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किसान

बैंकिंग से खेतों तक: जल संकट में खेती की नई दिशा दिखा रहे विवेक धर दीवान

17-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )। लगभग दो दशकों तक बैंकिंग क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर सेवाएँ देने के बाद विवेक धर दीवान ने जीवन का ऐसा मोड़ लिया, जो आज जल संरक्षण और टिकाऊ खेती की मिसाल बन गया है। रायपुर में उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट) जैसे वरिष्ठ पद पर रहते हुए उन्होंने नवंबर 2024 में स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गाँव ताला (विकासखंड बेमेतरा) लौटने का निर्णय लिया और कृषि को अपना नया लक्ष्य बनाया।
गाँव लौटकर उन्होंने देखा कि क्षेत्र में खरीफ और रबी—दोनों मौसमों में धान की खेती की जा रही है, जबकि धान अधिक जल मांगने वाली फसल है और रबी मौसम के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। लगातार जल संकट और राज्य में न्यूनतम वर्षा की स्थिति को समझते हुए विवेक धर दीवान ने न केवल स्वयं बदलाव की पहल की, बल्कि पंचायत के तीनों गांवों को नॉन-धान क्षेत्र (नॉन पेड्डी जोन) घोषित कराने में भी अहम भूमिका निभाई।
इस पहल के तहत रबी मौसम में दलहन एवं तिलहन फसलों को प्राथमिकता दी गई। गेहूं, चना, रागी, सूरजमुखी और मूंग जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया गया। स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए विवेक धर दीवान ने अपनी कृषि भूमि में गेहूं, सरसों, रागी और सूरजमुखी की बुवाई की। खेती में आधुनिक जीरो सीड ड्रिल तकनीक अपनाई गई तथा फसल अवशेष प्रबंधन का सख्ती से पालन किया गया, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहती है और प्राकृतिक खाद का लाभ मिलता है।
उन्होंने बताया कि जब जिले में एक वर्ष से अधिक समय से जल संकट बना हुआ है, तब ऐसी रबी फसलों को अपनाना आवश्यक है जिनके पूरे फसल चक्र में कम पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में न्यूनतम समर्थन मूल्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा गेहूं 2500 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक, रागी 7000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तथा सरसों 6200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।
विवेक धर दीवान की यह पहल जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और लाभकारी कृषि का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनकी सोच, तकनीक और नेतृत्व ने यह साबित कर दिया है कि खेती को न केवल टिकाऊ, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाया जा सकता है। आज उनकी यह प्रेरक कहानी बेमेतरा जिले के किसानों के लिए नई दिशा और आत्मविश्वास का स्रोत बन रही है।










 

धान से हटकर समृद्धि की राह, जेवरा के किसान दिलीप सिन्हा ने कमाए 25 लाख रुपये

17-Dec-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )। जिला बेमेतरा के ग्राम जेवरा के प्रगतिशील कृषक दिलीप सिन्हा ने ग्रीष्मकालीन धान की परंपरागत खेती को छोड़कर दलहन-तिलहन फसलों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। वैज्ञानिक खेती, सही फसल चयन और बाजार की समझ के बल पर उन्होंने लगभग 25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।
क्षेत्र में वर्षों से ग्रीष्मकालीन धान की खेती प्रचलित रही है, जिसमें अधिक पानी, बिजली, उर्वरक और श्रम की आवश्यकता होती है। बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को देखते हुए सिन्हा ने खेती के स्वरूप में बदलाव का साहसिक निर्णय लिया।
कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उन्होंने ग्रीष्म ऋतु में धान के स्थान पर मूंग और उड़द (दलहन) तथा सरसों और तिल (तिलहन) की खेती शुरू की। इन फसलों की विशेषता रही — कम पानी में अच्छी पैदावार, कम लागत, रोग-कीट प्रकोप कम और बाजार में बेहतर मूल्य। साथ ही दलहनी फसलों से मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार हुआ।
उन्नत किस्मों का चयन, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीक, समय पर निराई-गुड़ाई, फसल सुरक्षा तथा उत्पादन के बाद उचित भंडारण और विपणन ने उनकी सफलता को और मजबूत किया। इन उपायों से जहां लागत में उल्लेखनीय कमी आई, वहीं उत्पादन और आय में भी बड़ा इजाफा हुआ। दिलीप सिन्हा की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान कम संसाधनों में भी अधिक लाभ कमा सकते हैं। धान के विकल्प के रूप में दलहन-तिलहन की खेती न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी सुधार और टिकाऊ कृषि की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि तक: मिर्ची–धान से मुकेश चौधरी की सफलता की कहानी

16-Dec-2025
रायपुर,( शोर संदेश )। सारंगढ-बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बरमकेला अंतर्गत ग्राम नवापाली के प्रगतिशील किसान मुकेश चौधरी ने नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाकर खेती की पारंपरिक सोच को नई दिशा दी है। ड्रिप पद्धति से धान और मिर्ची की खेती कर वे प्रतिवर्ष लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं और आज एक सफल कृषि उद्यमी के रूप में पहचान बना चुके हैं।
चौधरी ने बताया कि वर्ष 2011 में उन्होंने दो एकड़ भूमि पर मिर्ची की खेती पारंपरिक विधि से प्रारंभ की थी। इसी दौरान उद्यान रोपणी केंद्र नदीगांव के तत्कालीन वरिष्ठ उद्यान अधीक्षक सुरेन्द्र पटेल से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें ड्रिप पद्धति से खेती करने की जानकारी मिली। इसके पश्चात वर्ष 2013 में बरमकेला ब्लॉक में पहली बार ड्रिप तकनीक से खेती की शुरुआत की।
ड्रिप पद्धति के अंतर्गत खेतों की गहरी जुताई कर मेड निर्माण, लेटरल पाइप बिछाना एवं मल्चिंग का उपयोग करते हुए मिर्ची की रोपाई की गई। ड्रिप के माध्यम से संतुलित मात्रा में सिंचाई, खाद एवं दवा देने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और मिर्ची की उपज लगभग दोगुनी हो गई। बेहतर परिणाम मिलने पर चौधरी ने धान की खेती का रकबा कम कर मिर्ची की खेती को बढ़ाया और वर्तमान में लगभग 12 एकड़ भूमि पर मिर्ची की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें प्रतिवर्ष लाखों रुपये की आय हो रही है।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणास्रोत
किसान मुकेश चौधरी की सफलता को देखकर क्षेत्र के खिंचरी, बांजीपाली, बेंद्रापारा, रिसोरा, नूनपानी, लिंजिर और प्रधानपुर सहित आसपास के गांवों के अनेक किसान भी धान के साथ मिर्ची एवं साग-सब्जी की खेती ड्रिप पद्धति से करने लगे हैं।
डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार से मिला सम्मान
खेती-किसानी में नवाचार, जैविक एवं समन्वित खेती को अपनाने के लिए वर्ष 2021 में राज्य सरकार द्वारा मुकेश चौधरी को डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने धान की खेती में जैविक खाद के साथ-साथ दलहन–तिलहन फसलों में उड़द, मूंग एवं मिर्ची की खेती की। पुरस्कार स्वरूप उन्हें प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो एवं दो लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। इस सम्मान से उनका उत्साह बढ़ा और कृषि कार्यों में और अधिक विस्तार हुआ।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, बीआरसी के रूप में मिली जिम्मेदारी
इस वर्ष कृषि विभाग द्वारा मुकेश चौधरी को प्राकृतिक खेती हेतु बीआरसी नियुक्त किया गया है। उनके साथ टिकेश्वरी महापात्र (जलाकोना) और खेल कुमारी (धौंरादरहा) को भी बीआरसी बनाया गया है। विभाग द्वारा रायपुर एवं बरगढ़ (ओडिशा) में प्रशिक्षण दिलाकर अब ये तीनों बीआरसी जलाकोना, धौंरादरहा, करपी, जामदलखा सहित दर्जनों गांवों के किसानों को प्राकृतिक संसाधनों से खाद निर्माण एवं बीज उपचार की जानकारी प्रदान कर रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसान मुकेश चौधरी द्वारा मिर्ची की खेती के साथ प्राकृतिक खेती लगातार की जा रही है और उन्हें राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उनकी यह पहल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही है।









 

धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में बढ़ा उत्साह, सरल प्रक्रिया से मिल रहा सीधा लाभ

16-Dec-2025
रायपुर,( शोर संदेश )।  कबीरधाम जिले में धान खरीदी से किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की पहल से पहले की तुलना में बेहतर और सुगम खरीदी व्यवस्था के कारण किसान बिना किसी परेशानी के अपना धान उपार्जन कर पा रहे हैं। पंजीयन से लेकर तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया सरल होने से किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। यही व्यवस्था ग्राम खैरवार के किसान  फिरतू पात्रे के लिए सहारा बन गया है। पिता के स्वर्गवास के बाद श्री फिरतू पात्रे ने स्वयं खेती की जिम्मेदारी संभाली। उनके पास कुल 5.50 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वे धान के साथ-साथ कुछ क्षेत्र में गन्ने की खेती भी करते हैं। इस वर्ष उन्होंने अपनी खेती से कुल 84.80 क्विंटल धान का विक्रय किया है।
फिरतू बताते हैं कि उनके पिता का निधन लगभग एक माह पूर्व हुआ था। अंतिम संस्कार और दशगात्र जैसे सामाजिक संस्कारों में काफी खर्च आया, जिसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा। भावुक होते हुए वे बताते हैं कि पिता के साथ ही वे वर्षों से खेती का कार्य करते थे और उनकी स्मृतियाँ हमेशा उनके साथ रहेंगी। उन्होंने अपने पिता का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और परंपरा के साथ किया। वे आगे कहते हैं कि पिता द्वारा दी गई जमीन और शासन द्वारा धान का 3100 रुपये प्रति क्विंटल का उचित मूल्य आज उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बना है। धान विक्रय से प्राप्त राशि से अब उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक चिंता नहीं है और लिया गया कर्ज भी चुकाया जा रहा है।
फिरतू पात्रे का पंजीयन धान खरीदी केंद्र ग्राम कोको में है, जहाँ बिना किसी परेशानी के उनका पूरा 84.80 क्विंटल धान खरीदा गया। खरीदी केंद्र में पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को सहज वातावरण में अपनी फसल बेचने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हित में निरंतर बेहतर कार्य कर रही है। खरीदी व्यवस्था से लेकर भुगतान प्रणाली तक में बड़ा सुधार हुआ है। धान विक्रय के बाद राशि शीघ्रता से सीधे बैंक खाते में पहुँच जाती है, जिससे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है।
 

समर्थन मूल्य से आत्मनिर्भरता तक: किसान हंसराज साहू की बदली हुई जिंदगी

16-Dec-2025
रायपुर( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियाँ आज गांवों में खुशहाली और आत्मनिर्भरता की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था ने किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी धमतरी जिले के ग्राम बोड़रा के किसान हंसराज साहू की है। जिन्होंने सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आधुनिक सुविधाओं को भी अपनाया।
हंसराज साहू बताते हैं कि उन्होंने पिछले खरीफ सत्र में संबलपुर सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय किया। धान बिक्री से प्राप्त राशि से उन्होंने एक ई-स्कूटी खरीदी, जो आज उनके लिए सुविधा, समय की बचत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। साँय-साँय दौड़ती ई-स्कूटी से अब उन्हें धमतरी शहर, खेतों, रिश्तेदारों के घर और दैनिक कार्यों के लिए सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है। इससे न केवल ईंधन खर्च में कमी आई है, बल्कि समय की भी उल्लेखनीय बचत हो रही है।
साहू के पास कुल 2 एकड़ 25 डिस्मिल कृषि भूमि है, जिसमें वे पारंपरिक अनुभव और आधुनिक कृषि समझ के साथ धान की खेती करते हैं। इस वर्ष उन्होंने समर्थन मूल्य पर कुल 46 क्विंटल 40 किलोग्राम धान का विक्रय किया है। समय पर भुगतान और स्पष्ट प्रक्रिया से वे बेहद संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष धान विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग वे अपने पुत्र के विवाह जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्य में करेंगे, जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
हंसराज साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “तुहर टोकन” मोबाइल ऐप ने धान बेचने की प्रक्रिया को अत्यंत सरल, पारदर्शी और किसान-अनुकूल बना दिया है। पंजीयन से लेकर विक्रय तक अब किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं होती।
किसान हंसराज साहू की यह सफलता कथा इस बात का सशक्त प्रमाण है कि सरकार की दूरदर्शी नीतियाँ और डिजिटल नवाचार जब जमीन पर प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो किसान सशक्त बनते हैं और उनका जीवन स्तर निरंतर ऊँचाइयों की ओर बढ़ता है। यह कहानी प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा है कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ लेकर समृद्धि की राह पर आगे बढ़ें।

17.24 लाख टोकन से 87 लाख टन धान की खरीदी, समर्थन मूल्य पर प्रक्रिया जारी

15-Dec-2025
रायपुर,( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़  में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केन्द्र सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर राज्य के पंजीकृत किसानों से धान खरीदी का कार्य  अनवरत रूप से जारी है। कृषि  विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में संचालित 2739 खरीदी केन्द्रों के माध्यम से धान की खरीदी  सुगमता पूर्वक की जा रही है । धान की खरीदी के लिए 15 नवम्बर 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक की अवधि निर्धारित की गई है । 
 राज्य के किसानों से सुगमता पूर्वक धान खरीदी के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है , वहीं  अवैध धान परिवहन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
7.5 प्रतिशत किसान एवं 19 प्रतिशत अधिक रकबा का पंजीयन 
राज्य में किसानों से धान खरीदी हेतु समुचित व्यवस्था की गई है । खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसान पंजीयन का कार्य एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है । वर्तमान में धान की खरीदी हेतु 27.40 लाख किसानों के धान का रकबा 34.39 लाख हेक्टेयर का पंजीयन किया गया है । जबकि गत वर्ष 25.49 लाख किसानों द्वारा रकबा 28.76 लाख हेक्टेयर से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया गया था । इस प्रकार गत वर्ष विक्रय गये किसानों की  तुलना में इस वर्ष लगभग 7.5 प्रतिशत किसान एवं 19 प्रतिशत रकबा का पंजीयन अधिक हुआ है ।
एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट
संस्थागत पंजीयन, भूमिहीन किसान (अधिया/रेगहा), डूबान क्षेत्र के किसान, वन अधिकार पट्टाधारी किसान, ग्राम कोटवार (शासकीय पट्टेदार) श्रेणी के किसानों को एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट प्रदान की गई है । किसान पंजीयन का कार्य वर्तमान में जारी है ।
24 घंटे टोकन प्राप्त करने की सुविधा  "टोकन व्यवस्था का हुआ सरलीकरण
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों के हितों का ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने अब 24 घंटे टोकन प्राप्त करने की सुविधा "तुहर टोकन" एप्प में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदान कर दी है । वर्तमान में 17.24 लाख टोकन से 87 लाख टन धान खरीदी हेतु जारी किया जा चुका है । किसानों द्वारा आगामी 20 दिवस के टोकन प्राप्त किये जा सकते हैं ।
किसानों को 7 हजार 771 करोड़ रुपए की राशि का त्वरित भुगतान
अधिकारियों  ने बताया कि 11 दिसंबर 2025 की स्थिति में किसानों  को धान खरीदी के एवज में 7 हजार 771 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान  समर्थन मूल्य  के तहत का किया जा चुका है ।
अवैध धान विक्रय/परिवहन पर नियंत्रण
 जिलों में विशेष चेकिंग दल का गठन राजस्व, खाद्य, सहकारिता, वन, मंडी आदि विभागों के अधिकारियों का गठन कर किया गया है ।
राज्य स्तर पर मार्कफेड अंतर्गत स्टेट इंटीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल सेंटर (ICCC) की स्थापना की गई है । अब तक प्रदेश में अवैध धान परिवहन/भण्डारण के 2000 से अधिक प्रकरण बनाये गये हैं, जिसमें अब तक 1.93 लाख टन अवैध धान जब्त किया गया है ।

 

अब टोकन के लिए नहीं लगेगी कतार: दिन-रात कभी भी मिलेगा तूहर टोकन

13-Dec-2025
रायपुर ( शोर संदेश )।  प्रदेश के किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 खोल दिया गया है। अब मोबाइल एप से टोकन काटने के लिए किसी निर्धारित समय की बाध्यता नहीं रहेगी। किसान दिन-रात किसी भी समय अपनी सुविधा के अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे।
अब किसान 13 जनवरी तक अगले 20 दिनों तक के लिए टोकन ले सकते हैं।इससे किसानों को धान विक्रय की योजना बनाने और टोकन प्राप्त करने में पर्याप्त समय मिलेगा तथा भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या से राहत मिलेगी।
इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप से टोकन ले सकेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर लघु किसनों के लिए यह सुविधा मुहैया कराई गई है l
उल्लेखनीय है कि टोकन प्रत्येक सहकारी समिति को आबंटित सीमा के भीतर ही जारी किए जाएंगे। किसानों से आग्रह है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त करें और किसी भी असुविधा से बचें।
"किसानों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तूहर टोकन ऐप को 24×7 खोलने और समय की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। अब किसान बिना किसी दबाव के, अपनी सुविधा अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिये टोकन की अतिरिक्त समय सीमा और अवधि का विस्तार किसानों को वास्तविक राहत देगा। राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।"- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से जशपुर के किसानों की आय में नई वृद्धि

13-Dec-2025
रायपुर ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)  2025-26 से शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में 1.7 करोड़ किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है। इसे सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके
खेती-किसानी आधारित जिले जशपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कृषि-उन्मुख नीतियों और प्रदेश में योजनाओं की तेज गति से क्रियान्वयन के कारण किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सहायता और कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन का व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के बगीचा विकासखंड के किसान सुधीर लकड़ा (उरांव) इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में सामने आए हैं।
सुधीर लकड़ा के पास कुल 3.400 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें उन्हें समय-समय पर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। आत्मा योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, डीएमएफ मद से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा सौर सुजला योजना के अंतर्गत सोलर सिंचाई सुविधा ने उनकी खेती को सुगम और कम लागत वाला बनाया है। कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने का अवसर मिला, जिससे उनकी उत्पादकता में सुधार हुआ।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा उन्हें धान के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का की खेती करने की सलाह दी गई। विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए 08 किलोग्राम मक्का बीज से उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाई। उचित देखरेख, पोषक तत्व खाद, दवाइयों और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी कुल आय करीब 15,000 रुपये तक पहुँची।
(PMDDKY)योजना के माध्यम से क्षेत्र में फसल उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, भंडारण क्षमता विकास तथा कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना अनाज, दलहन, तिलहन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ ही मशीनीकरण, जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सुधीर लकड़ा बताते हैं कि इस योजना ने उनकी खेती का स्वरूप बदल दिया है। विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण, उन्नत बीज और समय पर सलाह ने उनकी फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह किसान-हितैषी योजना और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को मिल रहा समर्थन उनकी आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर 
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाते हुए किसानों की आय को वर्ष 2030 तक दोगुना करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक के माध्यम से उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी, अनाज-दलहन- तिलहन में आत्मनिर्भरता, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई से मानसून पर निर्भरता में कमी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 5 प्रतिशत तक घटाने हेतु भंडारण क्षमता का विस्तार, जैविक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही महिलाओं और युवाओं को डेयरी, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों में सहयोग देकर उन्हें कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है।


 

मनरेगा की डबरी से बदली किस्मत : किसान रमेश के जीवन में आई आत्मनिर्भरता और खुशहाली

13-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) महात्मा गांधी नरेगा के डबरी निर्माण ने ग्राम पंचायत रेगड़ा के पट्टाधारी किसान रमेश के जीवन में नई आशाएं जगाई है। सिंचाई, मछली पालन और सब्जी उत्पादन से उनकी आय बढ़ी। पानी की कमी से जूझता जीवन अब खुशहाली में बदल रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत रेगड़ा के वन अधिकार पट्टाधारी किसान रमेश के जीवन में मनरेगा के तहत निर्मित डबरी ने वह बदलाव लाया जिसकी उन्हें वर्षों से तलाश थी। पहले रमेश की खेती पूरी तरह वर्षा पर आधारित थी, जिससे उत्पादन सीमित होता था और आय भी अनिश्चित रहती थी। कठिन परिश्रम करने के बावजूद परिवार की आजीविका पर हमेशा संकट बना रहता था। परंतु मनरेगा के माध्यम से उनके खेत में कराए गए डबरी निर्माण कार्य ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। कठिन मिट्टी और चट्टानों से भरे क्षेत्र में डबरी बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन तकनीकी सहायक, रोजगार सहायक और मेट के मार्गदर्शन में कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में 652 मानव दिवस सृजित हुए, जिससे ग्रामीणों को तात्कालिक रोजगार और आय का अवसर मिला।
डबरी निर्माण के बाद रमेश के खेत में वर्षभर सिंचाई उपलब्ध हो गई। इसका प्रत्यक्ष लाभ उन्हें खेती में मिला। अब उनके खेत में धान, मूंगफली, तरबूज, केला तथा विविध सब्जियों का उत्पादन होने लगा है। इससे न केवल उनके कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, बल्कि अतिरिक्त आय का मार्ग भी खुला। साथ ही डबरी में मछली पालन की शुरुआत ने उन्हें एक और स्थायी आजीविका स्रोत प्रदान किया।
मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सरकारी योजनाओं को ईमानदारी और सही दिशा में लागू किया जाए, तो ग्रामीण जीवन में स्थायी बदलाव संभव है। आज रमेश का परिवार आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है और उनकी तरक्की की कहानी पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी है। ग्राम पंचायत रेगड़ा में निर्मित यह डबरी आज रोजगार, विकास और समृद्धि का नया प्रतीक है। रमेश गर्व से कहते हैं “डबरी ने हमारे जीवन में स्थायी खुशहाली और आत्मनिर्भरता की नई राह खोल दी है।”

 


व्यवस्थित धान खरीदी से किसान महिपाल सिंह को मिला सुगम लाभ

12-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में कोरबा जिले में धान खरीदी व्यवस्था पहले से अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी हो गई है। जामबहार के मेहनतकश किसान महिपाल सिंह ने धान खरीदी की इस बेहतर व्यवस्था का लाभ उठाते हुए सोनपुरी उपार्जन केन्द्र में 90 क्विंटल धान का विक्रय किया है।
किसान महिपाल सिंह ने खरीदी केंद्र में मिली त्वरित, पारदर्शी और सुचारू प्रक्रिया की सराहना करते हुए बताया कि वजन, पंजीयन एवं धान विक्रय की संपूर्ण प्रक्रिया बिना किसी विलंब के पूरी हो गई। ऑनलाइन टोकन से आसानी हुई है। किसानों को टोकन के लिए समिति का बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पडती। उन्होंने बताया कि बेहतर सुविधाओं, सटीक माप-तौल और समय पर भुगतान ने व्यवस्था से सरकार के प्रति मन में विश्वास और बढ़ा है। सरकार किसान की हितैषी नीतियों और योजनाओं से खेती को स्थिरता और सुरक्षित भविष्य की दिशा भी मिली है।

















 


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