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जनप्रतिनिधि

दिल्ली में मुख्यमंत्री साय की अमित शाह से मुलाकात, नक्सल उन्मूलन पर चर्चा

03-Sep-2025
रायपुर।  शोर संदेश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान एवं विकास कार्यों से संबंधित जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के परिणामस्वरूप 453 माओवादी न्यूट्रलाइज हुए हैं, 1616 गिरफ्तार किए गए हैं और 1666 ने आत्मसमर्पण किया है। इस अवधि में 65 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। सड़क, पुल-पुलिया और मोबाइल नेटवर्क जैसी आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर में आई बाढ़ और चल रहे राहत कार्यों की जानकारी भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दी। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवार तक मदद पहुंचाना और उनका पुनर्वास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में नक्सल उन्मूलन के साथ ही विकास और शांति की स्थापना के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।










 

आदि कर्मयोगी अभियान : जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल

03-Sep-2025
रायपुर।  शोर संदेश देश की आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब किसी सरकार ने जनजातीय समाज के जीवन स्तर को उपर उठाने के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे मूलभुत सुविधाओं से जोड़ने और इनका लाभ दिलाने के लिए आदि कर्मयोगी अभियान की शुरूआत की है। यह अभियान देशभर के 30 राज्यों में संचालित किया जा रहा है। यह अभियान देश भर के 550 से ज्यादा जिलों और 1 लाख से अधिक आदिवासी बहुल गांवों में बदलाव के लिए काम करेगी। 
बता दें कि जब भारत 2047 में अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरा करेगा। उस समय तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए यह जरूरी है कि समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। आदिवासी समाज को आगे बढ़ाए बिना यह सपना अधूरा रहेगा। आदि कर्मयोगी अभियान इस अंतर को भरने के लिए एक ठोस कदम है। यह अभियान शासन और समाज के बीच की दूरी को कम करेगा, पारदर्शिता लाएगा और योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अभियान को सेवा पर्व का रूप दिया है। उनका कहना है कि यह केवल योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास नहीं, बल्कि समाज और शासन को जोड़ने वाला पुल है। छत्तीसगढ़ में इस अभियान के लिए वृहद स्तर पर आदिकर्म योगियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कर्मयोगी जनजातीय परिवारों से घर-घर संपर्क कर उनकी आवश्यकताओं और जरूरतों को समझेंगे तथा केंद्र और राज्य सरकार  की योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करेंगे, राज्य और जिला स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी। राज्य सरकार के सभी विभागों के अधिकारी इस कार्य में संवेदनशीलता के साथ सीधे जुड़ेंगे।
आदिकर्मयोगी अभियान का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर इसलिए भी है क्योंकि भारत की जनजातीय आबादी लगभग 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाए बिना 2047 तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। यह अभियान प्रधानमंत्री की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें हर क्षेत्र, हर समाज और हर नागरिक को विकसित भारत” की यात्रा में समान अवसर देना है। भारत का विकास केवल शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता। एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र वही कहलाएगा, जहाँ समाज के हर तबके को समान अवसर मिले और उसकी संस्कृति को उचित सम्मान दिया जाए। इसी सोच को मूर्त रूप ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के जरिए दिया जा रहा है। यह वस्तुतः जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।
छत्तीसगढ़ देश का वह राज्य है जहाँ सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या निवास करती है। इसीलिए इस अभियान का यहां विशेष महत्व है। आदिवासी समाज की असली चुनौती यही रही है कि अनेक योजनाएँ होते हुए भी उनकी जानकारी और लाभ ज़रूरतमंदों तक समय पर नहीं पहुँच पाते। ऐसे में लाखों कर्मयोगी स्वयंसेवक योजना और समाज के बीच सेतु बन सकेंगे। यह अभियान राज्य के 28 जिलों और 138 विकासखंडों के 6 हजार 650 गांवों में 1 लाख 33 हजार से अधिक वालंटियर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में यह अभियान 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक पूरे राज्य में ग्राम पंचायत स्तर पर सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाया जाएगा। 
आदिम जाति कल्याण मंत्री राम विचार नेताम में अधिकारियों को पंचायतों में आदि सेवा केंद्र स्थापित करने और जनजातीय परिवारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति, रोजगार, कौशल विकास जैसी सुविधाओं के लिए मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि इस अभियान को सेवा पर्व के रूप में मनाया जाए और जनजातीय योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने का ठोस प्रयास किया जाए।
आदि कर्मयोगी अभियान के पीछे एक गहरी सामाजिक सोच है। जब कोई स्थानीय युवा, महिला या स्वयंसेवक अपने ही गाँव में जाकर योजनाओं की जानकारी देता है, तो लोग उस पर भरोसा करते हैं और यह विश्वास ही बदलाव की असली ताकत है। अभियान का असर शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर आजीविका तक हर क्षेत्र में दिखेगा। जब एक वालंटियर किसी परिवार को यह बताता है कि उनकी बेटी को छात्रवृत्ति मिल सकती है, या बुजुर्ग को पेंशन का हक़ है, तो यह केवल सूचना नहीं होती, बल्कि उस परिवार की ज़िंदगी बदलने वाला अवसर होता है।

विक्रम’ प्रोसेसर लॉन्च : स्वर्णिम भारत की नई तकनीकी पहचान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

03-Sep-2025
रायपुर।  शोर संदेश  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप आज भारत ने तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। Semicon India 2025 सम्मेलन में देश का पहला स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर ‘विक्रम’ लॉन्च किया गया है। यह उपलब्धि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार क्षमता का सशक्त प्रमाण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘विक्रम’ प्रोसेसर का निर्माण पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। यह प्रोसेसर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस लॉन्च व्हीकल्स के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इससे न केवल भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत अपनी तकनीकी श्रेष्ठता का परिचय देगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में भारत ने अर्धचालक निर्माण (Semiconductor Manufacturing) के क्षेत्र में जिस तीव्रता से प्रगति की है, वह विकसित भारत की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की युवा इंजीनियरिंग प्रतिभा और वैज्ञानिक समुदाय की मेहनत का भी परिणाम है। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर का निर्माण यह संदेश देता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और वैश्विक तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को यह सफलता और अधिक गति प्रदान करेगी। स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान बल्कि रक्षा, संचार और अन्य उच्च तकनीकी क्षेत्रों में भी उपयोगी सिद्ध होगा। यह भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव जी को हार्दिक बधाई और अभिनंदन दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता स्वर्णिम भारत की नई पहचान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
















 

जापान और दक्षिण कोरिया के सफल विदेश दौरे से वापस लौटे मुख्यमंत्री

31-Aug-2025
रायपुर ( शोर संदेश )।  31अगस्त 2025 अपनी आठ दिन के जापान और दक्षिण कोरिया के विदेश दौरे के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वापस रायपुर लौटे हैं। साय के वापस लौटने पर आज एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कर्मा और पंथी नृत्यों से पूरा एयरपोर्ट परिसर लगभग एक घंटे तक सराबोर रहा। लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने मुख्यमंत्री साय की लोकप्रियता और उनके विदेश दौरे की सफलता को स्वयं ही बयां कर दिया। मुख्यमंत्री का पुष्प गुच्छों से लेकर गजमाला तक से स्वागत किया गया। एयरपोर्ट के निकास द्वार से मीडिया गैलेरी तक लगभग 100 मीटर की दूरी तय करने में साय को लगभग 15 मिनट लगे। इस दौरान लोगों ने पुष्प वर्षा से भी साय का स्वागत किया। बाद में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को सम्बोधित किया और इस भव्य स्वागत के लिए सभी का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान और दक्षिण कोरिया दोनों ही देशों में बड़ा भारतीय समुदाय बसा हुआ है और हमारे छत्तीसगढ़ के लोग भी वहां पर व्यापारिक कार्यों में लगे हुए हैं। उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और यह लगा ही नहीं कि हम परदेश में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे उद्यमी, हमारे कारोबारी पूरी दुनिया में फैले हुए हैं और भारत भूमि का नाम हर तरफ रोशन कर रहे हैं। 
इस दौरे से छत्तीसगढ़ में विदेशी निवेश और विकास के रास्ते खुलेंगे - मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा सफल रही है। इस यात्रा से छत्तीसगढ़ में विदेशी निवेश और औद्योगिक विकास के रास्ते खुलेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की जापान यात्रा के दौरान यह तय हुआ है कि भारत में जापान 6 लाख करोड़ रूपए का निवेश करेगा और 10 साल का आर्थिक रोड मैप तैयार किया गया है। इसका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ को भी मिलेगा। भारत और जापार के बीच हुए समझौतों से प्रदेश में एआई, सेमीकंडक्टर और रक्षा क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ने से रोजगार के बडे़े अवसर छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिलेंगे। 
जापान और कोरिया से एआई, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की सहमति - 
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस यात्रा के दौरान जापान और कोरिया दोनों ही देशों से छत्तीसगढ़ में निवेश के संबंध में चर्चा की गई और एआई, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की सहमति बनी है। इसके साथ ही कई औद्योगिक संस्थानों से छत्तीसगढ़ में निवेश प्रस्ताव भी मिले हैं। इन निवेश प्रस्तावों से बड़ी संख्या में हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा।
उन्होंने बताया कि इस दौरे पर जापान और दक्षिण कोरिया के व्यापार संगठन के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की गई। दोनों ही देशों के प्रतिनिधियों ने व्यापार बढ़ाने को लेकर और निवेश बढ़ाने को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। मुख्यमंत्री ने बताया कि दोनों ही देशों के व्यापार संगठनों को छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति के बारे में बताया और इसके अनुदान प्रावधानों से उन्हें अवगत कराया गया। एआई और सेमीकंडक्टर में निवेश के लिए बढ़िया अधोसंरचना की उपलब्धता से भी दोनों देशों के व्यापार संगठनों को अवगत कराया गया है। उन्हें बताया गया कि भारत का पहला डाटा सेंटर पार्क छत्तीसगढ़ में है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में तेजी से निवेश हो रहा है और इसके लिए आर्थिक अनुदान भी दिया जा रहा है। 
ओसाका वर्ल्ड एक्सपो में जापानी भाषा में दी गई छत्तीसगढ़ में औद्योगिक संभावनाओं की जानकारी -
 मुख्यमंत्री ने बताया कि जापान के ओसाका शहर में वर्ल्ड एक्सपो में हमारे राज्य ने अपना पवेलियन बनाया था। इस पवेलियन में हर दिन 30 हजार से अधिक लोग पहुंचे। साय ने बताया कि इस एक्सपो में छत्तीसगढ़ की औद्योगिक स्थिति के बारे में, निवेश की संभावनाओं के बारे में तथा संस्कृति के बारे में लोगों ने विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ एकमात्र ऐसा राज्य रहा, जिसने अपनी पूरी जानकारी जापानी भाषा में दी, जिससे हमें अपनी बातों को जापानी निवेशकों तक समझाने में पूरी तरह से सफलता मिली। 
पहली बार दक्षिण कोरिया पहुंचा छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधि मंडल -
मुख्यमंत्री साय ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहली बार दक्षिण कोरिया में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधि मंडल गया। कोरिया में भी छत्तीसगढ़ के बारे में पूरी बातें कोरियन भाषा में कही। इससे निवेशकों से कनेक्ट करने में मदद मिली। साय ने बताया कि दक्षिण कोरिया में आईसीसीके के साथएमओयू हुआ। आईसीसीके छत्तीसगढ़ के नॉलेज पार्टनर बनेंगे। इससे राज्य की नई औद्योगिक नीति के तहत आने वाले उद्योगों के लिए स्किल मैन पावर उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए जापान और दक्षिण कोरिया की यात्रा से हमने यह साबित किया है कि हम केवल देश भर के बड़े निवेश केंद्रों तक ही नहीं सीमित रहेंगे। हम पूरी दुनिया में जाएंगे और छत्तीसगढ़ के उत्पादों के लिए जगह बनाएंगे साथ ही छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर आएंगे।

 


रायपुर में राष्ट्रीय कार्यशाला: शिक्षा में मेंटरशिप पर मंथन

29-Aug-2025
रायपुर।  शोर संदेश ) नीति आयोग ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity विषय पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना को मूर्त रूप देते हुए शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने में मेंटरशिप की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श कर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क बनाना है। विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और हितधारकों ने शिक्षा में समानता लाने, ड्रॉपआउट दर घटाने और युवाओं को अवसरों से जोड़ने के लिए अपने अनुभव साझा किए। 
मेंटॉरशिप युवाओं को सशक्त करने की कुंजी है”: ओ. पी. चौधरी
विशेष अतिथि के रूप में वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में मेंटरशिप की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित है। यह साझा राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने का अवसर है, जो विकसित भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकीय ताकत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की औसत आयु 28 वर्ष है, जबकि छत्तीसगढ़ की औसत आयु मात्र 24 वर्ष है। यह हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, हमें युवाओं को अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दे सकें।
वित्त मंत्री चौधरी ने अपने जीवन अनुभव साझा करते हुए  कहा कि मैंने गांव के सरकारी स्कूल में 10वीं और 12वीं तक पढ़ाई की, जहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। 17 वर्षों की औपचारिक शिक्षा के बाद भी अनेक युवाओं को यह स्पष्ट नहीं होता कि जीवन में आगे क्या करना है। कैरियर गाइडेंस और मेंटरशिप इस कमी को दूर कर सकती है। उन्होंने स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्र के बच्चों के जीवन का जुड़ाव जंगलों और झरनों से है। उन्हें इसी के अनुरूप अक्षर ज्ञान देना चाहिए। एनईपी 2020 का स्थानीय बोलियों पर फोकस सही दिशा है।
वित्त मंत्री ने सरकारी स्कूलों की चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि समुदाय की भागीदारी घट रही है, हमें नवोदय विद्यालय जैसे मॉडल अपनाने होंगे। नीति आयोग को देशभर की इनोवेटिव प्रैक्टिस को साझा प्लेटफॉर्म पर लाना चाहिए, ताकि शिक्षा में समानता सुनिश्चित की जा सके।
हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार है: डॉ. वी. के. पॉल
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि शिक्षा मानव पूंजी निर्माण का आधार है और हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ड्रॉपआउट दरों को साझा करते हुए बताया कि  प्राथमिक स्कूलों में 93 प्रतिशत नामांकन है, लेकिन अपर प्राइमरी में तीन प्रतिशत बच्चे छूट जाते हैं। सेकेंडरी स्तर पर केवल 56 प्रतिशत और 12वीं कक्षा तक मात्र 23 प्रतिशत छात्र ही पहुंचते हैं। 2019 से 2023 तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 ओबीसी, एससी, एसटी छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी, जबकि आईआईटी और आईआईएम से 4,000 से अधिक छात्र बाहर हुए। यह व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षति भी है। 
डॉ. पॉल ने कहा कि मेंटरशिप से छात्रों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और जीवन कौशल मिलते हैं। हमें शिक्षकों का माइंडसेट बदलना होगा, छात्रों को सशक्त बनाना होगा और तकनीक के माध्यम से सीधी पहुँच सुनिश्चित करनी होगी। विषाक्त वातावरण और नशे जैसी समस्याएं ड्रॉपआउट को बढ़ाती हैं। हर बच्चे को ज्ञान और आत्मविश्वास से लैस होकर चुनौतियों का सामना करने का अवसर मिलना चाहिए, यह उसका मानवाधिकार है। उन्होंने कहा कि हमारा देश मानव-केंद्रित दर्शन से समृद्ध है। हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा, जिसमें हर बच्चे को मेंटरशिप मिले, हमें एनईपी 2020 यही रास्ता दिखाती है। 
कार्यशाला में योजना विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, नीति आयोग के संयुक्त सचिव  के. एस. रेजिमोन, नीति आयोग के फेलो डॉ. आई. वी. सुब्बा राव, आईएएस (सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा तथा नीति आयोग के उप सचिव अरविंद कुमार, सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।













 

आयुष्मान भारत से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानवीय पहल

29-Aug-2025
रायपुर। शोर संदेश )  जीवन में किसी एक सदस्य की गंभीर बीमारी पूरे परिवार को संकट में डाल देती है। इलाज के खर्चे जब लाखों में पहुँच जाते हैं तो आमजन के लिए यह बोझ असहनीय हो जाता है। ऐसे समय में सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत योजना बड़ी राहत देती है, जिसके तहत 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज संभव है, लेकिन जब बीमारी का खर्च इस सीमा से भी अधिक हो जाता है, तब मरीज और परिवार चिंता में घिर जाते हैं। इसी विकट परिस्थिति में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संवेदनशील पहल करते हुए मदद का हाथ आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना के तहत जशपुर जिले के 72 गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार के लिए 2 करोड़ 85 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। यह राशि सीधे संबंधित अस्पताल के बैंक खाते में चेक या एनईएफटी के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।
इस राशि से मरीजों को कैंसर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट जैसे जटिल व महंगे उपचार कराने में मदद मिली। समय पर सहायता पहुँचने से मरीजों का जीवन सुरक्षित हो सका और उनके परिवारों को भी बड़ी राहत मिली। मरीजों और परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इस कदम के लिए आभार जताया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित आवेदन पत्र भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करना होता है। आवेदन पत्र सीएमएचओ कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ मरीज का आधार कार्ड,बीमारी से संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेज,जिस अस्पताल में उपचार कराया जाना है, वहां से जारी प्राकलन (स्टिमेट) रिपोर्ट देना जरूरी  है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आदिवासी बहुल जशपुर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुधार के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई है, जिसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया है। जमीन का चयन हो चुका है और कॉलेज की स्थापना की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा अस्पतालों में भौतिक संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों से जिलेवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।

सियोल में KITA से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अहम मुलाकात

28-Aug-2025
रायपुर ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सियोल में दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े व्यापार संगठन कोरिया इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन (KITA) के चेयरमैन जिन सिक युन और वाइस प्रेसिडेंट किम की ह्यून से मुलाकात की। 77,000 से अधिक सदस्यों वाला यह संगठन एशिया का अग्रणी व्यापारिक मंच है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति 2024–30, प्राकृतिक संसाधनों और कुशल मानव संसाधन की ताकत को रेखांकित करते हुए निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और स्किलिंग के क्षेत्र में संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “दक्षिण कोरिया के साथ हमारे संबंध केवल व्यापारिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भी हैं। आज के इस संवाद से छत्तीसगढ़ और कोरिया के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास के नए द्वार खुलेंगे। इससे छत्तीसगढ़ के युवाओं को आधुनिक उद्योगों में अवसर प्राप्त होंगे और प्रदेश के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार निवेशकों को सुगम वातावरण, त्वरित स्वीकृतियाँ और आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि KITA के साथ यह सहयोग छत्तीसगढ़ को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।
बैठक के दौरान KITA के चेयरमैन जिन सिक युन और वाइस प्रेसिडेंट किम की ह्यून ने भी छत्तीसगढ़ की निवेश-अनुकूल नीतियों और संसाधनों में गहरी रुचि व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कोरियाई कंपनियाँ छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं और आने वाले समय में साझेदारी के ठोस कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस सहयोग से छत्तीसगढ़ के किसानों, श्रमिकों और स्थानीय उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ होगा। खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, स्टील और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के हजारों अवसर सृजित होंगे। साथ ही, तकनीकी हस्तांतरण से स्थानीय उद्योगों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है, बल्कि यहाँ का युवा वर्ग मेहनती और कुशल है। कोरियाई कंपनियों के साथ जुड़कर उन्हें स्किलिंग और तकनीकी प्रशिक्षण के नए अवसर मिलेंगे, जिससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी।यह साझेदारी प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी और आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारी का आदर्श उदाहरण बनेगा।

बस्तर बाढ़ प्रभावितों की हर संभव मदद सुनिश्चित करने के निर्देश – मुख्यमंत्री साय

28-Aug-2025
रायपुर, ( शोर संदेश ) 28 अगस्त 2025 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की पीड़ा को शीघ्र कम करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों व वरिष्ठ अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया  कि बाढ़ से हुई जनहानि और पशुहानि प्रभावित परिवारों को राहत राशि बिना विलंब के उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त आवासों के सुधार हेतु तिरपाल, बाँस-बल्ली और राहत राशि का वितरण प्राथमिकता से किया जाए।
मुख्यमंत्री ने  कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों का भ्रमण करें और राहत कार्यों का सतत पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें। 
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों से सड़क संपर्क बहाल करने, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत और बिजली आपूर्ति पुनर्स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की शीघ्र बहाली राहत कार्यों की सफलता की कुंजी है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टरों से कहा कि यदि उन्हें  शासन स्तर से अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता हो तो वे तुरंत प्रस्ताव भेजें, ताकि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में भोजन, कपड़े और सूखा राशन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में स्वास्थ्य शिविर और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
बैठक के प्रारंभ में राजस्व सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने मुख्यमंत्री को बस्तर में बाढ़ की स्थिति और अब तक किए गए राहत कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित जिलों को अतिरिक्त राशन का आबंटन भी कर दिया गया है और सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुँचाई जा रही है।
इसके उपरान्त मुख्यमंत्री साय ने चारों जिलों के कलेक्टरों से सीधे संवाद कर उनके-अपने जिलों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि अब अधिकांश बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी उतरने लगा है और स्थिति नियंत्रण में है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। 
समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दरराज उपस्थित थे।


























 

एलजी सैमसंग हुंडई जैसी कंपनियों की तरह नए निवेशक भी आएं छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

28-Aug-2025
रायपुर ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश हेतु किया आमंत्रित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश हेतु किया आमंत्रितमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दक्षिण कोरिया प्रवास के दौरान निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश हेतु किया आमंत्रित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में आयोजित छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में कोरिया इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन और निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी प्रो-एक्टिव एवं विकासोन्मुख औद्योगिक नीति 2024–30, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और प्रशिक्षित जनशक्ति के बल पर वैश्विक निवेश और औद्योगिक सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरियाई ब्रांड हर भारतीय घर का हिस्सा हैं। एलजी, सैमसंग, हुंडई जैसी कंपनियां गांव-गांव तक पहुंच चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में जल, ऊर्जा, लौह अयस्क व स्टील और बेहतरीन कनेक्टिविटी उपलब्ध है। ये संसाधन दक्षिण कोरियाई निवेशकों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलते हैं। 
मुख्यमंत्री साय ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, व्यवसाय सुगमता और उद्योग-अनुकूल नीतियों के माध्यम से प्रत्येक निवेशक को हर स्तर पर सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज खनिज, ऊर्जा, इस्पात, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आईटी-स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में वैश्विक निवेश का स्वागत कर रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को रोजगार, महिलाओं को स्वावलंबन और किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण भी हमारी प्राथमिकता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने भारत के राजदूत अमित कुमार  से भारतीय दूतावास, सियोल में मुलाक़ात कर छत्तीसगढ़ में निवेश संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने स्टील और खनिज से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स व फूड प्रोसेसिंग तक, मजबूत द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया है। 
मुख्यमंत्री साय ने दक्षिण कोरिया और छत्तीसगढ़ के बीच सांस्कृतिक एवं कारोबारी रिश्तों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन साझेदारियों से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुसंधान एवं नवाचार और उच्च मूल्य रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। उन्होंने कोरियाई निवेशकों से आग्रह किया कि वे छत्तीसगढ़ को अपने नए औद्योगिक निवेश स्थल के रूप में चुनें और साझा समृद्धि की इस यात्रा का हिस्सा बनें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं निवेश संवर्धन एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।






























 

बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत कार्य तेज करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश

28-Aug-2025
रायपुर शोर संदेश  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर में राहत और बचाव कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी सक्रियता से कार्य करे ।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि राहत शिविरों में ठहरे सभी लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने प्रशासन को बाढ़ से प्रभावित गाँवों तक तुरंत सहायता पहुँचाने और आपदा नियंत्रण कक्षों से स्थिति की निगरानी करने के आदेश दिए।
उल्लेखनीय है कि लगातार हो रही बारिश से प्रदेश के चार जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 26 और 27 अगस्त को सबसे अधिक वर्षा दंतेवाड़ा जिले में दर्ज की गई, जहाँ क्रमशः 93.7 मिमी और 118.4 मिमी बारिश हुई। सुकमा में 35 से 109.3 मिमी, बीजापुर में 34.9 से 50.2 मिमी तथा बस्तर में 67.3 से 121.3 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई जिससे 25 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 
राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त रीना बाबासाहेब कंगाले ने जानकारी दी कि प्रभावित लोगों के लिए 4 जिलों में कुल 43 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें  दंतेवाड़ा जिले से 1,116, सुकमा से 790, बीजापुर से 120 और बस्तर से 170 , इस प्रकार कुल 2,196 प्रभावितों को राहत शिविर में ठहराया गया है। बाढ़ से अब तक 5 जनहानि, 17 पशुधन हानि, 165 मकानों को आंशिक और 86 मकानों को पूर्ण क्षति की सूचना मिली है। सभी जिलों में नगर सेना एवं एस.डी.आर.आफ के द्वारा राहत बचाव कार्य किया जा रहा है एवं राहत शिविर में ठहराये गये लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग जिलों से बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सतत संपर्क बनाये हुए है एवं आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। जिला सुकमा में आपदा मित्रों के द्वारा बाढ़ की स्थिति से निपटने हेतु जिला प्रशासन का सहयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जनहानि और नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को त्वरित सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी और पुनर्वास कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन और राहत दल लगातार सक्रिय रहें, हर जरूरतमंद तक तुरंत मदद पहुँचे और राहत सामग्री समय पर मिले। 
मुख्यमंत्री साय ने आम नागरिकों से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आवश्यकता की स्थिति में तुरंत स्थानीय नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास जताया कि प्रशासन और जनता के सामूहिक सहयोग से हम इस आपदा पर शीघ्र काबू पाएंगे और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन जल्द बहाल होगा।















 



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