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किसान

शेडनेट हाउस ने बदली किसान की तकदीर

24-Jun-2026
रायपुर: कभी परंपरागत खेती तक सीमित रहे बीजापुर जिले के ग्राम पोलेम के किसान कन्हैया आत्रम आज आधुनिक बागवानी तकनीक अपनाकर आर्थिक समृद्धि की नई मिसाल बन गए हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत उद्यानिकी विभाग के सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में शेडनेट हाउस स्थापित किया, जिससे उनकी खेती की तस्वीर ही बदल गई।
शेडनेट हाउस में कन्हैया आत्रम करेला, खीरा, तरोई और बरबटी जैसी सब्जियों की उन्नत खेती कर रहे हैं। इस खेती से उन्हें अब तक लगभग 2 लाख रुपये का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसमें सभी खर्च निकालने के बाद 1.80 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई। वहीं खुले खेत में लाल मिर्च की खेती से उन्होंने करीब 7 लाख रुपये का उत्पादन हासिल किया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत के बाद उन्हें 5 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
कन्हैया आत्रम का कहना है कि उद्यानिकी विभाग की योजनाओं, अनुदान और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का आत्मविश्वास दिया। उनकी सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है और यह साबित कर रही है कि वैज्ञानिक खेती अपनाकर कम क्षेत्र में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित की जा सकती है।
 

नैनो उर्वरकों से बदली किसान दशरथ वर्मा की खेती, कम लागत में मिला बेहतर परिणाम

23-Jun-2026
कवर्धा, 23 जून 2026 कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत उसलापुर के किसान दशरथ वर्मा आज उन प्रगतिशील कृषकों में शामिल हैं, जिन्होंने बदलते समय के साथ खेती की नई तकनीकों को अपनाकर अपनी कृषि को अधिक लाभकारी और सुविधाजनक बनाया है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया और अब उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
लगभग 4.50 एकड़ भूमि पर धान और गन्ने की खेती करने वाले वर्मा बताते हैं कि पहले पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों को खेत तक पहुंचाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी। दुकान से घर और फिर खेत तक 50 किलोग्राम की बोरियां ले जाना कठिन होने के साथ समय और श्रम दोनों की मांग करता था। इसके साथ भंडारण की समस्या भी बनी रहती थी। दशरथ वर्मा ने खेती में बदलाव की शुरुआत करते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया। उन्होंने बताया कि अब केवल 500 मिलीलीटर की एक बोतल को स्प्रेयर के माध्यम से फसल पर छिड़का जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे और प्रभावी तरीके से मिलते हैं। इससे उर्वरक की बर्बादी कम हुई और फसल की गुणवत्ता तथा उत्पादन में सकारात्मक सुधार दिखाई दिया।
दशरथ बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी खेती की लागत पहले की तुलना में कम हुई है और काम करने में भी सुविधा बढ़ी है। कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से समय, श्रम और संसाधनों की बचत हो रही है। वर्मा ने कहा कि खेती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीकों को अपनाना जरूरी है जो भविष्य के लिए टिकाऊ भी हों। उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से भूमि और पर्यावरण पर दबाव कम पड़ता है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले प्रभावों को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
 

’नैनो उर्वरकों से बदलेगी खेती की तस्वीर, किसानों को कम लागत में मिलेगा अधिक लाभ’

22-Jun-2026
कोरिया(शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ नैनो उर्वरकों जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब किसानों की खेती में दिखाई देने लगा है।
कोरिया जिले के ग्राम मनसुख निवासी किसान छत्रपाल साय भी आधुनिक खेती की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। लगभग 17 एकड़ भूमि में धान की खेती करने वाले छत्रपाल साय ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में इस वर्ष अपनी फसल में नैनो यूरिया के उपयोग का निर्णय लिया है। उन्होंने सहकारी समिति से आवश्यक खाद एवं नैनो उर्वरक प्राप्त किए हैं और बेहतर उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं।
छत्रपाल साय का मानना है कि नैनो उर्वरक खेती को अधिक वैज्ञानिक, किफायती और प्रभावी बनाते हैं। उनके अनुसार नैनो यूरिया फसलों को आवश्यक पोषक तत्वों की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जिससे पौधों की वृद्धि और विकास में सुधार होता है। कम मात्रा में उपयोग के बावजूद इसका प्रभाव अधिक होने से पारंपरिक उर्वरकों की आवश्यकता घटती है और किसानों की लागत में बचत होती है।
उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव आसान है तथा इनके उपयोग से पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। इससे फसलों को संतुलित पोषण मिलता है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, ये उर्वरक मृदा की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायक हैं।
छत्रपाल साय ने सहकारी समितियों के माध्यम से खाद, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को अब कृषि आदान सामग्री प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही है। उन्होंने किसानों के हित में किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
नैनो उर्वरकों के बढ़ते उपयोग और कृषि आदान सामग्री की सुगम उपलब्धता से किसानों का भरोसा आधुनिक कृषि तकनीकों पर बढ़ रहा है। इससे खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम मिलने की उम्मीद है।

नैनो उर्वरक-कम लागत, अधिक उत्पादन, खुशहाल किसान’

22-Jun-2026
कोरिया (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। सहकारी समितियों के माध्यम से खाद, बीज एवं उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होने से किसानों को खेती की तैयारियों में सुविधा मिल रही है और वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कोरिया जिले के ग्राम आनी निवासी कृपाल सिंह (50 वर्ष) खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। अपनी तीन एकड़ कृषि भूमि के लिए वे आदिम जाति सहकारी समिति धौराटिकरा पहुंचे, जहां से उन्होंने खेती की आवश्यकता के अनुसार यूरिया, डीएपी, राखड़, धान बीज, मूंग बीज तथा नैनो यूरिया प्राप्त की।
कृपाल सिंह ने बताया कि कृषि विभाग एवं सहकारी समिति के माध्यम से उन्हें नैनो उर्वरकों की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इस वर्ष अपनी फसल में नैनो यूरिया के उपयोग का निर्णय लिया है। उन्हें विश्वास है कि इससे फसल की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है और नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी एवं नवाचारपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। कम लागत में बेहतर पोषण उपलब्ध कराने वाले ये उर्वरक खेती की उत्पादकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
कृपाल सिंह के अनुसार नैनो यूरिया फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके उपयोग से पौधों द्वारा पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है, जिससे फसल की वृद्धि और विकास को आवश्यक सहायता मिलती है। उन्होंने बताया कि किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और अधिक से अधिक किसान इनके उपयोग में रुचि दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खेती में समय का विशेष महत्व होता है। यदि खाद, बीज और उर्वरक समय पर उपलब्ध हो जाएं तो किसानों को काफी सुविधा मिलती है। आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक उर्वरकों के उपयोग से खेती को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाया जा सकता है। बदलते समय के साथ किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाना चाहिए, ताकि कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
कृपाल सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को खाद, बीज, नैनो यूरिया सहित अन्य आवश्यक कृषि आदान सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे खेती के कार्यों में सुविधा हो रही है और किसान बिना किसी बाधा के अपने कृषि कार्यों को आगे बढ़ा पा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसानों को इसी प्रकार आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध होते रहेंगे, जिससे कृषि क्षेत्र और अधिक सशक्त एवं समृद्ध बनेगा।

किसान हीरा सिंह ने रासायनिक खाद छोड़ अपनाया नैनो यूरिया और डीएपी,सुधरी मिट्टी की सेहत और बढ़ा उत्पादन

20-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) बलौदाबाजार भाटापारा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम गुडेलिया के प्रगतिशील किसान हीरा सिंग ध्रुव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए उन्होंने पिछले वर्ष से अपने खेतों में रासायनिक खाद की जगह नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग शुरू किया । नैनो उर्वरकों के उपयोग से हीरा सिंग ध्रुव के खेतों में फसल का उत्पादन न केवल शानदार रहा, बल्कि फसलों की गुणवत्ता में भी भारी सुधार देखने को मिला है।
हीरा सिंग ध्रुव बताते हैं कि यह अत्याधुनिक नैनो उर्वरक न केवल बाजार में मिलने वाली रासायनिक बोरियों वाली खाद की तुलना में बेहद सस्ते हैं, बल्कि इनका परिवहन और खेतों में छिड़काव करना भी बहुत आसान है। इससे खेती की लागत में भारी कमी आई है और समय व मेहनत की भी बचत हुई है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन लिक्विड उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उनकी जमीन की सेहत सुधरी है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 
इस बेहतरीन परिणाम से उत्साहित होकर किसान हीरा सिंग ध्रुव ने जिले और प्रदेश के सभी किसान भाइयों से विशेष अपील की है कि वे भी रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग को छोड़कर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को अनिवार्य रूप से अपनाएं, ताकि कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाया जा सके और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी सुरक्षित रखा जा सके।
 

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनी किसानों की उम्मीद, शिकायत पर अतिक्रमण मुक्त हुई नहर

20-Jun-2026
रायपुर(शोर संदेश) । मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एक बार फिर आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम साबित हुई है। बलरामपुर जिले के ग्राम राधानगर में किसानों की शिकायत पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण से बाधित नहर को मुक्त कराया, जिससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था पुनः सुचारु हो गई है।
जानकारी के अनुसार, किसानों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी कि धमनी जलाशय योजना की नहर के जल प्रवाह को एक निजी व्यक्ति द्वारा निर्धारित दिशा से मोड़कर अतिक्रमण कर पाट दिया गया है। इससे नहर का जल प्रवाह बाधित हो रहा था और किसानों को सिंचाई के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
शिकायत मिलते ही संबंधित विभागों के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर अतिक्रमणकर्ता को तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए। प्रशासन की सक्रिय पहल के बाद अतिक्रमणकर्ता ने स्वयं नहर से अतिक्रमण हटा लिया। इसके पश्चात नहर का सुधार कार्य भी कराया गया, जिससे जल प्रवाह पुनः शुरू हो गया।
नहर के पुनर्संचालन से राधानगर एवं आसपास के किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा, जिससे कृषि कार्यों को गति मिलेगी और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। 
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं जिला प्रशासन की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समयबद्ध समाधान से उन्हें बड़ी राहत मिली है।
यह मामला दर्शाता है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर शासन की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।

जशपुर के नवाचारी किसानों को मिलेगा सम्मान, आम-कटहल प्रतियोगिता में 10 हजार रूपए तक के नगद पुरस्कार

19-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जशपुर प्रवास के दौरान आयोजित होने वाली कृषि प्रदर्शनी एवं किसान सम्मान समारोह में जिले के प्रगतिशील और नवाचारी किसानों को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को नगद पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए जाएंगे।
उप संचालक कृषि द्वारा जारी जानकारी के अनुसार प्रतियोगिता का उद्देश्य जिले के उत्कृष्ट कृषकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले कृषकों को प्रोत्साहित करना है।
इस प्रतियोगिता में सर्वाधिक वजन, उत्कृष्ट गुणवत्ता और आकर्षक आकार वाले आम का चयन किया जाएगा। जिले के किसान अपने बगीचे में उत्पादित आम प्रस्तुत कर प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।
जिले में उत्पादित सर्वाधिक वजन एवं गुणवत्तायुक्त कटहल के लिए भी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। किसान अपने खेत या बाड़ी में उत्पादित कटहल को प्रतियोगिता में शामिल कर सकते हैं।
जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘जैविक खेती उत्कृष्ट किसान पुरस्कार’ श्रेणी भी रखी गई है। इसमें जैविक आदानों के उपयोग, कृषि नवाचार, विपणन, उद्यान प्रबंधन, जल संरक्षण, एकीकृत कृषि प्रणाली, ड्रोन तकनीक तथा आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों का चयन किया जाएगा।
प्रतियोगिता की प्रत्येक श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले किसान को ₹10,000, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले को ₹7,000 तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को ₹5,000 की नगद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही विजेताओं को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया जाएगा।
इच्छुक किसान अपना नाम, ग्राम, विकासखंड, मोबाइल नंबर तथा प्रतियोगिता की श्रेणी का उल्लेख करते हुए आवेदन संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अथवा विकासखंड कृषि कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
विजेताओं का चयन कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर स्थल निरीक्षण एवं सत्यापन भी किया जाएगा। उप संचालक कृषि ने जिले के किसानों से अधिक से अधिक संख्या में प्रतियोगिता में भाग लेने तथा अपनी उपलब्धियों, नवाचारों और उत्कृष्ट कृषि कार्यों को प्रदर्शित करने की अपील की है।
 

नैनो उर्वरकों के उपयोग से सब्जी की फसलों में मिल रहे बेहतर परिणाम, किसानों ने साझा किए अनुभव

18-Jun-2026
अम्बिकापुर (शोर संदेश) ।  कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को खेती अधिक सरल, किफायती और लाभकारी बनाने में सहायता मिल रही है। इसी क्रम में नैनो उर्वरकों का उपयोग किसानों के बीच तेजी से बढ़ रहा है। नैनो उर्वरक कम मात्रा में अधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार देखा जा रहा है।
सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम जगदीशपुर निवासी कृषक प्रेमनाथ ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में भिंडी सहित अन्य सब्जी फसलों की खेती कर रहे हैं और पारंपरिक खाद की जगह नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं।
कृषक प्रेमनाथ ने बताया कि नैनो उर्वरक बाजार से आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और खेत में स्प्रे करना भी सरल है। उन्होंने कहा कि उन्होंने भिंडी, लौकी, खीरा सहित विभिन्न फसलों में नैनो उर्वरकों का छिड़काव किया है, जिससे फसलों की वृद्धि और उत्पादन में सकारात्मक असर देखने को मिला है।
कृषक प्रेमनाथ के अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं। यह बाजार में आसानी से उपलब्ध होने के साथ-साथ खेत में पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करना भी बेहद सरल है। नैनो कण सीधे पत्तियों के माध्यम से पौधों तक पहुंचकर फसल की आवश्यकता के अनुसार सटीक पोषण प्रदान करते हैं, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर और शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित होता है। इसके उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि मृदा स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है। साथ ही पारंपरिक रासायनिक खादों पर होने वाले खर्च में कमी आने से किसानों की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। यही कारण है कि नैनो उर्वरक आधुनिक एवं लाभकारी खेती के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं।
अपने सफल प्रयोग के बाद कृषक प्रेमनाथ ने अन्य किसानों से भी अपील की है। उनका कहना है कि चाहे सब्जी की खेती हो या धान जैसी पारंपरिक फसलें, सभी किसानों को नैनो उर्वरकों का उपयोग अवश्य करना चाहिए। इससे फसल को बेहतर पोषण मिलता है और भूमि की गुणवत्ता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नैनो उर्वरकों का सही और संतुलित उपयोग किसानों की आय दोगुनी करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। किसानों को खेती को अधिक उन्नत, सुरक्षित और लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों उपयोग सुनिश्चित करना होगा।





 

 


छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की तैयारी तेज, रिकॉर्ड 4.03 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध

16-Jun-2026
रायपुर। (शोर संदेश) छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए राज्य की सभी सहकारी समितियों में उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत किसानों को उत्तम क्वालिटी के बीज सही समय पर मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रक्रिया केंद्रों से लगातार बीजों की सप्लाई की जा रही है।
इस साल किसानों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में बीज उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले साल (खरीफ 2025) में इस समय तक जहां 4.01 लाख क्विंटल बीज का भंडारण हुआ था, वहीं इस साल (खरीफ 2026) में अब तक रिकॉर्ड 4.03 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा हो चुका है। सहकारी समितियों के अलावा, बीज प्रक्रिया केंद्रों में अलग से बफर स्टॉक भी रखा गया है, ताकि किसान वहां से सीधे भी बीज खरीद सकें।
धान के उन्नत बीजों के साथ-साथ इस बार खेतों की सेहत सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए समितियों में 5,945 देंचा और 5,946 क्विंटलमूंग , हरी खाद के रूप में 'ढेंचा' और मूंग' के बीजों का भंडारण किया गया है, जिसका उठाव किसानों ने शुरू कर दिया है। हरी खाद कम खर्च में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने का सबसे बढ़िया प्राकृतिक तरीका है। इससे यूरिया और डीएपी (DAP) जैसे रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का पूरा फायदा लेने के लिए सबसे पहले खेतों में ढेंचा या मूंग के बीजों की बुवाई करें। इसके बाद फसल को 45 से 60 दिनों तक (फूल आने से पहले) बढ़ने दें। फिर ट्रैक्टर या हल चलाकर इस खड़ी फसल को मिट्टी में अच्छी तरह पलटकर मिला दें और हल्की सिंचाई कर दें। इस प्रक्रिया के 2 से 3 सप्ताह बाद जब यह खाद मिट्टी में गल जाए, तब धान, मक्का, गेहूं या गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुवाई करें। गौरतलब है कि कृषि विभाग द्वारा इस पूरी वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को खेती के समय कोई परेशानी न हो।

नैनो यूरिया से बढ़ी पैदावार, किसानों के लिए प्रेरणा बने देवराज सिंह

15-Jun-2026
रायपुर (शोर संदेश) राज्य सरकार द्वारा किसानों को उन्नत एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। नैनो उर्वरकों के उपयोग से किसान कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं और कृषि को अधिक लाभकारी बना रहे हैं। 
सूरजपुर जिले के ग्राम ऊँचडीह के बैगापारा निवासी किसान देवराज सिंह इसका एक प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने नैनो यूरिया के सफल उपयोग से अपनी खेती में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए हैं।
करीब 2.50 एकड़ कृषि भूमि में खेती करने वाले देवराज सिंह पिछले दो वर्षों से धान एवं सब्जी फसलों में नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनका अनुभव है कि नैनो यूरिया के प्रयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर होती है तथा उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है। धान की फसल में अच्छी गुणवत्ता वाली और वजनदार बालियां प्राप्त हो रही हैं, वहीं सब्जी फसलों में भी संतोषजनक परिणाम मिले हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में सहकारी समितियों और अधिकृत विक्रय केंद्रों के माध्यम से नैनो यूरिया, नैनो डीएपी सहित विभिन्न उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे किसानों को समय पर कृषि आदान प्राप्त हो रहे हैं। इससे खेती-किसानी के कार्यों में सुविधा और दक्षता दोनों बढ़ी हैं।
देवराज सिंह के अनुसार नैनो यूरिया का उपयोग पारंपरिक दानेदार यूरिया की तुलना में अधिक सुविधाजनक है। दूरस्थ खेतों तक बड़ी मात्रा में उर्वरक पहुंचाने की चुनौती को नैनो यूरिया ने काफी हद तक आसान बनाया है। इसकी छोटी बोतल को आसानी से खेत तक ले जाया जा सकता है तथा स्प्रे के माध्यम से फसलों पर उपयोग किया जा सकता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।
उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार, बेहतर उत्पादन और खेती की लागत प्रबंधन में मदद मिल सकती है।


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