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नैनो यूरिया से बदली सब्जी की खेती की तस्वीर, किसान सम्मेलाल बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

10-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)शासन द्वारा किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव अब सक्ति जिले के किसानों के खेतों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ नैनो यूरिया के उपयोग से किसान कम लागत में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 
सक्ती जिले के विकासखंड सक्ती के ग्राम भद्रीपाली के प्रगतिशील किसान  सम्मेलाल सिदार इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। वे लगभग 5 से 6 एकड़ कृषि भूमि में बैंगन, टमाटर सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करते हैं। सम्मेलाल सिदार ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने अपनी फसल में नैनो यूरिया का उपयोग किया। इसके परिणामस्वरूप पौधों की बढ़वार बेहतर हुई, फसल की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया और उत्पादन भी अच्छा प्राप्त हुआ। 
सम्मेलाल सिदार ने बताया कि नैनो यूरिया के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम हुआ, जिससे खेती की लागत में कमी आई और उन्हें अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि शुरुआत में नैनो यूरिया के उपयोग को लेकर उनके मन में कुछ संदेह था, लेकिन फसल में मिले सकारात्मक परिणामों ने उनका विश्वास मजबूत कर दिया। अब वे अपने अनुभव गांव एवं आसपास के अन्य किसानों के साथ साझा कर उन्हें भी आधुनिक कृषि तकनीकों एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सम्मेलाल सिदार ने कहा कि बदलते समय के साथ किसानों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। नैनो यूरिया जैसी तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम करने के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने नैनो यूरिया के उपयोग से मिले सकारात्मक परिणामों के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
 

 


गिरदावरी प्रक्रिया में सरकार ने किए बड़े बदलाव- अब खेत की फोटो से होगी फसल की पुष्टि

07-Aug-2026


रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस बार खरीफ सीजन की गिरदावरी (फसल निरीक्षण) पहले जैसी नहीं होगी। अगर किसान ने धान की जगह दूसरी फसल बोई है या खेत खाली छोड़ दिया है, तो अब सिर्फ कागजों में जानकारी दर्ज करना काफी नहीं होगा। संबंधित खेत की खसरा-वार फोटो खींचकर मोबाइल एप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बार गिरदावरी के लिए डिजिटल निगरानी, सात-स्तरीय भौतिक सत्यापन और तय समय-सीमा वाला नया सिस्टम लागू किया है। इसका उद्देश्य साफ है—खेत में जो फसल है, रिकॉर्ड में भी वही दिखनी चाहिए।
क्यों बदला गया गिरदावरी का पूरा सिस्टम?
छत्तीसगढ़ में हर साल धान की सरकारी खरीदी बड़े पैमाने पर होती है। इसके साथ ही उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली और अरहर जैसी फसलें भी प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत खरीदी जाती हैं। सरकार को कई बार शिकायतें मिलीं कि कुछ मामलों में खेत की वास्तविक फसल और रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी अलग-अलग थी। इसका असर सरकारी खरीदी, भुगतान और योजनाओं के लाभ पर भी पड़ता था। इसी वजह से इस बार गिरदावरी को पूरी तरह डिजिटल और जवाबदेह बनाने का फैसला लिया गया है।
अब केवल पटवारी नहीं, सात स्तरों पर होगी जांच
इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि गिरदावरी केवल पटवारी तक सीमित नहीं रहेगी। खेतों का सत्यापन सात स्तरों पर किया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की संभावना कम हो।
पटवारी अपने हल्के के 100 प्रतिशत कृषि रकबे का सत्यापन करेंगे।
राजस्व निरीक्षक (RI) और कृषि विस्तार अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के 25-25 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे।
तहसीलदार और नायब तहसीलदार 10 प्रतिशत रकबे का निरीक्षण करेंगे।
अनुविभागीय अधिकारी (SDO) 5 प्रतिशत रकबे का सत्यापन करेंगे।
जिला स्तरीय अधिकारी 1 प्रतिशत रकबे का औचक निरीक्षण करेंगे।
संभाग और राज्य स्तर के अधिकारी भी 0.1 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे।

यानी अब हर स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन होगा और किसी एक अधिकारी की रिपोर्ट पर पूरी प्रक्रिया निर्भर नहीं रहेगी।

फसल बदली तो फोटो अपलोड करना होगा जरूरी
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण नियम यही है। अगर किसान ने धान की जगह दूसरी फसल बोई है या खेत को खाली छोड़ा है, तो संबंधित खेत की फोटो मोबाइल एप के जरिए अपलोड करनी होगी। फोटो खसरा नंबर के आधार पर दर्ज होगी ताकि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान आसानी से किया जा सके। इसका उद्देश्य केवल फोटो लेना नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्य तैयार करना है ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो।

गलती मिली तो होगी कार्रवाई
सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि गिरदावरी में लापरवाही, गलत डेटा प्रविष्टि या फर्जी जानकारी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। यदि रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया तो केवल पटवारी ही नहीं, बल्कि निरीक्षण करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

समय-सीमा भी तय, देर की गुंजाइश नहीं
गिरदावरी अभियान के लिए इस बार पूरा कैलेंडर जारी किया गया है। 20 सितंबर तक गिरदावरी, डेटा एंट्री और त्रुटि सुधार का कार्य पूरा करना होगा। 25 सितंबर को ग्रामवार फसल क्षेत्र का प्रारंभिक डेटा प्रकाशित किया जाएगा। किसानों की दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद 30 सितंबर तक अंतिम रिकॉर्ड अपडेट कर दिए जाएंगे। इससे किसानों को समय रहते अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा।

गांव-गांव होगी मुनादी
नई व्यवस्था की जानकारी हर किसान तक पहुंचे, इसके लिए गांवों में कोटवारों के माध्यम से मुनादी कराई जाएगी। गिरदावरी के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसानों की मौजूदगी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी तरह के विवाद की गुंजाइश न बचे। गिरदावरी अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखने के लिए संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक हर 15 दिन में समीक्षा करेंगे। जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

किसानों पर क्या होगा असर?
नई व्यवस्था से सबसे बड़ा फायदा ईमानदार किसानों को मिलने की उम्मीद है। खेत में जो फसल होगी, उसी के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे MSP खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी दावों पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा। हालांकि, किसानों के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे गिरदावरी के दौरान अपने खेत की सही जानकारी उपलब्ध कराएं और प्रकाशित प्रारंभिक रिकॉर्ड की जांच कर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज करें।

आने वाले वर्षों में फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
छत्तीसगढ़ सरकार की नई गिरदावरी व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि कृषि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड, खेत की फोटो, सात-स्तरीय सत्यापन और तय समय-सीमा के जरिए सरकार फसल खरीदी व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाना चाहती है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने और वास्तविक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में यह मॉडल अहम भूमिका निभा सकता है।
 

 


आधुनिक तकनीक से बदली खेती की तस्वीर, धान रोपाई में प्रति एकड़ 7 हजार रुपये की बचत

06-Aug-2026
रायपुर: छत्तीसगढ़ में किसान आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी और किफायती बना रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन और उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती में लागत कम होने के साथ उत्पादकता भी बढ़ रही है। इसी दिशा में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम खल्लारी निवासी प्रगतिशील किसान डिकेश्वर कुमार साहू ने पैडी ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) के उपयोग से खेती में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।
किसान डिकेश्वर साहू लगभग 25 एकड़ भूमि में धान की खेती करते हैं। पहले धान रोपाई के समय उन्हें मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई कराने पर प्रति एकड़ लगभग 8 हजार रुपये का खर्च आता था। कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने पहले हाथ से चलने वाला पैडी ट्रांसप्लांटर अपनाया। इससे मिले सकारात्मक परिणामों के बाद उन्होंने इस वर्ष छह लाइन वाला आधुनिक पैडी ट्रांसप्लांटर खरीदा, जिससे खेती और अधिक आसान एवं लाभकारी हो गई।
डिकेश्वर साहू ने बताया कि आधुनिक मशीन के उपयोग से धान रोपाई की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। पहले जहां प्रति एकड़ लगभग 8 हजार रुपए खर्च होते थे, वहीं अब मशीन के माध्यम से यह खर्च घटकर लगभग 1 हजार रुपए प्रति एकड़ रह गया है। इस प्रकार उन्हें प्रति एकड़ लगभग 7 हजार रुपए की बचत हो रही है। साथ ही 25 एकड़ में रोपाई का कार्य कम समय में पूरा हो जाने से श्रम और समय दोनों की बचत हो रही है।
पैडी ट्रांसप्लांटर से रोपाई करने पर पौधों के बीच समान दूरी बनी रहती है, जिससे प्रत्येक पौधे को पर्याप्त हवा, पानी और पोषक तत्व मिलते हैं। इसके परिणामस्वरूप फसल का बेहतर विकास होता है और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से खेती वैज्ञानिक और अधिक लाभकारी बन रही है।
किसान डिकेश्वर साहू ने जिले के अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि यंत्रों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से किसानों को धान का बेहतर मूल्य मिल रहा है। ऐसे में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और यंत्रीकरण को अपनाकर कम लागत, कम समय और अधिक उत्पादन के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि आधुनिक खेती ही भविष्य की समृद्ध खेती है और यही किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम भी है।




 

वैज्ञानिक खेती का कमाल: घुटरा की विमला दीदी ने बरबटी उत्पादन में रचा नया कीर्तिमान

05-Aug-2026
रायपुर।  ( शोर संदेश ) कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली मनेन्द्रगढ़ जिले के ग्राम घुटरा की विमला दीदी आज वैज्ञानिक खेती की मिसाल बन चुकी हैं। इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) के सहयोग से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर न केवल अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाया, बल्कि आसपास की महिला किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। आईएफसी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से विमला दीदी सहित महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मचान विधि (Trellis Method) से बरबटी की खेती करने की तकनीक सिखाई गई। इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के बाद उनकी खेती में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला।
मचान विधि के कारण बरबटी की बेलों को पर्याप्त सहारा मिला, जिससे पौधों का विकास बेहतर हुआ। फसल को भरपूर धूप और वायु संचार मिलने से पौधे अधिक स्वस्थ रहे तथा रोग एवं कीटों का प्रकोप भी काफी कम हुआ। परिणामस्वरूप बरबटी की फलियां लंबी, आकर्षक और बेहतर गुणवत्ता वाली तैयार हुईं, जिससे बाजार में उनकी अच्छी मांग बनी।
इस तकनीक का एक बड़ा लाभ यह भी रहा कि फसल की तुड़ाई पहले की अपेक्षा अधिक आसान और सुविधाजनक हो गई। खेत में कार्य करने में समय और श्रम दोनों की बचत हुई, जबकि उत्पादन में वृद्धि होने से आर्थिक लाभ भी बढ़ा। बेहतर गुणवत्ता के कारण उत्पाद को उचित मूल्य मिला, जिससे विमला दीदी की आय में सकारात्मक बढ़ोतरी हुई।
विमला दीदी का कहना है कि आईएफसी द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने उनकी खेती करने का नजरिया बदल दिया। पहले जहां वे पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थीं, वहीं अब वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर रही हैं। उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को सीखकर अपनाएं, तो कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
आज विमला दीदी की सफलता आसपास के गांवों की महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि सही प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर महिलाएं भी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकती हैं।
इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) की यह पहल महिला किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो रही है। घुटरा की विमला दीदी की यह सफलता दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ खेती में नई संभावनाओं के द्वार खोले जा सकते हैं।




 

 


मुफ्त उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती से बदली किसान की तकदीर

05-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)  किसानों की आय में वृद्धि तथा तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम एवं तिलहन (NMEO) योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। योजना के तहत किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी एवं समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
सरगुजा जिले के ग्राम ईरगवां निवासी किसान बेसाहू राम ने कृषि विभाग से संपर्क कर NMEO योजना का लाभ लिया। विभाग द्वारा उन्हें 40 किलोग्राम उन्नत किस्म का मूंगफली बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया, जिसे उन्होंने अपनी एक एकड़ कृषि भूमि में बोया है।
बेसाहू राम ने बताया कि ग्राम कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में खेत की समुचित तैयारी, वैज्ञानिक तरीके से बुवाई तथा फसल प्रबंधन किया गया। आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से बीज का अंकुरण उत्कृष्ट हुआ है और फसल की बढ़वार भी संतोषजनक है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस वर्ष मूंगफली की अच्छी पैदावार होने की पूरी संभावना है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराए जाने से खेती की गुणवत्ता में सुधार आया है। वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने का लाभ सीधे उत्पादन पर दिखाई दे रहा है, जिससे किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम एवं तिलहन (NMEO) योजना के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक कृषि तकनीक एवं नियमित तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है।
कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे शासन की कृषि हितैषी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाकर वैज्ञानिक एवं आधुनिक पद्धति से खेती करें, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बना सकें।
 

 


महिलाओं की सामूहिक ताकत से महका एमसीबी का जीराफूल धान

31-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) आत्मनिर्भर भारत के साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की महिलाओं ने एक नई मिसाल कायम की है। सिद्धबाबा महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के दम पर सुगंधित जीराफूल धान की ऐसी सफलता की कहानी लिखी है, जो अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही है। महिलाओं की इस पहल ने न केवल खेती को लाभकारी बनाया है, बल्कि स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है।
महिला शेयरधारकों को संगठित कर गठित इस एफपीओ ने जीराफूल धान की खेती की शुरुआत उच्च गुणवत्ता वाले बीजों और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार नर्सरी के साथ की। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किए गए बीज उपचार और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग का परिणाम यह रहा कि 100 प्रतिशत अंकुरण प्राप्त हुआ। इस उपलब्धि ने महिला किसानों का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया।
सफल अंकुरण के बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से 10 एकड़ क्षेत्र में जीराफूल धान की खेती का विस्तार किया। समय पर रोपाई, संतुलित पोषण प्रबंधन, नियमित सिंचाई और सतत निगरानी के कारण खेतों में फसल शानदार स्थिति में है। आज लहलहाते धान के खेत महिला किसानों की मेहनत, अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की जीवंत मिसाल बन चुके हैं।
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि महिलाएं केवल खेतों में श्रम तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि बीज चयन, नर्सरी प्रबंधन, रोपाई, फसल संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पादन प्रबंधन जैसी पूरी कृषि प्रक्रिया में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। इससे खेती के प्रति उनका दृष्टिकोण बदला है और कृषि उनके लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।
एफपीओ का अगला लक्ष्य ’हसदेव ब्रांड’ के तहत उच्च गुणवत्ता वाले सुगंधित जीराफूल चावल को प्रदेश और देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना है। इसके लिए गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बेहतर विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि महिला किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य मिल सके और स्थानीय उत्पादों की अलग पहचान बन सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, एफपीओ मॉडल किसानों को सामूहिक रूप से संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने का अवसर देता है। यही कारण है कि सिद्धबाबा महिला एफपीओ की सफलता अब एमसीबी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।
महिलाओं के सामूहिक नेतृत्व, वैज्ञानिक खेती और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन का यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ यह भी साबित कर रहा है कि अवसर और संसाधन मिलने पर महिलाएं कृषि क्षेत्र में भी उत्कृष्ट नेतृत्व कर सकती हैं। 100 प्रतिशत अंकुरण से शुरू हुई यह यात्रा आज 10 एकड़ में लहलहाती जीराफूल धान की फसल के रूप में महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और आत्मनिर्भर गांवों की नई पहचान बन चुकी है।
 

 


आधुनिक खेती की ओर बढ़े किसान बाबालाल, पहली बार किया नैनो डीएपी का उपयोग

30-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश)  आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग के प्रयासों और किसानों के अनुभवों का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां विकासखंड के ग्राम फुनगा निवासी किसान बाबालाल ने इस खरीफ सीजन में पहली बार अपनी फसल में नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
किसान बाबालाल ने अपनी खेती के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पहुंचकर नैनो डीएपी प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने इस वर्ष अपनी फसल में पहली बार नैनो डीएपी के उपयोग का फैसला किया है।
बाबालाल ने बताया कि पिछले वर्ष उनके गांव और आसपास के कई किसानों ने नैनो डीएपी का उपयोग किया था। उनके खेतों में फसल की बढ़वार अच्छी दिखाई दी और उत्पादन भी बेहतर रहा। आसपास के किसानों की फसलों में सकारात्मक परिणाम देखने के बाद उनका भरोसा नैनो डीएपी के प्रति बढ़ा और उन्होंने स्वयं भी इसे अपनी खेती में आजमाने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा मैं पहली बार नैनो डीएपी का उपयोग कर रहा हूं। पिछले साल हमारे आसपास के किसानों ने इसका उपयोग किया था और उन्हें अच्छे परिणाम मिले। उनकी फसल देखकर मुझे भी प्रेरणा मिली। उम्मीद है कि इसके उपयोग से मेरी फसल की बढ़वार अच्छी होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।
किसान बाबालाल ने नैनो डीएपी के एक अन्य लाभ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना बेहद आसान है। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की तुलना में नैनो डीएपी की छोटी बोतल को आसानी से बैग में रखा जा सकता है। इससे परिवहन में सुविधा होती है और किसानों के समय एवं श्रम की बचत होती है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि तकनीकों को समझकर अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों और नई तकनीकों का सही तरीके से उपयोग करें, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कृषि विभाग द्वारा जिले में किसानों को नैनो डीएपी सहित आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग के संबंध में लगातार जानकारी और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि उत्पादन लागत को नियंत्रित करने के साथ फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार की दिशा में प्रयास किए जा सकें। ग्राम फुनगा के किसान बाबालाल का नैनो डीएपी अपनाने का निर्णय जिले में बदलती कृषि सोच और आधुनिक तकनीकों के प्रति किसानों के बढ़ते रुझान का उदाहरण है। खरीफ सीजन में इसके उपयोग से मिलने वाले परिणामों को लेकर बाबालाल सहित अन्य किसानों में भी उत्सुकता बनी हुई है।
 

 


छत्तीसगढ़ में खरीफ की रफ्तार तेज, 80 प्रतिशत रकबे में हुई बोनी

29-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) छत्तीसगढ़ में खेती किसानी का कार्य तेज़ी के साथ जारी हैं। राज्य में 28 जुलाई की स्थिति में राज्य के 39.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 80 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब तक 9.95 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.38 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती- किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है।
राज्य में अब तक 39.09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 80 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। 
अधिकारियों ने बताया कि 28 जुलाई सुबह तक की स्थिति में प्रदेश में अब तक 447.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।
अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.75 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 4.38 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 88 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 4.31 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। 
प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 14.95 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 9.95 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 64 प्रतिशत है।   
अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। चालू खरीफ सीजन 2026 के लिए 27 जुलाई की स्थिति में 6931.51 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 5691.72 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
 

नैनो डीएपी से बेहतर उत्पादन की उम्मीद, नई तकनीक पर बढ़ा किसानों का भरोसा

29-Jul-2026
रायपुर(शोर संदेश) मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उर्वरकों के संतुलित एवं प्रभावी उपयोग के उद्देश्य से किसानों को नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में विकासखंड खड़गवां के ग्राम फुनगा निवासी किसान दयाराम सिंह ने खरीफ सीजन में पहली बार अपनी फसल में नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है तथा कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
दयाराम सिंह ने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति पहुंचकर अपनी खेती के लिए नैनो डीएपी प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि खेती में लगातार बढ़ती लागत के बीच किसानों के लिए नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने इस वर्ष अपनी फसल में नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उनके गांव सहित आसपास के कई किसानों ने नैनो डीएपी का उपयोग किया था। उन किसानों की फसल की बढ़वार सामान्य की तुलना में अधिक अच्छी रही तथा उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। खेतों में मिले इन सफल परिणामों को देखकर उनके मन में भी इस उर्वरक के प्रति विश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं इसका उपयोग करने का फैसला किया।
दयाराम सिंह ने कहा, “मैं पहली बार नैनो डीएपी का उपयोग कर रहा हूं। पिछले साल आसपास के किसानों ने इसका प्रयोग किया था और उन्हें अच्छे परिणाम मिले। उनकी फसल देखकर मुझे भी प्रेरणा मिली। मुझे पूरा विश्वास है कि इसके उपयोग से मेरी फसल की बढ़वार अच्छी होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।“
उन्होंने नैनो डीएपी की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ इसकी आसान उपलब्धता और परिवहन है। पहले पारंपरिक उर्वरकों की भारी-भरकम बोरियों को खेत तक पहुंचाना कठिन होता था, जबकि नैनो डीएपी की छोटी बोतल को आसानी से बैग में रखकर घर और खेत तक ले जाया जा सकता है। इससे किसानों का समय और श्रम दोनों की बचत होती है तथा उर्वरक के परिवहन में भी सुविधा मिलती है। दयाराम सिंह ने अन्य किसानों से भी अपील करते हुए कहा कि वे कृषि विभाग के वैज्ञानिक मार्गदर्शन के अनुसार नई तकनीकों को अपनाएं। उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों और उन्नत उर्वरकों का सही तरीके से उपयोग करें, तो खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।
कृषि विभाग द्वारा जिले में नैनो डीएपी, नैनो यूरिया तथा अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग को लेकर किसानों को नियमित रूप से प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्रेरित किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ते हुए संतुलित उर्वरक प्रबंधन, बेहतर फसल उत्पादन, भूमि की उर्वरता के संरक्षण तथा किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप नैनो उर्वरकों का उपयोग पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ फसल की बेहतर वृद्धि एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।










 

 


कृषि में तकनीक का बढ़ता कदम, धमतरी में ड्रोन से हुआ स्प्रे प्रदर्शन

28-Jul-2026
धमतरी(शोर संदेश) जिले में कृषि कार्यों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा ड्रोन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में आज प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति दोनर (पैक्स) में उपलब्ध कृषि ड्रोन के माध्यम से ग्राम ढीमरटिकुर के प्रगतिशील कृषक हरनारायण साहू के खेत में कृषि दवाइयों का छिड़काव किया गया। इस अवसर पर आसपास के अनेक किसान भी उपस्थित रहे और उन्होंने ड्रोन द्वारा किए जा रहे स्प्रे का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
कृषक हरनारायण साहू के पास लगभग 8 एकड़ कृषि भूमि है। तकनीकी कारणों के चलते आज ड्रोन के माध्यम से लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में ही कृषि दवाइयों lemdaclorpid हेक्सागोनजोले एवं जैविक फर्टिलाइजर का सफलतापूर्वक छिड़काव किया जा सका। शेष क्षेत्र में स्प्रे का कार्य तकनीकी समस्या के समाधान के बाद किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों को ड्रोन की कार्यप्रणाली, संचालन तथा इसके उपयोग से होने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से कम समय में बड़े क्षेत्र में समान रूप से दवाइयों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे श्रम और समय की बचत होती है, दवा की मात्रा नियंत्रित रहती है तथा फसलों पर समान रूप से दवा पहुंचने से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। साथ ही किसानों का रासायनिक दवाइयों के सीधे संपर्क में आना भी कम हो जाता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम घटते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने ड्रोन से किए जा रहे छिड़काव को आधुनिक एवं उपयोगी तकनीक बताते हुए इसकी सराहना की। किसानों ने कहा कि यदि यह सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध हो तो खेती की लागत कम करने, समय पर कृषि कार्य संपन्न करने तथा उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। कई किसानों ने आगामी खरीफ एवं रबी सीजन में भी ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं का लाभ लेने की इच्छा व्यक्त की। इस अवसर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भिरेंद्र साहू, ड्रोन ऑपरेटर पीयूष साहू, कमल जी तथा कृषक भूषण साहू,खिलेंद्र दीवान, गिरधारी, दुर्जराम एवं  कालीराम थे।
उल्लेखनीय है कि जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि ड्रोन उपलब्ध कराकर खेती को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विभाग का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसान नवीन तकनीकों को अपनाकर लागत में कमी लाएं, उत्पादकता बढ़ाएं और कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बना सकें।




 

 



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