तत्व और सूर्य प्रकाश का संतुलित उपयोग होता है। साथ ही निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण भी आसान हो जाता है, जिससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
कृषि विभाग किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। इसमें मौजूद फास्फोरस के सूक्ष्म कण पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित किए जाते हैं। इससे जड़ों का विकास तेज होता है, प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है और पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है। कम नमी की स्थिति में भी पौधे उपलब्ध पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से खरीफ 2026 में कतार बोनी, मेड़बंदी, वर्षा जल संरक्षण तथा नैनो डीएपी, नैनो यूरिया और जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग को अपनाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक तकनीकों का समन्वित प्रयोग कम वर्षा के बावजूद उत्पादन को स्थिर और लाभकारी बनाए रखने की कुंजी है।

 

 


धान छोड़ मक्का अपनाया, किसानों ने बढ़ाई आय और रचा सफलता का नया अध्याय

05-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश)  फसल विविधीकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और भूमि की उर्वरता में सुधार हो रहा है। पारंपरिक फसलों से हटकर नई और उच्च-मूल्य वाली फसलें उगाने से किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है और जोखिम कम होता है। धान के बदले मक्का की खेती अपनाना फसल विविधीकरण की दिशा में एक बेहतरीन और अत्यधिक लाभदायक कदम है। इससे न केवल भूमि की उर्वरता और जल स्तर में सुधार होता है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
राजनांदगांव जिले में फसल चक्र परिवर्तन के तहत ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्के की खेती अपनाने वाले किसानों को बेहतरीन आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी के साथ अनुबंध खेती करने वाले किसानों ने उत्पादन एवं आय के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। कंपनी द्वारा जिले के किसानों से 5 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य का पॉपकॉर्न मक्का खरीदा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
रबी वर्ष 2025-26 में गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी द्वारा जिले के 605 किसानों के साथ अनुबंध कुल 1763 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कराई गई। किसानों को औसतन 19.33 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। कंपनी ने 1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मक्का की खरीदी करते हुए 5 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य का मक्का खरीदा, इसमें से अब तक 3.73 करोड़ रूपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है तथा शेष भुगतान की प्रक्रिया निरंतर जारी है। 
छुरिया विकासखंड के ग्राम भरीटोला के किसान ललित कुमार साहू ने 23.56 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर जिले में सर्वाधिक क्षेत्र में मक्का उत्पादन करने का गौरव प्राप्त किया। उन्हें इस खेती से 6 लाख 95 हजार रूपए से अधिक की आय हुई। इसी प्रकार राजनांदगांव विकासखंड के किसान वेद प्रकाश चंद्राकर ने 9.5 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर 32.66 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त किया। उन्हें इस खेती से 5 लाख 27 हजार रूपए से अधिक की आय हुई। वहीं ग्राम जमलेश्वर के किसान देवराम पटेल ने 35.5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त कर लगभग 4 लाख 67 हजार रूपए की आमदनी अर्जित की। 
इन किसानों की सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। कृषि विभाग के अनुसार धान के स्थान पर मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने से किसानों को अधिक लाभ मिलने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता तथा फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। जिले के किसानों की यह सफलता अन्य किसानों को भी फसल चक्र परिवर्तन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

किसानों को खाद की नहीं होगी कमी, खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध

03-Jun-2026
रायपुर,( शोर संदेश  किसानों को खाद की नहीं होगी कमी, खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्धखरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है, जिससे किसानों को खेती-किसानी के दौरान किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में खाद एवं बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसानों की सुविधा और कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद, हरी खाद और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
19 हजार मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक लक्ष्य, 40 प्रतिशत भंडारण पूरा
जशपुर जिले को सहकारी क्षेत्र में 19,150 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है। इसके विरुद्ध अब तक 7,756 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 40 प्रतिशत है। इनमें से 1,186.12 मीट्रिक टन उर्वरकों का किसानों द्वारा उठाव किया जा चुका है, जबकि वर्तमान में 6,569.83 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं।
कृषि विभाग का कहना है कि उपलब्ध भंडारण खरीफ सीजन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी।
रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जिले में नैनो उर्वरकों की भी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वर्तमान में 4,128 लीटर नैनो यूरिया एवं 3,468 लीटर नैनो डीएपी सहित कुल 7,596 लीटर नैनो उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से 135 लीटर का वितरण किया जा चुका है, जबकि 7,463 लीटर नैनो उर्वरक उपलब्ध हैं।
किसानों को उनकी भूमि, फसल और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है ताकि सभी किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती की लागत कम करने के उद्देश्य से कृषि विभाग किसानों को हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। इच्छुक किसानों को प्रति एकड़ 8 किलोग्राम ढेंचा बीज एवं 4 किलोग्राम मूंग बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्र डुमरबहार, शासकीय कृषि प्रक्षेत्र सुसडेगा एवं चयनित किसानों के खेतों में नील हरित काई (ब्लू ग्रीन एल्गी) का उत्पादन कराया जा रहा है। यह जैव उर्वरक वायुमंडलीय नत्रजन को स्थिर कर फसलों को प्राकृतिक पोषण प्रदान करता है तथा मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरता में वृद्धि करता है।
किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। खरीफ वर्ष 2026 में अब तक जिले के 75 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 38 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के भंडारण, वितरण एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद एवं उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर तत्काल कृषि विभाग को सूचित करें। कृषि विभाग की इस पहल से किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध होंगे, खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरता संरक्षित रहेगी और खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
 

खरीफ सीजन से पहले मुंगेली में खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था, किसानों को राहत

03-Jun-2026
रायपुर( शोर संदेश  मुंगेली जिले में खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही जिले के किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार जिले में रासायनिक उर्वरकों के भंडारण, वितरण और निगरानी की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जिले में वर्तमान में सहकारी, निजी एवं डबल लॉक केंद्रों सहित कुल 25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध है। सहकारी क्षेत्र में अब तक 14 हजार 217 मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी एवं म्यूरेट ऑफ पोटॉश शामिल हैं। वहीं निजी क्षेत्र में 10 हजार 727 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। इसके अतिरिक्त डबल लॉक केंद्रों में 04 हजार 208 मीट्रिक टन तथा निजी थोक विक्रेताओं के पास 01 हजार 213 मीट्रिक टन उर्वरक सुरक्षित रूप से उपलब्ध है।
किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक 05 हजार 668 मीट्रिक टन तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से 06 हजार 829 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का वितरण किया जा चुका है। इसके साथ ही जिले की 66 सहकारी समितियों में 12 हजार 412 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से धान एवं अरहर के बीज शामिल हैं। निजी क्षेत्र के 200 से अधिक केंद्रों में भी लगभग 01 हजार 50 क्विंटल बीज उपलब्ध है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि जिले में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा लगातार नई खेप भी पहुंच रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक प्रचार पर ध्यान न दें और आवश्यकता अनुसार ही खाद का क्रय करें। प्रशासन किसानों को निर्बाध रूप से खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।








 

राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत धनिया की खेती से किसान रतिराम की बढ़ी आय

01-Jun-2026
रायपुर( शोर संदेश )। जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम अछरीडीह के प्रगतिशील कृषक  रतिराम पटेल ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों को अपनाते हुए अपनी आय में अच्छी वृद्धि की है। कृषक पटेल बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती करते थे, जिसमें अधिक लागत के बावजूद सीमित आय प्राप्त होती थी। बेहतर आमदनी और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और साग-सब्जी एवं मसाला फसलों की खेती की ओर कदम बढ़ाया।
वर्ष 2025-26 में पटेल ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत मसाला क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़कर 0.87 हेक्टेयर क्षेत्र में धनिया फसल का उत्पादन किया। विभाग द्वारा उन्हें योजना के तहत 17,400 रुपये का अनुदान डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में प्रदान किया गया। उन्होंने खेती में ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया, जिससे उत्पादन लागत में कमी आई और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
रतिराम पटेल बताते हैं कि पूर्व में धान की खेती से उन्हें कुल लाभ सीमित ही मिलता था। वहीं धनिया की खेती अपनाने के बाद उन्हें लगभग 35 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा कुल लाभ लगभग 50,000 रुपए तक पहुंच गया। रतिराम पटेल की सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान तथा उनके रिश्तेदार भी उद्यानिकी फसलों एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए उत्साहित हो रहे हैं।

 


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